samacharsecretary.com

11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू, घटस्थापना में कलश रखते समय इन गलतियों से बचें

Sharadiya Navratri:शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से है। पहले दिन ही मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ घटस्थापना की परंपरा निभाई जाती है। नवरात्रि में पहले दिन ही कलश की स्थापना करते हुए अगले नौ दिन तक मां दुर्गा की पूर्जा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि कलश में देवती-देवता वास करते हैं और इसकी स्थापना में किसी भी तरह की चूक करने से बचना चाहिए। तमाम लोगों को ये कन्फ्यूजन होता है कि कलश की स्थापना कैसे करना है और कौन सा स्टेप पहले शुरू करना है। वहीं इस बात को लेकर बहुत कन्फ्यूजन होता है कि कलश को सीधे जमीन पर रखना है या फिर इसके नीचे कोई अनाज रखना है। अगर अनाज रखना है तो फिर कौन सा अनाज रखना है? चलिए जानते हैं कि कलसश के नीचे क्या रखना चाहिए? साथ ही जानेंगे के घटस्थापना के वक्त किन गलतियों को करने से बचना है? कलश के नीचे कौन सा अनाज रखें? नवरात्रि की कलश स्थापना में कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। पूजा के कलश को सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता है। ना ही इसे सीधे तौर पर चौकी पर रखना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले अनाजों की वेदी बनाते हैं और इसी पर कलश को रखना शुभ मानते हैं। इस दौरान सात तरह के अनाजों का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। इसे सप्तधान्य भी कहा जाता है। इसमें आप चावल, गेंहू, तिल और बाजरा समेत कई चीजें मिला सकते हैं। सबसे पहले अनाज को साफ कर लें और फिर इसकी वेदी बना दें और इसी पर कलश को रखें। नवरात्रि घटस्थापना में ना करें ये गलतियां 1. कलश पर रखे जाने वाले नारियल को गलत दिशा में कभी भी ना रखें। इसकी सही दिशा का ध्यान जरूर दें। धार्मिक मान्यता के हिसाब से जब आप पूजा करें तो नारियल की दिशा पूजा करने वाले की साइड होना चाहिए। इसे कहीं पर भी ऊपर या फिर अपने पीछे की ओर ना रखें। 2. नवरात्रि की घटस्थापना में अक्षत का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस दौरान कोशिश करें कि चावल टूटे हुए ना हो। कलश स्थापना के वक्त चावल का इस्तेमाल करते वक्त इस बात का ध्यान जरूर रखें। साथ ही ध्यान रखें कि पूजा में इस्तेमाल होने वाले चावल साफ हो। 3. नियम के अनुसार घटस्थापना वाले कलश को गलत जगह ना रखें। इसके लिए घर के ईशान कोण को चुनें। ज्योतिष वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। अगर यहां जगह संभव नहीं है तो पूर्व दिशा में भी कलश रख सकते हैं। बस इतना ध्यान रखें कि जहां भी पूजा हो रही है वो जगह साफ हो। बार-बार यहां पर किसी का हाथ नहीं लगना चाहिए।

आज का राशिफल 9 अक्टूबर 2026: इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, धन-करियर में तरक्की

