samacharsecretary.com

चाणक्य नीति के अनुसार: जो माता-पिता करते हैं ये 5 काम, उनकी संतान जरूर पाती है बड़ा मुकाम

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान जीवन में सफल बने, सम्मान पाए और एक मजबूत इंसान के रूप में अपनी पहचान बनाए। इसके लिए केवल अच्छी पढ़ाई या पैसा ही काफी नहीं होता, बल्कि सही परवरिश, मजबूत संस्कार और सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले संतान के पालन-पोषण को ले कर ऐसे स्पष्ट और व्यवहारिक सूत्र बताए, जो आज भी उतने ही उपयोगी हैं। यदि आप इन बातों को अपने जीवन में अपनाते हैं तो आप अपने बच्चे को केवल सफल ही नहीं बल्कि एक बेहतर इंसान भी बना सकते हैं। चलिए जानते है आचार्य चाणक्य द्वारा बताए गए ये सूत्र क्या है। शुरुआत से ही संस्कार और अनुशासन सिखाएं आचार्य चाणक्य के अनुसार बच्चे के जीवन के पहले पांच वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस समय आपको उसे भरपूर प्रेम देना चाहिए। प्यार से बच्चा भावनात्मक रूप से मजबूत बनता है और उसके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके बाद अगले दस वर्षों में उसे अनुशासन सिखाएं। उसे सही और गलत का अंतर समझाएं। नियमों का महत्व बताएं और जिम्मेदारी लेना सिखाएं। जब बच्चा सोलह वर्ष का हो जाए, तो उसके साथ मित्र जैसा व्यवहार करें। उस पर हुक्म चलाने के बजाय उसे समझें, उसकी बात सुनें और मार्गदर्शन दें। इससे वह आपसे खुलकर बात करेगा और गलत रास्ते पर जाने की संभावना कम होगी। शिक्षा को सबसे बड़ा धन मानें चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान सबसे बड़ा धन है, जिसे कोई चुरा नहीं सकता। इसलिए केवल स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान देना काफी नहीं है। अपने बच्चे को जीवन से जुड़ी बातें भी सिखाएं। उसे समझाएं कि कैसे सही निर्णय लेना है, कैसे लोगों से व्यवहार करना है और कठिन परिस्थिति में कैसे शांत रहना है। उसे सवाल पूछने दें और उसकी सोचने की क्षमता बढ़ाएं। जब बच्चा समझदारी से फैसले लेना सीख जाता है, तब वह जीवन में आगे बढ़ता है और गलतियों से भी सीखता है। बच्चे के चरित्र निर्माण पर ध्यान दें धन, पद और शोहरत समय के साथ बदल सकते हैं लेकिन चरित्र जीवनभर साथ रहता है। इसलिए बचपन से ही बच्चे में सच्चाई, ईमानदारी और मेहनत की आदत डालें। उसे बताएं कि गलत रास्ते से मिली सफलता टिकाऊ नहीं होती। जब बच्चा सच बोलने और सही काम करने की आदत डाल लेता है, तो वह हर परिस्थिति में मजबूत बना रहता है। आप खुद भी अपने व्यवहार से उदाहरण पेश करें क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। संगति पर नजर रखें बच्चा किन लोगों के साथ समय बिताता है, इसका उसके स्वभाव और सोच पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए उसकी संगति पर ध्यान देना जरूरी है। उसे अच्छे दोस्तों का महत्व समझाएं। यदि आप देखें कि वह गलत संगति में जा रहा है, तो डांटने के बजाय प्यार से समझाएं। उसके मित्रों को जानने की कोशिश करें और ऐसा माहौल बनाएं कि वह आपसे हर बात साझा कर सके। अच्छी संगति बच्चे को आगे बढ़ाती है और उसे सही दिशा देती है। आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है अत्यधिक लाड़-प्यार बच्चे को कमजोर बना सकता है। आप अपने बच्चे को हर छोटी समस्या से बचाने के बजाय उसे समस्याओं का सामना करना सिखाएं। उसे छोटे-छोटे निर्णय खुद लेने दें। जब वह गलती करे तो उसे समझाएं, लेकिन हर बार उसकी जगह खुद फैसला ना लें। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार होगा। आत्मनिर्भर बच्चा ही आगे चलकर मजबूत और सफल इंसान बनता है।

