samacharsecretary.com

शरद पवार की तबीयत फिर बिगड़ी, पुणे में दोबारा भर्ती

नई दिल्ली. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के संस्थापक और महाराष्ट्र के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके दिग्गज नेता शरद पवार को रविवार को एक बार फिर पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में भर्ती कराया गया है। पिछले कुछ दिनों से उनकी सेहत में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। उनकी बेटी और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस खबर की पुष्टि की है। ताजा जानकारी के अनुसार, शरद पवार पिछले कुछ दिनों से खांसी और गले के संक्रमण से जूझ रहे थे। शनिवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे अपने आवास पर विश्राम कर रहे थे, लेकिन रविवार सुबह उन्हें अत्यधिक कमजोरी और शरीर में पानी की कमी महसूस हुई। डॉक्टरों की सलाह पर परिवार ने उन्हें तुरंत आगे की जांच और चिकित्सकीय देखरेख के लिए अस्पताल में भर्ती करने का निर्णय लिया। सुप्रिया सुले ने एक्स पर लिखा, "हम बाबा को फॉलो-अप टेस्ट और हाइड्रेशन के लिए पुणे के रूबी हॉल में भर्ती कर रहे हैं। हम सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का आभार व्यक्त करते हैं।" 85 साल के शरद पवार को पिछले हफ्ते भी इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उन्हें सांस लेने में कठिनाई और सीने में संक्रमण की शिकायत थी। डॉक्टरों ने उन्हें एंटीबायोटिक्स का पांच दिनों का कोर्स दिया था और शनिवार को ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। हालांकि, डॉक्टरों ने उन्हें 3-4 दिन पूर्ण विश्राम की सलाह दी थी, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार न होने के कारण उन्हें दोबारा भर्ती करना पड़ा। आपको बता दें कि हाल ही में पवार परिवार पर आए दुखों के पहाड़ ने भी वरिष्ठ नेता के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है। जनवरी के अंत में एक विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और उनके भतीजे अजित पवार के असामयिक निधन के बाद से शरद पवार बारामती में परिवार को संभालने में व्यस्त थे। इस दौरान हुई भागदौड़ और मानसिक तनाव ने उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर डाला है। रूबी हॉल क्लिनिक के डॉक्टरों के अनुसार, शरद पवार की स्थिति फिलहाल स्थिर है। उनके महत्वपूर्ण अंगों की स्थिति सामान्य है, लेकिन उम्र और संक्रमण को देखते हुए उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन ने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अस्पताल में भीड़ न लगाएं ताकि अन्य मरीजों को असुविधा न हो।

असम चुनाव से पहले बीजेपी में आए कांग्रेस के पूर्व चीफ भूपेन बोरा

नई दिल्ली. असम कांग्रेस के पूर्व चीफ भूपेन बोरा ने कई अटकलों के बीच बीजेपी का दामन थाम लिया है। असम बीजेपी चीफ दिलीप सैकिया और बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा की उपस्थिति में उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। एक दिन पहले ही बोरा ने गृह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। बोरा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा और लखीमपुर के विधायक मनाब डेका की मौजूदगी में शाह से मुलाकात की थी। बैठक के बाद बोरा ने पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें शाह से मिलने के लिए कहा था, इसलिए वह उनसे शिष्टाचार भेंट करने आए थे। उन्होंने दावा किया कि आठ मार्च तक आत्मसम्मान और राज्य के प्रति 'राष्ट्रवादी' भावना रखने वाले लगभग 50 प्रतिशत कांग्रेस सदस्य भाजपा में शामिल हो जाएंगे। हालांकि उन्होंने 22 फरवरी को ही बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। बोरा सोमवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि पार्टी आला कमान ने इसे स्वीकार नहीं किया और वरिष्ठ नेता उनके आवास पर मिलने पहुंचे। राहुल गांधी ने भी उनसे फोन पर बात की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बोरा से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था, लेकिन अगले दिन मुख्यमंत्री शर्मा उनके आवास पर पहुंचे और घोषणा की कि बोरा 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे।

