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वास्तु शास्त्र: पेड़ों को काटते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना घर में बढ़ सकता है वास्तु दोष

  घर बनवाना हो, बिजली की तारें टकरा रही हों, या बस आंगन में धूप कम आ रही हो हम अक्सर बिना सोचे-समझे कुल्हाड़ी उठा लेते हैं और बरसों पुराने पेड़ को काट गिराते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि नियमों को नजरअंदाज करना आपके घर की सकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर सकता है. वास्तु दोष का साया पूरे परिवार की सुख-शांति को प्रभावित कर सकता है. आभामंडल (Aura) और ऊर्जा का संतुलन वास्तु के अनुसार, हर जीवित वृक्ष का अपना एक आभामंडल होता है. जब आप बिना नियम के उसे काटते हैं, तो वह स्थान शोक की स्थिति में आ जाता है.  इसका सीधा असर घर के मुखिया के मानसिक स्वास्थ्य और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है. देव वृक्षों को काटने का महापाप पीपल, बरगद और गूलर को देव वृक्ष माना गया है. अगर ये दीवार या तारों को नुकसान पहुंचा रहे हों, तो भी इन्हें काटना भारी वास्तु दोष, पितृ दोष और संतान कष्ट का कारण बन सकता है.  अगर इन्हें हटाना जरुरी हो, तो विधि-विधान से पूजा के बाद ही यह कदम उठाएं. माफी और शुभ समय का चयन काटने से पहले पेड़ की गंध, पुष्प और नैवेद्य से पूजा करें.  तने को सफेद कपड़े से ढककर उस पर सफेद सूत लपेटें. पेड़ से प्रार्थना करें कि उस पर निवास करने वाले सूक्ष्म जीव दूसरे स्थान में शरण ले लें.  विशेष परिस्थितियों में पीपल काटना हो, तो चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी चुनें, लेकिन शनिवार, गुरुवार या रविवार से बचें. निषिद्ध दिन: भूलकर भी मंगलवार, शनिवार या अमावस्या को पेड़ न काटें. शुभ नक्षत्र: मृगशिरा, पुनर्वसु, अनुराधा, हस्त, मूल, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, स्वाति और श्रवण नक्षत्र पेड़ काटने के लिए उत्तम हैं. समय: सुबह का समय सबसे उपयुक्त है, दोपहर में पेड़ काटने से बचें. क्षतिपूर्ति: एक के बदले दस का नियम वास्तु शास्त्र में प्रकृति के ऋण का भुगतान अनिवार्य है.  यदि मजबूरी में एक पेड़ काटना पड़े, तो उस ऊर्जा के शून्य को भरने के लिए 10 नए पौधे लगाने होंगे. नियम तब पूरा माना जाता है जब वे पौधे फलने-फूलने लगें. दिशाओं का विशेष ध्यान ईशान कोण (North-East): यहां का पेड़ काटना अपनी किस्मत का दरवाजा बंद करने जैसा है. यह सात्विक ऊर्जा का द्वार है. दक्षिण दिशा (South): यहां के पेड़ हटाना तुलनात्मक रूप से सुरक्षित है. काटने की दिशा: पेड़ को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर से काटना शुरू करना चाहिए.

शनि के नक्षत्र परिवर्तन से बढ़ेगी चुनौतियां, इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान

