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पेंशनधारकों को बड़ी राहत, जीवन प्रमाण पत्र जमा करना हुआ आसान – अब घर से ही कर सकेंगे सबमिट

नई दिल्ली देश के लाखों पेंशनरों के लिए राहत भरी खबर है। पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) देश के सभी 1600 जिलों और प्रमंडल मुख्यालयों में 1 से 30 नवंबर 2025 तक चौथा राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) अभियान चलाने जा रहा है। इसके जरिए पेंशनर्स के लिए लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना आसान हो जाएगा। फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी से बुजुर्ग घर बैठे ही अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर पाएंगे। इधर, बैंक और आईपीपीबी अक्टूबर 2025 में एसएमएस, व्हाट्सएप, सोशल मीडिया, बैनर और स्थानीय मीडिया प्रचार द्वारा पेंशनरों को निवेदन विकल्पों के बारे में सूचित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान शुरू करेंगे। हर साल जमा करना होता है लाइफ सर्टिफिकेट दरअसल,साल के अंतिम महीनो में खासकर नवंबर के महीने में पेंशनर्स को लाइफ सर्टिफिकेट को जमा करना होता है, क्योंकि पेंशनधारकों की ओर से जमा किया जाने वाला लाइफ सर्टिफिकेट एक साल के लिए वैलिड होता है।पिछले वर्ष जिन पेंशनर्स ने लाइफ सर्टिफिकेट जमा कराया था वो 30 नवंबर 2025 तक ही वैलिड है, ऐसे में दिसंबर महीने से पेंशन पाने के लिए ये जरूरी है कि 30 नवंबर तक पेंशनर्स अपना जीवन प्रमाण पत्र को जमा कर दें।30 नवंबर तक जो पेंशनभोगी यह सर्टिफिकेट जमा नहीं कराएगा, उसे दिसंबर से पेंशन मिलनी बंद हो जाएगी।हालांकि बाद में लाइफ सर्टिफिकेट जमा होने पर बकाया अमाउन्ट के साथ पूरी पेंशन की राशि खाते में आ जाती है। क्यों जरूरी है जीवन प्रमाण पत्र जीवन प्रमाण पत्र पेंशनभोगियों के लिए एक बायोमेट्रिक सक्षम डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र है। यह केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य शासकीय संस्थान के रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इससे पता चलता है कि पेंशन पाने वाला व्यक्ति जीवित है या नही। नियम के तहत 60 साल से 80 साल की उम्र वाले हर पेंशनर को 1 नवंबर से 30 नवंबर के बीच अपना जीवन प्रमाण पत्र या लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना होता है। 80 साल के सुपर सीनियर पेंशनर को 1 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच में ये सर्टिफिकेट जमा करना होता है। फेस ऑथेंटिकेशन से कैसे जमा होगा जीवन प्रमाण पत्र, यहां समझें पूरा प्रोसेस     सबसे पहले फोन पर UIDAI द्वारा बनाई Aadhaar Face RD Application डाउनलोड करना होगा।     Aadhaar Face RD ऐप इंस्टॉल करने के बाद आपको अपने फोन पर ‘जीवन प्रमाण ऐप’ डाउनलोड करना होगा।     यहा आपको ‘Operator Authentication’ स्क्रीन दिखेगी। यहां आधार चेकबॉक्स पर क्लिक करें और अपना आधार नंबर डालें।     मोबाइल नंबर दर्ज करें और ईमेल पता डालें, सबमिट का बटन दबाएं। इसके बाद आपके मोबाइल और ईमेल पर एक OTP आएगा, उसे दर्ज करें।     आपके सामने एक नई स्क्रीन आएगी। यहां अपना नाम दर्ज करें और चेक बॉक्स पर टिक करके ‘Scan’ ऑप्शन को चुनें।     फिर ऐप आपका फेस स्कैन करने की अनुमति मांगेगा। यहां Yes पर टैप करें।     स्क्रीन पर निर्देश दिखेंगे उसे पढ़ें और “I am aware of this” पर टैप करके Proceed पर टैप करें।     अब आपका चेहरा स्कैन किया जाएगा। इसके बाद पूछी गई जानकारी दर्ज करें और एक बार आपके चेहरे को फिर से स्कैन किया जाएगा और आपको प्रमाण ID और PPO नंबर मिलेगा।     लास्ट में सर्टिफिकेट डाउनलोड करने के लिए जीवन प्रमाण की वेबसाइट पर लॉगिन करें और अपनी प्रमाण ID डालें। इसके तुरंत बाद आपका जीवन प्रमाण डाउनलोड हो जाएगा।

