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Haryana High Court का बड़ा आदेश, 36 साल से कार्यरत कर्मचारी को नियमित करने के दिए निर्देश

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियमितीकरण का दावा केवल मौखिक दावों के आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि कोई कर्मचारी लंबे समय से सेवा में होने का दावा करता है तो उसे उसके समर्थन में ठोस साक्ष्य भी प्रस्तुत करने होंगे। अदालत ने कहा कि विवादित तथ्यों की जांच याचिका के अधिकार क्षेत्र में संभव नहीं है और ऐसे मामलों के लिए लेबर कोर्ट या औद्योगिक न्यायाधिकरण ही उचित मंच हैं। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने यमुना नगर निवासी एक व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। 1990 से हरियाणा में लगातार कार्यरत रहने का दावा याची ने हाई कोर्ट में दावा किया था कि वह वर्ष 1990 से हरियाणा में लगातार कार्यरत हैं और इसलिए उनकी सेवाओं को नियमित किया जाना चाहिए। उनकी शिकायत थी कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों ने उनके नियमितीकरण के दावे पर विचार नहीं किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया।रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री केवल वर्ष 2020 के बाद कुछ समय तक उनके कार्य करने को दर्शाती है। ऐसे में यह तय करना कि वह वास्तव में 1990 से कार्यरत हैं या नहीं, एक विवादित तथ्य का विषय है, जिसकी जांच याचिका में नहीं की जा सकती।खंडपीठ ने अपने फैसले में एकल पीठ के उस निष्कर्ष को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि याचिका में उठाए गए प्रश्न विवादित तथ्यों से जुड़े हैं और उनकी जांच साक्ष्यों के आधार पर ही संभव है। 'अप्रमाणित दावों के आधार पर नहीं दे सकते आदेश' इसलिए याचिकाकर्ता को किसी वैकल्पिक कानूनी उपाय का सहारा लेने की स्वतंत्रता दी गई थी।हाई कोर्ट ने कहा कि यदि याची कई दशकों से सेवा में हैं तो उन्हें इसका प्रमाण सक्षम प्राधिकारी या श्रम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। केवल सामान्य और अप्रमाणित दावों पर नियमितीकरण का आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उचित उपाय संबंधित लेबर कोर्ट या औद्योगिक न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाना है, जहां साक्ष्यों के आधार पर कर्मचारी और नियोक्ता के बीच संबंध तथा सेवा अवधि का निर्धारण किया जा सकता है। इसी आधार पर अदालत ने अपील को खारिज कर दिया।

