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रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की पहल, मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिका के द्वारा हाल ही में भारत के खिलाफ टैरिफ को लेकर कार्रवाई की गई। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि भारत रूस से लगातार तेल खरीद रहा है इसके कारण यह युद्ध अनवरत जारी है। इन तमाम आरोप प्रत्यारोपों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की खबरें सामने आई। वहीं, अब भारत में यूक्रेन के राजदूत अलेक्जेंडर पोलिशचुक ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की भारत यात्रा की बात कही है। इसके अलावा, यूक्रेन ने एक बार फिर रूस के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने में भारत की अधिक सक्रिय भूमिका की अपील की है। भारत में यूक्रेन के राजदूत अलेक्जेंडर पोलिशचुक ने शनिवार को एएनआई से बात करते हुए कहा कि रूस के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को देखते हुए यूक्रेन भारत को संभावित शांति वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में देखता है। भारत-यूक्रेन के बीच बढ़ी बातचीत पोलिशचुक ने यूक्रेन के राष्ट्रीय ध्वज दिवस के अवसर पर बोलते हुए कहा कि 2023 से यूक्रेन और भारत के बीच बातचीत में वृद्धि हुई है, जिसका उन्होंने स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान की भी सराहना की कि भारत युद्ध में तटस्थ नहीं है, बल्कि दृढ़ता से शांति, कूटनीति और राजनीतिक संवाद का समर्थन करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सितंबर में होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) सत्र में दोनों देशों के बीच यह बातचीत जारी रहेगी। जेलेंस्की जल्द आएंगे भारत जेलेंस्की की भारत यात्रा के बारे में पूछे जाने वाले पर राजदूत ने कहा, 'दोनों देश यात्रा की तारीख और वार्ता के विषय को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। जल्द ही इसका ऐलान कर दिया जाएगा।' भारत-यूक्रेन के पुराने संबंध यूक्रेनी राजदूत ने 'द वीक' में एक लेख लिखकर भारत-यूक्रेन संबंधों के बारे में चर्चा की है। उन्होंने लिखा, ''यूक्रेन के तीन राष्ट्रपतियों ने भारत का आधिकारिक दौरा किया, जबकि भारत के दो राष्ट्रपतियों ने यूक्रेन का दौरा किया। 2021 तक यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण से पहले द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3.4 अरब तक पहुंच गया था।'' भारत यात्रा के दौरान क्या होगी बात उन्होंने कहा, ''एक लंबे विराम के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री के बीच पहली बैठक नवंबर 2021 में ग्लासगो में जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। मई 2023 से ऐसी बैठकें और टेलीफोन वार्ता नियमित हो गई हैं। 23 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन की ऐतिहासिक यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय खोला। इसने रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए दोनों लोकतंत्रों के नेताओं की आकांक्षा की पुष्टि की। आज, दोनों देशों के विदेश मंत्रालय और राजनयिक मिशन इस साझा उद्देश्य को लागू करने के लिए लगन से काम कर रहे हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की की भारत की आगामी यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी के लिए एक रोडमैप पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।'' राजदूत ने एएनआई से बातचीत में आगे कहा, “हम यूक्रेन में शांति-निर्माण प्रक्रिया में भारत की अधिक भागीदारी की उम्मीद करते हैं। मेरा मानना है कि हमारी सभी बैठकें इस बात पर चर्चा का हिस्सा होंगी कि भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूस के साथ राजनीतिक बातचीत में कैसे शामिल हो सकता है। विशेष रूप से रूस और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को ध्यान में रखते हुए हमें इसकी उम्मीद है।”

