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क्रिस्टियानो रोनाल्डो का आखिरी वर्ल्ड कप खत्म, स्पेन ने पुर्तगाल को बाहर का रास्ता दिखाया

नई दिल्ली पुर्तगाल के स्टार स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो का फीफा वर्ल्ड कप जीतने का सपना अधूरा रह गया. स्पेन के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले में पुर्तगाल को 0-1 से दिल तोड़ने वाली हार मिली. इसके साथ ही 41 साल के रोनाल्डो का वर्ल्ड कप सफर हमेशा के लिए खत्म हो गया. मैच के बाद निराश रोनाल्डो ने पुष्टि की कि यह उनके करियर का आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन उन्होंने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं किया है. 7 जुलाई (मंगलवार) को आर्लिंग्टन के डलास स्टेडियम में आयोजित यह मुकाबला बहुत देर तक बराबरी पर था, लेकिन दूसरे हाफ के इंजरी टाइम में सब्स्टीट्यूट मिकेल मेरिनो ने गोल दागकर पुर्तगाल और रोनाल्डो का सपना तोड़ दिया. हार के बाद रोनाल्डो का दर्द साफ दिखाई दिया. उन्होंने स्वीकार किया कि आखिरी वर्ल्ड कप से इस तरह विदाई लेना उनके लिए बेहद दुखद है. क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'इस तरह वर्ल्ड कप से बाहर होने का दुख है. मैंने अपना सबकुछ दिया. मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और मैं साफ अंतरात्मा के साथ यहां से जा रहा हूं. हां, यह मेरा आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन अब मेरे पास सोचने और अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका होगा. मैं जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करूंगा.' भावनाओं में नहीं बहना चाहता: रोनाल्डो स्पेन के खिलाफ हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए भी अपना आखिरी मुकाबला खेल लिया है. रोनाल्डो ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया. उन्होंने साफ किया कि वह हार की निराशा और भावनाओं में बहकर अपने भविष्य पर कोई फैसला नहीं करेंगे. क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'मैं भावनाओं में बहकर कोई फैसला नहीं करता.' उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि भले ही उनका वर्ल्ड कप करियर खत्म हो गया हो, लेकिन वह पुर्तगाल के लिए कुछ समय और खेलते हुए दिखाई दे सकते हैं. रोनाल्डो का मानना था कि पुर्तगाल ने स्पेन के खिलाफ कड़ा मुकाबला खेला और मैच किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था. क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने बताया, 'स्पेन थोड़ा भाग्यशाली रहा. यह ऐसा मुकाबला था, जो किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था.' रोनाल्डो ने अपने करियर में रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए छठी बार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया. उन्होंने इस टूर्नामेंट में तीन गोल भी दागे, लेकिन वह अपनी टीम को खिताब तक नहीं पहुंचा सके. दो दशक के अपने शानदार वर्ल्ड कप करियर में क्रिस्टियानो रोनाल्डो कभी फाइनल तक नहीं पहुंच पाए. हार की निराशा के बावजूद रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए अपने योगदान पर गर्व जताया. उन्होंने याद दिलाया कि उनकी मौजूदगी में पुर्तगाल ने फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी सफलताएं हासिल कीं. क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'मैंने पुर्तगाल के लिए तीन खिताब जीते हैं. क्रिस्टियानो रोनाल्डो से पहले पुर्तगाल ने एक भी खिताब नहीं जीता था. राष्ट्रीय टीम का सबसे बड़ा खिताब हमने 2016 में यूरोपियन चैम्पियनशिप के रूप में जीता था. सच कहूं तो मेरे लिए वह वर्ल्ड कप जितना ही महत्वपूर्ण है.' क्रिस्टियानो रोनाल्डो की कप्तानी में पुर्तगाल ने यूरो 2016 का खिताब जीतकर इतिहास रचा था. इसके बाद टीम ने 2019 और 2025 में यूईएफए नेशन्स लीग की ट्रॉफी भी अपने नाम की. रोनाल्डो ने क्लब और इंटरनेशनल फुटबॉल में लगभग हर बड़ी उपलब्धि हासिल की. पांच बार बैलन डी'ओर जीता, पुर्तगाल को तीन बड़े खिताब दिलाए और अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए. लेकिन वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उनके हाथों में नहीं आ सकी.

इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में रणनीति बदलेगा भारत, तेज गेंदबाज को मौका

नई दिल्ली ओल्ड ट्रैफर्ड में रणनीति उलटी पड़ने के बाद भारतीय टीम अब ट्रेंट ब्रिज में नया दांव खेलने की तैयारी में है. मंगलवार को इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय में कप्तान श्रेयस अय्यर और टीम प्रबंधन परिस्थितियों के अनुरूप अतिरिक्त तेज गेंदबाज के साथ उतर सकते हैं. यदि ऐसा होता है तो इसकी सबसे बड़ी कीमत लेग स्पिनर रवि बिश्नोई को चुकानी पड़ सकती है, जिनकी प्लेइंग इलेवन में जगह खतरे में नजर आ रही है. पहला टी20 बारिश की भेंट चढ़ गया था, जबकि दूसरे मुकाबले में भारत को हार का सामना करना पड़ा. ऐसे में पांच मैचों की सीरीज में बराबरी हासिल करने के लिए तीसरा मुकाबला भारतीय टीम के लिए बेहद अहम है. टीम प्रबंधन अब परिस्थितियों के अनुरूप संयोजन चुनने पर अधिक जोर देता नजर आ रहा है. बिश्नोई के प्रदर्शन ने बढ़ाई मुश्किल मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 में बिश्नोई पूरी तरह लय से बाहर दिखे. उन्होंने तीन बैक-फुट नो-बॉल फेंकी और पारी के 17वें ओवर में 29 रन लुटा दिए. चार ओवरों में बिना विकेट लिए 60 रन खर्च करने वाले बिश्नोई के प्रदर्शन ने टीम प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है. ओल्ड ट्रैफर्ड जैसी परिस्थितियों में अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती के रहते तीसरे विशेषज्ञ स्पिनर की जरूरत नहीं थी. ट्रेंट ब्रिज में तेज गेंदबाजों को मिलने वाली मदद को देखते हुए भारतीय टीम अतिरिक्त पेसर के साथ उतर सकती है. ऐसे में प्रिंस यादव मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. नई गेंद से स्विंग कराने और पिच से अतिरिक्त उछाल हासिल करने की उनकी क्षमता इंग्लैंड की परिस्थितियों में भारत के लिए उपयोगी साबित हो सकती है. हालांकि पिछले मुकाबले में अर्शदीप सिंह ने नई गेंद से दो शुरुआती विकेट समेत तीन सफलताएं हासिल की थीं, लेकिन इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने उनके एक ओवर में 27 रन बटोरकर मैच का रुख बदल दिया. इंग्लैंड ने 191 रनों का लक्ष्य एक ओवर शेष रहते हासिल कर लिया था. बीच के ओवरों में फंस रही बल्लेबाजी गेंदबाजी के साथ-साथ भारतीय बल्लेबाजी को भी अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा. पिछले कुछ महीनों में आईपीएल समेत अधिकतर मुकाबले सपाट विकेटों पर खेलने वाली भारतीय बल्लेबाजी इंग्लैंड की अतिरिक्त उछाल, सीम मूवमेंट और सैम करन की विविधताओं के सामने सहज नहीं दिखी है. कप्तान श्रेयस अय्यर और ईशान किशन ने उपयोगी पारियां जरूर खेली हैं, लेकिन वे अब तक इंग्लैंड के गेंदबाजों पर पूरी तरह हावी नहीं हो सके हैं. तिलक वर्मा ने पिछले मुकाबले में अंतिम ओवरों में तेज रन बनाए, मगर बीच के ओवरों में रन गति बनाए रखना भारत की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. लियाम डॉसन, विल जैक्स और आदिल राशिद ने अपनी धीमी गति और विविधताओं से भारतीय बल्लेबाजों को लगातार बांधे रखा है. भारत ने दूसरे टी20 में 190 रन बनाए, लेकिन यह स्कोर इंग्लैंड की मजबूत बल्लेबाजी के सामने पर्याप्त साबित नहीं हुआ. भारतीय बल्लेबाजों में केवल अभिषेक शर्मा ही अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली में नजर आए. उन्होंने 24 गेंदों पर 43 रन बनाकर शुरुआत तो शानदार दी, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला. अभिषेक और वैभव पर रहेंगी निगाहें ट्रेंट ब्रिज की बल्लेबाजी के अनुकूल पिच पर एक बार फिर अभिषेक शर्मा और युवा वैभव सूर्यवंशी से तेज शुरुआत की उम्मीद होगी. डेब्यू का दबाव पीछे छोड़ चुके वैभव इस बार अधिक बेखौफ अंदाज में बल्लेबाजी करने की कोशिश करेंगे. यदि दोनों सलामी बल्लेबाज पावरप्ले का पूरा फायदा उठाने में सफल रहते हैं तो भारत बड़े स्कोर की नींव रख सकता है. दूसरी ओर, भारतीय स्पिन आक्रमण की अगुआई कर रहे वरुण चक्रवर्ती भी टी20 विश्व कप के बाद वाली धार नहीं दिखा सके हैं. उनकी गेंदों में पहले जैसा छल और गति में बदलाव नजर नहीं आया, जिसका फायदा इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने उठाया. ट्रेंट ब्रिज की पुरानी यादें बदलना चाहेगा भारत भारत ने पिछली बार 2022 में ट्रेंट ब्रिज में टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला था. उस मैच में सूर्यकुमार यादव ने 48 गेंदों पर शानदार शतक जड़ा था, लेकिन उनकी विस्फोटक पारी भी भारत को हार से नहीं बचा सकी थी. इस बार भारतीय टीम उस याद को पीछे छोड़ते हुए सीरीज में बराबरी हासिल करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी.

