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क्या आप सही तरीके से पढ़ते हैं हनुमान चालीसा? जानिए 10 जरूरी नियम और आम भूलें

शनिवार और मंगलवार को लोग बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। कहते हैं कि हनुमान जी चिरंजीवी हैं। ऐसे में जो भक्त सच्ची श्रद्धा बजरंगबली को याद करता है उनकी पूजा करता है उनपर हनुमान जी की विशेष कृपा बरसती है, पलभर में संकट दूर हो जाते हैं। लेकिन हनुमान चालीसा का पाठ यदि नियम से किया जाए, तो ही इसका फल प्राप्त होता है। वरना गलत तरीके से किए गए पाठ से बजरंगबली नाराज हो जाते हैं। जैसे कि गलत स्थान व गलत समय पर पाठ करना आदि। चलिए जानते हैं कि हनुमान चालीसा का पाठ करते समय किन गलतियों से बचना चाहिए। हनुमान चालीसा के दौरान ना करें ये गलतियां हनुमान चालीसा का पाठ करते समय किसी भी तरह की नकारात्मकता अपने दिल में नहीं लानी चाहिए। जो लोग निर्बलों को बिना बात के सताते हैं, उन पर कभी भी हनुमान जी की कृपा नहीं बरसती है। हनुमान चालीसा का पाठ करते समय साधक को किसी भी व्यक्ति से बातचीत नहीं करनी चाहिए। कुछ समय ऐसे भी हैं जब हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। सूर्यास्त के तुरंत बाद पाठ करने से बचना चाहिए। गुस्से, चिड़चिड़े मन या मानसिक अशांति की अवस्था में भी पाठ नहीं करना चाहिए। बिना स्नान, अशुद्ध अवस्था, जल्दबाजी या दोपहर के समय किया गया पाठ भी फलदायी नहीं माना जाता। हनुमान चालीसा पाठ के 10 जरूरी नियम हनुमान चालीसा पाठ में साफ-सफाई और पवित्रता का खास ख्याल रखना चाहिए। ऐसे में जहां आप हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं या पूजा स्थल की साफ-सफाई अच्‍छे से कर लें। हनुमान चालीसा का पाठ हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करें। इसके लिए सुबह और शाम का समय परफेक्ट रहता है। हनुमान चालीसा के पाठ के दौरान उपयोग किए गए फूल लाल रंग के रखें। हनुमान चालीसा के पाठ के पहले बजरंगबली के सामने दीपक जरूर जलानी करना चाहिए। ध्यान रखें कि दीपक में जो बाती लगा रहे हैं, वह भी लाल सूत (धागे) की होनी चाहिए। आप दीपक में चमेली का तेल या शुद्ध घी का इस्तेमाल होनी चाहिए। हनुमानजी चालीसा के पाठ के बाद उन्हें गुड़ और चने का प्रसाद जरूर ‍अर्पित करें। आप केसरिया बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, चूरमा, मालपुआ या मलाई मिश्री का भोग भी लगा सकते हैं। हनुमान चालीसा पाठ के दौरान सिर्फ एक वस्त्र पहनकर ही चालीसा का पाठ करें या उनकी पूजा करें। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शनिवार या रविवार के दिन 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। अगर आप 100 बार नहीं कर सकते हैं, तो आप 11, 9, 5, 3 या 1 बार शनिवार, मंगलवार या फिर रोज कर सकते हैं।

