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दशहरे पर अनोखा पुतला दहन: मुजफ्फरनगर में ‘कॉकरोच’ का नाम बदलकर किया भ्रष्टाचार

मुजफ्फरनगर/सहारनपुर मुजफ्फरनगर में इस बार दशहरा पर नुमाइश मैदान में दशानन रावण के साथ 30 फुट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी फूंकने की तैयारी थी। इसके लिए रावण दहन के पारंपरिक आयोजन के बीच कॉकरोच का प्रतीकात्मक पुतला भी बनवाया गया था। नुमाइश मैदान में रखे गए इन पुतलों की जानकारी पुलिस-प्रशासन को लगी तो टीम ने आयोजकों से बात की इसके बाद रामलीला कमेटी ने पुतले का नाम बदलकर भ्रष्टाचार कर दिया। उधर, सहारनपुर में अभिजीत दीपके का पुतला दहन करने की तैयारी है। आज दशहरा पर जिले-जिले मुहल्ले-मुहल्ले रावण दहन की तैयारी की गई है। बड़े-छोटे तमाम पुतले बनाए गए हैं। मुजफ्फरनगर नुमाइश मैदान में 60, 55 और 50 फुट ऊंचे रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले तैयार किए गए हैं। इनके साथ एक 30 फुट ऊंचा पुतला भी बनाया गया जिस पर कॉकरोच लिखा गया। ऋषिकेश से आए कारीगरों ने इन पुतलों को तैयार किया है। सोशल मीडिया पर वायरल फोटो से ऐक्शन में पुलिस सोमवार की दोपहर लगभग दो बजे लगे इन पुतलों की फोटो और खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। सूचना पुलिस तक पहुंची तो एक टीम ने आयोजकों से बात की। एसएसपी सूरज कुमार राय ने कहा कि यह धार्मिक आयोजन है इसमें राजनीतिक बातें नहीं होनी चाहिए। इसके बाद रात करीब 8.30 बजे आयोजकों ने स्वयं ही पुतले से कॉकरोच नाम हटाकर नाम भ्रष्टाचार लिख दिया। पुलिस का दावा, आयोजकों ने खुद बदल लिया नाम एसएसपी ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई थी। उसके बाद उन्होंने उन्होंने स्वयं ही पुतले का नाम बदल दिया। श्रीराम सेवा दल के कोऑर्डिनेटर विशाल डूमडा ने बताया कि विजयादशमी पर इससे पहले भी कोविड महामारी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसी समस्याओं के प्रतीकात्मक पुतलों का दहन किया जा चुका है। हालांकि, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का नाम सीधे तौर पर लेने से आयोजक मंडल परहेज कर रहा है। सहारनपुर में जातिवाद कानून और अभिजीत दीपके का पुतला फूंकने की तैयारी उधर, सहारनपुर में राष्ट्रीय सवर्ण समाज संघ ने दशहरे पर पर कथित ‘जातिवाद कानून’ का पुतला जलाने का ऐलान किया है। संगठन की योजना के अनुसार, कार्यकर्ता हकीकतनगर स्थित रामलीला मैदान से पैदल मार्च निकालते हुए कलेक्ट्रेट तिराहे तक पहुंचेंगे, जहां पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। वहीं, गोविंदनगर में आयोजित दशहरा महोत्सव के दौरान अभिजीत दीपके का पुतला दहन करने की भी तैयारी है। इन घोषणाओं से इस बार दशहरे के आयोजन में परंपरा के साथ विरोध प्रदर्शन भी चर्चा का विषय बन गया है।

बस्तर दशहरा में फूल रथ की परिक्रमा, पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाई गई रस्म