EPFO खाताधारकों को मिल सकती है राहत, अक्टूबर में अहम फैसलों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के कर्मचारियों-खाताधारकों के लिए काम की खबर है। EPFO 3.0 के लिए नए साल 2026 तक का इंतजार करना पड़ सकता है।खबर है कि अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में बैठक हो सकती है जिसमें इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होगी और फिर नवंबर या फिर दिसंबर में अंतिम फैसला लिया जा सकता है। बता दें कि EPFO 3.0 पोर्टल लॉन्च होने के बाद PF का पैसा यूपीआई और एटीएम से निकाल सकेंगे।इसके अलावा बैठक में सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज न्यूनतम पेंशन को भी बढ़ाने पर विचार कर सकता है।वर्तमान में मासिक पेंशन 1,000 रुपये है, जिसे बढ़ाकर 1,500–2,500 रुपये किए जाने की संभावना है। ATM से निकलेगा पीएफ का पैसा     कर्मचारी भविष्य निधि संगठन जल्द EPFO 3.0 लॉन्च करने की तैयारी में है। इससे कर्मचारी सीधे ATM से अपने PF फंड निकाल सकेंगे। यह बिल्कुल बैंक खाते की तरह होगा। इसके लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) को एक्टिवेट करना और आधार को बैंक अकाउंट से लिंक करना जरूरी होगा।  केन्द्र सरकार ने इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी बड़ी कंपनियों को भी शॉर्टलिस्ट किया है, जो डेवलपमेंट और मेंटिनेंस का काम संभालेगी।     ईपीएफओ ATM की सुविधा शुरू करने के लिए बैंकों के साथ-साथ, RBI से भी बात की है। इसके जरिए ऑटोमेटेड PF विड्रॉल और इंटीग्रेटेड ATM सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पीएफ से अकाउंट में सुधार, शिकायतों के निपटारे पैसा निकालना, डाटा अपडेट करना और क्लेम सेटलमेंट और आसान हो जाएगा।इसके लिए UAN नंबर के जरिए लॉगइन और UAN का आधार कार्ड, पैन कार्ड से लिंक अनिवार्य किया जाएगा।     वैसे तो इसे मई जून 2025 में लॉन्च किया जाना था, लेकिन तकनीकी टेस्टिंग और अन्य कारणों के चलते देरी हुई।संभावना है कि दिसंबर अंत तक इस पर फैसला हो सकता है और जनवरी 2026 से इसे लागू किया जा सकता है। PF विड्रॉल के लिए जारी होगा एक विशेष कार्ड     EPFO 3.0 के तहत खाताधारकों को ऑटोमेटेड PF विड्रॉल और इंटीग्रेटेड ATM सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे Google Pay, PhonePe या Paytm जैसे ऐप के जरिए भी पीएफ निकासी हो सकेगी। इससे पीएफ से अकाउंट में सुधार, शिकायतों के निपटारे पैसा निकालना, डाटा अपडेट करना और क्लेम सेटलमेंट और आसान हो जाएगा।इसकी मदद से आप PF अकाउंट का बैलेंस, कॉन्ट्रिब्यूशन को भी ट्रैक कर पाएंगे।     इस नए सिस्टम के तहत ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स को ATM जैसा एक कार्ड इश्यू किया जाएगा। यह कार्ड पीएफ अकाउंट से लिंक होगा, जिससे एटीएम से पीएफ का पैसा निकाल पाएंगे। UPI से पैसा निकालने के लिए अकाउंट को UPI से लिंक कराना होगा।     EPFO 3.0 में सदस्य यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) के जरिए तुरंत PF विड्रॉल कर पाएंगे। इससे इमरजेंसी की स्थिति में कर्मचारियों को बिना किसी जटिल प्रक्रिया के सीधे फंड तक पहुंच मिलेगी।     ईपीएफओ 3.0 सिस्टम के तहत सदस्य अपने अकाउंट हुई गड़बड़ी जैसे कर्मचारी का नाम, डेट ऑफ बर्थ, मोबाइल नंबर, स्थायी पता को भी ऑनलाइन माध्यम से सुधार सकेंगे। इसके लिए OTP वेरिफिकेशन की सुविधा होगी, जिससे पुराने फॉर्म को भरने की जरूरत खत्म हो जाएगी।

