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रतलाम में नाबालिग से ब्लैकमेलिंग का मामला, सोशल मीडिया पर दोस्ती के बाद दरगाह में निकाह

ढोढर/रतलाम. इंटरनेट मीडिया से हुई दोस्ती के बाद 17 वर्षीय किशोरी को धमकाकर निकाह कराने और बाद में पीछा कर धमकी देने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित युवक ढोढर निवासी ईरशाद शेख के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। किशोरी ने अपने माता-पिता के साथ चौकी पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। युवती ने बताया कि अक्टूबर 2024 में उसकी पहचान ईरशाद शेख से इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। दोनों के बीच पहले इंस्टाग्राम पर चैटिंग होती रही, बाद में मोबाइल नंबरों का आदान-प्रदान हुआ और फोन पर बातचीत शुरू हो गई। दोनों ने साथ में कुछ फोटो भी खिंचवाए थे। बातचीत के दौरान ईरशाद ने उससे प्रेम और निकाह करने की बात कही थी। दरगाह पर ईरशाद ने निकाह करने का दबाव बनाया 2 अप्रैल को वह कालूखेड़ा फंटे से बस द्वारा जावरा कोचिंग जाने निकली थी। ईरशाद अपने परिचित राजा के साथ कार से पीछा करते हुए जावरा बस स्टैंड पहुंच गया। वहां दोनों ने किशोरी को ज्यूस पिलाने की बात कही। ज्यूस पीने के बाद उसे चक्कर आने लगे, जिसके बाद दोनों उसे कार में बैठाकर बड़ावदा स्थित बाबा फरीद दरगाह ले गए। दरगाह पर ईरशाद ने निकाह करने का दबाव बनाया। मना करने पर ईरशाद ने साथ में खिंचवाए फोटो बहुप्रसारित करने की धमकी दी। डर के कारण किशोरी ने निकाह के लिए सहमति दे दी, जिसके बाद वहां मौजूद काजी द्वारा निकाह कराया गया। बाद में दोनों उसे वापस जावरा छोड़ गए, जहां से वह बस द्वारा घर पहुंची। हाथ पकड़कर जान से मारने की धमकी दी 16 मई को जब वह जिम जाने के लिए बस से जावरा जा रही थी, तब ईरशाद फिर उसका पीछा करते हुए जिम तक पहुंच गया और साथ चलने के लिए कहा। मना करने पर उसका हाथ पकड़कर जान से मारने की धमकी दी और वहां से चला गया। पीड़िता ने बताया कि लगातार डर के कारण वह अब तक चुप रही, लेकिन 29 मई को हिम्मत जुटाकर उसने पूरी घटना की जानकारी अपने माता-पिता को दी।

आधार कार्ड की ये गलती बन सकती है बड़ी परेशानी!