ट्रंप की एंट्री से गरमाया फुटबॉल विवाद, फीफा के फैसले पर सोशल मीडिया में हंगामा

 नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका के फुटबॉलर फोलारिन बालोगुन विवादों में घिर गए हैं। इसमें संयुक्त राज्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का नाम भी चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि ट्रंप के फोन कॉल की वजह से बालोगुन पर लगे बैन को फीफा ने हटा दिया। दरअसल, अमेरिका का सामना राउंड ऑफ-32 में बोस्निया हर्जेगोविना से था। मैच में बालोगुन ने एक शानदार गोल किया। हालांकि, इस दौरान उनका पैर बोस्निया के डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच के पैर से लग गया था। इसके बाद मैच रेफरी राफेल क्लॉस ने सामान्य फाउल मानने से इनकार कर दिया। वीएआर में स्लो मोशन में देखने के बाद रेफरी ने बालोगुन को रेड कार्ड दिखा दिया और उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। फीफा ने रेड कार्ड को बताया था सही फीफा ने दो दिनों बाद साफ कर दिया कि रेड कार्ड सही है। इसके बाद बालोगुन पर अगले मैच के लिए बैन कर दिया गया। इससे उनका बेल्जियम के खिलाफ मुकाबले से बाहर होना तय माना जा रहा था। हालांकि, रविवार को अचानक फीफा ने अपना फैसला बदल दिया और बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए हरी झंडी दे दी गई। फीफा ने लेकिन रेड कार्ड को पूरी तरह से खत्म नहीं किया। अगर वे आने वाले मैच में इस तरह का फाउल करेंगे, तो बैन को तुरंत लागू कर दिया जाएगा। फीफा ने अचानक कैसे बदल दिया नियम? फीफा के अचानकर फैसला बदलने की वजह से सोशल मीडिया पर इसकी जमकर आलोचना हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि फीफा ने किस नियम के तहत बैन को हटाया है। दरअसल, फीफा ने आर्टिकल 27 का इस्तेमाल कर बालोगुन के बैन को हटाया है। ये आर्टिकल फीफा को अधिकार देता है कि वो किसी खिलाड़ी के बैन को पूरी तरह से खत्म कर सकता है या फिर आंशिक रूप से खत्म कर दे। बालोगुन के लिए इसी नियम का इस्तेमाल किया गया और अगर वे अगले एक सालों कोई इस तरह का फाउल करते हैं, तो उनके ऊपर दोबारा से ये प्रतिबंध लागू कर दिए जाएंगे। डोनल्ड ट्रंप की कैसे हुई एंट्री? प्रतिबंध हटने के बाद ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की एक रिपोर्ट सामने आई। इसमें दावा किया गया कि बालोगुन पर बैन लगने के बाद बुधवार से लेकर रविवार के बीच ट्रंप ने फीफा के अधिकारियों को तीन बार फोन किया। हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बैन हटने के बाद ट्रंप ने फीफा के इस कदम को सही बताया और इसका स्वागत किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी कि फीफा ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव में आकर ऐसा फैसला किया है।  

