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वैराग्य का अर्थ और मनुष्य की द्वंद्वात्मक भाषा का भ्रम

वैराग्य का अर्थ, जहां न राग रह गया, न विराग रह गया। जहां न किसी चीज का आकर्षण है, न विकर्षण है। न किसी चीज के प्रति खिंचाव है, न विपरीत भागना है। जहां न किसी चीज का बुलावा है, न विरोध है। जहां व्यक्ति थिर हुआ, सम हुआ, जहां पक्ष और विपक्ष एक से हो गए, वहां वैराग्य फलित होता है। लेकिन इसे विराग या वैराग्य क्यों कहते हैं? जहां वैराग्य भी नहीं है, वहां वैराग्य क्यों कहते हैं? क्योंकि कोई उपाय नहीं है। शब्द की मजबूरी है, और कोई बात नहीं है। आदमी के पास सभी शब्द द्वंद्वात्मक हैं, डायलेक्टिकल हैं। आदमी की भाषा में ऐसा शब्द नहीं है जो नॉन-डायलेक्टिकल हो, द्वंद्वात्मक न हो। मनुष्य ने जो भाषा बनाई है, वह मन से बनाई है। मन द्वंद्व है। इसलिए मनुष्य जो भी भाषा बनाता है, उसमें विपरीत शब्दों में भाषा को निर्मित करता है। मजे की बात है कि हमारी भाषा बन ही नहीं सकती विपरीत के बिना। क्योंकि बिना विपरीत के हम परिभाषा नहीं कर सकते। अगर कोई आपसे पूछे कि अंधेरा यानी क्या? तो आप कहते हैं, जो प्रकाश नहीं है। कोई पूछे, प्रकाश क्या? तो आप कहते हैं, जो अंधेरा नहीं है। न आपको अंधेरे का पता है कि क्या है, न प्रकाश का पता है कि क्या है? अंधेरे को जब पूछते हैं, तो कह देते हैं, प्रकाश नहीं है। जब पूछते हैं, प्रकाश क्या है? तो कह देते है, अंधेरा नहीं है। यह कोई परिभाषा हुई? परिभाषा तो तभी हो सकती है, जब कम से कम एक का तो पता हो! एक आदमी एक अजनबी गांव में गया। उसने पूछा कि 'अ' नाम का आदमी कहां रहता है? तो लोगों ने कहा, 'ब' नाम के आदमी के पड़ोस में। पर उसने कहा, मुझे 'ब' का भी कोई पता नहीं, 'ब' कहां रहता है? उन्होंने कहा, 'अ' के पड़ोस में। ऐसे ही आदमी से पूछो, चेतना क्या है? वह कहता है, जो पदार्थ नहीं है। उससे पूछो, पदार्थ क्या है? वह कहता है, जो चेतना नहीं। माइंड क्या है? मैटर नहीं। मैटर क्या है? माइंड नहीं। बड़े से बड़ा दार्शनिक भी इसको परिभाषा कहता है। यह डेफिनिशन हुई? यह तो धोखा हुआ, डिसेप्शन हुआ- परिभाषा न हुई। क्योंकि इसमें से एक का भी पता नहीं है। आदमी को कुछ भी पता नहीं है, लेकिन काम तो चलाना पड़ेगा। इसलिए आदमी बेईमान शब्दों को रखकर काम चलाता है। उसके सब शब्द डिसेप्टिव हैं। उसके किसी शब्द में कोई भी अर्थ नहीं है। क्योंकि अपने शब्द में वह जिस शब्द से अर्थ बताता है, उस शब्द में भी उसको कोई अर्थ पता नहीं है। उसकी सब परिभाषाएं सर्कुलर हैं, वर्तुलाकार हैं। वह कहता है, बाएं यानी क्या? वह कहता है, जो दाएं नहीं है। और दाएं? वह कहता है, जो बाएं नहीं है। लेकिन इनमें से किसी को पता है कि बायां क्या है? यह आदमी की भाषा डायलेक्टिकल है। डायलेक्टिकल का मतलब यह कि जब आप पूछें 'अ' क्या, तो वह 'ब' की बात करता है। जब पूछें 'ब' क्या, तो वह 'अ' की बात करने लगता है। इससे भ्रम पैदा होता है कि सब पता है। पता कुछ भी नहीं है, सिर्फ शब्द पता हैं। लेकिन बिना शब्दों के काम नहीं चल सकता। राग है तो विराग है। लेकिन तीसरा शब्द कहां से लाएं? और तीसरा शब्द ही सत्य है। वह कहां से लाएं?- ओशो

