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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नए लोगो का किया विमोचन

आवास निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी प्रदेश के विकास को देगा नई गति : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नए लोगो का किया विमोचन पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को सक्षम बनाकर प्रदेश के विकास को गति देना हमारी इकोनॉमिक फिलॉसफी : मंत्री ओ पी चौधरी आवास बुक करने वाले लकी ड्रा के विजेताओं को कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित अन्य पुरस्कार का किया वितरण दो वर्षों में 07 हजार से अधिक परिसंपत्तियों का विक्रय कर 1500 करोड़ रुपये का किया राजस्व अर्जित छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना  विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले अंशुल कश्यप को दी 2.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नया रायपुर स्थित सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नवीन लोगो का विमोचन किया। इस अवसर पर वर्ष 2025 के आवास मेले में आवास बुक करने वाले हितग्राहियों को लकी ड्रा के माध्यम से कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित विभिन्न पुरस्कार वितरित किए गए। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना  विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले अंशुल कश्यप को शुभकामनाएं दी और प्रतियोगिता की पुरस्कार राशि ढाई लाख रुपए का चेक सौंपा।                मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार का अपना पक्का घर होने का सपना होता है और राज्य सरकार इस सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पूर्व में केवल गृह निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आर्थिक चुनौतियों से उबरते हुए मंडल ने लगभग 7,388 संपत्तियों का विक्रय कर 1,532 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग, मंडल के अध्यक्ष तथा पूरी टीम को बधाई दी।               मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने सभी संकल्पों और वायदों को तेजी से पूरा किया है। सरकार के गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। आज प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद साढ़े दस लाख से अधिक परिवार के आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 नए आवास तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से 15 हजार अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराए गए हैं तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए भी विशेष आवास योजना संचालित की जा रही है।              मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन हमारे सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 'सेवा सेतु' के माध्यम से 450 से अधिक शासकीय सेवाएं अब मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 भी प्रारंभ की गई है, जहां नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कर समयबद्ध समाधान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग 65 हजार घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के माध्यम से सरकार घर में सोलर संयंत्र लगाने के लिए आकर्षक सब्सिडी भी दे रही है और इन परिवारों लिए आने वाले समय में बिजली पूरी तरह मुफ्त हो जाएगी और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच पाएंगें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के माध्यम से लंबित बिजली बिल के भुगतान का भी बड़ा अवसर दिया है और बिल पर लगने वाले सरचार्ज समेत आकर्षक छूट का प्रावधान किया है। साय ने कहा कि सरकार न केवल जनहितैषी योजनाएं लागू कर रही है बल्कि सुशासन तिहार के माध्यम से उसका फीडबैक लेने लोगों के बीच भी गई। दो महीने लगातार जनता से फीडबैक लेकर व्यवस्थाओं में सुधार का काम किया गया है। उन्होंने इस दौरान शासन की विभिन्न नवाचारी पहल की जानकारी देते हुए सुशासन और पारदर्शी सरकार के संकल्प को दोहराया।             आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विभाग में व्यापक प्रशासनिक सुधार लागू किए गए हैं। गृह निर्माण मंडल को अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में नई पहचान देकर प्रदेश के पूंजीगत व्यय और विकास कार्यों में इसकी भूमिका का विस्तार किया गया है। मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को वित्तीय और मानव संसाधन के माध्यम से सक्षम बनाने का काम किया है ताकि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि अब किसी भी नई आवासीय परियोजना का निर्माण तभी प्रारंभ होगा जब पर्याप्त बुकिंग सुनिश्चित हो जाएगी, जिससे अनावश्यक निर्माण और वित्तीय जोखिम से बचा जा सके। मंत्री चौधरी ने कहा कि सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू कर वर्षों से लंबित संपत्तियों के विक्रय को गति दी तथा वित्तीय अनुशासन स्थापित किया। इसके परिणामस्वरूप मंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब यह अधोसंरचना विकास के नए आयाम स्थापित करने के लिए तैयार है।             मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मंडल ने नई कार्य संस्कृति अपनाई है। गृह निर्माण मंडल का विस्तार कर अधोसंरचना विकास मंडल बनाया जाना प्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने रिकॉर्ड संपत्तियों का विक्रय कर नई उपलब्धियां हासिल की हैं और भविष्य में मांग आधारित, गुणवत्तापूर्ण तथा वित्तीय रूप से व्यवहारिक परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा।            कार्यक्रम में लकी ड्रा के नौ विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। सारंगढ़ की श्रीमती पूजा बरेठ को प्रथम पुरस्कार के रूप में कार प्रदान की गई। इसके अलावा स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित अन्य आकर्षक पुरस्कार भी वितरित किए गए।          इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ,आयुक्त … Read more