मेजर लीग क्रिकेट में इतिहास, दासुन शनाका ने चार गेंदों में झटके चार विकेट

 नई दिल्ली श्रीलंका के पेस बॉलिंग ऑलराउंडर दासुन शनाका ने डबल हैट्रिक लेकर इतिहास रच दिया. जब गेंदबाज तीन गेंद में लगातार 3 विकेट लेता है, तो उसे 'हैट्रिक' कहा जाता है. वहीं जब गेंदबाज चार गेंदों में लगातार 4 विकेट लेता है, तो क्रिकेट की भाषा में उसे 'डबल हैट्रिक' कहते हैं. श्रीलंकाई खिलाड़ी ने यह कमाल इन दिनों अमेरिका में खेले जा रहे मेजर लीग क्रिकेट में किया. शनाका सिएटल ओर्कास के लिए खेल रहे हैं. टूर्नामेंट का 21वां मैच सिएटल ओर्कास और टेक्सास सुपर किंग्स के बीच पोमोना के नाइट राइडर्स क्रिकेट फील्ड पर खेला गया. मैच के आखिरी ओवर में शनाका ने डबल हैट्रिक लेकर टीम को हारा हुआ मैच जिता दिया. रन चेज के लिए मैदान पर मौजूद सुपर किंग्स को आखिरी ओवर में जीत के लिए 15 रनों की दरकार थी. क्रीज पर डोनोवन फरेरा और शुभम रंजने मौजूद थे. ओवर लेकर आए दासुन शनाका. सभी को उम्मीद थी कि टेक्सास की टीम आसानी से मैच जीत लेगी. पहली गेंद पर चौका लग गया. दूसरी गेंद पर 1 रन आया. अब अंतिम 4 गेंदों में 10 रन बचे. सुपर किंग्स के लिए जीत लगभग पक्की दिख रही थी. तभी शनाका ने एक बाद एक चारों गेंदों पर विकेट लेकर इतिहास रच दिया. यह मेजर लीग क्रिकेट के इतिहास की पहली डबल हैट्रिक रही. इस तरह चार गेंदों पर लिए 4 विकेट तीसरी गेंद पर शनाका ने सेट बल्लेबाज फरेरा को बोल्ड किया. चौथी गेंद पर कैल्विन सैवेज को कैच आउट के जरिए पवेलियन भेजा. पांचवी गेंद पर एडम मिल्ने को कीपर कैच के जरिए आउट किया. इस तरह उन्होंने हैट्रिक पूरी की. लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई, ओवर की आखिरी गेंद पर श्रीलंकाई गेंदबाज ने अमशी डी सिल्वा को कैच के जरिए आउट करके डबल हैट्रिक पूरी कर ली. इस तरह सिएटल ओर्कास ने हारा हुआ मैच 9 रन से जीत लिया. डबल हैट्रिक लेकर टीम को मैच जिताने वाले शनाका को 'प्लेयर ऑफ द मैच' के खिताब से नवाजा गया.

महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया की जीत, इंग्लैंड को फाइनल में हराया

नई दिल्ली  ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज ऑलराउंडर एलिस पेरी ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतकर इतिहास रच दिया है। वे दुनिया में अब सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफी जीतने के मामले में शीर्ष स्थान पर पहुंच गईं हैं। 5 जुलाई को इंग्लैंड के खिलाफ हुए फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने 151 रन के टारगेट का पीछा करते हुए 7 विकेट और 17 गेंद शेष रहते जीत अपने नाम की। इस जीत के साथ ही एलिस पेरी पुरुष और महिला क्रिकेटरों में सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाली खिलाड़ी बन गईं हैं। एलिस पेरी के नाम 9 आईसीसी ट्रॉफी एलिस पेरी ने क्रिकेट की दुनिया में वो आयाम हासिल किया है जो कोई और क्रिकेटर नहीं कर पाया है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब उनके करियर का 9वां आईसीसी टाइटल है। उन्होंने अपने देश के लिए 7 टी20 वर्ल्ड कप और 2 वनडे विश्व कप जीते हैं। साल 2010, 2012, 2014, 2018, 2020, 2023 और 2026 में उन्होंने 20 ओवर के खेल में चैंपियनशिप पर कब्जा किया। वहीं 2013 और 2022 में वनडे वर्ल्ड कप जीता। महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाली खिलाड़ी एलिस पेरी (9) एलिसी हीली (8) मेग लैनिंग (7) बेथ मूनी (6) मेगन शुट्ट (6) विराट और रोहित ने जीते 4-4 खिताब भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली और रोहित शर्मा अब तक अपने करियर में 4-4 आईसीसी ट्रॉफी जीत चुके हैं। रोहित ने साल 2007 में पहली बार टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पर हाथ लगाया था। वहीं विराट साल 2011 वनडे विश्व कप की टीम का हिस्सा थे। इसके बाद दोनों ने साथ मिलकर साल 2013 और 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्जा किया। टी20 वर्ल़्ड कप 2024 जीतने के बाद दोनों ने साथ ही फॉर्मेट को अलविदा भी कह दिया। पुरुषों में सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाली खिलाड़ी पुरुष क्रिकेट में सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफी जीतने का रिकॉर्ड ऑस्ट्र्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग के नाम है। अपनी कप्तानी में उन्होंने कंगारू टीम को बुलंदियों पर पहुंचाया। पोंटिंग ने अपन देश के लिए 5 खिताब जीते। जिसमें 3 वनडे वर्ल्ड कप और 2 चैंपियंस ट्रॉफी शामिल हैं।  