मेष राशि- दिन आपके लिए चुनौतियों और अवसरों का मिश्रण लेकर आया है। आपका पॉजिटिव रवैया दिन को सफलता के साथ पार करने और व्यक्तिगत विकास के द्वार खोलने में महत्वपूर्ण होगा। वृषभ राशि- दिन आपके लिए पॉजिटिव रहेगा। लव लाइफ में एक दूसरे के बीच के मतभेद दूर करें। टास्क में भी उत्तम परिणाम दें। स्मार्ट निवेश करने के लिए आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी है। मिथुन राशि- साहस और उत्साह के साथ दिन का आनंद उठाएं। हेल्दी डाइट लें और स्ट्रेस को बाय-बाय कहें। आज का दिन शुभ है। प्रेम के मामले में रोमांटिक रहें। आज आपका प्रेम जीवन मजबूत और पेशेवर जीवन रचनात्मक रहेगा। कर्क राशि- स्वास्थ्य भी ठीक है। याद रखें आप काम के प्रेशर को ऐसे संभालते हैं, जैसे कोई नहीं संभालता। आज आप आप क्रिएटिव फील कर सकते हैं। प्रॉब्लम सॉल्व करने की कला आप जानते हैं। सिंह राशि- आपकी करंट वित्तीय स्थिति स्मार्ट निवेश योजनाओं की अनुमति देती है। आज आपका स्वास्थ्य भी कोई तकलीफ नहीं देगा। अपने कार्यक्षेत्र में सफलता के प्रति आश्वस्त रहें। कन्या राशि- ज्यादा स्ट्रेस न लें। उत्पादकता से जुड़े मुद्दे पेशेवर जीवन पर असर नहीं डालेंगे। आपको दृष्टिकोण में हमेशा सकारात्मक बने रहना चाहिए। रिश्ते के मुद्दों को पॉजिटिव तरीके से सुलझाएं। तुला राशि- आपको हेल्थ पर फोकस करना चाहिए। अपने ऑफिस में अपना बेस्ट दें और प्रोडक्टिव बने रहें। धन को चालाकी से संभालने की जरूरत है। हेल्थ के मामले में पेट से जुड़ी कुछ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। वृश्चिक राशि- लव के मामलें में दिल की नहीं बल्कि दिमाग की सुनें। वर्कप्लेस पर आज कोई चुनौती मौजूद नहीं है। प्रेम संबंधी मामले समझदारी से सुलझाएं और पार्टनर के साथ ज्यादा से ज्यादा टाइम बिताएं। धनु राशि- व्यावसायिक चुनौतियों से मेहनत से निपटें। कोई वित्तीय समस्या नहीं रहेगी। आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहने वाला है। आज का दिन आपके लिए शानदार रहने वाला है। मकर राशि- कोई बड़ी वित्तीय समस्या नहीं है और स्वास्थ्य भी अच्छा है। लव के मामले में विवादों को निपटाने के लिए सही सोल्यूशन खोजें। आज आपको सेल्फ लव पर ध्यान देना चाहिए। कुंभ राशि- दिन पैसों के मामलें में वृद्धि और करियर में उन्नति के अवसर प्रदान करता है। कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहें, जो आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। मीन राशि- दफ्तर में बेहतर करियर सुनिश्चित करने के लिए अपनी क्षमता साबित करें। आर्थिक रूप से आज आप समृद्ध हैं। आज नया प्यार पाने के लिए तैयार रहें। बेहतर मौके आपके दिन को बेहतर बनाएंगे।

Tulsi Vastu Tips: घर की इस दिशा में भूलकर भी न रखें तुलसी, जानें सही जगह और जरूरी नियम

 हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत ही पवित्र पौधा माना जाता है. इसे भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है. मान्यता है कि जिस घर में नियमित रूप से तुलसी की पूजा-अर्चना होती है, वहां सकारात्मक माहौल बना रहता है और परिवार पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है. वास्तु शास्त्र में भी तुलसी को शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. वास्तु के अनुसार, सही स्थान पर तुलसी का पौधा रखने से घर का वातावरण बेहतर और खुशहाल बना रहता है. लेकिन गलत स्थान पर रखने से इसका शुभ फल प्राप्त नहीं होता है. ऐसे में आइए जानते हैं इसे किस दिशा में रखना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. इस दिशा में तुलसी रखने से बचें वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी का पौधा घर की दक्षिण दिशा में रखने से बचना चाहिए. इस दिशा का संबंध पितरों और यमराज से माना जाता है. वहीं, तुलसी के पौधे के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को शुभ माना गया है. तुलसी के पास न हो अंधेरा तुलसी के पौधे को हमेशा ऐसे स्थान पर रखें जहां पर धूप आती हो. यदि आपके घर में तुलसी के पौधे को अंधेरे कोने या ऐसे स्थान पर रखा गया है, जहां पर रोशनी नहीं पहुंचती तो अच्छा नहीं माना जाता है. पौधे तक पहुंचनी चाहिए पर्याप्त रोशनी घर में तुलसी का पौधा लगाते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि उसे पर्याप्त रोशनी मिलती रहे. पौधे को ऐसी जगह रखना बेहतर होता है, जहां दिन के समय धूप पहुंच सके. घर का बंद या अंधेरा कोना, जहां सूरज की किरणें नहीं आतीं, तुलसी के लिए शुभ नहीं माना जाता है. इसलिए इसे साफ, खुली और रोशनी वाली जगह पर ही रखने की कोशिश करें. तुलसी के आसपास रखें साफ-सफाई तुलसी के पौधे के आसपास हमेशा साफ-सफाई बनाए रखना चाहिए. उसके पास जूते-चप्पल, इस्तेमाल किए हुए कपड़े, कूड़ा या झाड़ू जैसी चीजें रखने से बचें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी को पवित्र पौधा माना जाता है, इसलिए इसकी देखभाल करते समय सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. तुलसी को सीधे जमीन में लगाने से बचें वास्तु के अनुसार, तुलसी को सीधे जमीन में लगाने के बजाय गमले में रखना अधिक शुभ माना जाता है. इसलिए, घर के आंगन या खुले स्थान में भी तुलसी के लिए अलग गमले का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है.