मुंबई से अहमदाबाद तक 2 घंटे का सफर, देश की पहली बुलेट ट्रेन कब शुरू होगी?

अहमदाबाद  रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट पर एक बड़ा अपडेट दिया है.  केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के बीच भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना का 50 किलोमीटर का हिस्सा 2027 में शुरू हो जाएगा और 2029 तक मुंबई और अहमदाबाद के बीच का पूरा खंड चालू कर दिया जाएगा. यानी कि 2029 तक भारत में पहली बुलेट ट्रेन चलनी शुरू हो जाएगी.  रेल मंत्री ने कहा कि चालू होने के बाद, बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच की दूरी केवल दो घंटे सात मिनट में तय होगी. उन्होंने कहा कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है. यह जानकारी उन्‍होंने सूरत रेलवे स्‍टेशन के निरीक्षण के दौरान कही. उन्‍होंने यहां पर स्‍टेशन कार्य के अलावा, ट्रैक तैयार होने का कार्य और टर्नआउट इंस्‍टॉलेशन की भी जांच की.  2029 तक देश में दौड़ने लगेगी पहली बुलेट ट्रेन  रेल मंत्री ने कहा कि पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट तेजी से चल रहा है. सूरत और बिलिमोरा के बीच परियोजना का पहला 50 किलोमीटर का खंड 2027 तक शुरू हो जाएगा. हम इसकी तैयारी कर रहे हैं. 2028 तक, पूरा ठाणे-अहमदाबाद खंड चालू हो जाएगा और 2029 तक पूरा मुंबई-अहमदाबाद खंड चालू हो जाएगा. वैष्णव ने बताया कि मुख्य लाइन की गति क्षमता 320 किमी प्रति घंटा और लूप लाइन की 80 किमी प्रति घंटा है.  नए टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल रेल मंत्री ने कहा कि ट्रेनों की सुरक्षित और कुशल आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह ट्रेनों की एक बहुत ही जटिल आवाजाही है, इसलिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. यहां कई वाइब्रेट सिस्‍टम इंस्‍टॉल किए गए हैं, जब भी ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी, तो यूटिलिटी केबल वाइब्रेट को खत्‍म कर देगा और ट्रेन स्‍मूथ चलेगी.  पटरियों के लिए खास सिस्‍टम इंस्‍टॉलेशन  उन्होंने आगे कहा कि पटरियों के भीतर भी, किसी भी वाइब्रेशन को कंट्रोल करने के लिए कई सिस्‍टम तैयार किए गए हैं. इनपर कुछ खास तरह की सुविधाएं जोड़ी गई हैं, ताकि तेज हवा या अचानक भूकंप आने पर भी ट्रेन पूरी तरह स्थिर रहे. वैष्णव ने कहा कि सूरत स्टेशन का पूरा भारी काम पूरा हो चुका है और ट्रैक लिंक के साथ-साथ फिनिशिंग और यूटिलिटी कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.  बुलेट ट्रेन शुरू होने से विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी उन्होंने कहा कि आज, बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत सूरत स्टेशन पर पहला टर्नआउट स्थापित किया गया है. टर्नआउट वह स्थान होता है जहां पटरी या तो जुड़ती है या अलग होती है. यहां कई नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, उदाहरण के लिए, ये रोलर बेयरिंग जिन पर पटरियां चलेंगी. यह भी एक बिल्कुल नई तकनीक है, जिसका हम इस्तेमाल कर रहे हैं.  वैष्णव ने कहा कि महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना मुंबई से अहमदाबाद तक सभी प्रमुख शहरों की अर्थव्यवस्थाओं को एक कर देगी और जापान की तरह विकास को गति देगी, जब पहली बुलेट ट्रेन शुरू हुई थी. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि नए प्रोजेक्‍ट पर जल्द ही काम शुरू हो जाएगा.

