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वास्तु शास्त्र में तवा रखने के तरीके से जुड़ी मान्यताएं और उसके प्रभाव

 वास्तु शास्त्र में रसोई को घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. यह न केवल हमारे भोजन का स्रोत है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य केंद्र भी है. रसोई में रखी हर छोटी-बड़ी वस्तु हमारे जीवन और भाग्य पर सीधा प्रभाव डालती है.  इनमें से एक सबसे सामान्य वस्तु है तवा. अक्सर जल्दबाजी में हम खाना बनाने के बाद तवे को उल्टा रख देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मामूली सी आदत आपके घर की सुख-समृद्धि को दांव पर लगा सकती है? तवे का राहु से गहरा नाता वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, रसोई में उपयोग होने वाला तवा केवल लोहे या धातु का एक टुकड़ा नहीं है.  इसका सीधा संबंध राहु ग्रह से माना जाता है.  ज्योतिष शास्त्र में राहु को मायावी और नकारात्मकता का कारक माना गया है.  यदि आप तवे को सही ढंग से नहीं रखती हैं, तो यह घर में राहु दोष पैदा कर सकता है, जिससे पारिवारिक शांति और आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है. उल्टा तवा रखने के नुकसान आर्थिक तंगी: मान्यता है कि तवे को उल्टा रखने से घर में धन का प्रवाह बाधित होता है. यह फिजूलखर्ची और आर्थिक नुकसान का संकेत हो सकता है. मानसिक तनाव: वास्तु के अनुसार, उल्टा तवा घर के सदस्यों के बीच कलह और मानसिक तनाव बढ़ाता है. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. स्वास्थ्य समस्याएं: रसोई में गंदगी या गलत तरीके से बर्तन रखने का सीधा असर घर की सेहत पर पड़ता है. यह परिवार के मुखिया के स्वास्थ्य को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है. वास्तु अनुसार सही तरीका साफ-सफाई है जरूरी: रोटी बनाने के बाद तवे को हमेशा अच्छी तरह धोकर और सुखाकर ही रखें. कभी भी गंदा तवा गैस पर या स्लैब पर न छोड़ें. सीधा रखें: उपयोग के बाद तवे को हमेशा सीधा करके ही रखें. यह सकारात्मक ऊर्जा के संचार में मदद करता है. नजरों से बचाएं: कोशिश करें कि तवे को ऐसी जगह रखें जहां बाहर से आने वाले लोगों की सीधी नजर उस पर न पड़े. रसोई में इसे किसी साफ और ढकी हुई जगह पर रखना सबसे उत्तम है. कपूर का प्रयोग: कभी-कभी आप तवे पर थोड़ा कपूर का प्रयोग कर सकती हैं, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने में सहायक माना जाता है.