सफल जीवन का रहस्य: नीम करोली बाबा की 5 बातें जो बदल सकती हैं आपकी किस्मत

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम, आध्यात्मिक गुरु, नीम करोली बाबा, का आश्रम है। नीम करोली बाबा आज भले ही भौतिक रूप से लोगों के बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी दी हुई शिक्षाएं आज भी उनके अनुयायियों के माध्यम से लोगों को प्रेरित करके हुए सुखी सफल जीवन जीने का रास्ता बताती रहती हैं। नीम करोली बाबा के ज्ञान को अपनाते हुए अपनी कुछ नकारात्मक आदतों को त्यागकर, कोई भी व्यक्ति अपना जीवन बदलकर पैसा कमा सकता है। आइए जानते हैं पैसा और कामयाबी हासिल करने के लिए नीम करोली बाबा ने कौन सी 5 आदतों से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया है। अहंकार का त्याग नीम करोली बाबा के अनुसार, अहंकार व्यक्ति को हमेशा गलत राह पर ले जाता है। अगर आप अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखते हुए जीवन को सफल बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने अहंकार का त्याग करें। याद रखें, विनम्रता न केवल व्यक्ति को सम्मान अर्जित करवाती है, बल्कि उसके लिए नए अवसरों के दरवाजे भी खोलती है। क्रोध पर नियंत्रण नीम करोली बाबा के अनुसार क्रोध में लिए गए ज्यादातर निर्णय अक्सर बाद में पछतावे का कारण बनते हैं। क्रोध व्यक्ति की आंतरिक शांति को नष्ट करके उसके निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर बना देता है।जो लोग अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाते, उन्हें अकसर जीवन में सफलता पाने में कठिनाई होती है। लालच से बचें नीम करोली बाबा के अनुसार व्यक्ति का जरूरत से ज्यादा लालच उसे जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ने देता है। लालच में डूबा व्यक्ति धन संचय करने या उसे बनाए रखने के लिए संघर्ष करता रहता है। ईर्ष्या से करें परहेज नीम करोली बाबा व्यक्ति को कभी भी दूसरों की सफलता से ईर्ष्या न करने की सलाह देते थे। उनका मानना था कि दूसरों की उपलब्धियों से जलन रखने की जगह व्यक्ति को हमेशा अपनी प्रगति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कड़ी मेहनत और लगन सच्ची सफलता दिलाते हैं, जबकि ईर्ष्या केवल नकारात्मकता और भटकाव की ओर ले जाती है। नकारात्मकता से रहें दूर नीम करोली बाबा की शिक्षाओं के अनुसार आत्म-अनुशासन, आंतरिक शांति और सकारात्मक सोच ही स्थायी सफलता की कुंजी हैं। ऐसे में व्यक्ति को हमेशा अहंकार, क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसी नकारात्मक आदतों को त्याग करना चाहिए।

घर में तुलसी की गलत दिशा बन सकती है कंगाली का कारण, पढ़ें क्या कहता है वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर आपने तुलसी का पौधा गलत दिशा में लगाया है, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा। साथ ही जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि किस दिशा में तुलसी का पौधा नहीं लगाना चाहिए। भूलकर भी न लगाएं इस दिशा में तुलसी वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण दिशा पितरों की होती है। इसलिए तुलसी के पौधे को दक्षिण दिशा में भूलकर भी नहीं लगाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि गलत दिशा में तुलसी को लगाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और पूजा सफल नहीं होती है। साथ ही आर्थिक परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए तुलसी को लगाने से पहले सही दिशा जरूर जान लें। कौन-सी दिशा में लगाएं तुलसी वास्तु शास्त्र की मानें तो तुलसी को उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। इस दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में तुलसी लगाने से धन, सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके अलावा उत्तर-पूर्व दिशा में भी तुलसी का पौधा लगा सकते हैं। इस दिशा में देवताओं का स्थान माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन लगाएं तुलसी अगर आप घर में तुलसी लगाना चाहते हैं, तो इसके लिए गुरुवार और शुक्रवार का दिन शुभ माना जाता है, क्योंकि गुरुवार भगवान विष्णु शुक्रवार धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन तुलसी लगाने से शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं। कार्तिक का महीना भी तुलसी लगाने के लिए उत्तम होता है। बता दें कि तुलसी को सोमवार, रविवार और एकादशी के दिन लगाने से बचना चाहिए। इन बातों का रखें ध्यान     तुलसी के पौधे के आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि मां लक्ष्मी का वास सफाई वाली जगह पर ही होता है।     तुलसी के पास रोजाना सुबह और शाम देसी घी का दीपक जलाएं।     पौधे के पास जूते-चप्पल न रखें। साथ ही कांटेदार पौधा नहीं लगाना चाहिए।  

