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हिमाचल में मानसून का तांडव! भारी बारिश से जनजीवन ठप, चेतावनी जारी

हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश इन दिनों मौसम के भीषण प्रकोप से जूझ रहा है। एक ओर पहाड़ों पर बर्फबारी ने सर्द हवाओं की दस्तक दी है, तो दूसरी ओर बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। खासकर लाहौल-स्पीति जिले में जुलाई के महीने में ही तीसरी बार हिमपात देखने को मिला है। शुक्रवार को शिंकुला, बारालाचा और तंगलंगला दर्रों पर ताजा बर्फबारी ने पहाड़ों को सफेद चादर से ढक दिया। लगातार हो रही बारिश से बिगड़े हालात प्रदेश के कई जिलों — शिमला, मंडी, सिरमौर, कांगड़ा, कुल्लू और सोलन — में लगातार हो रही बारिश के कारण सड़कों, पुलों और पेयजल योजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। लगभग 250 सड़कें बंद हैं, जिनमें अकेले मंडी जिले में 182 सड़कें बाधित हैं। इसके अलावा सिरमौर में 26, कुल्लू में 23, कांगड़ा में 10, सोलन में 6, ऊना में 3 और चंबा में 2 सड़कें बंद पड़ी हैं। जल जीवन मिशन पर भी असर भारी वर्षा और लैंडस्लाइड के कारण 137 पेयजल योजनाएं ठप हो गई हैं। मंडी जिले में 113 और कांगड़ा में 18 स्कीमें प्रभावित हैं, जिससे आम जनजीवन खासा प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग का अलर्ट: भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने आगामी 21, 22 और 23 जुलाई के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। कांगड़ा, शिमला, सोलन, मंडी और सिरमौर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है। इस दौरान अचानक बाढ़ जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है। हालांकि 19 और 20 जुलाई को राज्य के अधिकतर हिस्सों में मौसम थोड़ा साफ रहने की संभावना है, लेकिन कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।   अब तक 112 लोगों की जान जा चुकी है 20 जून से अब तक, यानी मानसून की शुरुआत से लेकर 17 जुलाई तक, प्रदेश में 112 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 67 लोगों की मौत बारिश और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं में हुई है, जबकि 45 लोग सड़क हादसों में जान गंवा चुके हैं। अब तक का नुकसान 1200 करोड़ से अधिक राज्य आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन के अनुसार, अब तक बारिश और इससे जुड़े हादसों से 1221 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। इसमें: लोक निर्माण विभाग को 546 करोड़ जलशक्ति विभाग को 434 करोड़ कृषि और बागवानी को लगभग 40 करोड़ का नुकसान हुआ है। प्रशासन की अपील प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, पहाड़ी क्षेत्रों में न जाएं और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

