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GB रियल्टी ग्रुप की शिकायत पर कार्रवाई, मोहाली में 35 सोशल मीडिया अकाउंट जांच के घेरे में

मोहाली मोहाली के एक इमिग्रेशन सलाहकार और उससे जुड़े कारोबारी समूह को इंटरनेट मीडिया पर कथित तौर पर बदनाम करने के मामले में पंजाब पुलिस ने 35 अकाउंट के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि इन अकाउंट के माध्यम से बिना सत्यापन वाली सामग्री प्रसारित कर कंपनी को कनाडा में कथित धोखाधड़ी के मामले से जोड़ा गया। संबंधित कारोबारी समूह जीबी रियल्टी ग्रुप शैक्षणिक संस्थान चलाने के साथ मोहाली और न्यू चंडीगढ़ में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा है। इस मामले में FIR नंबर 29, 13 अक्टूबर को एसएएस नगर के सेक्टर-79 स्थित साइबर क्राइम थाने में दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया है। कंपनी-एमडी के बारे में झूठी अफवाहें फैलाईं जीबी रियल्टी ग्रुप की ओर से अधिवक्ता पारस शर्मा ने पुलिस को शिकायत दी है। शिकायत के अनुसार, अज्ञात व्यक्तियों ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर कंपनी और उसके प्रबंध निदेशक के बारे में कथित तौर पर झूठी अफवाहें फैलाईं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन पोस्ट में कंपनी को कनाडा में हुए कथित धोखाधड़ी के मामले से जोड़कर पेश किया गया। कंपनी के अनुसार ये आरोप निराधार हैं। शिकायतकर्ता ने पुलिस को उन सोशल मीडिया अकाउंट और पोस्ट के लिंक भी दिए हैं, जिनके माध्यम से कथित सामग्री साझा की जा रही थी। इसके साथ ही संबंधित सामग्री हटाने और अकाउंट ब्लॉक करने की मांग की गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया है। हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। कनाडा के ओंटारियो में भी चल रही जांच यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कनाडा के ओंटारियो प्रांत में निजी करियर कॉलेजों को विद्यार्थियों की आर्थिक सहायता देने वाली योजना में संभावित अनियमितताओं की जांच चल रही है। प्रांतीय सरकार ने शुरुआती ऑडिट में सामने आई आशंकाओं के बाद मामला ओंटारियो प्रांतीय पुलिस (ओपीपी) को जांच के लिए सौंपा है। ऑडिट फर्म केपीएमजी को नियुक्त किया गया ओंटारियो के कॉलेज एवं विश्वविद्यालय मंत्री नोलन क्विन के अनुसार, ओंटारियो स्टूडेंट असिस्टेंस प्रोग्राम के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद सरकार ने निरीक्षण शुरू किए थे। इसके बाद मामले की विस्तृत समीक्षा के लिए ऑडिट फर्म केपीएमजी को नियुक्त किया गया। अधिक आवेदन आने जैसे बिंदुओं पर चिंता जताई शुरुआती निष्कर्षों में कुछ निजी करियर कॉलेजों के बीच साझा स्वामित्व, कॉलेजों और इमिग्रेशन भर्ती सेवाओं के बीच संबंध, विद्यार्थियों के सत्यापन की कमजोर प्रक्रिया और कुछ क्षेत्रों से ओएसएपी के तहत असामान्य रूप से अधिक आवेदन आने जैसे बिंदुओं पर चिंता जताई गई। प्रांतीय सरकार ने मामले की जानकारी ऑडिटर जनरल को भी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 7 करियर कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2024-25 में ओएसएपी के तहत लगभग 385 मिलियन कनाडाई डॉलर की अनुदान राशि मिली थी। हालांकि, इस जांच और मोहाली में दर्ज एफआईआर के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।  