अंडमान सी में 300 मीटर गहराई पर मिला नैचुरल गैस का भंडार, केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी

नई दिल्ली  भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता सामने आई है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने ट्विटर पर जानकारी दी कि अंडमान सागर में स्थित श्री विजयपुरम 2 (Sri Vijayapuram 2) कुएं में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का पता चला है. यह कुआं अंडमान द्वीपसमूह के पूर्वी तट से लगभग 17 किलोमीटर (9.20 समुद्री मील) दूर है. कुएं की जलगहराई (Water Depth) 295 मीटर है, यानी यह समुद्र की सतह से 295 मीटर गहरे पानी में स्थित है. इसकी लक्षित गहराई (Target Depth) 2650 मीटर रखी गई थी. इसका मतलब है कि कुएं को पानी की सतह से लेकर समुद्र के नीचे जमीन में कुल 2650 मीटर तक खोदा गया. इसमें 295 मीटर पानी की गहराई और उसके नीचे जमीन में लगभग 2355 मीटर की गहराई शामिल है. शुरुआती उत्पादन परीक्षण (Initial Production Testing) से पता चला कि 2212 से 2250 मीटर की गहराई में प्राकृतिक गैस मौजूद है और इसमें समय-समय पर फ्लेयरींग (Intermittent Flaring) भी देखा गया. मीथेन गैस मिली गैस के नमूनों (Gas Samples) को जहाज के माध्यम से काकिनाडा (Kakinada) लाया गया, जहां उनका परीक्षण किया गया. जांच में सामने आया कि इस गैस में 87% मीथेन (Methane) है. मीथेन एक उच्च ऊर्जा क्षमता वाला घटक है और इसे वाणिज्यिक उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. अंडमान सागर में खोज का महत्व अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस की यह खोज भारत के ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिहाज से अहम है. इससे देश की ऊर्जा जरूरतों को स्थानीय स्रोतों से पूरा करने में मदद मिलेगी और आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम होगी. आने वाले कदम केंद्रीय मंत्री के अनुसार, अब कुएं से कमर्शियल प्रोडक्शन योजना तैयार की जाएगी. यह चरण देश की ऊर्जा रणनीति में एक नया आयाम जोड़ सकता है और अंडमान-निकोबार क्षेत्र में ऊर्जा निवेश के अवसर भी बढ़ाएगा. ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक लाभ इस खोज से न केवल घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि यह क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करने में भी मदद करेगा. मीथेन की उच्च प्रतिशतता इस परियोजना को वाणिज्यिक रूप से आकर्षक बनाती है और भविष्य में एलएनजी (LNG) निर्यात के रास्ते भी खोल सकती है. कुल मिलाकर, श्री विजयपुरम 2 कुएं में प्राकृतिक गैस की पुष्टि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है और यह देश को आत्मनिर्भर ऊर्जा स्रोतों की ओर एक कदम और आगे ले जाएगी.