अप्रैल 2026 में शनि एक अहम ज्योतिषीय बदलाव करने जा रहे हैं, जिसे नक्षत्र पद परिवर्तन कहा जाता है.17 अप्रैल को शाम करीब 4 बजे शनि उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश करेंगे. शनि पूरे 1 महीने इसी नक्षत्र में रेहेंगे. ज्योतिष में शनि को कर्म और न्याय का ग्रह माना जाता है, जो धीरे-धीरे चलते हुए लंबे समय तक असर डालते हैं. ऐसे में उनका यह बदलाव कई राशियों के जीवन में उतार-चढ़ाव ला सकता है, खासकर करियर, सेहत और रिश्तों पर. जानते हैं वो राशियां कौन सी हैं. मेष राशि मेष राशि के लोगों को इस समय संयम से काम लेने की जरूरत होगी. छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ सकते हैं, जिससे रिश्तों में खटास आ सकती है. जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेना नुकसानदायक हो सकता है, खासकर कानूनी या व्यापार से जुड़े मामलों में. स्वास्थ्य को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह है. कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए यह समय मेहनत और धैर्य की परीक्षा लेने वाला रहेगा. कार्यक्षेत्र में उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं मिलेगा, जिससे निराशा हो सकती है. सीनियर और जूनियर दोनों के साथ तालमेल बिगड़ सकता है. आर्थिक मामलों में भी सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत होगी. मीन राशि मीन राशि वालों के लिए यह समय भावनात्मक रूप से थोड़ा भारी रह सकता है. बेवजह की चिंताएं और मानसिक दबाव बढ़ सकते हैं.रिश्तों में जल्दबाजी या गलतफहमी नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए संयम जरूरी है. सेहत के मामले में लापरवाही न करें. क्यों खास है यह गोचर शनि का नक्षत्र पद परिवर्तन साधारण घटना नहीं माना जाता, क्योंकि इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है. यह बदलाव व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देता है. इस दौरान धैर्य, संयम और सोच-समझकर फैसले लेना बेहद जरूरी है. बिना सोचे समझे कदम उठाने से नुकसान बढ़ सकता है, जबकि शांत रहकर काम करने से स्थितियां धीरे-धीरे बेहतर हो सकती हैं.

अक्षय तृतीया पर प्रेमानंद महाराज ने बताया एक चीज का दान करने से भाग्य बदलने का उपाय

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को एक ऐसा दिन माना जाता है जिसका फल अक्षय (जिसका कभी क्षय न हो) होता है. इस साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी. लोग इस दिन भारी मात्रा में सोना-चांदी और कीमती सामान खरीदते हैं, लेकिन वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है. महाराज जी कहते हैं कि संसार की वस्तुएं तो नश्वर हैं, लेकिन इस पावन तिथि पर किया गया एक विशेष कार्य आपके लोक और परलोक दोनों को सुधार सकता है।  क्या है महाराज जी के अनुसार सबसे बड़ा दान? सत्संग के दौरान महाराज जी ने कहा कि अक्षय तृतीया पर हम अन्न, जल या धन का दान तो करते ही हैं, लेकिन नामजप का दान इन सबसे ऊपर है. अगर आपकी जिह्वा से निरंतर राधा-राधा या प्रभु का नाम निकल रहा है और वह ध्वनि किसी दुखी व्यक्ति के कान में पड़ती है, तो वह उसके जीवन का अंधेरा दूर कर सकती है.  यही सबसे बड़ा दान है।  महाराज जी के बताए 3 खास उपाय.  1. मौन का सहारा लें प्रेमानंद महाराज के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन व्यर्थ की बातों और विवादों से दूर रहकर मौन धारण करना बेहद उत्तम है.  मौन रहने से ऊर्जा इकट्ठा होती है, जिसे आप भगवान की भक्ति में लगा सकते हैं।  2. बाहर के जल और भोजन का त्याग महाराज जी एक विशेष सावधानी बताते हैं, इस दिन कोशिश करें कि बाहर का पानी भी ग्रहण न करें. अपने घर में ठाकुर जी को भोग लगाएं और वही प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें.  इससे आपकी बुद्धि और विचार शुद्ध रहते हैं।  3. नामजप की निरंतरता इस दिन आप जो भी मंत्र जपते हैं, उसका फल करोड़ों गुना होकर मिलता है. महाराज जी कहते हैं कि इस दिन जितना हो सके भगवान के नाम का कीर्तन करें, ताकि आपके आसपास का वातावरण भी सकारात्मक और भक्तिमय हो जाए।  सोना नहीं खरीद पा रहे? तो यह करें अगर आप आर्थिक कारणों से सोना या चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं, तो महाराज जी के अनुसार निराश होने की जरूरत नहीं है. इस दिन जौ खरीदना या दान करना भी सोने के समान फल देता है.  साथ ही, मिट्टी के घड़े में जल भरकर किसी प्यासे को पिलाना भी अक्षय पुण्य की श्रेणी में आता है। .