Ketan Agrawal Murder Case: CM फडणवीस से मिले मृतक के पिता, फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

मुंबई  महाराष्ट्र के लोनावला ग्रामीण इलाके में केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में उनके पिता विशाल अग्रवाल ने पुणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर बेटे के लिए न्याय की मांग की है. मुख्यमंत्री ने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के साथ-साथ सीनियर एडवोकेट उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की मांग भी तत्काल स्वीकार कर ली।  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ऑफिस से किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया, "लोनावला के ग्रामीण इलाके में केतन अग्रवाल की दुखद हत्या के मामले में केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल ने आज पुणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और अपने बेटे के लिए न्याय की मांग की. हम यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि इस मामले में दोषियों को सबसे कड़ी सज़ा मिले. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें भरोसा दिलाया कि परिवार को न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।  पोस्ट में आगे कहा गया है कि इस मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और उज्ज्वल निकम को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने की उनकी मांग को भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत मान लिया और कानून एवं न्याय विभाग के सचिव को इस बारे में निर्देश जारी किए. सीनियर एडवोकेट उज्ज्वल निकम ने भी इस मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर काम करने के लिए अपनी सहमति दे दी है।  सिया के भाई साहिल को अफेयर के बारे में सब पता था लोहागढ़ किले से रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल मर्डर के मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है. अब इस हाई-प्रोफाइल केस में पुलिस की नजर सिया गोयल के भाई साहिल गोयल पर भी टिक गई है. पुलिस ने साहिल को पूछताछ के लिए तलब किया है. सूत्रों के मुताबिक, उसे अपनी बहन सिया गोयल और चेतन चौधरी के अफेयर की पहले से जानकारी थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि  उसने यह बात परिवार या किसी अन्य व्यक्ति से क्यों नहीं बताई।  पुलिस अधिकारियों का मानना है कि साहिल का बयान इस पूरे घटनाक्रम की कई अहम कड़ियों को जोड़ सकता है. फिलहाल उससे विस्तृत पूछताछ की जा रही है और उसके बयान को केस डायरी का हिस्सा बनाया जा रहा है. जांच टीम यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि परिवार के भीतर सिया की मानसिक स्थिति, उसके रिश्तों और शादी को लेकर क्या चर्चाएं होती थीं।   भाई के बयान से खुल सकती हैं कई परतें सूत्रों के अनुसार, पुलिस के पास ऐसे कुछ इनपुट हैं जिनसे संकेत मिलता है कि साहिल को सिया और चेतन की दोस्ती या संपर्क के बारे में जानकारी थी. हालांकि, अभी तक पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी इन दोनों के संपर्क की जानकारी थी या नहीं. यदि किसी को पहले से जानकारी थी तो उसने इसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया, यह भी जांच का हिस्सा है।  पूछताछ में सामने आई हत्या की कथित पूरी साजिश इस बीच पुलिस जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है. जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने पूछताछ के दौरान हत्या की पूरी योजना का क्रमवार विवरण बताया है. पुलिस के मुताबिक, 18 जून को लोहागढ़ किले पर पहुंचने से पहले दोनों ने पूरी योजना तैयार कर ली थी. तय हुआ था कि सिया एक निश्चित स्थान पर बैठकर पहले से तय इशारा करेगी. जैसे ही संकेत मिलेगा, चेतन पीछे से आकर केतन अग्रवाल को अचानक गहरी खाई में धक्का देगा. अधिकारियों का कहना है कि घटना ठीक उसी योजना के अनुसार हुई. केतन को अंतिम क्षण तक किसी तरह का संदेह नहीं हुआ और इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, उसे खाई में धक्का दे दिया गया।  शुरुआत में दोनों ने बचने की कोशिश की जांच अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में दोनों आरोपी लगातार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे. चेतन चौधरी ने पहले दावा किया कि वह किले पर तो मौजूद था, लेकिन घटना वाले स्थान तक नहीं गया था. उसने यह भी कहा कि उसे नहीं पता कि आखिर वहां क्या हुआ. हालांकि पुलिस को उसके बयान पर भरोसा नहीं हुआ. तकनीकी साक्ष्यों, घटनास्थल से मिले तथ्यों और लगातार पूछताछ के बाद दोनों के बयान बदलने लगे. इसके बाद दोनों ने कथित रूप से अपराध स्वीकार करते हुए पूरी योजना पुलिस के सामने रखी  भागकर शादी नहीं, हत्या का रास्ता क्यों चुना ? पूछताछ के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों से यह सवाल भी किया कि यदि वे एक-दूसरे से प्रेम करते थे तो भागकर शादी क्यों नहीं कर ली. पुलिस के अनुसार, दोनों का जवाब था कि यदि वे घर से भाग जाते तो दोनों परिवारों की सामाजिक बदनामी होती. इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. यह जवाब जांच अधिकारियों के लिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि पुलिस का मानना है कि यदि यह कथन सही है तो हत्या की साजिश पहले से सोची-समझी थी. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि 18 जून की घटना पहली कोशिश नहीं थी. अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले भी आरोपी केतन अग्रवाल को दो बार लोहागढ़ किले पर लेकर गए थे. जांच के मुताबिक, दोनों मौकों पर कथित योजना किसी कारण सफल नहीं हो सकी. इसके बाद तीसरी बार मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया गया. पुलिस इन दावों की पुष्टि के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण कर रही है।  नवंबर में होनी थी शाही शादी केतन अग्रवाल और सिया गोयल की सगाई हो चुकी थी. दोनों की शादी इसी वर्ष नवंबर में राजस्थान के उदयपुर स्थित एक महल में प्रस्तावित थी. दोनों परिवार विवाह की तैयारियों में जुटे थे और कार्यक्रम को लेकर उत्साह था. पुलिस के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि सिया कथित रूप से … Read more