बलोचिस्तान में भूकंप के तेज झटके, आसपास के इलाकों में भी महसूस हुई हलचल

 खुजदार 17 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 10:06-10:07 बजे पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में खुजदार शहर से लगभग 48 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में 5.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. कुछ एजेंसियों ने इसे 5.6 से 5.9 के बीच बताया है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह भूकंप बहुत उथला था- सिर्फ 10 किलोमीटर गहराई पर. उथले भूकंप समान तीव्रता वाले गहरे भूकंपों की तुलना में सतह पर कहीं ज्यादा जोरदार झटके पैदा करते हैं।  इसलिए यह झटका खुजदार और आसपास के बड़े क्षेत्र में साफ महसूस किया गया होगा. पाकिस्तान मौसम विभाग (पीएमडी) के अनुसार केंद्र 28.02 उत्तर और 66.20 पूर्व अक्षांश-देशांतर पर था. भूकंप की गहराई उसके असर को बहुत प्रभावित करती है. 10 किलोमीटर जैसी उथली गहराई का मतलब है कि ऊर्जा धरती की सतह के काफी करीब छूटी. इससे स्थानीय स्तर पर तेज हिलना, इमारतों में दरारें और लोगों में घबराहट पैदा हो सकती है।  गहरे भूकंप (70 किलोमीटर से ज्यादा) की ऊर्जा ज्यादा फैल जाती है और सतह पर कम असर करती है. इस बार खुजदार से झटके पहुंचने में महज 14 सेकंड का समय अनुमानित है. खारान और कलात जैसे शहरों में भी कुछ सेकंड में झटके पहुंचे होंगे. पिछले 30 दिनों में इस क्षेत्र में यही एकमात्र दर्ज भूकंप है. तीव्रता के हिसाब से सबसे बड़ा।  क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति और कारण बलोचिस्तान भारतीय, यूरेशियन और अरेबियन टेक्टोनिक प्लेट्स के मिलन क्षेत्र में आता है. इन प्लेट्स के लगातार दबाव और रगड़ से तनाव जमा होता रहता है. जब तनाव अचानक निकलता है तो भूकंप आता है. खुजदार के आसपास सक्रिय फॉल्ट लाइनें हैं. यहां पहले भी 5 से ऊपर के भूकंप आ चुके हैं. 6.0 या उससे ऊपर के बड़े भूकंप कम होते हैं, लेकिन 5.5-5.9 वाले झटके समय-समय पर आते रहते हैं. यह घटना क्षेत्र की सक्रिय भूकंपीय प्रकृति को फिर याद दिलाती है।  उथली गहराई के कारण खुजदार शहर और आसपास के गांवों में झटके जोरदार रहे होंगे. लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर जमा हुए होंगे. शुरुआती रिपोर्टों में बड़े नुकसान या हताहतों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कमजोर मकानों में छोटी-मोटी क्षति हो सकती है. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. आफ्टरशॉक्स यानी बाद के छोटे झटके भी आ सकते हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. सुरक्षित जगह पर रहें, भारी सामान से दूर रहें और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। 