कई लोगों को अपने आधार कार्ड की याद तभी आती है, जब बैंक में KYC करवानी हो, नया अकाउंट खोलना हो, मोबाइल नंबर अपडेट करना हो या किसी सरकारी योजना का फायदा लेना हो. लेकिन यहीं एक बड़ी समस्या छिपी होती है. कई आधार कार्ड में छोटी-छोटी गलतियां सालों तक नजर ही नहीं आतीं. रोजमर्रा के काम तो चलते रहते हैं, लेकिन जैसे ही दोबारा KYC वेरिफिकेशन या किसी जरूरी डॉक्यूमेंट्स की जांच होती है, यही मामूली गलती अचानक बड़ी परेशानी बन सकती है. अगर आपके आधार कार्ड में दर्ज जानकारी और बैंक के रिकॉर्ड में मौजूद डिटेल्स मेल नहीं खाते हैं, तो आगे चलकर परेशानी हो सकती है. इसलिए समय रहते अपनी जानकारी की जांच कर लेना बेहतर रहता है. नाम का मेल न होना बढ़ा सकता है मुश्किलें आधार और बैंक खाते में नाम का मेल न होना सबसे आम समस्याओं में से एक है. अगर आपके आधार कार्ड पर लिखा नाम बैंक रिकॉर्ड में दर्ज नाम से अलग है, तो KYC या अकाउंट वेरिफिकेशन के दौरान परेशानी आ सकती है. कई बार यह अंतर बहुत छोटा होता है, जैसे नाम की स्पेलिंग में मामूली गलती, मिडिल नेम का छूट जाना, कहीं पूरे नाम की जगह सिर्फ इनिशियल्स का इस्तेमाल होना या फिर सरनेम अलग तरीके से दर्ज होना. आमतौर पर लोग इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते, लेकिन KYC जांच के दौरान यही वजह रुकावट बन सकती है. आधार से जुड़ा पुराना नंबर कर सकता है जरूरी कामों में रुकावट आजकल आधार से जुड़ी ज्यादातर सेवाएं OTP के जरिए ही पूरी होती हैं. चाहे आधार डाउनलोड करना हो, डिटेल्स अपडेट करनी हो, e-KYC करवानी हो या फिर अपनी पहचान वेरिफाई करनी हो, हर जगह OTP उसी मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है जो आधार से लिंक होता है. समस्या तब आती है जब लोग अपना मोबाइल नंबर बदल तो लेते हैं, लेकिन उसे आधार में अपडेट करना भूल जाते हैं. शुरुआत में सब कुछ नॉर्मल लगता है, लेकिन जैसे ही किसी जरूरी काम के लिए OTP की जरूरत पड़ती है, पता चलता है कि OTP उस पुराने नंबर पर जा रहा है जो अब उनके पास है ही नहीं. डेट ऑफ बर्थ, जेंडर समेत इन डिटेल्स को जरूर चेक करें अगर आपके आधार कार्ड में डेट ऑफ बर्थ गलत है, तो आगे चलकर यह छोटी सी गलती बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है. खासकर तब, जब आपके आधार की जानकारी PAN कार्ड, बैंक खाते, बीमा पॉलिसी या इनवेस्टमेंट से जुड़े डॉक्यूमेंट्स से मैच न करे. ऐसे सिचुएशन में वेरिफिकेशन का प्रोसेस अटक सकता है या उसमें देरी हो सकती है. सिर्फ डेट ऑफ बर्थ ही नहीं, जेंडर या अन्य पर्सनल डिटेल्स में हुई गलती भी मुश्किलें खड़ी कर सकती है.