ट्रंप के साथ मुस्कुराते जेलेंस्की: क्या यह संकेत है अमेरिका से मजबूत समर्थन का?

कीव  रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ की तस्वीर शेयर की। पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी यूएनजीए में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सुरक्षा की गारंटी का मुद्दा उठाया था। जेलेंस्की ने शांति और सुरक्षा की बात करते हुए दावा किया कि शांति अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं, बल्कि हथियार तय करते हैं। जेलेंस्की ने कहा, "आप भी उतनी ही सुरक्षा और शांति चाहते हैं जितनी आज हम (यूक्रेन) चाहते हैं। सुरक्षा की गारंटी हमारे (यूक्रेन) अलावा कोई नहीं दे सकता। केवल मजबूत गठबंधन, केवल मजबूत साझेदार और केवल हमारे अपने हथियार, 21वीं सदी अतीत से बहुत अलग नहीं है। अगर कोई राष्ट्र शांति चाहता है तो उसे अभी भी हथियारों पर काम करना होगा। अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं, सहयोग नहीं, बल्कि हथियार तय करते हैं कि कौन बचेगा।" उन्होंने आगे कहा, "फिलिस्तीन, सोमालिया और सूडान में जो कुछ हुआ उसे रोकने में कोई भी एक अंतरराष्ट्रीय संस्था सामने नहीं आई, जिससे किसी भी आक्रमण को वास्तव में रोका जा सके।" गाजा का जिक्र कर अंतरराष्ट्रीय संगठन को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा, "सूडान, सोमालिया, फिलिस्तीन या दशकों से युद्ध झेल रहा कोई भी अन्य संयुक्त राष्ट्र या वैश्विक व्यवस्था से क्या उम्मीद कर सकता है, सिर्फ बयानों और बयानों के अलावा? इतने सारे बदलावों के बाद भी, सीरिया को अपनी अर्थव्यवस्था को चौपट कर रहे प्रतिबंधों में ढील देने के लिए दुनिया से अपील करनी पड़ रही है। उसे मांग करनी होगी और इंतजार करना होगा। सीरिया की मदद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को करनी चाहिए।" इसके बाद उन्होंने रूस-यूक्रेन जंग का जिक्र किया। बोले, "मेरे देश के खिलाफ रूस का युद्ध जारी है, हर हफ्ते लोग मर रहे हैं, फिर भी युद्धविराम नहीं हो पा रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल जापोरिज्जिया बिजली संयंत्र पर रूसी हमले के परिणामस्वरूप होने वाले विकिरण के खतरे को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन तब से कुछ भी नहीं बदला है। उन्होंने कहा, "रूस ने गोलाबारी बंद नहीं की, यहां तक कि परमाणु संयंत्र के पास के इलाकों में भी नहीं। और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इतनी कमजोर हैं कि यह पागलपन जारी है।"