हंगामेदार होगा मानसून सत्र! विश्लेषकों ने बताया किन मुद्दों पर गरजेंगे नेता

नई दिल्ली  संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होने वाला है और 21 अगस्त तक दोनों सदनों की कुल 21 बैठकें होंगी। सरकार की तरफ से इस सत्र में कई विधेयक पेश किए जाएंगे। इसमें से कुछ मुद्दे ऐसे है जिस पर हंगामा हो सकता है। इसमें पहलगाम से लेकर बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक कई मुद्दे शामिल है।    संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। पहले यह सत्र 12 अगस्त तक चलने वाला था, अब इसे बढ़ा दिया है। इस सत्र में कई मुद्दों पर हंगामा हो सकता है। इसमें भारत-पाकिस्तान संघर्ष से लेकर बिहार में मतदाता सूची के पुनर्निरीक्षण और डोनाल्ड ट्रंप के भारत से जुड़े मुद्दों पर लगातार दिए जा रहे बयानों से लेकर पहलगाम में सुरक्षा तक के मुद्दे पर सियासी तीर चल सकते हैं। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, सुनील शुक्ल, अवधेश कुमार, विजय त्रिवेदी और बिलाल सब्जवारी मौजूद रहे। विजय त्रिवेदी: बिल पास कराना इस सत्र का मुद्दा नहीं है। अहम ये है कि जो मामले इस दौरान उठाए जाएंगे। चाहे ट्रंप का ही मुद्दा ही क्यों न हो। ट्रंप जो कहते रहे हैं उस पर चर्चा जरूर होगी। हमारी डिप्लोमेसी में जो बदलाव आया है उसे देखने की जरूरत है। संसद का सत्र होगा तो पहलगाम पर चर्चा पर होगी, ऑपरेशन सिंदूर पर भी चर्चा होगी। ये भी पूछा जाएगा कि पहलगाम के आतंकी कहां हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीजफायर का बटन अचानक क्यों दबाया गया इस पर सवाल पूछे जाएंगे।    अवधेश कुमार:  नेता प्रतिपक्ष ने 2024 के चुनाव बाद से जिस तरह का रुख दिखाया है मैं उसमें कोई बदलाव नहीं देखता हूं। देश में बाहर की राजनीति में और अंदर की राजनीति में सीमाएं टूट चुकी हैं।  अगर ट्रंप की बात आएगी तो जी-7 के बाद की बात भी आएगी। चुनाव आयोग की बात आएगी उसका भी जवाब कई बार दिया जा चुका है। क्या यह तथ्य नहीं कि वहां से लोग पकड़े गए हैं। बिहार चुनाव से पहले यह सत्र हो रहा है तो उसका असर इसमें जरूर दिखेगा। चीजों पर तथ्यात्मक बहस हो मैं यह जरूर चाहूंगा।  सुनील शुक्ल:  जो संघर्ष विराम हुआ उसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्यों की? उसके बाद क्यों संघर्ष विराम की घोषणा हुई? बिहार में जो मतदाता सूची का पुनर्निरीक्षण हो रहा वो मुद्दा भी उठेगा। बिहार बंद के दौरान भी ये दिखाई दिया। इस सत्र में विपक्ष के पास बहुत से मुद्दे हैं। मुझे उम्मीद है कि विपक्ष इन मुद्दों को अच्छे से उठा पाएगा।  बिलाल सब्जवारी: ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला सत्र होने जा रहा है। सेना की सफलता से लेकर अल्पकालिक कूटनीतिक विफलता तक पर बात होगी। कुल मिलाकर संसद सत्र के दौरान राजनीति दोनों तरफ से होगी। टकराव दोनों तरफ से होगा। नैरेटिव भी दोनों तरफ से गढ़े जाएंगे, लेकिन अंत में बिल भी पास हो जाएंगे।  विनोद अग्निहोत्री:  सोमवार से शुरू हो रहा सत्र बहुत तूफानी और हंगामेदार होगा। किसी भी बिल को पास कराने में सरकार को दिक्कत नहीं होगी। वहीं, विपक्ष के पास भी बहुत से मुद्दे हैं। विपक्ष अगर हंगामा करने की जगह नियम के तहत अपनी बात रखेगा तो ज्यादा बेहतर होगा। विपक्ष के सामने चुनौती अपने को एकजुट रखने की भी है। विपक्ष के सामने चुनौती होगी कि वो कैसे सरकार विरोधी दलों को मुद्दों पर एकजुट रखे।

E20 फ्लाइंग टैक्सी डील: UAE और चीन ने मिलाया हाथ, इलेक्ट्रिक एविएशन में बड़ी छलांग