कश्मीर के किसानों की मांग: केसर उत्पादन गिरने के बाद सोलर पंप से हो खेती आसान

श्रीनगर कश्मीर में केसर की खेती करने वाले किसान पुलवामा जिले के पंपोर इलाके में सोलर पंप लगाने की मांग कर रहे हैं. यह सोलर पंप नेशनल केसर मिशन के तहत 2008 में लगाए गए खराब स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम को चलाने के लिए है. इससे 3715 हेक्टेयर कृषि भूमि को फिर से उपयोग में लाया जा सकेगा और मसाले की पैदावार बढ़ाई जा सकेगी. नेशनल केसर मिशन के तहत कृषि विभाग ने पंपोर केसर बेल्ट और बडगाम में 2,548.75 हेक्टेयर जमीन पर स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम लगाया, जिसके लिए 400.11 करोड़ रुपये खर्च करके 124 बोरवेल बनाने का प्लान बनाया गया. इस सिस्टम में पानी उठाने वाले पंप को चलाने के लिए डीजल से चलने वाले जनरेटर शामिल थे, जो केसर के खेतों में खोदे गए कुओं से स्प्रिंकलर पाइपों को पानी देते थे ताकि जरूरत पड़ने पर कंद और पौधों की सिंचाई हो सके. कृषि विभाग ने वर्तमान विधानसभा सत्र में माना कि 124 बोरवेल में से 85 किसानों को दिए गए थे, और उनमें से 77 काम नहीं कर रहे हैं, जबकि सिर्फ आठ काम कर रहे हैं – बडगाम और श्रीनगर में चार-चार. विभाग ने माना कि स्प्रिंकलर सिस्टम के अधिक ऑपरेशनल और रखरखाव खर्च ने उन्हें बेकार कर दिया है. पंपोर के चंदहारा गांव के एक युवा और शिक्षित किसान सज्जाद उल अकबर ने कहा कि उनके परिवार के पास 2 हेक्टेयर जमीन है, जिसका प्रोडक्शन 2000 में 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से घटकर इस साल 1.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गया है, और एक किलोग्राम केसर से एक किसान को करीब 2.8 लाख रुपये मिलते हैं. उन्होंने ईटीवी भारत को बताया, "बेमौसम बारिश फसल के कम उत्पादन के मुख्य कारणों में से एक है. स्प्रिंकलर सिस्टम खराब है. हम सरकार से इस सिंचाई सिस्टम को चलाने के लिए सोलर पंप लगाने की अपील कर रहे हैं, जिससे फसल का उत्पादन बढ़ सकता है." चंदहरा के एक और किसान एजाज अहमद गनई भी अकबर की बात से सहमत हैं, जिनके परिवार के पास इस इलाके में 3.5 हेक्टेयर जमीन है. गनई ने ईटीवी भारत को बताया, "हमारा उत्पादन 1996 में 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से घटकर इस साल एक किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गया है. कृषि विभाग का लगाया गया स्प्रिंकलर सिस्टम खराब हो गया है क्योंकि कोई उसे चलाता या रखरखाव नहीं करता. हमने विभाग को जमीन के ग्रुप में सोलर पंप लगाने का सुझाव दिया है. किसान इसका रखरखाव और ऑपरेट करेंगे क्योंकि इसमें जनरेटर जैसे फ्यूल का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता. यह हमारे लिए सस्ता और किफायती होगा." केसर के कंद और पौधों की समय पर सिंचाई की व्यवस्था न होने से, जो मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर है, इसके उत्पादन में गिरावट आई. विधानसभा में पेश किए गए कृषि उत्पादन विभाग के डेटा के अनुसार, 2020-2021 में 17.33 मीट्रिक टन (MT), 2021-2022 में 14.87 एमटी, 2022-2023 में 14.94 एमटी, 2023-2024 में 23.53 एमटी और 2024-2025 में 19.58 एमटी का उत्पादन हुआ. केसर मिशन के तहत, कृषि विभाग ने कहा कि लगभग 2,598 हेक्टेयर जमीन को फिर से तैयार किया गया है, जिससे हाल के वर्षों में