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गुरुवार का दिन इन राशियों के लिए रहेगा खास, 8 अक्टूबर को धन और करियर में मिलेगी तरक्की

मेष आज आपको पैसे कमाने के अन्य स्रोतों के बारे में भी सोचना चाहिए। आपका प्रेम जीवन समृद्ध रहेगा। आज का दिन आपके जीवन में खुशियां लेकर आने वाला है। कुछ कामों में आप आसानी से सफल हो जाएंगे। वृषभ आज आप बहुत ज्यादा पैसे नहीं बचा पाएंगे। नियमित रूप से बॉस के साथ हल्की-फुल्की बातचीत करना जरूरी है। आज आपको मानसिक शांति पाने पाने में मदद मिलेगी। मिथुन आज आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। गोल्स के बारे में सोचना आपके लिए फायदेमंद होगा। आप जो कुछ भी चाहते हैं उसे प्राप्त करना हमेशा संभव है, याद रखें। खर्च कम रखें। धन का आगमन होगा। कर्क आपका परिवार आज आपको सपोर्ट करेगा। आज टीम वर्क पर फोकस करें। कुछ बड़ा हासिल करने के लिए आपको अपने पर्सनल समय का त्याग करना होगा। इसका मतलब यह नहीं कि आपके पास अपना समय नहीं होगा। सिंह आपके लिए आज अपने रिश्ते को अगले लेवल पर ले जाने का अच्छा समय है। अपने साथी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेन्ड करें ताकि आप एक साथ गहरा कनेक्शन स्थापित कर सकें। आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। कन्या आज के दिन खुद पर ध्यान दें। बचत करने की कोशिश करें क्योंकि यह आपके वर्तमान कमाई के स्तर को बनाए रखने में मदद करेगा। लाइफ में बैलेंस बनाकर रखना जरूरी है। तुला आज आपको आर्थिक और भावनात्मक तौर पर सोच-विचार करने की जरूरत है। आगे की एक नई यात्रा के लिए तैयार हो जाइए। अपने करियर और निजी जीवन को एक साथ संतुलित करने का प्रयास करें। वृश्चिक आज अपने पार्टनर के साथ उन मुद्दों पर बात करें, जो आपके रिश्ते में समस्याएं पैदा कर रहे हैं। आप किसी ऐसे रिस्क की ओर बढ़ सकते हैं, जो आपकी वित्तीय स्थिति को नुकसान दे सकता है। धनु आज आपके सभी काम पूरे होंगे। आपका निजी और व्यावसायिक जीवन संतुलित रहेगा और आपको कुछ नया करने का मौका भी मिलेगा। दूसरी ओर, आपको अपने रिश्ते में रोमांस बनाए रखने की जरूरत है। मकर अगर आप अपने रिश्ते को लेकर बहुत गंभीर हैं तो नेक्स्ट लेवल प्लान करने का यह समय शुभ है। आज छोटी बचत से शुरुआत करें और पता करें कि क्या आप अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति को मैनेज करने में सक्षम हैं? कुंभ अपने पार्टनर को बेहतर तरीके से जानने के लिए साथ में कुछ अच्छा समय बिताना बेहतर होगा। आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी लेकिन सेविंग्स जरूर करें। आप जीवन में खुश और संतुष्ट रहें। मीन आज के दिन आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी रहेगी। निवेश के अवसरों के लिए यह अच्छा है। स्टॉक एक्स्पर्ट्स के साथ बात-चीत करते समय आपको सतर्क रहने की जरूरत है। सेहत पर ध्यान दें।

11 अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत, इस बार गज पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा; जानें क्या है मान्यता

  Sharadiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की उपासना और शक्ति आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है। नवरात्रि शुरू होने के दिन के आधार पर माता के आगमन के वाहन को लेकर एक प्रचलित धार्मिक मान्यता है। इसी मान्यता के अनुसार इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। माता की सवारी को लेकर भक्तों में हर साल खास उत्सुकता रहती है। धार्मिक परंपराओं में हाथी को शुभता, सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और धन-धान्य से जोड़कर देखा गया है। इसलिए 2026 में मां दुर्गा का हाथी पर आगमन भक्तों के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।   2026 में हाथी पर आएंगी मां दुर्गा प्रचलित मान्यता के अनुसार, यदि नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार को होती है, तो माता का वाहन हाथी माना जाता है। शनिवार या मंगलवार को शुरुआत होने पर घोड़ा, बुधवार को नाव और गुरुवार या शुक्रवार को डोली या पालकी से आगमन की मान्यता बताई जाती है। चूंकि 2026 में नवरात्रि की शुरुआत रविवार को हो रही है, इसलिए मां दुर्गा के हाथी पर आगमन की मान्यता है। हाथी पर आगमन को क्यों माना जाता है शुभ? हिंदू धार्मिक परंपरा में हाथी को शक्ति, स्थिरता, समृद्धि और ऐश्वर्य से जोड़ा जाता है। इसी वजह से देवी के हाथी पर आगमन को शुभ संकेत माना जाता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में इसे अच्छी वर्षा, बेहतर कृषि उपज और समाज में सुख-समृद्धि से भी जोड़ा गया है। यानी भक्तों की आस्था के अनुसार इस बार मां का गज पर आगमन खुशहाली और समृद्धि का संदेश लेकर आ सकता है। क्या मां का स्थायी वाहन सिंह नहीं है? धार्मिक परंपरा में मां दुर्गा का प्रमुख और स्थायी वाहन सिंह माना जाता है। वहीं नवरात्रि के दौरान माता के आगमन और प्रस्थान के लिए अलग-अलग वाहनों का उल्लेख कुछ परंपराओं में मिलता है। इसलिए हाथी पर आगमन की बात का अर्थ यह नहीं है कि मां दुर्गा का सिंह से संबंध बदल गया है। यह नवरात्रि के आगमन से जुड़ी विशेष धार्मिक मान्यता है।   नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी? शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। इस दिन घटस्थापना के साथ देवी आराधना शुरू होगी। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार विजयादशमी 20 अक्टूबर 2026 को होगी।   मां की विदाई किस वाहन से होगी? माता के आगमन की तरह प्रस्थान के वाहन को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं हैं और इसमें विजयादशमी के दिन के वार को आधार माना जाता है। 2026 में विजयादशमी मंगलवार को पड़ रही है। इस वजह से अलग-अलग परंपराओं में प्रस्थान वाहन को लेकर घोड़े या चरणायुध/कुक्कुट का जिक्र मिलता है।    

दशहरा 2026 की तारीख हुई तय, जानें रावण दहन और विजय मुहूर्त का शुभ समय

Dussehra 2026: हिंदू धर्म में दशहरा यानी विजयादशमी को बेहद शुभ पर्व माना जाता है. यह दिन सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन रामलीला, रावण दहन, शस्त्र पूजा और विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. साल 2026 में दशहरा किस दिन मनाया जाएगा और इस दिन कौन से शुभ मुहूर्त रहेंगे, आइए जानते हैं।  दशहरा 2026 कब है? पंचांग के अनुसार, साल 2026 में विजयादशमी यानी दशहरा 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा.  आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे समाप्त होगी. इसी वजह से उदया तिथि के अनुसार 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।  दशहरा 2026 का विजय मुहूर्त विजयादशमी के दिन पूजा और शुभ कार्यों के लिए विजय मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है. 20 अक्टूबर 2026 को विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक रहेगा. वहीं अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक बताया गया है. इन समयों में पूजा, शस्त्र पूजन और अन्य शुभ धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।  रावण दहन कब किया जाएगा? दशहरे पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन करने की परंपरा है. आमतौर पर रावण दहन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है. हालांकि, रावण दहन का स्थानीय समय शहर और आयोजन स्थल के अनुसार अलग-अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग या आयोजन की जानकारी देखना बेहतर रहेगा।  दशहरा क्यों मनाया जाता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था. राम और रावण के बीच युद्ध के बाद श्रीराम की विजय को धर्म की अधर्म पर जीत के रूप में देखा जाता है. इसी घटना की याद में देशभर में रामलीला का आयोजन और रावण दहन किया जाता है।  दशहरा की एक अन्य प्रमुख धार्मिक मान्यता देवी दुर्गा से जुड़ी है. कई परंपराओं में इस दिन को मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध और बुराई पर शक्ति की विजय से भी जोड़ा जाता है. इस तरह विजयादशमी दो प्रमुख धार्मिक कथाओं के जरिए अच्छाई और धर्म की स्थापना का संदेश देती है।  रावण के दस सिर किसका प्रतीक हैं? रावण के दस सिरों को कई धार्मिक व्याख्याओं में मनुष्य के भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों का प्रतीक माना जाता है. इनमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और अन्य बुरी प्रवृत्तियों को शामिल किया जाता है।  रावण दहन का संदेश केवल किसी पुतले को जलाने तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे अपने भीतर की नकारात्मकता और बुरी आदतों को खत्म करने के संकल्प से भी जोड़ा जाता है।  2026 में दशहरा क्यों खास है? साल 2026 में दशहरा के दिन श्रवण नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है. पंचांग के अनुसार यह नक्षत्र 19 अक्टूबर की दोपहर से शुरू होकर 20 अक्टूबर की शाम तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं में श्रवण नक्षत्र को शुभ माना जाता है.इसलिए विजयादशमी का दिन पूजा-पाठ, शस्त्र पूजन और सकारात्मक कार्यों के लिए विशेष माना जा रहा है। 