Sarva Pitru Amavasya 2026: 10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या, जानें श्राद्ध-तर्पण का शुभ मुहूर्त

Sarva Pitru Amavasya 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष यानी श्राद्ध पक्ष का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. 16 दिनों तक चलने वाले इस महाअभियान का समापन सर्व पितृ अमावस्या के साथ होता है. सर्व पितृ अमावस्या को महालय अमावस्या भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन धरती पर आए सभी पितरों का स्मरण कर उन्हें सम्मान के साथ उनके लोक के लिए विदा किया जाता है. साल 2026 में सर्व पितृ अमावस्या का पर्व बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि इस दिन पितरों की तृप्ति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए विशेष संयोग बन रहे हैं. आइए जानते हैं सर्व पितृ अमावस्या की सही तिथि, पंचांग के अनुसार समय और इसका धार्मिक महत्व. सर्व पितृ अमावस्या 2026 तिथि और पंचांग समय द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सर्व पितृ अमावस्या की तिथि और समय इस प्रकार रहेगा. इस बार सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को पड़ेगी. अमावस्या तिथि की शुरुआत 9 अक्टूबर की रात 9 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट पर समापन होगा. श्राद्ध और तर्पण के लिए शुभ मुहूर्त कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक. रोहिणी मुहूर्त: दोपहर 12:31 बजे से दोपहर 01:18 बजे तक. अपराह्न काल: दोपहर 01:18 बजे से दोपहर 03:37 बजे तक. क्यों खास होती है सर्व पितृ अमावस्या? हिंदू धर्म के अनुसार, यदि किसी परिवार को अपने किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि (देहावसान का दिन) याद नहीं है, या पितृ पक्ष की अन्य तिथियों पर किन्हीं कारणों से श्राद्ध नहीं किया जा सका है, तो वे सभी इस एक ही दिन अपने पितरों का निमित्त श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं. इस दिन विधि-विधान से तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण या जरूरतमंदों को दान करने से कुल के पितरों को शांति मिलती है और घर से पितृ दोष का प्रभाव समाप्त होता है. नवरात्र से पूर्व विदाई सर्व पितृ अमावस्या के अगले दिन यानी 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी, जो आत्मीय श्रद्धा और पितृ विसर्जन से मां शक्ति की उपासना के भव्य आगमन का प्रतीक है.

Navratri Vastu Tips: माता रानी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्र से पहले घर से बाहर करें ये 5 अशुभ चीजें

नवरात्र का पावन त्योहार आने वाला है. ऐसे में हर कोई अपने घर की साफ-सफाई में जुट जाता है.  लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल घर की धूल-मिट्टी साफ करना ही काफी नहीं है? वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर में रखी कुछ टूटी-फूटी और बेकार चीजें नकारात्मक ऊर्जा (बुरी ऊर्जा) को बढ़ावा देती हैं.  इससे मां दुर्गा और मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं.  अगर आप चाहते हैं कि नवरात्र में माता आपके घर में आएं और खूब तरक्की हो, तो इन 5 चीजों को तुरंत घर से बाहर कर दें. घर से तुरंत हटाएं ये 5 चीजें: 1. सूखी तुलसी और कांटेदार पौधे तुलसी को बहुत पवित्र माना जाता है. अगर आपके घर में तुलसी का पौधा सूख गया है, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि सूखा पौधा घर में गरीबी और उदासी लाता है.  इसके अलावा, घर के अंदर कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस) भी नहीं रखने चाहिए. क्या करें: सूखे पौधे को मिट्टी में दबा दें या किसी नदी में प्रवाहित कर दें. इसकी जगह नया और हरा-भरा तुलसी या मनी प्लांट का पौधा लगाएं. 2. टूटी हुई मूर्तियां और तस्वीरें पूजा घर में कभी भी देवी-देवताओं की टूटी हुई मूर्तियां या फटी हुई तस्वीरें नहीं रखनी चाहिए.  इससे घर में वास्तु दोष लगता है. क्या करें: अगर मूर्ति मिट्टी की है, तो उसे पानी में बहा दें. अगर किसी और धातु की है, तो उसे किसी पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं. 3. टूटी या पुरानी झाड़ू झाड़ू का संबंध माता लक्ष्मी से होता है. घर में टूटी हुई या बहुत पुरानी झाड़ू रखने से तंगी आ सकती है. क्या करें: नवरात्र शुरू होने से पहले पुरानी झाड़ू फेंक दें और नई झाड़ू खरीद लें. 4. एक्सपायर्ड दवाइयां और टूटे बर्तन घर में एक्सपायर्ड दवाइयां, पुराने कागज, चटके हुए बर्तन या टूटा हुआ कांच बिल्कुल न रखें.  इन चीजों से घर में बीमारी और मानसिक तनाव बढ़ता है. क्या करें: इन सारी बेकार और टूटी-फूटी चीजों को तुरंत घर से बाहर निकाल कर फेंक दें. 5. बंद घड़ियां और खराब सामान घर में बंद पड़ी घड़ी इस बात का संकेत है कि आपका अच्छा समय रुक गया है. इससे घर के लोगों में आलस बढ़ता है. साथ ही, खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान भी घर की तरक्की रोकते हैं. क्या करें: बंद घड़ी को तुरंत ठीक करवाएं या बैटरी बदलें. खराब पड़े कबाड़ और इलेक्ट्रॉनिक सामान को भी घर से हटा दें. नवरात्र के पहले दिन जरूर करें ये काम: मुख्य द्वार को सजाएं: नवरात्र के पहले दिन घर के मुख्य द्वार को अच्छे से साफ करें. स्वास्तिक बनाएं: मुख्य द्वार पर हल्दी और पानी से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं. तोरण लगाएं: माता के स्वागत के लिए आम या अशोक के पत्तों की माला (तोरण) मुख्य दरवाजे पर जरूर बांधें.  इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है.