गरुड़ पुराण के अनुसार अंतिम संस्कार में 5 प्रकार के लोग नहीं कर सकते भागीदारी

हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का जिक्र किया गया है, जिनमें से एक है अंतिम संस्कार. अंतिम संस्कार को बहुत पवित्र और गंभीर कर्म माना जाता है. दरअसल, इस संस्कार के दौरान मृतक व्यक्ति के शव को मुखाग्नि दे दी जाती है, जिसके बाद उसका शरीर पंचतत्व लीन हो जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, यह संस्कार आत्मा की शांति और उसकी आगे की यात्रा से संबंधित होता है. इसलिए, अंतिम संस्कार के समय माहौल शांत और संयमित रहना जरूरी होता है. इसी वजह से गरुड़ पुराण में कुछ लोगों को इस दौरान वहां न जाने की सलाह दी गई है. तो आइए गरुड़ पुराण के द्वारा जानते हैं कि अंतिम संस्कार में किन किन लोगों को शामिल नहीं होना चाहिए.  गर्भवती महिलाएं गरुड़ पुराण के अनुसार, श्मशान घाट या अंतिम संस्कार में गर्भवती महिलाओं को शामिल होने की अनुमति नहीं है. दरअसल, अंतिम संस्कार का माहौल दुख और तनाव से भरा होता है, जो कि गर्भवती महिला मन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. श्मशान घाट में नकारात्मक ऊर्जाएं भी सक्रिय होती हैं, जिसका प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ सकता है.  छोटे बच्चे छोटे बच्चों को भी श्मशान घाट या अंतिम संस्कार में जाने की मनाही होती है. गरुड़ पुराण के अनुसार, छोटे बच्चों के लिए श्मशान का दृश्य, जलती चिता और लोगों का रोना मन में डर या बेचैनी पैदा कर सकता है. इसी कारण बच्चों को अंतिम संस्कार में ले जाना सही नहीं माना जाता है.  बीमार लोग बीमार और कमजोर हृदय वाले व्यक्तियों को भी श्मशान घाट या अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होना चाहिए. गरुड़ पुराण के अनुसार, जो लोग पहले से बीमारी से जूझ रहे हों, उनके लिए यह माहौल भारी पड़ सकता है. शोक और तनाव उनकी ज्यादा तबीयत और खराब कर सकता है.  जिनके घर सूतक चल रहा हो गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर किसी के घर हाल ही में मौत हुई हो और सूतक लगा हो, तो उस दौरान दूसरे अंतिम संस्कार में जाना वर्जित माना जाता है. मान्यता है कि सूतक के समय व्यक्ति को धार्मिक कार्यों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. जो बहुत ज्यादा दुखी या भावुक हों गरुड़ पुराण के अनुसार, अंतिम संस्कार आत्मा की शांति से जुड़ा होता है. इस दौरान शांत मन और संयम जरूरी होता है. इसलिए, अत्यधिक रोना आत्मा की शांति में बाधा बन सकता है, इसलिए ऐसे लोगों को इस कर्म से दूर रहने की सलाह दी जाती है.  