सफलता के लिए सिर्फ मेहनत नहीं, ये 4 स्तंभ भी जरूरी; जानें ज्योतिष की खास सीख

कुछ लोग जब जी-तोड़ मेहनत, कर्म करके थक जाते हैं, तब ज्योतिषी मार्गदर्शकों के पास आते हैं, ताकि वे कुछ उपाय बताकर उनके लिए सफलता का मार्ग प्रशस्त करें। ज्योतिषी उपाय बताते हैं, सफलता के लिए, परन्तु यदि व्यक्ति के अन्दर विपरीत आदतें, अनुशासन की कमी या मनोवांछित पद-प्रतिष्ठा आदि प्राप्ति के लिए योग्यता का अभाव हो, तो सफलता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है, क्योंकि पूर्ण सफलता कभी भी किसी एक कारक का परिणाम नहीं होती। सफलता के लिए पहला स्तम्भ व्यक्ति की योग्यता है, दूसरा स्तम्भ व्यक्ति की आदतें और अनुशासन, तीसरा स्तम्भ है भाग्य और सही समय तथा चौथा स्तम्भ है ईश्वरीय कृपा और प्रभु का आशीर्वाद। जब जीवन में उपरोक्त चार मुख्य स्तंभ एक साथ सही दिशा में आते हैं, तभी व्यक्ति सफलता के उच्चतम शिखर को छूता है। पहला स्तंभ, योग्यता बिना योग्यता के यदि भाग्य से कोई बड़ा अवसर मिल भी जाए, तो व्यक्ति उसे लंबे समय तक संभाल नहीं सकता, योग्यता आपको अवसर को भुनाने के काबिल बनाती है। दूसरा स्तंभ, आदत और अनुशासन योग्यता होना एक बात है, लेकिन उसे रोज़मर्रा की दिनचर्या में लागू करना आपकी आदतों पर निर्भर करता है। अनुशासित आदतें आपकी योग्यता को बेकार नहीं होने देतीं और आपको सही ट्रैक पर रखकर सफलता दिलाती हैं। तीसरा स्तंभ, भाग्य और सही समय भाग्य वह द्वार है जो सही समय पर आपके लिए नए अवसर खोलता है। इसे आप सही परिस्थिति, सही समय पर सही लोगों से मुलाकात या अनुकूल वातावरण के रूप में देख सकते हैं। चौथा स्तंभ, ईश्वरीय कृपा और आशीर्वाद चाहे इसे ईश्वर की कृपा कहें, प्रकृति का संतुलन, या अपनों की शुभकामनाएं, जीवन में कृपा वह अदृश्य सुरक्षा कवच है जो आपको कठिन से कठिन दौर में टूटने नहीं देता। कई बार सब कुछ सही होते हुए भी स्थितियाँ बिगड़ जाती हैं, ऐसे समय में कृपा ही व्यक्ति को संकट से बाहर निकालती है, इसलिए एक इष्ट बनाऐं और नियमित रूप से सफलता के लिए उनका पूजन करें।