अक्षय तृतीया से पहले शनि का बड़ा बदलाव, करियर-धन में फायदा

19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है और ठीक 2 दिन पहले 17 अप्रैल को शनि नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं. इस दिन शनि उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 17 मई तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिषविदों का कहना है कि अक्षय तृतीया से पहले शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन कुछ राशियों के लिए बहुत ही लकी माना जा रहा है और शुभ परिणाम लेकर आने वाला है. आइए जानते हैं कि शनि पद नक्षत्र परिवर्तन किन राशियों के लिए लाभकारी रहने वाला है. वृषभ राशि शनि का पद नक्षत्र परिवर्तन सकारात्मक संकेत लेकर आ सकता है. करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. मेहनत का फल मिलने लगेगा. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. रुका हुआ धन भी वापस मिल सकता है. मिथुन राशि यह समय आपके लिए संतुलन और सफलता लेकर आ सकता है. साझेदारी में लाभ होगा. नए कॉन्ट्रैक्ट मिल सकते हैं. रिश्तों में सुधार देखने को मिलेगा. किसी नए कार्य की शुरुआत कर सकते हैं सिंह राशि सिंह राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलने के योग हैं. लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं. नौकरी और बिजनेस में अच्छे मौके मिलेंगे. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. कन्या राशि आपके लिए यह परिवर्तन राहत भरा रहेगा. मानसिक तनाव कम होगा. आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा. खर्चें कंट्रोल में रहेंगे. धनु राशि धनु राशि के लोगों के लिए यह समय करियर ग्रोथ का हो सकता है. प्रमोशन या नई नौकरी के योग बन रहे हैं. यात्रा से भी लाभ मिल सकता है. शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं, काले तिल और तेल का दान करें, हनुमान जी की पूजा करें, शनिदेव के मंत्रों का जाप करें, कौओं को भोजन कराएं और अपने कर्मों में सुधार करें.