Audi Q3 की भारतीय बाजार में एंट्री, शानदार डिजाइन के साथ मिलेगी लग्जरी SUV

मुंबई   लग्जरी कार निर्माता कंपनी Audi ने भारतीय बाजार में अपनी नई Audi Q3 एसयूवी को लॉन्च कर दिया है. इसके तीसरे जनरेशन मॉडल को कुल दो वेरिएंट्स – Nova और Zenith में पेश किया गया है. इनकी शुरुआती कीमत 51.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है।  इस नए जनरेशन मॉडल को अगस्त 2026 में भारतीय बाजार में पेश किया था. इसे महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में स्थित Skoda Auto Volkswagen India Pvt Ltd (SAVIPL) के प्लांट में असेंबल किया जा रहा है।  नई 2026 Audi Q3 का एक्सटीरियर नई Audi Q3 अपने पिछले मॉडल के मुकाबले ज़्यादा शार्प दिखाई देती है, जिसमें स्प्लिट-हेडलाइट सेटअप और एक चौड़ी फ्रंट ग्रिल लगाई गई है।  भारत में मिलने वाले वर्ज़न की ग्रिल का डिज़ाइन ग्लोबल मॉडल से अलग रखा गया है, हालांकि Audi के लोगो को उसी तरह से लगाया गया है, जैसा कि इसके इंटरनेशनल मॉडल में है. इसके निचले बंपर में हनीकॉम्ब पैटर्न वाला एयर इनटेक और एक सिल्वर स्किड प्लेट का इस्तेमाल किया गया है।  कार के किनारों की तरफ बदलाव थोड़े सूक्ष्म रखे गए हैं. इसका कुल आकार तो जाना-पहचाना ही रहता है, लेकिन नई Audi Q3 में बॉडी-कलर क्लैडिंग, डुअल-टोन अलॉय व्हील्स, रूफ रेल्स और विंडो लाइन के चारों ओर एक क्रोम स्ट्रिप लगाई गई है।  कार के रियर प्रोफाइल की बात करें तो यहां पर स्प्लिट टेल-लैंप एक LED लाइट बार से जोड़े गए हैं, जिसके बीच में ऑडी का चमकता हुआ लोगो लगाया गया है. इसमें एक बड़ा रूफ स्पॉइलर भी लगाया गया है, जबकि इसके आकर्षक बंपर में नकली एयर आउटलेट और एक सिल्वर स्किड प्लेट दी गई है।  कलर ऑप्शन्स की बात करें तो कंपनी ने इस कार को कुल पांच एक्सटीरियर कलर ऑप्शन्स में पेश किया है, जिनमें मिथोस ब्लैक, टैम्बोरा ग्रे, नवार्रा ब्लू, सेज ग्रीन और ग्लेशियर व्हाइट कलर शामिल हैं।  नई 2026 Audi Q3 का इंटीरियर कार के केबिन में पिछले मॉडल के मुकाबले काफी बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. इसके डैशबोर्ड में अब एक पैनोरमिक डिस्प्ले सेटअप दिया गया है, जिसमें 11.9-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 12.8-इंच की टचस्क्रीन लगाई गई है।  इसका इंफोटेनमेंट सिस्टम 'एंड्रॉइड ऑटोमोटिव OS' पर काम करता है और ड्राइवर की तरफ झुका हुआ है. Audi के कुछ बड़े मॉडल्स के विपरीत, इसमें आगे बैठे यात्री के लिए कोई अलग स्क्रीन नहीं दी गई है।  Audi ने इसके गियर सिलेक्टर को सेंटर कंसोल से हटाकर स्टीयरिंग व्हील के पीछे एक लीवर पर लगा दिया है, जिससे आगे की सीटों के बीच ज़्यादा जगह मिल गई है. वहीं लाइटिंग और वाइपर के कंट्रोल स्टीयरिंग व्हील के दूसरी तरफ दिए गए हैं।  नई 2026 Audi Q3 के फीचर्स इस कार के हायर-स्पेक Zenith वेरिएंट में 12-स्पीकर वाला 420W का SONOS साउंड सिस्टम, हेड-अप डिस्प्ले और दोनों पंक्ति के लिए फास्ट USB चार्जिंग का फीचर दिया गया है. कार में डिजिटल मैट्रिक्स LED हेडलाइट्स, लेन और ओरिएंटेशन लाइटिंग, और फ्रंट लाइट्स के लिए कस्टमाइज़ होने वाले डिजिटल लाइट सिग्नेचर भी दिए गए हैं।  ये 'कमिंग-होम' और 'लीविंग-होम' फंक्शन के दौरान काम आते हैं. इसके अलावा, इसमें ऊपर और नीचे से फ्लैट, ट्विन-स्पोक वाला स्पोर्टी लेदर स्टीयरिंग व्हील भी दिया गया है. इंटीरियर कलर विकल्पों में टैमरिंड ब्राउन और परगामेंट बेज कलर शामिल हैं।  नई 2026 Audi Q3 का इंजन कार में मिलने वाले इंजन की बात करें तो इसके दोनों वेरिएंट्स में 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो 201 bhp की पावर और 320 Nm का टॉर्क उत्पन्न करता है. इस इंजन के साथ 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स को जोड़ा गया है।  इंजन की पावर कंपनी के Quattro सिस्टम के जरिए इसके चारों व्हील्स तक पहुंचती है, जो इसमें स्टैंडर्ड तौर पर दिया जाता है. Audi का दावा है कि नई Audi Q3 महज 7.1 सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 229 kmph तक पहुंच सकती है। 

