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20वीं किस्त कब आएगी? कृषि मंत्रालय ने पीएम किसान योजना पर खोले अहम राज

नई दिल्ली  9.8 करोड़ से अधिक किसान पीएम किसान योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही पीएम किसान योजना की 20वीं किस्त जारी कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक इसकी कोई आधिकारिक तारीख या स्थान की घोषणा नहीं की गई है। तारीख की घोषणा पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर की जाएगी। इस बीच, कृषि मंत्रालय ने शुक्रवार को उन्हें सोशल मीडिया पर फैली गलत सूचनाओं के प्रति आगाह किया। मंत्रालय ने कहा कि किसानों को पीएम किसान योजना से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करने की सलाह दी जाती है। कृषि विभाग ने क्या कहा? कृषि विभाग के अंतर्गत आने वाले पीएम किसान सम्मान निधि के आधिकारिक अकाउंट "एक्स" ने शुक्रवार, 18 जुलाई को एक पोस्ट में कहा, "प्रिय किसान भाइयों और बहनों, पीएम-किसान के नाम पर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही झूठी सूचनाओं से सावधान रहें। केवल आधिकारिक वेबसाइट: http://pmkisan.gov.in और @pmkisanofficial पर ही भरोसा करें। फर्जी लिंक, कॉल और संदेशों से दूर रहें।" योजना के बारे में बता दें कि पीएम-किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत पात्र किसानों को सरकार की ओर से आर्थिक मदद के रूप में प्रति वर्ष 6,000 रुपये मिलते हैं। यह राशि 2,000 रुपये की तीन किस्तों में दी जाती है। इससे पहले फरवरी 2025 में पीएम मोदी ने बिहार के भागलपुर से 19वीं किस्त जारी की थी, जिसमें 9.8 करोड़ किसानों को 22,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। अब देशभर के किसान 20वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि यह किस्त आमतौर पर हर चार महीने में जारी की जाती है, इसलिए किसान जून में इसके जारी होने की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि, 18 जुलाई तक किस्त जारी नहीं की गई है और देरी का कोई आधिकारिक कारण भी नहीं बताया गया है। पिछले साल, जून की किस्त महीना खत्म होने से पहले ही जारी कर दी गई थी।  

अब नहीं बच पाएंगे दुश्मन: खराब मौसम में भी हमला करेंगे अपाचे हेलीकॉप्टर

नई दिल्ली  भारतीय सेना को अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टरों का पहला जत्था 22 जुलाई को मिलने की उम्मीद है। इसमें 15 महीने से अधिक की देरी पहले ही हो चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर के मद्देनजर पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान-अफगानिस्तान) पर सेना की मारक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, 2020 में अमेरिका के साथ 600 मिलियन डॉलर का सौदा हुआ। इसके तहत 6 अपाचे हेलीकॉप्टरों में से पहले 3 की डिलीवरी जल्द हो सकती है, जबकि बाकी तीन इस साल के अंत तक पहुंच जाएंगे। सेना के एविएशन कोर ने मार्च 2024 में जोधपुर में पहली अपाचे स्क्वाड्रन तैयार की थी, लेकिन हेलीकॉप्टर न होने के कारण यह स्क्वाड्रन बिना उपकरणों के थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सप्लाई चेन में रुकावटों और तकनीकी समस्याओं के कारण डिलीवरी दिसंबर 2024 तक टल गई, जो मई-जून 2024 में होनी थी। इस देरी से पश्चिमी मोर्चे पर बढ़ते खतरे के बावजूद सेना ने तत्परता में कोई कमी नहीं छोड़ी। अपाचे हेलीकॉप्टर की खासियत अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टर अपनी चपलता, मारक क्षमता और एडवांस टारगेंटिग सिस्टम के लिए जाने जाते हैं। यह 300 किमी/घंटा की रफ्तार और 20 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। इसमें आधुनिक टारगेट एक्विजिशन एंड डिजाइनेशन सिस्टम (TADS) और नाइट विजन सेंसर हैं, जो रात और खराब मौसम में सटीक निशाना साधते हैं। ड्रोन नियंत्रण और डेटा लिंक क्षमता इसे और प्रभावी बनाती है। भारतीय वायुसेना ने 2015 में एक अलग समझौते के तहत 22 अपाचे हेलीकॉप्टर पहले ही शामिल कर लिए हैं, लेकिन सेना को अपने हिस्से के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। ये हेलीकॉप्टर सेना की जमीनी हमले की क्षमता को मजबूती देंगे, जो ऑपरेशन सिंदूर के तहत मौजूदा जरूरतों के लिए अहम है। सैन्य तैयारियों को मिलेगा बढ़ावा सेना का एविएशन कोर टोही, घायल सैनिकों की निकासी और दूसरे मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके मौजूदा संसाधनों में स्वदेशी उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव, रुद्र, चीता, चेतक, और हल्का युद्धक हेलीकॉप्टर (LCH) शामिल हैं। अपाचे हेलीकॉप्टरों के आ जान से पश्चिमी सीमा पर आक्रामक और रक्षात्मक अभियानों को मजबूती मिलेगी, जिससे सेना की तैयारियां आगे बढ़ती नजर आएंगी।  