बीटीसी चुनाव परिणाम: असम में विपक्ष को बढ़ा मनोबल, भाजपा हारी सत्ता

नई दिल्ली बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) के चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को करारा झटका लगा है। परिषद में पिछले पांच वर्षों से विपक्ष में रही बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने इस बार 40 में से 28 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। भाजपा को पांच और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) को सात सीटें मिली हैं, जो पांच-छह महीने बाद होने वाले असम विधानसभा चुनाव में भाजपा-यूपीपीएल गठबंधन के लिए सबक है। बीटीसी चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जाता है। बीपीएफ की जीत संकेत देती है कि विधानसभा का मुकाबला आसान नहीं होगा और भाजपा को सत्ता में वापसी के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी होगी। क्यों अहम है बीटीसी का चुनाव? असम की राजनीति में बीटीसी चुनाव का असर हमेशा विधानसभा पर दिखता रहा है, क्योंकि 126 में से 19 विधानसभा सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं। यही वजह है कि यहां का जनादेश पूरे राज्य की दिशा तय करता है। इस बार बीपीएफ ने जिस तरह भाजपा और यूपीपीएल को पछाड़ते हुए प्रचंड जीत दर्ज की है, उसने विपक्ष को नई ऊर्जा और हौसला दिया है। ताजा नतीजों ने तोड़ा मिथक भाजपा ने पिछले एक दशक में असम की राजनीति में गहरी पैठ बनाई थी। लोकसभा और विधानसभा में लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उसे भरोसा दिला दिया था कि विपक्ष उसके सामने टिक नहीं पाएगा। लेकिन बीटीसी का ताजा परिणाम इस मिथक को तोड़ता दिखता है। संदेश साफ है कि मतदाता स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहे हैं। कांग्रेस की जगी उम्मीदें पिछले चुनाव में भाजपा ने बीपीएफ के साथ गठबंधन कर परिषद का चुनाव लड़ा था। बीपीएफ को 17 और भाजपा को नौ सीटें मिली थीं। हालांकि, परिणाम आने के बाद भाजपा ने बीपीएफ से नाता तोड़कर 12 सदस्यों वाली यूपीपीएल के साथ गठबंधन कर लिया। इसके बाद बीपीएफ पांच वर्षों तक विपक्ष में रही। बदले हालात में विधानसभा चुनाव में बीपीएफ भाजपा के साथ हाथ मिलाने के लिए शायद ही तैयार हो पाए। ऐसे में बीटीसी चुनाव में खाता भी नहीं खोल सकी कांग्रेस को बीपीएफ से नई उम्मीदें मिल सकती हैं। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में 126 में से 29 सीटें जीती थीं। बीटीसी के नतीजों ने बीपीएफ के साथ-साथ पूरे विपक्ष को मजबूती दी है। कांग्रेस और एआईयूडीएफ जैसे दल इसे भाजपा के खिलाफ बढ़ते असंतोष के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि विधानसभा चुनाव में सभी भाजपा विरोधी दल एकजुट होकर उतरते हैं, तो सत्तारूढ़ गठबंधन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। भाजपा के लिए चुनौती भाजपा के लिए यह हार केवल परिषद की सत्ता गंवाने तक सीमित नहीं है। रणनीतिक दृष्टि से अहम इस क्षेत्र में झटका विधानसभा चुनाव को भी प्रभावित कर सकता है। यहां की नाराजगी राज्य के अन्य हिस्सों तक असर डाल सकती है। भाजपा ने यूपीपीएल के साथ गठबंधन को स्थानीय समीकरण साधने का जरिया माना था, लेकिन नतीजों ने दिखा दिया कि यह फॉर्मूला काम नहीं आया। अब भाजपा को अपने संगठन और कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करना होगा। संदेश साफ है कि मतदाता स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व को तवज्जो देते हैं।  

