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श्रद्धालुओं की संख्या थमी, वैष्णो देवी यात्रा सुनी—दिल्ली विस्फोट के बाद हालात बिगड़े

कटड़ा बीते माह दिल्ली में हुए धमाके का असर अभी भी मां वैष्णो देवी की यात्रा (Mata Vaishno Devi Yatra) पर लगातार बना हुआ है, क्योंकि मां वैष्णो देवी की यात्रा (Maa Vaishno Devi Yatra) में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि, बीते दिनों मां वैष्णो देवी का यात्रा रोजाना का आंकड़ा 11000 से 15000 के मध्य बना हुआ था परंतु वर्तमान में यह आंकड़ा गिरकर 9000 से 11000 के मध्य पहुंच गया है। जिसके कारण आधार शिविर कटड़ा में लगातार श्रद्धालुओं की कमी देखने को मिल रही है। हालांकि, जो भी श्रद्धालु वर्तमान में मां वैष्णो देवी की यात्रा कर रहे हैं श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। एक ओर जहां श्रद्धालुओं को मां वैष्णो देवी (Mata Vaishno Devi) के दिव्य दर्शन आसानी के साथ हो रहे हैं तो दूसरी ओर यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवा के साथ ही बैटरी कार सेवा, रोपवे केवल कार सेवा के साथ घोड़ा, पिट्ठू तथा पालकी आदि की सेवाएं भी लगातार उपलब्ध हो रही हैं और श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपनी मां वैष्णो देवी की यात्रा लगातार जारी रखे हुए हैं। मां वैष्णो की यात्रा (Maa Vaishno Devi) में लगातार गिरावट के कारण कटड़ा के बाजार पूरी तरह से वर्तमान में वीरान नजर आ रहे हैं और व्यापारी वर्ग लगातार श्रद्धालुओं का इंतजार कर रहा है। वहीं, जानकारों का मानना है कि आगामी दिसंबर माह के दूसरे पखवाड़े में नव वर्ष के आगमन को लेकर मां वैष्णो देवी की यात्रा में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिसका नगर का व्यापारी वर्ग फिलहाल बेसब्री से इंतजार कर रहा है। बीते 26 नवंबर को करीब 9700 श्रद्धालुओं ने मां वैष्णो देवी के चरणों में हाजिरी लगाई थी, तो वहीं 27 नवंबर यानि कि वीरवार देर शाम 6:00 बजे तक करीब 7000 श्रद्धालु पंजीकरण करवा कर भवन की ओर रवाना हो चुके थे और श्रद्धालुओं का लगातार आना जारी है।  

भारत-नेपाल संबंधों में तनाव: नेपाल ने नए नोट पर विवादित नक्शा छापा, बढ़ी कूटनीतिक गर्मी

नेपाल  नेपाल के केंद्रीय बैंक ने बृहस्पतिवार को 100 रुपए के नए नोट जारी किए, जिन पर देश का संशोधित मानचित्र छपा है, जिसमें विवादास्पद कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्र भी शामिल हैं। भारत ने इस कदम को ‘‘कृत्रिम विस्तार'' करार दिया है। नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) के नए नोट पर पूर्व गवर्नर महाप्रसाद अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। बैंक नोट पर जारी करने की तिथि 2081 बीएस अंकित है, जो गत वर्ष 2024 को दर्शाती है। तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान, नेपाल ने मई 2020 में संसद के अनुमोदन के माध्यम से कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्रों को शामिल करते हुए मानचित्र को अद्यतन किया था। मानचित्र के अद्यतन संस्करण के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए, NRB के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह मानचित्र पुराने 100 रुपये के बैंक नोट में पहले से ही मौजूद है और सरकार के निर्णय के अनुसार इसे संशोधित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 रुपये, 50 रुपये, 500 रुपये और 1,000 रुपये जैसे विभिन्न नोटों में से केवल 100 रुपये के बैंक नोट पर ही नेपाल का मानचित्र अंकित है। भारत का कहना है कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा उसके क्षेत्र हैं। नेपाल पांच भारतीय राज्यों – सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ 1850 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करता है। भाषा शफीक पवनेश भारत की कड़ी प्रतिक्रिया  MEA (विदेश मंत्रालय) ने कहा है कि नेपाल द्वारा 100 रुपये के नोट पर विवादित क्षेत्रों  Kalapani, Lipulekh और Limpiyadhura  को अपना बताने वाला नया नक्शा छापना “एकतरफा” (unilateral) कदम है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि ऐसा नक्शा मात्र नोट पर होने से “पृथ्वी पर वास्तविक स्थिति (ground reality)” नहीं बदल जाएगी। भारत ने इसे “कृत्रिम विस्तार (artificial enlargement)” और “असमर्थनीय (untenable)” ज़मीन दावे कहा है।  भारत ने नेपाल को चेतावनी दी है कि सीमा विवाद को लेकर कोई भी कदम  विशेष रूप से नक्शों या मुद्रा में  बिना आपसी समझौते के नहीं होगा।  सीमावर्ती राज्यों विशेषकर Uttarakhand के व्यापारियों का भी कहना है कि वे विवादित नक्शे वाले नोट स्वीकार नहीं करेंगे। भारत की स्थिति स्पष्ट है  कि नेपाल द्वारा नोट में विवादित क्षेत्र दिखाना स्वीकार्य नहीं। यह कदम किसी भी तरह से सीमा विवाद या नियंत्रण‑दावे को बदलने वाला नहीं। भारत अपनी सीमाओं और संप्रभुता के प्रति पूरी तरह सतर्क है और नेपाल से “संवाद और कूटनीति” के जरिए विवाद हल करने की मांग करता है।  