सपा-टीएमसी के बाद AAP भी अलग, JPC में अब कांग्रेस की भूमिका अहम

पटना PM-CM हटाने वाला बिल (पीएम, सीएम और मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद पद से हटाने वाले विधेयक) की जांच के लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से अब आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी दूरी बनाने का फैसला कर लिया है। JPC टीम से पहले ही सपा (SP) और टाएमसी (TMC) ने दूरी बनाने का ऐलान किया था। अब आम आदमी पार्टी (आप) ने भी संयुक्त संसदीय समिति से किनारा कर लिया है। प्रमुख सहयोगियों के अलग होने से अब पूरा दारोमदार कांग्रेस के कंधे पर आ गया है। साथ ही विपक्षी एकजुटता बनाए रखने का दबाव और बढ़ गया है। बता दें कि संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को लेकर विपक्षी पार्टियां किनारा कर रही हैं। पहले तृणमूल कांग्रेस ने इस समिति को ‘नौटंकी’ बताते हुए बहिष्कार किया। इसके बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी साफ कर दिया कि उनकी पार्टी JPC में शामिल नहीं होगी। अब आम आदमी पार्टी ने भी यही रुख अपनाया है। ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली टीएमसी और अखिलेष यादव की नेतृत्व वाली सपा के किनारा करने पर कांग्रेस पर विपक्षी एकजुटता के नाम पर अपनी लाइन बदलने का दबाव बढ़ गया है। दरअसल, कांग्रेस अब तक इस पैनल का हिस्सा बनने के पक्ष में दिखाई दे रही थी, लेकिन टीएमसी के बाद सपा और AAP के कदम ने कांग्रेस हाईकमान को भी असमंजस में डाल दिया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी का मानना है कि संसदीय समितियों की कार्यवाही अदालतों में महत्व रखती है और विवादित विधेयकों पर जनमत को प्रभावित करती है। हालांकि बायकॉट ने विपक्षी समीकरण बदल दिए हैं। अब कांग्रेस के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं कि क्या पार्टी नेतृत्व विपक्ष की एकता को प्राथमिकता देगा या फिर अपनी पुरानी लाइन पर टिका रहेगा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया कि वो इस मुद्दे पर ममता बनर्जी और टीएमसी के साथ खड़े हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खुद गृह मंत्री अमित शाह यह कह चुके हैं कि उन्हें कई मामलों में झूठा फंसाया गया था तो फिर यह बिल किस आधार पर लाया गया है? अखिलेश का तर्क है कि इस प्रावधान के जरिए किसी भी नेता को फर्जी मामलों में फंसाकर पद से हटाया जा सकता है। उन्होंने आजम खान, रामाकांत यादव और इरफान सोलंकी जैसे अपने नेताओं का उदाहरण भी दिया, जिन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा था। अखिलेश ने यह भी कहा कि यह कानून संघीय ढांचे के खिलाफ है। टीएमसी ने कहा- सरकार की नौटंकी टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने इस JPC को पूरी तरह से ‘नौटंकी’ बताया है। उनका कहना है कि मोदी सरकार जानबूझकर ऐसे मुद्दों को हवा दे रही है ताकि असली सवालों से ध्यान भटकाया जा सके। ओ’ब्रायन ने कहा कि पहले JPC का गठन जनता के प्रति जवाबदेही तय करने के लिए किया जाता था, लेकिन 2014 के बाद से इन्हें सिर्फ राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। ओ’ब्रायन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि टीएमसी और सपा ने जेपीसी में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के चेयरमैन मिलकर जेपीसी के अध्यक्ष का चयन करते हैं और सदस्यों का नामांकन पार्टी की संख्या के आधार पर होता है। इससे समिति का झुकाव सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में हो जाता है। विधेयक में क्या है? 20 अगस्त को लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025, और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 पेश किए गए। इनका मकसद यह प्रावधान करना है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 30 दिन तक हिरासत में रहते हैं तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। इन विधेयकों की समीक्षा के लिए बनाई गई JPC में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सांसद शामिल हैं. समिति को शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट पेश करनी है।

बारिश से बिगड़े हालात: जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन और बादल फटने का खतरा