उत्पादकता 4.4 किलोग्राम और 6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ी है, जिससे कुल उत्पादन का वित्तीय मूल्य 2020-2021 में 302.35 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-2023 में 564.72 करोड़ रुपये और 2024-2025 में 534.53 करोड़ रुपये हो गया है. हाल के वर्षों में इस मसाले का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 4.02 किलोग्राम (2022) से 5.27 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच रहा है और इस फसल के तहत कुल खेती की जमीन भी 2010 के 5705 हेक्टेयर से घटकर अब 3715 हेक्टेयर रह गई है. पंपोर इलाके के दुस्सू गांव में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कश्मीर सैफरन एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (IIKSTC) के हेड प्रोफेसर एसए डार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, केसर की जमीन का आवासीय क्षेत्र में बदलना, मिट्टी का खनन और समय पर सिंचाई की कमी की वजह से मसालों की पैदावार में कमी आई है. प्रोफेसर डार ने कहा कि देश में केसर की घरेलू मांग 80 एमटी है. उन्होंने कहा, "हमने अफगानिस्तान के रास्ते ईरान से 58 एमटी केसर इंपोर्ट किया. कश्मीर केसर का देश में बहुत बड़ा मार्केट है क्योंकि इसमें क्रोसिन की मात्रा अधिक होती है और इसकी गुणवत्ता अच्छी होती है. कश्मीरी केसर अमेरिका, हांगकांग, सऊदी अरब और यूरोपीय देशों में निर्यात किया जाता है. इसलिए, मांग बहुत अधिक है, हमें क्वालिटी प्रोडक्शन बनाए रखना होगा." उन्होंने कहा कि सिंचाई प्रणाली में जो खामियां केसर मिशन के तहत पूरी तरह से हासिल नहीं हुई हैं, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए. उन्होंने ईटीवी भारत को बताया, "हम कंद की गुणवत्ता में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. हमारा कंद उत्पादन कम है. हमें नर्सरी स्तर पर कंद का उत्पादन बढ़ाना चाहिए. इस उद्देश्य के लिए कृषि विभाग को एक परियोजना प्रस्तुत की गई है." किसान गनई ने भी शिकायत की कि कंद खरीदने के लिए सरकार एक किसान को प्रति कनाल 25000 रुपये देती है, लेकिन एक कनाल की कीमत 1.50 लाख रुपये है. पंपोर के विधायक हसनैन मसूदी ने कहा कि असल उत्पादन अब तक के सबसे निचले स्तर, लगभग 1,000 किलोग्राम पर आ गया है, जिससे किसानों और इस बिजनेस से जुड़े स्थानीय व्यापारियों को लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि केसर मिशन के तहत लगाए गए 124 बोरवेल में से एक भी चालू नहीं था. उन्होंने कहा, "प्रोसेसिंग, GI टैगिंग और मार्केटिंग के लिए स्पाइस पार्क में सिर्फ 10 किलोग्राम केसर लाया गया, जो उप्तादन में बड़ी गिरावट को साफ दिखाता है." उन्होंने केसर को फिर से उगाने के लिए तुरंत और ठोस कदम उठाने की मांग की. पुलवामा जिले के संबूरा गांव के एक और किसान जावेद अहमद ने कहा कि हाल ही में बीज बोने के मौसम में सूखे की वजह से केसर का उत्पादन कम हो रहा है. अहमद ने ईटीवी भारत को बताया, "सूखी मिट्टी की वजह से कंदों में अंकुरण नहीं हो पाता है. सरकार को स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम को चालू करने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी लानी चाहिए, ताकि हम सूखे के दौरान उनका इस्तेमाल कर सकें. अगर सरकार सिंचाई में मदद करती है तो किसान इसमें दिलचस्पी … Read more