साइक्लोन डिटवाह की दस्तक! तटीय राज्यों में तेज़ हवाओं-बारिश का अलर्ट जारी

कोलकाता  बंगाल की खाड़ी में बने साइक्लोन ‘डिटवाह’ (Cyclone Ditwah) के 30 नवंबर तक तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों तक पहुँचने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव वाला क्षेत्र तेज होकर साइक्लोनिक तूफान (Weather Update) में बदल गया है। IMD ने बताया कि यह सिस्टम उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा और तटीय इलाकों को प्रभावित करेगा। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, साइक्लोन सेन्यार निकोबार द्वीप समूह के सबसे उत्तरी द्वीप से 850 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है और शाम तक यह कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व श्रीलंका के पास तथा इक्वेटोरियल हिंद महासागर में एक और वेदर सिस्टम सक्रिय है।   IMD के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, साइक्लोन डिटवाह पोट्टुविल के पास है, जो चेन्नई से लगभग 700 किलोमीटर दूर है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यह सिस्टम 30 नवंबर की शुरुआत तक उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों तक पहुंच जाएगा। दिल्ली, यूपी और बिहार पर इस तूफान का कोई असर नहीं बताया गया है, लेकिन इन इलाकों में बारिश होने की संभावना है, जिससे सर्दी बढ़ सकती है। साइक्लोन का नाम ‘डिटवाह’ यमन द्वारा दिया गया है। IMD ने चेन्नई, नागपट्टिनम, तिरुवल्लूर और तंजावुर समेत तमिलनाडु के कई जिलों में 27, 28 और 29 नवंबर के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। साइक्लोन सेन्यार की ताजा जानकारी के अनुसार, यह भारतीय क्षेत्र से दूर मलेशिया की ओर बढ़ रहा है और सुमात्रा के पास है। मौसम विशेषज्ञों ने इसे ‘रेयर’ बताया क्योंकि यह मलक्का स्ट्रेट में पहली बार इतना शक्तिशाली साइक्लोनिक सिस्टम रिकॉर्ड किया गया है।

मोदी–पुतिन मुलाकात: यूक्रेन जंग, ऊर्जा सहयोग और रक्षा साझेदारी पर होगी अहम बातचीत