वेलकम 3 vs कॉकटेल 2: बॉक्स ऑफिस पर आज से बड़ा क्लैश, टिकट ऑफर से बढ़ी टक्कर

बॉक्स ऑफिस पर आज से एक बहुत बड़ा और दिलचस्प मुकाबला शुरू हो चुका है. अक्षय कुमार की मच-अवेटीड और भारी-भरकम स्टारकास्ट वाली कॉमेडी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' (वेलकम 3) आज यानी 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. लेकिन, अक्षय कुमार की इस मल्टी-स्टारर फिल्म की राह इतनी आसान नहीं होने वाली है, क्योंकि थियेटर्स में पहले से ही शाहिद कपूर की फिल्म 'कॉकटेल 2' मजबूती से पैर जमाए बैठी है. दरअसल अब 'वेलकम 3' के क्रेज को टक्कर देने और अपनी फिल्म की रफ्तार बनाए रखने के लिए 'कॉकटेल 2' के मेकर्स ने एक ऐसा तगड़ा और हैरान करने वाला प्लान बनाया है, जो पहले ही दिन अक्षय की फिल्म का खेल बिगाड़ सकता है. एक टिकट पर दो लोगों के मजे अक्षय कुमार की बड़ी फिल्म के पहले दिन के कलेक्शन में सेंध लगाने के लिए 'कॉकटेल 2' के मेकर्स ने 26 जून यानी आज के लिए एक बेहद आकर्षक ऑफर का ऐलान कर दिया है. मेकर्स ने अपनी फिल्म पर 'बाय 1 गेट 1 फ्री' (Buy 1 Get 1 Free) का टिकट ऑफर लॉन्च किया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप सिनेमाघर जाकर 'कॉकटेल 2' की एक टिकट खरीदते हैं, तो दूसरी टिकट आपको बिल्कुल मुफ्त मिलेगी. यानी सिर्फ एक टिकट की कीमत पर दो लोग आराम से फिल्म का लुत्फ उठा सकते हैं. हालांकि, मेकर्स ने साफ किया है कि यह धमाकेदार ऑफर सिर्फ आज (शुक्रवार) के लिए ही लागू रहेगा. क्या 'वेलकम टू द जंगल' को पहले ही दिन होगा नुकसान? फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि अगर दर्शकों ने शाहिद कपूर की फिल्म के इस 'एक पर एक फ्री' वाले ऑफर का फायदा उठाना शुरू किया, तो इसका सीधा और बड़ा नुकसान अपने पहले ही दिन 'वेलकम टू द जंगल' को उठाना पड़ सकता है. वीकेंड की शुरुआत में लोग अक्सर कम बजट में मनोरंजन तलाशते हैं और ऐसे में यह ऑफर दर्शकों को 'वेलकम 3' के बजाय 'कॉकटेल 2' की तरफ खींच सकता है. अगर ऐसा हुआ, तो 'वेलकम टू द जंगल' की ओपनिंग डे की कमाई पर इसका सीधा असर पड़ेगा. अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि आज ऑडियंस इन दोनों फिल्मों में से किसे ज्यादा भाव देती है. 'कॉकटेल 2' का रिपोर्ट कार्ड अगर 'कॉकटेल 2' के अब तक के प्रदर्शन की बात करें, तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी अच्छा कारोबार कर रही है. बॉक्स ऑफिस ट्रैकर वेबसाइट सैक्लनिक के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने अपने सातवें दिन यानी गुरुवार को 4.90 करोड़ रुपये का शानदार बिजनेस किया. इसी के साथ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की पहले हफ्ते की कुल कमाई 70 करोड़ रुपये (नेट) के आंकड़े तक पहुंच गई है. क्या 100 करोड़ के क्लब में शामिल हो पाएंगे शाहिद कपूर? ट्रेड एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि 'कॉकटेल 2' अपने दूसरे वीकेंड के खत्म होने तक आसानी से 75 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लेगी. लेकिन सबसे बड़ा सवाल इसके आगे के सफर को लेकर है. अब पूरी फिल्म इंडस्ट्री की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 'बाय 1 गेट 1 फ्री' जैसे ऑफर्स और बाहरी मदद मिलने के बाद भी शाहिद कपूर की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये (नेट) का जादुई और प्रतिष्ठित आंकड़ा छू पाती है या नहीं?

AI के दौर में टेक नौकरियों पर संकट: भारत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग हायरिंग में तेज गिरावट