केतु के नक्षत्र परिवर्तन से इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, 5 दिसंबर तक मिलेंगे शुभ संकेत

केतु ने 3 अक्टूबर को मघा नक्षत्र के प्रथम पद में गोचर किया था. ज्योतिषविदों के अनुसार, मघा नक्षत्र के स्वामी केतु ग्रह हैं और इसके आधिपत्य देवता पितृगण माने जाते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, मघा नक्षत्र में केतु 5 दिसंबर तक रहने वाले हैं. यह नक्षत्र परिवर्तन तीन राशियों के लिए शुभ माना जा रहा है. ज्योतिषविदों का कहना है कि मघा नक्षत्र के प्रथम पद में बैठा केतु दिसंबर तक तीन राशियों पर अपनी शुभ दृष्टि रखेगा. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए केतु का मघा नक्षत्र के प्रथम पद में गोचर लाभदायक माना जा रहा है. करियर में लंबे समय से आ रही दिक्कतों के समाप्त होने के संकेत हैं. नौकरी और कामकाज से जुड़े मामलों में नए अवसर मिल सकते हैं. केतु का यह नक्षत्र गोचर आपके लिए आगे बढ़ने के नए रास्ते भी खोल सकता है. धन की स्थिति बेहतर होती जाएगी. कर्ज, उधार का भार आपके सिर से कम होगा. कुल मिलाकर 5 दिसंबर तक का समय मिथुन राशि के लिए सकारात्मक रहने की संभावना बताई गई है. तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए भी केतु का यह गोचर शुभ माना जा रहा है. इस अवधि में घर-परिवार के सदस्यों का भरपूर साथ मिल सकता है. परिवार के साथ संबंधों में सहयोग और अपनापन देखने को मिल सकता है. इस दौरान पूजा-पाठ में आपका मन अधिक लग सकता है. धार्मिक कार्यों के प्रति रुचि बढ़ने की बात कही गई है. इसके अलावा, आपको कोई गुड न्यूज भी मिल सकती है. भवन, वाहन या कोई नई प्रॉपर्टी खरीदने का सपना पूरा हो सकता है. 5 दिसंबर तक केतु का यह गोचर तुला राशि के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है. धनु राशि धनु राशि के जातकों के लिए मघा नक्षत्र के प्रथम पद में केतु का प्रवेश पॉजिटिव माना जा रहा है. इस अवधि में धन लाभ होने की संभावना है. आर्थिक मामलों में आपके लिए यह समय अच्छे संकेत लेकर आ सकता है. केतु का यह गोचर 5 दिसंबर की शाम तक प्रभावी रहेगा. इस दौरान धनु राशि के जातकों को लाभ मिलने की संभावना बताई गई है. ऐसे में केतु का नक्षत्र परिवर्तन आपके लिए खास माना जा रहा है.

आज का राशिफल 7 अक्टूबर: इन राशियों की चमकेगी किस्मत, धन और करियर में बनेंगे लाभ के योग

