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विदेश में फंसे झारखंड के मजदूरों की दुर्दशा! ट्यूनिशिया में भूख-प्यास से जूझ रहे लोग, सीएम सोरेन ने दिए जांच के आदेश

नई दिल्ली  अफ्रीका के ट्यूनिशिया में झारखंड राज्य के करीब 48 प्रवासी मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। ये सभी मजदूर झारखंड के हजारीबाग, गिरिडीह और बोकारो जिले के बताए जा रहे हैं। मजदूरों ने एक वीडियो जारी करके मदद की अपील की है। मामले में सीएम हेमंत सोरेन ने कार्रवाई का निर्देश दिया है। वीडियो में मजदूर कह रहे हैं, "हम यहां बहुत खराब हालत में हैं। कंपनी ने हमारी सैलरी बंद कर दी है। खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। बस किसी तरह से अपने घर लौटना चाहते हैं।" ट्यूनिशिया में फंसे मजदूरों ने दावा किया है कि उन्हें बीते चार महीने से सैलरी नहीं मिली है। मजदूरों ने यह भी कहा है कि उनसे ओवरटाइम करवाया जा रहा है। मामले की जानकारी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मिल गई है। उन्होंने उचित कार्रवाई कर श्रम विभाग के मजदूरों की मदद का निर्देश दिया है। इसके साथ ट्यूनिशिया में भारतीय एंबेसी से भी मदद करने की अपील की है। वहीं, झारखंड में श्रम नियोजन और कौशल विकास मंत्री संजय प्रसाद यादव ने इस मामले में कहा, "मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान के बाद, विभाग के वरीय पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि अफ्रीका के ट्यूनीशिया में फंसे झारखंड के सभी 48 प्रवासी श्रमिकों की शीघ्र एवं सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।" इस मामले की एक वीडियो सामने आई है, जिसमें मजदूर अपनी आपबीती सुना रहे हैं। एक मजदूर ने कहा, "हम लोगों को भारत से यह बोलकर लाया गया था कि यह एक कंपनी है, लेकिन यहां आने के बाद पता चला कि ये प्रेम पावर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (पीपीसीएल) कॉन्ट्रैक्टर हैं। पीपीसीएल ने यह एलएमपी से कॉन्ट्रैक्ट लिया है। हम लोगों ने भारत में एग्रीमेंट पेपर की मांग की तो हमें बोला गया कि वहां पहुंचने के बाद मिलेगा। यहां पहुंचने के बाद कुछ नहीं मिलेगा।" मजदूरों ने आगे कहा कि भारत से हमें 8 घंटे की ड्यूटी बोलकर लाया गया था, लेकिन यहां 12 घंटे ड्यूटी करवाई जा रही है। 4 महीने से सैलरी नहीं मिली है। सैलरी मांगने पर धमकी दी जा रही है कि सबको जेल करवा देंगे, भारत वापस नहीं जा पाओगे। हमारे पास खाने-पीने के सारे पैसे खत्म हो गए हैं। कोई सामान भी नहीं है। हम 48 मजदूर यहां फंसे हुए हैं। हमलोग वतन वापसी के लिए झारखंड और केंद्र सरकार से अपील कर रहे हैं कि हमारी मदद की जाए।

भारत का बड़ा कदम: कल लगेगा ‘समुद्र की आँख’ का लॉन्च — ऑपरेशन सिंदूर 2.0 और भी खतरनाक

