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दिल्ली में भारत-अमेरिका रणनीतिक बातचीत, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा

नई दिल्ली  भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता के बीच में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर आए मार्को रुबियो और डॉ. जयशंकर ने सुबह की द्विपक्षीय बैठक के बाद आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की रूपरेखा साझा की. इस कूटनीतिक मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापक रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग की समीक्षा करना तथा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी समझ को मजबूत करना था. दोनों नेताओं ने कल अमेरिकी विदेश मंत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद आज अपनी बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया, खाड़ी देशों के घटनाक्रमों और यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक संकटों पर गहन रणनीतिक बातचीत की है. दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नवीनीकृत करने के साथ-साथ एक व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए हैं. विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उनके बीच आज सुबह द्विपक्षीय वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ है. दोनों नेता इस चर्चा के बीच में हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद लंच पर शेष मुद्दों को पूरा करने के लिए वापस वार्ता की मेज पर लौटेंगे. हालांकि, ये सचिव रुबियो की पहली भारत यात्रा है, लेकिन वे अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही एक-दूसरे के साथ नियमित संपर्क में बने हुए हैं. विदेश मंत्री ने उठाया वीजा का मुद्दा बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत के वैध यात्रियों को अमेरिकी वीजा मिलने में आ रही हैं चुनौतियों को भी उठाया. इसके जवाब में रुबियो ने कहा कि सबसे पहले, मैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों के योगदान को स्वीकार करता हूं. भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है. हम चाहते हैं कि ये संख्या बढ़ती रहे… जो बदलाव अभी हो रहे हैं या अमेरिका में हमारी प्रवासन सिस्टम का आधुनिकीकरण, ये कदम केवल भारतीय को टारगेट नहीं करता, बल्कि ये नियम पूरे वर्ल्ड के लिए है, इसे पूरी दुनिया में लागू किया जा रहा है. USA में घुसपैठ कर चुके हैं 20 मिलियन लोग उन्होंने कहा कि हम आधुनिकीकरण के दौर में हैं. अमेरिका में प्रवासन संकट रहा है. ये भारत की वजह से नहीं है, लेकिन व्यापक रूप से, पिछले कुछ वर्षों में 20 मिलियन से अधिक लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और हमें इस चुनौती का सामना करना पड़ा है… एक देश के रूप में आप जो कुछ भी करते हैं, वह आपके राष्ट्रीय हित में होना चाहिए और इसमें आपकी आव्रजन नीति भी शामिल है. मेरा मानना ​​है कि अमेरिका आव्रजन के मामले में दुनिया का सबसे स्वागत करने वाला देश है. हर साल लगभग दस लाख लोग अमेरिका के स्थायी निवासी बनते हैं और इसमें महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. 'क्यूबा से आए थे मेरे माता-पिता' अमेरिकी विदेश मंत्री ने खुलासा करते हुए बताया कि मेरे माता-पिता 1956 में क्यूबा से स्थायी निवासी के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका में आए थे. इस प्रक्रिया ने हमें समृद्ध किया है, लेकिन ये एक ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए जो हर युग में मॉर्डन वक्त की वास्तविकताओं के हिसाब हो. हम ऐसा कर रहे हैं और ये बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था. इसलिए संयुक्त राज्य अमेरिका वर्तमान में उस सिस्टम में सुधार की प्रक्रिया से गुजर रहा है, जिसके द्वारा हम ये तय करते हैं कि हमारे देश में कितने लोग आते हैं, कौन आता है, कब आता है. जब भी आप कोई सुधार करते हैं, जब भी आप लोगों को एंट्री देने के सिस्टम में कोई बदलाव करते हैं तो एक बदलाव (संक्रमणकालीन) का दौर होता है जो कुछ मतभेद और कठिनाइयां पैदा करता है… ये कदम केवल भारत को टारगेट नहीं करता, ये एक ऐसी प्रणाली है, जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है. लेकिन हम एक बदलाव के दौर में हैं और इस रास्ते में कुछ बाधाएं तो आएंगी ही, लेकिन हमें लगता है कि अंततः हमारा उद्देश्य एक बेहतर सिस्टम, एक अधिक कुशल प्रणाली होगी, जो पहले की प्रणाली से बेहतर काम करेगी और साथ ही अधिक टिकाऊ भी होगी. रुबियो ने की भारत की तारीफ इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए इस यात्रा को अपने लिए एक बड़ा सम्मान कहा. उन्होंने रणनीतिक साझेदारी को परिभाषित करते हुए कहा कि अमेरिका और भारत दुनिया के कई अन्य देशों के साथ अलग-अलग या क्षेत्रीय मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन एक 'रणनीतिक साझेदारी' इन सब से बहुत अलग और कहीं अधिक व्यापक होती है. ये तब होती है जब दो देशों के हित पूरी तरह एक दिशा में संरेखित होते हैं. मार्को रुबियो ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की चौड़ाई और दायरा ही ये साबित करता है कि भारत अमेरिका का कितना महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार है. उन्होंने कहा कि इस रिश्ते की शुरुआत दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से होती है. भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से दोनों के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं क्योंकि दोनों देशों के नेता सीधे तौर पर अपनी जनता और मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होते हैं. मेक इन इंडिया पर जोर साथ ही रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर डॉ. जयशंकर ने जानकारी दी कि दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नया जीवन दिया है और व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर साइन किए हैं. उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों ने भारत के 'मेक इन इंडिया' दृष्टिकोण को ध्यान में रखने और हाल के वैश्विक संघर्षों से सीखे गए कड़े सबकों को शामिल करने के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की है. आपको बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री … Read more