पत्नी के सपोर्ट से फिर चमका ‘फेडरर को टक्कर देने वाला’ खिलाड़ी

नई दिल्ली  ब्रिटेन के टेनिस खिलाड़ी मार्कस विलिस की कहानी इतनी फिल्मी है कि उस पर यकीन कर पाना भी मुश्किल हो सकता है। वे एक समय पर टेनिस खेलना छोड़ चुके थे लेकिन बाद में पत्नी की जिद की वजह से उन्हें खेल में वापसी करनी पड़ी। वे दिग्गज खिलाड़ी रोजर फेडरर के खिलाफ एक शॉट खेलकर मशहूर हो गए थे लेकिन उसके कुछ ही दिनों बाद ये चमक चली गई। विलिस इस बार विंबलडन में खेलने के लिए लौटे हैं। हालांकि, इस बार उनका अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। पहले जब उन्होंने 2016 में फेडरर का सामना किया था, तो वे सिंगल्स में हिस्सा लिया करते थे। हालांकि, अब वो डबल्स खिलाड़ी के रूप में खेल रहे हैं। उन्होंने एक समय पर डिप्रेशन की वजह से टेनिस खेलना छोड़ दिया था। यहां तक कि वे परिवार का खर्च उठाने के लिए ईंट उठाने का काम करने लगे थे लेकिन पत्नी की वजह से उन्होंने दोबारा खेल में वापसी की। रोजर फेडरर के खिलाफ खेले थे विलिस 10 साल पहले मुकाबला दो अलग-अलग दुनिया के लोगों के बीच था। एक तरफ दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों में शामिल फेडरर थे, तो दूसरी तरफ विलिस, जिन्होंने उस पूरे साल टेनिस से सिर्फ 24 हजार रुपए कमाए थे। वे अनफिट थे, जंक फूड के शौकीन थे और खेल छोड़ने वाले थे, लेकिन उनकी गर्लफ्रेंड ने उन्हें खेलते रहने के लिए मनाया था। फेडरर से मैच के बाद उन्हें कुछ समय तो खूब शोहरत मिली, टीवी पर इंटरव्यू हुए, लेकिन जल्द ही यह जादू खत्म हो गया। डिप्रेशन और चोट की वजह से छोड़ दिया था टेनिस लगातार लगने वाली चोटों और डिप्रेशन के कारण विलिस ने साल 2018 में टेनिस को पूरी तरह अलविदा कह दिया। साल 2020 में कोरोना के दौरान जब पैसों की भारी किल्लत हुई, तो परिवार चलाने के लिए इस खिलाड़ी ने अपने भाई की कंस्ट्रक्शन कंपनी में ईंट बिछाने का काम किया। कुछ समय बाद जब स्थितियां बदलीं, तो परिवार के एक दोस्त ने उनके प्रोफेशनल कमबैक का खर्च उठाने का फैसला किया। विलिस खुद दोबारा खेलने को लेकर दुविधा में थे लेकिन पत्नी जेनी ने उनसे कहा, 'जाओ और खेलो, जिंदगी में ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा।' पत्नी के इसी भरोसे ने उन्हें फिर से कोर्ट पर उतारा। इस बार उन्होंने सिंगल्स के बजाय खुद को डबल्स खिलाड़ी के रूप में ढाला। अब वह दुनिया के 64वें नंबर के डबल्स खिलाड़ी हैं। विलिस ने अपनी जिंदगी के बारे में खुद की बात अब 35 वर्षीय विलिस चार बच्चों के पिता हैं। टेनिस के साथ- साथ वह अपना एक पॉडकास्ट भी चलाते हैं। विलिस ने कहा, 'अब मेरी जिंदगी में ड्रामा कम और गंभीरता ज्यादा है। मैं बस एक बेहतर खिलाड़ी, अच्छा पति और पिता बनने की कोशिश कर रहा हूं।'  

स्पेन मैच से पहले रोनाल्डो ने रिटायरमेंट और फुटबॉल जुनून पर खोले दिल के राज

नई दिल्ली क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा है कि फीफा वर्ल्ड कप-2026 उनका आखिरी वर्ल्ड कप होगा। रोनाल्डो ने ये एलान स्पेन के खिलाफ होने वाले अंतिम-16 के मैच से पहले किया है। रोनाल्डो ने अभी तक एक भी वर्ल्ड कप नहीं जीता है और उनकी कोशिश होगी कि वह इस बार ये कमी पूरी करें। रोनाल्डो ने मौजूदा वर्ल्ड कप को मिलाकर कुछ छह वर्ल्ड कप खेले हैं। उन्होंने 2006, 2010, 2014, 2018, 2022 और 2026 में हिस्सा लिया है। अगला फीफा वर्ल्ड कप 2030 में रोनाल्डो के ही देश पुर्तगाल, स्पेन और मोरक्को की संयुक्त मेजबानी में खेला जाना है। 'बस आखिरी मैच न हो' पुर्तगाल का भविष्य स्पेन के खिलाफ होने वाले मैच पर टिका है। ये इस वर्ल्ड कप के सबसे कड़े मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है। मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोनाल्डो ने कहा, "ये जितना ज्यादा हो सके लुत्फ लेने की बात है। ये मेरा आखिरी वर्ल्ड कप है, लेकिन उम्मीद करिए कि ये मेरा आखिरी मैच न हो। वो दिन आएगा जब मैं रिटायर होऊंगा। लेकिन मैं एक बात ईमानदारी से कहूंगा। कल जो भी हो क्रिस्टियानो रोनाल्डो अपने साफ जमीर के साथ विदा लेगा। वो भी 100 प्रतिशत नहीं बल्कि 1000 प्रतिशत क्योंकि मैंने फुटबॉल को अपना सबकुछ दिया है।" उन्होंने कहा, "मेरे पास अच्छी जिंदगी है, लेकिन ये जुनून की बात है। मैं फुटबॉल इसलिए खेलता हूं क्योंकि मैं इसे प्यार करता हूं। आपको हर दिन का लुत्फ उठाना पड़ता है। मैंने इस वर्ल्ड कप में तीन गोल किए हैं। मैं बुरा नहीं खेल रहा हूं।" याद रखेंगे ये वर्ल्ड कप रोनाल्डो ने कहा है कि वह इस वर्ल्ड कप को हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने कहा, "ये शानदार रहा है। ये मैदान से बाहर की बात है। ये वो वर्ल्ड कप है जिसे मैं सबसे ज्यादा याद रखूंगा। इसके पीछे की वजह लोगों का जुनून है। ये इस बार और ज्यादा देखने को मिला है। मुझे नहीं पता ऐसा क्यों है। ये भावनात्मक तौर पर सबसे अच्छा रहा है।"  