रूस में न्यूमोनिक प्लेग का असर, भोपाल में अंतरराष्ट्रीय रामलीला महोत्सव निरस्त

भोपाल राजधानी में चल रहे इंटरनेशनल रामलीला महोत्सव से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। रूस में फैले न्यूमोनिक प्लेग के कथित प्रकोप के कारण रूसी कलाकारों की एक मंडली भोपाल नहीं पहुंच पाई है। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के चलते इन कलाकारों को भारत यात्रा के लिए जरूरी क्लीयरेंस नहीं मिल सकी, जिसके कारण उनकी बहुप्रतीक्षित प्रस्तुति रद्द करनी पड़ी है। रविंद्र भवन में होने वाला था आयोजन यह कलाकार भोपाल के प्रतिष्ठित रविंद्र भवन में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले थे, लेकिन ऐन वक्त पर उनका दौरा टल गया। इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने पुष्टि की है कि रूस की यह परफॉर्मेंस अब नहीं होगी। उन्होंने बताया कि विभाग को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की तरफ से रूसी कलाकारों की मंडली के आगमन को लेकर कोई भी औपचारिक पुष्टि या सूचना प्राप्त नहीं हुई थी। फेस्टिवल पर क्या पड़ा असर? हालांकि विदेशी कलाकारों के न आने से एक बड़ा आकर्षण कम हुआ है, लेकिन आयोजन समिति ने साफ किया है कि महोत्सव तय कार्यक्रम के अनुसार पूरी भव्यता के साथ जारी रहेगा। फेस्टिवल में अन्य निर्धारित प्रस्तुतियां लगातार जारी हैं और दर्शक रामलीला के विभिन्न स्वरूपों का आनंद उठा रहे हैं। गंभीर बीमारी के चलते बरती जा रही सुरक्षा स्वास्थ्य विभाग और अंतरराष्ट्रीय यात्रा मानकों के तहत रूस में फैली इस गंभीर बीमारी को लेकर बरती जा रही सख्ती के कारण ही कलाकारों के आगमन पर रोक लगी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को देखते हुए यह स्थिति बनी है। न्यूमोनिक प्लेग और इसके लक्षण न्यूमोनिक प्लेग (Pneumonic Plague) 'येर्सिनिया पेस्टिस' (Yersinia pestis) नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से फैलने वाली एक अत्यंत गंभीर और दुर्लभ बीमारी है। यह प्लेग का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए हवा के माध्यम से आसानी से एक से दूसरे इंसान में फैल सकता है। हालांकि, यदि शुरुआती दौर में ही इस खतरनाक संक्रमण की पहचान हो जाए और तुरंत एंटीबायोटिक्स से इसका इलाज शुरू कर दिया जाए, तो मरीज के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना काफी अधिक होती है। भारत में इसका क्या है असर? वर्तमान में इस घटना से भारत या अन्य देशों को किसी बड़े खतरे का कोई सीधा संकेत नहीं है WHO का बयान रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों और उपभोक्ता स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को सूचित किया है कि की गई जांच में महिला के शरीर में प्लेग या किसी अन्य खतरनाक रोगजनक की पुष्टि नहीं हुई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए WHO ने रूस से और अधिक पारदर्शी जानकारी की मांग की है, हालांकि शुरुआती आकलन के अनुसार रूस से बाहर आम जनता के लिए इसका खतरा 'बहुत कम' माना गया है।  

शहडोल में मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारी तेज, बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे अधिकारी

शहडोल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित शहडोल दौरे को ध्यान में रखते हुए शहडोल कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने जिले के अलग अलग विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को कार्यक्रम की तैयारियों के संबंध में दायित्व सौंपे हैं. कलेक्टर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी करनी है. ऐसे में कोई भी अधिकारी बिना अनुमति के जिला मुख्यालय से बाहर न जाएं।  शहडोल में यहां होगा सीएम का कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम का आयोजन जिला मुख्यालय स्थित बाणगंगा मैदान में किया जाएगा. कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने संबंधित अधिकारियों को बाणगंगा मैदान का समतलीकरण कराने, प्रदर्शनी की व्यवस्था करने, हितग्राहियों को हितलाभ वितरण की तैयारियां करने और लोकार्पण एवं शिलान्यास के लिए प्रस्तावित कार्यों की सूची तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं।  हेलीपैड और पहुंच मार्ग की होगी मरम्मत मुख्यमंत्री मोहन यादव के संभावित शहडोल दौरे को ध्यान में रखते हुए शहडोल कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा है कि हेलीपैड और हेलीपैड से कार्यक्रम स्थल तक पहुंच मार्गों की मरम्मत कराएं, संबंधित अधिकारियों को इसके निर्देश भी जारी कर दिए हैं. कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कहा, '' कार्यक्रम से संबंधित सभी व्यवस्थाएं समय रहते पूर्ण की जाएं, ताकि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।  बिना अनुमति अधिकारी न छोड़े मुख्यालय शहडोल कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि 25 अक्टूबर तक कोई भी अधिकारी बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़े. उन्होंने अलग-अलग विभागों को सौंपे गए दायित्वों की समयपूर्व तैयारी सुनिश्चित करने और निर्धारित समय-सीमा में सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश भी दिए हैं. इस बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत शिवम प्रजापति, शहडोल साउथ डीएफओ श्रद्धा पेंद्रे, अपर कलेक्टर सरोधन सिंह, एसडीएम अमृता गर्ग सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। 

