samacharsecretary.com

Youth Congress चुनाव का बिगुल बजा, 29 मई से नामांकन; डिजिटल होगी सदस्यता प्रक्रिया

रायपुर. छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव का ऐलान हो गया है. प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में रविवार को भारतीय युवा कांग्रेस के मुख्य चुनाव आयुक्त जसप्रीत सिंह और प्रदेश चुनाव अधिकारी रोशन नेगी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम जारी किया. 29 मई से 13 जून तक नामांकन प्रक्रिया चलेगी. चुनाव पारदर्शी और समय पर पूरा कराने के लिए 5 जोन बनाकर ZRO नियुक्त किए जाएंगे. ब्लॉक और जिला कमेटियों के लिए नामांकन 29 मई से 13 जून तक भरे जाएंगे. वहीं प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी के लिए 11 जून से 13 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे. नामांकन के बाद 15 जून से 18 जून तक स्क्रूटनी की प्रक्रिया चलेगी. इसके बाद सदस्यता अभियान और चुनाव प्रक्रिया एक साथ ऑनलाइन माध्यम से होगी. सदस्यता के लिए नियम तय युवा कांग्रेस में सदस्यता और चुनाव लड़ने के लिए 18 से 35 वर्ष की आयु सीमा तय की गई है. सदस्यता और शिकायत की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. फर्जी सदस्यता रोकने के लिए वोटर आईडी अनिवार्य की गई है. आवेदन के साथ 8 सेकेंड का वीडियो भी अपलोड करना अनिवार्य किया गया है, जिसमें आवेदक को खुद आवेदन से जुड़ी जानकारी देनी होगी. आयु प्रमाण के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट या अन्य आईडी प्रूफ जरूरी होंगे. एक व्यक्ति, एक पद का नियम चुनाव प्रक्रिया में एक व्यक्ति-एक पद का नियम भी लागू रहेगा. सिर्फ एक पद के लिए ही नामांकन दाखिल करने की अनुमति रहेगी. वहीं नामांकन दाखित करने पर उस उम्मीदवार को पुराने पद से मुक्त माना जाएगा. दिल्ली में इंटरव्यू के बाद होगी नियुक्ति युवा कांग्रेस में जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री जैसे अहम पदों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व जरूरी होगी. दिल्ली में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने इंटरव्यू भी लिया जाएगा.

ट्विशा का दूसरा पोस्टमार्टम खत्म, अब भदभदा घाट के लिए रवाना होगा शव

नई दिल्ली. नोएडा की 33 वर्षीय मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आज का दिन अहम है। भोपाल एम्स में पुलिस की भारी मुस्तैदी के बीच ट्विशा का दूसरा पोस्टमार्टम किया जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में मौत का सच जानने के लिए दोबारा यह प्रक्रिया अपनाई गई। ट्विशा के भाई मेजर हर्षित ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद भदभदा श्मशान घाट में शाम 5 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा। बता दें कि दिल्ली एम्स (AIIMS) के विशेषज्ञ डॉक्टरों की चार सदस्यीय टीम रविवार को ही भोपाल पहुंची। राज्य सरकार की औपचारिक अपील और भोपाल कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली एम्स के निदेशक खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः लिया है संज्ञान इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की विशेष पीठ सोमवार, 25 मई को इस मामले की सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने इस स्वतः संज्ञान मामले को "एक युवती की उसके ससुराल में अप्राकृतिक मृत्यु में कथित संस्थागत पूर्वाग्रह और प्रक्रियात्मक अनियमितताएं" शीर्षक दिया है, जो पुलिस व स्थानीय प्रशासन की शुरुआती भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ससुराल में मिला था शव, पति 7 दिन की रिमांड पर गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही शादी के बंधन में बंधीं त्विषा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे पर लटकी पाई गई थीं। मृतका के परिजनों ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद त्विषा के पति वकील समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

मदरसा बोर्ड परीक्षा में 55,788 छात्र-छात्राएं सफल, छात्राओं का प्रदर्शन सबसे बेहतर