बेंगलुरु  कल यानी 2 नवंबर 2025 को भारत का प्रसिद्ध लॉन्च व्हीकल LVM3 रॉकेट अपनी पांचवीं उड़ान भरेगा. यह उड़ान LVM3-M5 के नाम से जाना जाएगा. इस उड़ान में भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. यह उपग्रह भारतीय नौसेना के लिए बहुत खास है. यह न केवल समुद्री इलाकों में संचार को मजबूत करेगा, बल्कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण अभियानों से सीखे गए सबकों को भी मजबूत करेगा. LVM3: भारत का विश्वसनीय रॉकेट LVM3 भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO का सबसे ताकतवर लॉन्च व्हीकल है. इसका पूरा नाम लॉन्च व्हीकल मार्क-3 है. यह रॉकेट भारी सामान को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए बनाया गया है. अब तक की चार उड़ानों में इसने शानदार काम किया है. सबसे हाल की उड़ान चंद्रयान-3 की थी, जिसमें भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास पहली बार सफल लैंडिंग करने वाला देश बना. अब LVM3-M5 की बारी है. यह रॉकेट पूरी तरह तैयार है. 26 अक्टूबर 2025 को इसे उपग्रह के साथ जोड़कर लॉन्च पैड पर ले जाया गया. अब अंतिम जांच चल रही है. लॉन्च शाम 5:26 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा. आप इसे ISRO के यूट्यूब चैनल पर लाइव देख सकते हैं. CMS-03: भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 का पूरा नाम कम्युनिकेशन सैटेलाइट मिशन-03 है. यह एक मल्टी-बैंड संचार उपग्रह है, यानी यह कई तरह की रेडियो तरंगों पर काम करेगा. इसका वजन करीब 4400 किलोग्राम है. यह भारत से जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में भेजा जाने वाला सबसे भारी संचार उपग्रह होगा. जीटीओ एक ऐसी कक्षा है जहां से उपग्रह आसानी से जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में पहुंच जाता है. वहां यह पृथ्वी के ऊपर घूमता रहता है. लगातार संपर्क रखेगा. यह उपग्रह सात साल तक काम करेगा. यह भारतीय मुख्यभूमि और बड़े समुद्री इलाकों को कवर करेगा. इसमें इंटरनेट कनेक्टिविटी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन जैसी सुविधाएं होंगी. खास बात यह है कि यह दूरदराज के इलाकों, जहाजों और हवाई जहाजों को मजबूत कनेक्शन देगा. पहले के संचार उपग्रहों से यह ज्यादा क्षमता वाला है, यानी ज्यादा डेटा तेजी से भेज सकेगा. भारतीय नौसेना के लिए क्यों खास है CMS-03? CMS-03 मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया है. इसे GSAT-7R भी कहा जाता है. नौसेना के जहाज, पनडुब्बियां और विमान समुद्र में दूर-दूर तक जाते हैं. वहां सिग्नल कमजोर हो जाते हैं. यह उपग्रह नौसेना को सुरक्षित और तेज संचार देगा.  उदाहरण के लिए…     सुरक्षा बढ़ेगी: नौसेना के अधिकारी रीयल-टाइम में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे.     समन्वय आसान: अलग-अलग जहाजों के बीच बातचीत तेज होगी, जिससे अभियान सफल होंगे.     समुद्री सुरक्षा: हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी जैसे इलाकों में निगरानी मजबूत होगी. यह उपग्रह नौसेना को 'समुद्री आंख' देगा. मतलब, समुद्र में हर चाल पर नजर रहेगी. इससे भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा और मजबूत होगी. ऑपरेशन सिंदूर से कैसे जुड़ा है यह उपग्रह? अब बात करते हैं ऑपरेशन सिंदूर की. यह भारत का एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान था, जो मई 2025 में हुआ. यह अभियान सिर्फ चार दिनों का था, लेकिन इसने भारत की सैन्य ताकत दिखाई. लेकिन इस ऑपरेशन से एक बड़ा सबक मिला: संचार और निगरानी में कमी न हो. ऑपरेशन के दौरान वायुसेना, सेना और नौसेना को एक-दूसरे से तुरंत संपर्क की जरूरत पड़ी. समुद्री इलाकों में जहाजों को वायुसेना के साथ समन्वय करना पड़ा. लेकिन पुराने उपग्रहों की वजह से कुछ देरी हुई.  ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने सैन्य संचार को मजबूत करने का फैसला लिया. इसके तहत 3 अरब डॉलर का स्पाई सैटेलाइट प्रोजेक्ट तेजी से चलाया जा रहा है. CMS-03 इसी का हिस्सा है. यह नौसेना को ऐसे संचार देगा जो दुश्मन जाम न कर सके. अगर भविष्य में 'ऑपरेशन सिंदूर २.०' जैसा कुछ हो, तो नौसेना इस उपग्रह से वायुसेना और सेना के साथ बेहतर तालमेल बिठा सकेगी.  ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि समुद्री संचार कितना जरूरी है. CMS-03 इसी कमजोरी को दूर करेगा. यह नौसेना को डिजिटल कवच देगा, जो युद्ध में जीत की कुंजी बनेगा. प्री-लॉन्च तैयारियां: सब कुछ तयशुदा 20 अक्टूबर को रॉकेट और उपग्रह का एकीकरण पूरा हुआ. 26 अक्टूबर को इसे लॉन्च पैड पर ले जाया गया. अब मौसम की जांच, ईंधन भरना और अंतिम टेस्ट हो रहे हैं. ISRO के वैज्ञानिक दिन-रात काम कर रहे हैं. अगर सब ठीक रहा, तो कल भारत का नया गौरव अंतरिक्ष में चमकेगा.