45°C गर्मी में फोन खतरे में! ये गलती मत करना

देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी लोगों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों के लिए भी चुनौती बन गई है. तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के बाद स्मार्टफोन यूजर्स को नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. फोन का जरूरत से ज्यादा गर्म होना, चार्जिंग का अचानक रुक जाना, बैटरी का तेजी से खत्म होना और कैमरा ऐप का अपने आप बंद हो जाना जैसी समस्याएं अब आम होती जा रही हैं. कई लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार ओवरहीटिंग स्मार्टफोन के कई अहम पार्ट्स को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है. गर्मी में फोन क्यों करने लगता है धीमा काम? जब स्मार्टफोन का तापमान लगातार बढ़ता है तो उसका सिस्टम खुद को सुरक्षित रखने के लिए प्रदर्शन कम कर देता है. तकनीकी भाषा में इसे थर्मल थ्रॉटलिंग कहा जाता है. इस स्थिति में प्रॉसेसर अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं करता, जिससे फोन की स्पीड कम हो जाती है. ऐप्स धीरे खुलते हैं, गेमिंग का अनुभव खराब होता है और कई बार फोन हैंग भी होने लगता है. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अत्यधिक तापमान में रहने से बैटरी की हेल्थ तेजी से गिर सकती है, जिसका असर फोन की कुल लाइफ पर पड़ता है. धूप से आने के तुरंत बाद चार्जिंग करना पड़ सकता है भारी कई लोग बाहर से लौटते ही फोन को चार्जर से जोड़ देते हैं. यही आदत कई बार सबसे बड़ी गलती साबित होती है. यदि फोन पहले से गर्म है और उसी समय चार्जिंग शुरू कर दी जाए तो बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. चार्जिंग के दौरान भी बैटरी गर्म होती है. ऐसे में पहले से गर्म डिवाइस में तापमान और बढ़ सकता है. यही वजह है कि कई स्मार्टफोन सुरक्षा कारणों से गर्म होने पर चार्जिंग स्पीड कम कर देते हैं या चार्जिंग अस्थायी रूप से रोक देते हैं. कार में फोन छोड़ना बन सकता है महंगा सौदा गर्मी के मौसम में बंद कार के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में काफी ज्यादा हो सकता है. ऐसे माहौल में स्मार्टफोन छोड़ना जोखिम भरा साबित हो सकता है. अत्यधिक तापमान बैटरी को फुला सकता है, डिस्प्ले पर दाग या लाइनें ला सकता है और कैमरा सेंसर की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है. कई मामलों में फोन अचानक बंद हो जाता है या दोबारा चालू होने में समस्या आने लगती है. इसलिए वाहन पार्क करते समय स्मार्टफोन को हमेशा अपने साथ रखना बेहतर विकल्प है. फोन गर्म हो जाए तो क्या करें? अगर आपका स्मार्टफोन जरूरत से ज्यादा गर्म महसूस हो रहा है तो सबसे पहले उसे सीधी धूप से हटाएं. चार्जिंग बंद करें और कैमरा, वीडियो रिकॉर्डिंग या भारी ऐप्स का इस्तेमाल कुछ समय के लिए रोक दें. फोन का कवर हटाने से भी गर्मी तेजी से बाहर निकलने में मदद मिलती है. हालांकि एक गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. कई लोग फोन को ठंडा करने के लिए फ्रिज में रख देते हैं या बर्फ के संपर्क में ले आते हैं. अचानक तापमान बदलने से फोन के अंदर नमी बन सकती है, जो सर्किट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को नुकसान पहुंचा सकती है. ये छोटे बदलाव भी बचा सकते हैं आपका स्मार्टफोन गर्मी के मौसम में बैटरी सेवर मोड का इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इससे बैकग्राउंड में चल रही कई प्रक्रियाएं सीमित हो जाती हैं. डार्क मोड भी बैटरी की खपत कम करने में मदद करता है, जिससे फोन अपेक्षाकृत कम गर्म होता है. इसके अलावा जहां 5जी नेटवर्क कमजोर हो, वहां 5जी बंद करके 4जी का इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है. कमजोर सिग्नल वाले क्षेत्रों में फोन लगातार नेटवर्क खोजता रहता है, जिससे बैटरी और प्रॉसेसर दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. सिर्फ बैटरी नहीं, पूरे फोन की उम्र पर पड़ता है असर लगातार ओवरहीटिंग का प्रभाव केवल बैटरी तक सीमित नहीं रहता. समय के साथ प्रोसेसर की क्षमता प्रभावित हो सकती है, डिस्प्ले की गुणवत्ता खराब हो सकती है और कैमरा सेंसर की कार्यक्षमता भी कम हो सकती है. यही वजह है कि विशेषज्ञ गर्मियों में स्मार्टफोन को सामान्य तापमान पर रखने और उपयोग के दौरान सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.

झपटमारी पर फास्ट ट्रैक एक्शन: रंगेहाथ पकड़ा आरोपी, 14 दिन में चार्जशीट और त्वरित सजा