17 अक्टूबर को बनेगा त्रिग्रही योग, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत; धन-करियर में होगा बड़ा लाभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्टूबर के मध्य में ग्रहों की स्थिति में बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है. दरअसल, वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को ग्रहों के राजा सूर्य देव तुला राशि में प्रवेश करेंगे और 16 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे. इस राशि में पहले से बुध और शुक्र की मौजूदगी के कारण सूर्य के प्रवेश के साथ तीन ग्रह एक ही राशि में आ जाएंगे, जिससे त्रिग्रही योग का निर्माण होगा. ऐसे में तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से पहले से ही लक्ष्मी राजयोग बना हुआ है. अब सूर्य के यहां पहुंचने से बुध के साथ बुधादित्य योग और शुक्र के साथ शुक्रादित्य योग भी बनने की स्थिति बनेगी. ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहों का यह संयोग कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ साबित हो सकता है. इन जातकों को आर्थिक मामलों में फायदा मिलने के साथ-साथ नौकरी और कारोबार में भी नए अवसर मिल सकते हैं. तो आइए जानते हैं किन तीन राशियों के लिए त्रिग्रही योग खास रहने वाला है. कब होगा सूर्य का तुला राशि में गोचर? वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को शाम 7 बजकर 50 मिनट पर सूर्य देव कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे. इसके बाद सूर्य करीब एक महीने तक तुला राशि में रहेंगे. 16 नवंबर 2026 को शाम 7 बजकर 42 मिनट के बाद सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश कर जाएंगे. ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, पद, प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का कारक ग्रह माना जाता है. सूर्य लगभग 30 दिनों के अंतराल पर एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं. इस तरह लगभग एक वर्ष में सूर्य सभी 12 राशियों का चक्र पूरा करते हैं. सिंह राशि सिंह राशि के जातकों के लिए अक्टूबर में बनने वाला त्रिग्रही योग कई मामलों में सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है. कारोबार से जुड़े लोगों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है. इस दौरान कोई बड़ी व्यावसायिक डील भी आपके पक्ष में तय हो सकती है. नौकरी करने वाले लोगों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है. कार्यक्षेत्र में आपकी जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग बन सकते हैं. आमदनी के नए स्रोत बन सकते हैं. लंबे समय से अटका हुआ पैसा भी वापस मिलने की संभावना है.   तुला राशि तुला राशि में ही सूर्य का गोचर होने के कारण इस राशि के जातकों पर इसका विशेष प्रभाव देखने को मिल सकता है. त्रिग्रही योग के प्रभाव से आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं. व्यापार करने वालों को कोई बड़ी सफलता मिल सकती है. महत्वपूर्ण डील फाइनल होने या कारोबार में विस्तार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं. समाज में आपकी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान बढ़ सकता है. पारिवारिक जीवन में भी सुख-शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहेगा. पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी यह समय अच्छा रह सकता है. मकर राशि मकर राशि के जातकों के लिए भी ग्रहों का यह संयोग आर्थिक और करियर के लिहाज से लाभकारी साबित हो सकता है. कारोबार से जुड़े लोगों को अच्छा मुनाफा मिलने के साथ व्यापार को आगे बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं. पैतृक संपत्ति से लाभ होने की संभावना है. वहीं नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा और करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं. लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिलने से आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है. अगर आप कोई नया कारोबार शुरू करने या किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अनुकूल रह सकता है.

