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रणजी ट्रॉफी की अहमियत पर बहस तेज, इंडिया-A के विदेशी दौरों से राज्य टीमों को हो रहा नुकसान?

नई दिल्ली नए सीजन की शुरुआत के साथ यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है. एक तरफ राज्य टीमें मैदान पर उतरकर खिताब की दौड़ में शामिल होने के लिए संघर्ष कर रही हैं, तो दूसरी तरफ इंडिया-ए के कार्यक्रमों के कारण कई प्रमुख खिलाड़ी अपनी घरेलू टीमों के लिए उपलब्ध नहीं हैं. पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर और दिलीप वेंगसरकर ने भी घरेलू क्रिकेट की व्यवस्था और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं. संदेश साफ है- रणजी की अहमियत सिर्फ भाषणों और सलाह तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. इसे बोर्ड के फैसलों में भी दिखना चाहिए. रणजी के बीच इंडिया-ए का दौरा क्यों? रणजी ट्रॉफी का नया सीजन 11 अक्टूबर से शुरू हुआ. इसी दिन इंडिया-ए और ऑस्ट्रेलिया-ए के बीच तीन मैचों की अनऑफिशियल वनडे सीरीज का आखिरी मुकाबला भी खेला गया. इसके कारण रजत पाटीदार, देवदत्त पडिक्कल और ऋतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी अपनी राज्य टीमों के लिए उपलब्ध नहीं थे. पाटीदार मध्य प्रदेश, पडिक्कल कर्नाटक और गायकवाड़ महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. अब इंडिया-ए की टीम 24 अक्टूबर से 7 नवंबर तक न्यूजीलैंड में तीन चार दिवसीय मुकाबले खेलेगी. यह दौरा भी रणजी ट्रॉफी के बीच हो रहा है. यानी घरेलू सीजन के दौरान एक बार फिर कई खिलाड़ी अपनी राज्य टीमों से दूर रहेंगे. सवाल यह है कि जब रणजी का कार्यक्रम पहले से तय है, तो इंडिया-ए के दौरों की तारीखें इस तरह क्यों रखी जाती हैं कि दोनों प्रतियोगिताओं के बीच टकराव पैदा हो? इंडिया-ए के दौरे जरूरी हैं. इनसे खिलाड़ियों को विदेशी परिस्थितियों का अनुभव मिलता है और चयनकर्ताओं को भविष्य के विकल्प तैयार करने का मौका मिलता है. लेकिन क्या इन दौरों का कार्यक्रम रणजी ट्रॉफी से टकराए बिना नहीं बनाया जा सकता? पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने इसी मुद्दे पर आपत्ति जताई है. उनका मानना है कि रणजी के दौरान इंडिया-ए का दौरा आयोजित करने से घरेलू टूर्नामेंट की अहमियत कम होती है. उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि यदि मुख्य टीम को विदेशी परिस्थितियों के अनुकूल ढलने के लिए जल्दी भेजना जरूरी है, तो उसे पहले रवाना किया जा सकता है. ऐसे खिलाड़ियों के लिए अलग दौरा आयोजित करने का क्या औचित्य है, जिनके टेस्ट सीरीज में खेलने की संभावना ही न हो? वेंगसरकर का सवाल घरेलू क्रिकेट की प्राथमिकताओं से जुड़ा है. राज्य टीमों को भी अपने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर मिलना चाहिए. प्रमुख बल्लेबाजों और गेंदबाजों की गैरमौजूदगी से टीमों का संयोजन, तैयारी और मुकाबलों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है. खिलाड़ियों को इंडिया-ए के अवसर जरूर मिलने चाहिए, लेकिन बेहतर योजना बनाकर घरेलू क्रिकेट को कमजोर होने से बचाना भी बोर्ड की जिम्मेदारी है. खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी से कैसे होगा सही मूल्यांकन? रणजी ट्रॉफी उन खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा मंच है, जो लंबे प्रारूप में अपनी काबिलियत साबित कर टीम इंडिया का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं. लेकिन जब प्रमुख खिलाड़ी अपनी राज्य टीमों के लिए उपलब्ध नहीं होते, तो मुकाबलों की परिस्थितियां भी बदल जाती हैं. मजबूत बल्लेबाजी क्रम के खिलाफ गेंदबाजी करना और कमजोर बल्लेबाजी क्रम के खिलाफ विकेट लेना एक जैसा अनुभव नहीं है. इसी तरह मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के सामने रन बनाना किसी बल्लेबाज की तकनीक और धैर्य की अलग परीक्षा लेता है. वेंगसरकर की चिंता है कि यदि प्रमुख घरेलू खिलाड़ी इंडिया-ए के लिए खेलेंगे, तो रणजी में प्रदर्शन करने वाले दूसरे खिलाड़ियों के आकलन पर भी असर पड़ सकता है. यह सिर्फ खिलाड़ियों की उपलब्धता का मामला नहीं, बल्कि उनके प्रदर्शन की अहमियत और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है. बीसीसीआई को समझना होगा कि रणजी में बनाए गए रन और लिए गए विकेट खिलाड़ियों के करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. यहां प्रदर्शन के आधार पर ही उन्हें आगे बढ़ने की उम्मीद होती है. ऐसे में टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धा मजबूत रखना और खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर देना जरूरी है. रणजी के रन टीम इंडिया में सफलता की गारंटी क्यों नहीं? सुनील गावस्कर ने भी घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन के मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने या विकेट लेने वाले कुछ खिलाड़ी भारतीय टीम में पहुंचने के बाद संघर्ष करते हैं. कुछ जल्द टीम से बाहर हो जाते हैं, जबकि कुछ को दोबारा मौका मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. यह सही है कि रणजी में अच्छा प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय सफलता की गारंटी नहीं है. दोनों स्तरों की चुनौतियां अलग हैं. लेकिन सवाल यह भी है कि घरेलू प्रदर्शन का आकलन करते समय खिलाड़ियों को मिले अवसरों, विरोधियों के स्तर और परिस्थितियों को कितनी गंभीरता से देखा जाता है? रणजी ट्रॉफी सिर्फ रन और विकेट का हिसाब नहीं है. यह खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप की तकनीक, धैर्य, दबाव में बल्लेबाजी और लगातार कई दिन अच्छा क्रिकेट खेलने की आदत सिखाती है. टेस्ट क्रिकेट के लिए इन गुणों की खास अहमियत है. ऐसे में अगर इस टूर्नामेंट के कार्यक्रम में ही बार-बार टकराव पैदा होगा, तो मुकाबलों की गुणवत्ता और खिलाड़ियों की तैयारी प्रभावित हो सकती है. ईरानी कप से रणजी तक, कैलेंडर पर सवाल यह समस्या मौजूदा सीजन तक सीमित नहीं दिखती. 2025-26 रणजी ट्रॉफी चैम्पियन जम्मू-कश्मीर और रेस्ट ऑफ इंडिया के बीच ईरानी कप के दौरान भी इंडिया-ए के ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ बहुदिवसीय मुकाबलों के कारण प्रमुख खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठे थे. अब रणजी के शुरुआती दौर का इंडिया-ए की वनडे सीरीज से टकराना और फिर न्यूजीलैंड दौरे का घरेलू सीजन के बीच पड़ना इसी समस्या को फिर सामने लाता है. बीसीसीआई के सामने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, खिलाड़ियों की तैयारी और घरेलू टूर्नामेंट के बीच तालमेल बैठाने की चुनौती जरूर है. हर कार्यक्रम को पूरी तरह अलग रखना हमेशा संभव नहीं होता. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि घरेलू क्रिकेट की जरूरतों को बार-बार पीछे कर दिया जाए. इंडिया-ए के दौरों की तारीखें तय करते समय रणजी के कार्यक्रम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. जहां टकराव टालना संभव न हो, वहां उसके असर को कम करने के विकल्प तलाशे जाने चाहिए. रणजी को सम्मान चाहिए, सिर्फ सलाह नहीं गावस्कर ने घरेलू प्रदर्शन के मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं, जबकि वेंगसरकर ने रणजी के दौरान इंडिया-ए के दौरे आयोजित करने पर … Read more