नई दिल्ली  शाहबाद डेयरी में 1 मई की रात पीड़ित ने पर्स छीनते हुए झपटमार को रंगेहाथ पकड़ा। पुलिस ने तेजी से जांच कर 6 मई को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। कोर्ट ने तारीख पर तारीख वाले फिल्मी जुमले को दरकिनार करते हुए रोजाना सुनवाई की और 16 मई को फैसला सुना दिया। पुलिस कमिश्नर ने दिए निर्देश महज दो हफ्ते में आरोपी दोषी करार दिया गया, जो दिल्ली पुलिस के लिए एक नजीर बन गई। पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने सभी जिलों को ऐसे ही स्पीडी इन्वेस्टिगेशन, स्पीडी ट्रायल और स्पीडी जस्टिस पर काम करने के निर्देश दे दिए, जिस पर अमल होने लगा है। दो हफ्ते में चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया पुलिस अफसरों के मुताबिक, रंगेहाथ पकड़े गए आरोपियों के अलावा जिन केसों में संभव हो सके उनमें एक से लेकर दो हफ्ते के भीतर चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया है। इसके बाद प्रॉसिक्यूशन (सरकारी वकील) के साथ तालमेल कर फास्ट ट्रैक सुनवाई सुनिश्चित करने और जल्द से जल्द दोषी साबित करने पर जोर दिया गया है। ज्यादातर केसों में आरोपी को मिल जाती है जमानत दरअसल सात साल से कम सजा वाले अधिकतर केसों में आरोपी को जमानत मिल जाती है। ऐसे में जांच अधिकारी के सामने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा का बंधन नहीं रहता है। अफसर कहते हैं कि इसके बाद कोर्ट में भी ऐसे केसों की सुनवाई कई साल तक चलती है। इससे शिकायतकर्ता या गवाह के मुकरने या बयानों में विरोधाभास होने से आरोपी को सजा नहीं हो पाती है। जल्द सजा करवाने पर दिया जा रहा जोर तेजी से जांच, तुरंत चार्जशीट दाखिल करने और सुनवाई होने से मुकरने या बयानों में विरोधाभास की गुंजाइश कम रहती है, जिससे सजा की दर में भी इजाफा होगा। इसलिए झपटमारी, चोरी या अन्य छोटे अपराधों में आरोपी के मौके या तुरंत बाद रंगेहाथ पकड़े जाने पर दो हफ्तों में चार्जशीट करने और जल्द सजा करवाने पर जोर है। सभी जिलों में शुरू हुआ एक्शन पुलिस अफसरों ने बताया कि सभी जिलों ने ऐसे मामलों में अमल करना शुरू कर दिया है। सिर्फ छोटे अपराध ही नहीं बल्कि गंभीर अपराधों में भी अगर संभव हो सकता है तो उनमें भी जल्द जांच कर आरोप पत्र दाखिल करने और सजा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। क्या है 'ताबड़तोड़ न्याय' का मकसद अगर किसी केस में आरोपी को कोर्ट बरी कर देता है तो जिलों के डीसीपी से खुद फैसले की समीक्षा करने को कहा गया है, ताकि अगर कोई कमी रह गई हो तो उसे आगे के केसों में ना दोहराई जाए। 'ताबड़तोड़ न्याय' का मकसद आरोपी को कोर्ट से सजा दिलवाना भी है। इन केसों में हुआ ताबड़तोड़ इंसाफ 14 मई: टैक्सी ड्राइवर का पर्स छीनने वाले को सिपाही ने पीछा कर रंगेहाथ पकड़ा था। आईपी एस्टेट थाना पुलिस ने चार दिन में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। स्पीडी ट्रायल के तहत 26 मई को आरोपी को दोषी करार दिया। 16 मईः पालम गांव में 80 हजार कैश-जूलरी की चोरी हुई। पुलिस ने चार घंटे में आरोपी को अरेस्ट किया। 10 दिन की सुनवाई के बाद 26 मई को अदालत ने पेश साक्ष्यों और गवाह के बयान पर आरोपी को दोषी ठहरा दिया। 3 फरवरी: आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर 5200 रुपये निकालकर आरोपी फरार हो गया। लूट का केस दर्ज कर पहाड़गंज पुलिस ने आरोपी को पकड़ा। 23 मार्च को चार्जशीट पेश की और 23 मई को दोषी करार दिया गया।  