शारदीय नवरात्रि 2026 की तारीख हुई तय, 11 अक्टूबर को घटस्थापना; जानें शुभ मुहूर्त

Shardiya Navratri 2026  मां दुर्गा की आराधना का सबसे पवित्र पर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होने जा रहा है. नवरात्र का यह पावन पर्व 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा. इस बार नवरात्र को लेकर एक विशेष धार्मिक मान्यता सामने आ रही है. ज्योतिषीय गणना और पंचांग के अनुसार, इस वर्ष जगत जननी मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा. धार्मिक परंपराओं में मां दुर्गा का हाथी पर आगमन बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि हाथी पर देवी का आगमन अच्छी वर्षा, कृषि में उन्नति, सुख-समृद्धि, शांति और स्थिरता का संकेत देता है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि देवी की सवारी से जुड़े ये फलादेश धार्मिक मान्यताओं और परंपरागत ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होते हैं. तो आइए पंडित श्रीपति त्रिपाठी जी से जानते हैं, इस वर्ष शारदीय नवरात्र कब से शुरू होगी? कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है? नवरात्र के प्रमुख दिन कौन-कौन से हैं? और इस बार देवी का आगमन और गमन किस वाहन पर होगा? 11 अक्टूबर से शुरू होगी नवरात्र 11 अक्टूबर, रविवार से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होगा. इस दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी. विधि-विधान से कलश स्थापना की जाएगी और मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होगी. नवरात्र के पहले दिन घर में कलश स्थापना करके मां भगवती की आराधना शुरू की जाती है. श्रद्धालु नौ दिनों तक माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं. इस दौरान अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत, जप, पाठ और साधना की जाती है. कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग रहेगा. कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त को विशेष महत्व दिया जाता है. इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा. इसी दौरान कलश स्थापना करना शुभ माना जाता है. हालांकि, अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय समय के अंतर के कारण मुहूर्त में थोड़ा बदलाव हो सकता है. इसलिए श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि जरूर कर लेनी चाहिए. नवरात्र में करें दुर्गा सप्तशती का पाठ नवरात्र केवल व्रत रखने का पर्व नहीं है, बल्कि यह शक्ति की उपासना और आत्मिक साधना का भी समय माना जाता है. आश्विन शुक्ल पक्ष की नवरात्र को आदि शक्ति मां दुर्गा की आराधना के साथ भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से भी जोड़ा जाता है. नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना या योग्य ब्राह्मण और पुरोहित से संकल्प लेकर इसका पाठ करवाना धार्मिक रूप से पुण्यकारी माना जाता है. मान्यता है कि मां भगवती की आराधना से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. अब जानते हैं नवरात्र के प्रमुख दिनों और उनसे जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों के बारे में. 16 अक्टूबर, शुक्रवार को बेलवरण पूजा होगी. बेलवरण दुर्गा पूजा की महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है. खासतौर पर बंगाल और पूर्वी भारत की दुर्गा पूजा परंपराओं में इसका विशेष महत्व माना जाता है. 17 अक्टूबर को महा सप्तमी 17 अक्टूबर, शनिवार को महा सप्तमी से जुड़ी पूजा होगी. पंचांग के अनुसार, सुबह 8:58 बजे के बाद सप्तमी से संबंधित पूजा की जाएगी. इसी दिन नवरात्र की कई महत्वपूर्ण परंपराएं पूरी की जाएंगी. नौपत्रिका प्रवेश, निशा पूजा और मूल नक्षत्र में पूजा पंडालों में देवी की स्थापना की जाएगी. इसी दिन श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मां दुर्गा के पट भी खोल दिए जाएंगे. यानी 17 अक्टूबर से दुर्गा पूजा का उत्साह और भी बढ़ जाएगा और भक्त मां के दर्शन कर सकेंगे. 18 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी 18 अक्टूबर, रविवार को श्री दुर्गा अष्टमी का व्रत रखा जाएगा. इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है. अष्टमी का दिन नवरात्र साधना में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, मां दुर्गा की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार कन्या पूजन सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. इसी दिन विशेष पूजा और महानिशा पूजा का भी विधान रहेगा. 19 अक्टूबर को संधि पूजा और महानवमी 19 अक्टूबर, सोमवार को अष्टमी और नवमी तिथि की संधि बेला में संधि पूजा की जाएगी. पंचांग के अनुसार, संधि पूजा का विशेष समय सुबह 6:53 बजे रहेगा. अष्टमी और नवमी के मिलन का यह समय धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए संधि पूजा को विशेष विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न किया जाता है. इसी दिन महानवमी का पर्व भी मनाया जाएगा. 20 अक्टूबर को विजयादशमी और विसर्जन 20 अक्टूबर, मंगलवार को उदया तिथि के अनुसार नवमी रहेगी और नवमी तिथि सुबह 9:35 बजे तक रहेगी. इसके बाद नवरात्र व्रत का पारण किया जाएगा. इसी दिन विजयादशमी यानी दशहरा भी मनाया जाएगा. मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन भी इसी दिन किया जाएगा. हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन धार्मिक मान्यता और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा. देवी का हाथी पर आगमन धार्मिक परंपराओं में बेहद शुभ माना जाता है. हाथी को समृद्धि, स्थिरता और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है. इसलिए मान्यता है कि देवी के हाथी पर आगमन से अच्छी वर्षा, कृषि में उन्नति, सुख-समृद्धि और खुशहाली का वातावरण बन सकता है. विशेष रूप से कृषि प्रधान समाज में अच्छी वर्षा का विशेष महत्व होता है. हालांकि, यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है कि देवी की सवारी से संबंधित ये फलादेश धार्मिक मान्यताओं और परंपरागत पंचांग गणनाओं पर आधारित हैं. मां दुर्गा की आराधना में रखें श्रद्धा और संयम इस प्रकार 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ शुरू होने वाला शारदीय नवरात्र का यह पावन पर्व 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा. नवरात्र केवल बाहरी उत्सव का पर्व नहीं है. यह अपने भीतर की शक्ति को पहचानने, मन को शुद्ध करने और मां भगवती के प्रति अपनी श्रद्धा को मजबूत करने का अवसर भी है. इन नौ दिनों में हम मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं. मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक देवी के प्रत्येक स्वरूप में शक्ति, भक्ति और जीवन से जुड़े अलग-अलग संदेश छिपे हुए हैं. इस नवरात्र अपने घर … Read more