भारत में टेक्नोलॉजी सेक्टर में नौकरियों की हायरिंग की रफ्तार धीमी होती नजर आ रही है. इसका सबसे ज्यादा असर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर पड़ता दिखाई दे रहा है क्योंकि कंपनियां AI और ऑटोमेशन को ज्यादा अपनाने लगी है. एक नए अध्ययन के मुताबिक, कुल मिलाकर नौकरी के अवसर कम हुए हैं लेकिन टेक सेक्टर में नौकरियों की संख्या पिछले कुछ महीनों में और तेजी से घटी है. लोकप्रिय जॉब पोर्टल इंडीड के अनुसार, मई 2026 में प्लेटफॉर्म पर भारतीय नौकरियों के एड 0.7 प्रतिशत कम हुए, जिनमें से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की नौकरियों में पिछले तीन महीनों में 12.3 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई. आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेशंस एंड सपोर्ट, आईटी सिस्टम्स एंड सॉल्यूशंस और डेटा एंड एनालिटिक्स जैसी अन्य तकनीकी नौकरियों में भी 10.2, 9.3 और 6.7 प्रतिशत की गिरावट आई है.  इंडीड के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि तकनीकी कंपनियां कर्मचारियों को ऑफिस लौटने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही हैं. क्या कहते हैं आंकड़े? आंकड़े बताते हैं कि इस समय टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़े बदलाव हो रहे हैं. कंपनियों की हायरिंग और कामकाज अब इस बात पर निर्भर करता है कि वे AI को कितनी अच्छी तरह इस्तेमाल कर पा रही हैं. हालांकि, यह साफ नहीं है कि टेक नौकरियों के एड क्यों कम हुए हैं, लेकिन AI इसका एक बड़ा कारण माना जा रहा है. कई कंपनियां AI से जुड़े नए स्किल वाले कर्मचारियों को हायर कर रहे हैं, जबकि कुछ कंपनियां क्लाउड और ChatGPT जैसे AI टूल्स की मदद से कम कर्मचारियों के साथ ही ज्यादा काम कर रही हैं. छंटनी का बढ़ रहा है खतरा वहीं, तकनीकी क्षेत्र में छंटनी धीरे-धीरे बढ़ रही है, जबकि पहले यह बहुत कम होती थी. उदाहरण के लिए अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच अमेजन ने लगभग 30,000 कॉर्पोरेट और तकनीकी पदों पर छंटनी की. इस अप्रैल में, मेटा ने 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की. उसी महीने माइक्रोसॉफ्ट ने लगभग 8,750 अमेरिकी कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की घोषणा की. इसकी लिस्ट काफी लंबी है, लेकिन मुख्य बात यह है कि तकनीकी क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और इंडीड के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि तकनीकी नौकरियां एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही हैं, जिसमें कुछ पद पूरी तरह से समाप्त हो सकते हैं और फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर (एफडीई) जैसे नए पद सामने आ सकते हैं. कम कर रही है वर्क फ्रॉम होम की सुविधा कई कंपनियां अब वर्क फ्रॉम होम की सुविधा को कम कर रही है या पूरी तरह खत्म कर रही है. इंडीड के आंकड़ों के अनुसार, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेशंस और सपोर्ट जैसी नौकरियों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है. इन क्षेत्रों में रिमोट वर्क के अवसर 4.4% तक कम हुए हैं. इसे लेकर इंडीड का कहना है कि रिमोट वर्क में कमी से यह पता चलता है कि कंपनियों का रुख बदल रहा है और वह अपने कर्मचारियों से ऑफिस में काम करने की उम्मीद कर रही है. खासकर टेक कंपनियों में यह बदलाव हाल के समय में साफ दिखाई दे रहा है. साथ ही कंपनियां ज्यादा उम्मीदवारों को आकर्षित करने के लिए अपनी हायरिंग प्लानिंग में बदलाव कर रही है. इन नौकरियां में हो रही बढ़त दिलचस्प बात यह है कि जहां एक ओर टेक सेक्टर में नौकरियां कम हो रही हैं, वहीं कई दूसरे क्षेत्रों में हायरिंग तेजी से बढ़ रही है. देशभर में खेल, ब्यूटी और हेल्थ, पर्सनल केयर तथा घरेलू सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नई नौकरियां निकली हैं. पिछले तीन महीनों में खेल क्षेत्र में नौकरियां 41%, ब्यूटी और हेल्थ में 36% और पर्सनल केयर और घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं में 34% बढ़ी हैं.