11 अप्रैल 2026 का राशिफल: मेष राशि में बढ़ेगी भागदौड़, सिंह और मकर को मिल सकता है मेहनत का पुरस्कार

मेष 11 अप्रैल के दिन कारोबार में तरक्‍की के योग हैं। मन में शांति एवं प्रसन्नता रहेगी। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। तरक्की के नए मार्ग खुलेंगे लेकिन आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए वॉक पर जाएं। वृषभ 11 अप्रैल के दिन कुछ लोगों के चिकित्सीय खर्च बढ़ सकते हैं। आत्मविश्वास से परिपूर्ण तो रहेंगे, परन्तु स्वभाव में चिड़चिडेपन का भाव आ सकता है। नौकरी में कार्यभार बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। मिथुन 11 अप्रैल के दिन माता के सहयोग से धन की प्राप्‍ति‍ होगी। स्वास्थ्‍य के प्रति सचेत रहें। खुद के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आकस्मिक धन की प्राप्‍ति‍ हो सकती है। आज आपके लिए ऑयली फूड्स से दूरी बनाना बेहतर रहेगा। कर्क 11 अप्रैल के दिन हाइड्रेटेड रहें। मन में शांति रहेगी। शिक्षा से जुड़े कामों में कठिनाइयां आ सकती हैं। वाहन के रख-रखाव पर खर्च बढ़ेंगे। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। सिंह 11 अप्रैल के दिन धैर्य बनाये रखने के प्रयास करें। कारोबार में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं। तुला 11 अप्रैल के दिन जीवनसाथी के स्वास्थ्‍य को लेकर परेशान हो सकते हैं। व‍िवादों से दूर रहें। आज खुद को स्ट्रेस से दूर रखें। मन में निराशा एवं असंतोष के भाव जाग सकते हैं। नौकरी में पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। धनु 11 अप्रैल के दिन कला या संगीत के प्रति रुझान बढ़ सकता है। अपने एमोशन्स को काबू में रखें। धर्म-कर्म में आपका मन लगेगा। मीठे खानपान में रुचि बढ़ेगी। फालतू के खर्च बढ़ेंगे। स्वास्थ्य की परेशानी अभी बनी रहेगी। मकर 11 अप्रैल के दिन वाणी में मधुरता बनी रहेगी। घर-परिवार की सुविधाओं के लिए खर्च बढ़ सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। वाहन एवं वस्त्रों के रख-रखाव पर खर्च बढ़ेंगे। परिवार का भरपूर साथ मिलेगा। कुम्भ 11 अप्रैल के दिन लग्जरी में बेफिजूल खर्च न करें। आज क्रोध से दूर रहें। व्यापारियों के लिए विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। इंकम में वृद्धि होगी। हेल्थ पर फोकस करें। कन्या 11 अप्रैल के दिन नौकरी में तरक्की के योग बन रहे हैं। किसी अतिथि का आगमन हो सकता है। तनाव से दूर रहें। भाइयों के सहयोग से कोई नया कारोबार शुरू कर सकते हैं। वृश्चिक 11 अप्रैल के दिन आज आपका कॉन्फिडेंस अलग ही लेवल पर रहेगा। आय में वृद्धि होगी, परन्तु कार्यभार बढ़ सकता है। गुस्सा करना आज ठीक नहीं है। दोस्तों का सहयोग मिलेगा। ध्यान रखें, परिवार में आपसी मतभेद हो सकते हैं। मीन 11 अप्रैल के दिन अपनी भावनाओं को वश में रखें। वाणी में मधुरता रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। लाइफ पार्टनर का साथ मिलेगा। आय में सुधार होगा। लाभ के नए अवसर मिल सकते हैं।

रात को किचन में जूठे बर्तन छोड़ना बढ़ा सकता है आर्थिक तंगी, मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए सोने से पहले अपनाएं ये 3 वास्तु नियम