भारत का सुरक्षा दायरा मजबूत, इजरायल से खरीदेंगे नया डिफेंस सिस्टम — S-400 के बाद अगला बड़ा कदम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर जाने वाले हैं. 25–26 फरवरी को होने वाले इस इजरायल दौरे से पहले भारत की रक्षा तैयारियों को लेकर बड़ी तस्वीर साफ होती दिख रही है. भारत अब रूसी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 के साथ-साथ इजरायल के अत्याधुनिक मिसाइल और लेज़र आधारित रक्षा सिस्टम को भी अपने सुरक्षा ढांचे में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसका मकसद साफ है देश को लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन और आधुनिक हवाई हमलों से पूरी तरह सुरक्षित करना. भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग पहले से ही काफी मजबूत है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत आने वाले वर्षों में करीब 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. वैसे तो पीएम मोदी की दौरे के दौरान भारत और इजरायल के बीच किसी नई डिफेंस डील पर हस्ताक्षर नहीं होंगे, लेकिन सुरक्षा सहयोग पर एक अहम समझौता (MoU) तय माना जा रहा है. रक्षा सहयोग को लेकर बातचीत लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और अब इसे और गहराई देने की तैयारी है. वैसे तो दोनों पक्ष इस यात्रा को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार, इस दौरे में इजरायल भारत को अपनी सबसे हाईटेक रक्षा तकनीकों तक पहुंच देने पर सहमत हो गया है. इनमें हाई-टेक लेज़र डिफेंस सिस्टम, लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ मिसाइलें और ड्रोन रोधी तकनीक शामिल हैं. यह वही तकनीक है जिसे इजरायल अब तक बेहद सीमित देशों के साथ साझा करता रहा है. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विस्तारित रक्षा सहयोग की नींव पिछले साल नवंबर में रक्षा सचिव आरके सिंह के इजरायल दौरे के दौरान पड़ी थी, जब दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी. मिशन सुदर्शन की रीढ़ भारत इजरायल के साथ मिलकर एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के संयुक्त विकास पर गंभीरता से काम कर रहा है. यह परियोजना मिशन सुदर्शन का अहम हिस्सा है, जिसका मकसद देश के भीतरी इलाकों को दुश्मन की लंबी दूरी की मिसाइलों से बचाना है. इस क्षेत्र में इजरायल को वैश्विक लीडर माना जाता है. उसके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए एरो मिसाइल सिस्टम है, मध्यम दूरी के खतरों के लिए डेविड स्लिंग और रॉकेट या ड्रोन हमलों के लिए आयरन डोम हैं. भारत लंबी दूरी से मार करने वाली मिसाइलों और लोइटरिंग म्यूनिशन की खरीद भी बढ़ा रहा है, जिन्हें हवा, जमीन और समुद्र से दुश्मन की एयर डिफेंस रेंज से बाहर रहकर लॉन्च किया जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने इजरायली तकनीक से लैस हथियारों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के भीतर गहरे तक सटीक हमले किए थे. इस श्रेणी में भारत जिन हथियार प्रणालियों को शामिल करने की तैयारी में है, उनमें Spice-1000 ग्लाइड बम, Rampage एयर-टू-सर्फेस मिसाइल, Air LORA एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल और Ice Breaker लॉन्ग रेंज मिसाइल सिस्टम शामिल हैं. इसके अलावा भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए विस्तारित रेंज वाली Barak सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली भी लेना चाहती है. अभेद्य होगा भारत का सुरक्षा कवच रूस से खरीदे गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम पहले ही भारत को लंबी दूरी की हवाई निगरानी और इंटरसेप्शन क्षमता दे चुके हैं. अब इजरायल की लेज़र और मिसाइल आधारित प्रणालियों के साथ मिलकर भारत की हवाई सुरक्षा एक बहुस्तरीय, मल्टी-डोमेन शील्ड में बदल जाएगी. इसका मतलब यह है कि दुश्मन की मिसाइल, ड्रोन या फाइटर जेट… किसी के लिए भी भारतीय सीमा भेदना बेहद मुश्किल होगा. प्रधानमंत्री मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी रिश्तों और आतंकवाद के खिलाफ समान रुख के चलते दोनों देश रणनीतिक, तकनीकी और रक्षा मोर्चे पर एक ही आवाज में बात कर रहे हैं. रक्षा के अलावा इस दौरे में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वच्छ पेयजल और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी. कुल मिलाकर, रूस के S-400 और इजरायल की अत्याधुनिक मिसाइल व लेज़र रक्षा तकनीक के साथ भारत धीरे-धीरे एक ऐसे सुरक्षा किले में तब्दील होता दिख रहा है, जहां आसमान से आने वाला हर खतरा पहले ही बेअसर कर दिया जाएगा.  

