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Aaj Ka Rashifal 21 January 2026: भाग्य देगा साथ या बढ़ेंगी चुनौतियाँ? पढ़ें सभी राशियों का हाल

मेष राशि: मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन प्रभावशाली रहने वाला है. कामकाज उम्मीद से बेहतर रहेगा. साख और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. आधुनिक विषयों में रुचि बढ़ेगी और आर्थिक मामलों में गति आएगी. लक्ष्य को साधने की कोशिश सफल होगी. प्रशासन और शासन से जुड़े काम आगे बढ़ेंगे. परिवार से मुलाकात मन को प्रसन्न करेगी. वृष राशि: वृष राशि वालों के लिए कामकाज अनुकूल रहेगा. व्यापार में तेजी आएगी और अपनों से करीबी बढ़ेगी. प्रतिभा प्रदर्शन के मौके मिलेंगे. पद और प्रतिष्ठा मजबूत होगी. अधिकारी वर्ग प्रसन्न रहेगा. विरोधियों में हताशा दिखेगी. साहस और आत्मविश्वास बढ़ा हुआ रहेगा. मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातकों को आज भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा. कामकाज में सकारात्मकता रहेगी. उच्च शिक्षा और नई योजनाओं पर फोकस बढ़ेगा. प्रभाव और लाभ में वृद्धि होगी. आकर्षक प्रस्ताव मिल सकते हैं. आस्था और अध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ेगा. कर्क राशि: कर्क राशि के लिए समय मिश्रित प्रभाव वाला है. अपनों की सलाह मानकर आगे बढ़ना लाभकारी रहेगा. व्यक्तिगत मामलों में सजगता रखें. अप्रत्याशित घटनाक्रम संभव है. परिवार का सहयोग मिलेगा. शोध और गहन विषयों में रुचि बढ़ेगी. सिंह राशि: सिंह राशि वालों के लिए साझा कार्य और व्यापार में सुधार होगा. नेतृत्व क्षमता निखरेगी. रिश्ते मजबूत होंगे और दांपत्य जीवन में खुशियां रहेंगी. उद्योग और प्रबंधन से जुड़े लोगों को खास सफलता मिल सकती है. कन्या राशि: कन्या राशि के जातकों को आज मेहनत पर भरोसा रखना होगा. विरोधियों की सक्रियता रह सकती है. धोखेबाजी से बचें. नए लोगों पर तुरंत भरोसा न करें. विनम्रता और तार्किक सोच से सफलता मिलेगी. तुला राशि: तुला राशि वालों के लिए दिन आनंददायक रहेगा. मित्रों के साथ यात्रा या मनोरंजन संभव है. रिश्तों में तालमेल बेहतर होगा. पढ़ाई और प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी. ऊर्जा और उत्साह बना रहेगा. वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातकों को आज जिद और उतावलेपन से बचना चाहिए. पारिवारिक मामलों में सहजता रहेगी. बड़ों का सानिध्य लाभ देगा. धैर्य और विनम्रता से काम लें. धनु राशि: धनु राशि वालों के लिए सामाजिक और पेशेवर प्रयास सफल रहेंगे. करियर में नए अवसर मिल सकते हैं. आत्मविश्वास बढ़ेगा. भाई-बंधुओं से नजदीकियां बढ़ेंगी. यात्रा के योग बन सकते हैं.   मकर राशि: मकर राशि के लिए घर-परिवार में सुख और सामंजस्य बना रहेगा. धन-संपत्ति से जुड़े मामलों में तेजी आएगी. बचत पर जोर रहेगा. महत्वपूर्ण प्रस्ताव मिल सकते हैं. कुंभ राशि: कुंभ राशि वालों की सोच आज आधुनिक और रचनात्मक रहेगी. नई योजनाएं गति लेंगी. आत्मविश्वास बढ़ेगा. वाणी और व्यवहार से लोग प्रभावित होंगे. मीन राशि: मीन राशि के लिए खर्च अधिक रहने के संकेत हैं. बजट और अनुशासन बनाए रखें. विरोधियों से सतर्क रहें. निवेश सोच-समझकर करें. बड़ों का सहयोग मिलेगा.  

जब हनुमान जी बने लक्ष्य: बाण चलाने से पहले भरत को क्यों हुआ था भय?