दुबई  चीन ने इलेक्ट्रिक और हवाई तकनीक में एक बड़ी छलांग लगाई है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने चीन की E20 फ्लाइंग टैक्सियों के लिए 1 अरब डॉलर का सौदा किया है, जिसमें 350 टैक्सियां शामिल हैं. यह अब तक का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) ऑर्डर है. ये टैक्सियां 5 सीटों वाली हैं, 320 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ सकती हैं. 200 किमी की रेंज रखती हैं. यह सौदा चीन के इलेक्ट्रिक विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.  कैसे होगी बुकिंग? लोग मोबाइल ऐप से एयर टैक्सी बुक कर सकेंगे। यह Uber की तरह ही होगा। Joby, Uber का ग्लोबल पार्टनर है। इसलिए मुमकिन है कि लोग एक ही ऐप से टैक्सी बुक कर सकें, उसमें चढ़ सकें और पैसे भी दे सकें। धीरे-धीरे, यह सेवा होटलों और खास जगहों तक भी पहुंच जाएगी। इससे एयरपोर्ट से सीधे अपनी मंजिल तक जाना आसान हो जाएगा। कितना होगा किराया? अभी तक किराये की सही जानकारी नहीं मिली है। लेकिन Conde Nast Traveller के अनुसार Joby का अनुमान है कि एक ट्रिप का किराया लगभग 75 डॉलर (करीब 6464 रुपये) होगा। यह उबर ब्लैक की महंगी राइड जैसा होगा। टैक्सी के अंदर कांच की दीवारें और छत तक विंडशील्ड होगी। इससे उड़ान के दौरान दुबई शहर का शानदार नजारा देखने को मिलेगा। कितने यात्री बैठ सकेंगे? जॉबी का कहना है कि एयर टैक्सी की सैकड़ों टेस्ट उड़ानें हो चुकी हैं। ये उड़ानें 60,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक हुई हैं। सभी विमानों को लाइसेंस वाले पायलट उड़ाएंगे। कंपनी का कहना है कि लोगों के लिए शुरू करने से पहले सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। हर एयर टैक्सी में एक पायलट और चार यात्री बैठ सकेंगे। इसकी टॉप स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। E20 फ्लाइंग टैक्सी क्या है? E20 एक आधुनिक इलेक्ट्रिक विमान है, जो वर्टिकल टेकऑफ कर सकता है. बिना रनवे के उतर सकता है. इसे शंघाई की TCab टेक्नोलॉजी कंपनी ने बनाया है. इसकी खासियतें हैं…     सीटें: 5 लोग (1 पायलट और 4 यात्री).     रफ्तार: अधिकतम 320 किमी/घंटा.     रेंज: 200 किमी तक उड़ान.     वजन: हल्का और पर्यावरण के लिए सुरक्षित.     डिजाइन: टिल्ट-रोटर तकनीक, जो इसे हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज का मिश्रण बनाती है. यह टैक्सी शोर कम करती है. प्रदूषण भी कम करती है, जो इसे शहरों के लिए आदर्श बनाता है. यूएई और चीन का सौदा यह सौदा पिछले साल चीन इंटरनेशनल इम्पोर्ट एक्सपो में शुरू हुई साझेदारी का नतीजा है. यूएई की कंपनी ऑटोक्राफ्ट ने TCab टेक्नोलॉजी के साथ 350 E20 टैक्सियों के लिए करार किया. पहली डिलीवरी तभी होगी, जब चीन की सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAAC) से एयरवर्थीनेस सर्टिफिकेट मिलेगा. यह सौदा मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में कम ऊंचाई वाले पर्यटन और शहरी हवाई गतिशीलता के लिए होगा. चीन के लिए यह क्यों खास है? चीन ने अपने ‘लो-ऑल्टिट्यूड इकोनॉमी’ प्रोग्राम के तहत इस तकनीक को बढ़ावा दिया है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक 1 लाख ड्रोन और eVTOL विमान हवा में लाना है. E20 का सौदा दिखाता है कि चीन की तकनीक अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसा जीत रही है. इसके पीछे चीन की सस्ती एविएशन और बैटरी सप्लाई चेन है, जो इसे यूरोप और अमेरिका से सस्ता बनाती है. यूएई को क्या फायदा? यूएई, जो पर्यटन और आधुनिक तकनीक में आगे है, इस सौदे से कई लाभ लेगा…     पर्यटन: दुबई और अबू धाबी में हवाई पर्यटन को नया रूप मिलेगा.     शहरी यातायात: भीड़भाड़ से बचने के लिए हवाई टैक्सी सेवा शुरू हो सकती है.     आर्थिक विकास: यह सौदा UAE की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा और नई नौकरियां पैदा करेगा. चुनौतियां और भविष्य इस तकनीक को लागू करने में रेगिस्तानी मौसम, नियामक मंजूरी और बुनियादी ढांचे की जरूरतें चुनौती हैं. फिर भी, TCab टेक्नोलॉजी का प्लान अबू धाबी से शुरू कर आसपास के शहरों तक विस्तार करना है. कुछ लोग मानते हैं कि यह सौदा चीन को इलेक्ट्रिक विमानन में विश्व नेता बना सकता है.