मनी प्लांट भी फेल! इस पौधे को सही दिशा में लगाते ही बढ़ने लगती है धन-दौलत

वास्तु शास्त्र में पेड़-पौधों का विशेष महत्व बताया गया है। अक्सर लोग सुख-समृद्धि के लिए घर में 'मनी प्लांट' लगाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा पौधा भी है जिसे मनी प्लांट से भी ज्यादा शक्तिशाली और 'धन खींचने वाला' माना जाता है? इस पौधे का नाम है क्रसुला, जिसे कुबेर पौधा या जेड प्लांट भी कहा जाता है। क्रसुला का पौधा अपनी मोटी, मखमली और गहरे हरे रंग की पत्तियों के लिए जाना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह पौधा घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने में जादुई भूमिका निभाता है। जैसे चुंबक लोहे को अपनी ओर खींचता है, वैसे ही यह पौधा सकारात्मक ऊर्जा और धन के आगमन के रास्ते खोलता है। सही दिशा का महत्व     वास्तु शास्त्र में किसी भी चीज का पूरा लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दिशा में रखा जाए।     पौराणिक मान्यताओं और वास्तु के नियमों के मुताबिक, क्रसुला के पौधे को घर के मुख्य द्वार के दाईं ओर रखना सबसे शुभ माना जाता है।     अगर आप इसे मुख्य द्वार पर रखते हैं, तो यह नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है।     इसे ऑफिस की डेस्क पर रखने से व्यापार में उन्नति और पदोन्नति के योग बनते हैं।     धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पौधे को कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे विपरीत परिणाम मिल सकते हैं। देखभाल में है बहुत आसान     इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत अधिक देखभाल की जरूरत नहीं होती।     इसे रोजाना पानी देने की आवश्यकता नहीं है। हफ्ते में दो या तीन बार पानी देना पर्याप्त है।     यह पौधा छाया में भी अच्छी तरह पनपता है, इसलिए इसे घर के अंदर आसानी से रखा जा सकता है।     इसकी पत्तियां जितनी हरी-भरी रहती हैं, घर में उतनी ही सुख-शांति बनी रहती है। वास्तु के अनुसार, मुरझाया हुआ या सूखा पौधा तुरंत हटा देना चाहिए क्योंकि यह प्रगति में बाधा डालता है। आर्थिक तंगी से छुटकारा अगर आप लंबे समय से कर्ज या पैसों की किल्लत से जूझ रहे हैं, तो क्रसुला का पौधा एक उम्मीद की किरण बन सकता है। प्राचीन शास्त्रों में वर्णित प्रकृति के नियमों के आधार पर, यह पौधा न केवल धन को आकर्षित करता है बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य भी बढ़ाता है।  

घर की तरक्की रोक सकती हैं बालकनी में रखी ये वस्तुएँ

वास्तु शास्त्र में बालकनी को घर की ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। यहीं से सूर्य प्रकाश, वायु और ब्रह्मांडीय ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण और वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि बालकनी में गलत वस्तुएं रख दी जाएं, तो इससे नकारात्मक ऊर्जा, धन हानि, मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह बढ़ सकती है। वास्तु शास्त्र केवल निर्माण का नियम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित करने का विज्ञान है। यदि बालकनी को स्वच्छ, हल्का और सकारात्मक रखा जाए तो घर में सुख, शांति और समृद्धि निश्चित रूप से आती है। आइए जानते हैं कौन-सी चीजें बालकनी में भूलकर भी नहीं रखनी चाहिए। बालकनी में पुराने फर्नीचर, टूटी कुर्सियां, खराब गमले या बेकार सामान रखना दरिद्र योग को जन्म देता है। इससे लक्ष्मी का वास नहीं होता और आर्थिक संकट बढ़ता है। कूड़ेदान या गंदगी बालकनी में कचरा रखना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है। यह घर में नकारात्मक ऊर्जा और बीमारियों को आकर्षित करता है। गरुड़ पुराण में गंदगी को दुर्भाग्य का कारण बताया गया है। लोहे के भारी औज़ार या हथियार बालकनी में हथौड़ा, रॉड, एक्सरसाइज़ इक्विपमेंट या लोहे का भारी सामान रखने से झगड़े, क्रोध और मानसिक अशांति बढ़ती है। कांटेदार या सूखे पौधे कैक्टस, सूखे पौधे या मुरझाए फूल वास्तु में अशुभ माने गए हैं। ये रिश्तों में तनाव और नकारात्मक विचार बढ़ाते हैं। बालकनी में हमेशा हरे और जीवित पौधे ही रखें। गीले कपड़े या कपड़ों का ढेर बालकनी में लंबे समय तक गीले कपड़े टांगे रखना चंद्र दोष और मानसिक तनाव को बढ़ाता है। यह घर की सकारात्मक तरंगों को रोकता है। बंद और अंधेरी बालकनी अगर बालकनी हमेशा बंद या अंधेरी रहती है तो सूर्य ऊर्जा का प्रवेश रुक जाता है, जिससे अवसाद और आलस्य बढ़ता है। प्रतिदिन कुछ समय बालकनी खुली रखें। बालकनी में क्या रखें (शुभ वस्तुएं) तुलसी, मनी प्लांट, एलोवेरा, हल्का और साफ फर्नीचर, विंड चाइम, मिट्टी या पीतल का दीपक (शाम को)