वसंत पंचमी 2026: करियर को मिले रॉकेट जैसी रफ्तार, अपनाएं ये 5 खास उपाय

हिंदू धर्म में वसंत पंचमी का दिन केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, कला और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की साधना का महापर्व है। साल 2026 में यह शुभ अवसर 1 फरवरी को आ रहा है। ज्योतिष शास्त्र और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहूर्त होता है यानी इस दिन किया गया हर शुभ कार्य और खरीदी गई विशेष वस्तुएं जीवन में सकारात्मकता का संचार करती हैं। माना जाता है कि वसंत पंचमी में कुछ विशेष प्रतीकात्मक चीजों को घर लाना आपके भाग्य के द्वार खोल सकता है। ये वस्तुएं न केवल आपके घर के वातावरण को शुद्ध करती हैं, बल्कि मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ाकर आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती हैं। तो आइए जानते हैं वसंत पंचमी के दिन कौन सी चीजों को घर लेकर आना चाहिए। मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर वसंत पंचमी के दिन घर में मां सरस्वती की नई प्रतिमा या तस्वीर लाना सबसे शुभ माना जाता है। इसे अपने घर के उत्तर-पूर्व  या अध्ययन कक्ष में स्थापित करें। ध्यान रहे कि देवी सरस्वती बैठी हुई मुद्रा में हों। इससे एकाग्रता बढ़ती है और करियर में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। वीणा वीणा मां सरस्वती का अति प्रिय वाद्य यंत्र है। वास्तु के अनुसार, घर में वीणा रखने से सुख-शांति बनी रहती है और रचनात्मक ऊर्जा का विकास होता है। यदि आप कला, संगीत या मीडिया के क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं, तो एक छोटी प्रतीकात्मक वीणा घर लाएं और उसे साफ स्थान पर रखें। मोरपंख विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मोरपंख घर लाना बहुत फायदेमंद होता है। इसे अपनी किताबों के बीच या स्टडी टेबल के पास लगाने से नकारात्मकता दूर होती है और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है। यह करियर की राह में आने वाले मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। सफेद या पीले फूल के पौधे वसंत ऋतु प्रकृति के खिलने का उत्सव है। इस दिन घर के आंगन या बालकनी में पीले गेंदे या सफेद चमेली का पौधा लगाना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पीला रंग गुरु का प्रतीक है, जो करियर में स्थिरता और ऊंचाइयां प्रदान करता है। नई कलम और पुस्तक कलम को ज्ञान का शस्त्र माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन एक अच्छी नई कलम और कोई ज्ञानवर्धक पुस्तक खरीदकर लाएं। सबसे पहले इस कलम की पूजा मां सरस्वती के चरणों में करें और फिर उससे अपने लक्ष्यों को एक डायरी में लिखें। माना जाता है कि इस दिन शुरू किया गया लेखन कार्य भविष्य में बड़ी सफलता दिलाता है। क्रिस्टल या स्फटिक की माला यदि आप बार-बार करियर में फोकस खो देते हैं, तो इस दिन स्फटिक की माला घर लाना और उससे 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' का जाप करना आपके लिए चमत्कारिक साबित हो सकता है। यह मन को शांत रखता है और भ्रम की स्थिति को दूर करता है।