UNSC सुधार पर भूटान का समर्थन, भारत और जापान की स्थायी सीट की वकालत

न्यूयॉर्क  संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र में भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की अपनी मांग को फिर से दोहराया। महासभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री तोबगे ने संयुक्त राष्ट्र को एक ऐसे निकाय के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, "भूटान एक ऐसे संयुक्त राष्ट्र में विश्वास करता है जो प्रतिनिधित्वपूर्ण, उत्तरदायी और प्रभावी हो। हम ऐसे बहुपक्षवाद की कामना करते हैं जो केवल समाधान ही नहीं, बल्कि परिणाम भी प्रदान करे। यही कारण है कि भूटान संयुक्त राष्ट्र के सुधार का समर्थन करता है, जिसमें स्थायी और अस्थायी, दोनों प्रकार की सदस्यता का विस्तार शामिल है। सुरक्षा परिषद में भारत और जापान जैसे योग्य राष्ट्रों के अलावा अन्य सक्षम और अग्रणी देशों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि आज की जटिल वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित किया जा सके।" यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री तोबगे ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया है। इससे पहले भी उन्होंने भारत के मजबूत आर्थिक विकास, कूटनीतिक नेतृत्व और वैश्विक दक्षिण में बढ़ती भूमिका को सुरक्षा परिषद में शामिल होने के लिए मजबूत योग्यता के तौर पर रेखांकित किया था। भूटान लगातार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की वकालत करता रहा है और वर्तमान संरचना को प्रतिनिधित्वहीन बताता रहा है। तोबगे ने अपने पिछले बयान को दोहराते हुए कहा है कि सुरक्षा परिषद अपने वर्तमान स्वरूप में "अतीत का अवशेष" है और इसे वर्तमान भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप बदला जाना चाहिए। भूटान लंबे समय से यूएनएससी में सुधार की वकालत कर रहा है ताकि इसे ज्यादा प्रभावशाली बनाया जा सके। यूएनएससी में सुधार की मांग दुनिया के अन्य कई देशों ने भी की है। वहीं भूटान ने भारत और जापान को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने की वकालत कर इस मांग को और बुलंद कर दिया है।

इस्लामिक देश में स्वास्थ्य संकट: मासूमों पर मंडराया खतरा, 20 की मौत और 2600 बीमार

इंडोनेशिया इंडोनेशिया, जो दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है, इस समय खसरे (Measles) की महामारी से जूझ रहा है। इंडोनेशिया के मदुरा द्वीप के सुमेनेप शहर में खसरे का प्रकोप जारी है। पिछले नौ महीनों में  यहां 2600 से अधिक बच्चे संक्रमित हो चुके हैं और अब तक 20 मासूमों की जान जा चुकी है। इस्लामधर्म  बना सबसे बड़ी बाधा सरकार घर-घर जाकर बच्चों को खसरे का टीका लगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन मुस्लिम समुदाय के कई माता-पिता टीकाकरण से पीछे हट रहे हैं। वजह है कि कुछ टीकों में सूअर से प्राप्त जिलेटिन का इस्तेमाल "स्टेबिलाइज़र" के रूप में किया जाता है, जिसे इस्लाम में हराम माना जाता है।   विद्वानों का मत 2018 में इंडोनेशियाई धार्मिक नेताओं (उलेमा काउंसिल) ने फैसला सुनाया था कि जिलेटिन वाले टीके हराम हैं, लेकिन जब तक वैकल्पिक दवा उपलब्ध न हो, तब तक इन्हें इस्तेमाल करने की इजाज़त है। इसके बावजूद, कई माता-पिता अब भी बच्चों को टीके नहीं लगवा रहे। सरकार और WHO की चेतावनी स्वास्थ्य विभाग ने अगस्त से 78,000 से अधिक टीके घरों, स्कूलों और क्लीनिकों में उपलब्ध कराए हैं। WHO ने साफ कहा है “टीकाकरण से दूरी बच्चों की जान के लिए खतरा है।” अगर लोग इस हिचकिचाहट को दूर नहीं करेंगे तो खसरे जैसी बीमारी और जानें ले सकती है।