शनि देव की बदलेगी चाल, 11 दिसंबर से इन 6 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन

शनि देव को ज्योतिष में कर्म और न्याय का कारक माना जाता है. उनकी चाल में बदलाव का असर व्यक्ति के करियर, आर्थिक स्थिति, कारोबार और निजी जीवन पर देखने को मिलता है. इस समय शनि वक्री अवस्था में मीन राशि में गोचर कर रहे हैं. ऐसे में कई लोगों को काम में देरी, मानसिक दबाव और आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि आने वाले समय में स्थिति बदलने वाली है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार शनि 11 दिसंबर 2026 को वक्री से मार्गी होंगे. यानी करीब 65 दिन बाद शनि अपनी सीधी चाल में लौटेंगे. शनि के मार्गी होने के बाद कुछ राशियों के रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं. लंबे समय से चल रही परेशानियों से राहत मिलने के योग बन सकते हैं. वृषभ राशि शनि के मार्गी होने के बाद वृषभ राशि वालों के लिए परिस्थितियां धीरे-धीरे बेहतर हो सकती हैं. लंबे समय से अटके कामों में गति आने के संकेत हैं. नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है. कारोबार करने वालों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं. आर्थिक स्थिति में सुधार होने और पुराने निवेश से लाभ मिलने की संभावना है. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि की सीधी चाल राहत लेकर आ सकती है. अगर आप लंबे समय से नौकरी बदलने की सोच रहे हैं तो अच्छा अवसर मिल सकता है. करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं. आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं. कन्या राशि कन्या राशि वालों को शनि मार्गी होने का लाभ कार्यक्षेत्र में मिल सकता है. नौकरी में आपके काम की सराहना हो सकती है. प्रमोशन के अवसर बन सकते हैं. पुराने निवेश या किसी पुरानी डील से आर्थिक फायदा मिलने के योग हैं. तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए शनि की सीधी चाल आर्थिक और करियर से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव ला सकती है. नौकरी में चल रहा दबाव कम हो सकता है. कारोबारियों को भी फायदा होने के संकेत हैं. हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा, ताकि बढ़ती आमदनी का लाभ बचत के रूप में भी मिल सके. मकर राशि मकर राशि शनि की अपनी राशि है, इसलिए शनि की चाल में बदलाव का असर इस राशि पर विशेष माना जाता है. मार्गी शनि के प्रभाव से करियर में स्थिरता आ सकती है. नौकरी में ग्रोथ और सैलरी बढ़ने के अवसर बन सकते हैं. कुंभ राशि कुंभ राशि के जातकों को भी शनि के मार्गी होने से राहत मिल सकती है. नौकरी या कारोबार में आ रही अड़चनें धीरे-धीरे कम हो सकती हैं. कार्यक्षेत्र में दबाव घटेगा. लंबित काम आगे बढ़ सकते हैं. परिवार के साथ भी अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा. आर्थिक मामलों में स्थिरता आने के साथ जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी संतुलन बढ़ सकता है. शनि के मार्गी होने का क्या मतलब है? ज्योतिष में ग्रह की वक्री अवस्था को उसकी प्रत्यक्ष गति से अलग माना जाता है. शनि की वक्री चाल के दौरान कई मामलों में देरी, दोबारा समीक्षा और पुराने कामों पर लौटने की स्थिति बन सकती है. वहीं मार्गी होने के बाद रुके हुए मामलों में गति आने की ज्योतिषीय मान्यता है. हालांकि शनि के परिणाम हर व्यक्ति के लिए एक जैसे नहीं होते. जन्म कुंडली में शनि की स्थिति, दशा और अन्य ग्रहों के प्रभाव के आधार पर फल अलग-अलग हो सकते हैं. इसलिए किसी भी बड़े आर्थिक या करियर संबंधी फैसले को केवल राशिफल के आधार पर नहीं लेना चाहिए.