2 जून से खुल जाएगी किस्मत! गुरु का बड़ा गोचर

 ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति (गुरु) को सुख, समृद्धि, ज्ञान, विवाह और भाग्य का कारक माना गया है. जून के महीने की शुरुआत में ही ज्योतिष जगत की एक बहुत बड़ी और शुभ घटना घटित होने जा रही है. 2 जून को देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में गोचर करने जा रहे हैं. ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, जब गुरु अपनी उच्च राशि में आते हैं, तो वे अत्यंत बलवान हो जाते हैं. केंद्र भावों की विशेष स्थिति के कारण गुरु का यह गोचर हंस महापुरुष राजयोग का निर्माण करेगा. वैदिक ज्योतिष में पंच महापुरुष योगों में से एक 'हंस योग' को सबसे पवित्र और भाग्यशाली माना गया है, जो जातकों के जीवन में अचानक तरक्की, अटके कामों में गति और बंपर धन लाभ लेकर आता है. मिथुन राशि (Gemini)- व्यापार, नई पार्टनरशिप और धन लाभ व्यापार जगत से जुड़े लोगों के लिए 2 जून के बाद का समय बंपर मुनाफा देने वाला साबित होगा. बिजनेस में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है. नौकरीपेशा लोगों को नई और बेहतर नौकरियों के ऑफर मिल सकते हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. कन्या राशि (Virgo)- शिक्षा, संतान और भाग्य का साथ छात्रों के लिए यह समय बेहद शुभ रहने वाला है, उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने के रास्ते खुलेंगे. संतान की ओर से कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है. भाग्य का पूरा साथ मिलने से आपके बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी. धनु राशि (Sagittarius)- मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और करियर यह राजयोग आपके आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी करेगा. समाज और कार्यक्षेत्र में आपका दबदबा बढ़ेगा. यदि आप लंबे समय से किसी बड़े पद, इंक्रीमेंट या प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे, तो जून की शुरुआत में आपकी यह इच्छा पूरी हो सकती है. मीन राशि (Pisces)- सुख-साधन, संपत्ति और मांगलिक कार्य मीन राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर किसी वरदान से कम नहीं होगा. भूमि, भवन या नया वाहन खरीदने के प्रबल योग बनेंगे. पैतृक संपत्ति से जुड़े पुराने विवाद सुलझ जाएंगे और घर-परिवार में कोई मांगलिक कार्य संपन्न हो सकता है. देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के उपाय – गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान: गुरुवार के दिन मंदिर में चने की दाल, पीले वस्त्र, केला या केसर का दान करें. – मंत्र जाप: नियमित रूप से बृहस्पति देव के बीज मंत्र 'ओम ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः' का जाप करें. – बुजुर्गों का आशीर्वाद: घर के बड़े-बुजुर्गों, माता-पिता और अपने गुरुओं (शिक्षकों) का सम्मान करें और सुबह उठकर उनके चरण स्पर्श करें. – हल्दी का तिलक: प्रतिदिन सुबह स्नान करने के बाद अपने माथे और नाभि पर हल्दी या केसर का तिलक लगाएं.

चतरा में सनसनीखेज मामला, बक्शा डैम में सिर फेंकने के बाद पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई

 चतरा इटखोरी थाना क्षेत्र के बक्शा डैम में प्रतिबंधित पशु के तीन कटे हुए सिर फेंकने के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज चंद घंटों के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान थाना क्षेत्र के पृथ्वीपुर गांव निवासी मोहम्मद इस्लाम और मोहम्मद इकराम के रूप में हुई है। पुलिस ने जब एक आरोपी के घर पर छापेमारी की तो वहाँ से एक फ्रिज बरामद हुआ। जिसके भीतर भारी मात्रा में प्रतिबंधित मांस छुपाकर रखा गया था। पुलिस ने मांस सहित फ्रिज को जब्त कर लिया है। पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपियों ने कुबूल किया है कि त्योहार के मौके पर प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी दी गई थी। कुर्बानी की बात गांव में फैल जाने और पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से कटे हुए सिरों को बक्शा डैम में फेंक दिया था। बता दें कि रविवार को बक्शा डैम में प्रतिबंधित पशु के सिर तैरते मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा था। घटना से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने नगवां चौक के पास इटखोरी-चतरा मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। जिससे वाहनों का आवागमन ठप हो गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएसपी सुनील कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। डीएसपी ने आक्रोशित ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया। जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए और सड़क से जाम हटाया। जाम हटने के तुरंत बाद एक्शन में आई पुलिस ने त्वरित छापेमारी कर दोनों आरोपियों को धर-दबोचा। इस त्वरित गिरफ्तारी के बाद इलाके में तनाव कम हुआ है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।  