शुक्र गोचर 2026: बनेगा मालव्य और शुक्रादित्य राजयोग, इन राशियों को फायदा

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुख, प्रेम, वैभव और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 16 अप्रैल 2026 की रात 10 बजकर 19 मिनट पर शुक्र भरणी नक्षत्र से निकलकर कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इसके बाद 19 अप्रैल को शुक्र वृषभ राशि में गोचर करेंगे, जिससे मालव्य राजयोग बनेगा. सूर्य के स्वामित्व वाले कृत्तिका नक्षत्र में शुक्र का प्रवेश 'शुक्रादित्य राजयोग' भी बना रहा है. यह खगोलीय बदलाव 27 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा और इस दौरान कई राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं. शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन क्यों है खास? ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, शुक्र जब कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो सूर्य के साथ उनका विशेष संबंध बनता है. शुक्र और सूर्य की युति से बनने वाला शुक्रादित्य राजयोग व्यक्ति के जीवन में मान-सम्मान, आकर्षण, आर्थिक लाभ और रिश्तों में सुधार लेकर आता है. वहीं, वृषभ राशि में शुक्र का प्रवेश मालव्य राजयोग बनाकर भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि करता है. आइए जानते हैं किन राशियों को इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है. मेष राशि (Aries Zodiac) मेष राशि वालों के लिए शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है. इस दौरान आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा. लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे. रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं. अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. बचत करने के भी मौके मिलेंगे. व्यापारियों को विशेष लाभ मिल सकता है, खासकर जो लोग आयात-निर्यात से जुड़े हैं. विदेश से जुड़े कामों में सफलता मिलने के संकेत हैं. लव लाइफ भी बेहतर रहेगी. अविवाहित लोगों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं. दांपत्य जीवन में भी मिठास बनी रहेगी. सिंह राशि (Leo Zodiac) सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय कई अच्छे संकेत लेकर आ सकता है. करियर में उन्नति के योग बन रहे हैं. नौकरी करने वालों को प्रमोशन या नई नौकरी मिलने का मौका मिल सकता है. परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा. घर में शांति बनी रहेगी. धार्मिक या आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर झुकाव बढ़ सकता है, जिससे यात्रा के योग भी बन सकते हैं. व्यापार करने वालों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है. जो लोग उच्च शिक्षा लेना चाहते हैं, उनके लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा. घर में वाहन या प्रॉपर्टी लेने का सपना भी पूरा हो सकता है. धनु राशि (Sagittarius Zodiac) धनु राशि के लिए शुक्र का कृत्तिका नक्षत्र में जाना सकारात्मक परिणाम दे सकता है. इस दौरान आपकी क्रिएटिविटी बढ़ेगी. नए विचार सामने आ सकते हैं. करियर में नए मौके मिल सकते हैं. आपके आइडियाज की वजह से सफलता मिलने के योग बनेंगे. बिजनेस करने वालों के लिए भी यह समय फायदेमंद रहेगा. प्रेम संबंधों में सुधार देखने को मिल सकता है. रिश्तों में नजदीकी बढ़ेगी. हालांकि शादीशुदा लोगों को छोटी-छोटी बातों को लेकर बहस से बचने की सलाह दी जाती है. आर्थिक स्थिति मजबूत रह सकती है. जीवन में संतुलन बना रहेगा. कब तक रहेगा असर? द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्र 27 अप्रैल 2026 तक कृत्तिका नक्षत्र में रहेंगे और इसके बाद रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इस पूरे समय में बने राजयोग कई राशियों के लिए शुभ परिणाम दे सकते हैं, खासकर प्रेम, करियर और आर्थिक मामलों में. क्या करें इस दौरान? – शुक्रवार के दिन सफेद वस्त्र पहनें. – माता लक्ष्मी की पूजा करें. – सुगंधित इत्र या सफेद फूल अर्पित करें. – जरूरतमंदों को मिठाई या सफेद वस्त्र दान करें.

छोटे बच्चों का अंतिम संस्कार दफनाकर क्यों किया जाता है? जानें धार्मिक कारण

क्या आपने कभी सोचा है कि हिंदू धर्म में छोटे बच्चों का अंतिम संस्कार जलाकर नहीं, बल्कि दफनाकर क्यों किया जाता है? हिंदू धर्म में आमतौर पर मृत्यु के बाद अग्नि संस्कार को सबसे पवित्र माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि अग्नि शरीर को पंचतत्वों में मिलाकर आत्मा को उसके बंधनों से मुक्त करती है. लेकिन जब बात छोटे बच्चों या अविवाहित बच्चों की आती है, तो यह परंपरा बदल जाती है. इसका मुख्य कारण बच्चों की निर्मलता और निष्कपट स्वभाव माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, छोटे बच्चों ने अभी तक कोई ऐसे कर्म नहीं किए होते हैं, जिनके कारण उन्हें जन्म-मरण के बंधन में फंसना पड़े. उनकी आत्मा पहले से ही शुद्ध और मुक्त होती है. इसलिए उन्हें अग्नि से शुद्ध करने की जरूरत नहीं मानी जाती है. नहीं होता है बच्चों का अग्नि संस्कार गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस बच्चे के दूध के दांत नहीं निकले हों या जो बहुत छोटा हो, उसका दाह संस्कार नहीं किया जाता है. कई मान्यताओं में 2 से 5 साल तक के बच्चों को दफनाने की परंपरा बताई गई है. ऐसा माना जाता है कि इस उम्र तक बच्चे में 'मैं' और 'मेरा' का भाव विकसित नहीं होता है. आध्यात्मिक दृष्टि से भी कहा जाता है कि मनुष्य के तीन शरीर होते हैं- स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर. बड़े लोगों में ये तीनों आपस में मजबूत रूप से जुड़े होते हैं, जिन्हें अलग करने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है. लेकिन बच्चों में यह संबंध बहुत हल्का और सरल होता है, इसलिए उनकी आत्मा आसानी से शरीर छोड़ देती है. क्या है वैज्ञानिक कारण? वैज्ञानिक रूप से भी देखा जाए तो छोटे बच्चों का शरीर बहुत कोमल होता है. उनके सिर का ऊपरी हिस्सा (जिसे ब्रह्मरंध्र कहा जाता है) पूरी तरह बंद नहीं होता है, जिससे प्राण आसानी से बाहर निकल जाते हैं. इसलिए कपाल क्रिया जैसी प्रक्रिया की भी जरूरत नहीं पड़ती. प्रकृति से जुड़ा है रहस्य हिंदू धर्म में शरीर को पंचतत्व मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, से बना माना गया है. बड़े व्यक्ति के शरीर को अग्नि के माध्यम से इन तत्वों में मिलाया जाता है, लेकिन बच्चे का शरीर अभी प्रकृति के सबसे करीब माना जाता है. इसलिए, उसे सीधे मिट्टी को सौंप देना अधिक स्वाभाविक और शांतिपूर्ण माना जाता है. एक और कारण भी है कि छोटे बच्चे की मृत्यु परिवार के लिए बहुत दुखद होती है. ऐसे में दफनाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांत होती है और यह एहसास देती है कि बच्चा धरती मां की गोद में सुरक्षित है.