पंजाब में मानसून की एंट्री, फिरोजपुर में झमाझम बारिश; 27-28 जून को कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी

फिरोजपुर  शुक्रवार सुबह से शुरू हुई झमाझम बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बारिश ने बड़ी राहत दी है। सुबह से लगातार हो रही वर्षा के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण में ठंडक घुल गई। बारिश शुरू होते ही सड़कों और बाजारों का नजारा भी बदल गया। लोगों ने गर्मी से राहत मिलने पर खुशी जताई। ठंडी हवाओं के चलने से मौसम सुहावना हो गया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। मौसम में आए इस बदलाव से जहां आम जनजीवन को राहत मिली है, वहीं किसानों ने भी बारिश को फसलों के लिए लाभदायक बताया। हालांकि लगातार बारिश जारी रहने पर कुछ निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका भी बनी हुई है। फिलहाल लोगों के लिए यह बारिश भीषण गर्मी से राहत लेकर आई है। भीषण गर्मी और उमस से परेशान पंजाब व चंडीगढ़ के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, 27 और 28 जून को कई जिलों में बारिश होने के आसार हैं। इसे देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं दूसरी तरफ पंजाब में बिजली की मांग ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भीषण गर्मी के बीच राज्य में बिजली की मांग 16 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई है। बीते दिन अधिकतम मांग 16,335 मेगावाट दर्ज की गई, जो इस वर्ष का सबसे उच्च स्तर है। पिछले वर्ष 25 जून को यह मांग 14,697 मेगावाट थी, जबकि वर्ष 2024 में अधिकतम मांग 15,345 मेगावाट दर्ज की गई थी। राज्य के 15 में से 12 थर्मल पावर यूनिट फिलहाल बिजली उत्पादन कर रहे हैं। मौसम अपडेट 1. 26 जून राज्य के अधिकांश इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 2. 27 और 28 जून इन दो दिनों में मानसून सबसे ज्यादा सक्रिय रहेगा। मौसम विभाग ने पंजाब के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। 3. 29 जून से 1 जुलाई बारिश का दौर जारी रहेगा, हालांकि इसकी तीव्रता कुछ कम हो सकती है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी। तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी मौसम विभाग के मुताबिक, फिलहाल पंजाब के कई जिलों में अधिकतम तापमान 36 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। अगले तीन दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने से तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज होने की संभावना है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी और मौसम सुहावना होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश धान की रोपाई कर रहे किसानों के लिए काफी लाभदायक होगी।  