प्रियंका चोपड़ा का खुलासा: “परफेक्शन नहीं, सच्चाई से बनती है सफलता”

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनस ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने लंबे सफर और कामयाबी के राज के बारे में खुलकर बात की है। उनका मानना है कि सफलता के लिए हमेशा हर चीज में एकदम सही होना जरूरी नहीं है, बल्कि अपनी कमियों को स्वीकार करना और इंसान बने रहना ज्यादा जरूरी है परफेक्शन नहीं, दर्शकों से दिल का रिश्ता जरूरी एएनआई की खबर के अनुसार, प्रियंका ने बताया कि करियर की शुरुआत में वह हर चीज को परफेक्ट करने की कोशिश करती थीं। लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि दर्शक आपकी कमियों से और आपकी सच्चाई से जुड़ते हैं। जब आप अपनी गलती मान लेते हैं और यह स्वीकार करते हैं, तब फैंस के साथ दिल का रिश्ता बनता है। 'ना' सुनने पर दोगुनी ताकत से काम करना प्रियंका ने अपनी कामयाबी का एक बड़ा कारण रिजेक्शन का डटकर सामना करना बताया। उन्होंने कहा, 'मैं बहुत महत्वाकांक्षी हूं। अगर मुझे किसी काम के लिए न कहा जाता है, तो मेरा मन उस काम को और भी ज्यादा करने का करता है।' प्रियंका ने हाल ही में आई अपनी फिल्म 'द ब्लफ' की सफलता को लेकर खुलकर बात की। इसमें उन्होंने एक महिला समुद्री डाकू का किरदार निभाया है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में महिलाओं के आगे बढ़ने की एक सीमा तय कर दी जाती है। ऐसे में मौकों का इंतजार करने के बजाय खुद पहल करनी पड़ती है। यही वजह है कि उन्होंने एक्टिंग के साथ-साथ फिल्मों का निर्माण करना भी शुरू किया। दूसरों के लिए मददगार बनना जब प्रियंका ने हॉलीवुड में कदम रखा, तो वह वहां किसी को नहीं जानती थीं। शुरुआत में उन्हें मुख्य भूमिकाएं नहीं मिल रही थीं, क्योंकि स्टूडियोज किसी भारतीय कलाकार को मुख्य रोल में नहीं सोचते थे। इसलिए उन्होंने खुद अपनी फिल्में प्रोड्यूस करना शुरू किया। अब वह अपने प्रोडक्शन हाउस के जरिए नए कलाकारों और क्रिएटर्स को आगे बढ़ने के लिए एक प्लेटफॉर्म देना चाहती हैं। इन फिल्मों में नजर आएंगी प्रियंका प्रियंका तेलुगु फिल्म 'वाराणसी' में नजर आएंगी। इसे करीब 200 भाषाओं में डब किया जाएगा। इसमें प्रियंका के साथ साउथ सुपरस्टार महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन एसएस राजामौली करेंगे। इसके अलावा प्रियंका अभिनेता ऑरलैंडो ब्लूम के साथ फिल्म 'रीसेट' में नजर आएंगी।

UP Politics: ब्रजेश पाठक ने सपा-कांग्रेस से पूछा ‘बाबरी मस्जिद चंदे का हिसाब’, सियासत गरमाई