हवाई यात्रियों ध्यान दें! बेवजह व्हीलचेयर मांगने पर अब देना होगा चार्ज, DGCA ने किया बड़ा बदलाव

नई दिल्ली  हवाई यात्रियों के लिए एक अहम बदलाव लागू हुआ है। अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं और फिर भी एयरपोर्ट पर व्हीलचेयर सुविधा लेते हैं, तो अब आपको इसके लिए अलग से शुल्क देना होगा। सिविल एविएशन रेगुलेटर DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने इस नियम को मंजूरी दे दी है, ताकि व्हीलचेयर का दुरुपयोग रोका जा सके और असली जरूरतमंद यात्रियों को यह सुविधा समय पर मिल सके। अब व्हीलचेयर पर लगेगा चार्ज DGCA ने सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) में संशोधन करते हुए एयरलाइंस को अनुमति दी है कि वे उन यात्रियों से फीस वसूल सकें जो न तो दिव्यांग हैं और न ही चलने-फिरने में अक्षम, लेकिन फिर भी व्हीलचेयर सुविधा मांगते हैं। अब एयरलाइंस को यह शुल्क अपनी वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से बताना होगा ताकि यात्री टिकट बुकिंग से पहले ही इसकी जानकारी ले सकें। हालांकि, दिव्यांग या सीमित गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए यह सेवा पूरी तरह मुफ्त रहेगी, और एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें किसी भी स्थिति में असुविधा न हो। रिपोर्टिंग टाइम और जिम्मेदारी तय नए नियमों के तहत जो यात्री व्हीलचेयर या सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें फ्लाइट से पहले निर्धारित समय पर एयरपोर्ट पहुंचना अनिवार्य होगा। एयरलाइंस को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने हिसाब से मिनिमम रिपोर्टिंग टाइम तय कर सकती हैं, ताकि सहायता समय पर उपलब्ध कराई जा सके।  एयरपोर्ट पर दिव्यांग यात्रियों के लिए नए इंतजाम DGCA ने सभी एयरपोर्ट ऑपरेटरों को निर्देश दिया है कि दिव्यांग यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएं — एयरपोर्ट पर स्पेशल ड्रॉप-ऑफ ज़ोन बनाए जाएंगे। वहां से व्हीलचेयर तुरंत उपलब्ध होगी। स्पष्ट साइनबोर्ड और दिशानिर्देश लगाए जाएंगे ताकि जरूरतमंद लोग सहायता डेस्क तक आसानी से पहुंच सकें। PRM (Persons with Reduced Mobility) काउंटर के पास आरामदायक बैठने की व्यवस्था की जाएगी।   क्यों लिया गया यह फैसला? DGCA के मुताबिक, एयरलाइंस को कई शिकायतें मिली थीं कि कुछ स्वस्थ यात्री जानबूझकर मुफ्त व्हीलचेयर सुविधा ले लेते हैं, जिससे वास्तविक जरूरतमंद यात्रियों को समय पर सहायता नहीं मिल पाती। इस समस्या से निपटने के लिए अब केवल मेडिकल जरूरत या प्रमाणित स्थिति में ही व्हीलचेयर सेवा मुफ्त होगी। बाकी यात्रियों को यह सेवा पेड कैटेगरी में मिलेगी। यात्रियों को क्या करना होगा? अगर कोई सक्षम व्यक्ति व्हीलचेयर लेना चाहता है — -उसे पहले से एयरलाइन को सूचित करना होगा। -निर्धारित शुल्क का भुगतान ऑनलाइन या एयरपोर्ट पर करना होगा। -DGCA का मानना है कि यह कदम एयरपोर्ट सेवाओं में पारदर्शिता लाएगा और जरूरतमंद यात्रियों के लिए सहायता को अधिक प्रभावी बनाएगा।  