2026 में आएगा अधिकमास, जानें कब से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास

 कई सालों में एक बार हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. साल 2026 में भी ऐसा ही खास साल आने वाला है. इस महीने को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. यह समय त्योहारों से ज्यादा पूजा, साधना और आत्मचिंतन के लिए माना जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार, हिंदू कैलेंडर चंद्रमा के हिसाब से चलता है, जो सूर्य के साल से करीब 11 दिन छोटा होता है. इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर 3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है. 2026 में अधिकमास कब है? द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा. इस बार यह ज्येष्ठ महीने में पड़ रहा है, जिसकी वजह साल 2026 में 1 महीना ज्यादा बढ़ गया है. यानी यह साल 13 महीने को होगा. एक साल में दो ज्येष्ठ महीने विक्रम संवत 2083 में एक खास बात यह भी होगी कि दो ज्येष्ठ मास पड़ेंगे. एक होगा सामान्य ज्येष्ठ मास और दूसरा होगा अधिक ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम) मास. अधिकमास के कारण ज्येष्ठ महीना लगभग 58-59 दिनों तक चलेगा और दोनों महीने कुछ समय के लिए आपस में मिलेंगे. इस बार अधिक ज्येष्ठ मास की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा. वहीं, सामान्य ज्येष्ठ मास की शुरुआत 22 मई 2026 से होगी और समापन 29 जून 2026 को होगी. इसी वजह से यह साल पंचांग और खगोलीय दृष्टि से बहुत खास माना जा रहा है. अधिकमास में क्या करें? – दान-पुण्य करें- अधिकमास में गरीबों को भोजन, कपड़े या जरूरत की चीजें दान करना बहुत शुभ माना जाता है. – दीपदान करें- हर दिन या खास दिनों पर दीपक जलाने से मानसिक शांति मिलती है. – मंत्र जाप करें- 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना शुभ होता है. – धार्मिक ग्रंथ सुनें या पढ़ें- इस महीने में श्रीमद्भागवत कथा सुनना या पढ़ना लाभकारी माना जाता है. – पवित्र स्नान करें- गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है. अधिकमास में क्या न करें? अधिकमास में किसी नए काम की शुरुआत न करें. शादी या सगाई जैसे मांगलिक कार्य टालें. गृह प्रवेश या जमीन-घर से जुड़े बड़े फैसले न लें. मुंडन या जनेऊ जैसे संस्कार न करें. बड़े निवेश या लेन-देन से बचें. व्रत की शुरुआत या उद्यापन न करें.