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राम मंदिर चंदा मामले से जुड़ा विवाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की एक साजिश का हिस्सा है. उन्होंने सवाल किया कि बाबरी मस्जिद के लिए इकट्ठा किए गए चंदे का क्या हुआ, इस पर किसी ने सवाल क्यों नहीं उठाया।  ब्रजेश पाठक ने कहा, 'बाबरी मस्जिद के लिए भी चंदा इकट्ठा किया गया था. कोई नहीं पूछ रहा है कि उस पैसे का क्या हुआ. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति कर रही हैं और मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए सनातन धर्म पर हमला कर रही हैं।  उनके ये बयान अयोध्या पुलिस द्वारा राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले में FIR दर्ज करने के एक दिन बाद आए हैं. यह FIR एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की सिफारिशों के आधार पर दर्ज की गई थी, जिसके बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।  विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों को बचाया जा रहा है।  विपक्ष के इस आरोप पर कि केवल जूनियर कर्मचारियों पर केस दर्ज किया गया है, पाठक ने कहा कि पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी और BJP सरकार भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाती है।  न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ब्रजेश पाठक ने कहा कि पत्रकारों को विपक्षी नेताओं से बाबरी मस्जिद के लिए इकट्ठा किए गए फंड के बारे में सवाल पूछना चाहिए और आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रही हैं।  उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीमावर्ती जिलों में चल रहे अवैध मदरसों को टेरर फंडिंग मिल रही थी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ऐसे संस्थानों की जांच की, अवैध गतिविधियों को बंद कराया और जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा। 

Ayodhya Ram Mandir Donation Row: ‘दूध का दूध, पानी का पानी होगा’, CM योगी ने SIT रिपोर्ट पर दिया बड़ा बयान

देवरिया पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सुर्खियों में है. कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और एसआईटी जांच जारी है. इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि रामभक्तों की अग्निपरीक्षा मत न ली जाए, अगर सबूत है, तो एसआईटो को सबूत दिया जाए. अयोध्या हमारी आस्था का प्रतीक है।  यूपी के देवरिया में जनता को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, "एसआईटी की रिपोर्ट आते ही एक्शन लिया गया. दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा. आरोप लगाने वालों की मंशा ठीक नहीं है।  मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की कामयाबियों का जिक्र करते हुए कहा, "हमें इस बात को ध्यान रखना होगा, जितनी अच्छी कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, विकास उतनी ही तेज गति के साथ आगे बढ़ेगा. विकास के लिए चाहिए कि अच्छी रोड हो, रेल की बेहतरीन व्यवस्था हो, स्किल मेनपॉवर हो और जल संसाधन हो, तो दुनिया की ताकत बनने में देर नहीं लगेगी।  'जो खिलवाड़ करेगा…' सीएम योगी ने कहा, "जनआस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं है. सनातन के साथ जो भी खिलवाड़ करेगा उसका भुक्तभोगी होगा. किसी को छूट नहीं दी जा सकती. ये जो लोग आज आक्षेप कर रहे हैं, उठाने का कुंठित प्रयास कर रहे हैं, इनकी मंशा अच्छी नहीं है. ये वे लोग हैं, जो भगवान राम को नकार चुके थे. भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा कर चुके थे. एक पक्ष उसमें है, जो कहता था कि राम हुए ही नहीं, यानी अयोध्या को भी ये नकारना चाहते थे।  उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या के बारे में हमने कहा था SIT गठित की गई है. SIT की रिपोर्ट आने के साथ ही हमारी कारवाई भी शुरू हो जाएगी और आपने देखा होगा कि SIT की रिपोर्ट आयी, तुरंत कार्रवाई शुरू हो गई. जन आस्था के साथ जो खिलवाड़ करेगा, उसके साथ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई करेंगे।  'बड़ी-बड़ी चट्टानों को पलटने की ताकत… सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे पास सब कुछ मौजूद है, दुनिया के अंदर सबसे युवा ताकत किसी के पास है, तो उत्तर प्रदेश के पास है. हमारी युवा शक्ति प्रतिभावान और ऊर्जावान है. हम बड़ी-बड़ी चट्टानों को पलटने की ताकत रखते हैं और यूपी के विकास के लिए कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का काम करते हैं।  उन्होंने आगे कहा कि हम युवाओं को रोजगार देने का काम कर रहे हैं, हमने 9 लाख नौजवानों को नौकरी दी है. सुरक्षा का बेहतरीन माहौल पैदा करते हुए, जीरो टॉलरेंस नीति लागू की गई है।  'सुरक्षा और विश्वास का वातावरण…' योगी आदित्यनाथ ने कहा, "प्रदेश को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने माफियाग्रस्त बना दिया था. मुझे याद है 2016 में यहीं मदनपुर थाने में कैसे असलहे लूट ले गए थे और एक थाने को आग लगा दी गई थी. आज मुहर्रम है, कहीं किसी का पता नहीं है. कोई अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन नहीं कर सकता है. कोई सड़कों पर गुंडागर्दी नहीं कर सकता है. उत्सवपूर्ण माहौल में कोई उपद्रव नहीं कर सकता है, और अगर करेगा तो सात पीढ़ियों तक भुगतेगा. यह सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बनाया है।  उन्होंने आगे कहा कि देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर में निवेश आ रहे हैं, उद्यम लग रहे हैं. हमारे नौजवानों को नौकरी मिल रही है, रोजगार मिल रहे हैं. युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का लाभ अपने क्षेत्र को दे रहा है। 