ट्रंप का बड़ा ऐलान: भारत समेत 5 देशों पर अब नहीं लगेगा 100% टैरिफ

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत पांच देशों को रूस से तेल और गैस खरीदने पर टैरिफ से छूट देने का ऐलान किया है. यह फैसला 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' के तहत लगाया गया था, जिसमें इन देशों को राष्ट्रीय हित के तहत छूट दी गई है. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इन पांच देशों को रूस से ऊर्जा खरीदने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा, जिससे उनके आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।  चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान इन पांच देशों में शामिल है. अमेरिकी राष्ट्रपति का यह कार्यकारी आदेश ऐसे समय में आया है, जब रूस को लेकर वे नरम रुख अपना रहे हैं. वहीं, सार्वजनिक रूप से वे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की आलोचना भी कर रहे हैं।  ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए 'रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अधिनियम' के तहत लगाए गए प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देने का फैसला किया है. शुक्रवार शाम जारी एक कार्यकारी आदेश में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ग्राहम एक्ट' के तहत लगाए जाने वाले प्रतिबंधों, पाबंदियों और टैरिफ से छूट का ऐलान किया है. ट्रंप ने आदेश में कहा कि वह राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए यह फैसला ले रहे हैं।  ट्रंप ने पिछले महीने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों पर सख्ती बढ़ाने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए थे. इसमें रूस के बड़े तेल खरीदारों से आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था. इसकी समयसीमा 18 अक्टूबर को खत्म होने वाली थी. लेकिन शुक्रवार देर रात जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने फिलहाल इन टैरिफ और संबंधित प्रतिबंधों को लागू करने से छूट दे दी. उन्होंने कांग्रेस को बताया कि मौजूदा समय में यह छूट अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है. हालांकि राहत को स्थायी फैसला नहीं माना जा सकता. ट्रंप बाद में परिस्थितियों के अनुसार फिर से टैरिफ लगाने का विकल्प अपने पास रख सकते हैं. यही वजह है कि भारत को राहत तो मिली है लेकिन व्यापारिक अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।  ट्रंप ने किस कानून के तहत टैरिफ लगाने की तैयारी की थी?     इस विवाद की जड़ रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाला कानून है जिसे ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम से बताया गया है. इसका मकसद रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए मिलने वाले आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाना था. कानून में रूसी अधिकारियों, बैंकों और ऊर्जा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने के साथ उन विदेशी देशों पर भी कार्रवाई का प्रावधान था जो रूस से तेल खरीदते हैं।      इसके तहत भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों से आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता खुलता. इसके अलावा रूस के ऊर्जा उत्पादों के अमेरिकी आयात पर 500 फीसदी तक टैरिफ और रूसी संस्थाओं के खिलाफ प्रतिबंधों का प्रावधान भी बताया गया था. हालांकि कार्यकारी आदेश के बाद ये उपाय फिलहाल लागू नहीं किए जा रहे हैं. इसका अर्थ यह नहीं कि पूरा कानून रद्द हो गया है।  आखिर अमेरिका ने आखिरी वक्त पर क्यों लिया यू-टर्न?     पहली वजह: अमेरिका में मिड टर्म चुनाव नजदीक हैं. ऐसे समय में ईंधन की कीमतें और महंगाई आम मतदाताओं के लिए अहम मुद्दे बन सकती हैं. यदि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाए जाते तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर उसका असर पड़ सकता था. इससे कीमतें बढ़ने का जोखिम भी रहता. इसलिए घरेलू आर्थिक दबाव ट्रंप प्रशासन के फैसले को प्रभावित करने वाला एक कारण है।      दूसरी वजह: रूस दुनिया के बड़े तेल सही ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है. उसके तेल के प्रवाह पर बहुत ज्यादा रोक लगाने से वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है. अमेरिका के लिए भी महंगी ऊर्जा आर्थिक चुनौती बन सकती है. ऐसे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की योजना को फिलहाल रोकना बाजार में अनिश्चितता कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है. हालांकि ट्रंप के आदेश में अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने की इच्छा को वजह नहीं बताया गया है।  आधिकारिक तौर पर फैसला राष्ट्रीय हित के आधार पर लिया गया है.     तीसरी वजह: टैरिफ को फिलहाल टालने से अमेरिका के पास आगे की बातचीत और रणनीति के लिए विकल्प खुले रहते हैं. यदि परिस्थितियां बदलती हैं तो ट्रंप प्रशासन इन शुल्कों को फिर लागू करने पर विचार कर सकता है. यानी यह कदम रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव की नीति को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसे कुछ समय के लिए रोकने जैसा है।  भारत को कितनी बड़ी राहत मिली? भारत के लिए यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस उसके प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है. यदि भारतीय सामान पर 100 फीसदी टैरिफ लगा दिया जाता तो अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ सकती थी. इससे भारत के निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने और अमेरिकी खरीदारों की मांग घटने का खतरा था।  भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में पिछले साल रूसी तेल की खरीद को लेकर तनाव बढ़ा था. उस समय ट्रंप प्रशासन ने भारत पर सामान्य टैरिफ के अलावा रूसी कच्चे तेल की खरीद से जुड़ा अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया था. हालांकि फरवरी 2026 में अतिरिक्त शुल्क हटा दिया गया और पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी किया गया. ऐसे में नया 100 फीसदी टैरिफ लागू होना व्यापार संबंधों के लिए एक और बड़ी चुनौती बन सकता था. फिलहाल इस आशंका से राहत मिली है। 