आंध्र प्रदेश हादसे पर बोले प्रधानमंत्री मोदी—’दुखद घटना’, सरकार देगी मुआवजा

श्रीकाकुलम  आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले स्थित वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में हुई भगदड़ की घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिवार को 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं, हादसे में घायल हुए लोगों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम स्थित वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में हुई भगदड़ से बहुत दुख हुआ। मेरी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल लोग जल्द स्वस्थ हों।” 

पाकिस्तान में सनसनी: हाफिज सईद के खास शेख मोइज को सरेआम गोलियों से भुना गया

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। संगठन के एक वरिष्ठ नेता और हाफिज सईद के करीबी सहयोगी शेख मोइज मुजाहिद की कसूर शहर में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। रिपोर्टों के मुताबिक, शेख मोइज मुजाहिद अपने घर के बाहर मौजूद था, तभी बाइक सवार हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गंभीर रूप से घायल मुजाहिद को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुजाहिद को लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रमुख कमांडर और हाफिज सईद का भरोसेमंद साथी माना जाता था। सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में पाकिस्तान में कई आतंकियों की इसी तरह रहस्यमयी परिस्थितियों में हत्याएं हुई हैं। खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अब तक इस हत्या पर कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं, स्थानीय पुलिस भी हमलावरों की पहचान करने में नाकाम रही है।विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान में आतंकियों पर हो रहे ये लगातार हमले किसी “साइलेंट वार” की ओर इशारा करते हैं, जिसमें कई बड़े नाम एक-एक कर खत्म किए जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में आधा दर्जन से अधिक मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की हत्या हो चुकी है, लेकिन अभी तक किसी भी मामले में एक भी हमलावर को गिरफ्तार नहीं किया गया। इससे देश में आतंकियों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल फैल गया है। 

पाकिस्तान पर तालिबान का तंज! आर्मी चीफ की बेइज्जती कर कहा– कश्मीर का सपना छोड़ दो

काबुल  काबुल से पाकिस्तान तक हलचल मचाने वाला बयान अफगान तालिबान के वरिष्ठ अधिकारी कारी सईद खोस्ती ने पाकिस्तानी सेना की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना अपनी जनता को झूठे दावों और प्रोपेगैंडा से गुमराह करती है। खोस्ती ने खुले शब्दों में कहा कि अगर पाकिस्तानी जनरलों में सच में दम होता, तो वे 75 साल में कश्मीर क्यों नहीं ले पाए? खोस्ती, जो अफगान तालिबान के सूचना मंत्री के सलाहकार हैं, ने पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी आदिल राजा को दिए एक ऑनलाइन इंटरव्यू में कहा कि पाक फौज का एक वर्ग मीडिया के जरिए यह भ्रम फैलाता है कि उसने अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को हराया। उन्होंने कहा “अगर तुमने अमेरिका और रूस को हराया है, तो फिर कश्मीर की कुछ किलोमीटर जमीन क्यों नहीं ले सके?” खोस्ती ने पाकिस्तानी फौज पर आरोप लगाया कि उन्होंने रूस और अमेरिका के खिलाफ लड़ी गई जंग से अरबों डॉलर कमाए और अपनी दौलत बढ़ाई। उनके मुताबिक, “इन जनरलों ने जंग नहीं जीती, बल्कि बंगले और जजीरे खरीदे।” उन्होंने दावा किया कि यह सब अफगान लोगों की लड़ाई थी, जिसमें पाकिस्तान ने सिर्फ मुनाफा कमाया। खोस्ती की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान और तालिबान के बीच सीमा संघर्ष के बाद तनाव चरम पर है। हाल ही में इस्तांबुल में हुई वार्ता में युद्धविराम पर सहमति तो बनी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कटुता अब भी बरकरार है।   

आंध्र प्रदेश में बड़ा हादसा: वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में भगदड़ से 10 लोगों की जान गई, कई घायल