जगदलपुर. बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा एक बार फिर आस्था, जनभागीदारी और सांस्कृतिक विरासत के साथ आगे बढ़ रही है. जोगी बिठाई की रस्म के बाद 13 अक्टूबर से जगदलपुर में चार पहियों वाले विशाल फूल रथ की परिक्रमा शुरू हो गई है. मंगलवार देर रात रथ की पहली परिक्रमा पूरी हुई, जिसमें जगदलपुर और तोकापाल विकासखंड के 36 गांवों से पहुंचे 400 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए. परंपरा के अनुसार, मां दंतेश्वरी के प्रतिनिधि स्वरूप उनके छत्र को दंतेश्वरी मंदिर से लाकर प्रधान पुजारी प्रेम पाढ़ी ने फूल रथ पर विराजित किया. पूजा-अर्चना और अभिवादन की रस्म के बाद सिरहासार चौक से रथ रवाना हुआ और ग्रामीणों ने उसे खींचकर गोलबाजार तथा मावली माता मंदिर की परिक्रमा कराई. रथ रवाना होने से पहले जिला पुलिस बल के जवानों ने हर्ष फायर कर माता को सलामी दी. इस दौरान जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. करीब 52 घन मीटर लकड़ी से तैयार यह विशाल फूल रथ बस्तर की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है. परंपरा के मुताबिक, मां दंतेश्वरी पांच दिनों तक मावली माता मंदिर की परिक्रमा करेंगी. इस दौरान श्रद्धालुओं की भागीदारी उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगी. दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी उदय चंद्र पाणिग्राही के अनुसार, पहले बस्तर महाराजा माता का छत्र लेकर रथ पर सवार होते थे, जबकि अब यह जिम्मेदारी प्रधान पुजारी निभाते हैं. मान्यता है कि काकतीय नरेश पुरुषोत्तम देव की जगन्नाथपुरी यात्रा के बाद रथपति की उपाधि से जुड़ी परंपरा बस्तर में शुरू हुई थी. आज भी ग्रामीणों के सामूहिक श्रम और आस्था के सहारे निभाई जा रही यह रस्म बस्तर दशहरा को देश के अनूठे सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष पहचान देती है.

दशहरा 2026 की तारीख हुई तय, जानें रावण दहन और विजय मुहूर्त का शुभ समय

Dussehra 2026: हिंदू धर्म में दशहरा यानी विजयादशमी को बेहद शुभ पर्व माना जाता है. यह दिन सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन रामलीला, रावण दहन, शस्त्र पूजा और विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. साल 2026 में दशहरा किस दिन मनाया जाएगा और इस दिन कौन से शुभ मुहूर्त रहेंगे, आइए जानते हैं।  दशहरा 2026 कब है? पंचांग के अनुसार, साल 2026 में विजयादशमी यानी दशहरा 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा.  आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे समाप्त होगी. इसी वजह से उदया तिथि के अनुसार 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।  दशहरा 2026 का विजय मुहूर्त विजयादशमी के दिन पूजा और शुभ कार्यों के लिए विजय मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है. 20 अक्टूबर 2026 को विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक रहेगा. वहीं अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक बताया गया है. इन समयों में पूजा, शस्त्र पूजन और अन्य शुभ धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।  रावण दहन कब किया जाएगा? दशहरे पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन करने की परंपरा है. आमतौर पर रावण दहन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है. हालांकि, रावण दहन का स्थानीय समय शहर और आयोजन स्थल के अनुसार अलग-अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग या आयोजन की जानकारी देखना बेहतर रहेगा।  दशहरा क्यों मनाया जाता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था. राम और रावण के बीच युद्ध के बाद श्रीराम की विजय को धर्म की अधर्म पर जीत के रूप में देखा जाता है. इसी घटना की याद में देशभर में रामलीला का आयोजन और रावण दहन किया जाता है।  दशहरा की एक अन्य प्रमुख धार्मिक मान्यता देवी दुर्गा से जुड़ी है. कई परंपराओं में इस दिन को मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध और बुराई पर शक्ति की विजय से भी जोड़ा जाता है. इस तरह विजयादशमी दो प्रमुख धार्मिक कथाओं के जरिए अच्छाई और धर्म की स्थापना का संदेश देती है।  रावण के दस सिर किसका प्रतीक हैं? रावण के दस सिरों को कई धार्मिक व्याख्याओं में मनुष्य के भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों का प्रतीक माना जाता है. इनमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और अन्य बुरी प्रवृत्तियों को शामिल किया जाता है।  रावण दहन का संदेश केवल किसी पुतले को जलाने तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे अपने भीतर की नकारात्मकता और बुरी आदतों को खत्म करने के संकल्प से भी जोड़ा जाता है।  2026 में दशहरा क्यों खास है? साल 2026 में दशहरा के दिन श्रवण नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है. पंचांग के अनुसार यह नक्षत्र 19 अक्टूबर की दोपहर से शुरू होकर 20 अक्टूबर की शाम तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं में श्रवण नक्षत्र को शुभ माना जाता है.इसलिए विजयादशमी का दिन पूजा-पाठ, शस्त्र पूजन और सकारात्मक कार्यों के लिए विशेष माना जा रहा है। 

