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रशियन और भारतीय दोस्त की जोड़ी ने गाया कन्नड़ कविता, इंटरनेट पर मचा धूम

नई दिल्ली बेंगलुरु का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इसमें एक रूसी बच्ची अपनी भारतीय दोस्त के साथ कन्नड़ भाषा की एक लोकप्रिय कविता गा रही है। इस वीडियो को रूसी बच्ची की मां ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था। देखते ही देखते यह वायरल हो गया। यह परिवार 2022 में रूस से भारत आया था। यहां रूसी बच्ची की दोस्ती एक स्थानीय बच्ची से हुई। रूसी बच्ची की मां ने सबसे पहले यह वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था। इसमें दोनों बच्चियां साइकिल चला रही हैं और कन्नड़ भाषा की बच्चों की कविता 'बन्नादा हक्की' गा रही हैं। हिंदी में इसका मतलब रंगीन पक्षी होता है। 2022 में भारत आया था रूसी परिवार दोनों बच्चियां वीडियो में एक साथ सुर मिला रही हैं। इंस्टाग्राम पर 2022 की कुछ तस्वीरें भी शेयर की गई हैं, जिसमें उस वक्त की यादें हैं, जब परिवार भारत आया था। कैप्शन में लिखा है- 'भारत में 3 साल। दोस्त और सहपाठी.. दोस्ती के 3 साल।' इस वीडियो को लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। वीडियो को रेडिट पर जब दोबारा शेयर किया गया, तो लोगों ने इस पर खूब प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। एक यूजर ने लिखा, 'बेंगलुरु में रहने वाली एक रूसी बच्ची अपनी भारतीय दोस्त के साथ कन्नड़ कविता गा रही है। यह देखना कितना अच्छा है। विदेशियों ने भी कन्नड़ सीखी है।' वहीं एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि सरकार को स्कूलों में स्थानीय भाषा सीखना अनिवार्य कर देना चाहिए, जिससे दूसरी पीढ़ी के अप्रवासी भाषाएं सीख सकें। कुछ लोगों ने सरकारी नीतियों की आलोचना भी की और कहा कि कन्नड़ जैसी स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।  

NDA ने उपराष्ट्रपति उम्मीदवार चयन की कमान दो दिग्गजों को सौंपी, जल्द होगा फैसला

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा को सत्तारूढ़ गठबंधन का उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुनने का अधिकार दिया। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि यह सर्वसम्मति से लिया गया फैसला है। NDA नेताओं ने की बैठक संसद परिसर में भाजपा के प्रमुख नेताओं और उनके सहयोगियों की एक बैठक हुई, जिसमें यह फैसला लिया गया। बैठक में नड्डा के अलावा केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और अमित शाह, जदयू के ललन सिंह, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, तेदेपा के लवू श्रीकृष्ण देवरायलु और लोजपा (रामविलास) के चिराग पासवान भी शामिल हुए। राजनाथ सिंह ने बैठक की अध्यक्षता की।   9 सितंबर को होगी वोटिंग जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहा है। इस पद के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव के कार्यक्रम की अधिसूचना जारी कर दी है। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होगा और मतगणना भी इसी दिन की जाएगी। मतदान 9 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। साथ ही आज से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है और अंतिम तिथि 21 अगस्त 2025 तय की गई है। चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम-1952 की धारा 4 की उप-धारा (4) और (1) के तहत आज अधिसूचना जारी कर दी है।