15 अप्रैल राशिफल: कुछ राशियों को मिलेगा शुभ लाभ, तो कुछ को झेलनी होंगी चुनौतियां

आज मेष राशि वालों के लिए आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। आपको थोड़ा कंट्रोल भी रखना होगा रहें। धैर्यशीलता बनाए रखने के प्रयास करें। कारोबार में भागदौड़ अधिक रहेगी, परंतु सेहत का भी ध्यान रखें। आज वृषभ राशि वालों का ग्रहों के कारण मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी, इसलिए आपको कई अटक सकते हैं। आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता बनाए रखें। सेहत का ध्यान रखें। कारोबार के लिए परिवार से धन मिल सकता है। मिथुन राशि वालों के लिए समय उत्तम है। आपको इस समय: आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहेंगे।कोशिश करें कि पठन-पाठन में रुचि बढ़ सकती है। बौद्धिक कार्यों से मान-सम्मान की प्राप्ति हो सकती है। किसी मित्र के सहयोग से आय बढ़ सकती है। कर्क राशि वालों के लिए आपका दांपत्य सुख अच्छा रहेगा, आपकी अपनी इनमक में बढ़ोतरी होगी। मन में उतार-चढ़ाव भी हो सकते हैं। परिवार के साथ यात्रा पर जा सकते हैं। सिंह राशि वालों का मन प्रसन्न तो रहेगा, परंतु आत्मविश्वास में कमी हो सकती है। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा, परंतु परिवार से दूर िकसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। कन्या राशि वालों को इस खुद पर थोड़ा कंट्रोल करना होगा। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। पिता की सेहत का ध्यान रखें। कारोबार में बदलाव हो सकता है। किसी मित्र का सहयोग मिलेगा। तुला राशि वालों के लिए आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन में उतार-चढ़ाव भी रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर भी मिलेंगे, परंतु सेहत का भी ध्यान रखें धनु राशि के लिए आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन भी परेशान हो सकता है, लेकिन इससे परेशान ना हों। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। पिता का साथ मिलेगा, पर कारोबार में लाभ के अवसर मिलेंगे। वृश्चिक राशि वालों का मन परेशान हो सकता है। माता-पिता की सेहत का ध्यान रखें। भागदौड़ अधिक रहेगी। खर्चों की अधिकता रहेगी। रहन-सहन अव्यवस्थित रहेगा। कुंभ राशि वाले आज आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहेंगे। पठन-पाठन में रुचि बढ़ सकती है। किसी मित्र के सपोर्ट से आय में वृद्धि के साथ बन सकते हैं। हेल्थ का ध्यान रखें। मकर राशि के लिए आज दिन अच्छा रहने वाला है। आपको लवलाइफ में अच्छे पल मिलेगें। आर्थिक तौर पर भी आज आगे बढ़ रहे हैं। हेल्थ को लेकर ध्यान रखें। मीन राशि के लिए समय उत्तम है। वाणी और अपनी फैसले लेने पर थोड़ा सोच समझकर फैसला लें। तभी आप सफल हो पाएंगे।

वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में क्या करें और क्या नहीं?

वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा अग्नि को दर्शाती है साथ ही इस दिशा में मंगल और यम की दिशा भी कहा गया है। अगर दक्षिण दिशा वास्तु के अनुसार संतुलित न हो तो घर परिवार के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही आर्थिक मामलों में कुछ न कुछ बाधाएं आती रहती हैं। तो आइए जानते हैं वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, दक्षिण दिशा को कैसा होना चाहिए। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को लेकर क्या नियम बताए गए हैं। दक्षिण दिशा में क्या नहीं होना चाहिए 1) वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण दिशा में पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए। पानी से संबंधित चीजें दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, जल तत्व दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। 2) दक्षिण दिशा में अग्नि की दिशा बताया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह को कोई एंटी एलिमेंट जैसे पानी की टंकी और वॉशिंग एरिया नहीं होना चाहिए। न ही इस दिशा में पूजा घर बनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो घर परिवार के सभी लोगों को कामकाज में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ता है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार नहीं होता है। 3) दक्षिण दिशा में टॉयलेट भी नहीं बनाना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण में टॉयलेट होने काफी हानिकारक होता है। अगर इस दिशा में टॉयलेट होने पर काम बनते बनते बिगड़ने लगते हैं। साथ ही लोगों की लोकप्रियता भी खराब हो जाती है। 4) दक्षिण दिशा को मंगल की दिशा और यम की दिशा भी माना गया है। इसे यम के द्वार भी कहा जाता है। इस दिशा अगर काले या नीला रंग बोता है तो वह आपको कोर्ट केस या दुर्घटना आदि होने की आशंका अधिक रहती है। साथ ही इस दिशा में घर में पानी का जमाव न होने दें। क्योंकि, इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है। भूलकर भी इस दिशा में स्फटिक टैंक या स्विमिंग पूल न बनवाएं। दक्षिण दिशा में क्या बना सकते हैं 1) दक्षिण दिशा को अग्नि की दिशा भी कहा गया है और यह आपकी प्रसिद्धि से भी जुड़ी दिशा में ऐसे में इस एरिया में आप चाहें तो मास्टर बेडरुम बनवा सकते हैं। इस दिशा में मास्टर बेडरुम होने शुभ परिणाम देता है।