वेलकम टू द जंगल रिव्यू: 32 सितारों की ब्रेनरॉट कॉमेडी ने किया सरप्राइज

किसी फिल्म से जब कोई उम्मीद ना हो, तब उसे देखना अपने आप में ही एक थ्रिलिंग एक्सपीरियंस होता है. थिएटर्स में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, रवीना टंडर, परेश रावल जैसे 32 सितारों से सजी फिल्म वेलकम टू द जंगल (वेलकम 3) रिलीज हुई है, जिससे कोई कुछ खास उम्मीद नहीं लगा रहा था. इसके पीछे दो कारण हैं. पहला इसका ट्रेलर जिसने काफी निराश किया था, और फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट में कमी पैदा कर दी थी. दूसरा इसके डायरेक्टर अहमद खान, जिनकी पिछली फिल्म हीरोपंती 2 बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी. वेलकम टू द जंगलजब अनाउंस हुई, तो लोगों के मन में शक पैदा हुआ कि क्या अहमद खान इस फिल्म की नैया पार लगा पाएंगे? रिलीज से पहले तक स्टारकास्ट ने तो डायरेक्टर की जमकर तारीफ की. अब फिल्म रिलीज हो गई है, तो इसे देखने के बाद एक बहुत बड़ा सरप्राइज मिला है. आइए, आपको बताते हैं कि इस मल्टी-स्टारर 'ब्रेनरॉट' फिल्म ने किस तरह सरप्राइज किया. 'फेक' फिल्म के चक्कर में असली खतरा से हुआ सामना एक अरबपति बिजनेसमैन काजा (जाकिर हुसैन) इंडिया में अपनी काली कमाई से ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा है. एक दिन उसे खबर मिलती है कि अगर उसने अपनी काली कमाई का कोई हल नहीं निकाला तो उसपर इनकम टैक्स की रेड पर जाएगी. ऐसे में वो अपने मैनेजर दुबे (जॉनी लिवर) के साथ मिलकर 2000 करोड़ रुपये की एक फ्लॉप फिल्म बनाने का प्लान करता है. मैनेजर देव (परेश रावल) और दास (राजपाल यादव) जैसे दो फ्लॉप डायरेक्टर और नयनसुख (श्रेयस तलपड़े) जैसे आधे-अंधे कैमरामैन को हायर करता है. देव और दास के पास एक धांसू स्क्रिप्ट है- वेलकम टू द जंगल. इसके लिए वो एक फ्लॉप का हीरो राजीव (अक्षय कुमार) को कास्ट करते हैं. राजीव के साथ-साथ येड़ा शेट्टी अन्ना (सुनील शेट्टी) और रोमियो भाई (अरशद वारसी) जैसे डॉन की भी फिल्म में एंट्री हो जाती है, जो दरअसल उदय-मजनू के कजिन हैं. इस फ्लॉप फिल्म में देव और दाव नादिया (दिशा पाटनी) को बतौर हीरोइन कास्ट करते हैं, जो पहले भी राजीव की गर्लफ्रेंड थी. इस फ्लॉप फिल्म में सिर्फ इतने एक्टर्स नहीं, टीवी-भोजपुरी-पंजाबी सिनेमा हर तरफ से एक्टर्स को कास्ट किया जाता है. बिजनेसमैन काजी अपनी फिल्म को फ्लॉप करने का पूरा प्लान बना लेता है, लेकिन तभी बाजी उसपर उलटी पड़ जाती है. इनकम टैक्स की रेड में काजा के सारे पैसे चले जाते हैं, जिससे वो कंगाल हो जाता है. अब उसे ये फिल्म किसी भी हाल में हिट चाहिए, जिसके लिए पूरी टीम एक रियल लोकेशन में जाकर असली लोगों के बीच शूटिंग करने लगती है. वहां उनका सामना असली आतंकवादी जतारा (जैकी श्रॉफ) से होता है. अब क्या ये फ्लॉप फिल्म वेलकम टू द जंगल पूरी बन पाएगी? यही इसका बेसिक प्लॉट है. एंटरटेनिंग है ये ब्रेनरॉट फिल्म अक्षय की मल्टी-स्टारर फिल्म का असली मजा इसकी कास्ट है, जिन्होंने इस पूरी फिल्म को एक एकसाथ अपने मजबूत कंधों पर उठाए रखा. फिल्म की कहानी एक पॉइंट के बाद भले ही मायने नहीं रखेगी, मगर जो एंटरटेनमेंट ये आपको दिलाती है उसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी. फिल्म में कई सारे ऐसे मोमेंट्स हैं जहां आप दिल खोलकर हंसते हैं. इसकी सबसे खास बात यही है कि फिल्म खुद को 'ब्रेनरॉट' कहला रही है. लेकिन वो देखने में भी आपको मजा ही आता है. सभी एक्टर्स की आपस में जुगलबंदी काफी अच्छी है. कॉमेडी सरप्राइजिंगली काफी क्लीन और देखने में अच्छी है. हालांकि वेलकम 3 में कुछ मोमेंट्स हैं जब आप थोड़े बोर से होने लगेंगे. लेकिन अंत में आते-आते फिल्म काफी दिलचस्प और मजेदार बन जाती है. जिस तरह की एक्साइटमेंट ट्रेलर ने सेटअप की थी, उसके मुताबिक फिल्म काफी बेहतर निकलकर आई है. वेलकम टू द जंगल का फर्स्ट हाल्फ काफी सही है, इसमें कहानी और विलेन को अच्छे से सेटअप किया जाता है. अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, राजपाल यादव, परेश रावल, और जॉनी लिवर के काफी सीन्स ऐसे हैं, जो आपको खुलकर हंसने पर मजबूर करेंगे. इन सभी एक्टर्स को बाकी स्टारकास्ट का भी बढ़िया सपोर्ट मिला है. सेकेंड हाल्फ में चीजें थोड़ी गड़बड़ होने लगती हैं, मगर अंत आते-आते वो संभल भी जाती हैं. इस फिल्म से एक बड़ी शिकायत ये है कि इसका वीएफएक्स काफी सस्ता सा लगा. इसकी वजह से कुछ सीन्स बेहद अटपटे लगे. लेकिन अंत में ये एक फुल-टाइमपास कॉमेडी फिल्म बनकर सामने आती है, जिसमें डायरेक्टर अहमद खान की तारीफ बनती है. डायरेक्टर की होगी तारीफ अभी तक डायरेक्टर अहमद खान को लेकर जो सवाल उठे थे, ऐसा लगता है कि उन्होंने इस फिल्म से दूर कर दिया है. सबसे पहले उनकी इस बात की तारीफ होगी कि उन्होंने 32-34 स्टार एक्टर्स को एक ही फिल्म में लेने का फैसला लिया. और यही नहीं, सबको एक जैसा स्क्रीन टाइम देने की कोशिश की. उन्होंने अपनी फिल्म में हर एक्टर से कुछ ना कुछ ऐसा कराया, जिसे देखकर मजा जरूर से आया. इस 2 घंटे 45 मिनट की फिल्म को उन्होंने काफी अच्छी तरह से संभालकर रखा. लेकिन ऐसा भी लगता है कि वो इस फिल्म को थोड़ी और बेहतर बना सकते थे. इसी में उनकी बतौर डायरेक्टर थोड़ी बहुत कमी नजर आई. बाकी दिवंगत राइटर नीरज वोहरा की इस ओरिजिनल कहानी को उन्होंने सही तरीके से पर्दे पर दिखाया है. हालांकि फिल्म में ऐसा कोई गाना नहीं था, जो बाद में चलकर याद रह जाए जिसमें अहमद खान शायद थोड़ा चूक गए हैं. स्टार्स-कैमियो के दम पर उठी फिल्म फिल्म वेलकम टू द जंगल को लेकर अब ये कहा जा सकता है कि अगर इसमें 32-34 एक्टर्स नहीं होते, तो शायद ये फिल्म उतनी एंटरटेनिंग नहीं होती. इसके पीछे की वजह ये है कि हर एक एक्टर स्क्रीन पर अपनी ओर से कुछ अनोखा और क्रिएटिव लेकर आया, जिसे देखने में मजा आता है. अक्षय ने जो इस फिल्म में अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाली है, उसके लिए आप थिएटर में ताली जरूर बजाएंगे. वैसे तो वो कॉमेडी के 'खिलाड़ी' है हीं. मगर उनके साथ परेश रावल, सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, राजपाल यादव, श्रेयस तलपड़े और जॉनी लिवर ने जो केमिस्ट्री बिठाई, वो सोने पर सुहागा जैसा था. वहीं … Read more

पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, 1 जुलाई से सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुलेंगे सभी सरकारी कार्यालय

चंडीगढ़. पंजाब सरकार के कार्यालयों का समय एक बार फिर सामान्य कर दिया गया है। भीषण गर्मी के चलते राज्य सरकार ने पहले दफ्तरों का समय बदलकर सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक कर दिया था, लेकिन अब मौसम में बदलाव और तापमान में राहत के बाद सरकार ने पुराने समय को बहाल करने का फैसला लिया है। नए आदेश 1 जुलाई से लागू होंगे। जिस अनुसार सरकारी कार्यालयों में कामकाज सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने 24 मई 2026 को गर्मी और हीटवेव के बढ़ते असर को देखते हुए दफ्तरों के समय में बदलाव किया था। इसके तहत 25 मई 2026 से पंजाब सिविल सचिवालय सहित सभी सरकारी कार्यालयों में कामकाज सुबह 7:30 बजे शुरू होकर दोपहर 1:30 बजे तक सीमित कर दिया गया था। गर्मी से दी थी राहत सरकार का तर्क था कि दोपहर के समय पड़ने वाली तेज गर्मी से कर्मचारियों और आम लोगों को राहत दी जा सके। उस दौरान पंजाब में लगातार तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच रहा था। मौसम विभाग ने भी कई जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया था। इसी के मद्देनजर सरकार ने यह अस्थायी व्यवस्था लागू की थी, ताकि कर्मचारियों को अत्यधिक गर्मी से बचाया जा सके और कामकाज भी प्रभावित न हो। अस्थायी व्यवस्था की समाप्त अब मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी ताजा आदेश में कहा गया है कि अस्थायी व्यवस्था समाप्त की जा रही है और सचिवालय का कामकाज फिर सामान्य समय के अनुसार चलेगा। इससे कर्मचारियों, अधिकारियों और सचिवालय में काम से आने वाले लोगों को पहले की तरह पूरे कार्यालय समय का लाभ मिलेगा। सरकारी हलकों में इसे सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था की वापसी माना जा रहा है। गर्मी के कारण लागू किया गया बदलाव करीब एक महीने तक प्रभावी रहा और अब जुलाई की शुरुआत के साथ सचिवालय फिर अपनी नियमित कार्यप्रणाली में लौट आएगा।

KBC विनर हर्षवर्धन नवाथे: करोड़पति बनने से CEO तक का सफर

हर्षवर्धन नवाथे ने 2000 में "कौन बनेगा करोड़पति" का पहला सीजन जीतकर 1 करोड़ रुपये जीते थे, जिसके बाद वो पूरे भारत में लोगों के बीच फेमस हो गए. दो दशकों से भी ज्यादा समय बाद नवाथे ने कॉर्पोरेट और सामाजिक विकास क्षेत्रों में एक प्रभावशाली करियर बना लिया है. आइए जानते हैं कि अमिताभ बच्चन का शो उनके जीवन को कैसे बदल गया और आज वो क्या कर रहे हैं. KBC फेम से कॉरपोरेट लीडरशिप तक नवाथे JSW के साथ काम कर रहे हैं. दिसंबर 2025 में उन्हें JSW फाउंडेशन का CEO नियुक्त किया गया था. बतौर CEO वो फाउंडेशन की रणनीतिक दिशा और भारत में इसकी सामाजिक प्रभाव वाली पहलों की निगरानी करते हैं. CEO बनने से पहले वो मई 2023 से संगठन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) के रूप में काम कर रहे थे. नवाथे ने डेवलपमेंट व सतत प्रोग्राम को आगे बढ़ाने में मदद की. उनकी LinkedIn प्रोफ्राइल में लिखा है, मैं सामाजिक और विकास के क्षेत्र का एक अनुभवी पेशेवर हूं. मैंने कॉरपोरेट, सोशल बिजनेस और नॉन-प्रॉफिट क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है और बड़े प्रोजेक्ट्स को मैनेज किया है. JSW फाउंडेशन से जुड़ने से पहले नवाथे NatWest Group में डायरेक्टर और हेड ऑफ सस्टेनेबल बैंकिंग परफार्मेंस, फ्रेमवर्क्स, गिविंग और गवर्नन्स के रूप में काम कर चुके हैं. वो पहले Welspun Group के साथ भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने वेल्स्पन ग्रुप CSR के वाइस प्रेसिडेंट और Welspun Foundation के COO के रूप में कार्य किया. KBC ने उनका जीवन कैसे बदला 2024 में नवाथे एक स्पेशल एपिसोड के लिए फिर से KBC पर लौटे और उन्होंने बताया कि क्विज शो उनके जीवन को कैसे बदल गयाय 2021 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में अपने KBC के बाद के सफर के बारे में नवाथे ने कहा था, शो के बाद मुझे पहचान और आर्थिक सुरक्षा मिली. जाहिर है लोकप्रियता लोगों की नजरें बदल देती है. लोगों से मिलना और अलग-अलग मंचों पर पहचाने जाना शानदार रहा है. उन्होंने कहा कि किसी भी इंसान के सफल होने के लिए ये साफ होना चाहिए कि वो जिंदगी में किस दिशा में जाना चाहता है. शुरुआती कुछ महीनों में मैंने रॉकस्टार की तरह जिंदगी जिए. मेरे बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में लोग ऑटोग्राफ लेने के लिए इंतजार करते थे. कहीं आसानी से घूमना-मचलना मुश्किल हो जाता था और मुझे सुरक्षा की जरूरत पड़ती थी. इसलिए काफी लंबे समय तक मुझे पुलिस सुरक्षा भी मिली.  