जम्मू-कश्मीर  जम्मू-कश्मीर में शनिवार रातभर हुई मूसलाधार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक महत्वपूर्ण पुल क्षतिग्रस्त हो गया। राजधानी जम्मू में रविवार सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों में 190.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस महीने में एक सदी में दूसरी सबसे अधिक बारिश है। इससे पहले 5 अगस्त 1926 को अगस्त में 228.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। अधिकारियों ने चेतावनी जारी कर लोगों से जलस्रोतों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 27 अगस्त तक पहाड़ी इलाकों में मध्यम से भारी बारिश, बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा है। यातायात पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि 250 किलोमीटर लंबा जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग और 434 किलोमीटर लंबा श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग भारी बारिश के बावजूद यातायात के लिए खुले हैं। भूस्खलन से आवाजाही बंद पुंछ और राजौरी (जम्मू) को दक्षिण कश्मीर के शोपियां से जोड़ने वाली मुगल रोड और जम्मू के किश्तवाड़ एवं डोडा जिलों को अनंतनाग (दक्षिण कश्मीर) से जोड़ने वाली सिंथन रोड पर भूस्खलन के कारण कई स्थानों पर आवाजाही बंद कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि कठुआ जिले में सहर खड्ड नाले के उफान पर होने के कारण जम्मू-पठानकोट राजमार्ग पर लोगेट मोड़ के पास एक पुल बीच से टूट गया। इसके बाद यातायात को वैकल्पिक पुल के रास्ते से डायवर्ट किया जा रहा है। जम्मू शहर में भारी बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। नालों और नदियों का जलस्तर बढ़ने से सड़कें जलमग्न हो गईं और जानीपुर, रूप नगर, तालाब तिल्लो, ज्वेल चौक, न्यू प्लॉट और संजय नगर जैसे इलाकों में पानी घरों में घुस गया। कई घरों की चारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई और करीब 12 वाहन अचानक आई बाढ़ में बह गए। पुलिस प्रशासन अलर्ट पर सांबा में बसंतर, कठुआ में उझ और रावी, डोडा, किश्तवाड़, रामबन और जम्मू में चिनाब, तथा उधमपुर और जम्मू में तवी सहित प्रमुख नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते प्रशासन ने आपदा मोचन दलों और स्थानीय पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा है।अधिकारियों ने बताया कि अभी तक किसी हताहत की सूचना नहीं है, लेकिन बारिश के कारण जम्मू क्षेत्र के राजौरी, पुंछ और उत्तरी कश्मीर के गुरेज में कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है। जम्मू क्षेत्र के उधमपुर में सबसे अधिक 144.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, इसके बाद रियासी जिले में वैष्णो देवी मंदिर के आधार शिविर कटरा में 115 मिलीमीटर, सांबा में 109 मिलीमीटर और कठुआ में 90.2 मिलीमीटर बारिश हुई। श्रीनगर में 13.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सभी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट भारतीय मौसम विभाग ( IMD ) ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने बादल छाए रहने, हल्की बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना भी जताई है। लेह स्थित क्षेत्रीय मौसम विभाग ने लद्दाख के अधिकांश क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और ज्यादातर जगहों पर बादल छाए रहने का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर में बारिश की चेतावनी के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। सीएम कार्यालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कई आवासीय क्षेत्रों में जलभराव की सूचना मिली है, जबकि नदियां और नाले खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं। अब्दुल्ला ने बताया कि नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं और मुख्यमंत्री कार्यालय विभागों के संपर्क में है। प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी, जलापूर्ति और बिजली जैसी आवश्यक सेवाओं की बहाली को प्राथमिकता दी जा रही है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।  

अनीश दयाल सिंह को मिली अहम जिम्मेदारी, अब बने अजित डोभाल की टीम का हिस्सा

नई दिल्ली सीआरपीएफ और आईटीबीपी के पूर्व महानिदेशक अनीश दयाल सिंह को डिप्टी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया है। इन्हें आंतरिक मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मणिपुर कैडर के 1988 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी सिंह 31 दिसंबर 2024 को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक (DG) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इस नियुक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल की टीम को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यूपी के प्रयागराज के रहने वाले हैं अनीश दयाल सिंह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 1964 में जन्मे अनीश दयाल सिंह ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। इससे पहले वे इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के महानिदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। CRPF के DG के रूप में उनके कार्यकाल में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में योगदान दिया। इसके अलावा अगस्त 2024 में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था। मणिपुर कैडर के आईपीएस अधिकारी अनीश दयाल सिंह ने अपने करियर की शुरुआत मणिपुर कैडर के IPS अधिकारी के रूप में की थी। उन्होंने कई वर्षों तक केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (IB) में विशेष निदेशक के रूप में काम किया, जहां उन्होंने कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण ऑपरेशनों का नेतृत्व किया। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव को देखते हुए उनकी डिप्टी NSA के रूप में नियुक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भारत की रणनीति को और प्रभावी बनाने में सहायक होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के नेतृत्व में डिप्टी NSA के रूप में अनीश दयाल सिंह आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और आंतरिक खतरों जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण सलाह देंगे। उनकी नियुक्ति से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है।  