रामायण के कई प्रसंग हमें जीवन की बड़ी सीख देते हैं. ऐसा ही एक प्रसंग तब आता है जब लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए हनुमान जी पूरा द्रोणागिरि पर्वत उठाकर लंका ले जा रहे थे. इस दौरान जब वे अयोध्या के ऊपर से गुजरे, तो भरत के साथ उनका एक छोटा सा टकराव हुआ. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भरत ने हनुमान जी को मारने के लिए मारक बाण का इस्तेमाल क्यों नहीं किया था? आइए जानते हैं. जब अयोध्या के आसमान में छाया अंधेरा युद्ध भूमि में लक्ष्मण जी मूर्छित थे और सूर्योदय से पहले संजीवनी बूटी पहुंचानी जरूरी थी. हनुमान जी विशाल पर्वत लेकर वायु मार्ग से तेजी से उड़ रहे थे. जब वे अयोध्या के ऊपर से निकले, तो उनकी विशाल परछाईं को देखकर भरत को लगा कि शायद कोई मायावी राक्षस अयोध्या पर हमला करने या उसे नष्ट करने के लिए कोई पहाड़ ले जा रहा है. क्यों चलाया बिना फल वाला बाण? भरत एक कुशल योद्धा थे, वे चाहते तो एक ही बाण में उस संकट को समाप्त कर सकते थे. लेकिन उन्होंने हनुमान जी पर बिना नोक वाला बाण चलाया, जिसे सायक भी कहा जाता है. इसके पीछे दो मुख्य कारण थे. भरत को पूरी तरह यकीन नहीं था कि उड़ने वाला कोई शत्रु ही है. उन्हें लगा कि अगर वह कोई मित्र हुआ, तो घातक बाण चलाने से अनर्थ हो जाएगा. राजा दशरथ ने बचपन में भरत को एक शिक्षा दी थी. दशरथ ने अनजाने में शब्दभेदी बाण चलाकर श्रवण कुमार की हत्या कर दी थी, क्योंकि उन्हें लगा था कि कोई जंगली जानवर पानी पी रहा है. उस एक गलती ने पूरे रघुवंश को पुत्र वियोग का श्राप और दुख दिया था. दशरथ ने भरत को समझाया था बेटा, जब तक तुम्हारी शंका पूरी तरह दूर न हो जाए तब तक कभी भी प्राणघातक बाण मत चलाना. राम नाम ने बचा लिया अनर्थ जैसे ही भरत का बाण हनुमान जी को लगा, वे राम-राम जपते हुए नीचे गिर पड़े. राम का नाम सुनते ही भरत हैरत में पड़ गए. वे दौड़कर हनुमान जी के पास पहुंचे और उनसे क्षमा मांगी. जब उन्हें पता चला कि यह पवनपुत्र हनुमान हैं और वे उनके प्रिय भाई राम के काम के लिए जा रहे हैं, तो भरत की आंखों में आंसू आ गए. भरत ने अपने विवेक और पिता के अनुभव से सीख लेकर एक बहुत बड़े पाप को होने से रोक लिया. अगर उस दिन भरत घातक बाण चलाते, तो शायद लक्ष्मण के प्राण बचाना असंभव हो जाता.