श्रीकाकुलम  आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम के वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर से भगदड़ की बड़ी घटना सामने आई है। इस भगदड़ में 10 श्रद्धालुओं की मौत हुई, जबकि कुछ लोग घायल भी हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। एकादशी के पावन पर्व पर हादसा यह भयानक हादसा कार्तिक मास की एकादशी के पावन अवसर पर हुआ, जब मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। अब तक सामने आई  रिपोर्ट्स के अनुसार मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास अचानक लोगों का दबाव बढ़ गया। इससे अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति बन गई। कई लोग नीचे गिर पड़े और उनके ऊपर भीड़ चढ़ती चली गई, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ। राहत और बचाव कार्य हुआ शुरू हादसे की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। सभी घायलों को पास के सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। ज़िला प्रशासन ने स्थिति पर नज़र बनाए रखी है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि हालात पर पूरी तरह काबू पाया जा सके।चश्मदीदों ने बताया कि सुबह से ही भीड़ काफी ज्यादा थी, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण में कमी के कारण हालात बेकाबू हो गए। स्थानीय प्रशासन ने घटना की जाँच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चूक कहाँ हुई।   मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुख आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, "काशी बुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर में भगदड़ की घटना अत्यंत दुखद है। मैं मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।" मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घायलों को सर्वोत्तम संभव उपचार प्रदान किया जाए। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को घटनास्थल का दौरा करने और राहत कार्यों की निगरानी करने के लिए भी कहा है।  

भारतीय मूल के CEO पर धोखाधड़ी का आरोप, अमेरिका में 4000 करोड़ का घोटाला उजागर

अमेरिका में 4000 करोड़ का घोटाला! भारतीय मूल के CEO पर लगे बड़े फर्जीवाड़े के आरोप भारतीय मूल के CEO पर धोखाधड़ी का आरोप, अमेरिका में 4000 करोड़ का घोटाला उजागर अमेरिका में हड़कंप: भारतीय मूल के CEO पर 4000 करोड़ रुपये के फ्रॉड का आरोप वाशिगटन  अमेरिका में भारतीय मूल के टेलीकॉम कंपनी के CEO बैंकिम ब्रह्मभट्ट पर 500 मिलियन डॉलर (4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) के बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप लगा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रह्मभट्ट ने फर्जी ग्राहक खातों और राजस्व के दस्तावेज तैयार कर अमेरिकी बैंकों से भारी कर्ज हासिल किया. ब्रह्मभट्ट ब्रॉडबैंड टेलीकॉम और ब्रिजवॉइस नामक कंपनियों के मालिक हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कई निवेशकों को यह विश्वास दिलाया कि उनके व्यवसायों की आय और ग्राहक आधार बहुत मजबूत है, जबकि असल में वह कई गैर-मौजूद ग्राहकों और फर्जी लेन-देन पर आधारित थी. इस घोटाले में प्रमुख निवेश फर्म HPS इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स और वैश्विक एसेट मैनेजमेंट दिग्गज BlackRock के समर्थित फंड भी शामिल हैं. WSJ की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त 2024 में लेनदारों ने मुकदमा दायर किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि ब्रह्मभट्ट ने गैर-मौजूद राजस्व स्रोतों को कर्ज की गारंटी के रूप में गिरवी रखा. 2020 से कंपनी को मिल रहे थे लोन HPS ने सितंबर 2020 में ब्रह्मभट्ट की एक कंपनी को कर्ज देना शुरू किया और यह राशि धीरे-धीरे बढ़कर 2021 की शुरुआत तक 385 मिलियन डॉलर और अगस्त 2024 तक 430 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई. इन कर्जों का लगभग आधा हिस्सा BNP Paribas बैंक द्वारा वित्तपोषित किया गया था. कंपनी ने दिवालियापन के लिए दायर की याचिका अब उनकी कंपनियों ने Chapter 11 दिवालियापन संरक्षण के तहत अदालत में आवेदन किया है, जो अमेरिकी कानून के तहत कंपनियों को पुनर्गठन का मौका देता है. इसी दिन ब्रह्मभट्ट ने निजी दिवालियापन की याचिका भी दाखिल की थी. रिपोर्ट के अनुसार, जब पत्रकार न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी स्थित उनके कार्यालय पहुंचे, तो वहां ताला लटका मिला और पड़ोसियों ने बताया कि कई हफ्तों से कोई वहां नहीं दिखा. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, संभावना है कि ब्रह्मभट्ट अमेरिका छोड़कर भारत लौट आए हों. उनके वकील ने हालांकि सभी आरोपों को निराधार बताया है.  