इंटरनेट स्पीड में सबसे आगे निकला यह देश, चौंक गए जापान और अमेरिका भी

जापान  जापान ने हाल ही में इंटरनेट स्पीड के मामले में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। जापान के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (NICT) के वैज्ञानिकों ने दुनिया की अब तक की सबसे तेज़ इंटरनेट स्पीड का परीक्षण कर सबको चौंका दिया है। वैज्ञानिकों ने 1.02 पेटाबिट्स प्रति सेकंड यानी लगभग 1,27,500 Gbps की स्पीड से इंटरनेट डेटा ट्रांसफर करके एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यह स्पीड अमेरिका के औसत होम ब्रॉडबैंड की स्पीड से लगभग 30 लाख गुना अधिक है। यह सफलता एक खास ऑप्टिकल फाइबर टेक्नोलॉजी के ज़रिए संभव हो सकी है, जो भविष्य में इंटरनेट की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकती है। हालांकि, इतना तेज़ इंटरनेट हासिल करने के बावजूद जापान का नाम फिलहाल उन देशों की सूची में शामिल नहीं है जो इंटरनेट सर्विस स्पीड में सबसे आगे हैं। Speedtest Global Index की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल इंटरनेट स्पीड के मामले में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शीर्ष पर है, जहां औसत मोबाइल इंटरनेट स्पीड 546.14 Mbps है। वहीं, होम ब्रॉडबैंड इंटरनेट की बात करें तो सिंगापुर पहले स्थान पर है, जहां की औसत स्पीड 393.15 Mbps है। भारत, अमेरिका, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भले ही दुनिया में सबसे अधिक इंटरनेट उपयोग करने वाले देशों में शामिल हैं, लेकिन इंटरनेट की औसत स्पीड के मामले में यह देश अभी भी पीछे हैं। भारत की क्या स्थिति है? भारत की स्थिति देखें तो मोबाइल इंटरनेट स्पीड में देश ने 26वां स्थान प्राप्त किया है और औसत स्पीड 133.51 Mbps है। लेकिन होम ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में भारत काफी पिछड़ा हुआ है और 98वें स्थान पर है, जहां औसत ब्रॉडबैंड स्पीड केवल 59.51 Mbps है। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में भारत नेपाल से भी पीछे है। नेपाल 88वें स्थान पर है और वहां की औसत ब्रॉडबैंड स्पीड 77.90 Mbps दर्ज की गई है। यह स्थिति भारत के टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक संकेत है कि अभी भी ब्रॉडबैंड इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्पीड सुधारने के लिए बहुत काम करना बाकी है।

सर्जिकल स्ट्राइक जैसे वार से नहीं उभर पाया पाकिस्तान, एयरबेस पर ताले दो महीने से ज्यों के त्यों

इस्लामाबाद  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की ओर से किए गए हमले में पाकिस्तान के रहीम यार खान एयरबेस का इकलौता रनवे पूरी तरह बर्बाद हो गया था. इस एयरबेस पर हुए नुकसान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका रनवे अभी तक बंद है. पाकिस्तान ने तीसरी बार इस रनवे की मरम्मत के चलते उड़ान संचालन पर रोक को आगे बढ़ा दिया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारतीय हमले से हुए नुकसान की गंभीरता काफी ज्यादा थी. पाकिस्तान की ओर से हाल ही में जारी की गई NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) में कहा गया है कि रहीम यार खान एयरबेस का रनवे अब 5 अगस्त तक उड़ानों के लिए बंद रहेगा. नोटिस में कोई ठोस वजह नहीं दी गई है, सिर्फ यह कहा गया है कि मरम्मत का काम जारी है. 10 मई को जारी की गई थी नोटिस पहली NOTAM 10 मई को जारी की गई थी, यानी उसी दिन जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हवाई हमले किए थे. नोटिस में बताया गया था कि पंजाब प्रांत में स्थित इस रणनीतिक एयरबेस का रनवे एक हफ्ते तक संचालन के लिए अनुपलब्ध रहेगा. फिर 4 जून को दूसरी NOTAM जारी कर प्रतिबंध की अवधि 4 जुलाई तक बढ़ा दी गई. मिलिट्री एयरबेस भी और इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी आजतक को मिलीं हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों में यह साफ देखा जा सकता है कि एयरबेस के रनवे के बीचोंबीच एक बड़ा और गहरा गड्ढा बन गया है. इसके अलावा, एयरबेस की एक इमारत को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है. गौरतलब है कि रहीम यार खान एक ऐसा एयरपोर्ट है जहां सैन्य हवाई अड्डे के साथ-साथ शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी स्थित है. पीएम मोदी ने भी रैली में किया था जिक्र यह एयरबेस उन 11 सैन्य ठिकानों में शामिल था जिन्हें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत निशाना बनाया था. यह ऑपरेशन कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) के जवाब में किया गया था. भारत के इन हमलों के बाद ही पाकिस्तान ने सीजफायर के लिए संपर्क किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजस्थान के बीकानेर में एक चुनावी रैली के दौरान इस एयरबेस का जिक्र करते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान का रहीम यार खान एयरबेस आज भी ICU में पड़ा है, पता नहीं कब तक ठीक होगा.'