बार-बार आता है गुस्सा? इन उपायों से रखें खुद को शांत

गुस्सा आना और गुस्सा होना दो अलग बातें हैं। किसी इंसान को गुस्सा आ रहा है लेकिन उसने कंट्रोल कर लिया, तो वो कई सारी प्रॉब्लम से बच सकता है। लेकिन गुस्सा हो जाना मतलब कि आपका अपने गुस्से पर कंट्रोल नही है। इसलिए सबसे जरूरी है समझना कि अपने गुस्से पर कैसे कंट्रोल किया जाए। जिससे ना केवल आप बाद में किसी भी तरह की शर्मिंदगी से बचें बल्कि होने वाले नुकसान को भी टाल सकें। गुस्से पर कंट्रोल करने के लिए अगर सांइटिफिक तरीके की बात की जाए तो मायो क्लीनिक ने इसके कई तरीके बताएं हैं, जिससे गुस्से को कंट्रोल किया जा सकता है। गुस्से में बोलने से पहले सोचें किसी भी आध्यात्मिक गुरु से बात करें तो वो गुस्से में बोलने से मना करते हैं। ठीक यहीं बात साइंस भी कहता है कि जब भी आप गुस्सा हो तो बोलने से पहले सोचें। गुस्से में बोले गए शब्द बाद में शर्मिंदगी का कारण बन सकते हैं। इसलिए गुस्सा हो तो चुप हो जाए और सोचकर बोलें। फिजिकल एक्टीविटी करें गुस्से को कंट्रोल करना है तो फिजिकल एक्टीविटी करें। जैसे कि वॉक करना शुरू करें या रन करें। या फिर अपनी मनपसंद किसी फिजिकल एक्टीविटी को करें। काम के बीच से ब्रेक लें कई बार काम करते-करते दिमाग थक जाता है। ऐसे में स्ट्रेसफुल माइंड में एंगर कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। इससे बचने के लिए ब्रेक लें और माइंड को रिफ्रेश करें। जिससे गुस्सा पर कंट्रोल हो सके। माफ करना सीखें मन में निगेटिव बातें रखना गुस्से को बढ़ाती है। जिसके प्रति गुस्सा हों उसे माफ करने से कड़वाहट कम होती है और आपके अंदर का गुस्सा भी कम होता है। सॉल्यूशन पर फोकस करें जब भी गुस्सा हो तो हमेशा सॉल्यूशन पर फोकस करें। वो कौन सी चीजें हैं जिससे गुस्सा आता है। उसके सॉल्यूशन निकालने की कोशिश करें। जिससे आपका गुस्सा कम हो।  

कहीं आप भी तो नहीं कर रहे झाड़ू से जुड़ी यह भूल? मां लक्ष्मी हो सकती हैं रुष्ट

 सनातन धर्म में झाड़ू का विशेष महत्व है। इसका संबंध मां लक्ष्मी और घर की स्वच्छता से है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, झाड़ू के द्वारा घर की दरिद्रता बाहर निकलती है और धन आगमन के मार्ग खुलते हैं। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में साफ-सफाई रहती है। वहीं, धन की देवी मां लक्ष्मी वास करती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, झाड़ू को घर की उत्तम दिशा में रखना चाहिए। झाड़ू से जुड़ी गलती करने से व्यक्ति को जीवन में कंगाली का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही मां लक्ष्मी की नाराजगी का सामान करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं कि घर की किस दिशा में झाड़ू रखनी चाहिए और इससे जुड़े नियम के बारे में। वास्तु शास्त्र में झाड़ू से जुड़े नियम के बारे में विस्तार से बताया गया है। वास्तु के अनुसार, झाड़ू को घर की उत्तम दिशा में रखने से आर्थिक स्थिति ठीक बनी रहती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है, लेकिन झाड़ू को गलत दिशा में रखने से जातक को धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। किस दिशा में रखें झाड़ू? वास्तु के अनुसार, झाड़ू रखने के लिए पश्चिम दिशा को उत्तम माना जाता है, क्योंकि इस दिशा को धन और प्रसिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिशा में झाड़ू को रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम दिशा में भी झाड़ू को रख सकते हैं। यह दिशा स्थिरता प्रदान करती है। भूलकर भी न रखें इस दिशा में झाड़ू झाड़ू को भूलकर भी उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में झाड़ू रखने से घर में दरिद्रता का आगमन होता है। साथ ही धन की कमी हो सकती है। अगर आप भी इस तरह की गलती कर रहे हैं, तो आज ही इसमें सुधार करें। इसके अलावा झाड़ू को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना वर्जित है। इस दिशा में झाड़ू को रखने से घर में क्लेश की समस्या बन सकती है। इन बातों का रखें ध्यान     घर या ऑफिस में झाड़ू को किसी की नजरों से दूर रखना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।     घर में टूटी हुई झाड़ू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस गलती को करने से घर में दरिद्रता का वास होता है और इंसान को कई परेशानियां घेर लेती हैं।    