05 मार्च 2026 का राशिफल: मेष से मीन तक सभी राशियों का भविष्य, जानें किसके लिए होगा लाभकारी दिन

आज का राशिफल मेष आज के दिन की स्थिति कुछ न कुछ मुश्किलें देने वाली हो सकती हैं, किसी न किसी बात को लेकर घर पर भी कुछ मतभेद बने रह सकते हैं जिन्हें सुलझाना आसान नहीं होगा। आप अपने काम के चलते कुछ यात्रा भी कर सकते हैं जो शायद अभी खर्च और थकान ही बढ़ाने वाली हैं।     करियर – काम के लिहाज से आज के दिन की स्थिति आप को कई मायनों में एक छिपा हुआ कंपटीशन देने वाली है यानी के लोग विरोध में सामने न हों लेकिन पीठ पीछे काफी कुछ चल रहा होगा। कारोबार को लेकर ध्यान से सौदे करने की जरूरत है।     फाइनेंस – पैसों को लेकर आज का दिन आपको खर्च की अधिकता देने वाला है। आप कुछ चीजों की खरीदारी कर सकते हैं।     लव लाइफ – प्यार भरे रिश्ते इस समय होकते हैं किसी दूसरे के चलते विवाद या तनाव का शिकार।     हेल्थ – सेहत के मामले में इस दौरान शरीर में दर्द बुखार या अन्य कोई परेशानी उभर सकती है। आज का राशिफल वृष वृषभ राशि वालों के लिए काम के साथ-साथ इस समय कुछ बदलाव का भी मौका होगा, घर को सजाने या उसमें कुछ चेंज करने की कोशिशें भी अच्छी रहने वाली हैं। इस समय घर पर दोस्तों के आने से अलग ही रौनक लगने वाली है।     करियर – काम के लिहाज से आज आप अपने रचनात्मक पक्ष में ज्यादा अच्छे रहने वाले हैं। इस दौरान आप के काम में कुछ नवीनता दिखाई दे सकती है। इस समय के दौरान काम या किसी सौदे को लेकर यात्रा भी हो सकती है।     फाइनेंस – आर्थिक स्थिति की अगर बात करें तो ये समय आपको कुछ अपने ऊपर होने वाले खर्च की स्थिति को अधिक दिखा रहा है।     लव लाइफ – प्रेम संबंध इस समय काफी बातों के चलते रहेंगे आप के लिए कमजोर क्योंकि कोई न कोई शक या संदेह दिलों में ला सकता है दूरी का असर।     हेल्थ – स्वास्थ्य के मामले में इस सप्ताह आप छोटी छोटी बातों से हो सकते से परेशान जिससे दिक्कत हो सकती हैं।   आज का राशिफल मिथुन मिथुन राशि वालों के लिए आज के दिन की स्थिति रह सकती है कुछ मामलों में उलझनों से भरी हुई। घर पर कुछ काम आप के ध्यान को कर सकते हैं भ्रमित। इस दौरान बच्चों को लेकर उनकी पढ़ाई से संबंधित बातचीत होगी जिसमें आप उनके लिए एक अच्छे मार्गदर्शक बनेंगे।     करियर – कामकाज की अगर बात की जाए तो इस समय कुछ पुरानी बातें या यादें मन पर डाल सकती हैं अपना प्रभाव। इस समय के दौरान लगातार कामकाज में लगे रहना आपको अपने आस पास के माहौल से भी दूर ले जाने वाला हो सकता है।     फाइनेंस – आर्थिक स्थिति के मामले में दिन रहेगा कुछ दोस्तों के साथ खर्चीला या फिर किसी भाई बंधु के लिए खरीदारी भी हो सकती है।     लव लाइफ – प्रेम संबंधों की अगर बात की जाए तो इस समय आप अचानक से किसी से मिल सकते हैं या बातचीत आगे बढ़ सकती है।     हेल्थ – सेहत की स्थिति सामान्य रहने वाली है, लेकिन किसी खेलकूद में चोट न लगे इस बात का रखें ख्याल।   