आज का दिन कैसा रहेगा? 19 जनवरी का संपूर्ण राशिफल

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुल 12 राशियों का वर्णन किया गया है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल से राशिफल का आकंलन किया जाता है। जानें 19 जनवरी 2026 के दिन किन राशि वालों को होगा लाभ और किन राशियों के लोग रहें सतर्क मेष मन प्रसन्न रहेगा, परंतु आत्मविश्वास में कमी रहेगी। संयत रहें। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। कोर्ट कचहरी में विजय मिलेगी। व्यावसायिक सफलता मिलेगी। वृषभ मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। परिवार में सुख-शांति रहेगी। संतान की ओर से कोई सुखद समाचार मिल सकता है। मित्रों का सहयोग मिलेगा। मिथुन आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। नौकरी हेतु साक्षात्कार आदि कार्यों में सफल रहेंगे। शासन-सत्ता का सहयोग मिलेगा। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है। कर्क आत्मसंयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। आय में वृद्धि होगी। व्यापार भी अच्छा है, अज्ञात भय सताएगा और मानसिक परेशानी बनी रहेगी। सिंह आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। वाणी में मधुरता रहेगी। कारोबार में वृद्धि होगी। भागदौड़ अधिक रहेगी। कारोबार के लिए माता से धन की प्राप्ति हो सकती है। तुला आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु मन परेशान भी रहेगा। संयत रहें। रुका हुआ धन वापस मिलेगा। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य में सुधार होगा। धनु विद्यार्थियों के लिए अच्छा समय रहेगा। लिखने, पढ़ने के लिए अच्छा समय रहेगा। वाहन की खरीदारी का प्रबल योग होगा व्यापारिक स्थिति सुदृढ़ होगी। मकर यात्रा का योग बनेगा। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें।आय के नवीन स्रोत बनेंगे। स्वास्थ्य, प्रेम, व्यापार बहुत अच्छा रहेगा। कुम्भ स्वास्थ्य में सुधार होगा। व्यापार अच्छा है। सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। आर्थिक या पारिवारिक कोई रिस्क मत लीजिएगा। निवेश मत करिए। कन्या भूमि, भवन, वाहन की खरीदारी का प्रबल योग होगा। व्यापारिक दृष्टिकोण से यह शुभ समय होगा। कोर्ट कचहरी में विजय मिलेगा। धनार्जन होगा।स्वास्थ्य पहले से बेहतर। वृश्चिक परिस्थितियां प्रतिकूल हैं।किसी परेशानी में पड़ सकते हैं। महत्वपूर्ण निर्णय सोच समझकर लें। भावनाओं में बहकर के कोई निर्णय न लें। मीन जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा। नौकरी चाकरी की स्थिति अच्छी होगी।व्यापार भी अच्छा है। थोड़ा स्वास्थ्य नरम गरम रहेगा।  

घर के मंदिर में न रखें ये मूर्तियां, धन हानि का संकेत

घर का मंदिर वह पवित्र कोना होता है जहां से पूरे परिवार को सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है। हम अपनी श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ ईश्वर की मूर्तियां स्थापित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत स्वरूप या दोषपूर्ण मूर्तियों का चुनाव आपके जीवन में अशांति और आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है। वास्तु शास्त्र और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हर मूर्ति की अपनी एक विशिष्ट ऊर्जा होती है और घर के भीतर केवल सौम्य और आशीर्वाद देने वाली ऊर्जा का ही वास होना चाहिए। अक्सर हम अनजाने में या केवल सुंदरता देखकर ऐसी मूर्तियां घर ले आते हैं जो गृहस्थ जीवन के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। शास्त्रों का स्पष्ट मानना है कि यदि मंदिर में रखी गई मूर्तियों की ऊर्जा घर के वातावरण से मेल नहीं खाती, तो यह तरक्की में बाधा, स्वास्थ्य हानि और आपसी कलह का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। तो आइए जानते हैं कि पूजा घर में भूलकर भी कैसी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। खंडित या टूटी हुई मूर्तियां वास्तु शास्त्र का सबसे पहला नियम है कि पूजाघर में कभी भी खंडित मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। चाहे वह थोड़ी सी ही क्यों न चटक गई हो, ऐसी मूर्ति की पूजा करना अशुभ माना जाता है। यह मानसिक तनाव और कार्यों में बाधा का कारण बनती है। ऐसी मूर्तियों को पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। देवी-देवताओं का रौद्र रूप घर के मंदिर में हमेशा शांत और सौम्य मुद्रा वाली मूर्तियां रखनी चाहिए। देवी काली का विकराल रूप, भगवान शिव का तांडव करते हुए स्वरूप या भगवान हनुमान का लंका दहन वाला चित्र घर में नहीं रखना चाहिए। माना जाता है कि रौद्र रूप वाली मूर्तियां घर के सदस्यों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और क्रोध बढ़ाती हैं। एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां अक्सर लोग श्रद्धावश एक ही भगवान की कई मूर्तियां रख लेते हैं। वास्तु के अनुसार, एक ही देवी-देवता की तीन या उससे अधिक मूर्तियां या चित्र एक ही जगह पर नहीं होने चाहिए। इससे घर में गृह-क्लेश की स्थिति पैदा हो सकती है और धन का आगमन रुक सकता है। आमने-सामने न हों मूर्तियां मंदिर में मूर्तियों को इस तरह न रखें कि वे एक-दूसरे के आमने-सामने हों। विशेष रूप से गणेश जी की पीठ कभी भी दिखाई नहीं देनी चाहिए, क्योंकि उनकी पीठ में 'दरिद्रता' का वास माना जाता है। मूर्तियों का मुख हमेशा सामने की ओर या साधक की ओर होना चाहिए। पूर्वजों की तस्वीरें कई लोग भगवान के साथ ही अपने मृत पूर्वजों की तस्वीरें भी रख देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, देवता और पितर दोनों पूजनीय हैं लेकिन उनके स्थान अलग होने चाहिए। भगवान के मंदिर में पूर्वजों की तस्वीर रखने से देव-दोष लगता है, जिससे घर की उन्नति रुक सकती है। युद्ध या विनाश दर्शाने वाली तस्वीरें महाभारत के युद्ध का दृश्य या किसी असुर का वध करते हुए उग्र तस्वीरें पूजाघर में रखने से बचें। ऐसी तस्वीरें परिवार में कलह और अशांति का माहौल पैदा करती हैं।

माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ कल से: गुप्त साधना का महापर्व, पूजा मुहूर्त और महत्व जानिए

हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। शक्ति की साधना के बगैर बाकी देवी-देवताओं की पूजा भी अधूरी मानी जाती है। ऐसे में नवरात्रि अलग-अलग रूप में साल में चार बार आती है। शारदीय और चैत्र के अलावा साल में दो बार गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि में माता रानी की पूजा पूरे 9 दिन धूमधाम के साथ होती है। वहीं गुप्त नवरात्रि में उनकी साधना गुप्त रूप से की जाती है। जानिए इस साल माघ महीने वाली गुप्त नवरात्रि कब है और इसके महत्व से लेकर जानें पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में… पूजा का शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के गुप्त नवरात्रि की शुरुआत कल यानी 19 जनवरी से होने वाली है। इसका समापन 27 जनवरी को है। इस दौरान घट स्थापना के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 19 जनवरी की सुबह 6 बजकर 43 मिनट से लेकर 10 बजकर 24 मिनट तक है। वहीं अभिजीत मुहूर्त की बात करें तो ये सुबह 11 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 36 मिनट तक रहने वाला है। गुप्त नवरात्रि का महत्व गुप्त नवरात्रि का संबंध 10 महाविद्या की साधना से जुड़ा है। माघ के महीने में मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्रि ठंड के दिनों में होती है। बसंत ऋतु के आगमन के दौरान ही ये पूजा होती है। ये तंत्र-मंत्र और गुप्त सिद्धियों के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और उनकी 10 महाविद्याओं को पूजने से जिंदगी की बाधाएं खत्म होती हैं और हर मनोकामना की पूर्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान की गई पूजा जितनी गुप्त रखी जाए, वो उतनी ही सफल होती है। गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि गुप्त नवरात्रि के पहले दिन स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद पूजा घर की सफाई करें। मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति के आगे दीया जलाएं। फूल और अक्षत अर्पित करें। इस दौरान मां दुर्गा के सभी मत्रों का जाप मन ही मन करें। माना जाता है कि इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना फलदायी होता है। पाठ के बाद आरती करें और किसी भी भूलचूक के लिए मां से माफी मांगकर उनका आशीर्वाद लें।