नई दिल्ली भारतीय कंपनियों ने रूस से तेल की खरीद सीमित करने के साफ संकेत के बावजूद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा के दौरान कच्चे तेल (क्रूड) व्यापार प्रमुख मुद्दा बनेगा। दिसंबर के पहले हफ्ते में पीएम नरेन्द्र मोदी के साथ सालाना सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति की तरफ से भारत को रूसी क्रूड की खरीद बढ़ाने के लिए हर संभव छूट देने की पेशकश होने के आसार हैं। रूसी तेल व्यापार है भारत यात्रा का मुख्य मुद्दा यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों से जूझ रही रूसी अर्थव्यवस्था के लिए भारत एक जीवन रेखा साबित हुआ है, लेकिन हाल के दिनों में भारत द्वारा रूसी तेल आयात में कमी ने मास्को को चिंतित कर दिया है। कूटनीतिक व उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि रूसी पक्षकारों ने पहले ही भारत को यह संकेत दिया है कि जिस तरह की छूट भारतीय तेल कंपनियों को पहले मिला करती थी, आगे वैसी ही छूट जारी रह सकती है। भारतीय तेल उद्योग के सूत्रों ने बताया कि हाल के दिनों में रूसी तेल आपूर्तिकर्ता कंपनियों के साथ विमर्श में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि वो किसी भी कीमत पर भारत जैसे बड़े ऊर्जा खरीददार देश को छोड़ना नहीं चाहते। रूस की योजना अगले दो दशक तक अपने सारे प्रमुख तेल उत्पादक फील्डों से तेल उत्पादन बढ़ाने की है। भारत को तेल छूट जारी रखने की पेशकश इस बढ़ते हुए उत्पादन की खपत तभी होगा जब भारत जैसे तेजी से विकास करती अर्थव्यवस्था उसे खरीदे। पिछले दो वर्षों (2023-2025) में रूस की कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी नाटकीय रूप से बढ़ी है। 2021 में रूसी क्रूड भारत के कुल आयात का मात्र तीन फीसद था, जो 2024 तक 37 फीसद तक पहुंच गया। 2024-25 वित्तीय वर्ष में रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड आपूर्तिकर्ता बन गया, जिसकी हिस्सेदारी 35 फीसद रही। अक्टूबर 2025 में भारत ने रूस के कुल तेल निर्यात का 38 फीसद हिस्सा लिया है जो चीन (47 फीसद) के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। इस वृद्धि का श्रेय डिस्काउंटेड रूसी तेल को जाता है, जिसने भारत की रिफाइनरियों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी को आकर्षित किया। कुल मिलाकर, 2024 में रूस से भारत को 67.15 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें क्रूड का योगदान प्रमुख था।अब स्थिति बदलने के संकेत हैं। भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट रूप से रूसी क्रूड आयात बंद करने की घोषणा की है, जबकि कुल आयात दिसंबर में तीन साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच सकता है। भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड खरीदार है और इसकी हिस्सेदारी खोने से रूसी तेल उद्योग पर भारी दबाव के संकेत मिलने लगे हैं। यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी-यूरोपीय प्रतिबंधों ने रूसी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। 2025 में रूस का जीडीपी विकास दर एक फीसद से नीचे रहने का अनुमान है। महंगााई की दर आठ फीसद से ज्यादा है। यही वजह है कि रूस हर हाल में भारत से क्रूड कारोबार को जारी रखना चाहता है। रूस की तेल उद्योग की तरफ से दिया जाने वाले टैक्स वहां के कुल राजस्व का 40 फीसद होता है। भारत जैसे विशाल खरीददार का विकल्प अभी रूस को मिलना मुश्किल है। एक तो यह प्रतिबंध की वजह से मुश्किल है और दूसरा, चीन के अलावा और किसी भी देश में इतनी ज्यादा तेल खरीदने की क्षमता नहीं है। पुतिन का चार साल बाद भारत आगमन हो रहा है। इसके पहले वह यूक्रेन-रूस युद्ध की शुरुआत (फरवरी, 2022) से ठीक पहले दिसंबर, 2021 में भारत आए थे। रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा संभव माना जाता है कि उस दौरे ने फरवरी, 2022 के बाद भारत की तरफ से रूस से ज्यादा कच्चे तेल की खरीद की जमीन तैयार की थी। अब जबकि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्ति की ठोस पहल अमेरिका और यूरोपीय देशों की तरफ से की जा रही हैं तब पुतिन फिर से नई दिल्ली में होंगे। अधिकारियों का कहना है कि आगामी भारत-रूस सालाना सम्मेलन में रक्षा व ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग सबसे मुद्दा होने जा रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय ने कहा भी है कि इस यात्रा का फोकस आर्थिक साझेदारी पर होगा।  

प्रकृति का कहर: श्रीलंका में मूसलाधार बारिश ने ली 31 जानें, अगले 12 घंटे बेहद खतरनाक