दिल्ली में जयशंकर से मुलाकात के बाद बोले अमेरिकी विदेश मंत्री, भारत-अमेरिका संबंध दुनिया के सबसे अहम

नई दिल्ली  भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आज दिल्ली में अपने समकक्ष एस. जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका न केवल सहयोगी हैं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं, जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं। रूबियो ने आज सुबह अपने भारतीय समकक्ष जयशंकर से मिले। प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के दौरान शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि रणनीतिक संबंध भारत और अमेरिका के रिश्तों को अन्य देशों से अलग बनाते हैं। रूबियो ने क्या कहा? उन्होंने कहा, "अमेरिका और भारत सिर्फ सहयोगी नहीं हैं। हम रणनीतिक सहयोगी हैं और यह बात बेहद अहम है। जाहिर है हम दुनिया भर के देशों के साथ कई अलग-अलग मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन हमारी रणनीतिक साझेदारी ही इस रिश्ते को सबसे अलग बनाती है।" रूबियो ने आगे कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि यह साझेदारी सिर्प इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में, वैश्विक स्तर पर सहयोग करने के अवसर भी देती है। और जैसा कि मैंने कहा और जैसा कि कल रात हमने खाने पर थोड़ी चर्चा भी की थी इसमें पश्चिमी गोलार्ध और वैसी ही दूसरी जगहें भी शामिल हो सकती हैं।" 'भारत-अमेरिका रखते हैं साझा हित' उन्होंने आगे कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते कई साझा हित रखते हैं। उन्होंने आगे कहा, "हम दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। सिर्फ यही बात हमारे बीच जबरदस्त सहयोग के लिए एक मजबूत आधार है। हमारे इतने सारे साझा हित हैं कि हमारे लिए उन पर लगातार काम करते रहना पूरी तरह से समझदारी की बात है।" अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, "यह किसी चीज को फिर से बहाल करने या उसमें नई जान डालने के बारे में नहीं है। मैंने कुछ लोगों को इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते देखा है बल्कि यह तो उस पहले से ही बहुत ठोस और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के बारे में है, जो हमारी सबसे अहम साझेदारियों में से एक है। मैं तो यहां तक कहूंगा कि यह दुनिया की सबसे अहम साझेदारियों में से एक है।"