दशहरा 2026 की तारीख हुई साफ, 20 अक्टूबर को विजयादशमी; जानें शस्त्र पूजन का मुहूर्त

हिंदू धर्म में असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले पर्व दशहरा का विशेष स्थान है. दशहरा को विजयदशमी भी कहा जाता है. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व बुराई के अंत और नई शुरुआत का संदेश देता है. इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर त्रैलोक्य को उसके अत्याचारों से मुक्त किया था. इसके साथ ही, यह दिन मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की विजय के रूप में भी मनाया किया जाता है. साल 2026 में दशहरा की तारीख को लेकर लोगों के मन में जो संशय है. तो आइए जानते हैं इस साल विजयादशमी की सही तिथि, शस्त्र पूजन के मुहूर्त और रावण दहन का समय क्या रहने वाला है. दशहरा 2026 तिथि (Dussehra 2026 Tithi) द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को पड़ रही है. इसी दिन पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा. पंचांग के मुताबिक, दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 13 मिनट पर होगा. विजय मुहूर्त और शस्त्र पूजन का समय दशहरे के दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए 'विजय मुहूर्त' को अत्यंत शुभ माना गया है. इसके अलावा इस दिन शस्त्रों और उपकरणों की भी पूजा की जाती है. विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. इस समयावधि में माता अपराजिता और शमी के पेड़ की पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है. रावण दहन का समय (Ravan Dahan 2026 Timing) दशहरे के दिन शाम के समय बुराई के प्रतीक रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है. रावण दहन का समय 20 अक्टूबर 2026 को सूर्यास्त के बाद किया जाएगा. आमतौर पर स्थानीय रामलीला कमेटियों द्वारा प्रदोष काल और शुभ चौघड़िया देखकर शाम के समय रावण दहन किया जाता है. दशहरा का महत्व विजयादशमी को अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, यानी इस दिन बिना किसी पंचांगीय विचार के कोई भी नया व्यापार, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं. यह पर्व हमें सिखाता है कि अहंकार, बुराई और अधर्म का नाश निश्चित है, भले ही वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो. जीत हमेशा सत्य, सदाचार और धर्म की ही होती है. दशहरा पर कैसे करें पूजन? दशहरे के दिन घर के ईशान कोण में साफ चौकी पर गाय के गोबर से अष्टदल बनाकर माता अपराजिता और मां जया-विजया की स्थापना करें. फिर उन्हें रोली, अक्षत, फूल और भोग अर्पित कर विजय प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें. इसके बाद शाम के समय प्रदोष काल में शमी के पेड़ के पास जाकर जल अर्पित करें, घी का दीपक जलाएं और उसकी पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करें. साथ ही, अपने घर के शस्त्रों, औजारों या वाहनों को गंगाजल से पवित्र कर रोली-अक्षत से तिलक करें और कलावा बांधकर उनकी पूजा करें.