तकनीक का करिश्मा, एआई ने लौटाई महिला की खोई हुई आवाज़

लंदन  आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई की मदद से कई कमाल हो चुके हैं। लेकिन 55 साल की सारा एजेकील के साथ जो हुआ वह तो वास्तव में चमत्कार ही है। एआई की मदद से सारा एजेकील ने 25 साल पहले खोई अपनी आवाज वापस पा ली। सारा एजेकील को 25 साल पहले मोटर न्यूरॉन रोग के बारे में पता चला था। इस बीमारी में इंसान के शरीर की नसें और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इससे बोलने, निगलने और चलने-फिरने में मुश्किल होती है। बाद में धीरे-धीरे आवाज भी चली जाती है। सारा के साथ भी ऐसा ही हुआ था। अब परिवार के पास से आठ सेकंड की पुरानी वीडियो क्लिप का इस्तेमाल करके सारा की आवाज वापस लाई गई है। ऐसे किया गया काम सारा की जो पुरानी क्लिप मिली है उसमें वह अपनी बेटी से बात कर रही थीं। वैज्ञानिकों ने इस क्लिप से सारा की आवाज का आठ सेकंड का ऑडियो सैंपल लिया। इस सैंपल का यूज करके एआई को ट्रेनिंग दी गई। इसके जरिए बताया गया कि सारा के आवाज की टोन, पिच और बोलने का तरीका कैसा था। इस ट्रेनिंग के आधार पर एआई मॉडल ने एक सिंथेटिव वॉयस डेवलप की। यह आवाज सुनने में बिल्कुल सारा एजेकील की आवाज की तरह लगती है। अब अपनी आंखों से बोलती हैं सारा अब बोलने के लिए सारा एक खास टेक्नीक का इस्तेमाल करती हैं। इसके लिए वह अपनी आखों से कंप्यूटर पर टाइप करती हैं। इसके बाद एआई सारा के लिखे को अपनी आवाज में बोल देती है। इस तरह से सारा अपने फैमिली मेंबर्स के साथ अपनी आवाज में बात कर सकती हैं। यह दिखाता है कि एआई के जरिए किस तरह से मेडिकल फील्ड में शानदार चीजों को अंजाम दिया जा सकता है।  

चीन-पाक की बढ़ी टेंशन! भारत लाने जा रहा है जर्मनी से पनडुब्बियां

नई दिल्ली थल और वायु के बाद भारत अब समुद्र में भी अपनी ताकत को बढ़ाने में जुट गया है। भारत ने प्रोजेक्ट-75 को मंजूरी दे दी है। प्रोजेक्ट- 75 इंडिया के तहत जर्मनी के साथ 70 हजार की डील को मंजूरी दी है। प्रोजेक्ट 75 इंडिया के तहत भारत जर्मनी के सहयोग से छह एडवांस सबमरीन को देश में विकसित करेगी। इस प्रोग्राम में प्राइवेट सेक्टर भी शामिल है, जिसमें नौसेना के सबमरीन प्रोडक्शन सेंटर के सहयोग से लार्सन एंड टुब्रो ) की प्रमुख भूमिका होने की उम्मीद है। भारत दो परमाणु सबमरीन्स पर भी काम कर रहा है। इस कॉन्ट्रैक्ट के अगले छह महीने के अंदर पूरा होने की उम्मीद है। रक्षा अधिकारियों ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य न सिर्फ अपनी सबमरीन्स के फ्लीट में विस्तार करना है। साथ ही कंवेंसनल सबमरीन के निर्माण में भारत की स्वदेशी क्षमता को मजबूत करना है। एक रिपोर्ट के अनुसार, छह महीने से ज़्यादा समय तक रुके रहने के बाद, केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्रालय और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) को प्रोजेक्ट 75 इंडिया (पी-75आई) के तहत छह एडवांस सबमरीनंस के निर्माण के लिए जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करने की मंज़ूरी दे दी है। डिफेंस से जुड़े अधिकारियों ने एएनआई को बताया कि इस महीने के अंत तक बातचीत शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अब डिफेंस मिनिस्ट्री और एमडीएल को इस प्रोजेक्ट के लिए बातचीत शुरू करने की मंज़ूरी दे दी है और इस महीने के अंत तक यह प्रोसेस शुरू होने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट 75आई का क्या है लक्ष्य? रक्षा मंत्रालय ने जनवरी में सरकारी स्वामित्व वाली एमडीएल को इस कार्यक्रम के लिए अपने रणनीतिक साझेदार के रूप में चुना था। इसके तहत जर्मनी के सहयोग से भारत में सबमरीनंस का निर्माण किया जाएगा। प्रोजेक्ट की विशेषताए     एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम वाली छह कंवेंशनल सबमरीनंस।     जर्मन AIP तकनीक सबमरीनंस को तीन हफ्ते तक पानी के अंदर रख सकती है।     इसे भारत की स्वदेशी सबमरीन निर्माण क्षमता बढ़ाने और इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए डिजाइन किया गया है।     रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना अंतिम सरकारी मंज़ूरी से पहले छह महीने की बातचीत का लक्ष्य बना रहे हैं। क्यों जरूरी है प्रोजेक्ट? भारत के रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के टॉप अधिकारियों ने जर्मन कंपनी के साथ छह एडवांस सबमरीन को भारत में ही निर्माण करने का यह फैसला भारतीय सबमरीन प्रोग्राम और उसकी भविष्य की आवश्यकताओं की समीक्षा और एक उच्च स्तरीय बैठक करने के बाद लिया है। प्रस्तावित सबमरीन्स को एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्सन (AIP) सिस्टम्स से भी लैस किया जाएगा, जिससे यह सबमरीन तीन हफ्ते तक पानी के अंदर बिना किसी समस्या के रह सकेंगी। इस एडवांस फीचर से भारतीय नौसेना की ताकत में और ज्यादा इजाफा होगा। न्यूक्लियर सबमरीन प्रोग्राम P-75I के साथ-साथ, भारत दो परमाणु सबमरीन्स पर भी काम कर रहा है। इस प्रोग्राम में प्राइवेट सेक्टर भी शामिल है, जिसमें नौसेना के सबमरीन प्रोडक्शन सेंटर के सहयोग से लार्सन एंड टुब्रो ) की प्रमुख भूमिका होने की उम्मीद है। सरकार इस सेक्टर में उनके महत्व को समझते हुए, परमाणु और कंवेंशनल दोनों सबमरीन प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाने के विकल्प तलाश रही है। टीकेएमएस के साथ बातचीत से भारत में नेक्स्ट जेन की कंवेंशनल सबमरीन प्रोडक्शन की रूपरेखा तय होने की उम्मीद है। रक्षा सूत्रों ने एएनआई को बताया कि सरकार न केवल इन नावों को हासिल करने की इच्छुक है, बल्कि भविष्य की जरूरतों के लिए स्वदेशी डिजाइन और निर्माण विशेषज्ञता भी विकसित करना चाहती है।  इस कॉन्ट्रैक्ट के अगले छह महीने के अंदर पूरा होने की उम्मीद है।