पृथ्वी शॉ के साथ आकृति अग्रवाल की नई शुरुआत, बोलीं- रिश्ते में तीसरे की जरूरत नहीं

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और एक्ट्रेस-इन्फ्लुएंसर आकृति अग्रवाल ने अपना रिश्ता फिर से जोड़ने का फैसला किया है। इसी साल मार्च में दोनों ने सगाई खी थी। हालांकि, सितंबर में आकृति ने बताया था कि दोनों ने अलग होने का फैसला किया है। उस समय उन्होंने फ्यूचर और परिस्थितियों में अंतर को इसकी वजह बताया था। अब दोनों ने अपना फैसला बदल लिया है। आकृति ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी। पृथ्वी शॉ ने भी इस पोस्ट को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। आकृति अग्रवाल ने मानी अपनी गलती आकृति ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब उन्होंने सगाई तोड़ने का फैसला किया था, तब उन्होंने अपने करीबियों की बातों को अपने रिश्ते पर हावी होने दिया। उन्होंने लिखा, 'जब मैंने हमारी सगाई तोड़ी थी तो मैंने अपने करीबियों की राय को खुद पर हावी होने दिया। जिन्हें लगता था कि वे हमारे रिश्ते को हमसे बेहतर समझते हैं। उसी वजह से मंगेतर और हमारे रिश्ते के प्रति मेरा नजरिया बदल गया। मुझे लगता है कि मुझे भड़काया गया था और मैंने वह फैसला बिना आपस में बात किए ले लिया जिसकी हमें जरूरत थी।' आकृति के मुताबिक दोनों ने अब खुलकर बात की है और एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझा है। उन्होंने लिखा- मैं उस फैसले और उससे पहुंची ठेस की पूरी जिम्मेदारी लेती हूं। इसके बाद हमने आपस में खुलकर बात की है, एक-दूसरे को समझा है और फिर से एक साथ होने का फैसला किया है। एक साथ मिलकर हम एक-दूसरे के लिए काफी हैं और हमें किसी तीसरे इंसान की जरूरत नहीं है। इस बार मैं चाहती हूं कि हमारा भविष्य हमारी अपनी समझ, विश्वास और प्यार से चले। नई शुरुआत करते हुए हमारे इस फैसले का सम्मान करें। रणजी ट्रॉफी में खेल रहे पृथ्वी शॉ 26 साल के पृथ्वी शॉ की कप्तानी में भारत ने अंडर-19 विश्व कप 2018 का खिताब जीता था। उसी साल डेब्यू करते हुए उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ शतक लगा दिया था। पृथ्वी को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जाता था लेकिन चोट और खराब फॉर्म के कारण उनका करियर उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पाया। 2025-26 घरेलू सीजन से पहले पृथ्वी शॉ ने मुंबई छोड़कर महाराष्ट्र का रुख किया था। अभी वह रणजी ट्रॉफी में खेल रहे हैं। रविवार को सर्विसेज के खिलाफ महाराष्ट्र की कप्तानी करते हुए पृथ्वी ने 73 गेंदों पर 70 रन बनाए।