पंचक आज आधी रात से प्रभावी, भूलकर भी ये शुभ कार्य किए तो हो सकता है नुकसान

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में समय की गणना को बहुत महत्व दिया गया है. शुभ कार्यों के लिए जहां हम मुहूर्त देखते हैं, वहीं कुछ समय ऐसा भी होता है जिसे वर्जित माना गया है. ऐसा ही एक समय है पंचक. आज यानी 20 जनवरी की देर रात से पंचक शुरू हो रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से बचना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान किए गए अशुभ कार्य का प्रभाव पांच गुना बढ़ जाता है. कब से कब तक है पंचक? ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार पंचक की अवधि कुछ इस प्रकार रहेगी. पंचक का आरंभ: 21 जनवरी 2026 (बुधवार) को रात 01:35 AM से (यानी आज 20 जनवरी की आधी रात के बाद). पंचक का समापन: 25 जनवरी 2026 (रविवार) को दोपहर 01:35 PM पर. चूंकि यह पंचक बुधवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे ज्योतिष की भाषा में शुभ फल देने वाला राज पंचक भी कहा जाता है, लेकिन कुछ सावधानियां फिर भी जरूरी हैं. क्या होता है पंचक? जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में विचरण करता है, तो उस काल को पंचक कहा जाता है. सरल शब्दों में कहें तो जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में होता है, तब पंचक लगता है. शास्त्रों के अनुसार, पंचक का अर्थ है ‘पांच’. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान होने वाली कोई भी शुभ या अशुभ घटना पांच बार दोहराई जा सकती है. पंचक में भूलकर भी न करें ये 5 काम लकड़ी इकट्ठा करना: पंचक के दौरान ईंधन के लिए लकड़ी एकत्र करना या घास-फूस इकट्ठा करना अशुभ माना जाता है. इससे अग्नि का भय बना रहता है. घर की छत डलवाना: अगर आप घर बनवा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि पंचक के दौरान छत न डलवाएं. माना जाता है कि इससे घर में क्लेश और धन की हानि हो सकती है. चारपाई या बेड बनवाना: पंचक काल में नया बेड, चारपाई बुनना या खरीदना शुभ नहीं माना जाता. यह सुख-शांति में बाधा उत्पन्न कर सकता है. दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना गया है. पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह कष्टकारी हो सकती है. अंतिम संस्कार में सावधानी: यदि पंचक के दौरान किसी की मृत्यु हो जाए, तो अंतिम संस्कार विशेष नियमों के साथ किया जाता है. शांति के लिए शव के साथ पांच पुतले बनाकर जलाए जाते हैं. पंचक में क्या करें ? क्या करें: आप पूजा-पाठ, नामकरण, और नियमित व्यापारिक कार्य कर सकते हैं. चूंकि यह राज पंचक है, इसलिए सरकारी कामकाज और संपत्ति के लेन-देन में सफलता मिलने के योग बनते हैं. बस ध्यान रखें कि ऊपर बताए गए पांच वर्जित काम न करें. मन में श्रद्धा रखें और किसी भी नए बड़े काम की शुरुआत से पहले अपने कुलदेवता का स्मरण जरूर करें.

बसंत पंचमी और पीले रंग का गहरा संबंध: क्या है इसके पीछे की मान्यता?

भारत त्योहारों का देश माना जाता है. यहां जो भी पर्व मनाए जाते हैं, उसके पीछे कोई न कोई रहस्य अवश्य छिपा होता है. माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन हर साल बंसत पंचमी मनाई जाती है. ये पर्व विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित किया गया है. इस पर्व को ‘श्री पंचमी’ या ‘ज्ञान पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है. ये पर्व बंसत ऋतु के आने का प्रतीक माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से माता सरस्वती का पूजन किया जाता है. छात्रों के लिए ये पर्व बहुत विशेष और महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती का पूजन करने से विद्या और ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन चारों ओर एक ही रंग छाया रहता है और वो होता है पीला रंग. पीला रंग सकारत्मकता और शुभता का कारक माना जाता है. ये उत्सव की आत्मा माना जाता है. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनें जाते हैं. आइए जानते हैं कि इसके पीछे रहस्य क्या है? बसंत पंचमी कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को शाम 06 बजकर 15 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 23 जनवरी 2026 को रात 08 बजकर 30 मिनट पर हो जाएगा. चूंकि 23 जनवरी को सूर्योदय पर पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का पर्व इस साल 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा. बसंत ऋतु मौसमों का राजा बसंत ऋतु को ‘ऋतुराज’ यानी मौसमों का राजा माना जाता है. यह पीलापन नई फसल के आने और जीवन में खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. लोग प्रकृति के इसी सुंदर रूप के साथ स्वयं को जोड़ने की कोशिश करते हैं, इसलिए पीले वस्त्र धारण करते हैं. धार्मिक दृष्टि से पीला रंग शुद्धता, सादगी और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. मां सरस्वती को ये रंग बहुत प्रिय है. मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग पहनने से मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है. भक्त इस दिन पीले वस्त्र पहनकर और पीले फूल अर्पित करके मां सरस्वती का पूजन करते हैं. पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा का कारक माना जाता है. ये रंग सूर्य के प्रकाश का प्रतिनिधित्व भी करता है. इस रंग से जीवन में शुभता आती है.