आस्था और रहस्य से घिरा पुरी का जगन्नाथ मंदिर

 ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर एक बार फिर चर्चा में है. कारण है उसका रत्न भंडार. मंदिर के रत्न भंडार की जांच शुरू हो गई है, जिसकी जांच अलग-अलग चरणों में की जा रही है और इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. इस विशेष खोज के बाद मंदिर से जुड़े रहस्य और भी गहरे हो गए हैं. जगन्नाथ मंदिर की पौराणिक मान्यता पुरी का प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर हर साल से हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है. यह भारत के चार धामों में से एक माना जाता है और अपनी भव्य रथ यात्रा के लिए खास पहचान रखता है. मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान विष्णु के आशीर्वाद के बाद कराया था. कहा जाता है कि भगवान ने उन्हें स्वप्न में नील माधव को खोजने का आदेश दिया था. एक और कथा के मुताबिक, जब पांडव यमराज की ओर अपनी अंतिम यात्रा पर निकले, तो सप्त ऋषियों ने उन्हें मोक्ष के करीब पहुंचने के लिए चार धाम की यात्रा करने की सलाह दी थी. पुरी का जगन्नाथ मंदिर इन्हीं पवित्र धामों में शामिल है. तब से इस मंदिर की कई परंपराएं आज भी वैसी ही चली आ रही हैं, जिनमें भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा से जुड़ी कुछ खास मान्यताएं भी शामिल हैं. इसके अलावा, यह मंदिर कई ऐसी बातों के लिए भी जाना जाता है, जो सामान्य वैज्ञानिक तर्कों से परे मानी जाती हैं. आखिर ये रहस्य क्या हैं, आइए जानते हैं. लाल झंडे का रहस्य मंदिर के ऊपर हमेशा एक लाल झंडा लहराता रहता है. यह आम बात लग सकती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह झंडा हवा के उल्टी दिशा में लहराता है. हर बार ऐसा ही होता है. कई लोग इसे भगवान का संकेत मानते हैं, जैसे वह बता रहे हों कि उन्हें पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है. इसके साथ ही एक खास परंपरा भी जुड़ी है. हर दिन एक पुजारी करीब 200 फीट ऊंचे मंदिर पर बिना किसी सुरक्षा के चढ़कर इस झंडे को बदलता है. मान्यता है कि अगर किसी दिन यह परंपरा नहीं निभाई गई, तो मंदिर कई सालों तक बंद रह सकता है. समुद्र की आवाज जो अंदर जाते ही गायब हो जाती है जगन्नाथ मंदिर समुद्र से करीब 2 किलोमीटर दूर है. लेकिन हैरानी की बात ये है कि जैसे ही आप मंदिर के मुख्य द्वार के अंदर कदम रखते हैं, समुद्र की लहरों की आवाज बिल्कुल सुनाई नहीं देती. बाहर आते ही फिर वही आवाज सुनाई देने लगती है. इसलिए लोग कहते हैं कि ये सिर्फ मंदिर नहीं, एक अलग अनुभव है. मान्यता है कि भगवान हनुमान को मंदिर की रक्षा के लिए रखा गया था और उन्होंने ही समुद्र की आवाज को रोक दिया, ताकि भगवान जगन्नाथ शांतिपूर्वक विश्राम कर सकें. प्रसाद का अनोखा तरीका यहां रोज भगवान का प्रसाद सात मिट्टी के बर्तनों में एक के ऊपर एक रखकर पकाया जाता है. आमतौर पर नीचे वाला बर्तन पहले पकना चाहिए, लेकिन यहां उल्टा होता है- सबसे ऊपर वाला बर्तन पहले तैयार हो जाता है. इतना ही नहीं, जितने भी लोग दर्शन के लिए आते हैं, प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न ही बचता है. हर दिन बिल्कुल सही मात्रा में ही बनता है. मंदिर की परछाई नहीं पड़ती कहा जाता है कि इस मंदिर की बनावट ऐसी है कि दिन के किसी भी समय इसकी छाया दिखाई नहीं देती. यह बात लोगों को आज भी हैरान करती है. लकड़ी की मूर्तियां, जो हैं सबसे अलग जगन्नाथ मंदिर की एक और खास बात है यहां की मूर्तियां. जहां ज्यादातर मंदिरों में भगवान की मूर्तियां पत्थर या धातु की होती हैं. यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनी होती हैं. और सबसे अनोखी बात यह है कि इन मूर्तियों को हर 12 से 19 साल में एक खास और गुप्त प्रक्रिया के तहत बदला जाता है, जिसे नवकलेवर कहा जाता है. मान्यता है कि इस दौरान एक रहस्यमयी तत्व, जिसे ब्रह्म पदार्थ कहा जाता है. पुरानी मूर्ति से नई मूर्ति में स्थानांतरित किया जाता है. इस प्रक्रिया को केवल कुछ चुनिंदा पुजारी ही देख सकते हैं, बाकी सब कुछ आज भी रहस्य बना हुआ है.  