यूक्रेन की साज़िश? जेलेंस्की पर आतंकवाद फैलाने के आरोप UN में गूंजे

यूक्रेन  संयुक्त राष्ट्र महासभा में माली के प्रधानमंत्री अब्दुलाये मैगा ने  यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की का काला चेहरा बेनकाब करते हुए आरोप लगाया कि यूक्रेन अब दुनिया भर के आतंकवादी समूहों के लिए कमिकेज़ ड्रोन का मुख्य सप्लायर बन गया है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में कुछ पश्चिमी देशों को यूक्रेन को हथियार की आपूर्ति रोक देनी चाहिए, वरना वे अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के फैलाव में योगदान कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मैगा ने याद दिलाया कि यूक्रेन ने जुलाई 2024 में माली की सुरक्षा बलों पर टिंज़ाउतेन क्षेत्र में हुए हमले में अपनी भागीदारी को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था। उन्होंने कहा,"24-26 जुलाई 2024 को माली के किडाल क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर हुए हमले के बाद, हमने इस घटना और यूक्रेनी अधिकारियों के सार्वजनिक बयानों की कड़ी निंदा की। दुर्भाग्य से, यूक्रेनी अधिकारी अंतरराष्ट्रीय मंच को थिएटर समझ बैठे हैं।"इस घटना के बाद अगस्त 2024 में माली ने यूक्रेन के साथ राजनयिक संबंध तोड़ दिए थे। यह निर्णय यूक्रेन की रक्षा मंत्रालय की इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रतिनिधि अंद्रेय यूसोव और सेनेगल में यूक्रेनी राजदूत यूरी पिवोवारोव के हमले में कथित शामिल होने के बयानों के बाद लिया गया।   माली के एक आतंकवाद विरोधी अभियोजन अधिकारी ने बताया कि यूक्रेनी अधिकारियों के बयानों के मद्देनजर आतंकवाद को समर्थन देने की संभावित जांच शुरू की गई है। रूसी विदेश मंत्रालय spokeswoman मारिया ज़ाखारोवा ने स्पुतनिक को बताया कि कीव उन अफ्रीकी देशों में आतंकवादी समूहों का समर्थन कर रहा है, जो रूस के दोस्त हैं, क्योंकि यूक्रेन मैदान में रूस को हराने में असफल रहा है।   

जानिए कैसे मोदी सरकार की नई योजना से मिलेगा रिटायरमेंट में आरामदायक जीवन

नई दिल्ली  आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता अपने बुढ़ापे को लेकर होती है। कामकाजी जीवन के दौरान तो किसी तरह खर्च पूरे हो जाते हैं लेकिन रिटायरमेंट बाद जब आय का कोई स्थायी साधन नहीं होता, तब आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे समय में सरकार की अटल पेंशन योजना (APY) काम आ सकती है। अटल पेंशन योजना के तहत 18 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक का कोई भी भारतीय नागरिक जुड़ सकता है। योजना में निवेशक को हर महीने एक तय राशि जमा करनी होती है, जो उनकी उम्र और चुनी गई पेंशन राशि के हिसाब से निर्धारित होती है। निवेशक 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद इस योजना से ₹1000, ₹2000, ₹3000, ₹4000 या ₹5000 प्रति माह पेंशन प्राप्त कर सकता है। योजना की सबसे खास बात यह है कि यदि किसी निवेशक की मृत्यु हो जाती है तो उसके पति या पत्नी को उतनी ही पेंशन मिलती रहेगी। वहीं, पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद उनके नॉमिनी को वापस कर दी जाती है। अटल पेंशन योजना का एक और फायदा यह है कि इसमें सरकार की गारंटी होती है। यानी निवेशक को भविष्य में तय पेंशन निश्चित रूप से मिलेगी। किस उम्र में निवेश करना सही? अगर कोई व्यक्ति 18 साल की उम्र में अटल पेंशन योजना से जुड़ता है और उसे भविष्य में ₹5000 की पेंशन चाहिए तो उसे हर महीने लगभग ₹210 का योगदान करना होगा। इसी तरह अगर 30 साल की उम्र में जुड़ता है तो योगदान राशि लगभग ₹577 होगी। 40 साल की उम्र में जुड़ने वाले को यह योगदान ₹1454 तक करना पड़ सकता है। मतलब जितनी जल्दी योजना से जुड़ेंगे, उतना ही कम निवेश करना होगा। अटल पेंशन योजना खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जैसे- किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार, ठेला-रेहड़ी चलाने वाले लोग आदि। इस योजना से उन्हें बुढ़ापे में भी स्थायी आय का स्रोत मिल सकता है।