तहव्वुर राणा को बड़ी राहत, अब कर सकेगा अपने वकील से निजी पैरवी की तैयारी

नई दिल्ली  26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी और मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा को अपने मुकदमे की पैरवी के लिए निजी वकील नियुक्त करने की अनुमति मिल गई है। इसके लिए उसे अपने परिवार से बात करने की इजाजत दी गई है। यह आदेश पाटियाला हाउस कोर्ट ने दिया है। तहव्वुर राणा ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत में एक अर्जी दाखिल की थी। इस अर्जी में उसने मांग की थी कि उसे अपने किसी परिवार के सदस्य से बातचीत करने की अनुमति दी जाए, ताकि वह अपने मुकदमे के लिए एक प्राइवेट वकील नियुक्त कर सके। कोर्ट ने उसकी अर्जी स्वीकार करते हुए कहा कि उसे एक बार अपने परिवार के सदस्य से बात करने की अनुमति दी जाती है ताकि वह बचाव के लिए उचित कानूनी सलाह ले सके और किसी वकील की नियुक्ति कर सके। तहव्वुर राणा, जो कि अमेरिका और पाकिस्तान की नागरिकता रखता है, 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। इस हमले में 166 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एनआईए स्पेशल कोर्ट ने 25 जुलाई को तहव्वुर राणा की याचिका पर सुनवाई की थी। इस मामले में अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जवाब मांगा था। 26/11 मामले के आरोपी तहव्वुर राणा ने अदालत में अपने परिवार से फोन पर नियमित बातचीत करने की मांग को लेकर एक याचिका दाखिल की थी। पटियाला हाउस की एनआईए कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए एनआईए से विस्तृत जवाब मांगा था। दिल्ली की अदालत ने तहव्वुर राणा की न्यायिक हिरासत को 13 अगस्त तक बढ़ा दिया था। एनआईए द्वारा राणा के खिलाफ एक पूरक आरोपपत्र दाखिल करने के बाद न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई। इस आरोपपत्र में राणा का गिरफ्तारी ज्ञापन, जब्ती ज्ञापन और कुछ अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी शामिल थे। राणा के खिलाफ पहला आरोपपत्र 2012 में दाखिल किया गया था। वहीं, तहव्वुर राणा ने मुंबई अपराध शाखा के सामने कुछ अहम खुलासे किए थे। उसने कहा कि वह पाकिस्तानी सेना का एक भरोसेमंद एजेंट था और 2008 के हमलों के दौरान मुंबई में मौजूद था।  

अमेरिका से भिड़ा चीन, ट्रंप को कहा ‘बदमाश’, भारत को बताया सही

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और रूस की दोस्ती रास नहीं आ रही है। ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद के लिए भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले की भारत ही नहीं बल्कि उसके पड़ोसी देश भी आलोचना कर रहे है। इस पर चीन की भी तिखी प्रतिक्रिया सामने आई है। चीन ने इस कदम को व्यापारिक उपायों का दुरुपयोग करार देते हुए अमेरिका की कड़ी आलोचना की है। चीनी राजदूत ने ट्रंप को कहा- 'बदमाश' ट्रंप के टैरिफ पर अब चीन भी खुलकर भारत के साथ खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जमकर की आलोचना करते हुए चीनी राजदूत ने ट्रंप को बदमाश कह डाला है। उन्होंने इसे वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए खतरा बताया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री मोदी के संभावित चीन दौरे की अटकलें भी तेज हैं।   'बदमाश को अगर एक इंच दिया जाए तो…' नई दिल्ली में चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने गुरुवार को ट्रंप टैरिफ पर अपनी राय रखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर जोरदार हमला बोला है। शू फेइहोंग ने एक्स पर बिना नाम लिए लिखा, 'बदमाश को अगर एक इंच दिया जाए तो वह एक मील ले लेता है।' शू फेइहोंग ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी और ब्राजील के राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार में हुई फोन कॉल का भी जिक्र किया है। बातचीत में वांग यी ने कहा कि दूसरे देशों को दबाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है। उन्होंने कहना है कि यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों को कमजोर करता है। ट्रंप की नीतियों से अमेरिका-भारत के रिश्ते में बढ़ा तनाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के खिलाफ नई नीति ने दोनों देशों के बीच पिछले दो दशकों से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी में तनाव पैदा कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात को लेकर भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है, जबकि चीन के रूस के साथ ऊर्जा व्यापार पर नरमी बरती जा रही है। 'इंडिया नैरेटिव' की एक रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया है कि वह 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को अमेरिका के दबाव में नहीं आने देगा।

‘कबूतरखानों से फैल रही बीमारियां’, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी सख्त चेतावनी