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को आधुनिक, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में शनिवार को उ०प्र० मदरसा शिक्षा परिषद, लखनऊ द्वारा संचालित मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) तथा आलिम (सीनियर सेकेंडरी) बोर्ड परीक्षा वर्ष-2026 का परिणाम घोषित किया गया। इस वर्ष मदरसा बोर्ड परीक्षा का कुल परिणाम 88.26 प्रतिशत रहा। कुल 55,788 छात्र-छात्राएं सफल घोषित किए गए। खास बात यह रही कि छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों से बेहतर रहा। कुल 29,229 छात्राएं 94.30 प्रतिशत सफलता दर के साथ पास हुईं, जबकि 26,559 छात्र 85.13 प्रतिशत दर के साथ सफल हुए। सेकेंडरी में 41 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं पास सेकेंडरी यानी मुंशी-मौलवी परीक्षा में कुल 62,232 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 47,036 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी, जिनमें 41,426 परीक्षार्थी सफल रहे। इस परीक्षा का कुल परिणाम 88.07 प्रतिशत रहा। सेकेंडरी में भी छात्राओं का प्रदर्शन शानदार रहा है। 21,407 छात्राएं 91.46 प्रतिशत सफलता दर के साथ पास हुईं, जबकि 20,019 छात्र 84.72 प्रतिशत अंक के साथ सफल घोषित किए गए। सीनियर सेकेंडरी में छात्राओं ने मारी बाजी वहीं सीनियर सेकेंडरी यानी आलिम परीक्षा में कुल 18,701 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से 16,175 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। इनमें 14,362 छात्र-छात्राएं सफल हुए। इस स्तर पर कुल सफलता प्रतिशत 88.79 रहा। सीनियर सेकेंडरी में 7822 छात्राओं ने परीक्षा पास की, उनका रिजल्ट 90.88 प्रतिशत रहा। जबकि 6540 छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की। इस तरह 86.42 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित इस परीक्षा को नकलविहीन और तकनीकी निगरानी के बीच सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया है।  मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में सरकार अल्पसंख्यकों के हित में कर रही काम अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने परिणाम घोषित करते हुए कहा कि हमारी सरकार की मूल नीति सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास के साथ सबका प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर से अल्पसंख्यकों में एक नए मनोबल को जीतना और विश्वास का संचार हुआ है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राओं के सशक्तीकरण की आधार नीति को यथार्थ धरातल पर लाने का काम योगी सरकार लगातार कर रही है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में हम लगातार अल्पसंख्यको के हित में काम कर रहे हैं।  आधिकारिक वेबसाइट पर देखें रिजल्ट छात्र-छात्राएं अपना रिजल्ट मदरसा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट https://madarsaboard.upsdc.gov.in पर देख सकते हैं। मदरसा बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 में कुल 80,933 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से 63,211 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनकी निगरानी सीधे मदरसा बोर्ड मुख्यालय से की गई। योगी सरकार के सख्त इंतजामों के चलते परीक्षा शांतिपूर्ण और नकलविहीन वातावरण में संपन्न हुई।

दिल्ली में भारत-अमेरिका रणनीतिक बातचीत, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा

नई दिल्ली  भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता के बीच में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर आए मार्को रुबियो और डॉ. जयशंकर ने सुबह की द्विपक्षीय बैठक के बाद आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की रूपरेखा साझा की. इस कूटनीतिक मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापक रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग की समीक्षा करना तथा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी समझ को मजबूत करना था. दोनों नेताओं ने कल अमेरिकी विदेश मंत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद आज अपनी बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया, खाड़ी देशों के घटनाक्रमों और यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक संकटों पर गहन रणनीतिक बातचीत की है. दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नवीनीकृत करने के साथ-साथ एक व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए हैं. विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उनके बीच आज सुबह द्विपक्षीय वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ है. दोनों नेता इस चर्चा के बीच में हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद लंच पर शेष मुद्दों को पूरा करने के लिए वापस वार्ता की मेज पर लौटेंगे. हालांकि, ये सचिव रुबियो की पहली भारत यात्रा है, लेकिन वे अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही एक-दूसरे के साथ नियमित संपर्क में बने हुए हैं. विदेश मंत्री ने उठाया वीजा का मुद्दा बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत के वैध यात्रियों को अमेरिकी वीजा मिलने में आ रही हैं चुनौतियों को भी उठाया. इसके जवाब में रुबियो ने कहा कि सबसे पहले, मैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों के योगदान को स्वीकार करता हूं. भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है. हम चाहते हैं कि ये संख्या बढ़ती रहे… जो बदलाव अभी हो रहे हैं या अमेरिका में हमारी प्रवासन सिस्टम का आधुनिकीकरण, ये कदम केवल भारतीय को टारगेट नहीं करता, बल्कि ये नियम पूरे वर्ल्ड के लिए है, इसे पूरी दुनिया में लागू किया जा रहा है. USA में घुसपैठ कर चुके हैं 20 मिलियन लोग उन्होंने कहा कि हम आधुनिकीकरण के दौर में हैं. अमेरिका में प्रवासन संकट रहा है. ये भारत की वजह से नहीं है, लेकिन व्यापक रूप से, पिछले कुछ वर्षों में 20 मिलियन से अधिक लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और हमें इस चुनौती का सामना करना पड़ा है… एक देश के रूप में आप जो कुछ भी करते हैं, वह आपके राष्ट्रीय हित में होना चाहिए और इसमें आपकी आव्रजन नीति भी शामिल है. मेरा मानना ​​है कि अमेरिका आव्रजन के मामले में दुनिया का सबसे स्वागत करने वाला देश है. हर साल लगभग दस लाख लोग अमेरिका के स्थायी निवासी बनते हैं और इसमें महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. 'क्यूबा से आए थे मेरे माता-पिता' अमेरिकी विदेश मंत्री ने खुलासा करते हुए बताया कि मेरे माता-पिता 1956 में क्यूबा से स्थायी निवासी के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका में आए थे. इस प्रक्रिया ने हमें समृद्ध किया है, लेकिन ये एक ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए जो हर युग में मॉर्डन वक्त की वास्तविकताओं के हिसाब हो. हम ऐसा कर रहे हैं और ये बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था. इसलिए संयुक्त राज्य अमेरिका वर्तमान में उस सिस्टम में सुधार की प्रक्रिया से गुजर रहा है, जिसके द्वारा हम ये तय करते हैं कि हमारे देश में कितने लोग आते हैं, कौन आता है, कब आता है. जब भी आप कोई सुधार करते हैं, जब भी आप लोगों को एंट्री देने के सिस्टम में कोई बदलाव करते हैं तो एक बदलाव (संक्रमणकालीन) का दौर होता है जो कुछ मतभेद और कठिनाइयां पैदा करता है… ये कदम केवल भारत को टारगेट नहीं करता, ये एक ऐसी प्रणाली है, जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है. लेकिन हम एक बदलाव के दौर में हैं और इस रास्ते में कुछ बाधाएं तो आएंगी ही, लेकिन हमें लगता है कि अंततः हमारा उद्देश्य एक बेहतर सिस्टम, एक अधिक कुशल प्रणाली होगी, जो पहले की प्रणाली से बेहतर काम करेगी और साथ ही अधिक टिकाऊ भी होगी. रुबियो ने की भारत की तारीफ इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए इस यात्रा को अपने लिए एक बड़ा सम्मान कहा. उन्होंने रणनीतिक साझेदारी को परिभाषित करते हुए कहा कि अमेरिका और भारत दुनिया के कई अन्य देशों के साथ अलग-अलग या क्षेत्रीय मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन एक 'रणनीतिक साझेदारी' इन सब से बहुत अलग और कहीं अधिक व्यापक होती है. ये तब होती है जब दो देशों के हित पूरी तरह एक दिशा में संरेखित होते हैं. मार्को रुबियो ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की चौड़ाई और दायरा ही ये साबित करता है कि भारत अमेरिका का कितना महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार है. उन्होंने कहा कि इस रिश्ते की शुरुआत दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से होती है. भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से दोनों के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं क्योंकि दोनों देशों के नेता सीधे तौर पर अपनी जनता और मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होते हैं. मेक इन इंडिया पर जोर साथ ही रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर डॉ. जयशंकर ने जानकारी दी कि दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नया जीवन दिया है और व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर साइन किए हैं. उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों ने भारत के 'मेक इन इंडिया' दृष्टिकोण को ध्यान में रखने और हाल के वैश्विक संघर्षों से सीखे गए कड़े सबकों को शामिल करने के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की है. आपको बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री … Read more

USCIS मेमो का असर: स्टूडेंट और H-1B आवेदकों को देना होगा इरादे बदलने का स्पष्ट जवाब