वास्तु शास्त्र के अनुसार पर्स में ये चीजें रखने से रुक सकती है धन की वृद्धि

 वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारा बटुआ (पर्स) केवल धन रखने का एक साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यक्तिगत ऊर्जा क्षेत्र (Personal Energy Field) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.  जैसे घर की दिशाएं और सजावट हमारे जीवन पर गहरा असर डालती हैं, वैसे ही पर्स में रखी गई वस्तुएं भी सीधे तौर पर हमारी आर्थिक स्थिति और धन के प्रवाह (Cash Flow) को प्रभावित करती हैं. अक्सर हम अनजाने में अपने पर्स को कबाड़खाना बना देते हैं, जिसमें ढेर सारी फालतू चीजें जमा होती रहती हैं. वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि पर्स में नकारात्मक ऊर्जा वाली चीजें रखने से धन का आगमन रुक जाता है. इससे व्यक्ति को अनावश्यक आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यदि आप भी अपने जीवन में आर्थिक स्थिरता और सकारात्मकता चाहते हैं, तो अपने पर्स की ऊर्जा को शुद्ध करना बेहद जरूरी है. 1. पुरानी रसीदें और फालतू कागज हम अक्सर शॉपिंग के बाद मिलने वाली रसीदें या पुराने बिल पर्स में ही भूल जाते हैं.  वास्तु शास्त्र में इन्हें नकारात्मक ऊर्जा का संचय माना जाता है.  ये पुरानी रसीदें हमारे बीते हुए खर्चों की याद दिलाती हैं, जो अवचेतन मन में धन की कमी का डर पैदा करती हैं. इन्हें समय-समय पर हटाते रहें ताकि नई ऊर्जा (पैसा) के लिए जगह बन सके. 2. फटे हुए नोट और पुराने कागजात फटे हुए नोट दरिद्रता को आमंत्रित करते हैं. वास्तु के अनुसार, पैसा माता लक्ष्मी का स्वरूप है, और फटे हुए नोट का पर्स में होना धन के प्रति अनादर दर्शाता है. इससे धन की बचत नहीं हो पाती, पैसा आते ही खर्च हो जाता है.  हमेशा साफ-सुथरे और व्यवस्थित नोट ही रखें. 3. मृत पूर्वजों की तस्वीरें श्रद्धा के कारण लोग अक्सर अपने पूर्वजों की तस्वीरें पर्स में रखते हैं.  लेकिन वास्तु शास्त्र कहता है कि मृत व्यक्तियों की तस्वीरें पर्स में रखने से व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और यह धन की वृद्धि में रुकावट करता है. पूर्वजों को घर के उत्तर-पूर्व या किसी विशेष स्थान पर स्थान देना चाहिए, न कि वॉलेट के अंदर. 4. हिसाब-किताब के कागज उधारी, कर्ज या लेनदेन का हिसाब-किताब रखने वाली पर्चियां पर्स में रखना वास्तु दोष पैदा करता है. यह लगातार आपको तनाव और कर्ज की स्थिति की याद दिलाता है, जिससे मानसिक शांति भी भंग होती है.  धन संबंधी कार्य बिगड़ने लगते हैं. हिसाब-किताब के लिए एक अलग डायरी का उपयोग करें. 5. धारदार और नुकीली चीजें पर्स में पुराने ब्लेड, सेफ्टी पिन, पुरानी चाबियां या कोई भी नुकीली वस्तु रखना नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है.  ये वस्तुएं वास्तु दोष पैदा करती हैं, जो आपके आर्थिक निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं और अनावश्यक विवादों को जन्म देती हैं.

घने पौधे बालकनी और बगीचे में बन सकते हैं सांप-बिच्छू के छिपने की जगह, सावधानी जरूरी