5 साल में सख्त कार्रवाई का ऐलान: अमित शाह बोले- घुसपैठियों की नहीं होगी कोई जगह

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को जोर दिया कि अगर भारत नक्सलियों से मुक्त हो सकता है, तो वह घुसपैठियों से भी मुक्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में अवैध प्रवासियों को न केवल मतदाता सूची से बल्कि देश से भी निकाल दिया जाएगा। शाह असम पुलिस की 10वीं बटालियन के नए परिसर की आधारशिला रखने के बाद एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। बटालियन के बारे में उन्होंने कहा कि इसका निर्माण घुसपैठियों के अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि पर किया जाएगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस नेता ने एक बार कहा था कि घुसपैठियों को बाहर निकाल दिया जाएगा, लेकिन ''कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकती क्योंकि अवैध प्रवासी उसका वोट बैंक हैं।'' उन्होंने कहा, ''अतिक्रमण की गई जमीनों से घुसपैठियों को निकालना ही काफी नहीं है, उन्हें भारत से बाहर भी भेजना होगा।'' शाह ने कहा कि अगले पांच वर्षों में असम पूर्व और पूर्वोत्तर भारत का औद्योगिक केंद्र बन जाएगा। असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए चुनाव मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है।  

मस्जिद के पास बजते संगीत पर बवाल: नेपाल में हिंसा, प्रशासन ने कई क्षेत्रों में लगाया कर्फ्यू

काठमांडू नेपाल के मधेश प्रांत स्थित Rautahat District में प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है। जिला मुख्यालय गौर समेत कई इलाकों में शनिवार दोपहर 1 बजे से अगली सूचना तक आवाजाही और सार्वजनिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। मुख्य जिला अधिकारी दिनेश सागर भुसाल के अनुसार, जिला सुरक्षा समिति के निर्णय के बाद यह कदम उठाया गया। क्या है मामला? दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यह कर्फ्यू लगाया गया।  घटना गुरुवार शाम गौर नगरपालिका के सपगधा इलाके में हुई। आरोप है कि एक समुदाय के लोगों ने मस्जिद के सामने से गुजर रहे शादी जुलूस में बज रहे संगीत का विरोध किया, जिसके बाद तनाव बढ़ गया। शुक्रवार शाम दोनों पक्षों के बीच छह बिंदुओं पर सहमति बनी थी, लेकिन शनिवार सुबह फिर पथराव शुरू हो गया। झड़प के दौरान एक वाहन में आग लगा दी गई। इस बारे में The Kathmandu Post ने भी रिपोर्ट प्रकाशित की है।इस हिंसा में कम से कम आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। हालात को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में दंगा नियंत्रण पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है।  

Middle East में बढ़ा तनाव, अमेरिका ने बोइंग के साथ की मेगा डिफेंस डील, GBU-57 बमों की खरीद