उज्जैन-आगर मार्ग पर दर्दनाक हादसा, पुलिया से उतरकर पलटी यात्री बस, दो लोगों की दबकर मौत

उज्जैन  उज्जैन-आगर मार्ग पर तराना फंटे के पास बाइक सवार को बचाने के प्रयास में यात्री बस अनियंत्रित होकर पुलिया से उतरकर पलट गई। हादसे में बस के नीचे दबने से दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच महिलाएं घायल हो गई। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने बस से यात्रियों को निकाला। राघवी पुलिस ने बताया कि बस क्रमांक एमपी 70 पी 0161 शुक्रवार दोपहर आगर से उज्जैन की ओर जा रही थी। तराना फंटे के पास बाइक सवार को बचाने के प्रयास में चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख पाया और बस पुलिया के समीप से नीचे उतरकर पलट गई। बस की चपेट में आने से दो ग्रामीणों की मौत बताया जा रहा है कि इस दौरान फंटे के पास खड़े मोहन पुत्र मांगीलाल उम्र 50 वर्ष और महेश पुत्र बापू दोनों निवासी ब्राह्मण बड़ोदिया इंगोरिया बस की चपेट में आकर नीचे दब गए। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दोनों व्यक्ति ग्राम ठुकराल रिश्तेदार के यहां जा रहे थे। रास्ते में दोनों मार्ग के समीप खड़े होकर बीड़ी पी रहे थे। बताया जा रहा है कि बस में 40 से अधिक लोग सवार थे। हादसे में बस में सवार गंगाबाई, तेजूबाई, विष्णुबाई, पेपाबाई और सगनाबाई सभी निवासी आगर भी घायल हुई हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उन्हें गंभीर चोट नहीं आई है।  

भोपाल गैस त्रासदी के कचरे पर रिपोर्ट पेश, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताई स्थिति

भोपाल/जबलपुर  भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे को जलाने के बाद निकली राख में पारे की मात्रा उपस्थित होने के संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए कहा है कि अगली सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष के अधिवक्ता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करें. वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से उनके तर्कों को नही सुना जाएगा।  क्या है पूरा मामला? दरअसल, भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण किए जाने की मांग करते हुए आलोक प्रताप सिंह द्वारा साल 2004 में याचिका दायर की गई थी. याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मृत्यु हो जाने पर हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में शुरू कर दी थी, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण पीथमपुर जिला धार में किया गया था।  पूर्व में याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीले कचरे को हटाए जाने के बावजूद भी आसपास के कई वार्डों में आम जनता को अब भी दूषित और जहरीला पानी की सप्लाई होने का खतरा है. युगलपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के जरिए पानी के सैंपल लेकर उनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए थे. विनष्टीकरण के बाद भी राख में पारा? पिछली सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पानी की जांच रिपोर्ट पेश की गई. संबंधित पक्षों ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया. वहीं, याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे को जलाने से बची हुई राख में पारा पाया गया है. राख का विनष्टीकरण वर्तमान में मानव बस्तियों के बहुत करीब स्थित ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोजल फैसिलिटी पीथमपुर, जिला धार में किया जा रहा है।  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पेश की रिपोर्ट सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, सभी पैरामीटर तय सीमा के अंदर हैं. इसके बाद हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को राख के संबंध में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए थे. याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से राख में उपस्थित पारा के संबंध में रिपोर्ट पेश की गई, जिसे कोर्ट में रिकॉर्ड पर लिया और संबंधित पक्षों को 27 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर तर्क देने के आदेश दिए हैं। 