कूटनीति में भारत का संतुलन: अमेरिका की चाहत पर रूस से दूरी नहीं

नई दिल्ली  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध की आड़ में भारत पर निशाना साधा है और खुली धमकी भी दे डाली है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि प्रेसीडेंट ट्रंप चाहते हैं कि जो देश रूस से तेल खरीदेंगे, उन पर पाबंदी लगाई जा सकती है। इससे पहले अमेरिका की अगुवाई वाले सैन्य गठबंधन नाटो यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के महासचिव मार्क रुट ने भारत, ब्राजील और चीन को खुली धमकी दे डाली थी। इससे पहले भारत ने अपना रुख एकदम साफ कर दिया था। भारत ने कहा था कि इस मामले में दोहरा मापदंड नहीं चलेगा। रूस ने हमेशा से ही भारत का साथ दिया है। वह आजादी के समय से ही भारत का साथ देता है। भारत के विकास में रूस का काफी योगदान है। आइए-समझते हैं। भारत ने कहा-दोहरा मापदंड नहीं चलेगा, हमें कोई टेंशन नहीं इन धमकियों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे लोगों के लिए ऊर्जा की जरूरतें पूरी करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हमें इस मामले में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड से बचना चाहिए। वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध संघर्ष और मध्य-पूर्व में तनाव जैसे वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवधानों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए सक्रिय रूप से कच्चे तेल के आयात स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 40 देशों तक कर दिया है। इसीलिए रूस पर पाबंदी जैसी किसी कार्रवाई से हम चिंतित नहीं हैं। रूस तो फाइटर भी दे रहा है और सोर्स कोड भी WIKIPEDIA के अनुसार, रूस यानी पूर्व सोवियत संघ भारत की स्वतंत्रता के समय से कई मौकों पर भारत के लिए मददगार रहा है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया था, जिससे भारत की स्थिति मजबूत हुई थी। साथ ही शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ भारत का एक प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता देश था। इससे भारत को अपनी सैन्य क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिली। जबकि इन दोनों ही मौकों पर अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया था। ये भारत को भूलना नहीं चाहिए। इसीलिए आज भी भारत अमेरिका के मुकाबले रूस पर ज्यादा भरोसा करता है। हाल ही में रूस ने अपना SU-57 फाइटर जेट देने की पेशकश भी की है और उसका सोर्स कोड भी। वहीं, अमेरिका और फ्रांस कभी भी अपना इंजन और सोर्स कोड देने से कतराते रहे हैं। 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध में दिया साथ विकीपीडिया के मुताबिक, पूर्व सोवियत संघ ने 1971 के युद्ध में भारत का समर्थन किया। उस वक्त भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) को पाकिस्तान से आजादी दिलाने में मदद की थी। सोवियत संघ ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के खिलाफ किसी भी प्रस्ताव पर वीटो कर दिया, जिससे भारत को अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने में मदद मिली। वहीं, अमेरिका ने 71 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान की मदद के लिए समंदर में अपना जंगी बेड़ा उतार दिया था। शीत युद्ध के दौरान रूस ने दिए हथियार तत्कालीन सोवियत संघ ने शीत युद्ध के दौरान भारत को खूब हथियार दिए। वह भारत के लिए प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता देश था। इसने भारत को टैंक, विमान, मिसाइल और अन्य सैन्य उपकरण प्रदान किए, जिससे भारत को अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिली। देश के आर्थिक विकास में भी रूसी झलक सोवियत संघ ने भारत को आर्थिक विकास में भी मदद की, विशेष रूप से भिलाई और बोकारो जैसे स्टील फैक्ट्रियों की स्थापना में। इसके अलावा, रूस की योजनाओं की ही तर्ज पर पंचवर्षीय योजनाएं भी शुरू की गई थीं। जो अब जारी नहीं हैं। भारत के विकास में रूसी समाजवाद की झलक भी दिखाई देती है। अंतरिक्ष में भी रूस ने मजबूती से बढ़ाया हाथ पूर्व सोवियत संघ ने 1984 में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा को अंतरिक्ष में भेजने में भी मदद की थी। इसके अलावा, भारत के कई अंतरिक्ष मिशनों के लिए अपने रॉकेट भी दिए। सैटेलाइट विकास में भी जमकर सहयोग किया। दोनों देशों के बीच आज है बहुपक्षीय सहयोग भारत और रूस आज भी संयुक्त राष्ट्र, जी20, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे कई बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम कर रहे हैं। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का भी समर्थन किया है। हालांकि, दोनों देशों के बीच संबंध बीच में असहज भी रहे, मगर वो जल्द ही पटरी पर लौट आए। ट्रंप ने क्यों बौखलाए, पहले इसे समझिए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने गुरुवार को कहा, अगर 50 दिनों में रूस ने युद्धविराम या शांति समझौते की शर्तें नहीं मानीं, तो उस पर बेहद सख्त टैरिफ और सेकंडरी सैंक्शन लगाए जाएंगे। भारत जैसे देशों की ओर साफ इशारा करते हुए लैविट ने कहा कि जो देश रूसी तेल खरीदेंगे, वो भी इन प्रतिबंधों की चपेट में आएंगे। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि युद्ध का अंत कूटनीतिक समाधान से हो। दरअसल, भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 फीसदी विदेशों से मंगाता है। वह रूस से अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 35.10 प्रतिशत आयात करता है। जबकि यूक्रेन से युद्ध के पहले वह रूस से केवल 2.10 फीसदी कच्चा तेल मंगाता था। नाटो चीफ ने क्यों दी थी ऐसी धमकी इससे पहले NATO के महासचिव मार्क रुटे ने भी भारत, चीन और ब्राजील को खुली चेतावनी दी थी। अगर रूस से व्यापार जारी रहा तो 100 फीसदी टैरिफ और सेकेंडरी सैंक्शन तय हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राजील के राष्ट्रपति हैं और आप रूस के साथ व्यापार करना और उनका तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं, तो आपको यह पता होना चाहिए। अगर मॉस्को में बैठे व्यक्ति ने शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं लिया, तो मैं 100% सेकंडरी सैंक्शन लगाऊंगा।  