75 दिन तक चलेगा बस्तर दशहरा, UNESCO धरोहर सूची में शामिल कराने की तैयारी; बलराम मांझी बने समिति के उपाध्यक्ष

आस्था, परंपरा और भव्यता के रंग में सजेगा ऐतिहासिक बस्तर दशहरा 75 दिवसीय पर्व को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प, बलराम मांझी बने दशहरा समिति के नए उपाध्यक्ष रायपुर,  ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व 2026 इस वर्ष भी पूरी भव्यता, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। पर्व की तैयारियों, पूजा विधान, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न आयोजनों को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने की। बैठक में बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित समस्त मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य उपस्थित रहे। बलराम मांझी निर्विरोध नहीं, बहुमत से चुने गए नए उपाध्यक्ष बैठक की शुरुआत औपचारिक प्रक्रियाओं के साथ हुई। इसके बाद बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन कराया गया। बचेली परगना के बीरो मांझी ने अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि सोनाबाल परगना के समुन्द मांझी ने बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव किया। सदस्यों द्वारा हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें स्पष्ट बहुमत के आधार पर बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने देवसराय सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में सुझाव दिए। केवल पर्व नहीं, विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत बैठक को संबोधित करते हुए सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग करने की बात कही। उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से सकारात्मक चर्चा हुई है। सांसद ने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाले इस विशिष्ट पर्व की मौलिकता और परंपरागत स्वरूप को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पर्व अवधि के दौरान समानांतर आयोजनों की अनुमति नहीं देने, देवस्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा प्रमुख पूजा विधान स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग और पक्की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का साझा संकल्प बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरा से भी प्राचीन है। उन्होंने बस्तर दशहरा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सामूहिक प्रयास और साझा संकल्प को दोहराया। उन्होंने मावली परघाव के लिए संबंधित स्थलों एवं मार्गों की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं और आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मांझी-चालकी से पर्व के दौरान पारंपरिक वेशभूषा एवं पगड़ी धारण करने का आग्रह किया। भंजदेव ने मेंबर-मेंबरीन के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए मेंबरीन के मासिक मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव भी दशहरा समिति के समक्ष रखा। 1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित बैठक में दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने बस्तर दशहरा पर्व के लिए एक करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। उन्होंने पर्व के दौरान संपन्न होने वाले विभिन्न पूजा विधानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी समिति के सदस्यों को दी। बैठक में पूजा स्थलों, मार्गों, देवस्थलों, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। पर्व की विशिष्ट परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के साथ आयोजन को सफल बनाने पर विशेष जोर दिया गया। शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए प्रशासन तैयार कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बस्तर दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने पर्व से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने तथा सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया। बैठक में मौजूद मांझी-चालकी, पुजारी, मेंबर-मेंबरीन और समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न पूजा विधान एवं आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं के संबंध में सुझाव दिए। इस प्रकार बैठक में बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा, जनभागीदारी, धार्मिक आस्था और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के समन्वय के साथ वर्ष 2026 के पर्व को भव्य एवं गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित करने की रूपरेखा पर व्यापक चर्चा हुई।