नवरात्र 2026 में महाअष्टमी-नवमी की सही तारीख क्या? जानें कन्या पूजन और हवन का शुभ दिन

शारदीय नवरात्र में इस बार महाष्टमी और महानवमी की तिथि को लेकर लोगों के मन में काफी कंफ्यूजन है. खासकर उन लोगों के बीच जो अष्टमी का व्रत रखते हैं या फिर नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन करते हैं।  कई परिवारों में अष्टमी की पूजा की परंपरा है, तो कई घरों में नवमी की पूजा प्रमुख रूप से की जाती है. ऐसे में सवाल है कि इस बार अष्टमी का व्रत और पूजन किस दिन करना चाहिए? महानवमी की पूजा कब होगी? कन्या पूजन किस दिन करना शुभ रहेगा? और संधि पूजा का मुहूर्त क्या है? इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगी. आइए पंडित प्रवीण मिश्र जी से जानते हैं कि महा अष्टमी और महा नवमी की तिथि के बारे में।  19 अक्टूबर को होगी महाष्टमी की पूजा इस वर्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:27 बजे होगा और इसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर को अष्टमी मानी जाएगी. इसलिए जिन लोगों के यहां अष्टमी के दिन विशेष पूजा, हवन या कन्या पूजन की परंपरा है, वे 19 अक्टूबर को यह अनुष्ठान कर सकते हैं।  अगर आप अष्टमी का व्रत रखते हैं तो 19 अक्टूबर को व्रत रखें और विधि-विधान से मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करें।  कन्या पूजन या कन्या भोजन कराने वाले लोग भी 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के दौरान यह अनुष्ठान कर सकते हैं. कोशिश करें कि अष्टमी से जुड़े पूजा-पाठ और कन्या पूजन सुबह 10:51 बजे से पहले कर लिया जाए।  रात में अष्टमी पूजा की परंपरा है तो क्या करें? कुछ परिवारों में महाष्टमी की पूजा रात्रि में करने की परंपरा होती है. खासकर कुछ परिवारों में कुलदेवी या मां चामुंडा की पूजा रात के समय की जाती है. ऐसे परिवार 18 अक्टूबर की रात को अष्टमी तिथि लगने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।  महानवमी की पूजा कब होगी? 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी. इसलिए 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जा सकता है।  अगर आपके परिवार में नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है, तो आप 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद कन्या पूजन और हवन कर सकते हैं।  यानी 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों का कन्या पूजन किया जा सकता है।  20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं नवमी का कन्या पूजन कुछ लोग उदया तिथि को विशेष महत्व देते हैं. ऐसे लोग 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं. हालांकि, इस दिन नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक ही रहेगी. इसलिए 20 अक्टूबर को नवमी के अनुसार पूजा, हवन और कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को दोपहर 12:50 बजे से पहले यह अनुष्ठान पूरा कर लेना चाहिए. इस तरह, जो लोग उदया तिथि को मानते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं।  महानवमी का व्रत कब रखें और पारण कब करें? जिन लोगों के यहां महानवमी का व्रत रखने की परंपरा है, वे नवमी के दिन यानी 19 अक्टूबर को व्रत रख सकते हैं. नवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा करें और पूरे दिन व्रत रखें. व्रत का पारण अगले दिन यानी विजयादशमी के दिन करना उचित माना जाता है।  संधि पूजा का शुभ मुहूर्त इस वर्ष संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा. यह कुल 48 मिनट का समय होगा. अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर कुल 48 मिनट का यह समय संधि काल कहलाता है. इसी दौरान संधि पूजा की जाती है।  शास्त्रों में संधि काल को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण करके चंड और मुंड नामक असुरों का संहार किया था. इसी वजह से संधि पूजा में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है. मान्यता है कि इस विशेष समय में मां चामुंडा की पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी को कमल पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। 