बालकनी का वास्तु बदल सकता है घर की ऊर्जा और भाग्य

 कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी घर में पैसा नहीं टिकता या मानसिक तनाव बना रहता है.  तमाम कोशिश के बाद जब हमारा ध्यान घर के वास्तु पर जाता है तो हम कमरे, किचन और हॉल का वास्तु तो ठीक करते हैं लेकिन कई बार घर की बालकनी अछूती रह जाती है. हम अक्सर घर के कमरों का वास्तु तो ठीक कर लेते हैं, लेकिन बालकनी के वास्तु पर हमारा ध्यान नहीं जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, बालकनी में रखी कुछ चीजें और गलत दिशा आपकी तरक्की में ब्रेक लगा सकती हैं. अगर आप भी सुख-समृद्धि चाहते हैं, तो बालकनी से जुड़े इन नियमों को अनदेखा करने की गलती बिल्कुल न करें. बालकनी की सही दिशा बदल देगी किस्मत वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व है. बालकनी के लिए उत्तर और पूर्व दिशा को सबसे उत्तम माना गया है. इसे देव मार्ग कहा जाता है. अगर आपकी बालकनी इस दिशा में है, तो सूर्य की पहली किरणें घर की नकारात्मकता को खत्म कर देती हैं. कोशिश करें कि इस हिस्से को जितना हो सके खुला और साफ रखें, ताकि घर में ईश्वरीय ऊर्जा बनी रहे. इसके अलावा बालकनी में आप कुछ पौधे लगा कर पूरे घर के वास्तु दोष से निजात पा सकते हैं. बस इन्हें लगाते वक्त दिशा का ध्यान रखना जरूरी है. तुलसी: बालकनी के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में तुलसी का पौधा लगाएं. इसे साक्षात लक्ष्मी का रूप माना जाता है. मनी प्लांट: आर्थिक तंगी दूर करने के लिए इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ होता है. शमी: शनि दोष से मुक्ति और कार्यों में सफलता के लिए शमी का पौधा लगाएं. बालकनी में कभी भी कांटेदार या दूध निकलने वाले पौधे न लगाएं, ये घर में कलह और तनाव पैदा करते हैं. दीवारों का रंग और शाम का दीपक बालकनी की दीवारों पर हमेशा हल्के और सात्विक रंगों का चुनाव करें. सफेद, क्रीम या हल्का पीला रंग सबसे अच्छा माना जाता है. वास्तु के अनुसार, रोज शाम को बालकनी में एक दीपक जरूर जलाना चाहिए. ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और घर से बुरी शक्तियां दूर रहती हैं. अगर बैठने के लिए भारी फर्नीचर रखना है, तो उसे हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा में ही रखें. भूलकर भी न रखें ये चीजें अक्सर लोग बालकनी को स्टोर रूम बना देते हैं, जो सबसे बड़ी गलती है. कबाड़ और टूटे बर्तन: बालकनी में पुराना सामान या कबाड़ रखने से 'राहु' का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है, जिससे मानसिक अशांति होती है. सूखे पौधे: अगर आपकी बालकनी में कोई पौधा सूख गया है, तो उसे तुरंत हटा दें. सूखे पौधे दुर्भाग्य और आर्थिक हानि का संकेत हैं. गंदगी: बालकनी जितनी साफ होगी, माता लक्ष्मी के आने का रास्ता उतना ही साफ होगा.