आज का राशिफल कर्क कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन कुछ आत्मविश्वास को देने वाला रह सकता है। आप अपने कामों को लेकर भी सक्रिय रहेंगे, लेकिन किसी पारिवारिक विषय को लेकर मन थोड़ा बेचैन हो सकता है। आज शांत रहते हुए मेहनत करते रहना आपके लिए बेहद आवश्यक रहेगा।     करियर – कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। यदि आप नौकरी में हैं तो अधिकारी आपके काम की सराहना कर सकते हैं, लेकिन अपेक्षाएं भी बढ़ेंगी। व्यापार से जुड़े लोगों को किसी पुराने संपर्क से लाभ मिल सकता है। निर्णय सोच-समझकर लें, जल्दबाज़ी नुकसान दे सकती है।     फाइनेंस – आर्थिक स्थिति स्थिर रहने वाली है, किसी जरूरी घरेलू खर्च के कारण बजट थोड़ा प्रभावित हो सकता है।     लव लाइफ – दांपत्य जीवन में आज के दिन एक दूसरे को समय कम ही दे पाते हैं, प्रेम संबंधों में उन बातों से परेशान न हों जो किसी बाहरी व्यक्ति के कारण प्रभावित हो रही है।     हेल्थ – स्वास्थ्य अच्छा रहेगा असर पर यात्रा के दौरान कुछ दर्द की शिकायत बढ़ सकती है।   आज का राशिफल सिंह सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन काम के साथ साथ घर के लोगों के साथ समय बिताने वाला देगा। परिवार और काम दोनों के बीच संतुलन भी बना सकते हैं। किसी महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर परिवार में चर्चा हो सकती है, जिसमें आपकी राय अहम होगी।     करियर – काम के मामले में आपकी मेहनत रंग ला सकती है। लंबे समय से अटका हुआ काम आज आगे बढ़ सकता है। व्यवसाय में साझेदारी से लाभ मिलने की संभावना है। सहकर्मियों के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाएं।     फाइनेंस – आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें वैसे तो आय के नए स्रोत बनने की संभावना है, लेकिन खर्च भी बढ़ सकते हैं।     लव लाइफ – रिश्तों में आज के दिन घर परिवार की जिम्मेदारी ही बहुत अधिक रहने वाली है, जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।     हेल्थ – स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, खानपान में लापरवाही न करें। गले या सर्दी-जुकाम की हल्की समस्या हो सकती है।   आज का राशिफल कन्या कन्या राशि वालों के लिए आज का दिन अपने ही अनुसार काम करने की इच्छा को बढ़ा सकता है। इस समय घर पर किसी के साथ बातचीत में बहस बढ़ सकती है, इसलिए जितना हो सके आज के दिन आपने स्वभाव में अड़ियल रुख न अपनाएं।     करियर – कार्यक्षेत्र में पुरानी बातें या अनुभव आपके फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। आप किसी नए काम में शामिल होने की इच्छा तो रखेंगे लेकिन इसमें आगे बढ़ना मुश्किल रह सकता है।     फाइनेंस – आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन मित्रों के साथ बाहर जाना या किसी रिश्तेदार के लिए खरीदारी करने से खर्च बढ़ सकता … Read more