11 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू, पूजा से पहले घर से बाहर करें टूटी मूर्तियां, खराब सामान और ये चीजें

शारदीय नवरात्रि: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होने वाला है। पूरे 9 दिन चलने वाले इस त्योहार में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। वैसे नवरात्रि की तैयारियां कई दिनों पहले ही शुरू हो जाती हैं। खासकर घर की साफ-सफाई का काम तो जल्दी से जल्दी शुरू हो जाता है। इस दौरान सिर्फ धूल-मिट्टी साफ करना ही काफी नहीं है, बल्कि ऐसी चीजों को भी हटाना भी जरूरी है जिनका इस्तेमाल लंबे समय तक नहीं हुआ है। कई बार हम पुरानी और बेकार चीजों को ये सोचकर संभालकर रखते जाते हैं कि ये बाद में काम आएंगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता और घर में बेकार की चीजें बढ़ती जाती हैं। ऐसे में नवरात्रि के लिए आप भी घर की सफाई करने वाले हैं तो ये चीजें हटाना ना भूलें। रसोई से निकालें टूटे हुए बर्तन और सामान रसोई में रखे टूटे-फूटे बर्तन, चटके हुए कप-प्लेट, खराब डिब्बे और लंबे समय तक इस्तेमाल ना हुए सामान को अलग कर दें। इनकी वजह से रसोई साफ करने के बाद भी भरी-भरी और अव्यवस्थित नजर आती है। हो सके तो त्योहरों से पहले पुराने डिब्बे बदलकर नए और मजबूत डिब्बों से रिप्लेस कर दें। खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान पुराने और बेकार चार्जर, खराब इयरफोन, केबल और काम ना करने वाले इलेक्ट्रिक गैजेट्स या दूसरे सामान को यूं ही घर में इक्कठा करने से कोई फायदा नहीं है। ये दोबारा काम भी नहीं आते हैं और फालतू की जगह घेरकर रखते हैं। इसलिए सफाई के दौरान इन्हें भी घर से निकालने का इंतजाम करें। पुराने कपड़े और जूते-चप्पल अलमारी में कई ऐसे कपड़ों का ढेर लगा हुआ रहता है, जिन्हें कोई पहनता भी नहीं है और वो दोबारा इस्तेमाल भी नहीं होते। ऐसे ही जूते-चप्पल के ढेर भी रखे रहते हैं। सफाई के दौरान इन्हें भी निकालकर अलग करें। इसमें से ठीक सामान को किसी जरूरतमंद को डोनेट किया जा सकता है। मंदिर से हटाएं टूटी हुई मूर्तियां घर के मंदिर में रखी हुई खंडित मूर्तियों और तस्वीरों को भी अलग कर दें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी मूर्तियों को घर में रखना शुभ नहीं माना जाता है। इन्हें किसी मंदिर, धार्मिक स्थान या उचित व्यवस्था के अनुसार विसर्जित कर दें। बंद घड़ी और टूटा हुआ सामान घर में बंद और टूटी हुई घड़ी रखना अशुभ माना जाता है। साथ ही ये फालतू की जगह भी घेरकर रखती है। इसके अलावा टूटे हुए शोपीस, चटका हुआ शीशा और खराब सामान को भी अलग निकालकर रख दें। इससे घर की सफाई के साथ-साथ अनावश्यक सामान भी कम होगा। सूखे हुए खराब पौधे अगर आपके घर में पूरी तरह सूख चुके या खराब हो चुके पौधे रखे हैं तो उन्हें भी नवरात्रि की सफाई के दौरान घर से अलग कर दें। इसके अलावा सूखे हुए फूल या फूलों की माला को उचित व्यवस्था के साथ घर से हटा दें। नवरात्रि से पहले हटाएं तामसिक चीजें नवरात्रि की सफाई के दौरान घर से तामसिक चीजें भी हटा देनी चाहिए। अगर आपके घर पुरानी शराब की बोतल इक्कठा हैं, तो उन्हें कबाड़ में दे दें। इसके अलावा रसोई और फ्रिज से मांस, अंडे और प्याज-लहसुन भी निकाल दें।