  रसोईघर (Kitchen) को केवल भोजन पकाने का स्थान नहीं, बल्कि घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई का सीधा संबंध हमारी सेहत, सौभाग्य और आर्थिक स्थिति से होता है. कहते हैं कि जिस घर की रसोई में वास्तु के नियमों को माना जाता है, वहां मां लक्ष्मी और मां अन्नपूर्णा का हमेशा वास रहता है. अक्सर हम दिनभर की थकान के बाद रात को किचन को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही छोटी सी लापरवाही आपके घर की सुख-शांति को भंग कर सकती है. अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में कभी धन-धान्य की कमी न हो, तो सोने से पहले अपनी दिनचर्या में ये 3 छोटे लेकिन चमत्कारी बदलाव जरूर अपनाएं. 1. जूठे बर्तन अक्सर आलस के कारण लोग रात के जूठे बर्तन सिंक में ही छोड़ देते हैं, रात भर यूं ही गंदे पड़े रहने के बाद सुबह उन्हें साफ किया जाता है. वास्तु शास्त्र में इसे बहुत बड़ा दोष माना गया है. रात भर सिंक में पड़े जूठे बर्तन नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच तनाव और बीमारियां बढ़ती हैं. शास्त्रों के अनुसार, इससे राहु का अशुभ प्रभाव भी बढ़ता है जो आर्थिक तंगी का कारण बनता है.  इसलिए, सोने से पहले बर्तनों को साफ जरूर करें. यदि संभव न हो, तो उन्हें कम से कम पानी से धोकर किचन से बाहर रखें. 2. चूल्हे की सफाई किचन का चूल्हा अग्नि का प्रतीक है और अग्नि ऊर्जा का स्रोत होती है. दिन भर खाना बनाने के बाद चूल्हे पर गिरे खाने के दाने या गंदगी नकारात्मकता को आकर्षित करती है. वास्तु के अनुसार, गंदे चूल्हे पर अगली सुबह खाना बनाने से घर की बरकत रुक जाती है. रात को सोने से पहले चूल्हे और गैस स्टोव के आसपास के प्लेटफॉर्म को अच्छी तरह पोंछकर साफ करें. एक साफ और चमकता हुआ चूल्हा इस बात का संकेत है कि आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा, परिवार का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा. 3. रोशनी का महत्व वास्तु के अनुसार, घर का कोई भी हिस्सा पूरी तरह अंधेरे में नहीं होना चाहिए, खासकर रसोई. बहुत से लोग काम खत्म होते ही किचन की लाइट बंद कर देते हैं. लेकिन, पूरी तरह अंधेरी रसोई घर में डर और नकारात्मकता का संचार करती है. सोने से पहले किचन के एक कोने में एक छोटा बल्ब (Zero Watt Bulb) जलता रहने दें. रसोई में हल्की रोशनी होने से सकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती हैं , इससे घर में सुख-समृद्धि के द्वार खुले रहते हैं. पानी से भरी बाल्टी का जादू वास्तु के जानकारों का यह भी मानना है कि रात को किचन की सफाई करने के बाद वहां एक बाल्टी या बर्तन में स्वच्छ पानी भरकर रखना चाहिए. यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो कर्ज (Debt) की समस्या से जूझ रहे हैं. माना जाता है कि रसोई में भरा हुआ पानी रखने से मानसिक शांति मिलती है, धन लाभ के नए रास्ते खुलते हैं.

सफलता पाने के लिए बगुले से सीखें ये खास गुण, स्थान और अपनी शक्ति का सही अंदाजा लगाकर ही शुरू करें कोई भी नया कार्य