न्यूजीलैंड दौरे से पहले इंडिया A को झटका, पंत की जगह कुशाग्र

नई दिल्ली   ऋषभ पंत न्यूजीलैंड ए के खिलाफ शुरुआती दो मैचों से बाहर हो गए हैं। पंत चोटिल हैं जिस कारण वह भारत ए के लिए पहले दो मैचों में उपलब्ध नहीं रह सकेंगे। बीसीसीआई ने पंत के रिप्लेसमेंट की भी घोषणा की है। भारत के अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत न्यूजीलैंड ए के खिलाफ भारत ए के लिए शुरुआती दो मैचों से बाहर हो गए हैं। पंत चोटिल होने के कारण शुरुआती दो मैच में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने बताया कि पंत के तीसरे मैच में उपलब्ध होने पर बाद में सूचना दी जाएगी। पुरुष चयन समिति ने पंत की जगह दो मैचों के लिए कुमार कुशाग्र को भारत ए टीम में शामिल किया है। बीसीसीआई ने पंत की फिटनेस पर दिया अपडेट बीसीसीआई ने बयान में कहा, ऋषभ पंत की न्यूजीलैंड दौरे के लिए इंडिया ए टीम में उपलब्धता फिटनेस पर निर्भर थी। उन्हें पहले दो मैचों से बाहर कर दिया गया है। विकेटकीपर बल्लेबाज को ईरानी कप में शेष भारत की कप्तानी करते समय लेफ्ट साइड स्ट्रेन आ गया था। वह फिलहाल बीसीसीआई मेडिकल टीम की निगरानी में हैं और तेजी से रिकवर कर रहे हैं। तीसरे मैच में उनके खेलने पर फैसला बाद में लिया जाएगा। सीरीज का कार्यक्रम भारत ए टीम 24 अक्तूबर से 10 नवंबर तक न्यूजीलैंड के दौरे पर तीन मैचों की अनौपचारिक टेस्ट सीरीज खेलेगी। ये मैच लिंकन और क्राइस्टचर्च में खेले जाएंगे। टीम में कई ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं जिन्हें सीनियर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव है, जिसमें केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल, साई सुदर्शन और वाशिंगटन सुंदर शामिल हैं। इन खिलाड़ियों के होने से भारत ए की बल्लेबाजी और गेंदबाजी मजबूत होगी। इन खिलाड़ियों के लिए न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज से पहले तैयारियां पुख्ता करने का अच्छा अवसर होगा। भारत ए टीम की कप्तानी ध्रुव जुरेल करेंगे। वह विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। भारत ए की अपडेटेड टीम: यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, रविचंद्रन स्मरण, ध्रुव जुरेल (कप्तान और विकेटकीपर), वाशिंगटन सुंदर, आकिब नबी, आकाश दीप, अंशुल कंबोज, मानव सुथार, मुकेश चौधरी, साई सुदर्शन, यश राठौड़, मुकेश कुमार, कुमार कुशाग्र (शुरुआती दो मैचों के लिए)।  

रोनाल्डो नेशनल कैंप छोड़कर क्लब से जुड़े, पुर्तगाल फेडरेशन ने शुरू की अनुशासनात्मक जांच