कोलम्बो  श्रीलंका में बीते 11 दिन में मूसलाधार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण 31 लोगों की मौत हो गई जबकि करीब 4,000 लोग प्रभावित हुए हैं। श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र ने बृहस्पतिवार को कहा कि अकेले मध्य पर्वतीय जिलों में 18 लोगों की मौत होने की जानकारी मिली है। डेली मिरर ऑनलाइन की खबर के अनुसार एक भयावह घटना में, कुंबुक्कना में बढ़ते जलस्तर के बीच एक यात्री बस फंस गई, जिसके बाद आपात दलों ने 23 यात्रियों को सफलतापूर्वक बचा लिया।   अडाडेराना समाचार पोर्टल ने बताया कि करीब 10 लोग घायल हुए हैं जबकि 14 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने 25 में से 17 प्रशासनिक जिलों में बिगड़ती स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई है। मौसम ब्यूरो के अनुसार देश के दक्षिण पूर्व में एक निम्न दाब क्षेत्र बना, जो बाद में एक अवदाब क्षेत्र में बदल गया। ब्यूरो के अनुसार फिलहाल वह बट्टीकलोआ से 210 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है। ब्यूरो ने कहा, “अगले 12 घंटे में इसके उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने और जोर पकड़कर गहन दबाव क्षेत्र में बदलने का प्रबल अनुमान है।” ब्यूरो ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश होने का पूर्वानुमान है।  

शिक्षा को बढ़ावा: केंद्र सरकार देगी SC छात्रों को 2 लाख तक की वार्षिक सहायता

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए बड़ी राहत भरी घोषणा की है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2024-25 के लिए SC छात्रों के लिए टॉप क्लास स्कॉलरशिप योजना के नए और अपडेटेड दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन नए नियमों के अनुसार छात्रों को अब पहले से अधिक वित्तीय सहायता मिलेगी और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से तय की गई हैं। योजना का उद्देश्य और मुख्य लाभ इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई भी योग्य छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। इसके तहत देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे SC छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस सरकार द्वारा वहन की जाएगी। इसके अलावा, छात्रों को शैक्षणिक भत्ता भी दिया जाएगा ताकि वे अपनी पढ़ाई से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर सकें। संशोधित वित्तीय सहायता व्यवस्था वर्ष 2024-25 से सरकार छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस और गैर-वापसी योग्य शुल्क सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजेगी। निजी संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह सहायता प्रति वर्ष अधिकतम 2 लाख रुपये तक सीमित होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि छात्रों को समय पर और पारदर्शी तरीके से आर्थिक सहायता मिल सके और किसी भी तरह की देरी या धोखाधड़ी से बचा जा सके। छात्रों के भविष्य के लिए बड़ी पहल सरकार का मानना है कि इस योजना से SC वर्ग के छात्रों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई करने का बेहतर अवसर मिलेगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। यह कदम सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के साथ-साथ उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी को भी मजबूत करेगा। कुल मिलाकर, यह योजना लाखों SC छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

दूसरा विवाह अब बना बड़ा अपराध: असम सरकार का कड़ा कानून, भारी सज़ा और नौकरी पर खतरा

असम  असम विधानसभा में गुरुवार को बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने को लेकर प्रोहिबिशन ऑफ पॉलीगैमी बिल 2025 पारित कर दिया गया है। अब असम में दूसरी शादी करना दंडनीय अपराध बन गया है। इस बिल के तहत यदि कोई व्यक्ति दूसरी शादी रचाता है तो उसके लिए 7 साल की कैद की सजा के साथ पीड़ित महिला को मुआवजा देने का भी प्रावधान है। अगर सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति दूसरी शादी करता है तो उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बिल के बारे में जानकारी दी। विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए सरमा ने दोहराया कि राज्य में महिलाओं के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। अगले साल बीजेपी की सरकार बनी तो पारित होगा यूसीसी विधेयक सीएम हिमंत ने कहा कि असम बहुविवाह निषेध विधेयक 2025 उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक के अनुरूप राज्य में नया कानून लाने की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने कहा कि यदि अगले वर्ष होने वाले असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आती है, तो यूसीसी विधेयक पहले विधानसभा सत्र में ही पूरी तरह पारित कर दिया जाएगा। असम बहुविवाह निषेध विधेयक क्या है? विधेयक के प्रावधानों के तहत पहली शादी के रहते हुए अवैध रूप से दूसरी शादी करने का दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की कैद हो सकती है। हालांकि, इसमें अनुसूचित जनजातियों और संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है, जो पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों को स्वायत्तता प्रदान करता है। पीड़ित महिलाओं को मिलेगा मुआवजा विधेयक में पीड़ित महिलाओं को मुआवजा देने का प्रावधान है, क्योंकि बहुविवाह के कारण उन्हें अत्यधिक पीड़ा और कष्ट सहना पड़ता है। विधेयक में प्रस्तावित किया गया है कि प्रस्तावित अधिनियम के तहत दोबारा अपराध करने वाले को प्रत्येक अपराध के लिए निर्धारित सजा से दोगुनी सजा दी जाएगी। बहुविवाह में शामिल होने पर 2 साल की जेल, एक लाख का जुर्माना यदि कोई ग्राम प्रधान, काजी, माता-पिता या कानूनी अभिभावक बेईमानी से तथ्यों को छुपाता है या जानबूझकर बहुविवाह में भाग लेता है, तो उसे दो साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। कोई भी व्यक्ति जो प्रस्तावित कानून का उल्लंघन करते हुए जानबूझकर विवाह करता है, उसे दो वर्ष तक की कैद या 1.50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