मेष आज के दिन आपका लक आपका साथ देगा। करियर के नए अवसर आपके सामने आएंगे। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं, जो लाभदायक रहेगी। आज आपको तारीफ भी मिल सकती है। इंकम बढ़ने के भी योग हैं। वृषभ आज के दिन कॉन्फिडेंस में आपके कमी आ सकती है। नौकरी में बदलाव की भी बड़ी संभावना है। संतुलित डाइट और एक्सरसाइज को शामिल करके अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। जीवन में संतुलन बनाए रखें। मिथुन आज प्रमोशन पाने के लिए आपको पूरे लगन के साथ ऑफिस के टास्क कंप्लीट करने चाहिए। व्यापार अच्छा चलेगा और आप अच्छे मुनाफे की भी उम्मीद कर सकते हैं। आर्थिक रूप से यह एक अच्छा दिन है। कर्क आज के दिन लाइफ पार्टनर के साथ बॉन्ड को स्ट्रांग बनाने के लिए आप डेट प्लान कर सकते हैं। हो सकता है कि आपके दोस्त सहयोगात्मक न हों। धैर्य रखने की कोशिश करें और कठोर शब्दों का प्रयोग न करें। सिंह आज के दिन हिम्मत न हारें और पॉजिटिव रहने की कोशिश करें। दफ्तर में टिके रहने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करनी होगी। आर्थिक रूप से, अपने भविष्य को सुरक्षित करने पर फोकस करें। कन्या आज बदलाव के लिए खुले रहने से आपको अच्छे नतीजे मिल सकते हैं। हर पहलू में संतुलन बनाए रखें। प्यार में शांत रहें। काम पर टीमवर्क पर ध्यान दें। वित्त का समझदारी से प्रबंधन करें और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। तुला आज कारोबार से जुड़े लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। काम का प्रेशर ज्यादा महसूस होगा। व्यवसायी लोग अपना कार्यक्षेत्र बदलना चाह रहे होंगे। लाइफ में प्रॉब्लम आना नॉर्मल है। धन का मामला उम्मीद से कम रहेगा। वृश्चिक आज कुछ अप्रत्याशित समस्याएं सामने आ सकती हैं, जिससे आपकी प्लानिंग पूरी होने में देरी हो सकती है। हेल्थ आज अच्छी रहेगी। दिन की शुरुआत में अपने करियर को लेकर आप स्ट्रगल करेंगे। धनु आज आपको अपनी मेंटल हेल्थ का खास ख्याल रखना चाहिए। आपको अपने सहकर्मियों से कही गई बातों में सावधानी बरतने की जरूरत है। काम में सहयोग और बातचीत की आवश्यकता होती है। मकर आज पर्सनल और प्रोफेशनल कनेक्शन को मजबूत करने का अवसर है। करीबियों के साथ अपने कनेक्शन को मजबूत करने के अवसरों की तलाश करें। काम पर नई चुनौतियों से न कतराएं। कुंभ आज वित्तीय मामलों पर पूरा ध्यान दें। सोच-समझकर प्लानिंग के डिसीजन लें। सेहत के लिहाज से, अपनी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए यह एक अच्छा दिन है। मीन प्रोडक्टिविटी आज रोज के मुकाबले नॉर्मल से स्लो रहेगी। यह आपको बेचैन कर देगी। आपको अपने जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए मोटिवेट किया जाता है। रोमांटिक रिश्तों में धैर्य की आवश्यकता हो सकती है।

नवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन की सवारी तय, घोड़े पर होगा प्रस्थान; जानें पूजा से जुड़ी खास बातें

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। इस दिन से नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना होगी। इसके साथ ही माता की आराधना शुरू हो जाएगी। इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवार और सोमवार को नवरात्रि शुरू होने पर मां दुर्गा का वाहन हाथी माना जाता है। इसलिए इस बार माता रानी हाथी पर सवार होकर आएंगी। वहीं नवरात्रि का समापन मंगलवार को होगा, इसलिए माता का प्रस्थान घोड़े पर माना जाएगा। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक का समय शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। शहर के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। कलश स्थापना कैसे करें? नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करके पूजा स्थल की सफाई करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। कलश में साफ पानी भरें और इसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का डालें। कलश के ऊपर आम या अशोक के पत्ते रखें। इसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें। कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और विधि-विधान से पूजा शुरू करें। मां दुर्गा की पूजा विधि सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद कलश और मां दुर्गा की पूजा करें। माता को लाल फूल, चुनरी, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें। धूप और दीप जलाएं। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या माता के मंत्रों का पाठ करें। अंत में मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। माता को क्या भोग लगाएं? नवरात्रि में मां दुर्गा को फल, मिठाई, नारियल और सात्विक भोजन का भोग लगाया जाता है। अपनी श्रद्धा के अनुसार माता को भोग अर्पित कर सकते हैं। नौ दिनों में माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। मां दुर्गा की सवारी का क्या है महत्व? धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि में माता के आगमन और प्रस्थान के वाहन का खास महत्व होता है। इस बार माता का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। हाथी को सुख-समृद्धि, धन-धान्य और अच्छी वर्षा से जोड़कर देखा जाता है। वहीं माता का प्रस्थान घोड़े पर होगा। धार्मिक मान्यताओं में देवी के घोड़े पर प्रस्थान को बदलाव और हलचल से जोड़कर देखा जाता है। नवरात्रि में रखें इन बातों का ध्यान नवरात्रि के दौरान घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई रखें। व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार उपवास करें। सात्विक भोजन करें और पूजा-पाठ में मन लगाएं। अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की भी परंपरा है। कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें उपहार या दक्षिणा दी जाती है।