Hanuman Chalisa Rules: गलत समय पर पाठ करने से हो सकता है नुकसान, जानें सही समय

नई दिल्ली हनुमान चालीसा हिंदू धर्म में सबसे प्रभावशाली और फलदायी स्तोत्रों में से एक है। नियमित पाठ से भय, रोग, शत्रुता, आर्थिक संकट और ग्रह पीड़ा दूर होती है। बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। लेकिन शास्त्रों में इसके पाठ से जुड़े कुछ सख्त नियम भी बताए गए हैं। कुछ विशेष समय और अवस्थाओं में हनुमान चालीसा का पाठ करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। आइए जानते हैं उन समयों के बारे में, जब हनुमान चालीसा का पाठ गलती से भी नहीं करना चाहिए। दोपहर के समय हनुमान चालीसा का पाठ क्यों नहीं करना चाहिए हनुमान चालीसा का पाठ दोपहर के समय वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि दोपहर में हनुमान जी विभीषण को दिए गए वचन के अनुसार, लंका चले जाते हैं। इस समय उनकी उपस्थिति नहीं रहती है। इसलिए दोपहर में पाठ करने से इच्छित फल नहीं मिलता, बल्कि विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। ब्रह्म मुहूर्त, सूर्योदय या संध्या काल में हनुमान चालीसा का पाठ सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इन समयों में पाठ करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं। मासिक धर्म के समय पाठ से बचें महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में इस अवस्था को शारीरिक और मानसिक विश्राम का समय बताया गया है। इस दौरान पूजा-पाठ और मंत्र जप से दूर रहने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से महिला के शरीर और मन को आराम मिलता है। इस अवधि में पाठ करने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। मासिक धर्म समाप्त होने के बाद शुद्ध होकर पाठ शुरू करें। मृत्यु के समय हनुमान चालीसा का पाठ ना करें घर में किसी की मृत्यु होने पर हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। मृत्यु के बाद परिवार पर शोक और अशौच की स्थिति होती है। इस समय धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पूजा-पाठ को कुछ समय के लिए बंद कर दिया जाता है। शोक काल समाप्त होने और शुद्धि संस्कार के बाद ही पाठ शुरू करना चाहिए। मृत्यु के समय पाठ करने से आत्मा की शांति में बाधा आ सकती है और परिवार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बच्चे के जन्म के समय पाठ से दूर रहें जब घर में किसी बच्चे का जन्म होता है, तो हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। जन्म के बाद कुछ दिनों तक परिवार पर सूतक माना जाता है। यह समय नवजात और माता की देखभाल के लिए होता है। इस अवधि में पूजा-पाठ को कुछ समय के लिए बंद कर देना चाहिए। सूतक समाप्त होने और शुद्ध होने के बाद ही पाठ शुरू करें। ऐसा करने से नवजात का स्वास्थ्य और परिवार की शांति बनी रहती है। हनुमान चालीसा का सही समय और लाभ हनुमान चालीसा का पाठ मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में करना विशेष रूप से फलदायी होता है। इन समयों में पाठ करने से भय, रोग, शत्रुता और ग्रह पीड़ा दूर होती है। नियमों का पालन करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। नियमित पाठ से आत्मविश्वास, साहस और सफलता मिलती है। गलत समय में पाठ करने से विपरीत प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए समय का विशेष ध्यान रखें। हनुमान चालीसा का पाठ श्रद्धा और नियमों के साथ करें। सही समय पर पाठ करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

इस बार बदलेगा पंचांग का गणित: 12 नहीं, 13 महीनों वाला होगा हिंदू नववर्ष 2026

नई दिल्ली Adhik Maas 2026 : वर्ष 2026 आध्यात्मिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा, जिसके कारण साल में 12 के बजाय कुल 13 महीने होंगे। 17 मई से 15 जून 2026 तक की इस अतिरिक्त अवधि को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाएगा। खगोलीय विज्ञान और अधिक मास का आधार अधिक मास का सीधा संबंध सूरज और चंद्रमा की चाल के बीच के अंतर को पाटने से है। वैज्ञानिक रूप से देखें तो एक चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का। हर साल इन दोनों के बीच करीब 11 दिनों का फासला रह जाता है। जब यह अंतर बढ़ते-बढ़ते 30 दिनों के बराबर हो जाता है, तब पंचांग में संतुलन बनाए रखने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी गणितीय गणना के कारण 2026 में ज्येष्ठ का महीना दो बार पड़ रहा है।   पौराणिक कथा और पुरुषोत्तम नाम की महिमा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी नहीं था, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम 'पुरुषोत्तम' देकर इसे अत्यंत पवित्र बना दिया। इसी मास का संबंध भगवान नरसिंह और हिरण्यकश्यप के वध से भी जोड़ा जाता है। चूंकि हिरण्यकश्यप को वरदान था कि उसे साल के 12 महीनों में से कोई नहीं मार पाएगा, इसलिए भगवान ने इस 13वें महीने का सृजन कर अधर्म का अंत किया। यह समय धर्म की स्थापना और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक माना जाता है। साधना और आत्मचिंतन का विशेष समय पंडितों और विद्वानों का मानना है कि अधिक मास कोई अशुभ समय नहीं है बल्कि यह ईश्वर की भक्ति के लिए रिजर्व रखा गया समय है। 17 मई से 15 जून के बीच अधिक मास महात्म्य का पाठ करना या कथा सुनना बहुत शुभ होता है। यह अवधि हमें भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर आत्म-मंथन करने और अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।   वर्जित कार्य और विशेष सावधानी चूंकि यह समय पूरी तरह से ईश्वर की आराधना के लिए समर्पित है, इसलिए इस दौरान सांसारिक मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। अधिक मास में निम्नलिखित कार्य टाल देने चाहिए: विवाह और सगाई के कार्यक्रम। नया व्यापार या दुकान की शुरुआत। गृह प्रवेश और भूमि पूजन। मुंडन, जनेऊ या अन्य संस्कार। दान-पुण्य और लोकहित का महत्व इस महीने में किए गए सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। गरीबों को भोजन कराना, जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता करना, हवन और गीता का पाठ करना इस समय की मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए। यह महीना हमें सिखाता है कि सेवा और सकारात्मक सोच ही जीवन में वास्तविक सुख और शांति लाती है।

मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए रोज जपें ये 5 हिंदू मंत्र

भले ही इस आधुनिक युग में मनुष्य कितनी भी तरक्की क्यों ना कर लें, लेकिन वो इस बात से कभी इनकार नहीं कर सकता है कि व्यक्ति एक दूसरे की ऊर्जा से निरंतर प्रभावित होता रहता है, जो एक-दूसरे के व्यवहार और भावनाओं को भी प्रभावित कर सकती है। यह एनर्जी पॉजिटिव भी हो सकती है और नेगेटिव भी। अगर आप खुद को कुछ लोगों के संपर्क में आने के बाद थका हुआ, कंफ्यूज और मायूस महसूस कर रहे हैं तो आप यकीनन टॉक्सिक लोगों के साथ हैं। जबकि पॉजिटिव लोग हर स्थिति में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर जीवन के प्रति आशावादी बने रहते हैं। सकारात्मकता उन्हें तनाव, चिंता और डिप्रेशन से दूर रखती है। लेकिन नेगेटिव लोग आपकी हर चीज में कमियां ढूंढकर आलोचना करते रहते हैं। ऐसे लोग किसी भी तरह के बदलाव का विरोध करते हैं और उन्हें खुश रहने वाले लोगों से जलन होती है। अगर आप खुद को रियल लाइफ में ऐसे ही टॉक्सिक लोगों के बीच घिरा हुआ महसूस करते हैं तो ये 5 हिंदू मंत्र आपके मन को शांत रखने के साथ हर तरह की नेगेटिविटी से दूर रखने में मदद करेंगे। दुर्गा मंत्र ॐ दुम् दुर्गायै नमः मंत्र माता दुर्गा की शक्ति का प्रतीक है, जो बुराई और नकारात्मकता को नष्ट करती हैं। अगर आपको लगता है कि आप नेगेटिव लोगों से घिरे हुए हैं, जो आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं तो इस मंत्र का जाप आपकी ढाल बन सकता है। यह मंत्र आपको याद दिलाता है कि खुद को याद दिलाते हैं कि किसी को भी आपको मानसिक और भावनात्मक रूप से नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है। गायत्री मंत्र 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्'। यह मंत्र मन को शुद्ध करके नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करता है। इस मंत्र के जाप से आप सत्य को भ्रम से अलग कर पाते हैं, और डर की जगह जीवन में समझदारी से निर्णय ले पाते हैं। महामृत्युंजय मंत्र 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्'। यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और सभी प्रकार के भय, नकारात्मकता और बुरे प्रभावों से रक्षा करता है। हनुमान चालीसा हनुमान चालीसा का नियमित पाठ नकारात्मक ऊर्जा और बुरे प्रभावों से रक्षा करता है। यह भगवान हनुमान की भक्ति को समर्पित है, जो शक्ति और सुरक्षा के प्रतीक हैं। नृसिंह मंत्र 'ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु-मृत्युं नमाम्यहम्'। भगवान नृसिंह का यह मंत्र शत्रुओं और नकारात्मक लोगों से रक्षा करता है।