ऑस्ट्रेलिया का दबदबा बरकरार! मेजबान इंग्लैंड को फाइनल में रौंदकर सातवीं बार जीता Women’s T20 World Cup

 लंदन आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में 5 जुलाई (रविवार) को इंग्लैंड का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ. लंदन के लॉर्ड्स में आयोजित इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 7 विकेट से जीत हासिल की. मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 151 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने 17.1 ओवर्स में हासिल कर लिया।  ऑस्ट्रेलियाई टीम ने रिकॉर्ड सातवीं बार विमेंस टी20 वर्ल्ड कप जीता है.यह टीम 2010, 2012, 2014, 2018, 2020, 2023 और 2026 के संस्करण में चैम्पियन बनी. इंग्लैंड (2009), वेस्टइंडीज (2016) और न्यूजीलैंड (2024) ने एक-एक मौके पर टी20 वर्ल्ड कप में खिताबी जीत हासिल की. खास बात यह है कि सोफी मोलिनक्स की अगुवाई वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इस वर्ल्ड कप में एक भी मुकाबला नहीं गंवाया, जो उसके दबदबे का सबूत है।  रनचेज में ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने जॉर्जिया वॉल का विकेट दूसरे ही ओवर में गंवा दिया. इसके बाद फोएबे लिचफील्ड और विकेटकीपर बल्लेबाज बेथ मूनी ने 100 रनों की साझेदारी कर इंग्लिश टीम को पस्त कर दिया.लिचफील्ड ने 35 बॉल का सामना करते हुए 48 रन बनाए, जिसमें 6 चौके और 2 छक्के शामिल रहे. वहीं बेथ मूनी ने 10 चौके की मदद से 49 बॉल पर 64 रनों का योगदान दिया. मूनी के आउट होने के बाद एलिस पेरी (नाबाद 13 रन) और एश्ले गार्डनर (नाबाद 3 रन) को जीत के द्वार तक पहुंचाया. इंग्लैंड की ओर से चार्लोट डीन, सोफी एक्लेस्टोन और लॉरेन बेल ने एक-एक कामयाबी हासिल की।  बड़ा स्कोर नहीं बना सका इंग्लैंड टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए इंग्लैंड ने निर्धारित 20 ओवर्स में 4 विकेट पर 150 रन बनाए. इंग्लिश टीम के लिए कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने 5 चौके की मदद से 53 बॉल पर नाबाद 58 रनों की पारी खेली. वहीं फ्रेया केम्प ने 4 चौके और एक छक्के की सहायता से 28 बॉल पर नाबाद 44 रनों का योगदान दिया। फ्रेया केम्प और नेट साइवर-ब्रंट के बीच पांचवें विकेट के लिए नाबाद 80 रनों की साझेदारी हुई. एमी जोन्स (6 रन), डैनी वायट-हॉज (8 रन) और हीदर नाइट (2 रन) का बल्ला इस मैच में नहीं चला. ऑस्ट्रेलिया की ओर से किम गार्थ, लुसी हैमिल्टन, सोफी मोलिनक्स और एनाबेल सदरलैंड ने एक-एक विकेट झटके।  इंग्लैंड की प्लेइंग इलेवन: एमी जोन्स (विकेटकीपर), डैनी वायट-हॉज, नैट साइवर-ब्रंट (कप्तान), एलिस कैप्सी, हीदर नाइट, फ्रेया केम्प, डेनियल गिब्सन, चार्लोट डीन, लिन्से स्मिथ, सोफी एक्लेस्टोन और लॉरेन बेल. ऑस्ट्रेलिया की प्लेइंग इलेवन: जॉर्जिया वॉल, बेथ मूनी (विकेटकीपर), फोएबे लिचफील्ड, एलिस पेरी, एश्ले गार्डनर, जॉर्जिया वेयरहैम, एनाबेल सदरलैंड, निकोला कैरी, सोफी मोलिनक्स (कप्तान), किम गार्थ और लूसी हैमिल्टन.  