देश की सुरक्षा के लिए सरकार करेगी द्वीप का अधिग्रहण, क्या आप जानते हैं पूरा मामला?

कोच्चि लक्षद्वीप प्रशासन रक्षा उद्देश्यों के लिए द्वीपसमूह के एक आबाद द्वीप बित्रा का अधिग्रहण करने पर विचार कर रहा है। मगर, स्थानीय कांग्रेस सांसद हमदुल्ला सईद ने इस कदम का यह कहते हुए विरोध किया है कि इसके पीछे असली उद्देश्य स्थानीय आबादी को विस्थापित करना है। उन्होंने कहा कि इस कदम का विरोध करने के लिए वह सभी राजनीतिक और कानूनी रास्ते तलाशेंगे। वह आगामी संसद सत्र में इस मुद्दे को उठाएंगे और केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह करेंगे। हाल में ही जारी की गई थी अधिसूचना उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक सरकारी अधिसूचना में राजस्व विभाग द्वारा बित्रा द्वीप के संपूर्ण भू-क्षेत्र को अपने अधीन करने के प्रस्ताव की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। इसका उद्देश्य इसे केंद्र की संबंधित रक्षा और रणनीतिक एजेंसियों को हस्तांतरित करना है। पिछले सप्ताह जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह पहल द्वीप की रणनीतिक स्थिति, इसकी राष्ट्रीय सुरक्षा प्रासंगिकता और प्रशासनिक चुनौतियों से प्रेरित है। प्रादेशिक प्रशासन भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनस्र्थापन अधिनियम, 2013 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता के अधिकार के प्रासंगिक प्रविधानों के अनुसार द्वीप का अधिग्रहण करेगा। इसके लिए प्रस्तावित क्षेत्र का 'सामाजिक प्रभाव आकलन' का अध्ययन किया जाना है। जिला कलेक्टर शिवम चंद्र ने आदेश में कहा कि 'सामाजिक प्रभाव आकलन' पहल के तहत ग्राम सभाओं सहित सभी हितधारकों से परामर्श किया जाएगा। इसमें कहा गया है कि अधिग्रहण के तहत प्रस्तावित क्षेत्र का सर्वेक्षण 11 जुलाई को अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से दो महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। कांग्रेस सांसद ने किया फैसले का विरोध इस बीच, लक्षद्वीप के सांसद हमदुल्ला सईद ने बित्रा द्वीप के अधिग्रहण का विरोध करते हुए कहा है कि इस कदम के पीछे असली उद्देश्य स्थानीय आबादी को विस्थापित करना है। सांसद ने कहा कि बित्रा केंद्र शासित प्रदेश का कम आबादी वाला सबसे छोटा द्वीप है और वह रक्षा आवश्यकताओं के बहाने प्रशासन द्वारा इसे अधिग्रहित करने के प्रयास का विरोध करेंगे। उन्होंने इस निर्णय को तुरंत वापस लेने की भी मांग की। सईद ने बताया कि रक्षा उद्देश्यों के लिए आवश्यक भूमि सरकार द्वारा पहले ही कई द्वीपों में अधिग्रहित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इन विकल्पों पर विचार किए बिना दशकों से स्थायी आबादी वाले बित्रा को निशाना बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने स्थानीय निवासियों से बिना किसी परामर्श के, खासकर ऐसे समय में जब द्वीपों में स्थानीय पंचायतें काम नहीं कर रही हैं, ऐसी कार्रवाई शुरू करने के लिए प्रशासन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करती है और नागरिकों को दिए गए संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।  