ईरान ईरान के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका ने अपने सबसे ताकतवर गैर-परमाणु बंकर बस्टर बम GBU-57 MOP की दोबारा खरीद का फैसला किया है। अमेरिकी वायुसेना करीब 100 मिलियन डॉलर की सिंगल-सोर्स डील के तहत Boeing से इन बमों की आपूर्ति लेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह बम केवल बोइंग द्वारा निर्मित किया जाता है, इसलिए किसी अन्य कंपनी को ठेका देने से उत्पादन में देरी हो सकती थी। क्या है GBU-57 MOP?     GBU-57 MOP (Massive Ordnance Penetrator) दुनिया के सबसे भारी पारंपरिक बमों में से एक है।     वजन: लगभग 30,000 पाउंड (करीब 13,600 किलोग्राम)     वारहेड: 5,740 पाउंड     क्षमता: 200 फीट गहराई तक मजबूत कंक्रीट को भेदने में सक्षम     इसे विशेष रूप से भूमिगत कमांड सेंटर और परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। ऑपरेशन ‘मिडनाइट हैमर’   रिपोर्ट्स के अनुसार, 22 जून 2025 को अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” नाम से कार्रवाई की थी। इस मिशन में सात B-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षकों का इस्तेमाल किया गया और 14 MOP बम गिराए गए। इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी स्टॉक में कमी आई थी, जिसे अब नई डील के जरिए फिर से भरा जाएगा।   स्टॉक फिर से भरने की तैयारी अमेरिकी वायुसेना के दस्तावेजों के अनुसार, युद्ध में इस्तेमाल हुए बमों की भरपाई आवश्यक है। 2015 तक अमेरिका के पास केवल 20 MOP बम थे। नए बमों की डिलीवरी जनवरी 2028 से शुरू होने की संभावना है। अमेरिका भविष्य में “नेक्स्ट जेनरेशन पेनिट्रेटर (NGP)” विकसित करने पर भी काम कर रहा है, जिसे आधुनिक B-21 रेडर स्टेल्थ बमवर्षकों के साथ उपयोग किया जा सकेगा। फिलहाल MOP की नई खरीद को अस्थायी लेकिन आवश्यक सैन्य कदम माना जा रहा है। ट्रंप की चेतावनी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि परमाणु बातचीत जारी रहनी चाहिए, लेकिन यदि समझौता नहीं होता है तो सैन्य कार्रवाई भी विकल्प हो सकती है। अमेरिका की यह डील स्पष्ट संकेत देती है कि वह अपनी रणनीतिक और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है।  

रूस-यूक्रेन जंग तेज: पुतिन ने एजेंसियों को किया मजबूत, ड्रोन अटैक में 3 लोगों की जान गई

रूस यूक्रेन-रूस युद्ध के ताज़ा घटनाक्रम में एक ओर खार्किव क्षेत्र में रूसी ड्रोन हमले से नागरिकों की मौत की खबर है, तो दूसरी ओर रूस में आंतरिक सुरक्षा कानूनों को और सख्त किया गया है। युद्ध के मैदान से लेकर कूटनीतिक और डिजिटल मोर्चे तक, हालात लगातार जटिल होते जा रहे हैं। यूक्रेन की आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, Kharkiv Oblast में एक नागरिक गोदाम पर रूसी ड्रोन हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। मलबे के नीचे से दो और शव बरामद किए गए। हमले के बाद इमारत में भीषण आग लग गई थी और कई घंटों तक राहत अभियान चलता रहा। हमले के बीच राष्ट्रपति Vladimir Putin ने एक नए कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत Federal Security Service (FSB) को किसी भी व्यक्ति की मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद कराने का अधिकार मिल गया है। यह कानून यूक्रेन के रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों में भी लागू होगा, जिससे डिजिटल नियंत्रण और कड़ा हो गया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelensky ने जिनेवा में हुई शांति वार्ताओं को “हमेशा आसान नहीं” बताया, लेकिन कहा कि सम्मानजनक समाधान की संभावना अब भी है।  उन्होंने Donald Trump की ओर से कथित क्षेत्रीय रियायतों की मांग को “अनुचित” बताते हुए स्पष्ट किया कि यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं करेगा।International Paralympic Committee (IPC) द्वारा रूस और बेलारूस के 10 एथलीटों को विंटर पैरालंपिक्स में भाग लेने की अनुमति दिए जाने के बाद, यूक्रेन ने आधिकारिक स्तर पर कार्यक्रमों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। हालांकि, यूक्रेनी खिलाड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे।    