चुनावी जश्न के बाद पंजाब में बड़ा एक्शन, अकाली नेता समेत कई आरोपी नामजद

खन्ना/लुधियाना. नगर कौंसिल चुनाव के नतीजों के बाद लुधियाना जिले के खन्ना कस्बे में सियासी तनाव खुलकर सामने आ गया। जीत की खुशी दौरान हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े। इस प्रकरण में शिरोमणि अकाली दल से जुड़े नेता हरदीप सिंह उर्फ हनी रोशा और उनके भतीजे करण रोशा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वार्ड नंबर 30 से जीत दर्ज करने के बाद हनी रोशा समर्थकों के साथ क्षेत्र में जश्न मना रहे थे। इसी दौरान जुलूस आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप कुमार उर्फ सोनू जौहर के घर के पास पहुंच गया। यहां तेज आवाज में गाने बजाने और पटाखे चलाने को लेकर दोनों पक्षों में पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते झगड़े में बदल गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विवाद के दौरान कुछ लोग जबरन घर के भीतर घुस गए और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की। मामले में महिला के साथ अभद्र व्यवहार और गर्भवती महिला से धक्का-मुक्की के आरोप भी लगाए गए हैं। घटना की सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी। खन्ना पुलिस ने फुटेज और शिकायत के आधार पर दो दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। फिलहाल मुख्य आरोपी हनी रोशा और करण रोशा को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