न्यू मार्केट में आग का खतरा! 50 फीट में 3 दुकानों पर भट्टियां, बेखौफ खा रहे लोग

भोपाल  राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट में कपड़ा, ज्वैलर्स समेत करीब 900 दुकानों के बीच भटि्टयां भी सुलग रही हैं। जिस छोले-भटूरे की दुकान में 8 अक्टूबर को भीषण आग लगी, वहां से सिर्फ 50 फीट दूर ही 3 दुकानें और हैं। यहां खतरे के बीच ही भटूरे तले जा रहे हैं। जांच में खुलासा हुआ कि इन दुकानों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। दुकान की न तो फायर और न ही इलेक्ट्रिक एनओसी है। फायर एक्सटिंग्विशर जरूर हैं, लेकिन कोने में रखे हैं। यदि आग लग जाए तो इन्हें चलाने के लिए कर्मचारी भी प्रशिक्षत नहीं है। ये खामियां मिलीं…     कलकत्ता छोले-भटूरे: जिस जगह पर छोले तले जा रहे, उसके ऊपर ही धूप से बचने के लिए रिट्रैक्टेबल अवनिंग लगी है। जरूरत के हिसाब से इसे खोल और बंद कर सकते हैं। यहां आग बुझाने के लिए एक्सटिंग्विशर तो है, लेकिन इन्हें चलाना नहीं आता।     देहली के छोले-भटूरे: यहां किचन इतना छोटा है कि 2 कर्मचारी मुश्किल से बैठकर भटूरे तलते हैं। ऐसे में आग लग जाए तो कर्मचारी निकल ही नहीं सकते। बिजली के तार भी खुले हुए हैं।     पंजाब छोले-भटूरे: फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं मिली। कई जगहों से बिजली के तार खुले मिले। फायर एक्सटिंग्विशर तो है, लेकिन कोने में रखे हैं। अब शिफ्टिंग पर जोर फायर ऑफिसर सौरभ पटेल ने बताया कि दुकान में अग्निशामक यंत्र होने चाहिए। कर्मशियल सिलेंडर ही होना चाहिए। भटि्टयां नहीं होना चाहिए। जांच में सामने आया कि भटि्टयां पाई गईं। देहली के छोले-भटूरे में ऊंचाई पर बैठकर कर्मचारी भटूरे तलते हुए मिला। इलेक्ट्रिक सर्टिफिकेट किसी के पास नहीं है। बिजली के तार भी खुले ही पड़े हैं। इन सभी खामियों के चलते दुकानों को शिफ्ट करने का प्लान है। 8 अक्टूबर को लगी थी भीषण आग बालाजी छोटे भटूरे दुकान में 8 अक्टूबर को भीषण आग लगी थी। आग ने पास की 5 बड़ी दुकानों और 12 से ज्यादा रेहड़ियों को चपेट में ले लिया था। इससे करोड़ों रुपए का नुकसान हो गया। जिस जगह आगजनी हुई थी, उससे 100 फीट की दूरी पर ही दो और छोले भटूरे की दुकानें खुली हुई है। इसके पास में दो से तीन नमकीन दुकानें भी हैं। जहां पर सुबह से रात तक भट्‌टी जलती है। ऐसे में फिर से हादसा होने की संभावना है। लापरवाही पर हो चुकी FIR 8 अक्टूबर को बालाजी छोला भटूरे दुकान में आग लगी थी और इसके बाद पास की अन्य दुकानें भी चपेट में आ गई थीं। इस मामले में टीटी नगर पुलिस ने आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल की शिकायत पर छोला भटूरे की दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के विरुद्ध केस दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि बालाजी छोला-भटूरा दुकान में भट्टी जल रही थी। इसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गईं और देखते ही देखते आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। हादसे में आम्रपाली रेस्टोरेंट, विजय स्टोर, एक कैफे और मोबाइल दुकान को नुकसान हुआ था। घटना के बाद ने पुलिस को शिकायत की थी। थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर ने बताया कि आग लगने की शुरुआत भट्टी के पास रखे कपड़े से हुई थी। अब मामले में दुकान संचालक की लापरवाही को लेकर कार्रवाई की गई है। दूसरी ओर, दुकान में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं? इसकी पड़ताल नगर निगम कर रहा है। अग्नि सुरक्षा के इंतजामों की जांच के बाद इस पहलू पर स्थिति स्पष्ट होगी। चौक बाजार में 22 लाख का सिस्टम, पर हादसे के वक्त काम नहीं करता जानकारी के अनुसार चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की 10 से 12 फीट चौड़ी गलियों में आग बुझाने के लिए निगम ने 22 लाख रुपए का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया था। जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान यह सिस्टम काम नहीं आया। इसकी प्रेशर टेस्टिंग और मेंटेनेंस नहीं होने की बातें सामने आई हैं। शहर के जुमेराती, इब्राहिमपुरा, नदीम रोड, घोड़ा नक्कास समेत 8 प्रमुख बाजारों में भी यही स्थिति है। आग लगने या हादसे के बाद सुरक्षा इंतजाम होते हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं होती। बैरागढ़ में दिखावे का सिस्टम 17 दिसंबर 2017 को संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 100 से ज्यादा कपड़ा दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। इसके बाद होज-रील पाइप, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और फायर वाटर पंप लगाने के निर्देश मिले। सिस्टम लगा, लेकिन देखरेख नहीं हुई। उपकरण जंग खा रहे हैं। मेन कॉरिडोर तक कब्जे हैं। यहां कभी मॉकड्रिल तक नहीं हुई।