 नई दिल्ली  पुर्तगाली फुटबॉल फेडरेशन ने क्रिस्टियानो रोनाल्डो को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है। कप्तान ने UEFA नेशंस लीग के दौरान इंटरनेशनल विंडो के बीच में ही नेशनल कैंप छोड़ दिया था। फेडरेशन ने एक बयान में कहा, "9 अक्टूबर 2026 को नॉन-प्रोफेशनल सेक्शन के फैसले के बाद क्रिस्टियानो रोनाल्डो डॉस सैंटोस एवेइरो के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। यह कार्रवाई 7 अक्टूबर 2026 को हुई घटनाओं के संभावित अनुशासनात्मक नतीजों की जांच के लिए की गई है।" बयान में कहा, "कार्रवाई शुरू होने की तारीख तक उन पर लागू ऑटोमैटिक प्रोविजनल सस्पेंशन (अपने-आप लागू होने वाला अस्थायी निलंबन) के अलावा अब उन पर एक नॉन-ऑटोमैटिक प्रोविजनल सस्पेंशन भी लगाया गया है। इस मामले में कार्रवाई की तात्कालिकता को ध्यान में रखा गया है।" खबरों के मुताबिक, पांच बार बैलन डी'ओर जीतने वाले खिलाड़ी पुर्तगाल के नेशंस लीग मैचों में वेल्स और नॉर्वे के खिलाफ टीम सिलेक्शन से खुश नहीं थे। हालांकि, रोनाल्डो ने वेल्स के खिलाफ मैच शुरू किया था, लेकिन नॉर्वे के खिलाफ मैच में उन्हें नहीं बुलाया गया। पुर्तगाल ने ये दोनों मैच जोआओ फेलिक्स के गोल की बदौलत जीते। नेशनल टीम के कोच जॉर्ज जीसस के साथ अनबन के बाद रोनाल्डो नेशनल कैंप छोड़कर अपने क्लब अल-नसर से जुड़ गए। फेडरेशन ने कहा, "यह मामला 10 अक्टूबर 2026 को FPF की अनुशासनात्मक जांच समिति को सौंपा गया था। जांच पूरी होने तक इस बारे में कोई भी जानकारी सार्वजनिक करने पर रोक है।" पुर्तगाली फुटबॉल फेडरेशन के अनुशासनात्मक नियमों के आर्टिकल 160 के तहत, बिना किसी वाजिब वजह के नेशनल टीम की ड्यूटी छोड़ने पर एक से छह महीने तक का सस्पेंशन हो सकता है। हालांकि, रोनाल्डो के मामले में अभी तक कोई अंतिम सजा घोषित नहीं की गई है। रोनाल्डो के नाम अपने देश के लिए 234 इंटरनेशनल मैचों में 146 गोल करने का रिकॉर्ड दर्ज है।

भारतीय टेनिस को मिला नया सितारा, माया राजेश्वरन ने 17 साल की उम्र में जीता पहला प्रोफेशनल सिंगल्स खिताब

नई दिल्ली भारतीय महिला टेनिस में इन दिनों एक नई खिलाड़ी तेजी के साथ अपनी पहचान बना रही हैं. हाल ही में 17 वर्षीय माया राजेश्वरन रेवती ने महान टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच दिया है. कोयंबटूर में जन्मी इस युवा खिलाड़ी ने पुर्तगाल में आयोजित आईटीएफ डब्ल्यू 35 लागोस (ITF W35 Lagos) टूर्नामेंट के फाइनल में स्पेन की सीलिया सर्विनो रुइज को सीधे सेटों में 6-4, 6-2 से हराकर अपने करियर का पहला प्रोफेशनल सिंगल्स खिताब जीत लिया. जीत के समय माया की उम्र 17 साल और 3 महीने थी. इसके साथ ही वह डब्ल्यू 35 स्तर पर सिंगल्स खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड सानिया मिर्जा के नाम था. सानिया मिर्जा ने साल 2004 में नाइजीरिया के लागोस में 17 साल और 10 महीने की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी. सिंगल्स के अलावा माया ने यूक्रेन की येलीजावेता कोट्लियार् के साथ मिलकर डबल्स का खिताब भी अपने नाम किया और टूर्नामेंट में डबल धमाका किया. कौन हैं माया राजेश्वरन? माया को 8 साल की उम्र में उनके पिता राजेश्वरन ने टेनिस से जोड़ा था. भारत में शुरुआती कोचिंग और प्रो सर्व टेनिस अकादमी में ट्रेनिंग के बाद उन्होंने कई आईटीएफ जूनियर खिताब जीते और ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. अपने खेल को निखारने के लिए माया ने स्पेन के मल्लोर्का स्थित राफेल नडाल अकादमी में भी प्रशिक्षण लिया है. इसके बाद वह फ्रांस के कांस में एलीट टेनिस सेंटर में शिफ्ट हो गईं. सानिया मिर्जा का रिकॉर्ड तोड़ने के बाद जब माया से उनके इस खास मुकाम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बहुत ही विनम्रता से कहा कि सानिया एक लीजेंड हैं और हमेशा रहेंगी, उनकी बराबरी नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि बचपन से सानिया ही उनकी आदर्श थीं और उन्हीं की वजह से भारत में टेनिस को पहचान मिली.

विराट कोहली ने अचानक क्यों छोड़ा टेस्ट क्रिकेट? वसीम जाफर ने बताई संन्यास की बड़ी वजह