महान विद्वान चाणक्य ने अपनी किताब चाणक्य नीति में जीवन से जुड़ी कई अहम बातों का जिक्र किया है. उनकी नीतियों को आज भी लोग सफलता का रास्ता मानते हैं. कहा जाता है कि जो व्यक्ति उनकी बातों को अपनाता है, वह अपने जीवन में आगे बढ़ सकता है. चाणक्य ने सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि जानवरों और पक्षियों के गुणों के बारे में भी विस्तार से बताया है. उनका मानना था कि प्रकृति में मौजूद हर जीव से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. उन्होंने बताया कि कुछ जानवरों के खास गुण ऐसे होते हैं, जिन्हें अगर इंसान अपनी जिंदगी में उतार ले, तो उसे सफलता हासिल करने में मदद मिल सकती है. उन्हीं में से एक बगुला. इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत्पण्डितो नरः । देशकाल बलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत् ।। आचार्य चाणक्य बगुले के जरिए एक बहुत जरूरी सीख दे रहे हैं. बगुला जब शिकार करता है, तो वह पूरी तरह शांत और एकाग्र होकर खड़ा रहता है. उसका ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य यानी मछली पर होता है. वह जल्दबाजी नहीं करता, बल्कि सही समय का इंतजार करता है. जैसे ही मौका मिलता है, तुरंत उसे पकड़ लेता है. इसी तरह इंसान को भी अपने काम में पूरा फोकस रखना चाहिए. कार्यों पर रखें फोकस आचार्य चाणक्य आगे कहते हैं कि इंसान को भी अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान लगाना चाहिए. अगर हम बार-बार ध्यान भटकाते हैं या बिना सोचे-समझे जल्दबाजी करते हैं, तो सफलता मिलना मुश्किल हो जाता है. धैर्य के साथ सही समय का इंतजार करना और मौके को पहचानना बहुत जरूरी होता है. काम शुरू करने से पहले इन चीजों पर दें ध्यान देश (स्थान)- जहां आप काम कर रहे हैं, वहां उसका कितना फायदा होगा और उसकी जरूरत कितनी है, यह समझना जरूरी है. काल (समय)- कौन-सा समय उस काम के लिए सही है, यह जानना चाहिए. बल (शक्ति)- अपनी क्षमता, पैसे और संसाधनों का सही अंदाजा लगाना भी जरूरी है.

परशुराम जयंती की तारीख को लेकर उलझन हुई दूर, 19 अप्रैल को प्रदोष काल में मनेगा जन्मोत्सव और यह है पूजा का शुभ मुहूर्त

 हर साल की तरह इस बार भी परशुराम जयंती की तारीख को लेकर लोगों में बना रहता है. इस बार कुछ लोग 19 अप्रैल को मनाने बात कर रहे हैं और कुछ लोग 20 अप्रैल को. क्योंकि उसी दिन अक्षय तृतीया का पर्व है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर परशुराम जयंती की सही तारीख क्या है? हिंदू पंचांग के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था, जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भगवान परशुराम का जन्म संध्या काल यानी प्रदोष काल में हुआ था. द्रिक पंचांग के मुताबिक, तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा. ऐसे में परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी. द्रिक पंचांग के अनुसार, परशुराम जयंती पर पूजन का समय 19 अप्रैल को शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. कैसे मनाएं परशुराम जयंती? इस पावन अवसर पर आप घर पर ही सरल तरीके से पूजा कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान परशुराम की तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद गंगाजल या साफ जल से छिड़काव कर स्थान को पवित्र करें. फिर भगवान को तिलक लगाएं, अक्षत अर्पित करें और फूल या माला चढ़ाएं. दीपक जलाकर आरती करें और फल, मिठाई या नारियल का भोग लगाएं. अंत में अपनी मनोकामनाओं के लिए भगवान से प्रार्थना करें. पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और आसपास के लोगों में बांटना शुभ माना जाता है. परशुराम जयंती से मिलने वाले लाभ परशुराम जयंती के दिन भगवान परशुराम की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से उपासना करने पर व्यक्ति के जीवन में साहस और पराक्रम बढ़ता है. साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और मन को शांति मिलती है. मान्यता है कि इस पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कठिन से कठिन कार्यों को पूरा करने की क्षमता भी मिलती है.