संसद के मॉनसून सत्र में ही आएगा जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव? रिजिजू ने दिया जवाब

नई दिल्ली  संसद का मॉनसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। सरकार और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने एजेंडे तैयार कर लिए हैं। इसी सत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाने की भी संभावना है। हालांकि संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक बिजनेस एडवाइजरी कमेटी इस मुद्दे को पास नहीं करती और चेयर से मंजूरी नहीं मिल जाती, इस मामले में कोई भी ऐलान करना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि महाभियोग को लेकर सांसदों के हस्ताक्षर हो रहे हैं। 100 से ज्यादा सदस्य इसपर साइन कर चुके हैं। जस्टिस यशवंत वर्मा वर्तमान में इलाहाबाद हाई कोर्ट में कार्यरत हैं। हालांकि उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया है। दिल्ली हाई कोर्ट में जज रहने के दौरान उनके आवास से जली हुए नोटों की गड्डियां मिली थीं। इससे पहले रीजीजू ने शुक्रवार को कहा था कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल एकमत हैं। न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से नोटों की जली हुई गड्डियां बरामद हुई थीं। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के आदेश पर हुई आंतरिक जांच में उन्हें दोषी ठहराया गया है। न्यायमूर्ति वर्मा ने किसी भी गलत कार्य में संलिप्त होने से इनकार किया है, लेकिन सुप्रीम द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला है कि न्यायाधीश और उनके परिवार के सदस्यों का उस स्टोर रूम पर गुप्त या सक्रिय नियंत्रण था, जहां नकदी पाई गई थी। इससे यह साबित होता है कि मामला गंभीर है और उन्हें हटाया जाना चाहिए। शुक्रवार को इस मामले को लेकर रिजिजू ने भी कहा था कि उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के सभी वरिष्ठ नेताओं से बात की है। मैं एकमात्र सांसद वाले कुछ दलों से भी संपर्क करुंगा, क्योंकि मैं किसी भी सदस्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहता। ताकि यह भारतीय संसद की एक संयुक्त राय के रूप में सामने आए।’ केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लाने की पहल सरकार की नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों की है, जिनमें कांग्रेस के सांसद भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मामला है, क्योंकि न्यायपालिका ही वह जगह है जहां लोगों को न्याय मिलता है। अगर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, तो यह सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसी कारण न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव सभी राजनीतिक दलों द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा।’  

ड्रीम प्रोजेक्ट नियोम की रफ्तार पर ब्रेक! सऊदी अरब में 20% कर्मचारियों की छुट्टी तय