रक्षा क्षेत्र में बड़ी सफलता: भारत ने किया एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली का सफल उड़ान परीक्षण

नई दिल्ली भारत ने एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली का पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक कर लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन समेत उद्योग जगत को इसके लिए बधाई दी। जानकारी के मुताबिक, डीआरडीओ ने 23 अगस्त को करीब 12:30 बजे ओडिशा के तट पर एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस) का पहला उड़ान परीक्षण किया। क्या है एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली या आईएडीडब्ल्यूएस? आईएडीडब्ल्यूएस एक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है, जिसमें सभी तुरंत वार या पलटवार करने वाली स्वदेशी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (क्यूआरएसएएम), उन्नत अति लघु दूरी वायु रक्षा प्रणाली (वीएसएचओआरएडीएस) मिसाइलें और एक उच्च शक्ति वाली लेजर-आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार (डीईडब्ल्यू) शामिल हैं। 'सफल उड़ान परीक्षण के लिए सभी को बधाई' रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ओडिशा के तट पर किए गए IADWS का पहले सफल उड़ान परीक्षण के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, 'IADWS एक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है, जिसमें सभी स्वदेशी त्वरित प्रतिक्रिया सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (QRSAM), उन्नत अति लघु दूरी वायु रक्षा प्रणाली (VSHORADS) मिसाइलें और एक उच्च शक्ति लेजर आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार (DEW) शामिल हैं।' 'क्षेत्रीय रक्षा को मजबूत करेगा IADWS' उन्होंने आगे लिखा, 'मैं IADWS के सफल विकास के लिए DRDO, भारतीय सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को बधाई देता हूं। इस अनूठे उड़ान परीक्षण ने हमारे देश की बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता को स्थापित किया है। यह दुश्मन के हवाई खतरों के खिलाफ महत्वपूर्ण सुविधाओं के लिए क्षेत्रीय रक्षा को मजबूत करेगा।'