हर बात सबको बताना पड़ सकता है नुकसानदेह, चाणक्य ने ईमानदारी को लेकर दी थी ये खास सलाह

 प्राचीन भारत के महान दार्शनिक, अर्थशास्त्री और राज सलाहकार चाणक्य को जीवन, शासन और व्यवहार पर उनकी तीखी टिप्पणी करने के लिए आज भी याद किया जाता है चाणक्य नीति में कहा गया है कि, 'किसी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाते हैं और ईमानदार लोगों को सबसे पहले धोखा दिया जाता है।' ईमानदारी पर चाणक्य के कथन अपने भी यह कथन कई बार सुना होगा। हो सकता है कि सुनकर नजरअंदाज भी कर दिया हो, लेकिन इस कथन के माध्यम से चाणक्य जीवन का सबसे की सबसे जरूरी चीज समझाने की कोशिश करते हैं। सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाने का अर्थ है कि वे इस्तेमाल करने लायक होते हैं, ठीक उसी तरह ईमानदार लोग शोषण का आसानी से शिकार बन सकते हैं। हालांकि इस कथन के जरिए चाणक्य ईमानदारी के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसी दुनिया में अज्ञानता या लापरवाही के खिलाफ है, जहां हर कोई निष्पक्ष, स्वार्थी और लोभी है। चाणक्य नीति में चाणक्य कहते हैं कि, व्यक्ति को ईमानदारी और बुद्धिमत्ता के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए। सच बोलना जरूरी है, लेकिन नुकसान से बचने के लिए परिस्थितियों और लोगों को भी समझना उतना ही जरूरी है। जरूरत से ज्यादा ईमानदार क्यों हैं खतरनाक? चाणक्य कहते हैं कि, जो व्यक्ति अपने सभी विचार, भावनाएं और योजनाएं जाहिर कर देता है, वह अनजाने में ही दूसरों को ऐसी जानकारी दे सकता है, जिसका इस्तेमाल आगे चलकर उसी के खिलाफ किया जा सकता है। ऐसा इंसान आसानी से छल-कपट का शिकार हो सकता है।चाणक्य के ऐसा कहने के पीछे ईमानदारी को गलत ठहराना नहीं है, बल्कि पूरी तरह से बेपरवाह होने से बचने के लिए है। चाणक्य कहते हैं कि, ईमानदार होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सबको सब कुछ बता दिया जाए। एक बुद्धिमान व्यक्ति सच बोलते हुए भी यह समझ सकता है कि कब बोलना है, क्या जाहिर करना है और किस पर भरोसा करना है। क्या चाणक्य झूठ बोलने की प्रेरणा देता हैं? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। चाणक्य कहते हैं कि आप अपने हर निजी विचार बताए बिना भी सोच कह सकते हैं। आप हर किसी पर फौरन भरोसा किए बिना भी ईमानदार हो सकते हैं। आप अपनी कुछ योजनाओं और निजी मामलों को अपने तक सीमित रखते हुए भी सच्चे बने रह सकते हैं। छल और विवेक में भी अंतर होता है। छल में जानबूझकर किसी को गलत ज्ञान या मार्गदर्शन प्रदान करना शामिल है। जबकि विवेक का सीधा मतलब है हर बात को कहना जरूरी नहीं है। इसलिए चाणक्य की चेतावनी को बेईमानी के बजाय विचारशील ईमानदारी के रूप में लेना चाहिए।

गुरु की बदली चाल से चमकेगी 6 राशियों की किस्मत, अगले 33 दिन धन-करियर के लिए रहेंगे खास