ब्राजील के बाहर होते ही टूटा नेमार का सपना, मैदान पर फूट-फूटकर रोए, फिर पत्नी के साथ भावुक पल हुए वायरल

नई दिल्ली  ब्राजील के दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी नेमार ने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने का एलान किया है। उन्होंने ये फैसला उनकी टीम के फीफा वर्ल्ड कप-2026 से बाहर होने के बाद लिया है। नॉर्वे ने सोमवार को ब्राजील को राउंड-16 के मैच में 2-1 से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। इसी के साथ नेमार ने अपनी राष्ट्रीय टीम से न खेलने का फैसला किया। नेमार इस दौरान काफी भावुक दिखे।  किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि नॉर्वे की टीम ब्राजील को हराकर वर्ल्ड कप से बाहर कर देगी। अपनी टीम की इस हार से नेमार टूट गए और उन्होंने संन्यास लेने का फैसला किया। ब्राजील के लिए इस मैच में एक मात्र गोल किसी ने किया तो वो नेमार ही रहे। उन्होंने पेनल्टी में गोल को तब्दील करते हुए टीम का खाता खोला, लेकिन उनकी टीम एक गोल से फिर भी पीछे रहे गई। 'मैंने बहुत कोशिश की' मैच के बाद नेमार ने कहा कि उन्होंने अपनी टीम को जीत दिलाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। उन्होंने कहा, "मैंने कोशिश की। ये यहीं मेटलाइफ स्टेडियम से शुरू हुआ था और खत्म भी यहीं हो रहा है। अब सब खत्म हो चुका है।" नेमार ने ब्राजील के लिए अपना पहला मैच नौ अगस्त 2010 को अमेरिका के खिलाफ इसी स्टेडियम में खेला था। इस वर्ल्ड कप में पिंडली में चोट के कारण वह ब्राजील के पांच मैचों में से सिर्फ दो में ही खेल सके। नॉर्वे के खिलाफ भी वह काफी समय बेंच पर रहे और फिर मौका मिलने पर पेनल्टी पर गोल किया। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और नेमार ने पत्नी को किस किया. इस भावुक पल ने हार के गम के बीच दोनों के रिश्ते की मजबूती भी दिखाई. इसके बाद नेमार अपनी पत्नी के साथ मैदान से बाहर जाते नजर आए।    दिलचस्प बात यह रही कि नेमार का इंटरनेशनल करियर उसी स्टेडियम में खत्म हुआ, जहां से इसकी शुरुआत हुई थी. उन्होंने 10 अगस्त 2010 को अमेरिका के खिलाफ न्यू जर्सी के इसी स्टेडियम में ब्राजील के लिए डेब्यू किया था. अब 16 साल बाद उसी मैदान पर उन्होंने आखिरी बार ब्राजील की जर्सी पहनी।  मैच के बाद भावुक नेमार ने कहा- यहीं से मेरी शुरुआत हुई थी और यहीं सब खत्म हो गया. मैंने पूरी कोशिश की."उनके ये शब्द करोड़ों ब्राजीलियाई फैन्स के लिए बेहद भावुक पल बन गए।  नेमार को चोटों ने पूरे टूर्नामेंट में किया परेशान नेमार पूरे टूर्नामेंट के दौरान दाहिनी पिंडली (राइट काफ) की चोट से जूझते रहे. इसी वजह से वह ब्राजील के पांच में से सिर्फ दो मुकाबले खेल सके. ग्रुप स्टेज में स्कॉटलैंड के खिलाफ उन्हें सिर्फ 15 मिनट खेलने का मौका मिला था.नॉर्वे के खिलाफ भी नेमार बेंच से मैदान पर उतरे. मैच के इंजरी टाइम में उन्होंने पेनल्टी पर गोल कर ब्राजील की उम्मीदें जगाईं, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. इससे पहले नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर एरलिंग हालैंड दो गोल दागकर ब्राजील को बड़ा झटका दे चुके थे. नेमार का गोल सिर्फ हार का अंतर कम कर सका।  हर वर्ल्ड कप में मिला दर्द नेमार का वर्ल्ड कप करियर शानदार प्रदर्शन और लगातार दिल टूटने वाली कहानियों से भरा रहा. 2014 वर्ल्ड कप में चोट के कारण वह निर्णायक मुकाबलों से बाहर हो गए थे. 2018 में ब्राजील क्वार्टर फाइनल से बाहर हुआ. 2022 में पेनल्टी शूटआउट में हार मिली और अब 2026 में टीम राउंड ऑफ-16 से ही बाहर हो गई।  ब्राजील के सबसे सफल गोल स्कोरर बनकर ली विदाई नेमार ने 16 साल तक ब्राजील की उम्मीदों का बोझ अपने कंधों पर उठाया. वह 129 इंटरनेशनल मैचों में 80 गोल के साथ ब्राजील के इतिहास के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बनकर विदा हुए. उनके जाने के साथ ही ब्राजील की टीम अब नए दौर में प्रवेश कर रही है.टीम के कप्तान  मार्किन्होस ने भी प्रशंसकों से युवा खिलाड़ियों का समर्थन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि नई टीम को खुद को स्थापित करने के लिए समय और धैर्य की जरूरत होगी।  ऐसा रहा करियर नेमार ब्राजील के लिए इंटरनेशनल फुटबॉल में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी के तौर पर रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने अपने देश के लिए कुल 130 इंटरनेशनल मैच खेले जिनमें 59 असिस्ट के साथ 80 गोल किए। अपने 16 साल के करियर में उन्होंने कई बार टीम को मुश्किल समय में जीत दिलाई। उन्होंने ब्राजील के लिए चार वर्ल्ड कप और दो ओलंपिक खेले। 2012 में उन्होंने ब्राजील के साथ ओलंपिक सिल्वर मेडल जीता और 2016 में गोल्ड मेडल नाम किया।  