इंडिया-US संबंध ऐतिहासिक गिरावट पर! भारतीय-अमेरिकी नेता ने बताई तनाव की असली वजह

वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के संबंधों में काफी कड़वाहट देखने को मिली है। दोनों देशों में जारी तनाव के बीच व्यापार को लेकर बातचीत भी जारी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय अधिकारी वार्ता भी देखने को मिली है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही व्यापार पर बात पक्की हो जाएगी। हालांकि, इस सिलसिले में भारतीय-अमेरिकी नेता जसदीप सिंह जस्सी का कहना है कि दोनों देशों के बीच संबंध लगभग दो दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं। जसदीप सिंह जस्सी सिख्स ऑफ अमेरिका और सिख्स फॉर ट्रंप के फाउंडर हैं। उन्होंने गुरुवार को कहा कि ट्रंप सरकार ने अपने अभियान के मुख्य वादों को इतनी तेजी से पूरा किया है, वैसा आधुनिक अमेरिकन राजनीति में बहुत कम देखने को मिला है। एक इंटरव्यू के दौरान जसदीप जस्सी ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का पहला साल बहुत बढ़िया रहा है। मुझे लगता है कि उन्होंने इतिहास के किसी भी दूसरे राष्ट्रपति से ज्यादा काम किया है। जो दूसरे राष्ट्रपति 10 साल में करते, वह उन्होंने एक साल में कर दिया।” हाल ही में अमेरिका में अवैध प्रवासी कानून को लेकर काफी सख्ती बरती जा रही है। जस्सी ने अमेरिका के इमिग्रेशन एनफोर्समेंट को एक बड़ी कामयाबी बताया और कहा कि ट्रंप ने अमेरिकी सीमा को सुरक्षित करने का अपना वादा पूरा किया। उन्होंने कहा, “उन्होंने वादा किया था कि वह गैरकानूनी इमिग्रेशन को रोकेंगे और बॉर्डर बंद कर देंगे, और उन्होंने आज वह कर दिया है। अमेरिका में जीरो बॉर्डर क्रॉसिंग है। बाइडेन सरकार के कार्यकाल के दौरान हमारे यहां हर दिन 10,000 क्रॉसिंग होती थीं।” जस्सी ने अमेरिका में अपराध के खिलाफ ट्रंप सरकार के सख्त रवैये की सराहना की और अमेरिका के बड़े शहरों में नेशनल गार्ड फोर्स की तैनाती का जिक्र किया। जेसी ने कहा, “उन्होंने अपराध पर रोक लगाने का वादा किया था, और उन्होंने वह किया भी है। बाल्टीमोर जैसे शहरों में आपराधिक आंकड़ों के रिकॉर्ड कम हो रहे हैं।” जस्सी ने व्यापार, रोजगार और महंगाई के चलन पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका ट्रेड डेफिसिट में 35 फीसदी की कमी आई है। उन्होंने इसे रिकॉर्ड पर सबसे बड़ी गिरावट बताया और कहा कि ट्रंप सरकार ने एक साल में प्राइवेट सेक्टर में 6,80,000 नई नौकरियां बनाई हैं और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद की है। उन्होंने कहा, “हमने पिछले तीन सालों की तुलना में किराने के सामान की सबसे कम कीमतें देखी हैं। थैंक्सगिविंग के आसपास पूरे देश में गैस की कीमतों में तेजी से गिरावट आई।" इसके अलावा, जस्सी ने टैरिफ रेवेन्यू का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सालाना 75,000 डॉलर से कम कमाने वाले अमेरिकियों या शादीशुदा जोड़ों के लिए 150,000 डॉलर को 2,000 डॉलर का चेक मिलने की उम्मीद है। भारतीय अमेरिकी समुदाय को लेकर जस्सी ने कहा कि स्वाभाविक नागरिक, स्थायी निवासी और उनके अमेरिका में जन्मे बच्चों को दूसरे अमेरिकियों की तरह फायदा हो रहा है। वे भारतीय अमेरिकी हैं, उनके बच्चे यहीं पैदा हुए हैं, और उनका भविष्य अमेरिका में है। अमेरिका के मजबूत होने और बिजनेस के फलने-फूलने के साथ, भारतीय अमेरिकी भी फलेंगे-फूलेंगे। हालांकि, जस्सी ने भारत और अमेरिका के संबंधों पर चिंता भी जाहिर की है। उन्होंने कहा, "हम सभी को उम्मीद थी कि भारत-यूएस इस साल अपने संबंध मजबूत करेंगे। लेकिन बदकिस्मती से, यह रिश्ता बहुत गंभीर हालत में है। मैंने इसे लगभग 20 सालों में इतना नीचे नहीं देखा।"