विधानसभा चुनाव से पहले यूपी भाजपा में बड़ा फेरबदल, नई कार्यकारिणी में कई नए चेहरे शामिल

 लखनऊ  विधानसभा चुनाव से पहले कील कांटे दुरुस्त करने में जुटी भाजपा ने बड़े बदलावों के साथ प्रदेश इकाई घोषित कर दी है। चुनावी वर्ष को देखते हुए पिछली बार की तुलना में इस बार 64 सदस्यीय बड़ी टीम बनाई गई है। आठ महामंत्री, 19 उपाध्यक्ष, 19 मंत्री, छह क्षेत्रीय अध्यक्ष व छह मोर्चों के अध्यक्ष बनाए गए हैं। कई दिग्गजों सहित आधे पदाधिकारियों को संगठन से मुक्त कर नए चेहरों पर भरोसा किया गया है। जातीय समीकरणों का ध्यान देते हुए पिछड़े और अनुसूचित समाज को विशेष वरीयता दी गई है। छह में चार क्षेत्रीय अध्यक्ष ओबीसी समाज से हैं। महामंत्रियों की संख्या सात से बढ़ाकर आठ की गई है, वहीं 16 की जगह अब 19 उपाध्यक्ष होंगे। कई नए और चौंकाने वाले नाम शामिल किए गए हैं। पूर्व मंत्री सुरेश राणा और नवाब सिंह नागर को भी संगठन में बड़ा दायित्व दिया गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह की जगह नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर उन्हें राजनीतिक पारी शुरू करने का अवसर दिया गया। भाजपा ने इसमें क्षेत्रीय से ज्यादा जातीय संतुलन पर फोकस किया है। जातीय समीकरणों के पैमाने पर देखें तो 27 सामान्य चेहरों में 12 ब्राह्मण, सात क्षत्रिय, चार भूमिहार, दो वैश्य व एक-एक कायस्थ और त्यागी हैं। किस वर्ग को मिला कितना अवसर? समाज में सबसे बड़ा करीब 55 प्रतिशत समूह ओबीसी का माना जाता है, जिनको सबसे ज्यादा 29 पदों पर भागीदारी दी गई है। इसमें सर्वाधिक तीन जाट, दो-दो यादव, कुर्मी, पाल, गुर्जर व लोधी को स्थान दिया गया है। साथ ही एक-एक पद पर कुशवाहा, मौर्य, बिंद, शिवहरे, विश्वकर्मा, निषाद, गिरी, राजभर, सैंथवार, सैनी, चौरसिया, तेली, कलार व लोनिया चौहान को अवसर दिया गया है। अनुसूचित वर्ग में पासी को सबसे ज्यादा तीन पद दिए गए हैं, जबकि कोरी, वाल्मीकि, जाटव व एसटी के रूप में गोंड को भी अवसर दिया गया है। वहीं, 64 में 13 पदों पर महिलाओं को दायित्व दिया गया है, जो पार्टी के संकल्प 33 प्रतिशत की तुलना में कमतर प्रतिनिधित्व है। यूजीसी नियमों से उपजे आक्रोश से लेकर कई अन्य विषयों पर ब्राह्मणों में असंतोष उभरा था, जिसको साधने के लिए प्रदेश इकाई में उन्हें विशेष वरीयता दी गई है। अभिजात मिश्रा को जहां महामंत्री बनाया गया, वहीं बृज बहादुर, अर्चना मिश्रा, शंकर गिरी, अंकुर शर्मा, यतेंद्र शर्मा, रजनी पांडे के अलावा अवध के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में अवधेश द्विवेदी को अवसर दिया गया, वहीं कार्यालय मंत्री व सह मंत्री और अन्य भूमिकाओं में कई ब्राह्मणों को समायोजित किया गया। आठ से तीन महामंत्री अभिजात, उपेंद्र रावत व शंकर लोधी अवध क्षेत्र के हैं, जबकि पश्चिम क्षेत्र से कोई चेहरा महामंत्री नहीं बनाया गया। धार्मिक व राजनीतिक केंद्र के रूप में उभरे ब्रज क्षेत्र से रामप्रताप सिंह व राजेश चौधरी को महामंत्री बनाने के साथ ही सबसे ज्यादा नौ पदाधिकारियों को स्थान दिया गया है। पश्चिम क्षेत्र से दिग्गज क्षत्रिय चेहरा सुरेश राणा को हरियाणा व बंगाल चुनाव में बेहतर जिम्मेदारी निभाने का फायदा मिला और उनकी उपाध्यक्ष पद पर लंबे समय बाद वापसी हुई। दिल्ली आइआइटी से पढ़े लिखे और पश्चिम क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल को युवा जाट नेता के रूप में दोबारा उपाध्यक्ष बनाया गया है। प्रदेश संगठन में लंबे समय तक पदाधिकारी व कई जिलों में चुनावी जमीन बनाने में भूमिका निभाने वाले मेरठ के