नई दिल्ली टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर विराट कोहली साफ कर चुके हैं कि वह अब टेस्ट क्रिकेट में कभी वापसी नहीं करेंगे। टी20 से वह पहले ही संन्यास ले चुके हैं। सिर्फ वनडे फॉर्मेट खेलने वाले कोहली अगले साल विश्व कप में भारत के लिए आखिरी मैच खेल सकते हैं। विराट अभी भी युवा खिलाड़ियों से ज्यादा फिट हैं। इसके बावजूद उनका टेस्ट क्रिकेट न खेलना भारतीय फैंस को चुभता है। भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान विराट ने अचानक ही टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया था। विराट के इस फैसले से सभी को हैरानी हुई थी। अब वसीम जाफर ने इस बारे में खुलकर बात की है और कई खुलासे किए हैं। विराट ने 12 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया था। अब वसीम जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर खुलासा किया है कि विराट अपने साथ हो रहे बर्ताव से नाराज थे। इसी वजह से विराट और रोहित ने 5 दिन के अंतराल में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। लंबा हो सकता था विराट का करियर वसीम जाफर ने कहा, 'ऐसा लग रहा था कि विराट अपने साथ हुए बर्ताव से थोड़ा नाराज थे। विराट जैसा खिलाड़ी लोगों को मैदान तक खींच लाता है। उनके बहुत बड़े प्रशंसक हैं। वह निश्चित रूप से और अधिक टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे। जब तक हम विराट से खुद नहीं सुनेंगे, तब तक हमें पता नहीं चलेगा। वह इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे।' दिल्ली के कोच और अगरकर के बयान एक-दूसरे के उलट दिल्ली के कोच सरनदीप सिंह ने विराट के संन्यास लेने पर हैरानी जताई थी। विराट जनवरी 2025 में दिल्ली के लिए रणजी खेल रहे थे, क्योंकि बीसीसीआई ने सभी खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना जरूरी कर दिया था। इसी दौरान कोहली ने दिल्ली के कोच से अपना प्लान शेयर किया था। सरनदीप के अनुसार वह इंग्लैंड दौरे पर खेलना चाहते थे और तीन-चार शतक बनाने के सपने देख रहे थे। कोहली ने सीरीज से पहले दो इंडिया ए मैच खेलने पर भी बात की थी। हालांकि, अगरकर का बयान इससे अलग था। उनका कहना था कि विराट ने अप्रैल की शुरुआत में उनसे संपर्क किया और कहा कि वह संन्यास लेना चाहते हैं। 2 महीने में ऐसा क्या हुआ, जिससे विराट का प्लान बदल गया। यह अभी भी राज है।

भारत के खिलाफ हारकर भी वेस्टइंडीज का विश्व रिकॉर्ड, T20I में पूरे किए 2000 छक्के

नई दिल्ली वेस्टइंडीज ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जहां तक कोई दूसरी टीम नहीं पहुंची थी. वेस्टइंडीज ऐसी पहली टीम बन गई, जिसने टी20 इंटरनेशनल में 2 हजार छक्के पूरे किए. रविवार (11 अक्टूबर) को भारत के खिलाफ इंदौर में खेले गए टी20 सीरीज के तीसरे मुकाबले में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने 13 छक्के लगाए और इस ऐतिहासिक आंकड़े को छू लिया. हालांकि, इस उपलब्धि के बावजूद टीम को मुकाबले में 14 रनों से हार का सामना करना पड़ा. इस मैच से पहले वेस्टइंडीज के नाम 1997 छक्के दर्ज थे. ऐसे में 2000 का आंकड़ा टच करने के लिए उसे सिर्फ तीन छक्कों की जरूरत थी. भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ कैरेबियाई बल्लेबाजों ने आक्रामक रुख अपनाया और अपनी टीम को टी20 क्रिकेट के इतिहास में एक खास स्थान दिला दिया. 2000 छक्कों का आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि कैरेबियाई टीम ने छोटे फॉर्मेट में आक्रामक बल्लेबाजी को अपनी ताकत बनाया है. हालांकि, भारत भी इस मामले में ज्यादा पीछे नहीं है और अगले मुकाबले में इस आंकड़े तक पहुंच सकता है. भारतीय टीम ने 1997 छक्के लगाए हैं. न्यूजीलैंड 1585 छक्कों के साथ इस सूची में तीसरे स्थान पर है. इसके बाद पाकिस्तान और साउथ अफ्रीका का नंबर आता है. टी20I में में सर्वाधिक छक्के 2010- वेस्टइंडीज 1997- भारत 1585- न्यूजीलैंड 1500- पाकिस्तान 1407- साउथ अफ्रीका 1406- इंग्लैंड 1400- ऑस्ट्रेलिया मुकाबले में भारत ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 223 रन बनाए. अभिषेक शर्मा ने महज 30 गेंदों पर 69 रन ठोक दिए. उनकी पारी में छह चौके और पांच छक्के शामिल रहे. ईशान किशन ने भी 18 गेंदों पर 37 रन बनाकर भारतीय पारी को रफ्तार दी. दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए 108 रनों की तेज साझेदारी हुई. अभिषेक ने इस पारी के दौरान टी20 इंटरनेशनल में अपने 2000 रन भी पूरे किए. हालांकि, मिडिल ओवर्स में लगातार विकेट गिरने के कारण भारत अपनी मजबूत शुरुआत का पूरा फायदा नहीं उठा सका. 224 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज ने शाई होप के रूप में शुरुआती विकेट गंवाया. इसके बाद शिमरॉन हेटमायर और कामिल पूरन ने पारी को संभालने की कोशिश की. हेटमायर ने 26 गेंदों पर 43 रन बनाए, जबकि पूरन ने 27 गेंदों पर 42 रनों की पारी खेली. दोनों ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए 60 रनों की साझेदारी की. पूरन ने एक ओवर में तीन छक्के लगाकर मुकाबले में रोमांच बढ़ाया. इसके बाद शमर स्प्रिंगर ने सिर्फ 11 गेंदों पर नाबाद 35 रन बनाए, लेकिन बढ़ते जरूरी रनरेट के कारण वेस्टइंडीज लक्ष्य हासिल नहीं कर सका. टीम निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट पर 209 रन ही बना सकी. भारतीय गेंदबाजों ने दबाव के क्षणों में बेहतर नियंत्रण दिखाया. अर्शदीप सिंह ने 44 रन देकर तीन विकेट हासिल किए और उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया. उन्होंने कप्तान शाई होप को जल्दी आउट करने के साथ अंतिम ओवरों में भी अहम विकेट चटकाए. नमन धीर ने दो विकेट लेकर उनका अच्छा साथ दिया. अब सीरीज का चौथा मुकाबला 14 अक्टूबर को हैदराबाद में खेला जाएगा, जबकि सीरीज का आखिरी मैच 17 अक्टूबर को बेंगलुरु में होगा. दोनों मुकाबले भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होंगे