रियाद सऊदी अरब के ड्रीम प्रोजेक्ट नियोम सिटी संकट में फंसता दिख रहा है। सेमाफोर ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में बताया है कि निओम 1,000 कर्मचारियों की छंटनी करने पर विचार कर रहा है। यह इस प्रोजेक्ट में काम कर रहे कुल कर्मचारियों का 20 प्रतिशत है। इससे पता चलता है कि सऊदी अरब सरकार अपनी अपनी प्रमुख गीगा प्रोजेक्ट को छोटा कर रहा है। सेमाफोर ने बताया है कि निओम एक व्यापक बदलाव के तहत छंटनी पर विचार कर रहा है। इसके तहत 1,000 से ज्यादा कर्मचारी उत्तर-पश्चिमी लाल सागर तट पर स्थित नियोम की साइट को छोड़कर रियाद ट्रांसफर हो सकते है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह योजनाएं अभी अंतिम रूप नहीं ले पाई हैं। इनमें और बदलाव हो सकते हैं। नियोम सऊदी सरकार की योजना सेमाफोर की यह रिपोर्ट उन लेखों की श्रृंखला में सबसे नई है। इससे पता चलता है कि सऊदी अरब सरकार नियोम के मामले में अपनी महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगा रही है। नियोम का उद्देश्य सऊदी अरब के लाल सागर तट को लग्जरी होटलों, स्की रिसॉर्ट, द लाइन नाम का 170 किलोमीटर लंबा शहर और एक औद्योगिक पार्क बनना है। निओम ग्रीक शब्द नियोस (नया) और अरबी शब्द मुस्तकबाल (भविष्य) के मिश्रण से बना है। ऐसे में नियोम का अर्थ नया भविष्य है। यह मोहम्मद बिन सलमान के प्रोजेक्ट 2030 का हिस्सा है। नियोम शहर 2,63,000 हेक्टेयर में फैला होगा। इसके जरिए मोहम्मद बिन सलमान का मकसद सऊदी की अर्थव्यवस्था की तेल से निर्भरता कम करनी है। प्रोजेक्ट पर संदेह! सेमाफोर से पहले ब्लूमबर्ग ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि सऊदी अरब ने कई कंस्लटिंग फर्म से 'द लाइन' की व्यवहार्यता की समीक्षा करने के लिए कहा है। द फाइनेंशियल टाइम्स ने इस साल की शुरुआत में दावा किया था कि सऊदी अरब ने नियोम की व्यापक समीक्षा शुरू की है क्योंकि इस पर कई सवाल हैं। नियोम की व्यावहारिकता लंबे समय से बहस का विषय रही है। खासतौर उन निवेशकों के बीच संदेह है, जिन्हें लगता है कि सऊदी अरब शायद ही इस भविष्यवादी दूरस्थ शहर में लोगों को रहने के लिए आकर्षित कर पाएगा। सऊदी अरब का 1 ट्रिलियन डॉलर का सार्वजनिक निवेश कोष (पीआईएफ) से फिलहाल नियोम की फंडिंग हो रही है। हालांकि विदेशी निवेशकों की सीमित रुचि के कारण इस परियोजना को असफलताओं का सामना करना पड़ा है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा तोहफा: जानिए 8वें वेतन आयोग की तिथि और सैलरी बढ़ोतरी का स्केल

नई दिल्ली  देशभर के केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स आगामी 8वें वेतन आयोग से जुड़े खबरों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। इससे वेतन और पेंशन में जबरदस्त बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। एम्बिट कैपिटल की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नए सैलरी स्ट्रक्चर से कुल पारिश्रमिक में 30-34% की वृद्धि हो सकती है, जिसका असर देश भर के 1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और रिटायर कर्मचारियों पर पड़ेगा। अगर इसे लागू किया जाता है तो यह संशोधन 2026 या वित्तीय वर्ष 2027 तक लागू हो सकता है, और इससे सरकारी खजाने पर 1.8 लाख करोड़ रुपये का भारी बोझ पड़ सकता है। क्या है डिटेल वर्तमान वेतन और पेंशन संरचना सातवें वेतन आयोग पर आधारित है, जो जनवरी 2016 में लागू हुआ था। जीवन-यापन की लागत, मुद्रास्फीति और आर्थिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए वेतन संरचना में संशोधन के लिए आमतौर पर हर दस साल में एक नया आयोग गठित किया जाता है। उम्मीद है कि आठवें वेतन आयोग द्वारा भी यह परंपरा जारी रहेगी और रक्षा कर्मियों और पेंशनभोगियों सहित केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए संशोधित वेतनमान की पेशकश की जाएगी। वेतन बढ़ोतरी को गति देने वाला फिटमेंट फैक्टर अपेक्षित संशोधन के मुख्य कंपोनेंट में से एक फिटमेंट फैक्टर है—एक गुणक जिसका उपयोग नए बेसिक सैलरी को तय करने के लिए किया जाता है। एम्बिट कैपिटल का अनुमान है कि आठवें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.46 के बीच हो सकता है। इसका अर्थ है कि वर्तमान में 18,000 रुपये का न्यूनतम वेतन बढ़कर 32,940 रुपये (1.83 पर) या 44,280 रुपये (2.46 पर) हो सकता है। उदाहरण के लिए, 50,000 रुपये का मौजूदा आधार वेतन, फिटमेंट फैक्टर के निचले सिरे पर 91,500 रुपये और ऊपरी सिरे पर 1.23 लाख रुपये तक बढ़ सकता है। संशोधित ढांचे से महंगाई भत्ते को मुद्रास्फीति के साथ और अधिक सटीक रूप से संरेखित करने और पेंशन भुगतान को तदनुसार अद्यतन करने की भी उम्मीद है। उपभोग और आर्थिक विकास को बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि नया वेतन आयोग आर्थिक विकास के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा, क्योंकि बढ़े हुए वेतन से उपभोग में वृद्धि, स्वास्थ्य सेवा तक बेहतर पहुंच, बेहतर आवास और मनोरंजन पर अधिक खर्च हो सकता है। इतने बड़े कर्मचारी आधार पर वेतन वृद्धि का व्यापक प्रभाव खुदरा, रियल एस्टेट और सेवा क्षेत्रों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।  