नई दिल्ली  अमेरिका की US सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने एक नई पॉलिसी मेमो की घोषणा की है, जिसके तहत देश में ग्रीन कार्ड चाहने वाले विदेशियों को अब अमेरिका की बजाय अपने देश से ही आवेदन करना होगा। इस घोषणा में, USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा, "यह पॉलिसी हमारे इमिग्रेशन सिस्टम को वैसे काम करने देती है, जैसा कि कानून का मकसद है, न कि इसमें मौजूद कमियों का फायदा उठाने को बढ़ावा देती है।" उन्होंने कहा कि जब विदेशी अपने देश से आवेदन करते हैं, तो उन लोगों को ढूंढने और निकालने की जरूरत कम हो जाती है, जो रेजिडेंसी (रहने की अनुमति) न मिलने पर छिपकर अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से रहने लगते हैं। एजेंसी ने एक बयान में कहा, "छात्र, अस्थायी कर्मचारी या टूरिस्ट वीजा पर आने वाले गैर-प्रवासी थोड़े समय के लिए और किसी खास मकसद से अमेरिका आते हैं। सिस्टम यही है कि जब उनका दौरा खत्म हो जाए तो वे वापस चले जाएं। उनका यह दौरा ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला कदम नहीं बनना चाहिए।" USCIS के नए मेमो का आपकी वर्कफोर्स के लिए क्या मतलब है? 21 मई, 2026 को USCIS ने अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे ग्रीन कार्ड आवेदनों की समीक्षा करते समय अधिक सख्त मानक लागू करें, जो USA के भीतर रहकर रहकर अप्लाई किए गए हैं। अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया है कि U.S. में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना एक राहत का एक 'असाधारण' रूप है और इसे वीजा जारी करने की 'नियमित कांसुलर प्रक्रिया' की जगह लेने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। इस मेमो का मतलब है कि अमेरिका में काम करने वाले वो विदेशी नागरिक अपने वीजा का मकसद पूरा होने के बाद USA छोड़ देंगे, जिनके पास F-1 OPT/STEM OPT वीजा है। इस तरह का वीजा'नॉन-डुअल इंटेंट' (दोहरे इरादे वाला नहीं) माना जाता है। वहीं, वे लोग जिन्हें वीजा से छूट (जैसे, ESTA) मिली हुई है, उन्हें U.S. के बाहर किसी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से 'एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस' के लिए आवेदन करना होगा। ऐसा उन्हें तभी नहीं करना होगा, जब वे कोई 'असाधारण परिस्थिति' दिखा सकें। हालांकि, इस मेमो में 'असाधारण परिस्थिति' को परिभाषित नहीं किया गया है। Memo में क्या कहा गया है? USCIS के पास हमेशा से ग्रीन कार्ड के आवेदन को अस्वीकार करने का कानूनी अधिकार रहा है, भले ही आवेदक सभी शर्तों को पूरा करता हो। यानी यह अधिकार 'विवेक' (discretion) पर आधारित होता है। यह मेमो इस बात की पुष्टि करता है कि इस अधिकार का प्रयोग अब और भी अधिक सोच-समझकर और सख्ती से किया जाना चाहिए। अधिकारियों को मूल्यांकन करने के लिए नकारात्मक कारकों की सूची आप्रवासन कानूनों का उल्लंघन, या किसी भी आप्रवासन दर्जे (status) की शर्तों का उल्लंघन  किसी भी सरकारी एजेंसी के साथ धोखाधड़ी या झूठी गवाही के वर्तमान या पिछले मामले देश में प्रवेश करने के बाद किया गया कोई भी ऐसा आचरण, जो उस वीजा के मूल उद्देश्य के अनुरूप न हों शुरुआत में की गई उम्मीद के अनुसार देश छोड़कर न जाना। मेमो में इसे "इस विश्लेषण के लिए अत्यंत प्रासंगिक" बताया गया है। इन कारकों को सख्त बनाने के लिए, मेमो ने एक बहुत ऊंचा मानक (high bar) तय किया है। आवेदकों को 'असामान्य या असाधारण' कारकों को दिखाना होगा, जिसमें पारिवारिक संबंध और नैतिक चरित्र शामिल हैं। इसका अर्थ यह है कि सकारात्मक कारक इतने मजबूत होने चाहिए कि वे इस तथ्य पर भारी पड़ सकें कि आवेदक ने विदेश से आवेदन करने के बजाय U.S. में ही रुककर आवेदन करने का विकल्प चुना। मेमो के लहजे को देखते हुए, यह उम्मीद की जा सकती है कि USCIS इस नियम को काफी सख्ती से लागू करेगा। आपकी वर्कफोर्स के लिए इसका क्या मतलब है? कर्मचारी से ज्यादा HR को करना होगा काम   HR और मोबिलिटी टीमों के लिए इसका मतलब ये हुआ कि ग्रीन कार्ड फाइलिंग में आपके कर्मचारियों से ज्यादा आपको मेहनत की जरूरत होगी। इसके लिए इमिग्रेशन वकीलों को पहले से ही ऐसी फाइलें तैयार करनी चाहिए, जो आवेदक के U.S. से जुड़ाव, उनके नियमों के पालन के रिकॉर्ड और उनके मामले को आगे क्यों बढ़ाया जाना चाहिए? इन बातों को दस्तावेजों में दर्ज करती हों। हालांकि जांच-पड़ताल का स्तर बदल गया है। अब फाइलिंग को सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। वकीलों को अब हर I-485 आवेदन के लिए एक मजबूत तर्क देना होगा कि इस व्यक्ति को U.S. से बाहर जाने के बजाय, U.S. के अंदर से ही अपने ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए? जिन लोगों के पास'नॉन-डुअल इंटेंट' वीजा है, उन्हें ज्यादा डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ेगी। मेमो में अधिकारियों से कुछ बातों पर विचार करने को कहा गया है, जिनमें पारिवारिक जुड़ाव, इमिग्रेशन की स्थिति और इतिहास, आवेदक का नैतिक चरित्र शामिल हैं। इनमें से हर बात को सबूतों के साथ साबित करना होगा। H-1B और L-1 कर्मचारी इसका मतलब है कि भले ही H-1B और L-1 कर्मचारी लंबे समय से U.S. के भीतर अपनी स्थिति में बदलाव (adjustment of status) के लिए आवेदन कर पा रहे हैं, लेकिन अब वे यह नहीं मान सकते कि यह रास्ता अपने आप और सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही पूरा हो जाएगा। अधिकारियों को ऐसे ठोस तर्क चाहिए, जिनसे यह साबित हो सके कि आवेदक U.S. में अपनी स्थिति में बदलाव के हकदार क्यों हैं। इन तर्कों में टैक्स का इतिहास, पारिवारिक परिस्थितियां, करियर में प्रगति, और U.S. में उनकी जड़ों से जुड़े अन्य सबूत शामिल हो सकते हैं। उदाहरण से समझिए एक F-1 OPT कर्मचारी कंप्यूटर साइंस में PhD पूरी करता है, एक टेक कंपनी में अपना STEM OPT पूरा करता है और यह तर्क देते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करता है कि उसका काम 'राष्ट्रीय हित' में है। मेरिट के आधार पर यह एक मजबूत मामला है, सिवाय इसके कि सालों पहले उसने एक दूतावास अधिकारी से कहा था कि उसकी योजना अपने देश वापस लौटने की है। इस मेमो के तहत, अधिकारी अब यह पूछ सकते हैं कि उन्होंने असल में U.S. में ही रुकने का फ़ैसला कब किया और वे … Read more