चोट से वापसी कर झेंग क्निवेन बनीं चाइना ओपन चैंपियन, फाइनल में आंद्रिवा को दी मात

बीजिंग  ओलिंपिक चैंपियन चीन की झेंग क्निवेन ने रविवार को फ्रेंच ओपन विजेता मीरा आंद्रिवा को 7-5, 6-4 से हराकर चाइना ओपन टेनिस टूर्नामेंट का खिताब जीत लिया। वह इस टूर्नामेंट का खिताब जीतने वाली पहली चीनी खिलाड़ी बन गईं। इस जीत के साथ झेंग ने घरेलू सरजमीं पर अपना पहला डब्ल्यूटीए 1000 खिताब जीता। वाइल्ड कार्ड से टूर्नामेंट में प्रवेश करने वाली झेंग दाहिने हाथ की कोहनी में चोट के कारण लगभग छह महीने तक कोर्ट से दूर रहने के बाद वापसी कर रही हैं। इस मुकाबले में वह अपने पुराने अंदाज में नजर आईं। उन्होंने दमदार फोरहैंड शाट के दम पर रैलियों में दबदबा बनाया और आंद्रिवा के विरुद्ध कोर्ट के कोणों पर सटीक शाट लगाकर अंक हासिल किए। शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे की सर्विस तोड़ी। इसके बाद दुनिया की पांचवें नंबर की खिलाड़ी आंद्रिवा ने मजबूती दिखाते हुए 5-4 की बढ़त बना ली। झेंग की एक क्रास-कोर्ट शाट कोर्ट से बाहर चली गई, जबकि उनका फोरहैंड नेट में उलझ गया। इससे आंद्रिवा को सर्विस तोड़कर निर्णायक बढ़त हासिल करने का मौका मिला। हालांकि, झेंग ने तीन ब्रेक पाइंट बचाकर स्कोर 5-5 कर दिया। अगले गेम में आंद्रिवा की गलतियों का फायदा उठाते हुए उन्होंने अपनी तेज बैकहैंड से रूसी खिलाड़ी को चकमा दिया और उनकी सर्विस तोड़कर पहला सेट अपने नाम किया। दूसरे सेट में भी मुकाबला कड़ा रहा। स्कोर 4-4 होने पर आंद्रिवा ने तीन ब्रेक पाइंट बचाए, लेकिन झेंग ने लगातार दबाव बनाए रखते हुए उनकी सर्विस तोड़ दी। इसके बाद अगले गेम में सटीक ऐस लगाकर उन्होंने मुकाबला अपने नाम कर लिया।

तीन मैच में संजू सैमसन के 11, 82 और 3 रन, अब वैभव सूर्यवंशी को आजमाने की उठी मांग