घर के मंदिर में 5 मूर्तियां और सफाई रखने से आती है सकारात्मक ऊर्जा

हिंदू धर्म में रोजाना पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। लोग मंदिर जाकर मत्था टेकते हैं और अपने घर के मंदिर में भी श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं। घर का ये पवित्र कोना पॉजिटिव एनर्जी और मानसिक शांति का केंद्र माना जाता है। ऐसे में इसे हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। मंदिर में टूटे-फूटे सामान या बेकार की चीजें नहीं रखनी चाहिए। पूजा स्थान से जुड़े कुछ नियम भी होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। अक्सर लोग एक बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि घर के मंदिर में कितनी मूर्तियां होनी चाहिए? आज जानेंगे इस बारे में विस्तार से। साथ ही जानेंगे कि आखिर कौन सी मूर्तियों को हमें घर के पूजा स्थल पर नहीं रखना चाहिए? मूर्तियों को लेकर सही तरीका क्या होना चाहिए। पूजा घर में रखें सिर्फ इतनी मूर्तियां वास्तुशास्त्र और हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार घर के मंदिर में सादगी रहें तो ये अच्छा माना जाता है। वास्तु शास्त्र के नियम के हिसाब से घर के मंदिर में बहुत ज्यादा मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। अगर सीमित संख्या में यहां मूर्तियां रखी जाए तो मन एकाग्र रहता है और ध्यान लगाकर पूजा करना भी आसान हो जाता है। आम तौर पर यहां पर 2 से 5 मूर्तियां रखना ही सही होता है। इससे मंदिर में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है और ऐसे में आसानी से साफ-सफाई भी की जा सकती है। पूजा घर में गलती से भी ना रखें ये मूर्तियां घर के मंदिर में शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां रखना ही शुभ माना जाता है। मंदिर कुछ देवताओं के उग्र या क्रोधित रूप घर में रखने की सलाह नहीं दी जाती है। घर के मंदिर में नटराज, शनि देव या फिर राहु-केतु उग्र या फिर क्रोधित रूप वाली मूर्तियां, मां काली की मूर्ति या फिर काल भैरव के उग्र स्वरूप को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। ऐसी मूर्तियां शक्ति और तप का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में इन्हें घर के मंदिर में रखना सही नहीं होता है। घर में आम तौर पर शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां ही रखनी चाहिए। इन मूर्तियों की एनर्जी से घर का वातावरण शांति रहता है और घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है। रखें इन बातों का ध्यान घर के मंदिर से जुड़े कुछ और भी नियम हैं, जिनका ध्यान जरूर रखना चाहिए। सबसे पहले तो ये सुनिश्चित कर लें कि मंदिर घर के ईशान कोण में ही हो। बता दें कि वास्तु शास्त्र में ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को कहा जाता है। इस दिशा को एनर्जी का सबसे बड़ा सोर्स माना जाता है। ऐसे में यहां पर मंदिर बनाना फलदायी होता है। साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि इसी दिशा में सभी देवी-देवता का वास होता है। इसके अलावा ये जरूर देख लें कि मंदिर में मौजूद मूर्तियों के बीच कम से कम 1-2 इंच की दूरी जरूर हो। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर कभी भी बेडरूम या फिर वॉशरूम के आसपास ना हो। नियम के अनुसार घर का मंदिर सीढ़ियों के ठीक नीचे भी नहीं होना चाहिए क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

क्या सुबह देखे गए सपने होते हैं सच? जानिए ब्रह्म मुहूर्त से उनका गहरा संबंध

अक्सर कहा जाता है कि सुबह का सपना सच होता है. हम में से कई लोगों ने बचपन से ही बड़े-बुजुर्गों से यह बात सुनी है. लेकिन क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक तर्क है या यह महज एक लोक मान्यता है? विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त में देखे गए सपनों को लेकर भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्व दिया गया है. आइए स्वप्न शास्त्र के अनुसार जानते हैं सुबह के सपनों का क्या मतलब है और इनके पीछे छिपा रहस्य क्या है. क्या होता है ब्रह्म मुहूर्त? हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त को दिन का सबसे पवित्र समय माना गया है. यह समय सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले शुरू होता है. मान्यता है कि इस दौरान वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा सबसे अधिक होती है और मन शांत एवं निर्मल रहता है. इसलिए इस समय पूजा-पाठ, ध्यान और जप करना बेहद शुभ माना गया है. क्यों खास होते हैं सुबह के सपने? ज्योतिष और स्वप्न शास्त्र के अनुसार, रात के आखिरी पहर यानी ब्रह्म मुहूर्त में देखे गए सपने ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं. इसके पीछे कुछ कारण बताए गए हैं. इस समय मन गहरी नींद से हल्की अवस्था में आ जाता है. अवचेतन मन सक्रिय रहता है. आसपास का वातावरण शांत और ऊर्जा से भरपूर होता है. इसी वजह से इस समय देखे गए सपने भविष्य के संकेत माने जाते हैं. शुभ सपनों के संकेत स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर ब्रह्म मुहूर्त में ये चीजें दिखें तो इसे शुभ माना जाता है.     मंदिर, देवी-देवता या भगवान का दर्शन     साफ पानी या नदी में स्नान     फूल, दीपक या उजाला     सफेद वस्त्र पहने लोग ऐसे सपने सुख, सफलता और शुभ समाचार का संकेत देते हैं. अशुभ सपनों का क्या मतलब? अगर सुबह के समय बुरे या डरावने सपने आएं, जैसे गिरना, रोना, अंधेरा या तूफान, झगड़ा तो इस तरह के सपनों को मानसिक तनाव या आने वाली चुनौती का संकेत माना जाता है. क्या हर सपना सच होता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में देखा गया सपना कुछ ही दिनों में फल दे सकता है. लेकिन आधुनिक विज्ञान इसे मन की कल्पना और मानसिक स्थिति से जोड़कर देखता है. इसलिए हर सपना सच हो, यह जरूरी नहीं है. क्या करें अगर सुबह सपना याद रहे?     भगवान का स्मरण करें.     सकारात्मक रहें और किसी भी डर को मन में न बसने दें.  