दशहरे पर करें ये दिव्य मंत्रों का जाप, हर बाधा होगी समाप्त

दशहरा भारत के सबसे पवित्र और विजय उत्सवों में से एक है। यह दिन अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक माना जाता है। यही वह दिन है जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी और मां दुर्गा ने महिषासुर जैसे राक्षस का संहार किया था। इस दिन को शक्ति, विजय, साहस और सकारात्मक ऊर्जा के रूप में मनाया जाता है। दशहरे के दिन यदि सही मंत्रों का जाप किया जाए, तो न सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति मिलती है बल्कि जीवन में चल रही बाधाएं भी दूर होती हैं। आइए जानते हैं दशहरे पर किए जाने वाले महत्त्वपूर्ण मंत्रों, उनके लाभ और जाप की विधि के बारे में। इन मंत्रों का करें जाप ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः दशहरे के दिन ही श्री राम ने रावण का वध कर देश में शांति और सच्चाई का राज्य स्थापित किया। ऐसे में यदि आप इस मंत्र का जाप करते हो तो आपको मनचाही सफलता मिलेगी। ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।। यह शक्ति, साहस और रक्षा प्रदान करता है। दशहरे के दिन इस मंत्र के जाप से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की हर बुराई का अंत होता है। ॐ हनुमते नमः श्रीराम भक्त हनुमान दशहरा के अवसर पर विशेष पूजनीय होते हैं। यह मंत्र जीवन से डर, भय, और नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो कर्ज, कोर्ट-कचहरी, या शत्रु बाधा से पीड़ित हैं। ॐ अपराजितायै नमः  इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को हर कार्य में सफलता मिलती है। यदि कोई भी शुभ कार्य करने जा रहे हो तो इस मंत्र का जाप कर के घर से बाहर निकलें। ऐसा करने के बाद आपको कभी भी निराशा का मुंह नहीं देखना पड़ेगा। मंत्र जाप की सही विधि दशहरा के दिन विजय मुहूर्त जो दोपहर के समय आता है और अपराह्न काल मंत्र जाप के लिए सबसे शुभ माने जाते हैं। स्नान के बाद, स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर बैठें। यदि संभव हो तो लाल या पीले रंग के आसन का प्रयोग करें। जाप शुरू करने से पहले हाथ में जल, फूल और चावल लेकर अपने उद्देश्य  का संकल्प लें। मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष या तुलसी की माला का प्रयोग करें। जाप करते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

दशहरे पर इन चीजों का दान करने से बढ़ेगी आपकी खुशहाली और समृद्धि

भारत में दशहरा या विजयादशमी (Dussehra 2025) का पर्व सिर्फ उत्सव ही नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राक्षसराज रावण का वध कर अधर्म का अंत किया था। यही नहीं, इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं और समस्त प्रजा को भयमुक्त किया था। हर वर्ष आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को यह पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। लोग घरों में विशेष पूजा-पाठ करते हैं, शस्त्र पूजन का आयोजन होता है, और शाम को रावण दहन के माध्यम से बुराई को प्रतीकात्मक रूप से समाप्त किया जाता है। इसके साथ ही इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है।    इन वस्तुओं का करना चाहिए दान शास्त्रों में वर्णित है कि विजयादशमी के दिन किया गया दान अक्षय फल देने वाला होता है। यानी इस दिन जो भी पुण्य कार्य किया जाए, उसका फल लंबे समय तक बना रहता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि दशहरे के दिन किन वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है। अन्न और वस्त्र का गुप्त दान धार्मिक ग्रंथों में गुप्त दान को सर्वोत्तम माना गया है। विजयादशमी के दिन यदि कोई व्यक्ति किसी जरूरतमंद, गरीब अथवा ब्राह्मण को चुपचाप अन्न और वस्त्र का दान करता है, तो इससे घर की दरिद्रता दूर होती है। कहा जाता है कि इससे परिवार में स्थायी सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। झाड़ू का दान भारतीय परंपरा में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। यह न केवल घर की सफाई का साधन है बल्कि नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता को दूर करने का प्रतीक भी है। दशहरे के दिन किसी धार्मिक स्थल पर या किसी जरूरतमंद को नई झाड़ू दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर के वास्तु दोष दूर होते हैं और आर्थिक स्थिति में मजबूती आती है। पीले वस्त्र और मिठाई ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दशहरे पर पीले वस्त्रों का दान करना विशेष फलदायी होता है। पीला रंग सौभाग्य और समृद्धि का द्योतक है। इस दिन यदि कोई व्यक्ति पीले वस्त्र अथवा पीली मिठाई का दान करता है, तो उसके जीवन में रुके हुए कार्य पूरे होते हैं। यह कारोबार और करियर में आ रही बाधाओं को दूर करने में भी सहायक माना गया है। सुहाग की सामग्री दशहरे पर विवाहित महिलाओं को सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, काजल, मेहंदी आदि का दान करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इस दान से पारिवारिक जीवन में खुशहाली और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है। दान करते समय ध्यान रखने योग्य बातें दान हमेशा ब्राह्मणों, साधुओं, या फिर वास्तव में जरूरतमंद लोगों को ही करना चाहिए। इस दिन धारदार वस्तुओं, नुकीली चीजों और चमड़े से बनी वस्तुओं का दान करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ माना गया है। दान हमेशा विनम्र भाव से करना चाहिए। दान देने के बाद उसका दिखावा या घोषणा नहीं करनी चाहिए। दान करते समय मन में अहंकार या घमंड नहीं होना चाहिए।