CJI गवई का बड़ा बयान: आरक्षण पर फैसले से क्यों भड़क गए उनके समुदाय के लोग

पणजी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने शनिवार को कहा कि उन्हें अनुसूचित जातियों के आरक्षण में उपवर्गीकरण पर दिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले को लेकर भारी आलोचना झेलनी पड़ी है। यहां तक कि उनकी ही जाति के लोग उनके खिलाफ खड़े हुए। गोवा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बोलते हुए CJI गवई ने कहा, "मेरे समुदाय के लोगों ने भी इस फैसले की आलोचना की। लेकिन मैं मानता हूं कि मुझे अपने निर्णय जनता की अपेक्षाओं के अनुसार नहीं, बल्कि कानून की समझ और अपनी अंतरात्मा के अनुसार लिखने होते हैं।" अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संवैधानिक पीठ ने 6-1 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि अनुसूचित जातियां सामाजिक रूप से एक समान वर्ग नहीं हैं और राज्यों को उनमें उपवर्गीकरण करने का अधिकार है, ताकि सबसे वंचित तबकों को आरक्षण का लाभ मिल सके। क्रीमी लेयर पर भी रखी बात CJI गवई ने कहा कि आरक्षण से ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर करने की उनकी राय पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "क्या मुंबई या दिल्ली के बेहतरीन स्कूलों में पढ़ने वाले किसी IAS अधिकारी के बेटे-बेटी की तुलना उस मजदूर या किसान के बच्चे से की जा सकती है जो गांव की जिला परिषद या ग्राम पंचायत स्कूल में पढ़ रहा है?" उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 सभी के बीच समानता नहीं, बल्कि असमानों के बीच असमान व्यवहार कर उन्हें समान बनाना सुनिश्चित करता है। बुलडोजर जस्टिस पर क्या बोले? गवई ने सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया फैसले का भी जिक्र किया जिसमें अवैध बुलडोजर कार्रवाई रोकने और नियमित प्रक्रिया का पालन करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए। उन्होंने कहा, "हमें यह देखकर चिंता हुई कि जिन लोगों पर मुकदमा भी नहीं चला, उनके घर तोड़े जा रहे थे। परिवार के सदस्य, जिनकी कोई गलती नहीं, वे भी सजा भुगत रहे थे। इसलिए हमने यह स्पष्ट किया कि कार्यपालिका खुद ही न्यायाधीश नहीं बन सकती।" अपने 22–23 साल के न्यायिक कार्यकाल पर संतोष व्यक्त करते हुए CJI गवई ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उन्होंने भारतीय संविधान की यात्रा में सामाजिक और आर्थिक न्याय की दिशा में थोड़ा योगदान दिया है।  

पुलिस/जांच में सनसनी: गर्भनिरोधक गोली ने उजागर किया पति का गैरकानूनी रिश्ता

 गुआंग्डोंग  चीन में एक शख्स ने गर्भनिरोधक गोली खरीदने के लिए ऑनलाइन पेमेंट की कोशिश की थी. इस दौरान कुछ ऐसा हुआ  कि अनजाने में ही शख्स की पत्नी के हाथ कुछ सबूत लग गया. पत्नी जब मामले की तह तक गई तो उसे पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का पता चला.  साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार,  दक्षिणी चीन में एक चीनी व्यक्ति ने गुप्त रूप से गर्भनिरोधक गोलियां खरीदने का प्रयास किया. जब उसका ई-पेमेंट फेल हो गया, तो फार्मेसी कंपनी के कर्मियों ने भुगतान के लिए अनजाने में ही शख्स की पत्नी से संपर्क किया. इस तरह उस शख्स का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर सब के सामने आ गया.   ऑनलाइन पेमेंट हो गया था फेल व्यक्ति का नाम उजागर नहीं किया गया है. उसने एक वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया कि वह गुआंग्डोंग प्रांत के यांगजियांग में डैशेनलिन फार्मेसी की पिंगगांग शाखा में गया था. अपने मोबाइल भुगतान कोड का उपयोग करके गर्भनिरोधक गोलियों के लिए पेमेंट का प्रयास किया. सिस्टम में समस्या के कारण, 15.8 युआन (2.2 अमेरिकी डॉलर) का भुगतान नहीं हो सका. इसके बाद स्टाफ ने शुल्क वसूलने के लिए उस व्यक्ति के मेंबरशिप वाले कार्ड से जुड़े फोन नंबर पर कॉल किया, लेकिन कॉल गलती से उसकी पत्नी को लग गया.  फॉर्मेसी ने पेमेंट के लिए घर में लगा दिया फोन जब उसकी पत्नी ने खरीदारी के बारे में पूछताछ की, तो स्टाफ ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की कि यह गर्भनिरोधक गोलियों के लिए है. इसके बाद उस व्यक्ति का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर राज नहीं रहा. उसने अपनी प्रेमिका और अपनी पत्नी, दोनों से अपनी शादी और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की बात छुपाई थी.  अब दो परिवार टूटने के कागार पर व्यक्ति ने दावा किया कि इस घटना के कारण दो परिवार टूट गए तथा उसने फार्मेसी से जवाबदेही की मांग की. उसने गुस्से से अपनी पोस्ट में लिखा कि अब मेरी पत्नी को सब पता चल गया है और दो परिवार टूटने की कगार पर हैं. मैं जानना चाहता हूं कि क्या आपकी फार्मेसी की कोई जिम्मेदारी है?  उन्होंने साक्ष्य के तौर पर खरीदी गई दवा की रसीद और स्टोर क्लर्क तथा उनकी पत्नी के बीच हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट भी शामिल किया. इसके अतिरिक्त, उन्होंने यांगजियांग सार्वजनिक सुरक्षा ब्यूरो की गाओक्सिन शाखा के अंतर्गत पिंगगांग पुलिस स्टेशन द्वारा 12 अगस्त को जारी की गई एक पुलिस रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई. फॉर्मेसी पर कानूनी कार्रवाई करना होगा मुश्किल हेनान ज़ेजिन लॉ फर्म के निदेशक फू जियान ने एलिफेंट न्यूज को बताया कि हालांकि व्यक्ति अपने अधिकारों की रक्षा करने की कोशिश कर सकता है, लेकिन ऐसा करना बहुत चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. फू ने कहा कि एक ओर, पुरुष की बेवफाई परिवार के टूटने का मुख्य कारण है और उसे अपने कार्यों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. दूसरी ओर, अगर फार्मेसी ने उसकी निजता का उल्लंघन किया है, तो उसे भी कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर, फार्मेसी कर्मचारियों द्वारा किया गया फोन कॉल वैध प्रतीत होता है और जानकारी लीक करने के इरादे से नहीं किया गया था. इससे उस बेवफा व्यक्ति के लिए अपने अधिकारों के उल्लंघन का दावा करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. 