बुडापेस्ट में PSG का जलवा, आर्सेनल को शूटआउट में हराकर यूरोप पर फिर कब्जा

नई दिल्ली पेरिस सेंट जर्मेन (PSG) ने साबित कर दिया कि पिछले साल की चैम्पियंस लीग जीत कोई संयोग नहीं थी. 30 मई (शनिवार) को बुडापेस्ट के पुस्कास एरिना में खेले गए बेहद रोमांचक फाइनल में पीएसजी ने आर्सेनल को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर लगातार दूसरी बार UEFA चैम्पियंस लीग ट्रॉफी अपने नाम कर ली. निर्धारित समय और एक्स्ट्रा टाइम तक मुकाबला 1-1 से बराबरी पर था, लेकिन दबाव के सबसे बड़े पल में फ्रेंच क्लब ने फिर साबित कर दिया कि आखिर क्यों उन्हें इस समय दुनिया की सबसे खतरनाक टीम माना जा रहा है. जैसे ही आर्सेनल डिफेंडर गैब्रियल मैगाल्हेस का निर्णायक पेनल्टी शॉट बार के ऊपर चला गया, पूरा स्टेडियम पीएसजी की जीत के जश्न में डूब गया. कप्तान मार्क्विनहोस ने दूसरी बार चैम्पियंस लीग ट्रॉफी उठाई और आतिशबाजी के बीच पेरिस क्लब ने यूरोप पर अपना दबदबा फिर साबित कर दिया. आधुनिक दौर में लगातार दो बार चैम्पियंस लीग जीतने वाली पीएसजी सिर्फ दूसरी टीम बनी है. इससे पहले यह कारनामा सिर्फ रियल मैड्रिड ने किया था. इस जीत के साथ कोच लुइस एनरिक भी इतिहास के सबसे महान कोचों की सूची में और ऊपर पहुंच गए. उन्होंने तीसरी बार चैम्पियंस लीग जीती और पेप गार्डियोला, कार्लो एन्सेलोटी, बॉब पेस्ली और जिनेदिन जिदान जैसे दिग्गजों के क्लब में जगह बना ली. सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने वह काम कर दिखाया जो उनके करीबी दोस्त पेप गार्डियोला बार्सिलोना और मैनचेस्टर सिटी के साथ बैक-टू-बैक यूरोपियन खिताब जीतकर नहीं कर पाए थे. ये रहा गेमचेंजिंग मोमेंट फाइनल की शुरुआत हालांकि पीएसजी के लिए किसी झटके से कम नहीं थी. मैच के सिर्फ छठे मिनट में काई हावर्ट्ज ने शानदार गोल कर आर्सेनल को बढ़त दिला दी. इसके बाद आर्सेनल ने डिफेंसिव फुटबॉल का शानदार नमूना पेश किया. पीएसजी के पास बॉल पोजीशन ज्यादा थी, लेकिन रास्ते बहुत कम. पहले हाफ में फ्रेंच क्लब सिर्फ एक शॉट ही टारगेट पर मार सका. लेकिन बड़े खिलाड़ी बड़े मौकों पर ही सामने आते हैं. दूसरे हाफ में क्वारात्स्खेलिया को बॉक्स में गिराए जाने के बाद पीएसजी को पेनल्टी मिली और ओस्मान डेम्बेले ने बिना गलती किए गोल दाग दिया. इसके बाद मुकाबला पूरी तरह बदल गया. पीएसजी के पास बढ़त लेने के कई मौके आए. क्वारात्सखेलिया का शॉट पोस्ट से टकराया, जबकि ब्रेडली बार्कोला ने आखिरी मिनटों में आसान मौका गंवा दिया. दूसरी तरफ आर्सेनल लगातार दबाव झेलता रही. आंकड़ों के मुताबिक फाइनल में आर्सेनल का गेंद पर कब्जा सिर्फ 24.7% रहा, जो 2004 के बाद किसी भी चैम्पियंस लीग फाइनल में सबसे कम है. फिर आया पेनल्टी शूटआउट का तनाव. एबेरेची एजे पेनल्टी चूक गए, हालांकि गोलकीपर डेविड राया ने नूनो मेंडेस का शॉट रोककर आर्सेनल की उम्मीदें बढ़ाईं. लेकिन आखिर में लुकास बेराल्डो ने गोल किया और फिर गैब्रियल का मिस आर्सेनल फैन्स का दिल तोड़ गया. हार के बाद आर्सेनल कोच मिकेल आर्टेटा ने भी पीएसजी की खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा, 'मेरे हिसाब से पीएसजी इस समय दुनिया की सबसे बेहतरीन टीम है. गेंद के साथ जो वे करते हैं, वह मैंने पहले कभी नहीं देखा.'

बंगाल में हड़कंप: कल्याण बनर्जी घायल, चंडीतला थाने के सामने बवाल

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित चंडीतला पुलिस स्टेशन के सामने तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी पर हमले की जानकारी सामने आई है. टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया और उनके सिर पर पत्थर या गेंद जैसी चीज (वस्तु) मारकर चोट पहुंचाई है. जबकि बीजेपी का कहना है कि वह घायल नहीं  हुए हैं, सिर्फ ड्रामा कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, कल्याण बनर्जी अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के संबंध और गिरफ्तार टीएमसी नेता, कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर चंडीतला थाना ज्ञापन देने पहुंचे थे. इसी दौरान ज्ञापन सौंपने से पहले ही तृणमूल और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नारेबाजी शुरू हो गई. बीजेपी-टीएमसी के बीच नारेबाजी बताया जा रहा है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तृणमूल समर्थकों के खिलाफ "चोर-चोर" के नारे लगाए, जिसके बाद माहौल और गर्म हो गया. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए गए. बताया जा रहा है कि इसी दौरान किसी ने उन पर गेंद या पत्थर जैसी चीज से हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में चोट लग गई. कल्याण बनर्जी सिर पर भीगा हुआ रूमाल रखे कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि चंडीतला थाने में डिपुटेशन (ज्ञापन) देने जाते वक्त उन पर हमला किया गया. उन्होंने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने जा रहे लोगों पर हमला किया गया. ध्यान भटकाना चाहते हैं कल्याण: बीजेपी वहीं, बीजेपी ने कल्याण के खुद के चोट लगने के दावों को झूठा करार दिया है. बीजेपी का कहना है कि वह (कल्याण बनर्जी) ड्रामा कर रहे हैं. उन्हें चोट