MSME की गुणवत्ता बढ़ाना ज़रूरी, भारत हितकारी व्यापार संधियाँ करेगा: केंद्रीय मंत्री गोयल

नई दिल्ली  केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एसोचैम की ओर से आयोजित 'विकसित भारत की दिशा में वैश्विक प्रभाव का सृजन' सत्र को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में तभी प्रवेश करेगा जब वे देश के हितों की पूर्ति करेंगे। उन्होंने देश के हित को सर्वोपरि बताया। उद्योग जगत के नेताओं और उद्यमियों के एक समूह को संबोधित करते हुए उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में मानसिकता में बदलाव के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सामूहिक विकास और छोटी व बड़ी कंपनियों के बीच आपसी सहयोग की दिशा में बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें लक्ष्य, मार्गदर्शन और मानसिकता में बदलाव की जरूरत है। बड़ी हो या छोटी, कंपनियों को एक साथ बढ़ना होगा। हमें एक-दूसरे का समर्थन करना होगा और स्थानीय हितों के लिए मुखर होना होगा। उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए अनुसंधान, नए विचारों, गुणवत्ता और विस्तार पर ध्यान देना होगा। एमएसएमई हितधारकों से उन्होंने आग्रह किया कि वे सरकार को उन गैर-शुल्क बाधाओं के बारे में सक्रिय रूप से सूचित करें जो उनके व्यवसायों को प्रभावित कर रही हैं। उद्योग जगत के दिग्गजों से गोयल ने कहा कि केवल जब आप हमें सूचित करेंगे, तभी हम द्विपक्षीय चर्चाओं के दौरान इन मुद्दों को उठा सकते हैं और उनके समाधान की दिशा में काम कर सकते हैं। व्यापक आर्थिक ढांचे पर विचार करते हुए उन्होंने वर्तमान बैंकिंग प्रणाली की तुलना पिछली यूपीए सरकार के कार्यकाल से की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र का सफलतापूर्वक पुनर्गठन किया है। यूपीए शासन के दौरान, बढ़ते एनपीए के कारण बैंकिंग क्षेत्र चरमरा गया था। हमने इसे पारदर्शी तरीके से पुनर्गठित किया है। आज, बैंकिंग प्रणाली मजबूत है और अच्छा प्रदर्शन कर रही है।