भारत बना डिजिटल पेमेंट्स का सिरमौर, UPI ने जून में रचा 24 लाख करोड़ का इतिहास

नई दिल्ली भारत त्वरित भुगतान में दुनिया में ग्लोबल लीडर के रूप में उभरा है। यूपीआई से अकेले जून माह में 24.03 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन 18.39 अरब ट्रांजैक्शन के माध्यम से हुआ है। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ओर से रविवार को जारी किए गए नोट में दी गई। बीते महीने सालाना आधार पर यूपीआई लेनदेन की संख्या में 32 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पिछले साल जून में यूपीआई लेनदेन की संख्या 13.88 अरब थी। आईएमएफ की रिपोर्ट में बताया गया कि वर्तमान में भारत में सभी डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत और दुनिया भर में सभी रियल टाइम डिजिटल भुगतानों में यूपीआई की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि अब यह प्रतिदिन 64 करोड़ से ज्यादा लेनदेन संभालता है, जो वीजा जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियों से कहीं ज्यादा है, जो प्रतिदिन लगभग 63.9 करोड़ लेनदेन संभालती हैं। यह उपलब्धि काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यूपीआई केवल नौ वर्षों में इस मुकाम तक पहुंच गया है। यूपीआई प्लेटफॉर्म वर्तमान में 49.1 करोड़ व्यक्तियों और 6.5 करोड़ व्यापारियों को सेवाएं प्रदान करता है और 675 बैंकों को एक ही प्रणाली के माध्यम से जोड़ता है। इसने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे देशभर के लोगों विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों को आसान और किफायती तरीके से डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने में मदद मिली है। आईएमएफ की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की सफलता वर्षों के डिजिटल आधारभूत कार्य और समावेशी विकास के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग की एक मजबूत दृष्टि का परिणाम है। यूपीआई, जिसकी शुरुआत एक भुगतान प्रणाली के रूप में हुई थी, अब सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे में एक वैश्विक मानक बन गया है। यूपीआई का प्रभाव केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। यह पहले से ही संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और मॉरीशस सहित सात देशों में मौजूद है। फ्रांस में इसकी शुरुआत यूरोप में इसके प्रवेश का प्रतीक है, जिससे वहां यात्रा करने वाले या रहने वाले भारतीय निर्बाध भुगतान कर सकेंगे। भारत ब्रिक्स समूह में भुगतान मानक के रूप में यूपीआई को अपनाने की भी वकालत कर रहा है, जिसमें हाल ही में छह नए सदस्य देश शामिल हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो इससे सीमा पार भुगतान तेज, सस्ता और अधिक सुरक्षित हो सकता है, जिससे वैश्विक डिजिटल लीडर के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा 2016 में लॉन्च किए गए यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को सरल, तेज और सुलभ बना दिया है। मोबाइल फोन पर बस कुछ ही टैप से, यूजर्स व्यापारियों को भुगतान कर सकते हैं, दोस्तों को पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, या अपने बैंक खातों का प्रबंधन कर सकते हैं। इसकी सुविधा और गति ने इसे व्यक्तियों और व्यवसायों दोनों के बीच एक लोकप्रिय विकल्प बना दिया है।

किश्तवाड़ में एनकाउंटर: जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी इलाके में छिपे होने की सूचना