हनुमान से बजरंगबली तक: इस नाम के पीछे छिपी है अद्भुत और प्रेरक कहानी

हनुमान जी को भक्त 'बजरंगबली' कहकर पुकारते हैं। यह नाम उनकी अपार शक्ति और वज्र जैसी मजबूती का प्रतीक है। 'बजरंग' शब्द 'वज्रांग' से निकला है, जिसका अर्थ है अंग वज्र (इंद्र के अस्त्र) जैसे कठोर हों। हनुमान जी का शरीर इतना बलशाली था कि इंद्र के वज्र प्रहार से भी उन्हें कोई हानि नहीं हुई। इस नाम की कहानी बाल्यकाल की एक घटना से जुड़ी है, जो उनकी दिव्य शक्ति और अमरता को दर्शाती है। आइए जानते हैं इस नाम की पूरी कहानी और महत्व। बजरंगबली नाम का मूल अर्थ 'बजरंगबली' दो शब्दों से मिलकर बना है – 'बजरंग' और 'बली'। 'बली' का अर्थ है बलशाली या महाबली। 'बजरंग' शब्द संस्कृत के 'वज्रांग' से अपभ्रंशित रूप है। 'वज्र' इंद्र का दिव्य अस्त्र है, जो हीरे से भी कठोर होता है। 'वज्रांग' का अर्थ है – जिसके अंग वज्र जैसे मजबूत हों। हनुमान जी के शरीर की मजबूती इतनी थी कि वज्र प्रहार भी उन्हें चोट नहीं पहुंचा सका। इसी कारण उन्हें 'वज्रांग बली' कहा गया, जो लोक भाषा में 'बजरंगबली' बन गया। यह नाम उनकी अजेय शक्ति और अमरता का प्रतीक है। बाल्यकाल की घटना – सूर्य को फल समझकर निगलने की कथा हनुमान जी के बचपन में एक प्रसिद्ध घटना हुई, जिससे उनका नाम 'बजरंगबली' पड़ा। बाल हनुमान ने आकाश में लाल-नारंगी सूर्य को फल समझ लिया। वे उड़कर सूर्य को निगलने के लिए पहुंच गए। देवताओं में हड़कंप मच गया। इंद्र ने अपने वज्र से हनुमान जी पर प्रहार किया। वज्र प्रहार से हनुमान जी का ठुड्डी (हनु) टूट गया और वे बेहोश होकर गिर पड़े। इसी कारण उनका नाम 'हनुमान' पड़ा, जिसका अर्थ है – जिसका हनु (ठुड्डी) टूटा हो। लेकिन वज्र प्रहार से भी वे मरे नहीं, बल्कि और अधिक बलशाली बन गए। इस घटना ने सिद्ध कर दिया कि उनके अंग वज्र जैसे कठोर हैं। वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास जी का योगदान मूल वाल्मीकि रामायण में 'बजरंगबली' शब्द का प्रयोग नहीं है। वहां हनुमान जी को 'मारुति', 'कपिश्रेष्ठ', 'अंजनिपुत्र' या 'हनुमान' कहा गया है। 'वज्रांग' या 'बजरंग' का उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने जब अवधी भाषा में श्री रामचरितमानस लिखी, तब उन्होंने 'वज्रांग' को लोक भाषा में 'बजरंग' लिखा। तुलसीदास जी की रामचरितमानस में 'बजरंग बली' शब्द का प्रयोग हुआ, जिससे यह नाम जन-जन तक पहुंचा। तुलसीदास जी ने ही इस नाम को लोकप्रिय बनाया, जो आज भी हनुमान जी का सबसे प्रिय नाम है। बजरंगबली नाम का महत्व और प्रतीक 'बजरंगबली' नाम हनुमान जी की अजेय शक्ति, अमरता और वज्र जैसी मजबूती का प्रतीक है। यह नाम भक्तों को साहस, बल और सुरक्षा का संदेश देता है। जब भी कोई संकट आए, भक्त 'बजरंगबली' नाम जपते हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करते हैं। यह नाम बताता है कि सच्ची भक्ति और बल से कोई भी बाधा नहीं रोक सकती है। बजरंगबली नाम से हनुमान जी की पूजा करने से भय, रोग और शत्रु दूर होते हैं। यह नाम भक्तों के जीवन में साहस और आत्मविश्वास भरता है। हनुमान जी को 'बजरंगबली' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उनके अंग वज्र जैसे कठोर थे और इंद्र के वज्र प्रहार से भी वे अडिग रहे। यह नाम तुलसीदास जी की कृपा से लोकप्रिय हुआ। बजरंगबली नाम जपने से जीवन में बल, साहस और सुरक्षा मिलती है।