तेल नहीं, अब चुंबक है नया सोना! भारत के पास मिला खजाना, चीन की दबदबे पर लगाम

नई दिल्ली रेयर अर्थ मिनरल्‍स की वजह से वर्ल्ड वॉर तक हो सकती है. इसके दम पर चीन ने पूरी दुनिया का टेटुआ दबा रखा है. जिससे रिलेशन खराब होता है, उसे रेयर अर्थ मिनरल्‍स नहीं देता है. इससे स्‍मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक कार तक की मैन्‍यूफैक्चरिंग प्रभावित होती है. भारत के साथ संबंध जब पटरी से उतरा तो चीन ने इस अमूल्‍य खजाने के एक्‍सपोर्ट को लिमिटेड कर दिया, जिसका असर साफ तौर पर देखा गया. रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर फिलहाल चीन की मोनोपोली यानी एकाधिकार है. अमेरिका से लेकर भारत तक इसके लिए चीन पर निर्भर हैं. क्‍लाइमेट चेंज को देखते हुए फॉसिल फ्यूल्‍स (जैसे पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट्स और कोयला आदि) के दिन लदने वाले हैं. इलेक्‍ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स का बोलबाला बढ़ने वाला है, जिसकी तस्‍वीर दिखने भी लगी है. इलेक्ट्रिक कार के बढ़ते बाजार से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. इसके अलावा स्‍मार्टफोन आज लोगों के जीवन का अ‍हम हिस्‍सा बन चुके हैं. रेयर अर्थ मिनरल्‍स के बिना इनकी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग संभव नहीं है और चीन का इसपर एकाधिकार है. लिहाजा, यह पूरी तरह से चीन पर निर्भर है कि किस देश में इस तरह की इंडस्‍ट्री फलेगी-फुलेगी. लेकिन, अब एक शुभ समाचार सामने आया है. रेयर अर्थ मिनरल्‍स के रिजर्व के मामले में भारत का तीसरा स्‍थान है और एक अनुमान के अनुसार देश में 70 लाख टन ऐसे म‍िनरल्‍स हैं अनुमान है कि चीन की जमीन में 4.4 करोड़ टन रेयर अर्थ मिनरल्‍स हैं. दूसरे नंबर पर कौन है? जी हां…दूसरे नंबर पर ब्रिक्‍स का ही एक और मेंबर कंट्री ब्राज़ील है. अनुमान है कि ब्राज़ील की जमीन में 2.1 करोड़ टन रेयर अर्थ दबे हैं यानी इस गेम में ब्राज़ील दुनिया का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है, क्योंकि आने वाला टाइम तो इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ही दिख रहा है. पेट्रोल डीजल के जमाने लदने वाले हैं. सऊदी अरब से लेकर कतर वगैरह सब आगे की प्‍लानिंग कर रहे हैं, जब उनके तेल से कमाई के दिन खत्म होने वाले हैं. पहले देखते थे कि किस देश के पास कितना तेल का भंडार है. अब जमाना आएगा रेयर अर्थ के भंडार का. इस मामले में फिलहाल चीन बेताज बादशाह है. ब्राज़ील के पास दूसरा सबसे बड़ा भंडार है. आपको पता है कि इस मामले में तीसरे स्‍थान पर कौन है. अपना भारतवर्ष. देश में करीब 70 लाख टन रेयर अर्थ मिनरल्‍स होने का अनुमान है. भारत के लिए गेम चेंजर भारत में रेयल अर्थ मिनरल्‍स अभी भंडार ही हैं. जमीन में ही हैं. इसको निकालना, साफ़ करना, रिफ़ाइन करना, फिर उसके मैगनेट बनाने के लिए पूरा सिस्टम तैयार करना पड़ेगा. अच्‍छी बात यह है कि भारत अब इस काम में लग गया है. इसमें टाइम तो लगेगा. चीन कई साल से ऐसा कर रहा है और शुरू में तो कोई देश उतना सस्ता और उतनी क्षमता की रिफाइनिंग कर भी ना पाए, लेकिन लगे रहना पड़ेगा. एक सरकारी घोषणा आपने सुनी होगी. भारत नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन शुरू कर रहा है. ये उसी काम का मिशन है. इसमें कुछ साल लगेंगे. तब तक चीन से ही लेना होगा. अब चुंबक का आया जमाना! कैसे धरती में दबी ताकत से पूरी दुनिया का टेंटुआ दबा रहा चीन तेल के खेल से पूरी दुनिया अच्छी तरह वाक़िफ है. 