एकादशी ही नहीं! अन्न न खाने के 5 बड़े नियम

 सनातन धर्म में व्रत, उपवास और नियमों का गहरा महत्व है. जब भी बिना अन्न खाए उपवास रखने की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम एकादशी का आता है. हिंदू धर्म में एकादशी के दिन चावल या भारी भोजन का त्याग करना अनिवार्य माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे धर्मग्रंथों और स्मृतियों में सिर्फ एकादशी ही नहीं, बल्कि 5 अन्य ऐसे बेहद खास और संवेदनशील मौके बताए गए हैं, जब सामान्य व्यक्ति को अन्न ग्रहण करने से सख्त परहेज करना चाहिए? पौराणिक शास्त्रों के सूत्रों के अनुसार, इन विशेष अवसरों पर भोजन करने से पुण्य का नाश होता है और दोष लगता है. आइए जानते हैं एकादशी के अलावा वो कौन से 5 मौके हैं, जब रसोई में अन्न की जगह फलाहार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण (Eclipse) शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के सूतक काल से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे भोजन दूषित हो जाता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस दौरान बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे पका हुआ भोजन सही नहीं रहता है. कन्यादान: महादान के संकल्प से पहले का संयम हिंदू विवाह पद्धति में कन्यादान को संसार के सबसे बड़े और पवित्र पुण्यों में गिना गया है. माता-पिता अपनी लाडली को किसी अन्य कुल को सौंपते समय एक महान संकल्प लेते हैं. शास्त्रों का नियम है कि जिस दिन घर में यह महादान होना हो, उस दिन माता पिता को कन्यादान या फेरे पूरे होने तक अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. इस मांगलिक कार्य से पहले अन्न ग्रहण करना धार्मिक दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया है. संकल्प की पवित्रता बनाए रखने के लिए इस नियम का कड़ाई से पालन किया जाता है. हरिजन्मकाले: प्रभु के प्राकट्य और जन्मोत्सव का पावन दिन भगवान राम का जन्मोत्सव (रामनवमी), भगवान कृष्ण की जन्मतिथि (जन्माष्टमी), इसके साथ ही नरसिंह जयंती, हनुमान जयंती और जानकी नवमी जैसे पावन अवसर 'हरिजन्मकाले' की श्रेणी में आते हैं. यह वो समय होता है जब साक्षात ईश्वर ने पृथ्वी पर अवतार लिया था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन देवी-देवताओं के जन्मोत्सव के दिन दोपहर या मध्यरात्रि तक उपवास रखना चाहिए. इस दिन अन्न खाने के बजाय शुद्ध सात्विक फलाहार या दूध का सेवन करना अधिक शुभ माना जाता है. द्विजभोजने: संत और ब्राह्मण की थाली से पहले स्वयं का त्याग भारतीय संस्कृति में अतिथि और संतों को साक्षात नारायण का रूप माना गया है. धर्म शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि यदि आपके द्वार पर कोई साधु, संत, ब्राह्मण या अतिथि खाने के लिए आमंत्रित है, तो द्विजभोजने के नियम का पालन करें. इसका सीधा अर्थ है कि जब तक आए हुए अतिथि आदरपूर्वक भोजन न कर लें, तब तक घर के सदस्यों को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. उनके भोजन करने से पहले खुद पेट भर लेना मर्यादा के खिलाफ और दोषपूर्ण माना गया है. प्राणप्रयाणे: शोक और सूतक का समय मानव जीवन का सबसे अंतिम और कड़वा सच मृत्यु है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब परिवार में या किसी करीबी के यहां किसी के प्राण चले जाए तो वह समय बेहद शोक और संयम का होता है. किसी की मृत्यु होने पर या अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने तक घर में चूल्हा जलाना या अन्न ग्रहण करना पूरी तरह वर्जित माना गया है. यह समय सूतक का होता है और मानसिक रूप से गहरे शोक का, इसलिए इस दौरान भोजन से दूरी बनाकर मृतक के प्रति सम्मान और संवेदना प्रकट करनी चाहिए.