शराब प्रेमियों के लिए खुशखबरी! अब दुकानों पर मिलेंगे ज्यादा प्रीमियम ब्रांड्स, जानिए कब से लागू होगी नई व्यवस्था

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार अपनी नई आबकारी नीति का मसौदा तैयार कर चुकी है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस नीति का मुख्य लक्ष्य दिल्ली में शराब की बिक्री व्यवस्था को और पारदर्शी, consumer-friendly और आधुनिक बनाना है। सरकारी नियंत्रण रहेगा जारी मसौदे में यह साफ कर दिया गया है कि शराब की खुदरा बिक्री पर नियंत्रण पूरी तरह से सरकार के हाथों में रहेगा। इसका मतलब है कि फिलहाल निजी शराब दुकानों को खोलने की अनुमति देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह निर्णय पिछली नीतियों के अनुभवों को ध्यान में रखकर लिया गया है, ताकि पारदर्शिता और नियंत्रण दोनों बनाए रखा जा सके। स्मार्ट होंगी शराब की दुकानें नई नीति के तहत शराब की दुकानों को मार्डन स्मार्ट लुक दिया जएगा। अब तक जो सरकारी वेंडर छोटे, भीड़भाड़ वाले और जालीदार काउंटरों से चलते थे, उन्हें आधुनिक रूप दिया जाएगा। दुकानों को खुला, आकर्षक और 'मॉल जैसा' बनाने की योजना है, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर और सुरक्षित खरीदारी का अनुभव मिल सके।   प्रति बोतल लाभांश बढ़ाने की तैयारी इस मसौदे का एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रति बोतल मुनाफे की सीमा को बढ़ाना है। सूत्रों के अनुसार IMFL पर ₹50 से अधिक का लाभांश तय किया जा सकता है। इस कदम से उच्च गुणवत्ता वाले और विविध ब्रांडों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे दिल्ली के बाज़ार में प्रीमियम सेगमेंट की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी होगी। ब्रांड और उपभोक्ता अनुभव पर जोर सरकार की इस नई नीति का फोकस केवल राजस्व बढ़ाना नहीं है, बल्कि उपभोक्ता अनुभव और ब्रांड विविधता पर भी है। सरकार चाहती है कि दिल्ली के उपभोक्ताओं को देश-विदेश के अधिक से अधिक ब्रांड मिलें और शराब खरीदना एक व्यवस्थित और सम्मानजनक प्रक्रिया बन सके।   अगले वित्तीय वर्ष से हो सकती है लागू मसौदे को अंतिम रूप दिए जाने के बाद जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उम्मीद है कि यह नई आबकारी नीति अगले वित्तीय वर्ष से प्रभावी हो सकती है।  

FDA का बड़ा एक्शन! अब बच्चों को नहीं मिलेंगे फ्लोराइड सप्लीमेंट्स

वाशिंगटन  अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बच्चों के दांतों को मजबूत बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले ‘फ्लोराइड सप्लीमेंट' के इस्तेमाल को सीमित करने का निर्णय लिया है। यह अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर और उनके सहयोगियों की ओर से दंत चिकित्सा में व्यापक रूप से उपयोग होने वाले इस रसायन के खिलाफ उठाया गया एक और कदम है। एफडीए ने शुक्रवार को कहा कि अब तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों और उन बच्चों को यह इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाएगी जिनके दांतों में सड़न (कैविटी) का गंभीर खतरा नहीं है। पहले यह उत्पाद छह महीने या उससे अधिक उम्र के बच्चों को दिया जा सकता था। इससे पहले मई में एफडीए ने सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिया गया था कि इन उत्पादों को बाजार से हटाया जा सकता है। एजेंसी ने चार कंपनियों को चेतावनी पत्र भेजे हैं, जिनमें उन्हें एक सीमा के अंदर उत्पादों का विपणन करने की सलाह दी गई है। जिन बच्चों के दांतों में सड़न का अधिक खतरा रहता है, उन बच्चों और उन किशोरों को कभी-कभी फ्लोराइड की गोलियां लेने की सलाह दी जाती है, खासकर जब उनके क्षेत्र में पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा कम हो। एफडीए ने शुक्रवार को एक नयी वैज्ञानिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें निष्कर्ष निकाला गया है कि ‘फ्लोराइड सप्लीमेंट' से बच्चों के दांतों को सीमित लाभ मिलता है और ये आंतों की समस्याओं, वजन बढ़ने और सोचने-समझने की क्षमताओं से जुड़ी नयी स्वास्थ्य चिंताओं का कारण बन सकते हैं।