किश्तवाड़ जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दच्छन इलाके में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई है. शुरुआती जानकारी के अनुसार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों के एक समूह के इलाके में छिपे होने की आशंका है. सुरक्षाबलों ने सूचना के आधार पर इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन जारी है. बताया जा रहा है कि कुछ आतंकी छिपे हुए हैं और सुरक्षा बलों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया है. समाचार एजेंसी के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि यह मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब पुलिस और सेना ने खुफिया जानकारी के आधार पर दच्छन और नगसेनी के बीच स्थित खानकू जंगल में तलाशी अभियान शुरू किया. सर्च ऑपरेशन के दौरान जंगल में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी. जवाब में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए गोलियां चलाईं. ये मुठभेड़ कुछ समय तक चली, हालांकि किसी के घायल या हताहत होने की खबर नहीं है.अधिकारियों के अनुसार इलाके में अतिरिक्त सुरक्षाबलों को भेजा गया है और ऑपरेशन अब भी जारी है. सुरक्षाबल जंगल में छिपे आतंकियों की घेराबंदी कर उन्हें पकड़ने या निष्क्रिय करने का प्रयास कर रहे हैं. सुरक्षाबलों का कड़ा एक्शन किश्तवाड़ में एनकाउंटर की घटना से एक दिन पहले ही यानी शनिवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस विंग ने आतंकवादी फंडिंग और भर्ती मॉड्यूल से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए श्रीनगर, पुलवामा, बडगाम और गंदरबल जिलों से 10 संदिग्धों को हिरासत में लिया था. इन सभी पर पाकिस्तान के निर्देश पर आतंकवादी गतिविधियों के समन्वय, वित्तपोषण और उन्हें अंजाम देने का आरोप है. जांच में बड़े खुलासे जांच में खुलासा हुआ कि ये सभी संदिग्ध एक विशेष एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन के जरिए लगातार संपर्क में थे. इसी एप्लिकेशन का उपयोग आतंकी संगठनों द्वारा रिक्रूटमेंट, फंडिंग और हमलों के समन्वय के लिए किया जा रहा था. यह पूरा नेटवर्क पाकिस्तान स्थित आतंकी हैंडलर अब्दुल्ला गाजी संचालित कर रहा था, जो लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से जुड़ा हुआ है.

हिमाचल में आपदा राहत के लिए केंद्र सक्रिय, अमित शाह ने बहु-क्षेत्रीय टीम के गठन की घोषणा की

नई दिल्ली केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति व तीव्रता को देख एक बहु-क्षेत्रीय केंद्रीय टीम के गठन का निर्देश दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में यह महसूस किया गया कि हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और मूसलाधार वर्षा की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हुई है, जिससे राज्य में व्यापक जनहानि, बुनियादी ढांचे और आजीविका को नुकसान और पर्यावरण क्षरण हुआ है। अमित शाह ने तुरंत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की, भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे, भूविज्ञानी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के विशेषज्ञों की एक बहु-क्षेत्रीय केंद्रीय टीम गठित करने का आदेश दिया। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बाढ़, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने उनके ज्ञापन का इंतजार किए बिना ही, नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) को पहले ही भेज दिया है। यह अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल 18 से 21 जुलाई तक राज्य के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, केंद्र सरकार आपदाओं के समय बिना किसी भेदभाव के राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी है। इसी दिशा में, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति ने वर्ष 2023 के लिए बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए हिमाचल प्रदेश को 2,006.40 करोड़ रुपए के परिव्यय को पहले ही मंजूरी दे दी है और 7 जुलाई 2025 को 451.44 करोड़ रुपए की पहली किस्त भी जारी कर दी है। इसके अलावा, राज्य के प्रभावित लोगों की सहायता के लिए, केंद्र सरकार ने तत्काल राहत उपायों के लिए 18 जून 2025 को राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) से हिमाचल प्रदेश को 198.80 करोड़ रुपए की केंद्रीय हिस्सेदारी की पहली किस्त पहले ही जारी कर दी है। केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्यों को आवश्यक राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) टीमें, सेना टीमें और वायु सेना की तैनाती सहित सभी प्रकार की रसद सहायता भी प्रदान की है। राज्य में बचाव और राहत कार्यों के लिए एनडीआरएफ की कुल 13 टीमें तैनात हैं।

समुद्र में मची चीख-पुकार: इंडोनेशियाई जहाज में भीषण आग, 280 लोगों की जान पर बन आई