आज का राशिफल 20 जनवरी: ग्रहों की स्थिति से जानें दिन कैसा रहेगा

मेष राशि- इस समय पढ़ाई-लिखाई और नई चीजें सीखने में मन लगेगा। जो लोग किसी परीक्षा, इंटरव्यू या ट्रेनिंग की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए समय ठीक है। मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे, कभी बहुत जोश तो कभी चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। बातचीत में संयम रखें, गुस्से में कही बात बाद में पछतावा दे सकती है। सेहत में थकान या सिरदर्द हो सकता है। नौकरी में बदलाव, ट्रांसफर या नई जिम्मेदारी के योग हैं। आमदनी बढ़ने के संकेत हैं। वृषभ राशि- कामकाज में धीरे-धीरे स्थिरता आएगी। जो मेहनत आप काफी समय से कर रहे थे, उसका फल मिलने लगेगा। परिवार का सहयोग बना रहेगा और घर से जुड़ा कोई अच्छा समाचार मिल सकता है। खर्च बढ़ सकता है, इसलिए फिजूलखर्ची से बचें। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन खान-पान में लापरवाही न करें। नौकरी में स्थिति मजबूत होगी। मिथुन राशि- यह समय बातचीत और संपर्कों के लिए अच्छा है। लोगों से मिलने-जुलने से नए मौके मिल सकते हैं। नौकरी या बिज़नेस में नया प्रस्ताव आ सकता है। मन थोड़ा भटका हुआ रहेगा, एक साथ कई बातें सोचेंगे। निर्णय लेते समय जल्दबाज़ी न करें। सेहत में नींद की कमी या तनाव हो सकता है। कर्क राशि- भावनात्मक रूप से समय थोड़ा संवेदनशील है। छोटी-छोटी बातों को दिल पर लेने से बचें। परिवार का साथ मिलेगा और घर में आपकी बात मानी जाएगी। काम में मेहनत ज़्यादा करनी पड़ेगी, लेकिन परिणाम धीरे-धीरे दिखेंगे। सेहत का ध्यान रखें, खासकर पेट और नींद से जुड़ी दिक्कत हो सकती है। सिंह राशि- आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप खुलकर अपनी बात रख पाएंगे। नौकरी में सीनियर या अधिकारियों से सहयोग मिल सकता है। काम में आपकी पहचान बनेगी। खर्च बढ़ सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखें। सेहत ठीक रहेगी, बस ज्यादा तनाव न लें। कन्या राशि- काम में ध्यान अच्छा रहेगा और अधूरे काम पूरे होंगे। आप हर चीज को बारीकी से देखेंगे, लेकिन जरूरत से ज्यादा सोचने से बचें। नौकरी में स्थिरता रहेगी। सेहत में पेट, गैस या थकान की परेशानी हो सकती है। समय पर आराम जरूरी है। तुला राशि- रिश्तों के लिए समय अच्छा है। पुराने मतभेद दूर हो सकते हैं। कामकाज में संतुलन बनाकर चलना फायदेमंद रहेगा। नया मौका या नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक स्थिति सामान्य से बेहतर रहेगी। सेहत ठीक रहेगी। वृश्चिक राशि- मन में कुछ पुरानी बातें चलती रहेंगी, जिससे बेचैनी हो सकती है। धैर्य रखें, समय आपके पक्ष में आएगा। पुराने रुके काम पूरे होने लगेंगे। नौकरी में जिम्मेदारी बढ़ सकती है। खर्च पर नियंत्रण रखें। सेहत में कमजोरी या थकान महसूस हो सकती है। धनु राशि- भाग्य का अच्छा साथ मिलेगा। जो काम अटके हुए थे, उनमें गति आएगी। पढ़ाई, यात्रा या किसी नए कोर्स के योग हैं। काम में आत्मविश्वास रहेगा। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। सेहत अच्छी रहेगी। मकर राशि- काम का दबाव ज्यादा रहेगा, लेकिन आप अपनी मेहनत से हालात संभाल लेंगे। नौकरी में स्थिरता बनी रहेगी। सीनियर आपकी मेहनत नोटिस करेंगे। सेहत में थकान या कमर-दर्द जैसी परेशानी हो सकती है। आराम जरूरी है। कुंभ राशि- नए विचार और योजनाएं दिमाग में आएंगी। दोस्त या पुराने संपर्क आपके काम आएंगे। नौकरी या काम में नया अवसर मिल सकता है। आय के योग अच्छे हैं। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन रूटीन बिगड़ने न दें। मीन राशि- मन शांत रहेगा और आध्यात्मिक सोच बढ़ेगी। काम में धीरे-धीरे सुधार आएगा। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह फायदेमंद रहेगी। सेहत का ध्यान रखें, खासकर नींद और तनाव को लेकर। धैर्य रखेंगे तो स्थितियाँ आपके पक्ष में बनेंगी।

कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी—22 या 23 जनवरी? तिथि, पूजा समय और विधि की पूरी जानकारी

बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, ज्ञान और जीवन में नई ऊर्जा के आगमन का उत्सव है. इस दिन चारों ओर पीले रंग की छटा, मन में उमंग और दिल में उम्मीदें खिल उठती हैं. मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु पूरे मन से इस दिन पूजा-अर्चना करते हैं. ऐसे में हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में सवाल है कि बसंत पंचमी 22 जनवरी को है या 23 जनवरी को? आइए पंचांग के आधार पर इस कंफ्यूजन को दूर करते हैं. कब है बसंत पंचमी: 22 या 23 जनवरी? हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पंचमी तिथि का आगमन 22 जनवरी की शाम से ही हो रहा है, लेकिन उदया तिथि और शास्त्रों की मान्यताओं के अनुसार, पूजा का विधान अगले दिन श्रेष्ठ माना गया है. बसंत पंचमी तिथि: 23 जनवरी 2026, शुक्रवार पंचमी तिथि का प्रारंभ: 22 जनवरी 2026, शाम 06:15 बजे से पंचमी तिथि का समापन: 23 जनवरी 2026, रात 08:30 बजे तक चूंकि 23 जनवरी को सूर्योदय के समय पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को ही मनाया जाएगा. पूजा का शुभ मुहूर्त मां सरस्वती की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है. 23 जनवरी को पूजा के लिए शुभ समय इस प्रकार है. पूजा का समय: सुबह 07:13 से दोपहर 12:33 तक रहेगा. अमृत काल: सुबह 08:45 से 10:20 तक रहेगा. सरस्वती पूजा की विधि इस दिन का रंग पीला है, जो ऊर्जा, उत्साह और शुद्धता का प्रतीक है माना जाता है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर पीले रंग के वस्त्र धारण करें. एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. साथ ही भगवान गणेश को भी विराजमान करें. मां के सम्मुख कलश रखें और धूप-दीप जलाएं. मां को पीले फूल खासकर गेंदा या सरसों के फूल, पीला चंदन, केसर और अक्षत अर्पित करें. इस दिन अपनी पुस्तकें, कलम या संगीत वाद्ययंत्रों को मां के पास रखकर उनकी पूजा करें. बच्चों के लिए ‘अक्षर अभ्यास’ शुरू करने का यह सबसे शुभ दिन है. मां को पीले मीठे चावल, बूंदी के लड्डू या केसरिया हलवे का भोग लगाएं. सबसे आखिर में सरस्वती माता की आरती करें और उनसे सद्बुद्धि का आशीर्वाद मांगें. बसंत पंचमी का महत्व बसंत पंचमी केवल एक तिथि नहीं, बल्कि जड़ता से चेतनता की ओर बढ़ने का उत्सव है. कहा जाता है कि जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तो चारों ओर मौन था. तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का और मां सरस्वती प्रकट हुईं. मां के वीणा वादन से पूरी सृष्टि में सुर और वाणी का संचार हुआ. इसीलिए, यह दिन हमारी बुद्धि, कला और ज्ञान को मां के चरणों में समर्पित करने का दिन है.