जाट चेहरे देवेंद्र सिंह को किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा संदेश दिया गया है। सत्यपाल सैनी के रूप में पश्चिम में बड़े जातीय समूह में संदेश देने का प्रयास किया गया है। मथुरा में मांट के विधायक जाट चेहरा राजेश चौधरी को प्रदेश महामंत्री जैसा अहम पद दिया गया है। जाट समाज को गुर्जरों से ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला। पिछली टीम में सुरेंद्र नागर के रूप में गुर्जर चेहरे को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था, जिन्हें बाद में राष्ट्रीय मंत्री बना दिया गया। इस बार महामेधा नागर को मंत्री बनाया गया है। हालांकि, पश्चिम क्षेत्र की कमान नवाब सिंह नागर को देकर पार्टी ने बड़ा दांव चला है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र नीरज सिंह के मिलनसार व्यवहार व उनकी जमीनी पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें उपाध्यक्ष बनाया है। पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के छह माह बाद गठित हुई कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दिसंबर में कार्यभार संभाला। तब से ही नई प्रदेश इकाई बनाने की चर्चा चल पड़ी, लेकिन संगठन छह माह बाद ही बन सका। प्रदेश इकाई में बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल, सुभाष यदुवंश, अनूप गुप्ता, अमरपाल मौर्य, त्रियंबक त्रिपाठी, अंजुला महौर, विजय बहादुर पाठक, संतोष सिंह, कांता कर्दम, डा.चंद्रमोहन, सुनीता दयाल, सलिल विश्नोई, मीना चौबे समेत दर्जनभर नामों को स्थान नहीं मिला। रदेश उपाध्यक्ष के रूप में सुरेश राणा, सत्यपाल सैनी, ब्रज बहादुर, डा.धर्मेंद्र सिंह, मोहित बेनीवाल, देवेश कोरी, प्रियंका रावत, दुर्विजय शाक्य, रमेश सिंह, नीरज सिंह, अर्चना मिश्रा, पूजा पाल, शंकर गिरी, कामेश्वर सिंह, डा.कृतिका अग्रवाल, सुरेश मौर्य, राजेश यादव, कृष्ण बिहारी राय और आलोक गुप्ता को अवसर दिया गया है। मंत्री पद के लिए विजय शिवहरे, बसंत त्यागी, शिवभूषण सिंह, सहजानंद राय, अंकुर शर्मा, अनिल यादव, अवधेश श्रीवास्तव, विजय राजभर, प्रमेन्द्र जांगड़ा, किरण लोधी निषाद, राकेश बिंद मंत्री, संचिता सिंह चौहान (लुनिया), रजनी पांडेय, राहुल वाल्मीकि, महामेधा नागर दीपमाला संतोषी, सुहासिनी जायसवाल, यतेंद्र शर्मा व आकांक्षा सोनकर के नाम पर मुहर लगी है। भारत दीक्षित कार्यालय मंत्री व अतुल अवस्थी व लक्ष्मण सिंह कार्यालय सह-मंत्री होंगे। दिनेश प्रताप सिंह मुख्य प्रवक्ता बनाए गए हैं, जबकि मनीष दीक्षित प्रदेश मीडिया संयोजक बने रहेंगे। हिमांशु राज पंडित को प्रदेश सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है। सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्ष बदले कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल को पिछड़ा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उनकी जगह क्षेत्रीय महामंत्री रहे रामकिशोर साहू को क्षेत्रीय अध्यक्ष की कमान दी गई। ब्रज के क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्गविजय शाक्य को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया, उनकी जगह बरेली के पूर्व जिलाध्यक्ष पूरण लाल लोधी क्षेत्रीय अध्यक्ष होंगे। पश्चिम के क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेंद्र शिशौदिया किसी इकाई में जगह नहीं बना सके। उनकी जगह गुर्जर चेहरा व दो बार प्रदेश सरकार में मंत्री रहे नवाब सिंह नागर क्षेत्रीय अध्यक्ष बने हैं। अवध के क्षेत्रीय अध्यक्ष कमलेश मिश्र प्रदेश इकाई से लेकर … Read more