अजित पवार केस में नया ट्विस्ट, रोहित पवार बोले- सच सामने लाने के लिए चाहिए ये कदम

मुंबई   महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का प्लेन क्रैश हादसे में 28 जनवरी को निधन हुआ था। इस  घटना को घटित हुए तीन हफ्ते से ज्यादा का वक्त हो गया है। रोहित पवार ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरे हादसे को गहरी साजिश करार दिया है। इसी के साथ उन्होंने हादसे से जुड़ी तकनीकी खामियों और विमान संचालक कंपनी पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के इस्तीफे की मांग की है। कंपनी को मिल रहा है सत्ता का संरक्षण रोहित पवार ने आरोप लगाया कि दुर्घटनाग्रस्त Learjet 45 विमान का संचालन करने वाली कंपनी 'VSR वेंचर्स' को सत्ताधारी दलों का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने दावा किया कि इस कंपनी के तार केंद्र और राज्य के प्रभावशाली नेताओं से जुड़े हैं। रोहित पवार ने सीधे तौर पर कहा कि DGCA के कुछ अधिकारी तथ्यों को दबाने और कंपनी को क्लीन चिट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।   हादसे के पीछे के कारण? रोहित पवार ने अपनी निजी जांच का हवाला देते हुए कुछ चौंकाने वाले दावे किए:     पेट्रोल के कैन: उन्होंने आरोप लगाया कि विमान में यात्रियों के सामान वाली जगह पर पेट्रोल के अतिरिक्त कैन रखे गए थे, जिसके कारण आग बेकाबू हुई।      विस्फोट का दावा: रोहित पवार के मुताबिक, क्रैश के समय विमान में एक के बाद एक कई धमाके हुए, जिससे ब्लैक बॉक्स की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं।     मेंटेनेंस में लापरवाही: उन्होंने आरोप लगाया कि विमान की यांत्रिक स्थिति और रख-रखाव में भारी अनदेखी की गई थी। पीएम मोदी और अमित शाह से न्याय की गुहार रोहित पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा, "अजित पवार को न्याय केवल पीएम और गृहमंत्री ही दिला सकते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि वे प्रधानमंत्री को इस संबंध में ईमेल के जरिए पत्र लिखेंगे। इसके अलावा, उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाने का आग्रह किया। 28 जनवरी को हुआ था हादसा गौरतलब है कि 28 जनवरी, 2026 को बारामती एयरस्ट्रिप पर लैंडिंग के दौरान अजित पवार का चार्टर विमान क्रैश हो गया था। इस भीषण हादसे में अजित पवार समेत चालक दल के सदस्य और सुरक्षा अधिकारी—कुल 5 लोगों की जान चली गई थी।