मुंबई  बॉम्बे हाईकोर्ट ने कबूतरखानों को बंद करने के फैसले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला डॉक्टरों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, न कि मनमाने ढंग से। हाईकोर्ट ने कहा, "यह मामला किसी एक व्यक्ति या मोहल्ले का नहीं, बल्कि पूरे समाज की सेहत से जुड़ा है।" कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि अगर उनकी कोई अलग राय है, तो वे इसे पेश करें, लेकिन अगर सरकार को जनता की सेहत की चिंता नहीं है, तो यह उनकी मर्जी है। हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करना उसका कर्तव्य है। कबूतरों की बीट (विष्ठा) से गंभीर बीमारियां फैल रही हैं, जो मेडिकल रिपोर्ट्स में दर्ज है। कुछ मामलों में मरीजों की हालत इतनी खराब हो जाती है कि फेफड़े तक बदलने की नौबत आ जाती है। खासकर छोटे बच्चे और बुजुर्ग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कुछ लोगों के कबूतरों को दाना डालने के शौक के कारण पूरे इलाके की सेहत को खतरे में नहीं डाला जा सकता। दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को शहर के सभी अस्पतालों से डेटा पेश करने का निर्देश दिया था, लेकिन बीएमसी ने अब तक यह डेटा जमा नहीं किया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई नया आदेश नहीं दिया गया है, बल्कि बीएमसी के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान निर्देश जारी किए गए हैं। सुनवाई के दौरान डॉ. राजन की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की गई, जिसमें उन्होंने कबूतरों से होने वाली बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र किया था। डॉ. राजन ने सुझाव दिया था कि कबूतरखाने बंद किए जाएं और उन्हें दाना डालना रोका जाए। जस्टिस ओक ने इस मुद्दे को पहले भी गंभीरता से लिया था और कोर्ट ने कहा कि उनके पास इस संबंध में मेडिकल रिपोर्ट्स मौजूद हैं। हाईकोर्ट ने दोहराया कि यह मामला सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है और हजारों लोग प्रभावित इलाकों में रहते हैं। कोर्ट ने कहा, "कुछ गिने-चुने लोगों का पक्षियों को दाना डालने का शौक पूरे समाज के स्वास्थ्य पर भारी नहीं पड़ सकता।" हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि यह मामला राज्य सरकार और पालिका की जिम्मेदारी है। संविधान हर नागरिक को सुरक्षा देता है, न कि सिर्फ कुछ लोगों को। कोर्ट ने इस मुद्दे को सभी के अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि जनता की सेहत सर्वोपरि है।

इजरायल ने थामा भारत का हाथ, नेतन्याहू बोले– भरोसा है हमें भारत पर

नई दिल्ली  अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद के बीच इजरायल ने खुलकर भारत का समर्थन किया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि अमेरिका में भी एक बुनियादी समझ है कि भारत एशिया में एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार है। नेतन्याहू ने उम्मीद जताई कि अमेरिका और भारत के बीच जो भी मौजूदा मतभेद हैं, वे जल्द ही सुलझ जाएंगे। नेतन्याहू ने गुरुवार को यरुशलम स्थित अपने कार्यालय में इजरायल में भारत के राजदूत जेपी सिंह से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बैठक में सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर भी विस्तार से बातचीत हुई। अमेरिका-भारत टैरिफ विवाद पर नेतन्याहू एक इंटरव्यू के दौरान नेतन्याहू ने कहा, "भारत और अमेरिका दो बेहतरीन दोस्त हैं। दोनों देशों के बीच इतनी गहरी दोस्ती है कि किसी भी समस्या का हल आसानी से निकाला जा सकता है।" ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में दिखी भारत-इजरायल की दोस्ती नेतन्याहू ने भारत के साथ अपने देश के मजबूत रक्षा संबंधों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इजरायली हथियारों का इस्तेमाल किया और इनकी प्रदर्शन क्षमता साबित हो चुकी है। बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भीषण आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद भारत ने एक जवाबी सैन्य अभियान चलाया, जिसका नाम था – ऑपरेशन सिंदूर। इस ऑपरेशन में भारत ने इजरायल द्वारा निर्मित ‘Harpy’ और ‘SkyStriker’ जैसे आत्मघाती ड्रोन का उपयोग किया। इन ड्रोन ने पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को सटीक तरीके से निशाना बनाया। इनमें अमेरिकी निगरानी रडार और चीन के HQ-9 मिसाइल सिस्टम भी शामिल थे। इजरायल बोला- भारत से रक्षा सहयोग और बढ़ेगा इजरायली पीएम ने कहा कि इस ऑपरेशन में जो सफलता मिली, वह यह दिखाती है कि इजरायल के हथियार भरोसेमंद हैं और युद्ध की स्थिति में बेहद प्रभावी साबित होते हैं। इससे भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग और भी मजबूत हुआ है। नेतन्याहू ने कहा, “यह साझेदारी सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा का मामला है।”  