चुनाव के 3 दिन बाद बड़ा upheaval: राष्ट्रपति भवन पर गोलियां, सेना ने संभाली सत्ता

नई दिल्ली  गिनी-बिसाऊ में राष्ट्रीय चुनावों के तीन दिन बाद सेना ने राष्ट्रपति को सत्ता से हटा दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। सैनिकों ने बुधवार को सरकारी टेलीविजन पर तख्तापलट की घोषणा की। बुधवार दोपहर राष्ट्रपति भवन के पास गोलियों की आवाजें भी सुनाई दी थीं। फ्रांस के समाचार आउटलेट 'जून अफ्रीका' ने राष्ट्रपति उमारो सिस्सोको एम्बालो के हवाले से बताया कि सेना प्रमुख ने तख्तापलट किया है और उन्हें (राष्ट्रपति) गिरफ्तार कर लिया गया है।   फ्रांसीसी टेलीविजन नेटवर्क ‘फ्रांस 24' से उन्होंने कहा, "मुझे पद से हटा दिया गया है।" राष्ट्रीय और सार्वजनिक व्यवस्था की बहाली के लिए गठित उच्च सैन्य कमान के प्रवक्ता दिनिस एन'चमा ने एक बयान में कहा, ‘‘ शीर्ष सैन्य कमान ने राष्ट्रीय और सार्वजनिक व्यवस्था की बहाली के लिए तुरंत राष्ट्रपति को पद से हटाने और गिनी-बिसाऊ गणराज्य की सभी संस्थाओं को अगले आदेश तक निलंबित करने का निर्णय लिया है।"   उन्होंने दावा किया कि चुनावी नतीजों में हेरफेर करके देश को अस्थिर करने की जारी गोपनीय योजना के जवाब में यह कदम उठाया गया है। एन'चमा ने आरोप लगाया कि इस "साजिश" में कुछ नेता, एक कुख्यात मादक पदार्थ कारोबारी और घरेलू तथा विदेशी नागरिक शामिल थे। राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव रविवार को हुए थे। मौजूदा राष्ट्रपति एम्बालो और विपक्षी उम्मीदवार फर्नांडो डायस दा कोस्टा, दोनों ने मंगलवार को अपनी-अपनी जीत का दावा किया था जबकि आधिकारिक अनंतिम परिणाम बृहस्पतिवार को आने की उम्मीद है।    

बदलते वैश्विक संकटों के बीच भारतीय सेना का संकल्प—2047 तक बनेगी शक्तिशाली बहु-क्षेत्रीय सेना