70 के दशक में अरब देशों ने दिखा दिया था कि तेल पर कंट्रोल मतलब पूरी दुनिया पर दबाव. लेकिन अब ज़माना बदल गया है. खेल का नया खिलाड़ी है ‘रेयर अर्थ मिनरल‘ और नया सुपरपावर बन बैठा है चीन. रेयर अर्थ मिनरल्स आखिर हैं क्या? ये कोई जादुई चीज़ नहीं, बल्कि 17 धातुओं का एक समूह है. जैसे लोहा या तांबा होता है, वैसे ही ये भी खनिज हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इन्हें जमीन से निकालना और रिफाइन करना बेहद मुश्किल और महंगा काम है. लंबे समय तक इनका कोई बड़ा इस्तेमाल नहीं था. लेकिन जैसे ही इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का जमाना आया, इनकी कीमत आसमान छूने लगी. असली ताकत चुंबक की इन रेयर अर्थ मिनरल्स से बनते हैं सुपर मैगनेट. ये छोटे से पुर्जे दिखने वाले मैगनेट आज पूरी टेक्नोलॉजी की रीढ़ हैं. – स्मार्टफोन में – इलेक्ट्रिक गाड़ियों में – टीवी स्क्रीन में – हवाई जहाज के इंजन में – बिजली के टर्बाइन में खासकर इलेक्ट्रिक कारें इन चुंबकों के बिना असंभव हैं. मतलब इलॉन मस्क की टेस्ला हो या कोई और कंपनी, अगर रेयर अर्थ मैगनेट न मिले तो उनका काम खत्म. चीन कैसे बना राजा? 30-40 साल पहले चीन ने दूरदर्शिता दिखाई. उसने देखा कि इलेक्ट्रॉनिक्स का जमाना आने वाला है. उसने बड़े पैमाने पर खदानें खोलीं, रिफाइनिंग प्लांट लगाए और चुंबक बनाने की फैक्ट्रियां खड़ी कर दीं. नतीजा ये हुआ कि आज दुनिया का 90% रेयर अर्थ रिफाइनिंग चीन में होती है और 60-70% खदानें भी वहीं हैं. इतना ही नहीं, चीन ने म्यांमार, अफ्रीका और पाकिस्तान के बलूचिस्तान तक में खदानों पर कब्जा कर लिया है. यानी सिर्फ अपने देश ही नहीं, दूसरे देशों की जमीन से भी रेयर अर्थ निकालकर अपने कंट्रोल में कर लिया. बाकी दुनिया क्यों फंसी? अमेरिका जैसे देश पहले खुद खनन करते थे. लेकिन चीन ने इतने सस्ते दाम पर चुंबक बेचना शुरू किया कि बाकी देशों ने खदानें बंद कर दीं. 2002 में अमेरिका ने अपना बड़ा प्लांट ही बंद कर दिया. सबको लगा चीन से खरीदना आसान है. लेकिन जब इलेक्ट्रिक कारों का दौर आया तो चीन ने सप्लाई रोककर सबका टेंटुआ दबा दिया. भारत और दुनिया की स्थिति आज चीन के पास अनुमानित 4.4 करोड़ टन रेयर अर्थ मिनरल का भंडार है. दूसरे नंबर पर ब्राज़ील है 2.1 करोड़ टन के साथ. तीसरे नंबर पर आता है भारत, जहां करीब 70 लाख टन का भंडार है. फर्क बस इतना है कि चीन 40 साल से इस धंधे में है और भारत अभी शुरुआत कर रहा है. भारत ने ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ लॉन्च किया है. लक्ष्य साफ है- अपने भंडार को निकालना, रिफाइन करना और खुद मैगनेट बनाना. लेकिन इसमें वक्त लगेगा. तब तक चीन से लेना ही मजबूरी है. आने वाला समय कैसा होगा? जैसे कभी तेल पर कंट्रोल रखने वाले अरब देश पूरी दुनिया को ब्लैकमेल करते थे, वैसे ही … Read more