Mysaa: रश्मिका मंदाना की फिल्म से निधि सिंह का फर्स्ट लुक आया सामने, कैरेक्टर पोस्टर वायरल

मुंबई  पैन-इंडिया स्टार रश्मिका मंदाना की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मैसा' से अभिनेत्री निधि सिंह का नया कैरेक्टर पोस्टर रिलीज किया गया है। मेकर्स ने निधि सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उनका यह पोस्टर रिलीज करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।पोस्टर में निधि सिंह का गुस्से से भरा और निडर अंदाज नजर आ रहा है। पोस्टर साझा करते हुए मेकर्स ने लिखा, "हर आत्मा का जन्म कोमल होने के लिए नहीं होता। कुछ का निर्माण संघर्षों को सहने के लिए किया जाता है। टीम #मैसा की तरफ से बेहद प्रतिभाशाली निधि सिंह को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं। शूटिंग जारी है। इस 2026 में सिनेमाघरों में।" 'मैसा' में रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में उनका अब तक का सबसे अलग और दमदार अवतार देखने को मिलेगा। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों के बीच खासा उत्साह है। अनफॉर्मूला फिल्म्स के बैनर तले निर्मित और रवींद्र पुल्ले के निर्देशन में बन रही 'मैसा' आदिवासी क्षेत्रों की पृष्ठभूमि पर आधारित एक इमोशनल एक्शन थ्रिलर फिल्म है। फिल्म की शूटिंग जारी है और इसके वर्ष 2026 में सिनेमाघरों में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने की संभावना है।

MP Transco की बड़ी राहत: पेंशनर्स और कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य योजना से जुड़ने का फिर मिला मौका

भोपाल मध्यप्रदेश शासन के उपक्रम म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा संचालित अंशदायी कैशलेस स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत अब तक शामिल होने से वंचित रह गए कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों को योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए एक और अवसर प्रदान किया गया है। एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता मानव संसाधन एवं प्रशासन श्री धीरेंद्र सिंह ने बताया कि पात्र कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों से 25 जून से 20 जुलाई 2026 तक पुनः आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से स्वीकार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जो पात्र हितग्राही वर्तमान में योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं और अब इसमें शामिल होना चाहते हैं, उन्हें योजना के प्रारंभ होने की तिथि से अब तक देय सभी अंशदान किस्तों का भुगतान एकमुश्त करना होगा। योजना के अन्य सभी नियम एवं शर्तें यथावत रहेंगी। एमपी ट्रांसको प्रबंधन ने पात्र कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों से निर्धारित अवधि में आवेदन प्रस्तुत कर इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने का आग्रह किया है।  

श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद बैठक, 12 प्रस्तावों पर लगी मुहर

कुरुक्षेत्र  श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में शुक्रवार को कुलपति प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान की अध्यक्षता में अकादमिक परिषद (एकेडमिक काउंसिल) की 10वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में कुलसचिव डा. कृष्ण कांत गुप्ता ने परिषद के समक्ष 12 प्वाइंट रखे, जिन पर विस्तार से चर्चा के बाद बहुमत से पास कर दिए गए। बैठक में पिछली बैठक की कार्रवाई की पुष्टि, एक्शन टेकन रिपोर्ट, गृहिणियों के लिए तीन माह के स्वास्थ्य एवं योग पाठ्यक्रम को अनुमोदन दिया गया। वहीं बेचलर इन नेचुरोपैथी एंड योग एवं डिप्लोमा इन नेचुरोपैथी एंड योग के पाठ्यक्रम तैयार करके उन्हें हरियाणा सरकार के पास भेजकर कालेजों में शुरू करने बारे भी चर्चा हुई। वहीं बीएससी इन योगा को अगले वर्ष आयुर्वेदिक अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान में आरंभ करने का अनुमोदन भी दिया गया। बीएएमएस के नए परीक्षा पैटर्न, डी-फार्मेसी (आयुर्वेद) एवं पंचकर्म सहायक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के संशोधित सिलेबस को शुरू करने बारे अनुमोदन दी गई। बोर्ड आफ होम्योपैथी के डायरेक्टर की डिमांड पर हरियाणा में होम्योपैथिक फार्मेसी डिप्लोमा के पाठ्यक्रम एवं मानकों का मसौदा तैयार किया जाएगा इस प्वाइंट को भी सरकार के पास अनुमति के लिए भेजा जाएगा। विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए एमओयू, विश्वविद्यालय के कुलगीत, संशोधित विजन और मिशन सहित अन्य प्रस्तावों पर विचार-विमर्श कर उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, अनुसंधान एवं प्रशासनिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। बीएससी इन योग जल्द शुरू होगा विश्वविद्यालय में कुलपति प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि विश्वविद्यालय के स्वस्थवृत्त विभाग की ओर से गृहिणियों के लिए तीन माह का स्वास्थ्य एवं योग पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। प्रतिदिन दो घंटे की कक्षाओं के माध्यम से गृहिणियों को आयुर्वेद, संतुलित आहार-विहार, योग एवं स्वस्थ जीवनशैली की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आयुष विभाग, हरियाणा की मांग पर प्राकृतिक चिकित्सा का नया पाठ्यक्रम भी तैयार किया जा रहा है और विश्वविद्यालय में जल्द ही बीएससी इन योग पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया जाएगा।  शिक्षक परिषद के समक्ष रखें सुझाव, आयोग को भेजेंगे : कुलपति कुलपति ने कहा कि बीएएमएस का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआइएसएम) द्वारा निर्धारित किया जाता है, लेकिन यदि शिक्षकों को उसमें किसी प्रकार के सुधार की आवश्यकता महसूस होती है तो वे अपने सुझाव अकादमिक परिषद के समक्ष रखें, ताकि उन्हें संबंधित आयोग तक भेजा जा सके। उन्होंने बताया कि डी-फार्मेसी (आयुर्वेद) के पाठ्यक्रम में भी आवश्यक संशोधन किए गए हैं, जिन्हें स्वीकृति मिलने के बाद लागू किया जाएगा। इसके अलावा बोर्ड आफ होम्योपैथी द्वारा प्रस्तावित होम्योपैथिक फार्मेसी डिप्लोमा के पाठ्यक्रम एवं मानकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई, जिसे अंतिम रूप देकर सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) की भी समीक्षा की गई। कुलपति ने कहा कि इन एमओयू के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव के बेहतर अवसर उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को नई दिशा मिल रही है। परिषद की बैठक में डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर रणधीर सिंह, प्रोफेसर आशीष मेहता, परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर हेतल दावे, हरियाणा के राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्य कुवि के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुखबीर लाल, प्रोफेसर जितेश पंडा, उप कुलसचिव अतुल गोयल, प्रोफेसर सतीश वत्स, प्रोफेसर आशु, प्रोफेसर अमित कटारिया, प्रोफेसर रविराज मौजूद रहे।