नई दिल्ली  नई दिल्ली में आयोजित चाणक्य डिफेंस डायलॉग में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना की भावी रणनीति, सैन्य परिवर्तनों और राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण का व्यापक खाका पेश किया। सेना प्रमुख ने कहा कि विश्व अत्यधिक अस्थिर, बहुध्रुवीय और संघर्षग्रस्त होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल दुनिया के 50 से अधिक क्षेत्रों में संघर्ष जारी हैं। इससे वैश्विक असुरक्षा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह मूल प्रश्न उठता है कि तेजी से बदलती इन वैश्विक परिस्थितियों में भारतीय सेना को किस दिशा में रूपांतरित होना चाहिए। सेनाध्यक्ष ने यहां प्रधानमंत्री के 5-एस दृष्टिकोण का उल्लेख भी किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के 5-एस दृष्टिकोण यानी सम्मान, संवाद, सहयोग, समृद्धि और सुरक्षा के आधार पर भारत अमृतकाल से विजन 2047 की ओर बढ़ रहा है। इसी विजन से इस वर्ष का विषय रखा गया है जिसका शीर्षक ‘रिफार्म टू ट्रांसफॉर्म – सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत’ है।  सेना प्रमुख ने बताया कि सेना ने आने वाले वर्षों के लिए तीन-चरणीय योजना तैयार की है। चरण-1 के अंतर्गत वर्ष 2032 तक परिवर्तन के दशक के अंतर्गत तीव्र बदलाव की रूपरेखा तय है। चरण-2 में 2037 तक पहले चरण में हासिल उपलब्धियों का विस्तार एवं स्थिरीकरण निश्चित किया गया है। चरण-3 में जंप यानी भविष्य के लिए 2047 तक पूर्णत एकीकृत, बहु-क्षेत्रीय, आधुनिक और तैयार सेना का निर्माण तय किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 को रक्षा मंत्रालय ने सुधार वर्ष घोषित किया है, जिसका प्रभाव ऑपरेशन ‘सिंदूर’ जैसी उपलब्धियों में दिखा है। भारतीय सेना के परिवर्तन के चार प्रमुख आधार बताए गए। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने चार प्रमुख स्प्रिंगबोर्ड या प्रेरक आधार बताए। इनमें आत्मनिर्भरता यानी स्वदेशीकरण से सशक्तिकरण शामिल है। वहीं रक्षा निर्माण, अंतरिक्ष तकनीक और आधुनिक सैन्य प्रणालियों में भारत तेजी से आगे बढ़ा है। हालांकि अभी भी व्यापक क्षमता निर्माण की आवश्यकता है ताकि भारत स्वयं की जरूरतें स्वयं पूरी कर सके। वहीं अनुसंधान यानी त्वरित नवोन्मेष को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सेना प्रमुख ने बताया कि आइडेक्स और ‘अदिति’ जैसे कार्यक्रम विचार से प्रोटोटाइप तक तेजी ला रहे हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर, क्वांटम, अंतरिक्ष और अत्याधुनिक सामग्री के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव की जरूरत है। तीसरा अनुकूलन और रक्षा ढांचे में सुधार है। राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता लक्ष्यों के अनुरूप सैन्य ढांचे को तेजी से पुनर्गठित किया जा रहा है। इस संवाद से सेना को ठोस सुझाव मिलने की अपेक्षा है। चौथा आधार एकीकरण को बताया गया। इसमें सैन्य नागरिक समन्वय शामिल है। युद्धक क्षमता का विकास बहु-एजेंसी और बहु-क्षेत्रीय प्रयास भी इसका हिस्सा है। आर्मी चीफ ने बताया कि सेना अपने परीक्षण क्षेत्र खोल रही है, स्टार्ट-अप को सहयोग दे रही है और राष्ट्रीय तकनीकी मिशनों से जुड़ रही है। साथ ही वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के साथ वैश्विक सहयोग को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। सेना प्रमुख ने संबोधन के अंत में कहा कि चाणक्य डिफेंस डायलॉग में उपस्थित सैन्य विशेषज्ञ, विद्वान और नीति निर्माता भारतीय सेना के परिवर्तन को नई दिशा देंगे। इससे पहले सत्र की शुरुआत में सेना प्रमुख ने राष्ट्रपति, राजनयिक समुदाय, सेनाध्यक्षों, विशेषज्ञों, मीडिया प्रतिनिधियों और उपस्थित विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि चाणक्य डिफेंस डायलॉग की स्थापना वर्ष 2023 में हुई थी, तब तत्कालीन सेना प्रमुख ने भारतीय सेना के लिए ‘परिवर्तन का दशक’ घोषित किया था। इसके बाद यह मंच लगातार विस्तृत, प्रभावी और वैश्विक रणनीतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

एक महीने में दो कड़े फैसले: पहले फांसी, अब 21 साल कैद… हसीना की वापसी पर लगा ब्रेक?