ट्रंप बोले- डील भी हो सकती है, तबाही भी! ईरान समझौते पर अमेरिका का बड़ा संकेत

नई दिल्ली अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे के दौरान ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। चार दिवसीय भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे रुबियो ने कहा कि अगले कुछ घंटों में दुनिया को ईरान मुद्दे पर 'अच्छी खबर' मिल सकती है। रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रुबियो ने कहा कि मुझे लगता है कि शायद अगले कुछ घंटों में दुनिया को कुछ अच्छी खबर मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित शांति समझौता होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव को समाप्त करेगा। बता दें कि ईरान ने अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले के जवाब में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया था। रुबियो ने जोर देकर कहा कि यह समझौता उस प्रक्रिया की शुरुआत करेगा जिसका अंतिम लक्ष्य एक ऐसी दुनिया बनाना है जहां किसी को भी ईरानी परमाणु हथियारों से डरने या चिंता करने की जरूरत न पड़े। ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए ईरान की कार्रवाई की निंदा की। रुबियो ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों को नुकसान पहुंचाने की धमकी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। शनिवार को ट्रंप ने क्या कहा था? इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि वह ईरान के नवीनतम प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अपने वार्ताकारों से मिल रहे हैं और रविवार तक युद्ध फिर से शुरू करने के बारे में फैसला करेंगे। ट्रंप ने 'एक्सियोस' से बात करते हुए कहा था कि इस बात की ''पूरी तरह से 50/50'' संभावना है कि वह कोई 'अच्छा' सौदा कर पाएंगे या फिर उन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर देंगे। वहीं, ट्रंप ने रविवार सुबह दावा किया कि इजरायल और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ व्यापक परामर्श के बाद ईरान के साथ शांति समझौते पर 'काफी हद तक' बातचीत हो चुकी है। तीन महीने से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में यह अहम प्रगति मानी जा रही है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि औपचारिक घोषणा से पहले समझौते के अंतिम विवरण पर चर्चा जारी है। उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग से हुई बातचीत को 'बहुत अच्छी' बताया। ट्रंप ने इस वार्ता को 'शांति से संबंधित समझौता ज्ञापन' करार दिया। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखेगा फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान केवल गुजरने वाले जहाजों की संख्या को युद्ध-पूर्व स्तर पर वापस लाने की अनुमति देने को तैयार हुआ है, लेकिन इसका मतलब 'मुक्त आवागमन की पूर्ण बहाली' नहीं है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ट्रंप के पोस्ट को 'प्रचार' बताया। आईआरजीसी ने कहा कि समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है। आईआरजीसी के बयान में कहा गया है कि ट्रंप ने पहले परमाणु कार्यक्रम को किसी भी समझौते की मुख्य शर्त बताया था, लेकिन ईरान की ओर से इस पर कोई सहमति नहीं बनी है। इस स्तर पर परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा भी नहीं हुई है।

बिहार: उद्यमी योजना से युवाओं और महिलाओं को बड़ा अवसर, गांवों में खुलेंगे नए उद्योग