शमी पूजा क्यों है दशहरे पर विशेष? जानें ऐतिहासिक और धार्मिक कारण

दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व साल का सबसे शुभ दिन माना जाता है. इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर धर्म की रक्षा की थी. लेकिन यह दिन सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं है. दशहरे पर एक और खास परंपरा निभाई जाती है शमी वृक्ष की पूजा. शमी पूजन को धर्म, पुराण और ज्योतिष—तीनों ही स्तर पर बेहद शक्तिशाली और फलदायी बताया गया है. महाभारत से जुड़ी कथा: पांडव और शमी वृक्ष शमी का महत्व महाभारत काल से जुड़ा है. जब पांडव अज्ञातवास पर निकले तो उन्होंने अपने सभी शस्त्र एक शमी के पेड़ में छिपा दिए थे. बारह साल बाद जब वे लौटे तो उनके शस्त्र वैसे ही सुरक्षित मिले. इसी वजह से शमी को शक्ति और विजय का प्रतीक माना गया. तभी से दशहरे के दिन शमी पूजन और शस्त्र पूजन की परंपरा चली आ रही है. शमी के पत्ते क्यों कहलाते हैं ‘सोना’ दशहरे पर शमी वृक्ष के पत्ते आपस में बांटने की परंपरा कई राज्यों में प्रचलित है. खासकर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे सोना बांटना कहा जाता है. मान्यता है कि शमी के पत्ते असली सोने के समान शुभ होते हैं. इन्हें घर में रखने से लक्ष्मी का वास होता है और धन-समृद्धि बढ़ती है. यही कारण है कि दशहरे पर लोग शमी के पत्ते घर ले जाकर पूजाघर या तिजोरी में रखते हैं. शमी और ज्योतिषीय महत्व ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शमी वृक्ष शनि ग्रह का प्रिय है. दशहरे पर शमी की पूजा करने से शनि दोष शांत होता है, साथ ही करियर और व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं. कहा गया है कि जो व्यक्ति नियमित शमी वृक्ष की पूजा करता है, उसके जीवन में स्थिरता आती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. शमी पूजन से मिलने वाले लाभ     शत्रु बाधा और संकटों से मुक्ति     शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव का नाश     घर में सुख-शांति और सौभाग्य की वृद्धि     धन और समृद्धि की प्राप्ति     कार्यक्षेत्र और व्यापार में सफलता     हर क्षेत्र में विजय और न्याय की प्राप्ति रावण और शमी का संबंध कहा जाता है कि लंका में रावण ने शमी वृक्ष की विशेष पूजा की थी. इसी कारण इसे युद्ध और विजय से जोड़ा जाता है. दक्षिण भारत में आज भी दशहरे के अवसर पर लोग शमी के वृक्ष के नीचे पूजा कर उसे प्रणाम करते हैं और युद्ध या कार्य की सफलता के लिए आशीर्वाद मांगते हैं. दशहरा सिर्फ बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व नहीं है, बल्कि यह शक्ति और समृद्धि को आमंत्रित करने का अवसर भी है. इस दिन शमी पूजन करने से शत्रु पर विजय, शनि दोष का नाश और धन की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि दशहरे पर शमी की पूजा करना शुभ और आवश्यक माना गया है.