वास्तु के ये 5 नियम बदल देंगे आपकी किस्मत, सुबह और शाम की इन गलतियों को सुधारने से घर में आएगी सुख और समृद्धि

  वास्तु शास्त्र में सुबह और शाम के समय को घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का सबसे खास वक्त माना गया है. हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि घर की बरकत केवल अच्छी कमाई से नहीं, बल्कि सही आदतों से आती है. अक्सर हम अनजाने में सुबह उठने या शाम के वक्त कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे घर में दरिद्रता आने लगती है. अगर आप भी महसूस करते हैं कि मेहनत के बाद भी पैसा नहीं टिक रहा या घर में तनाव रहता है, तो आपको अपनी दिनचर्या के इन 5 वास्तु नियमों पर ध्यान देने की जरूरत है. 1. सुबह देर तक सोना सूर्योदय के बाद भी देर तक सोते रहना स्वास्थ्य और सौभाग्य दोनों के लिए बुरा माना जाता है. वास्तु के अनुसार, जो लोग सुबह देर तक सोते हैं, उनके घर में नकारात्मकता बढ़ती है, ऐसे घरों में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता. कोशिश करें कि सूर्योदय से पहले या साथ उठें. 2. शाम को झाड़ू लगाना शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय यानी सूर्यास्त के वक्त घर में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए. माना जाता है कि शाम को झाड़ू लगाने से घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है. अगर झाड़ू लगाना बहुत जरूरी हो, तो कूड़ा घर के बाहर न फेंकें, उसे एक कोने में इकट्ठा कर दें. 3. सूर्यास्त के समय सोना शाम के समय सोना वर्जित माना गया है. जो लोग गोधूलि वेला (शाम के वक्त) में सोते हैं, उन्हें शारीरिक बीमारियां घेर सकती हैं . घर में दरिद्रता आती है. यह समय पूजा-पाठ और ध्यान का होता है, न कि सोने का. 4. मुख्य द्वार पर अंधेरा रखना शाम होते ही घर के मुख्य द्वार पर रोशनी जरूर करनी चाहिए. अंधेरा दरवाजा नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करता है. प्रवेश द्वार पर दीपक या बल्ब जलाकर रखने से मां लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं, जिससे व्यापार व करियर में तरक्की होती है. 5. तुलसी के पास गंदगी या अंधेरा सुबह-शाम तुलसी की देखभाल बहुत जरूरी है. शाम को तुलसी के पास दीपक जरूर जलाएं, लेकिन याद रखें कि सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्तों को कभी न छुएं और न ही जल चढ़ाएं. तुलसी के आसपास गंदगी रखना भी धन हानि का बड़ा कारण बनता है.

शुक्र और शनि के मिलन से बना दुर्लभ दशांक योग, आज से अगले 48 घंटे इन 3 राशियों के लिए खुलेंगे बंद किस्मत के ताले

  ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को ऐश्वर्य, सुख-सुविधा और विलासिता का कारक माना जाता है, वहीं शनि देव कर्म, अनुशासन और न्याय के अधिपति हैं. जब इन दो महत्वपूर्ण ग्रहों के बीच विशेष दृष्टि संबंध बनता है, तो यह राजयोग के जैसा शक्तिशाली फल मिलने लगता है. ज्योतिष गणना के अनुसार, जब शुक्र और शनि एक-दूसरे से दशम भाव (10th House) में स्थित होते हैं या उनके बीच 36 डिग्री की विशेष दूरी होती है, तो इसे दशांक दृष्टि या दशांक योग कहा जाता है.   10 अप्रैल को बना महासंयोग: 48 घंटे रहेंगे बेहद खास आज 10 अप्रैल 2026 को यह दुर्लभ दशांक योग सुबह ही बन चुका है. आज सुबह 04:39 बजे शुक्र और शनि एक-दूसरे से ठीक 36 डिग्री के विशेष कोण पर आए, जिससे इस शुभ योग की शुरुआत हुई. इस खगोलीय घटना का सबसे तीव्र और सीधा असर अगले 48 घंटों तक बना रहेगा. यह समय आर्थिक निवेश, नए व्यावसायिक समझौतों और करियर से जुड़े बड़े फैसले लेने के लिए बेहद शुभ है. विशेष रूप से तीन भाग्यशाली राशियों के लिए यह योग दरिद्रता दूर करने वाला और बंद किस्मत के ताले खोलने वाला साबित होगा. इन 3 राशियों पर होगी धन की वर्षा वृषभ राशि (Taurus): आपकी राशि के स्वामी शुक्र हैं.  शनि आपके भाग्य भाव के स्वामी हैं. इस योग के कारण व्यापार में बड़ा मुनाफा होगा. अगर आप नया घर या गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह समय सबसे उत्तम है. तुला राशि (Libra): आपके लिए यह योग करियर में बड़ी छलांग लगाने वाला साबित होगा. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और वेतन वृद्धि की खुशखबरी मिल सकती है.  आपकी लाइफस्टाइल में बड़ा सकारात्मक बदलाव आएगा. कुंभ राशि (Aquarius): शनि आपकी ही राशि के स्वामी हैं. शुक्र की कृपा से आपको पैतृक संपत्ति से लाभ मिल सकता है. जो जातक कला, मीडिया या फैशन जगत से जुड़े हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है. सुख-समृद्धि के लिए करें ये उपाय दशांक योग का पूर्ण लाभ लेने के लिए शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी को सफेद मिठाई का भोग लगाएं. साथ ही, शनिवार को गरीबों को काले चने या वस्त्र दान करें.  इससे शनि और शुक्र दोनों ग्रह मजबूत होंगे. जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी.