संघर्ष पर विराम: कंबोडिया-थाईलैंड के बीच ऐतिहासिक समझौता

कुआलालंपुर  कंबोडिया और थाईलैंड ने गुरुवार को संघर्षविराम की व्यवस्था को औपचारिक रूप देने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय मलेशिया की राजधानी में आयोजित एक विशेष जनरल बॉर्डर कमेटी (जीबीसी) बैठक के बाद लिया गया। कंबोडियाई पक्ष के अनुसार, दोनों देशों ने संघर्षविराम को लेकर विस्तृत चर्चा की और एक क्षेत्रीय निगरानी तंत्र स्थापित करने, आपसी विश्वास बहाली और पकड़े गए सैनिकों के साथ अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत व्यवहार करने पर सहमति जताई। वहीं, थाई पक्ष ने बताया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय तंत्र के माध्यम से संवाद बनाए रखने और विवाद सुलझाने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, आसियान सदस्य देशों को संघर्षविराम की निगरानी की अनुमति दी जाएगी। दोनों देशों ने यह भी तय किया कि अगली विशेष जीबीसी बैठक एक महीने के भीतर आयोजित की जाएगी। इस बीच, 6 अगस्त को कंबोडियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने थाईलैंड द्वारा कंबोडिया पर सैन्य बल और हथियारों के जरिए उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करने को लेकर की गई कानूनी कार्रवाई को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। विदेश मंत्रालय के सचिव और प्रवक्ता चुम सौनरी ने कहा कि यह कानूनी कदम पूर्णतः आधारहीन है और थाईलैंड की कंबोडिया-विरोधी नीतियों से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ध्यान भटकाने का प्रयास है। उन्होंने कहा, “आरोप बेबुनियाद, राजनीतिक रूप से प्रेरित और किसी ठोस प्रमाण पर आधारित नहीं हैं।” सौनरी ने स्पष्ट किया कि कंबोडिया ने झड़प की शुरुआत नहीं की थी और वह शांति के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लगातार उकसावे के बावजूद कंबोडिया संघर्षविराम समझौते के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रवक्ता ने कहा, “कंबोडिया थाईलैंड से अपील करता है कि वह झूठे प्रचार और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को रोके और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तथा आसियान एकता की भावना के साथ रचनात्मक संवाद में लौटे।” गौरतलब है कि 24 जुलाई को कंबोडिया और थाईलैंड के सैनिकों के बीच उनके विवादित सीमा क्षेत्र में झड़पें हुई थीं। इसके बाद 28 जुलाई को दोपहर में दोनों देशों ने संघर्षविराम पर सहमति जताई, जो उसी दिन मध्यरात्रि से प्रभावी हो गया।

भारत ने मानी अमेरिका की बात? सरकारी तेल कंपनियों ने रूस से डील रोकी

नई दिल्ली  रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। अब अमेरिकी दबाव के बीच भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल रूसी कच्चे तेल की स्पॉट खरीद को रोकने का फैसला लिया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) जैसी कंपनियों ने अक्टूबर लोडिंग के लिए रूस के उरल्स ग्रेड तेल की खरीद से फिलहाल दूरी बना ली है। यह फैसला तब तक प्रभावी रहेगा जब तक केंद्र सरकार इस पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं देती। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के सभी निर्यातों पर दोगुना टैरिफ लगा दिया है। माना जा रहा है कि यह निर्णय भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद जारी रखने की "सीधी सजा" है। ट्रंप सरकार के इस कदम का उद्देश्य रूस पर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने का दबाव बनाना है। भारत सरकार ने औपचारिक रूप से तेल कंपनियों को रूस से तेल खरीदने से मना नहीं किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने कंपनियों से यह जरूर कहा है कि वे गैर-रूसी विकल्पों की योजना तैयार रखें। भारतीय तेल कंपनियां आमतौर पर 1.5 से 2 महीने पहले के शॉर्ट-टर्म साइकिल में तेल की खरीद करती हैं, जिससे समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इस चक्र में फिलहाल अक्टूबर के लिए खरीद योजनाएं बन रही हैं। हालांकि यह संभावना नहीं है कि भारत की ओर से अक्टूबर लोडिंग वाले उरल्स की खरीद पूरी तरह रुक जाएगी, लेकिन खरीद में कमी जरूर आ सकती है। इससे अमेरिका, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के अन्य कच्चे तेल ग्रेड्स की मांग बढ़ सकती है। व्यापारियों का मानना है कि रूस अब चीन को और अधिक डिस्काउंट पर तेल बेच सकता है, हालांकि चीन उरल्स ग्रेड ज्यादा नहीं लेता। उरल्स ग्रेड तेल रूस से निर्यात किया जाने वाला एक प्रकार का कच्चा तेल है, जो मुख्य रूप से यूराल और वोल्गा क्षेत्रों के तेल क्षेत्रों से प्राप्त होता है। यह मध्यम-भारी और उच्च सल्फर युक्त कच्चा तेल है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से रिफाइनरियों में डीजल, गैसोलीन और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जाता है। गौरतलब है कि जुलाई के अंत में सितंबर लोडिंग के लिए उरल्स की खरीद में भी गिरावट देखी गई थी क्योंकि कीमतें अधिक थीं। इसके बाद सरकारी कंपनियों ने अन्य क्षेत्रों से स्पॉट टेंडर के जरिए तेल खरीदा है। वहीं निजी कंपनियां रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। नायरा एनर्जी को यूरोपीय यूनियन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उत्पादन दर में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। रूस का उरल्स ग्रेड कच्चा तेल पश्चिमी रूस से आता है। अगस्त और सितंबर लोडिंग वाले कार्गो भारत को सामान्य रूप से डिलीवर होने की संभावना है, जब तक कि भारत सरकार से कोई नया निर्देश नहीं आता। कुछ टैंकरों ने हाल के दिनों में भारतीय बंदरगाहों पर कार्गो उतारा है, हालांकि कुछ मामूली देरी जरूर हुई है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत लगभग शून्य के बराबर रूसी तेल खरीदता था, लेकिन युद्ध के बाद यह आंकड़ा 20 लाख बैरल प्रतिदिन से भी ऊपर पहुंच गया था। भारत पेट्रोलियम के पूर्व रिफाइनरी निदेशक आर. रामचंद्रन के अनुसार, “कुछ समय के लिए परिचालन में बाधा जरूर आएगी, लेकिन तेल की मांग और आपूर्ति में संतुलन बन जाएगा। यदि रूसी सप्लाई मुश्किल होती है, तो मध्य-पूर्वी देशों विशेषकर सऊदी अरब और इराक से कच्चा तेल बेहतर विकल्प हो सकता है।” इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजार को भी झटका दिया है। ब्रेंट क्रूड के दाम फिलहाल 67 डॉलर प्रति बैरल के पास स्थिर हैं, जो लगातार पांच दिनों की गिरावट के बाद देखी गई स्थिति है। व्यापारी इस बात का आकलन कर रहे हैं कि अगर भारत रूस से तेल खरीद कम करता है तो वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर क्या असर पड़ेगा।  