फायरिंग घटनाओं के बाद चंडीगढ़ में सुरक्षा कड़ी, बस स्टैंड सील कर पुलिस ने की व्यापक जांच

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में हाल के दिनों में हुई फायरिंग की घटनाओं के बाद पुलिस ने शुक्रवार सुबह सेक्टर-43 इंटर स्टेट बस टर्मिनस (ISBT) पर बड़ा सुरक्षा अभियान चलाया। ऑपरेशन सेल की टीम ने अचानक बस स्टैंड पहुंचकर पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया। यह विशेष अभियान ऑपरेशन सेल के इंस्पेक्टर जसपाल सिंह की अगुवाई में चलाया गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस की मौजूदगी देखकर बस स्टैंड पर मौजूद कई यात्री कुछ देर के लिए घबरा गए। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के उद्देश्य से चलाया गया था। पुलिस बैग की जांच करती हुई। बसों से लेकर यात्रियों के सामान की जांच अभियान के दौरान ऑपरेशन सेल की टीम ने बस स्टैंड के सभी प्रवेश और निकास द्वारों पर पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया। इसके बाद अंदर आने-जाने वाली हर बस की जांच की गई। पुलिसकर्मी बसों में चढ़कर यात्रियों के बैग, सामान, सीटों के नीचे रखे लगेज की तलाशी लेते रहे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि किसी बस में कोई संदिग्ध व्यक्ति या सामान तो मौजूद नहीं है। इस अभियान का उद्देश्य बस स्टैंड के माध्यम से किसी भी अपराधी या अवैध सामग्री की आवाजाही को रोकना था। बस स्टैंड परिसर में मौजूद दुकानदारों, रेहड़ी-फड़ी संचालकों, बस चालकों, परिचालकों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। पुलिस ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने हाल के दिनों में किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि को देखा है। दुकानों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास भी विशेष निगरानी रखी गई। पुलिस ने बस स्टैंड के वेटिंग एरिया, टिकट खिड़की, पार्किंग, शौचालय, फुटओवर ब्रिज और अधिक भीड़भाड़ वाले सभी स्थानों की जांच की। पुलिसकर्मी पूरे परिसर में लगातार गश्त करते रहे और हर आने-जाने वाले व्यक्ति पर नजर रखी। इस अभियान का उद्देश्य संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करना, अपराधियों पर निगरानी रखना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। करीब दो घंटे चले इस अभियान में बस स्टैंड के हर हिस्से की गहन जांच की गई। फायरिंग की घटनाओं के बाद जांच चंडीगढ़ में हुई फायरिंग और गैंगस्टर से जुड़ी घटनाओं की जांच में सामने आया है कि कुछ आरोपी वारदात को अंजाम देने के बाद बसों के जरिए शहर से फरार हो गए थे, जबकि कुछ पहले भी बसों के माध्यम से चंडीगढ़ पहुंचे थे। इससे स्पष्ट हुआ कि अपराधी बस स्टैंड का इस्तेमाल आवाजाही के लिए कर रहे हैं। इसी को देखते हुए पुलिस ने सेक्टर-43 बस स्टैंड पर सर्च अभियान चलाया। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई संदिग्ध व्यक्ति, गैंगस्टर या अपराधी बसों के जरिए शहर में प्रवेश या बाहर न निकल सके। इस दौरान बसों, यात्रियों और उनके सामान की गहन जांच की गई तथा संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ कर उनकी पहचान और यात्रा से जुड़ी जानकारी ली गई। बस स्टैंड के बाहर नहीं सीसीटीवी कैमरे सेक्टर-43 बस स्टैंड के भीतर पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन बाहर, खासकर कजहेड़ी की ओर पेट्रोल पंप के पास कैमरे नहीं हैं। पुलिस का कहना है कि कई बार आरोपी इसी रास्ते का फायदा उठाकर आसानी से निकल जाते हैं। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बस स्टैंड के बाहरी हिस्से में भी सीसीटीवी कैमरे लगाने की जरूरत महसूस की जा रही है।  