मेष राशि में 14 अप्रैल को सूर्य का महागोचर, उच्च अवस्था में आकर चमकाएंगे कई राशियों का भाग्य और कुछ के लिए बढ़ेगी मुश्किल

 सूर्य महाराज 14 अप्रैल 2026 को मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव मेष राशि में उच्च अवस्था में होते हैं और इसके अधिपति देव मंगल ग्रह हैं. ऐसा माना जाता है कि मेष राशि में सूर्य देव उच्च अवस्था में होते हैं इसलिए हम कह सकते हैं कि इस राशि में सूर्य ग्रह बहुत शक्तिशाली स्थिति में होते हैं. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को उग्र ग्रह माना जाता है और जब यह मेष राशि में स्थित होते हैं. मेष राशि में सूर्य के आने से जातकों की बुद्धि तेज होती है. कई विषयों का अच्छा ज्ञान भी होता है. सूर्य मेष राशि में होने पर जातक योद्धा, सरकार से जुड़े क्षेत्रों जैसे सेना और पुलिस आदि में नेतृत्व संबंधित भूमिकाओं में सफलता प्राप्त करते हैं. ज्योतिषियों की मानें तो, सूर्य का यह गोचर कई राशियों के लिए अशुभ भी रहेगा. आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में. वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य देव का यह गोचर बारहवें भाव में होने जा रहा है. जीवन में समस्याएं आ सकती हैं. करियर में सफलता पाने के लिए अनेक बार प्रयास करने पड़ सकते हैं. बेकार की यात्राएं करनी पड़ सकती हैं. काफी धन खर्च हो सकता है. माता की सेहत आपके लिए चिंता का विषय हो सकती है. कुछ परिस्थितियों में अपने घर से दूर रहना पड़ सकता है. सरकार या प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. सेहत का ख्याल रखना होगा. कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रह बारहवें भाव में गोचर करने जा रहे हैं. इस दौरान किसी नियम का उल्लंघन न करें. किसी भी तरह की गलती से बचना होगा. स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. आपको सावधानी बरतने और समझदारी से काम लेना होगा. आर्थिक नुकसान हो सकता है. तुला राशि तुला राशि वालों के लिए सूर्य का गोचर ग्यारहवें भाव में होगा. आपके रिश्ते में समस्याएं पैदा कर सकती हैं. अहंकार से जुड़े विवाद आपके रिश्तों में तनाव पैदा कर सकते हैं. आपके लिए धैर्य और समझदारी से काम लेना जरूरी होगा. आपको यात्रा के दौरान परेशानियां हो सकती हैं. व्यापार में भी कठिनाई का अनुभव हो सकता है. पेशेवर जीवन में अगर आप सतर्क रहकर काम करेंगे, तो आपको धन लाभ हो सकता है. मानसिक तनाव हो सकता है.