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता, पटना में दुर्गा पूजा-दशहरा के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध: पटना जिला प्रशासन

पटना दुर्गा पूजा, दशहरा और रावण वध के पावन अवसर पर पटना में भव्य मेले और सांस्कृतिक आयोजनों की तैयारियां जोरों पर हैं और इसी कड़ी में पटना जिला प्रशासन ने आमजन की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए शनिवार को एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने अपील की है कि मेला क्षेत्र में आने वाले अभिभावक अपने बच्चों के पॉकेट में उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर अवश्य रखें। साथ ही बच्चों का हाथ न छोड़ें और उन्हें अकेले घूमने न दें। जारी एडवाइजरी में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह न फैलाएं और न ही उन पर ध्यान दें। सार्वजनिक स्थानों पर शांति बनाए रखें और सुरक्षा मानकों का पालन करें। किसी भी तरह के पटाखे, ज्वलनशील पदार्थ या नशीले पदार्थों को मेले में ले जाने पर रोक है। मेले में भीड़- भाड़ के दौरान सड़क पर धीरे चलें, कतारबद्ध रहें और जल्दबाज़ी न करें। इमरजेंसी मार्ग को कभी अवरुद्ध न करें। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था फैलाने से बचें। अगर किसी को कोई लावारिस या संदिग्ध वस्तु दिखाई दे तो उसे छूने से बचें और तत्काल निकटतम दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी या नियंत्रण कक्ष को सूचित करें। इसके लिए प्रशासन ने 2437 हेल्पलाइन नंबर 0612-2219810, 2219234 और डायल 112 जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा जांच आपके और आपके परिवार की सुरक्षा के लिए है, इसलिये उसमें पूर्ण सहयोग करें। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस पर्व को आस्था, अनुशासन और सुरक्षा का प्रतीक बनाएं।  

वास्तु मंत्र: दशहरा 2025 पर अपने घर में लाएँ समृद्धि और सफलता

सनातन धर्म में दशहरे के पर्व को बहुत शुभ और खास माना जाता है। दशहरा को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। पूरे देश में दशहरे के पर्व को बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दशहरा या विजयदशमी का पर्व असत्य पर सत्य की विजय और बुराई पर अच्छाई के प्रतीक है। दशहरे का दिन धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वास्तु और ज्योतिष की दृष्टि से भी बहुत शुभ माना जाता है। दशहरे के अवसर पर किए गए कुछ विशेष वास्तु उपाय न केवल धन की वृद्धि करते हैं, बल्कि घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि को भी स्थायी बनाते हैं। तो आइए जानते हैं  दशहरे के पावन अवसर पर कौन से वास्तु उपायों का पालन करना चाहिए। घर में झाड़ू और तिजोरी की पूजा दशहरे के दिन झाड़ू और तिजोरी की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन पूजा स्थान पर झाड़ू की पूजा करने से घर से दरिद्रता दूर होती है और वहीं तिजो पर हल्दी, कुमकुम और चावल से स्वस्तिक बनाकर दीपक जलाने पैसों से जुड़ी समस्या दूर होती है और कारोबार में मनचाही सफलता मिलती है। शमी के पेड़ की पूजा दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन शमी के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाने और जल चढ़ाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और धन में वृद्धि होती है। घर के मुख्य द्वार पर विशेष सजावट वास्तु शास्त्र में घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। दशहरे के दिन दरवाजे पर आम्रपल्लव, गेंदे के फूल और स्वास्तिक का चिन्ह बनाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लक्ष्मी माता का वास बना रहता है।