चरपोखरी (आरा)  बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत भोजपुर जिले में स्वरोजगार और स्थानीय रोजगार को नई रफ्तार मिलने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जारी औपबंधिक चयन सूची में जिले के 224 लाभार्थियों का चयन विभिन्न श्रेणियों के तहत उद्योग स्थापित करने के लिए किया गया है। सरकार की ओर से वित्तीय सहायता और तकनीकी प्रशिक्षण मिलने के बाद चयनित लाभार्थी जिले के अलग-अलग प्रखंडों और कस्बों में अपने उद्योग शुरू करेंगे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि युवाओं का महानगरों की ओर पलायन भी कम होने की उम्मीद है। युवाओं और महिलाओं को सबसे ज्यादा मौका इस बार सरकार ने सामाजिक संतुलन के साथ युवाओं और महिलाओं को सबसे अधिक प्राथमिकता दी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 53 युवाओं का चयन किया गया है। जबकि मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना में 52 महिलाओं को मौका मिला है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ईबीसी उद्यमी योजना के तहत 52, अनुसूचित जाति-जनजाति श्रेणी में 50, अल्पसंख्यक उद्यमी योजना में 14 और दिव्यांग उद्यमी योजना में तीन लोगों का चयन हुआ है। डिजिटल और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर बना पहली पसंद नई पीढ़ी का झुकाव डिजिटल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की ओर अधिक देखने को मिल रहा है। चयनित परियोजनाओं में सबसे ज्यादा 35 साइबर कैफे सह आईटी बिजनेस यूनिट शामिल हैं। इसके अलावा 26 आटा-सत्तू-मसाला पिसाई इकाइयां, 16 तेल मिल, छह मिनी राइस मिल और 12 रेडीमेड गारमेंट्स प्लांट स्थापित किए जाएंगे। वहीं 16 होटल, रेस्तरां और ढाबे, 15 पेपर प्लेट यूनिट, सात आधुनिक ऑटोमोबाइल गैराज, सात फर्नीचर प्लांट, पांच मेडिकल डायग्नोस्टिक सेंटर और चार फ्लेक्स प्रिंटिंग इकाइयों को भी मंजूरी दी गई है। आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों में कूलर-पंखा असेंबलिंग के चार प्लांट, तीन एलईडी बल्ब उद्योग और तीन आधुनिक कृषि ड्रोन सेवा केंद्र भी शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा 65 अन्य लघु और कुटीर उद्योगों को भी स्वीकृति मिली है। गांवों तक पहुंचेगी ड्रोन तकनीक इस बार आधुनिक कृषि ड्रोन सेवा केंद्रों को मंजूरी मिलना सबसे खास माना जा रहा है। चयनित उद्यमियों को ड्रोन खरीदने, पायलट प्रशिक्षण और सर्विस सेंटर संचालन के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को गांव स्तर पर ही नैनो यूरिया और कीटनाशकों के छिड़काव के साथ फसल निगरानी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। 10 लाख तक की सहायता, आधी राशि अनुदान अधिकारियों के अनुसार दस्तावेज सत्यापन के बाद लाभार्थियों को पहली किस्त जारी की जाएगी। योजना के तहत अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। इसमें 50 प्रतिशत यानी अधिकतम पांच लाख रुपये अनुदान के रूप में माफ किए जाते हैं। शेष राशि आसान शर्तों पर ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। पलायन रोकने में मिलेगी मदद आरा, तरारी, जगदीशपुर, पीरो, बिहिया, शाहपुर, संदेश और चरपोखरी जैसे इलाकों में ये इकाइयां शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। इससे दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे शहरों की ओर होने वाले पलायन पर रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है। हर साल बढ़ रहा योजना का दायरा मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की शुरुआत वर्ष 2018-19 में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए की गई थी। बाद में इसे अति पिछड़ा वर्ग और फिर 2021-22 से सभी वर्गों के युवाओं और महिलाओं के लिए खोल दिया गया। इसके बाद जिले में स्वरोजगार का दायरा लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2021-22 में 174, 2022-23 में 172, 2023-24 में 194, 2024-25 में 208 और अब 2025-26 में 224 लाभार्थियों का चयन किया गया है।