BCCI के अगले चीफ सेलेक्टर की दौड़ में नया नाम, पूर्व भारतीय ओपनर ने किया आवेदन

नई दिल्ली  भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने बीसीसीआई की सीनियर सेलेक्शन कमेटी में खाली हुए पद के लिए आवेदन किया है। पूर्व चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर का कार्यकाल खत्म होने के बाद से यह पद खाली पड़ा है। अभी प्रज्ञान ओझा चीफ सेलेक्टर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ओझा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय सेलेक्शन कमेटी ने न्यूजीलैंड दौरे के लिए टी20, वनडे और टेस्ट टीम का चयन किया है। बीसीसीआई ने खाली पड़े पद के लिए आवेदन मांगे थे और समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक जाफर ने इसके लिए आवेदन किया है। जाफर ने पीटीआई से कहा, "हां मैंने आवेदन किया है।" बन सकते हैं चीफ सेलेक्टर अगर अशोक मल्होत्रा, जतिन परांजपे की क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) जाफर को चुनती है तो वह ओझा को चीफ सेलेक्टर के लिए टक्कर नहीं देंगे बल्कि फिर जाफर का इस पद पर काबिज होना तय है। सेलेक्शन कमेटी में सबसे ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी को चीफ सेलेक्टर चुना जाता है। जाफर ने भारत के लिए 31 टेस्ट मैच खेले हैं तो वहीं ओझा ने 24। इस मामले में पूर्व सलामी बल्लेबाज का अनुभव ज्यादा है और चुने जाने पर वह स्वाभाविक तौर पर चीफ सेलेक्टर की जिम्मेदारी निभाएंगे। जाफर के पास फर्स्ट क्लास का अनुभव भी ओझा से ज्यादा है। जाफर ने कुल 260 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं और 19,410 रन बनाए हैं जिनमें 57 शतक और 91 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं, ओझा ने 108 फर्स्ट क्लास मैच ही खेले हैं। पार्थिव पटेल थे रेस में अगरकर के जाने के बाद भारत के पूर्व विकेटकीपर पार्थिव पटेल का नाम नए चीफ सेलेक्टर की रेस में था, लेकिन पार्थिव ने सेलेक्टर पद के लिए आवेदन नहीं किया था। ऐसे में उनका नाम चीफ सेलेक्टर की रेस से बाहर हो गया था। इसके बाद ओझा का चुना जाना तय माना जा रहा था, लेकिन जाफर के आवेदन की खबर सामने आने के बाद चीफ सेलेक्टर पद की रेस में नया नाम शामिल हो गया है।