तमिलनाडु में बिल पर फिर घमासान, मामला अब राष्ट्रपति की चौखट पर

नई दिल्ली तमिलनाडु के राज्यपाल की ओर से विधानसभा से पारित विधेयकों को लटकाने का मामला कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इसी मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्यपालों और राष्ट्रपति को तीन महीने के अंदर निर्णय लेने को कहा था। इस पर राष्ट्रपति की ओर से सुप्रीम कोर्ट से राय भी मांगी गई है कि आप कैसे ऐसा आदेश प्रेसिडेंट या राज्यपाल को दे सकते हैं। लेकिन इस बीच तमिलनाडु में ही विधेयकों को लटकाने पर ही फिर से खींचतान शुरू हो गई है। ताजा मामला कलैग्नार शताब्दी विश्वविद्यालय विधेयक से जुड़ा है। इस विधेयक को आर. एन. रवि ने रिजर्व कर लिया है और राष्ट्रपति के समक्ष भेजा है। राजभवन के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। पूर्व मुख्यमंत्री और एमके स्टालिन के पिता करुणानिधि को कलैग्नार के नाम से भी जाना जाता है। इस विधेयक को तमिलनाडु विधानसभा से अप्रैल में मंजूरी मिल गई थी। इसके तहत यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव है और उसके चांसलर चीफ मिनिस्टर होंगे। मौजूदा नियम के अनुसार किसी भी राज्य यूनिवर्सिटी के चांसलर संबंधित सूबे के राज्यपाल ही होते हैं। अब इस नियम को तमिलनाडु की स्टालिन सरकार बदलना चाहती है। राज्यपाल की ओर से बिल अटकाने से डीएमके भड़क गई है। पार्टी का कहना है कि राज्यपाल ने तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खुली अवमानना की है। डीएमके ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल से एक महीने के अंदर निर्णय लेने को कहा था। इसके अलावा यह भी कहा था कि यदि राष्ट्रपति के पास राय लेने के लिए बिल भेजा जाए तो अधिकतम तीन महीने का ही वक्त लगना चाहिए। राज्यसभा सांसद और तमिलनाडु सरकार के वकील पी. विल्सन ने कहा, 'बिल को मंजूरी न देकर राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना की है। उनके पास कोई अधिकार नहीं है कि वे निर्णय न लें। उनकी यह ड्यूटी है कि वे मंत्री परिषद और विधानसभा से पारित विधेयक को मंजूरी प्रदान करें।' माना जा रहा है कि इस मामले में यदि अगले कुछ दिनों में राज्यपाल या राष्ट्रपति की ओर से निर्णय ना लिया गया तो फिर डीएमके सरकार अदालत का रुख कर सकती है। बता दें कि राष्ट्रपति की ओर से मांगी गई सलाह पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है।  