नई दिल्ली संजू सैमसन, आखिर कब तक? तीन मैच, दो नाकामियां और एक बड़ी पारी, जिस पर दो-दो जीवनदान का एहसान है. वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा टी20 सीरीज में संजू के बल्ले से 11, 82 और 3 रन निकले हैं. रांची में 82 रन बनाकर उन्होंने जरूर उम्मीद जगाई, लेकिन उस पारी की चमक के पीछे छिपी हकीकत भी देखिए. जब वह 6 रन पर थे, तब उनका कैच छूटा. 42 पर उन्हें दूसरा जीवनदान मिला. यानी संजू की पारी को दो बार विपक्षी टीम ने खुद मौका दिया. सवाल है कि क्या एक बड़ी पारी और दो जीवनदान के सहारे ही भारतीय टीम में उनकी जगह बची रहनी चाहिए? सवाल इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि टीम के पास एक ऐसा किशोर बल्लेबाज मौजूद है, जिसने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनिया का ध्यान खींचा है. नाम है वैभव सूर्यवंशी. लेकिन वैभव को मौका मिले, उससे पहले संजू को लगातार मौके दिए जा रहे हैं. पांच मैचों की सीरीज के तीन मुकाबले बीत चुके हैं. अब सिर्फ दो मैच बाकी हैं. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या टीम मैनेजमेंट अब भी संजू को आजमाता रहेगा या वैभव को मैदान पर उतारने का साहस दिखाएगा? एक पारी के दम पर कब तक बचेगी जगह? संजू की 82 रनों की पारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. लेकिन किसी खिलाड़ी का आकलन सिर्फ उसकी सर्वश्रेष्ठ पारी के आधार पर नहीं होता. टी20 क्रिकेट में असली परीक्षा प्रदर्शन में निरंतरता है. संजू ने पहले मैच में 11 रन बनाए, दूसरे में 82 और तीसरे में सिर्फ 3 रन बनाकर लौट गए. तीन पारियों का यह उतार-चढ़ाव एक बार फिर वही सवाल खड़ा करता है, जो उनके करियर के साथ लंबे समय से जुड़ा रहा है- क्या संजू अपनी प्रतिभा को लगातार प्रदर्शन में बदल सकते हैं? रांची में मिली दो जीवनदान की बात इसलिए अहम है, क्योंकि बड़े स्तर पर बल्लेबाज को हर बार ऐसे मौके नहीं मिलते. अगर कैच पकड़ लिए जाते, तो क्या संजू की पारी 82 रनों तक पहुंचती? इसका जवाब कोई निश्चित तौर पर नहीं दे सकता. लेकिन इतना जरूर है कि उनकी पारी को परखते समय इन मौकों का जिक्र जरूरी है. रन बने, यह अच्छी बात है. मगर उन रनों के पीछे मिले अवसरों को भुलाकर सिर्फ स्कोरकार्ड देखकर फैसला करना भी सही नहीं होगा. वैभव कब तक देखेंगे ड्रेसिंग रूम से तमाशा? दूसरी तरफ वैभव सूर्यवंशी हैं, जिनकी प्रतिभा पर दुनिया तालियां बजा चुकी है, लेकिन भारतीय टीम में उन्हें अपनी बारी का इंतजार है. टीम में चुनकर भी मैदान से दूर रखना, किसी युवा खिलाड़ी के लिए इससे बड़ी विडंबना क्या होगी? वैभव ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से बड़े-बड़े गेंदबाजों के पसीने छुड़ाए हैं, फिर भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को साबित करने का मौका उनके हाथ नहीं आया. अगर टीम मैनेजमेंट ने उन्हें चुना है, तो उनकी काबिलियत पर भरोसा भी जताया होगा. फिर उस भरोसे को आजमाने से परहेज क्यों? आखिर वैभव को मौका देने के लिए और कितनी दस्तक का इंतजार है? वैभव सूर्यवंशी ने छोटी उम्र में ही अपने बल्ले से बड़े-बड़े गेंदबाजों को चुनौती दी है. उनकी बल्लेबाजी में जो बेखौफ अंदाज दिखता है, उसने उन्हें खास पहचान दिलाई है. बेशक, आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव में फर्क है. वैभव को भी टीम इंडिया की जर्सी में उतरकर अपनी काबिलियत साबित करनी होगी. लेकिन सवाल है कि जब उन्हें मैदान पर उतरने का मौका ही नहीं मिलेगा, तो उनकी असली परीक्षा होगी कैसे? प्रतिभा को बेंच पर बैठाकर नहीं, मैदान में उतारकर परखा जाता है. वैभव को मौका दिए बिना उनके बारे में फैसला सुनाना आखिर कितना जायज है? अब सीरीज में दो ही मैच बचे हैं. यही वह समय है, जब टीम मैनेजमेंट को भविष्य को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए. अगर वैभव को मौका देना है, तो अभी क्यों नहीं? क्या हर बार संजू की एक बड़ी पारी का इंतजार किया जाएगा? और अगर संजू लगातार रन नहीं बना पा रहे हैं, तो क्या सिर्फ उनकी पुरानी उपलब्धियों के आधार पर उन्हें आगे भी खिलाते रहना उचित है? औसत 27 से नीचे, फिर भी सवालों से बाहर क्यों? संजू का टी20 अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजी औसत 27 से नीचे आ चुका है. यह आंकड़ा अपने आप में किसी खिलाड़ी की पूरी कहानी नहीं बताता, लेकिन जब खराब पारियों और अच्छी पारी के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे, तो सवाल पूछना जरूरी हो जाता है. भारतीय टीम में जगह किसी की स्थायी जागीर नहीं हो सकती. यहां प्रदर्शन, टीम की जरूरत और भविष्य की योजनाओं को बराबर महत्व मिलना चाहिए. संजू को बाहर करने की मांग का मतलब यह नहीं कि उनमें प्रतिभा नहीं है. उनकी प्रतिभा पर सवाल नहीं है, सवाल उस प्रतिभा से मिलने वाले नतीजों पर है. आखिर कब तक उम्मीद के आधार पर जगह मिलती रहेगी? कब तक एक बड़ी पारी पिछली नाकामियों पर पर्दा डालती रहेगी? और कब तक किसी दूसरे खिलाड़ी को मौका देने का फैसला टलता रहेगा? संजू की जगह या वैभव का भविष्य? अब तस्वीर साफ है. वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के दो मैच बाकी हैं. टीम मैनेजमेंट के सामने विकल्प मौजूद है. वह संजू को एक और मौका देकर उनकी फॉर्म पर भरोसा जता सकता है, या वैभव को उतारकर यह देख सकता है कि युवा बल्लेबाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कर सकता है. लेकिन फैसला सिर्फ एक खिलाड़ी को खिलाने या दूसरे को बाहर बैठाने का नहीं है. यह टीम की सोच का सवाल है. क्या भारत भविष्य के लिए नए विकल्प तैयार करना चाहता है, या पुराने विकल्पों को बार-बार आजमाने में ही उलझा रहेगा? संजू को अपनी जगह बचाने का पूरा अधिकार है, लेकिन वैभव को मौका पाने का हक भी कम नहीं है. संजू की नाकामी अपने आप वैभव की सफलता की गारंटी नहीं बनती, मगर वैभव को मौका न देना उनकी परीक्षा शुरू होने से पहले ही रोक देना है. अब संजू के सामने बल्ले से जवाब देने की चुनौती है और टीम मैनेजमेंट के सामने फैसले की. सीरीज के आखिरी दो मैच बताएंगे कि भारतीय टीम सिर्फ आज का स्कोर देख रही है या कल की टीम भी तैयार कर रही है. … Read more