एसआईआर प्रक्रिया में फर्जी प्रमाणपत्रों पर कार्रवाई के आदेश, मतदाता सूची सुधार पर जोर

 रांची राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआइआर को लेकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश सभी जिलों के उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एसआइआर की प्रक्रिया में कई प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता मतदाताओं को हो सकती है। पाकुड़ एवं गढ़वा जिले में ऐसे मामलों की सूचना विभिन्न माध्यमों से आई है। इसलिए ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरूद्ध कानून की संगत धाराओं के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भी कहा है कि एसआइआर के दौरान जितने भी दस्तावेज जमा किए जाएंगे, उनका सत्यापन का दायित्व जिला निर्वाचन पदाधिकारी का है। इसलिए एसआइआर के लिए कोई भी नागरिक फर्जी अनधिकृत दस्तावेज न बनवाए और न ही ऐसा प्रयास किसी के द्वारा किया जाए। उन्होंने इसका पूर्णरूप से प्रचार-प्रसार विभिन्न माध्यमों से करने को कहा है। साथ ही ऐसे मामलों में उपायुक्तों को पूर्ण सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने राजनीतिक दलों से की सहयोग की अपील मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने गुरुवार को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर उत्पन्न होनेवाली शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर राजनीतिक दलों द्वारा उठाई गई विभिन्न पृच्छाओं और शंकाओं का समाधान पीपीटी के माध्यम से किया। उन्होंने कहा कि एसआइआर का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआइआर की चरणबद्ध विस्तृत कार्ययोजना और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश को साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण एवं मुद्रण का कार्य 29 जून तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 30 जून से 29 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर भ्रमण कर गणना प्रपत्र भरने का का कार्य किया जाएगा। मतदान केंद्रों का युक्तीकरण 29 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पांच अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन होगा, जिस पर चार सितंबर तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। दावों और आपत्तियों के निष्पादन के बाद सात अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। उनके अनुसार, 30 जून से शुरू होने वाले गणना चरण के दौरान बीएलओ अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर नागरिकों को आंशिक रूप से पहले से भरा हुआ गणना प्रपत्र दो प्रतियों में वितरित करेंगे। यदि कोई घर बंद मिलता है, तो बीएलओ को प्रपत्र इकट्ठा करने के लिए कम से कम तीन बार जाना होगा। इस चरण के शुरुआती दिनों में मतदान केंद्रों पर कोई कैंप नहीं लगेगा, बल्कि यह सेवा पूरी तरह घर-घर जाकर दी जाएगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि मतदाताओं से दस्तावेजों की आवश्यकता को कम करने के लिए ''सेल्फ'' या ''पैरेंटल'' मैपिंग की जा रही है। यदि किसी मतदाता का नाम पिछले एसआइआर रोल में दर्ज है, तो उसे किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और सिविल व सैन्य क्षेत्र के सभी वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान पहले से कर प्राथमिकता के आधार पर उनकी गणना की जाएगी। मैपिंग के दौरान सामने आने वाली 15 प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए बीएलओ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।