बाढ़ में बहा पुराना पुल, मलाणा के ग्रामीणों ने 7 दिन में रच दी नई उम्मीद की कहानी

हिमाचल  हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित, अपने प्राचीन नियमों और संस्कृति के लिए मशहूर मलाणा गांव ने हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा के बाद अपनी हिम्मत और आत्मनिर्भरता से पूरे प्रदेश को एक नई प्रेरणा दी है। 1 अगस्त की रात को भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ ने मलाणा नदी में भारी तबाही मचाई। इस बाढ़ में गांव को बाहरी दुनिया से जोड़ने वाला एकमात्र पैदल पुल बह गया, जिससे मलाणा का संपर्क पूरी तरह कट गया। इस आपदा से गांव में काफी नुकसान हुआ। नदी के तेज बहाव में एक महिला, 10-15 मवेशी, एक कार, जेसीबी और एक ट्रक भी बह गए। मुश्किल की इस घड़ी में भी गांव के लोग टूटे नहीं। सरकारी सहायता या किसी बचाव दल का इंतज़ार करने के बजाय, उन्होंने खुद ही बचाव कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से मिलकर लापता महिला का शव ढूंढ़ निकाला। यह उनकी बहादुरी और मुश्किल हालात में भी हार न मानने वाले जज्बे को दर्शाता है। आपदा की वजह और ग्रामीणों का आरोप स्थानीय लोगों का मानना है कि इस भयंकर बाढ़ का कारण नदी के ऊपरी हिस्से में चल रही जलविद्युत परियोजना का निर्माण कार्य है। उनका आरोप है कि निर्माण कंपनी ने पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की, जिससे मिट्टी कमजोर हो गई। पेड़ों की कमी से मिट्टी पानी को रोक नहीं पाई, और बारिश का पानी सीधे नदी में जाकर बाढ़ का कारण बना। मलाणा गांव के पास बन रही 109 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर मलाणा जलविद्युत परियोजना को भी इस बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचा है, और उसकी मशीनरी भी नदी में बह गई है।   सरकारी मदद के बजाय खुद बनाया पुल आपदा के बाद, मलाणा के लोगों ने किसी सरकारी मदद का इंतज़ार नहीं किया। उन्होंने अपनी पारंपरिक सामूहिक श्रम व्यवस्था को फिर से जीवित किया। सभी गांववासियों ने मिलकर पारंपरिक तरीकों से लकड़ी और रस्सियों की मदद से एक अस्थाई पुल का निर्माण कर डाला। इस अद्भुत प्रयास से एक बार फिर से मलाणा का संपर्क बाहरी दुनिया से जुड़ गया। गांव के लोग अपने देवता जमलू ऋषि के सिद्धांतों पर चलते हैं, और उनकी यही एकता और आत्मनिर्भरता हर संकट में उन्हें ताकत देती है। यह पहली बार नहीं है जब मलाणा के लोगों ने ऐसा साहस दिखाया है। पिछले साल भी जब इसी पुल को नुकसान हुआ था, तब भी उन्होंने खुद ही मिलकर नया पुल बना लिया था। मलाणा की अनूठी संस्कृति और पहचान मलाणा गांव, जिसे दुनिया के सबसे पुराने लोकतांत्रिक गांवों में से एक माना जाता है, अपने अलग कानून और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां का शासन देवता जमलू ऋषि की आज्ञा से चलता है। गांव के लोगों का मानना है कि वे सिकंदर के सैनिकों के वंशज हैं जो भारत में बस गए थे। मलाणा की एक और खास बात यह है कि यहां बाहरी लोगों को किसी भी चीज़ को छूने की अनुमति नहीं है। इस आपदा में मलाणा के लोगों ने जिस तरह की एकजुटता, बहादुरी और आत्मनिर्भरता दिखाई है, उसकी सोशल मीडिया पर भी खूब प्रशंसा हो रही है। कई लोगों ने इसे सच्चे 'आत्मनिर्भर भारत' का उदाहरण बताया है। गांव के पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार से अपील की है कि जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण में पर्यावरणीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसे बड़े हादसे न हों।