सोलर नववर्ष की शुरुआत: सूर्य के मेष राशि में प्रवेश से बदलेगा राशिफल

14 अप्रैल यानी आज से सोलर नववर्ष की शुरुआत हो चुकी है. ज्योतिषियों के अनुसार, हर साल जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, तभी सोलर न्यू ईयर की शुरुआत होती है. यह दिन नई ऊर्जा, नई शुरुआत और जीवन में सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है. भारत के कई हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे बैसाखी, पुथंडु और विशु. ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन सूर्य की स्थिति सभी राशियों पर गहरा प्रभाव डालती है, जिससे पूरे साल के संकेत मिलते हैं. आइए जानते हैं कि सोलर नववर्ष किन राशियों के लिए शुभ माना जा रहा है. मेष इस सोलर नव वर्ष में मेष राशि वालों के लिए समय काफी अनुकूल रहने वाला है. सूर्य आपकी ही राशि में मजबूत स्थिति में रहेगा, जिससे आपके अंदर आत्मविश्वास और लीडरशिप क्वालिटी बढ़ेगी. करियर में आपको अच्छे मौके मिल सकते हैं. कुछ लोगों को मनचाही नौकरी भी मिल सकती है. भाग्य का साथ मिलने से आपके कई अधूरे काम पूरे हो सकते हैं. इच्छाएं पूरी हो सकती हैं. मिथुन मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय नए अवसरों से भरा रहेगा. पिछले समय से चल रही परेशानियां धीरे-धीरे खत्म हो सकती हैं. किस्मत का साथ मिलने से अटके हुए काम पूरे होंगे. धन के मामले में भी स्थिति बेहतर रहेगी. पुराने निवेश से अच्छा फायदा मिलने की संभावना है. यह समय राहत और प्रगति देने वाला रहेगा. सिंह सोलर नव वर्ष की शुरुआत सिंह राशि वालों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकती है. आपकी मेहनत का फल आपको जरूर मिलेगा. भाग्य भी आपके पक्ष में रहेगा. जो लोग विदेश से जुड़े काम करते हैं, उन्हें लाभ मिल सकता है. पढ़ाई कर रहे छात्रों को भी सफलता मिल सकती है. परिवार में खुशियों का माहौल बना रहेगा. धनु राशि धनु राशि के लिए यह साल ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरा रहेगा. भाग्य का पूरा साथ मिलने से आपके काम आसानी से पूरे हो सकते हैं. जो लोग खेल या कला के क्षेत्र में हैं, उन्हें अच्छी पहचान मिल सकती है. कार्यक्षेत्र में आपके काम की तारीफ होगी. कुछ लोगों को प्रमोशन मिलने के योग भी बन रहे हैं. प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ने की संभावना है. क्या होता है सोलर नववर्ष? सोलर नववर्ष वह समय होता है जब सूर्य एक राशि चक्र पूरा करके फिर से मेष राशि में प्रवेश करता है. ज्योतिष में मेष राशि को शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे नए साल की शुरुआत कहा जाता है. इस दिन को मेष संक्रांति भी कहा जाता है. इस संक्रांति के आने से जातकों के जीवन में नई शुरुआत के योग बनते हैं. आत्मविश्वास बढ़ता है. निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है.