श्रेयस अय्यर ने गेंदबाजों की तारीफ की, भारत ने वेस्टइंडीज को 14 रन से हराया

 नई दिल्ली भारत ने वेस्टइंडीज को पांच मैचों की टी20 सीरीज के तीसरे मुकाबले में 14 रनों से हराया. इसके साथ ही उसने सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली. रविवार (11 अक्टूबर) को इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने बड़ा स्कोर खड़ा किया, लेकिन जीत की असली कहानी गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन ने लिखी. मैच के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने गेंदबाजों की जमकर तारीफ की और बताया कि टीम दबाव के बावजूद जीत हासिल करने में कैसे कामयाब रही. श्रेयस अय्यर के मुताबिक गेंदबाजों को अपनी रणनीति पर पूरा भरोसा था. उन्होंने स्पष्ट सोच के साथ गेंदबाजी की और मैदान पर अपनी योजनाओं को अच्छी तरह लागू किया. श्रेयस ने कहा कि जब भी उन्होंने गेंद किसी खिलाड़ी को सौंपी, हर गेंदबाज चुनौती का सामना करने के लिए तैयार था. कप्तान के लिए यही सबसे अहम बात थी. मैच के बाद श्रेयस अय्यर ने कहा कि गेंदबाजों के आत्मविश्वास और उनकी रणनीति में स्पष्टता साफ दिखाई दे रही थी. उन्होंने दबाव के क्षणों में भी अपने प्लान पर अमल किया. श्रेयस ने माना कि ऐसे मैदान पर, जहां बड़े स्कोर बनते हैं, विरोधी टीम को रोकना आसान नहीं होता. इसके बावजूद भारतीय गेंदबाजों ने संयम बनाए रखा और टीम को जीत दिलाई. श्रेयस अय्यर ने कहा कि वेस्टइंडीज जैसी टीम को कभी हल्के में नहीं लिया जा सकता. इसलिए भारतीय खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रक्रिया पर टिके रहना, नियमित रणनीति का पालन करना और आक्रामक रवैया बनाए रखना जरूरी था. भारतीय कप्तान ने अभिषेक शर्मा और ईशान किशन की बल्लेबाजी की भी तारीफ की. अभिषेक ने 30 गेंदों पर 69 रनों बनाकर टीम को तेज शुरुआत दिलाई, जबकि ईशान किशन ने सिर्फ 18 गेंदों पर 37 रनों ठोक दिए. दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय पारी को मजबूती दी और बड़े स्कोर की नींव रखी. वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने हार के बाद स्वीकार किया कि उनकी टीम गेंदबाजी में अधिक अनुशासित प्रदर्शन कर सकती थी. उन्होंने कहा कि क्रिकेट में कई बार छोटे-छोटे अंतर नतीजा तय करते हैं. भारतीय बल्लेबाजों की साझेदारी काफी खतरनाक थी, लेकिन विकेट मिलने के बाद वेस्टइंडीज ने मुकाबले में वापसी भी की. हार के बाद शाई होप का छलका दर्द शाई होप ने माना कि उनकी टीम कुछ मौकों पर चौके रोकने में नाकाम रही. उन्होंने यह भी कहा कि वेस्टइंडीज को एक मजबूत ओपनिंग साझेदारी की जरूरत है, ताकि बल्लेबाजी की शुरुआत में ही टीम को बेहतर आधार मिल सके. हालांकि, उन्होंने किसी एक या दो खिलाड़ियों को हार के लिए जिम्मेदार ठहराने से परहेज किया. शाई होप ने इंदौर में ओस के असर का जिक्र करते हुए कहा कि पारी के आखिरी हिस्से में गेंदबाजी करना चुनौतीपूर्ण हो गया था. गेंद की दिशा और स्विंग पर इसका प्रभाव महसूस हुआ. इसके बावजूद उन्होंने भारतीय गेंदबाजों की तारीफ की और कहा कि उन्होंने बेहतरीन यॉर्कर डालकर दबाव में गेंदबाजी करने का उदाहरण पेश किया. भारत ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 223 रन बनाए थे. लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज की टीम सात विकेट पर 209 रन ही बना सकी. फास्ट बॉलर अर्शदीप सिंह ने तीन विकेट लेकर अहम भूमिका निभाई, जबकि नमन धीर ने दो विकेट हासिल किए. अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का चौथा मुकाबला बुधवार (14 अक्टूबर) को हैदराबाद में खेला जाएगा. भारतीय टीम की नजरें इस मुकाबले को जीतकर सीरीज में अजेय बढ़त हासिल करने पर होंगी.