मानसून में मलेरिया का खतरा बढ़ा: जानें इसके शुरुआती लक्षण और समय रहते कैसे पहचानें

मानसून का मौसम जहां तपती गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. बारिश के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिसके कारण मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी फैल सकती है. अक्सर लोग मलेरिया के शुरुआती संकेतों को सामान्य वायरल संक्रमण या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या बढ़ सकती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते लक्षणों की पहचान और सही इलाज शुरू कर दिया जाए तो मलेरिया से होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं इस बीमारी के कुछ प्रमुख संकेतों के बारे में. तेज बुखार और ठंड लगना मलेरिया का सबसे सामान्य लक्षण तेज बुखार है. इसके साथ अचानक ठंड लगना और कंपकंपी भी हो सकती है. कई बार बुखार बार-बार आता है और शरीर का तापमान काफी बढ़ जाता है. ज्यादा पसीना आना बुखार उतरने के बाद अत्यधिक पसीना आना भी मलेरिया का संकेत माना जाता है. शरीर तापमान को सामान्य करने की कोशिश करता है, जिसके कारण मरीज को जरूरत से ज्यादा पसीना आ सकता है. सिरदर्द और शरीर में दर्द मलेरिया होने पर सिर भारी लगना, आंखों के आसपास दर्द और पूरे शरीर में टूटन महसूस हो सकती है. कई लोगों को मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी की शिकायत भी होती है. लगातार थकान और कमजोरी अगर बिना ज्यादा काम किए भी हर समय थकान महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. मलेरिया शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करता है, जिससे कमजोरी और सुस्ती बढ़ सकती है. उल्टी होना कुछ मरीजों में जी मिचलाना, उल्टी होना, भूख कम लगना और पेट में असहजता जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं. बुखार के साथ ऐसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत जांच करानी चाहिए. मलेरिया से बचाव कैसे करें? मलेरिया से बचने के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें. सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का उपयोग करें. यदि लगातार बुखार या ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें. मानसून के मौसम में थोड़ी सावधानी और जागरूकता आपको और आपके परिवार को मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रख सकती है.

नारायणपुर में सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता, हथियारों का डंप और 24 लाख कैश जब्त

नारायणपुर. नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत नारायणपुर पुलिस और सुरक्षा बलों को दो अलग-अलग सर्च ऑपरेशनों में बड़ी सफलता मिली है। थाना ओरछा क्षेत्र के टेकला जंगल-पहाड़ी में नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखा गया हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया गया। वहीं, थाना छोटेडोंगर क्षेत्र के तोयामेटा जंगल-पहाड़ी से 24 लाख रुपये की नकद राशि बरामद कर सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के हथियारों के साथ-साथ उनके आर्थिक नेटवर्क पर भी बड़ा प्रहार किया है। विश्वसनीय सूचना के आधार पर चलाए गए इन अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने जंगलों में छिपाए गए हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और संचार उपकरण सुरक्षित बरामद किए। पुलिस के अनुसार, यह सफलता लगातार चलाए जा रहे सर्च और एरिया डोमिनेशन अभियान का परिणाम है। टेकला जंगल-पहाड़ी में मिले जखीरे से एक INSAS रायफल, दो SLR रायफल, दो .303 रायफल, दो 30-ओसी बंदूक, एक BGL लॉन्चर और एक सिंगल शॉट बंदूक बरामद की गई। इसके अलावा बड़ी संख्या में मैगजीन, सैकड़ों जिंदा कारतूस, डेटोनेटर तथा बायोफेंग संचार उपकरण भी जब्त किए गए। पुलिस के अनुसार, यह डंप नक्सलियों की गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र था। एक अन्य अभियान के तहत 25 जून को थाना छोटेडोंगर क्षेत्र के तोयामेटा जंगल-पहाड़ी से नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखी गई 24 लाख रुपये की नकद राशि बरामद की गई। सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सली संगठन के आर्थिक नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मान रही हैं। बरामद राशि के स्रोत और उसके उपयोग की भी जांच की जा रही है। अभियान लगातार रहेगा जारी पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सर्च अभियान लगातार जारी रहेगा। जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियार, विस्फोटक सामग्री और अन्य संसाधनों की तलाश कर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई आगे भी तेज की जाएगी, ताकि नक्सली संगठन की संचालन क्षमता को कमजोर किया जा सके। जनता से सहयोग की अपील नारायणपुर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, व्यक्ति या सूचना की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि आमजन के सहयोग से जिले में शांति, सुरक्षा और विकास की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।