सावधान! इस समय किया गया लेन-देन रोक सकता है आर्थिक प्रगति

हिंदू परंपरा में धन को मां लक्ष्मी की कृपा, शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, केवल धन कमाना ही नहीं बल्कि उसका सही समय पर आदान-प्रदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। मान्यता है कि सप्ताह के हर दिन की अपनी अलग ऊर्जा और ग्रहों का प्रभाव होता है, जो हमारे आर्थिक फैसलों और धन प्रवाह को प्रभावित करता है। वास्तु शास्त्र में कुछ दिन ऐसे बताए गए हैं, जब पैसों का लेन-देन समृद्धि और स्थिरता बढ़ाता है, जबकि कुछ दिन ऐसे भी होते हैं जब किया गया आर्थिक व्यवहार मां लक्ष्मी की नाराजगी का कारण बन सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि धन से जुड़े कार्यों के लिए कौन-से दिन शुभ और कौन-से अशुभ माने जाते हैं। धन के लेन-देन के लिए शुभ दिन शुक्रवार वास्तु शास्त्र के अनुसार शुक्रवार को पैसों के लेन-देन के लिए सबसे शुभ दिन माना गया है। यह दिन मां लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से जुड़ा होता है। शुक्र ग्रह को ऐश्वर्य, सुख-सुविधा और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक माना गया है। शुक्रवार को किया गया धन संबंधी लेन-देन आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और धन प्रवाह बढ़ाने में सहायक होता है। सोमवार सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन किया गया धन का आदान-प्रदान मानसिक शांति के साथ-साथ आर्थिक बाधाओं को भी दूर करता है। व्यापार या जरूरी आर्थिक लेन-देन के लिए यह दिन शुभ माना गया है। गुरुवार गुरुवार भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति का दिन होता है। वास्तु के अनुसार, इस दिन किया गया लेन-देन धन वृद्धि और स्थिरता लाने वाला माना जाता है। खासकर निवेश या उधार देने के लिए गुरुवार अनुकूल माना गया है। इन दिनों पैसों का लेन-देन करने से बचें शनिवार शनिवार शनि देव से संबंधित होता है, जिन्हें कर्म और न्याय का देवता माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पैसों का लेन-देन करने से आर्थिक अस्थिरता, देरी और रुकावटें आ सकती हैं। मंगलवार मंगलवार को धन उधार देना या लेना भी शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि इस दिन दिया गया पैसा लंबे समय तक वापस नहीं आता, जिससे आर्थिक तनाव बढ़ सकता है। तिथियों का भी रखें विशेष ध्यान वास्तु शास्त्र के अनुसार केवल दिन ही नहीं, बल्कि तिथियों का भी धन के लेन-देन में विशेष महत्व होता है। अमावस्या के दिन पैसों का लेन-देन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अमावस्या तिथि नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है, जिससे धन हानि और अस्थिरता हो सकती है। वास्तु विशेषज्ञों की सलाह यदि आर्थिक मजबूती और मां लक्ष्मी की कृपा बनाए रखना चाहते हैं, तो धन से जुड़े हर निर्णय में शुभ दिन और तिथि का ध्यान अवश्य रखें। छोटे-छोटे वास्तु नियम अपनाकर भी जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।