 वैदिक ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) को ज्ञान, सौभाग्य, धर्म, विस्तार और धन का मुख्य कारक माना जाता है. जब भी गुरु की चाल या स्थिति में बदलाव होता है, तो इसका गहरा प्रभाव सभी 12 राशियों के जीवन पर पड़ता है. पंचांग के अनुसार, वर्तमान में गुरु चंद्रमा की राशि में विराजमान हैं, जिससे कुछ चुनिंदा राशियों के लिए अगले 33 दिनों का यह समय बेहद खास और स्वर्णिम अवसर लेकर आया है. इस दौरान कई जातकों को धन लाभ, करियर में उन्नति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति हो सकती है. आइए जानते हैं कि गुरु के इस शुभ प्रभाव से किन 6 राशियों की किस्मत चमकने वाली है. गुरु गोचर का ज्योतिषीय महत्व ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, चंद्रमा की राशि में गुरु का संचरण मानसिक शांति, आर्थिक मजबूती और बड़े वैचारिक बदलाव लेकर आता है. इस अवधि में जातकों को अपने रुके हुए कार्यों में गति मिलती है और जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के जातकों के लिए अगले 33 दिन आर्थिक दृष्टि से बेहद शानदार रहने वाले हैं. धन लाभ के नए मार्ग खुलेंगे और यदि कहीं पैसा अटका हुआ था, तो उसके वापस मिलने की पूरी संभावना है. परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जाने का योग बन सकता है. कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि के जातकों पर देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा बरसने वाली है. इस दौरान आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर कोई नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकता है. व्यापार में भी बड़ा मुनाफा हाथ लग सकता है. कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि वालों के लिए यह समय करियर और शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकता है. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता मिलने के प्रबल योग हैं. निवेश करने के लिहाज से भी यह अवधि बेहद अनुकूल है, जिससे भविष्य में भारी मुनाफा हो सकता है. वृश्चिक राशि (Scorpio) वृश्चिक राशि के जातकों के जीवन में चल रही उथल-पुथल अब शांत होने लगेगी. गुरु की कृपा से आपके अटके हुए कार्य तेजी से पूरे होंगे. वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी और जीवनसाथी का पूरा सहयोग प्राप्त होगा. स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलेगा. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के स्वामी स्वयं गुरु ग्रह हैं, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह गोचर विशेष फलदायी साबित होगा. कारोबार में विस्तार के नए अवसर मिलेंगे. भाग्य का पूरा साथ मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और मानसिक शांति का अनुभव होगा. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों के लिए यह 33 दिन का समय किसी वरदान से कम नहीं है. नौकरी और व्यवसाय में लगातार सफलता के योग बन रहे हैं. पारिवारिक जीवन में खुशहाली आएगी और घर-परिवार के लोगों के साथ बेहतरीन समय बिताने का मौका मिलेगा.

घर में इस दिशा में रखें ब्रह्मकमल का पौधा, खिलने पर शुभ मानी जाती है इसकी पंखुड़ियां