ढाका  बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर न्यायिक शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। एक महीने में दूसरा बड़ा फैसला आते ही राजनीतिक हलकों में भूचाल मच गया है। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल से मानवता के खिलाफ अपराधों में मौत की सजा मिलने के बाद, अब ढाका की स्पेशल जज कोर्ट ने भूमि घोटाले के तीन मामलों में कुल 21 साल की कैद सुनाई है। फैसला हसीना और उनके परिवार की अनुपस्थिति में सुनाया गया, क्योंकि वे पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद भारत में रह रही हैं। अदालत ने पाया कि RAJUK पुर्बांचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट में हसीना और उनके रिश्तेदारों को बिना आवेदन और गैरकानूनी तरीके से प्लॉट आवंटित किए गए थे। इन मामलों में उनका बेटा सजीब वाजेद जॉय, बेटी साइमा पुतुल, बहन शेख रेहाना, और ब्रिटिश सांसद ट्यूलिप सिद्दीक सहित पूरा परिवार आरोपी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस, हसीना की राजनीतिक जड़ों को पूरी तरह उखाड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिसके संकेत लगातार आते फैसले दे रहे हैं।इस तरह फांसी + 21 साल की सजा ने हसीना की राजनीति पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बांग्लादेश की राजनीति अब नए मोड़ पर है, और आने वाले हफ्तों में घटनाएँ और भी नाटकीय हो सकती हैं। मौत की सजा का फैसला 17 नवंबर को बांग्लादेश इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए शेख हसीना को मौत की सजा दी। ट्रिब्यूनल का आरोप है कि पिछले साल जुलाई-अगस्त 2024 के दौरान  सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हुई हिंसा में कई छात्रों की मौत  “मानवता के खिलाफ अपराध”  है। इस मामले में हसीना के साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी फांसी की सजा सुनाई गई। इन प्रदर्शनों के बाद हसीना देश से भागकर भारत में रह रही हैं, इसलिए यह फैसला भी उनकी अनुपस्थिति में दिया गया।   21 साल की कैद  ढाका की स्पेशल जज कोर्ट-5 ने RAJUK के पुर्बांचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट में प्लॉट आवंटन घोटाले के तीन मामलों में शेख हसीना को 7-7 साल (कुल 21 साल) की सजा सुनाई। कोर्ट के मुताबिक हसीना को बिना किसी आवेदन और गैरकानूनी तरीके से सरकारी भूमि आवंटित की गई।  इसलिए तीनों मामलों में अलग-अलग सजाएँ दी गईं । सजा क्रमशः भुगतनी होगी।  यह फैसला गुरुवार सुबह 11:45 बजे जज मोहम्मद अब्दुल्ला अल-मामून ने सुनाया। ट्रायल कैसे हुआ?     प्रॉसिक्यूशन और डिफेंस की दलीलें 23 नवंबर को पूरी हुईं     31 जुलाई को आरोप तय हुए     17 नवंबर को गवाही पूरी     आज फैसला सुनाया गया     हसीना कोर्ट में मौजूद नहीं थीं पूरा परिवार कानून के शिकंजे में  एंटी-करप्शन कमीशन (ACC) ने प्लॉट घोटाले में 6 अलग केस दर्ज किए थे। तीन मामलों में आज फैसला आया, बाकी तीन अभी लंबित हैं। आरोपी सूची में शेख हसीना, उनका बेटा सजीब वाजेद जॉय, उनकी बेटी साइमा वाजेद पुतुल,  बहन शेख रेहाना, रेहाना की बेटी और ब्रिटिश MP ट्यूलिप रिजवाना सिद्दीक, रेहाना का बेटा रादवान मुजीब सिद्दीक, रेहाना की पोती अज़मीना सिद्दीक शामिल हैं। कुल मिलाकर, घोटाले में पूरे वाजेद-सिद्दीक परिवार को आरोपी बनाया गया है।मामलों में कुल 20 आरोपी हैं, लेकिन केवल एक  मोहम्मद खुर्शीद आलम  गिरफ्तार है। विशेषज्ञों के अनुसार,इंटरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और हसीना के बीच पुराने राजनीतिक मतभेद हैं। हसीना की सत्ता वापसी की किसी भी संभावना को खत्म करने के लिए  पहले ट्रिब्यूनल से मौत की सजा फिर ढाका कोर्ट से भ्रष्टाचार में 21 साल और बाकी मामलों की सुनवाई तेज की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कार्रवाई यूनुस बनाम हसीना की जंग का हिस्सा है।  हसीना  भारत में हैं। बांग्लादेश अरेस्ट वॉरंट जारी करने की तैयारी में है।