गर्मियों में पहली बार AC चलाएं तो जरूर करें ये 5 काम

इस बार मौसम ने बहुत जल्द तेवर तीखे कर लिए हैं। आधा फरवरी खत्म ही हुआ है कि दोपहर गर्म महसूस होने लगी है। ऐसा ही चलता रहा, तो कुछ ही दिनों में लोगों को एयर कंडीशनर शुरू करने पड़ेंगे। आप भी ऐसा करें, तो ध्यान रखें कि सीजन की शुरुआत में पहली बार AC ऑन करते समय 5 काम जरूर कर लेने चाहिए। ऐसा न करने पर स्विच ऑन करते ही एयर कंडीशनर में कोई खराबी आ सकती है और कोई न कोई बड़ा खर्चा आपके गले पड़ सकता है। पहली बार AC शुरू करने से पहले उसकी हार्ड या सॉफ्ट सर्विस, कंडेंसर और आउटडोर यूनिट की जांच, ड्रेन पाइप और लीकेज की जांच, वोल्टेज और स्टेबलाइजर सेटअप करना और सही मोड का ध्यान रखना जरूरी होता है। हार्ड या कम से कम सॉफ्ट सर्विस कर लें AC को गर्मियों में पहली बार शुरू करने से पहले सर्विस जरूर करवा लें। किसी वजह से अगर हार्ड सर्विस में देरी हो रही हो तो खुद सॉफ्ट सर्विस कर लें। बता दें कि हार्ड सर्विस टेक्नीशियन जरूरी टूल्स के साथ करते हैं। वहीं सॉफ्ट सर्विस में आप फिल्टर की सफाई, एक खराब टूथब्रश और पानी से कॉइल की सफाई और संभव हो, तो तेज पानी की धार से विडों AC की पीछे से और स्पलिट एसी के आउटडोर युनिट की सफाई कर सकते हैं। कंडेंसर और आउटडोर यूनिट को चेक करें अगर आपके घर में स्पलिट एयर कंडीशनर है, तो उसके कंडेंसर और आउटडोर यूनिट को चेक कर लें। कंडेंसर आउटडोर यूनिट के पीछे मौजूद जाली को कहते हैं, तो कि लंबे समय से बंद पड़े-पड़े धूल-मिट्टी से ब्लॉक हो जाती है। उसे तेज पानी की धार से धो लें। इसके अलावा देखें कि आउटडोर यूनिट सामने या आसपास कम से कम 2-3 फीट तक कोई रुकावट न हो। AC स्विच ऑन करने के बाद गौर करें कि आउटडोर फैन या कंप्रेसर से तेज खड़कड़ाहट की आवाज तो नहीं आ रही है? ड्रेन पाइप और लीकेज की जांच लंबे समय से AC बंद होता है, तो उसमें गंदगी इकट्ठा होने के चलते लीकेज की समस्या आ सकती है। ऐसे में स्प्लिट AC को पहली बार ऑन करने से पहले उसके ड्रेन पाइप को चेक कर लें। स्टेबलाइजर सेटअप करें AC को ऑन करने से पहले चेक करें कि स्टेबलाइजर ठीक से काम कर रहा है या नहीं। इसके अलावा AC के प्लग को भी चेक करें कि कहीं भी तार कटी न हो और न ही AC का प्लग ढीला हो। अगर आप स्टेबलाइजर से जुड़ी AC की तारों को खोलकर उन्हें नए सिरे से कस दें, तो स्टेबलाइजर से जुड़ी कोई समस्या आने की गुंजाइश कम हो जाती है। शुरू में फैन मोड पर चलाएं AC AC को पहली बार शुरू करते समय उसे फैन मोड पर शुरू करें। ऐसे में हो सकता है कि AC के अंदर से कुछ गंदगी बारह आए (अगर AC हार्ड सर्वस नहीं हुआ है, तो) साथ ही अगर AC में किसी तरह की समस्या होगी, तो वह भी फैन मोड पर बिना कंप्रेसर के ऑन हुए पता चल जाएगी। जिससे कंप्रेसर तक खराबी नहीं पहुंच पाती।