बेथ मूनी और लिचफील्ड की शानदार साझेदारी, ऑस्ट्रेलिया ने जीता रिकॉर्ड सातवां खिताब

लंदन ऑस्ट्रेलिया ने महिला टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीत लिया है। फाइनल मुकाबले में टीम की भिड़ंत इंग्लैंड से थी। दोनों टीमों अजेय रहते हुए फाइनल तक पहुंची थी। खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट से अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया ने 7वीं बार खिताब अपने नाम किया है। अन्य कोई भी टीम एक बार से ज्यादा खिताब नहीं जीत पाई है। इंग्लैंड को चौथी बार फाइनल में हार मिली है। हर बार उसके सामने ऑस्ट्रेलिया की ही टीम थी। पहले बैटिंग करते हुए फाइनल में इंग्लैंड ने 4 विकेट पर 150 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया ने आसानी से 18वें ओवर में मैच अपने नाम कर लिया। इंग्लैंड ने पावरप्ले में दो विकेट गंवाए ऐतिहासिक लॉर्डस मैदान में खेले जा रहे मुकाबले में टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत खराब रही थी। इंग्लैंड ने अपने दोनों सलामी बल्लेबाजों को सस्ते में गंवा दिया। एमी जोंस 6 और डैनी व्याट 8 रन बनाकर आउट हुईं। 32 रन पर 2 विकेट गंवा चुकी इंग्लैंड को कप्तान नैट सीवर-ब्रंट और एलिस कैप्सी ने संभाला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 35 रन की साझेदारी की। कैप्सी 20 गेंदों पर 23 रन बनाकर आउट हुईं। इसके बाद इंग्लैंड को हेदर नाइट के रूप में चौथा झटका 70 के स्कोर पर लगा। नाइट महज 2 रन बनाकर आउट हो गईं। 70 पर 4 विकेट गंवा चुकी इंग्लैंड को कप्तान ब्रंट और छठे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आईं फ्रेया केम्प ने संभाला। दोनों ने नाबाद 80 रन की साझेदारी कर टीम को 150 तक पहुंचाया। केम्प ने 28 गेंदों पर 1 छक्का और 4 चौकों की मदद से 44 रन बनाकर नाबाद लौटीं। ब्रंट 53 गेंदों पर 5 चौकों की मदद से 58 रन बनाकर नाबाद रहीं। ऑस्ट्रेलिया के लिए किम गार्थ, लूसी हैमिल्टन, कप्तान सोफी मोलिनक्स और एनाबेल सदरलैंड ने 1-1 विकेट लिए। मूनी और लिचफील्ड के बीच शतकीय साझेदारी ऑस्ट्रेलिया को जॉर्जिया वोल के रूप में दूसरे ही ओवर में पहला झटका लग गया। लेकिन इसके बाद बेथ मूनी और फोएबी लिचफील्ड ने दूसरे विकेट के लिए 67 गेंदों पर 100 रनों की साझेदारी कर दी। लिचफील्ड के बल्ले से 35 गेंदों पर 48 रनों की पारी निकली। उन्होंने 6 चौके और दो छक्के मारे। वहीं मूनी ने अपनी फिफ्टी पूरी की। वह महिला टी20 विश्व कप के फाइनल में दो फिफ्टी लगाने वाली पहली क्रिकेटर बन गई हैं। 49 गेंदों पर मूनी 64 रन बनाकर आउट हुई। एलिस पेरी ने 13 और एश्ले गार्डर ने 3 रन बनाकर टीम को जीत दिला दी।