राशिफल 18 जनवरी: ग्रहों की स्थिति क्या कहती है? किन राशियों पर पड़ेगा असर

मेष आज आपको कड़ी मेहनत से ही अच्छे रिजल्ट मिलेंगे। आपको घर और ऑफिस में जो जिम्मेदारियां मिली हैं, उनका सहीसे इस्तेमाल करों। नए लोगों पर आपको आसानी से भरोसा नहीं करना है। आपको इस समय रिएक्शन को लेकर लॉजिक रखने चाहिए। काम पर अधिक ध्यान दें। परिणाम अपेक्षाओं के अनुरूप होंगे। इस समय आपको पारंपरिक काम को छोड़कर स्मार्ट वर्किंग पर जोर देना है। वृषभ इस राशि के लोगों के लिए आज उत्साह का दिन है।नौकरी में बदलाव के साथ आपके लिए तरक्की के मौके भी आ रहे हैं। इस समय आपकी इनकम में भी बढ़ोत्तरी होने कीसंभावना है। आपको यात्रा करने और मित्रों के साथ आनंद लेने के मौके मिल सकते हैं। आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। पर, मन परेशान भी हो सकता है। मिथुन इस राशि के लोगों के लिए अच्छा समय है, आप परिवार के और नजदीक आएंगे और यादगार पल बिताएंगे। आर्थिक मामलों को लेकर इस समय सलाहकारों से सलाह लें। आपके सोशल नेटवर्क से आपके पर्सनल संबंध सुधरेंगे। मित्र आपका साथ देंगे। क्रिएटिव तौर पर आप मजबूत होगें। क्रिएटिव चीजों पर जोर रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में अचीवमेंट मिलेंगी। कर्क आज आपने जो टारगेट सोचे थे, उनमें से महत्वपूर्ण टारगेट पूरे होंगे। बिजनेस को लेकर आपमें आत्मविश्वास बना रहेगा। आपकी लीडरशिप में सुधार होगा। आपने जो काम पहले से सोच रखे थे, वो पूरे होंगे। आप कॉन्पिटीशन में सफल होंगे। मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। सिंह आत्मविश्वास में कमी रहेगी। इस राशि के लोगों को सुबह के समय जरूरी काम जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। परिवार के सदस्यों की सलाह और उनकी गइ पर ध्यान दें। इस समय आपको सलाह देते हैं कि पर्सनल मामलों में सावधानी बरतें। मीटिंग्स के लिए समय निकालें। परिवार में सुख और समृद्धि रहेगी। आपको रिश्तेदारों का सहयोग मिलेगा। तुला इस समय कुछ ऐसी चीजें आपके साथ हो सकती हैं, जिनके बारे में सोचा नहीं था, इसलिए थोड़ा सतर्क रहें। सलाह मानने से चीजें सही होगी। अपनों का सहयोग जारी रहेगा। जिम्मेदार व्यक्तियों पर भरोसा बनाए रखें। आवश्यक काम पर अधिक ध्यान दें। लेन-देन में धैर्य रखें। किसी मित्र के सहयोग से किसी नए कारोबार की शुरुआत हो सकती है। लाभ के मौके मिलेंगे। धनु इस राशि के लोगों के लिए समय तेजी से अनुकूल होगा। मित्रों के साथ संबंध मजबूत होंगे। करियर और बिजनेस में आपके असर पड़ सकता है। अपनी अलग-अलग प्लानिंग को उत्साहपूर्वक आगे बढ़ाएं। वांछित जानकारी आपको मिलेगी। अगर आप पार्टनरशिप बिजनेस में हैं, तो वो पहले से बेहतर होंगी। लाभ बढ़ाने में सफलता मिलेगी। आवश्यक मामलों में प्रगति होगी। मकर आपके सामने जो मौके आ रहे हैं, उनका अधिकतम इस्तेमाल करें। मैरिड लाइफ सुखमय रहेगी। परिवार मनोबल बढ़ाएगा। साहस के साथ काम करें।मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। परिवार की जिम्मेदारी बढ़ सकती है। माता-पिता का साथ मिलेगा। कुम्भ इस राशि के जातकों को करियर और बिजनेस में बिजी रहने का अनुभव होगा। प्रोफेशनल के साथ बेहतर तालमेल रहेगा। परिवार में सही राह खोजने के लिए विवेक और धैर्य का इस्तेमाल करें। शत्रुओं की साजिशों से सावधान रहें। जल्दबाजी में फैसले न लें। काम प्रभावित हो सकता है। विवेक और विनम्रता बनाए रखें। कन्या इस राशि वालों के लिए सोशल एक्टिविटी बढ़ेंगी। ग्रुप के जितने इशयूज हैं, उनमें रुचि बनी रहेगी। चर्चाओं और संवादों में आपका प्रभाव रहेगा। आपका व्यवहार प्रभावशाली होगा। जिम्मेदार लोगों से सलाह लें। आत्मविश्वास बढ़ेगा। आप सबको साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। धन और संपत्ति के मामलों में तेजी आएगी। बचत पर जोर रहेगा। वृश्चिक आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। आपको किसी से अच्छे प्रपोजल मिल सकेंगे। आप एक अच्छे मेजबान बनेंगे। बैठकें सफल रहेंगी। आप प्रियजनों के साथ प्रभावशाली संवाद बनाए रखेंगे। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। मेहमान आएंगे। आप योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ेंगे। मीन आज इस राशि के लोगों में जानकारी का लेन-देन बढ़ेगा। सहयोगात्मक मामलों पर ध्यान केंद्रित रहेगा। आप सबके साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे। उत्साह और जोश बढ़ेगा। भाई-बहनों के साथ संबंध मजबूत होंगे। काम और व्यापार उम्मीद के मुताबिक चलेगा।