ब्रह्म कमल (Saussurea obvallata) हिमालय में मिलने वाला पवित्र और दुर्लभ फूलों में से है, जिसे वास्तु शास्त्र में बहुत ही शुभ माना जाता है. इसे क्वीन ऑफ नाइट (Queen of Night) भी कहा जाता है क्योंकि यह फूल सिर्फ रात में खिलता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, इसे खिलते हुए देखना बहुत सौभाग्य की बात मानी जाती है, इसलिए लोग इसे देखने के लिए उत्तराखंड की 'वैली ऑफ फ्लावर्स' (Valley of Flowers) तक जाते हैं. लेकिन, हर किसी के लिए पहाड़ की इतनी ऊंचाई पर जाकर इसे देखना मुमकिन नहीं है. ऐसे में सवाल आता है कि क्या इसे घर पर उगाया जा सकता है. इसका जवाब है हां. आप इसे अपने घर पर भी उगा सकते हैं, बस इसके लिए आपको कुछ खास सावधानियां रखनी होंगी और सही माहौल देना होगा. क्या है ब्रह्म कमल? ब्रह्म कमल (Brahma Kamal) हिमालय में उगने वाली एक खास जड़ी-बूटी मानी जाती है. यह फूल भारत, नेपाल, भूटान और दक्षिण-पश्चिम चीन के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है. यह फूल ठंडे तापमान में ही उगता है. इसके कटोरे जैसे फूल बड़े बड़े पत्तों के बीच छुपे रहते हैं. ये रात में खिलता है और सुबह होते ही मुरझा जाते हैं. इसी वजह से इसे देखना बहुत ही दुर्लभ माना जाता है. ब्रह्म कमल को 'स्टेट फ्लावर ऑफ उत्तराखंड यानी राजकीय पुष्प' भी माना जाता है. साथ ही, ब्रह्म कमल की तस्वीर को भारतीय डाक टिकट पर भी छापा जाता था. ब्रह्म कमल की शुभ दिशा हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, ब्रह्म कमल को बेहद पवित्र माना जाता है. इसका संबंध सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा से भी जोड़ा जाता है. वहीं, वास्तु शास्त्र के मुताबिक भी, यह पुष्प बहुत ही शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इसे घर की कुछ खास जगहों, जैसे घर के बीचों-बीच यानी ब्रह्मस्थान या उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में रखने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक माहौल बना रहता है. ब्रह्म कमल की पौराणिक मान्यता ब्रह्म कमल को आम पौधों से बिल्कुल अलग बनाती है इसकी दुर्लभता. यह पौधा प्राकृतिक रूप से केवल जंगलों और पहाड़ी इलाकों में उगता है और इसका खिलना एक बेहद खास अनुभव माना जाता है. इसके फूल आमतौर पर सिर्फ रात में खिलते हैं और कुछ घंटों के बाद ही बंद हो जाते हैं. क्या ब्रह्म कमल घर में उगाया जा सकता है? जी हां, घर में भी ब्रह्म कमल उगाया जा सकता है. लेकिन, इसके लिए एकदम ठंडा तापमान होना चाहिए. इसको बाकी फूलों की तरह घर के अंदर उगाना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन, सही देखभाल और थोड़ी सी कोशिश से आप इस पवित्र पौधे को अपने घर में भी उगा सकते हैं. आइए जानते हैं इसे घर पर उगाने का आसान तरीका. ये रहना चाहिए तापमान- ब्रह्म कमल ठंडी और ऊंची जगहों पर अच्छे से बढ़ता है. इसे ज्यादा गर्मी और उमस बिल्कुल पसंद नहीं है. घर में आप इसे किसी ठंडी और छायादार जगह पर रख सकते हैं. अगर घर में एसी (AC) है, तो उसके आसपास की ठंडी जगह भी इसके लिए अच्छी रहती है. इस पौधे की मिट्टी कैसी होनी चाहिए? ब्रह्म कमल के लिए ऐसी मिट्टी चाहिए जिससे पानी आसानी से बाहर निकल जाए. इसके लिए आप रेत, मिट्टी और कोकोपीट को मिलाकर सही मिश्रण तैयार कर सकते हैं. साथ ही, इस पौधे को गमले में लंबे समय तक पानी में नहीं रखना चाहिए. – ऐसी चाहिए रोशनी ब्रह्म कमल को तेज धूप से बचाना चाहिए. खास तौर पर दोपहर की सीधी धूप से इसकी पत्तियां पीली पड़ सकती हैं या मुरझा सकती हैं. इसलिए इसे ऐसी जगह रखें जहां सीधी धूप न पड़े. – पानी देने का सही तरीका इस पौधे को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है. जब गमले की मिट्टी पूरी तरह सूख जाए, तभी पानी डालें. ज्यादा पानी देने से पौधे को नुकसान हो सकता है. – ब्रह्म कमल पौधा उगाने का तरीका बीज से पौधा उगाने में काफी समय लग सकता है, इसलिए घर पर इसे पत्तियों की कटिंग (Cutting) से उगाना ज्यादा आसान होता है. पत्ती को काटकर उसके कटे हिस्से को कुछ दिन सूखने दें ताकि उस पर हल्की परत जम जाए. इसके बाद इसे तैयार मिट्टी में लगा दें और गमले को ऐसी जगह रखें जहां हल्की और छनकर रोशनी आती हो. – उगाने में आएंगी ये मुश्किलें घर पर ब्रह्म कमल उगाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि इसकी ग्रोथ बहुत धीमी होती है और फूल आने में कई साल लग जाते हैं. सबसे जरूरी है कि पौधे के आसपास का तापमान ठंडा और एक जैसा रहे. बार-बार गमला बदलने या पानी देने में लापरवाही करने से पौधा खराब हो सकता है.