पीस कमेटी बैठक में फैसला, भीड़ बढ़ने पर मस्जिदों में ही अदा होगी ईद की नमाज

लखनऊ ईदगाह में जगह पूरी तरह भर जाने की स्थिति में आसपास की अन्य मस्जिदों में जाकर नमाज अदा करने को कहा गया है.(File Photo: PTI) सड़क पर नमाज के मुद्दे पर सीएम योगी के सख़्त रुख के चलते, बकरीद को लेकर बुलाई गई पीस कमेटी की बैठक में साफ कहा गया कि किसी भी हाल में सड़क पर नमाज नहीं होगी. अगर ईदगाह में जगह पूरी तरह भर जाती है, तो बाहर नमाज पढ़ने के बजाय आसपास की दूसरी मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने को कहा गया है. प्रशासन ने यह भी कहा कि कुर्बानी के बाद जानवर के अवशेष खुले में या नालियों में न फेंके. खुले में अवशेष फेंकने का मुद्दा विश्व हिन्दू परिषद की तरफ से उठाया गया था. बता दें, झांसी के शहर कोतवाली में एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में बकरीद त्यौहार को लेकर पीस कमेटी की बैठक हुई. जिसमें दोनों धर्मों के धर्मगुरुओं व विभिन्न संगठन के सदस्य मौजूद रहे. जिन्होंने कई समस्याओं के बारे में चर्चा की. वहीं प्रशासन ने जहां सड़क पर नमाज न पढ़ने पर फोकस किया तो वहीं हिन्दू संगठनों ने कुर्बानी के बाद जानवर का खून व वेस्ट मटेरियल नालियों में न बहाने की बात उठाई. मुस्लिम समाज के लोगों ने ईद के दिन बिजली और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और सफाई व्यवस्था पर जोर दिया. एसपी सिटी प्रीति सिंह ने कहा कि जो भी व्यवस्थाओं की बात कही गई है, उन्हें पूरा करने के निर्देश नगर निगम, बिजली व जल संस्थान के अधिकारियों को दे दिए गए हैं. साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि सड़क पर किसी भी दशा में नमाज न पढ़े और कुर्बानी के अवशेष खुले में न फेंके. कुर्बानी के बाद अवशेष का सही तरह से रखें पुलिस प्रशासन की ओर से सभी को अवगत करा दिया गया है कि कुर्बानी के बाद जानवरक के अवशेष सही तरह से बाहर रखा जाए ताकि जब नगर निगम की गाड़ी आए तो वह कचरे रूप में उठाकर ले जाए. अव्यवस्था रूप से न फेंका जाए, जिससे कोई कुत्ता या अन्य जानवर उसे उठाकर न ले जाए. अगर ऐसा हो जाता है तो अव्यवस्था का माहौल बन जाता है. साथ ही यह भी निर्देश दिए गए कि जो भी स्थानीय ईदगाह में नमाज सम्पन्न होती है वहां यदि क्षमता पूरी हो चुकी है तो आस-पास की मस्जिद में जाकर नमाज अदा कर लें, मस्जिद के बाहर किसी भी दशा में नमाज अदा न करें. वहीं पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर लक्ष्मीकांत गौतम ने भी कहा कि किसी भी दशा में मस्जिद के बाहर या फिर सड़क पर नमाज अदा न करें.

दिल्ली में जयशंकर से मुलाकात के बाद बोले अमेरिकी विदेश मंत्री, भारत-अमेरिका संबंध दुनिया के सबसे अहम

नई दिल्ली  भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आज दिल्ली में अपने समकक्ष एस. जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका न केवल सहयोगी हैं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं, जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं। रूबियो ने आज सुबह अपने भारतीय समकक्ष जयशंकर से मिले। प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के दौरान शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि रणनीतिक संबंध भारत और अमेरिका के रिश्तों को अन्य देशों से अलग बनाते हैं। रूबियो ने क्या कहा? उन्होंने कहा, "अमेरिका और भारत सिर्फ सहयोगी नहीं हैं। हम रणनीतिक सहयोगी हैं और यह बात बेहद अहम है। जाहिर है हम दुनिया भर के देशों के साथ कई अलग-अलग मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन हमारी रणनीतिक साझेदारी ही इस रिश्ते को सबसे अलग बनाती है।" रूबियो ने आगे कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि यह साझेदारी सिर्प इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में, वैश्विक स्तर पर सहयोग करने के अवसर भी देती है। और जैसा कि मैंने कहा और जैसा कि कल रात हमने खाने पर थोड़ी चर्चा भी की थी इसमें पश्चिमी गोलार्ध और वैसी ही दूसरी जगहें भी शामिल हो सकती हैं।" 'भारत-अमेरिका रखते हैं साझा हित' उन्होंने आगे कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते कई साझा हित रखते हैं। उन्होंने आगे कहा, "हम दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। सिर्फ यही बात हमारे बीच जबरदस्त सहयोग के लिए एक मजबूत आधार है। हमारे इतने सारे साझा हित हैं कि हमारे लिए उन पर लगातार काम करते रहना पूरी तरह से समझदारी की बात है।" अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, "यह किसी चीज को फिर से बहाल करने या उसमें नई जान डालने के बारे में नहीं है। मैंने कुछ लोगों को इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते देखा है बल्कि यह तो उस पहले से ही बहुत ठोस और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के बारे में है, जो हमारी सबसे अहम साझेदारियों में से एक है। मैं तो यहां तक कहूंगा कि यह दुनिया की सबसे अहम साझेदारियों में से एक है।"