पाकिस्तान का बड़ा फैसला: एयरस्पेस अलर्ट, सभी फ्लाइट रूट्स बंद

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में अगले हफ्ते यात्रियों और एयरलाइंस को कुछ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अनिर्दिष्ट ‘ऑपरेशनल कारणों’  का हवाला देते हुए देश के कुछ चुनिंदा हवाई मार्गों को दो दिन के लिए बंद करने  का ऐलान किया है। पाकिस्तान एयरपोर्ट अथॉरिटी (PAA)  ने ‘ नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) ’ जारी कर बताया कि ये प्रतिबंध 22 जुलाई और 23 जुलाई को लागू रहेंगे। इन दोनों दिन सुबह  5:15 बजे से रात 8:15 बजे तक  कुछ तय हवाई मार्गों पर उड़ान संचालन नहीं होगा।   पीएए के मुताबिक, ये बंदिशें पाकिस्तान के कराची और लाहौर उड़ान सूचना क्षेत्र (Flight Information Region) के तहत आने वाले कुछ मार्गों पर लागू होंगी। यानी कराची और लाहौर एयरस्पेस के कुछ हिस्सों में दो दिन तक सामान्य हवाई यातायात प्रभावित रहेगा।पीएए ने नोटिस में बंद के पीछे ‘परिचालन कारण’ बताए हैं। हालांकि अभी तक इन परिचालन कारणों का कोई स्पष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। न ही यह साफ है कि इसका सैन्य अभ्यास से कोई संबंध है या किसी तकनीकी या सुरक्षा वजह से यह फैसला लिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि इन मार्गों को  सभी तरह के विमानों के लिए बंद किया जाएगा  यानी यात्री विमान, मालवाहक विमान या कोई अन्य। इसके अलावा, जिन मार्गों को बंद किया गया है, उनका पूरा विवरण और वैकल्पिक मार्ग भी नोटिस में जारी किया गया है ताकि एयरलाइंस अपने रूट की योजना दोबारा बना सकें। फिलहाल पाकिस्तान के नागरिक उड्डयन विभाग ने यात्रियों और एयरलाइंस को सलाह दी है कि वे अपनी यात्रा से पहले उड़ान का स्टेटस जरूर जांच लें। 

मोदी के दौरे से पहले भारत का सरप्राइज गिफ्ट, मुस्लिम देश ने जताया भरोसा – पाकिस्तान में मिर्ची!

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से पहले भारत ने मालदीव को एक खास तोहफा दिया है. ये तोहफा है मालदीव पुलिस के दस जवानों को वीआईपी सिक्योरिटी में ट्रेनिंग देना. वीआईपी सुरक्षा की ट्रेनिंग लेने के बाद ये सभी 10 कमांडो, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु के अंगरक्षक के तौर पर तैनात किए जाएंगे. इसी महीने के आखिरी हफ्ते में पीएम मोदी दो दिवसीय (25-26 जुलाई) मालदीव के दौरे पर जा रहे हैं. इन सभी दस कमांडो ने नोएडा में दो हफ्तों की वीआईपी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद शनिवार (19 जुलाई, 2025) को सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जीपी सिंह से दिल्ली में मुलाकात की. नोएडा में सीआरपीएफ का वीआईपी सिक्योरिटी ट्रेनिंग सेंटर है. देश के वीआईपी और दूसरे गणमान्य व्यक्तियों को वाई और जेड कैटेगरी की सुरक्षा सीआरपीएफ के हवाले है. गृह मंत्री अमित शाह और दलाई लामा तक की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ की सिक्योरिटी विंग के हवाले है. क्षेत्रीय संबंध होंगे मजबूत मालदीव पुलिस के कमांडो से मुलाकात के बाद सीआरपीएफ के डीजी जीपी सिंह ने कहा कि यह प्रशिक्षण शांति, प्रोफेशनलिज्म और पुलिसिंग में अधिक सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण है. सीआरपीएफ के मुताबिक, पड़ोसी देशों की पुलिस के साथ इस तरह के सहयोग से क्षेत्रीय संबंध मजबूत होंगे और पार्टनरशिप को ताकत मिलेगी. सीआरपीएफ ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि यह क्षेत्र में आपसी विश्वास और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक गौरवपूर्ण कदम है. इसी महीने की 25 तारीख को मालदीव का राष्ट्रीय दिवस है. मालदीव के नेशनल डे पर प्रधानमंत्री मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे. दोनों देशों के बीच आई खटास होगी कम पीएम की यात्रा से दोनों देशों के बीच मुइज्जु के राष्ट्रपति बनने से आई खटास थोड़ी कम होने की उम्मीद है, क्योंकि साल 2023 में मालदीव का राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जु ने भारतीय नौसेना के हेलीकॉप्टर सहित क्रू-सदस्यों को अपने देश से निकाल दिया था. साथ ही मुइज्जु को चीन का करीबी माना जाता है. हालांकि, पिछले साल मुइज्जु ने भी दिल्ली का दौरा किया था और भारत को अहम सहयोगी बताया था. जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी के मालदीव दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम करार होने की उम्मीद है. साथ ही मालदीव के अलग-अलग द्वीपों को जोड़ने के लिए शुरू होने वाली फेरी (बोट नौवहन) के लिए भी भारत एक बड़ा अनुदान कर सकता है.