AI की मदद से खुलासा: हैदराबाद ‘बिरयानी कांड’ से जुड़ी 70,000 करोड़ की टैक्स चोरी

हैदराबाद  आयकर विभाग (Income Tax Department) ने रेस्टोरेंट उद्योग में अब तक के सबसे बड़े टैक्स चोरी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। हैदराबाद की तीन मशहूर बिरयानी चेन से शुरू हुई यह जांच अब एक ऐसे राष्ट्रव्यापी घोटाले में बदल गई है, जिसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपये की आय छिपाने का अनुमान है। इस हाई-प्रोफाइल जांच की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि टैक्स चोरी के इस "गड़बड़झाले" को पकड़ने के लिए विभाग को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत फोरेंसिक तकनीक का सहारा लेना पड़ा। सॉफ्टवेयर में छिपा था 'बल्क डिलीट' का खुफिया बटन जांच में खुलासा हुआ है कि देशभर के लगभग 1.7 लाख रेस्टोरेंट एक खास किस्म के बिलिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे। इस सॉफ्टवेयर को विशेष रूप से टैक्स चोरी के लिए डिजाइन किया गया था:     रिकॉर्ड मिटाने की तकनीक: सॉफ्टवेयर में एक गुप्त 'बल्क डिलीट' फीचर था। इसकी मदद से रेस्टोरेंट मालिक एक ही क्लिक में पूरे महीने की बिक्री का डेटा गायब कर देते थे।     बिल हेरफेर: पिछले 6 वर्षों में करीब 19,400 करोड़ रुपये के बिलों में संशोधन किया गया, जबकि 13,000 करोड़ रुपये के बिल पूरी तरह डिलीट कर दिए गए।     बिक्री में गिरावट: अनुमान है कि रेस्टोरेंट्स ने अपनी वास्तविक बिक्री को 27% तक कम करके दिखाया ताकि जीएसटी और आयकर देनदारी से बचा जा सके। पूरा सॉफ्टवेयर का खेल बता दें कि यह सॉफ्टवेयर बाजार के लगभग 10% रेस्तरां बिलिंग सॉफ्टवेयर मार्केट को नियंत्रित करता है. अधिकारियों ने इसकी मदद से 1.77 लाख रेस्टोरेंट की आईडी के ट्रांजेक्शन डेटा को खंगाला. इतने बड़े पैमाने पर डाटा का एनलिसिस करना आसान काम नहीं था. तब एआई टूल्स का इस्तेमाल किया गया. रेस्तरां के जीएसटी (GST) नंबरों को ओपन-सोर्स जानकारी और ऑनलाइन उपलब्ध डाटा से मैप किया गया ताकि चोरी का सटीक पता चल सके. घोटाले का राज्य के हिसाब से ब्यौरा अकेले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ₹5,141 करोड़ की बिक्री छिपाई गई. पूरे भारत में कर चोरी के मामले में शीर्ष 5 राज्य इस प्रकार हैं:     कर्नाटक: सबसे अधिक ₹2,000 करोड़ की बिलिंग डिलीट की गई.     तेलंगाना: ₹1,500 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर.     तमिलनाडु: ₹1,200 करोड़ की हेराफेरी.     महाराष्ट्र और गुजरात में भी भारी मात्रा में चोरी पकड़ी गई. 60 टेराबाइट डेटा और AI का 'कमांडो एक्शन' आयकर अधिकारियों ने इस केस में तकनीक का अभूतपूर्व इस्तेमाल किया है। जांच की भयावहता को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:     विशाल डेटा: अधिकारियों ने लगभग 60 टेराबाइट (TB) डिजिटल डेटा और यूपीआई (UPI) लेनदेन का विश्लेषण किया है।     संदिग्ध पैन और जीएसटी: डेटा माइनिंग के दौरान हजारों ऐसे पैन (PAN) और जीएसटी नंबर मिले हैं जिनका इस्तेमाल फर्जी तरीके से रिकॉर्ड छिपाने के लिए किया गया।     AI की भूमिका: एआई ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और जीएसटी डेटा को आपस में जोड़कर उन विसंगतियों को पकड़ा जिन्हें सामान्य ऑडिट में पहचानना नामुमकिन था। घोटाले का रिपोर्ट कार्ड (2019 से अब तक) विवरण – आंकड़े कुल छिपाई गई आय (अनुमानित) – ₹70,000 करोड़ आंध्र और तेलंगाना का हिस्सा – ₹5,000 करोड़ से अधिक सॉफ्टवेयर से दर्ज कुल बिक्री – ₹2.4 लाख करोड़ डिलीट किए गए बिलों का प्रतिशत – 14% तक जांच के दायरे में रेस्टोरेंट – 1.7 लाख (देशभर में) पैन कार्ड्स के जरिए रची गई साजिश सूत्रों का कहना है कि यह केवल बिल डिलीट करने तक सीमित नहीं था। हजारों फर्जी या अनधिकृत पैन कार्ड्स के जरिए बिक्री को अलग-अलग खातों में बांट दिया जाता था ताकि किसी भी एक इकाई (Entity) का टर्नओवर टैक्स सीमा से अधिक न दिखे। फिलहाल, विभाग की आईटी टीम डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में जुटी है ताकि रिकवरी की सटीक राशि तय की जा सके।