इंडोनेशिया इंडोनेशिया के तट पर 280 लोगों से भरी एक जहाज में आग लग गई, जिससे घबराए यात्रियों ने समुद्र में छलांग लगा दी. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें जहाज पूरी तरह से आग की लपटों में घिरा हुआ दिखाई दे रहा है और आसमान में काले धुएं का गुबार उठ रहा है. इस दुर्घटना में तीन लोगों की मौत और 18 लोगों के घायल होने की खबर है. दुर्घटना का शिकार हुई इस जहाज का नाम केएम बार्सिलोना वीए (KM Barcelona VA) है.   आग रविवार दोपहर स्थानीय समयानुसार लगभग 1.30 बजे लगी. वायरल वीडियो में घबराये हुए यात्रियों को देखा जा सकता है, जिनमें से कुछ अपने बच्चों के साथ आग से बचने के लिए समुद्र में छलांग लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं. इस भयावह फुटेज में यात्री चमकीले नारंगी रंग की लाइफ जैकेट पहनकर पानी में कूदते दिखाई दे रहे हैं और जहाज में आग तेजी से फैल रही है. KM Barcelona III, KM Venecian और KM Cantika Lestari 9F नामक तीन बड़े जहाजों को तुरंत मौके पर भेजा गया.  एक अन्य फुटेज में जहाज के डेक पर भीड़ दिखाई दे रही है और कर्मचारी यात्रियों को नाव से कूदने से पहले लाइफ जैकेट बांधने में मदद करते दिखाई दे रहे हैं. आग की लपटों ने जहाज को अंदर से बाहर तक पूरी तरह जला दिया. नीले और सफेद रंग का यह जहाज जलकर काले मलबे में तब्दील हो गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 18 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है, हालांकि कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश की जा रही है. नॉर्थ सुलावेसी रीजनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी के सेक्रेटरी जेरी हार्मनसिना ने स्थानीय न्यूज आउटलेट डेटिक को बताया कि आग तालिस द्वीप के पास लगी.  3000 गाड़ियों के साथ डूब गया था मालवाहक जहाज इस महीने की शुरुआत में प्रशांत महासागर में 'द मॉर्निंग मिडास' नाम का एक मालवाहक जहाज आग लगने के बाद डूब गया था. इस जहाज पर लगभग 3000 गाड़ियां लदी थीं, जिनमें से लगभग 800 इलेक्ट्रिक व्हीकल थे. अमेरिकन कोस्ट गार्ड द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में जहाज के पिछले हिस्से में इलेक्ट्रिक व्हीकल से भरे डेक से धुएं का एक बड़ा गुबार उठता देखा गया, जिसके बाद शिपिंग कंपनी जोडियाक मैरीटाइम ने एक बयान में इसकी पुष्टि की. इस जहाज को बचाने के लिए कुछ नहीं किया जा सका और 3000 गाड़ियों को लेकर यह समंदर में समा गया. 

क्रूज हादसे से दहला देश: 37 शव बरामद, लापता यात्रियों की तलाश जारी

वियतनाम  वियतनाम में एक भीषण हादसे में पर्यटकों से भरा एक क्रूज जहाज समुद्र में पलट गया है जिससे अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है। यह दुखद घटना शनिवार को क्वांग निन्ह प्रांत के प्रसिद्ध हा लॉन्ग खाड़ी में तब हुई जब जहाज एक भयंकर तूफान की चपेट में आ गया। बचाव अभियान अभी भी बड़े पैमाने पर जारी है क्योंकि दर्जनों लोग अभी भी लापता हैं। यह घटना शनिवार को दोपहर लगभग 1:30 बजे (स्थानीय समयानुसार) हुई। अधिकारियों ने बताया कि जहाज का सामना एक शक्तिशाली तूफान से हुआ और दोपहर 2:05 बजे तक जहाज का अधिकारियों से संपर्क टूट गया और वह खाड़ी के पानी में डूब गया। जहाज में सवार थे 48 यात्री, अधिकतर युवा और बच्चे हादसे के समय क्रूज जहाज में 48 यात्री सवार थे जिनमें 24 पुरुष और 24 महिलाएँ थीं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई यात्री युवा और बच्चे थे। ज़्यादातर यात्री वियतनाम से ही थे जो राजधानी हनोई से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हा लॉन्ग खाड़ी घूमने आए थे। चुनौतीपूर्ण मौसम और भारी बारिश के बावजूद बचाव दल 11 लोगों को पानी से ज़िंदा निकालने में कामयाब रहे। हालांकि दर्जनों लोग अभी भी लापता हैं जिसके चलते बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जताया शोक, जांच के आदेश इस दुर्घटना और पर्यटकों की मौत के बाद देश भर में शोक का माहौल है। वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह ने भी इस घटना को लेकर अपना बयान जारी किया है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त की है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने दुर्घटना की विस्तृत जांच का आह्वान किया है। सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस घटना में हुई किसी भी चूक या लापरवाही से सख्ती से निपटा जाएगा। बता दें कि हा लॉन्ग बे वियतनाम के सबसे प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। साल 2019 में यहां देश और विदेश से 40 लाख से ज़्यादा पर्यटक घूमने आए थे। इस हादसे ने वियतनाम के पर्यटन उद्योग और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।