सावधान! ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनकर ठग रहे जालसाज, लोगों के खाते कर रहे साफ

लुधियाना. देश भर में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे डिजिटल संगठन “कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)” का नाम अब साइबर ठगों के लिए नया हथियार बन गया है। युवाओं को सिस्टम बदलने और बड़ी जिम्मेदारी मिलने का लालच देकर ठग लोगों को फिशिंग लिंक भेज रहे हैं। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन हैक हो रहा है और लोगों की बैंकिंग जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए लुधियाना पुलिस ने आम जनता को सतर्क करने के लिए अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जागरूकता वीडियो जारी किया है। पुलिस के पास ऐसे मामलों की 6 से 7 के करीब शिकायतें पहुंची हैं। हालांकि किसी से अभी तक ठगी नहीं हुई। जिसके बाद पुलिस इसे गंभीरता से ले रही है। ऐसे समझिए ठगी का नया तरीका इन दिनों कॉकरोच जनता पार्टी ट्रेंडिंग में होने के चलते ठगों ने एक लिंक तैयार किया है। जिसके ऊपर लिखा है कि देश को बदलना है तो पार्टी के साथ जुड़ें। पार्टी के साथ जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें और आप रजिस्टर हो जाएंगे। यही नहीं आप पार्टी के वॉट्सऐप ग्रुप, मैसेंजर और इंस्टाग्राम इनबॉक्स के साथ जुड़ जाएंगे। ऐसे में लोग उक्त लिंक पर जाने-अंजाने में क्लिक कर बैठते हैं। जिसके बाद उनका फोन रिमोट मोड यानि हैक हो जाता है। फोन या लैपटाप की सारी डिटेल जिसमें बैंक खाते की डिटेल, पर्सनल फोटोज और बाकी की सभी डिटेल्स ठगों द्वारा अपने कब्जे में ले ली जाती हैं। जिसके बाद वो आपके इन डिटेल्स की मदद से आपके खाते को खाली कर देते हैं या फिर ब्लैकमेल करते हैं। ये लिंक वॉट्सऐप, मैसेंजर और इंस्टाग्राम के इनबाक्स में भेजे जा रहे हैं। जिससे लोग ठगी का शिकार बन रहे हैं। ग्राफिक के लालच में आकर कर रहे क्लिक इसी तरह के कॉकरोच पार्टी के लिंक पर लोगों को ओहदे दिए जा रहे हैं। उनसे उनकी फोटो मांगी जाती है और एक ग्राफिक बनाकर भेजा जाता है, जिसमें फोटो भेजने वाले शख्स की फोटो लगाकर उसे पार्टी का पद देकर ग्राफिक भेज दिया जाता है। लोगों को लगता है कि वो पार्टी के मेंबर बन गए हैं, जबकि उनके फोटो का इस्तेमाल ठग लोन लेने, क्रेडिट कार्ड बनवाने और फर्जी आईडी बनाने में कर रहे हैं। पुलिस ने बनाई 42 सैकेंड का जागरूकता वीडियो लुधियाना पुलिस ने आम लोगों को इस नए फ्रॉड से बचाने और जागरूक करने के लिए अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर एक वीडियो भी जारी किया है। 42 सेकेंड के इस वीडियो में पुलिस अधिकारी अमरिंदर सिंह ने विस्तार से बताया है कि कैसे एक छोटी सी गलती लोगों को कंगाल बना सकती है। इस वीडियो में विजुअल्स के साथ लोगों के सामने पेश किया गया है, ताकि लोगों को आसानी से समझ आ सके। साइबर पुलिस ने जारी की एडवाइजरी अगर आपने लिंक क्लिक कर दिया है तो तुरंत इसकी शिकायत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर करें। इसके साथ ही एक लिखित शिकायत अपने नजदीकी साइबर थाने में दर्ज करवाएं। अपने बैंक खातों पर तुरंत कैश ट्रांजेक्शन को बंद करवाएं और क्रेडिट या डेबिट कार्ड को ब्लाक करवा दें। मैसेंजर और इंस्टाग्राम आने वाले लिंक को बिना खोले ही डिलीट करें और इसे रिपोर्ट करें, ताकि बाकी कोई इसका शिकार न होने पाए। लिंक क्लिक हो गया है तो तुरंत अपने फोन को आफ कर दें, ताकि कोई एक्टिविटी न होने पाए। इस तरह के फर्जी लिंक से बचने के लिए लोगों से अपील की है। इसके साथ ही अगर किसी ने लिंक क्लिक कर दिया है तो वो तुरंत साइबर पुलिस से संपर्क करे। लोगों से अपील है कि किसी भी अंजान लिंक को क्लिक न करें, क्योंकि ये साइबर ठगों का ट्रैप हो सकता है। -स्वपन शर्मा, पुलिस कमिश्नर