क्या है किचन में सिंक और चूल्हा पास-पास रखने का वास्तु दोष? जानें इसका कारण और सही दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन केवल भोजन बनाने की जगह नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा और स्वास्थ्य का केंद्र होता है. किचन में मौजूद हर चीज का सही स्थान घर की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डालती है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण चीज है किचन सिंक, जिसका सही दिशा में होना बेहद जरूरी माना जाता है. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार सिंक कहां होना चाहिए और किन बातों से बचना जरूरी है. किचन सिंक की शुभ दिशा वास्तु शास्त्र में किचन के सिंक के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को सबसे सही माना गया है. इस दिशा में रखा गया सिंक घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और समृद्धि को बढ़ावा देता है. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि सिंक इस तरह से लगाया जाए कि बर्तन धोते समय व्यक्ति का मुंह उत्तर दिशा की ओर रहे. ऐसा करने से मानसिक शांति बनी रहती है और घर में खुशहाली आती है.  सिंक लगाने की गलत दिशाएं वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा में किचन सिंक का होना अशुभ माना जाता है. इस दिशा में रखा सिंक पारिवारिक तनाव बढ़ा सकता है और घर में आपसी मतभेद की स्थिति पैदा कर सकता है. इसके अलावा इससे आर्थिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे धन का असंतुलन बना रहता है. गैस चूल्हे के पास न रखें सिंक वास्तु शास्त्र के अनुसार अग्नि और जल तत्व एक-दूसरे के विपरीत होते हैं. गैस चूल्हा अग्नि तत्व से जुड़ा होता है, जबकि किचन का सिंक जल तत्व का प्रतीक माना जाता है. अगर चूल्हा और सिंक एक-दूसरे के बहुत पास रखे हों, तो इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और परिवार की शांति और खुशहाली पर असर पड़ता है. इसलिए वास्तु के अनुसार सिंक और चूल्हे के बीच थोड़ी दूरी रखना जरूरी माना जाता है. सिंक के नीचे डस्टबिन रखने से बचें किचन सिंक के नीचे डस्टबिन रखना भी वास्तु के लिहाज से सही नहीं माना जाता. इससे नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ सकता है, इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. बेहतर होगा कि डस्टबिन को किचन के किसी अलग और ढके हुए स्थान पर रखा जाए.