अक्सर हम अपने घर या अपार्टमेंट की बालकनी और बगीचे को हरा-भरा बनाने के लिए कई तरह के पौधे लगा लेते हैं.लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ पौधे अनजाने में सरीसृपों और कीटों के लिए छिपने की बेहतरीन जगह बन सकते हैं? टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, घनी झाड़ियाँ और कुछ विशेष प्रकार के पौधे सांप और बिच्छुओं को आकर्षित कर सकते हैं. यहां उन प्रमुख पौधों की सूची दी गई है, जिन्हें घर के आसपास लगाने में सावधानी बरतनी चाहिए: 1. चमेली (Jasmine) क्यों खतरनाक: यह तेजी से बढ़ती है और इसकी घनी लताओं के नीचे नमी और सूखी पत्तियां जमा हो जाती हैं, जो कीड़ों और छोटे छिपकलियों के लिए छिपने की जगह बनती हैं.इन्हें खाने वाले जीव और उनके पीछे-पीछे सांप यहाँ आ सकते हैं. वास्तु और दिशा: चमेली का पौधा सकारात्मक ऊर्जा देता है, लेकिन इसे घर के मुख्य द्वार या खिड़कियों के ठीक बगल में बहुत घना न होने दें.वास्तु के अनुसार, इसे उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है, बशर्ते इसकी नियमित कटाई-छंटाई की जाए. 2. केला (Banana Plant) क्यों खतरनाक: केले के चौड़े पत्ते जमीन पर गिरकर नमी बनाए रखते हैं.यह नमी बिच्छुओं और छोटे रेंगने वाले जीवों को आकर्षित करती है.घनी पत्तियों के नीचे सांपों को आसान आश्रय मिल जाता है. वास्तु और दिशा: वास्तु शास्त्र में केले के पौधे का बहुत महत्व है, इसे उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है.बस ध्यान रखें कि इसके पास कचरा जमा न हो और जमीन हमेशा साफ रहे. 3. जुनिपर झाड़ियाँ (Juniper Shrubs) क्यों खतरनाक: ये झाड़ियाँ जमीन के काफी करीब फैलती हैं, जिससे इनके नीचे एक अंधेरा और सुरक्षित कोना बन जाता है.यहाँ बिच्छू छिप सकते हैं और रात में सांप इन रास्तों का उपयोग सुरक्षित गलियारे के रूप में कर सकते हैं. वास्तु और दिशा: इसे घर के मुख्य रास्तों या प्रवेश द्वार पर न लगाएं.इसे पश्चिम या दक्षिण दिशा में खुले स्थान पर लगाना बेहतर है, जहाँ आप आसानी से देख सकें कि इसके नीचे कोई हलचल तो नहीं है. 4. ग्राउंडकवर और सजावटी बेलें (Groundcovers/Ivy) क्यों खतरनाक: ये पौधे जमीन को पूरी तरह ढक लेते हैं.इनके नीचे क्या हो रहा है, यह देख पाना मुश्किल होता है, जो इन्हें बिच्छुओं और सांपों के लिए सुरक्षित अड्डा बनाता है. वास्तु और दिशा: इन्हें घर की बाहरी सीमा (Boundary Wall) के पास लगाने से बचें.यदि लगाना ही हो, तो दक्षिण-पश्चिम दिशा में सीमित मात्रा में लगाएं, लेकिन ध्यान रखें कि ये दीवारों पर न चढ़ें. वास्तु और सुरक्षा के उपाय सांप और बिच्छुओं से बचने के लिए केवल पौधों को हटाना ही काफी नहीं है, बल्कि कुछ वास्तु और सुरक्षा नियमों का पालन भी जरूरी है: नियमित सफाई: पौधों के नीचे सूखी पत्तियों, कचरे या निर्माण सामग्री को बिल्कुल भी जमा न होने दें. कटाई-छंटाई (Pruning): पौधों को इतना न बढ़ने दें कि वे दीवारों या जमीन को पूरी तरह ढक लें.हवा और रोशनी का आवागमन बना रहना चाहिए. रोशनी की व्यवस्था: बगीचे या बालकनी के उन कोनों में लाइट जरूर लगाएं जहाँ अंधेरा रहता है.सांप और बिच्छू अंधेरी और ठंडी जगह पसंद करते हैं. पानी का निकास: गमलों के आसपास पानी का जमाव न होने दें, क्योंकि नमी कीटों को आकर्षित करती है. वास्तु टिप्स: घर के मुख्य द्वार के पास बहुत घने और कांटेदार पौधे लगाने से बचें.ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को हमेशा साफ-सुथरा रखें.घर की परिधि (Boundary) के पास अधिक घनी झाड़ियाँ लगाने के बजाय खुले स्थान रखें.

29 जून की ज्येष्ठ पूर्णिमा से मेष, मिथुन, तुला और धनु राशि वालों के लिए शुभ योग बनने के आसार

 इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून को मनाई जाएगी और इसी को वट सावित्री पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. ज्येष्ठ पूर्णिमा का सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व है. इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है और ज्येष्ठ मास समाप्त होकर आषाढ़ महीने की शुरुआत होती है. ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण इस पूर्णिमा का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है. कुछ राशियों के लिए यह समय बेहद शुभ और धन-लाभ कराने वाला रहेगा, तो वहीं कुछ राशियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी. आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ पूर्णिमा से किन राशियों को लाभ होने जा रहा है और किन्हें नुकसान या चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इन राशियों को होगा जबरदस्त लाभ (Lucky Zodiac Signs) मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए यह पूर्णिमा आर्थिक रूप से बेहद शुभ रहने वाली है. रुके हुए काम गति पकड़ेंगे.  नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर सराहना मिलेगी. पदोन्नति के योग बन सकते हैं. व्यापार में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. पैतृक संपत्ति से लाभ होने की संभावना है. मिथुन राशि (Gemini) आपकी गोचर कुंडली में धन भाव और भाग्य भाव सक्रिय रहने से आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. नए बिजनेस की शुरुआत के लिए समय उत्तम है. अगर निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह अवधि आपको भविष्य में बड़ा मुनाफा देगी. प्रेम जीवन और वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी. संतान पक्ष से कोई शुभ समाचार मिल सकता है. तुला राशि (Libra) तुला राशि वालों के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा मानसिक शांति और धन-धान्य लेकर आ रही है. आय के नए स्रोत बनेंगे. जो लोग कला, मीडिया, या लेखन के क्षेत्र से जुड़े हैं, उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के बेहतरीन अवसर मिलेंगे. पुराने कर्जों से मुक्ति मिल सकती है. परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जाने के योग हैं. धनु राशि (Sagittarius) आपकी राशि के लिए यह समय भाग्योदय जैसा रहेगा. अटके हुए सरकारी काम पूरे होंगे. नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अच्छी खबर मिल सकती है. अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा. स्वास्थ्य में सुधार होगा. कोर्ट-कचहरी के मामलों में फैसला आपके पक्ष में आने की उम्मीद है. इन राशियों को रहना होगा सावधान (Cautious Zodiac Signs) 1. वृषभ राशि (Taurus) नुकसान: आर्थिक मामलों में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. खर्चों में अचानक बढ़ोतरी होने से बजट बिगड़ सकता है. सलाह- इस समय किसी को भी बड़ा कर्ज या उधार देने से बचें, पैसा फंस सकता है. वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा अपनों से विवाद हो सकता है. 2. कन्या राशि (Virgo) नुकसान: कार्यस्थल पर काम का दबाव बढ़ने से मानसिक तनाव और थकान का अनुभव हो सकता है. विरोधी आपके काम में बाधा डालने की कोशिश कर सकते हैं. सलाह- सेहत को लेकर बिल्कुल लापरवाही न बरतें. कोई भी बड़ा निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह जरूर लें. 3. मकर राशि (Capricorn) नुकसान: वैवाहिक जीवन या साझेदारी के बिजनेस में कुछ वैचारिक मतभेद उभर सकते हैं. बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला नुकसान करा सकता है. सलाह- वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखें. खुद को शांत रखने के लिए ध्यान या योग का सहारा लें. पूर्णिमा के विशेष उपाय शुभ फलों की प्राप्ति और नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें. शाम के समय चंद्र देव को दूध और जल का अर्घ्य दें. दान-पुण्य करने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि मिलती है.

नीम करोली बाबा और उनका कंबल: आस्था, वैराग्य और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक

 भारत एक ऐसा देश है जहां लोग आस्था, संस्कृति, धर्म और रहस्यमयी शक्तियों पर गहरा विश्वास रखते हैं. यहां के संत-महात्माओं में एक बहुत प्रसिद्ध नाम है नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके भक्त प्यार से महाराज जी कहते हैं. उनकी ख्याति सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि विदेशों तक पहुंची. मशहूर बिजनेसमैन स्टीव जॉब्स और अमेरिकी आध्यात्मिक गुरु राम दास भी उनसे प्रभावित थे. नीम करोली बाबा की एक खास पहचान उनकी सादी ऊनी चादर थी. कहा जाता है कि वे हर मौसम में, चाहे कड़ाके की ठंड हो या तेज गर्मी, हमेशा उसी चादर में रहते थे. यह बात कई लोगों को हैरान करती थी और वे सोचते थे कि इसके पीछे क्या रहस्य है. नीम करोली बाबा हमेशा कंबल क्यों ओढ़ते थे? हालांकि, इस बात का कोई पुख्ता सबूत तो नहीं है. लेकिन, बाबा के भक्त दादा मुखर्जी कहते हैं कि कि वह कंबल जैसे बाबा का ही एक हिस्सा हो. बाबा जहां भी जाते, वह कंबल हमेशा उनके साथ रहता था. कई बार उस कंबल से नवजात बच्चे जैसी खुशबू आती थी. लोगों का यह भी मानना था कि वह कंबल कभी बहुत हल्का तो कभी भारी महसूस होता था, जैसे उसमें अपनी कोई शक्ति या चेतना हो. उन्होंने कहा कि बाबा के पास दो कंबल थे, एक जो सबको दिखता था, जो उनके शरीर को ढकता था. दूसरा जो दिखाई नहीं देता था, जो उनकी बड़ी आध्यात्मिक शक्ति और उपलब्धियों को छुपाए रखता था. वैराग्य का प्रतीक दादा मुखर्जी ने बताया कि बाबा का कंबल सिर्फ पहनने की चीज नहीं था, बल्कि वह त्याग (वैराग्य) और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक था. महाराज जी हमेशा वैराग्य की बात करते थे कहा जाता है कि एक बार एक भक्त उनके कंबल को ठीक करने लगा, तो बाबा ने कहा, 'इसे रहने दो, जैसा है वैसा ही रहने दो. किसी को भी किसी चीज से बंधा नहीं होना चाहिए.' भक्तों का मानना है कि यह हिंदू धर्म के एक मुख्य सिद्धांत वैराग्य को दर्शाता है. यह कंबल इस बात का प्रतीक था कि हमारा शरीर अस्थायी है और आत्मा ही सच्ची और हमेशा रहने वाली है. बाबा अपने आराम और बाहरी रूप की परवाह नहीं करते थे, ताकि लोग अंदर की चेतना पर ध्यान दें, न कि शरीर पर. भक्तों की रक्षा के लिए एक और वजह यह मानी जाती है कि बाबा कंबल अपने भक्तों की रक्षा के लिए ओढ़ते थे. कहा जाता है कि वे अपने भक्तों की बीमारी और कर्मों का बोझ खुद पर ले लेते थे. दादा मुखर्जी के अनुसार, 'वह कंबल उन सभी दुखों और पीड़ा को छुपा लेता था, जो बाबा दूसरों से अपने ऊपर ले लेते थे. वह सिर्फ शरीर को नहीं ढकता था, बल्कि उसमें ऐसी आध्यात्मिक शक्ति भी थी, जिससे वे अपने भक्तों का दुख दूर कर सकते थे.' कई लोगों का यह भी मानना है कि बाबा कभी-कभी बीमार लोगों पर वह कंबल रख देते थे, जिससे उन्हें राहत मिलती थी. एक भक्त ने बताया कि एक बहुत ठंडी रात में वह कंबल आसपास के लोगों को गर्माहट और सुकून देता हुआ महसूस हुआ. जीवन में शांति का प्रतीक महाराज जी के कंबल का रंग भी खास माना जाता है. उनका कंबल अक्सर नीले या हल्के रंग का होता था. नीला रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. इसलिए लोग मानते हैं कि वह कंबल उन्हें अंदर से शांत और संतुलित बनाए रखता था. बाबा कहते थे कि इंसान सिर्फ शरीर नहीं है, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक शक्ति का रूप है. उनका कंबल यह भी दिखाता था कि उन्हें गर्मी-ठंड जैसी शारीरिक चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता था, क्योंकि उनका ध्यान अपने आध्यात्मिक मार्ग पर था. अपनी शक्तियों को छुपाने का माध्यम नीम करोली बाबा बहुत साधारण जीवन जीते थे, लेकिन माना जाता है कि उनके पास कई चमत्कारी शक्तियां (सिद्धियां) थीं, जिनके बारे में वह ज्यादा बात नहीं करते थे. कहा जाता है कि उनका कंबल उन शक्तियों को छुपाने का एक तरीका था, ताकि लोग उन्हें लेकर ज्यादा आकर्षित न हों. दादा मुखर्जी के अनुसार, 'शायद वे ऐसा अपने बचाव के लिए या लोगों की भीड़ से बचने के लिए करते थे.' बाबा का कंबल और आस्था अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड एलपर्ट, जो बाद में राम दास बने, ने 1979 में मिरेकल ऑफ लव नाम की किताब लिखी थी. इसमें उन्होंने बाबा के चमत्कारों का जिक्र किया और एक घटना ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ के बारे में भी बताया. क्योंकि बाबा हमेशा कंबल ओढ़ते थे, इसलिए आज भी जब लोग कैंची धाम आश्रम जाते हैं, तो फूल-माला की जगह कंबल चढ़ाते हैं. आज भी क्यों खास है यह कंबल? 1973 में बाबा के निधन के कई साल बाद भी उनकी कंबल ओढ़े तस्वीरें आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं. इन तस्वीरों में वे मुस्कुराते हुए नजर आते हैं. कुछ लोगों के लिए यह कंबल प्यार और सुरक्षा का प्रतीक है, तो कुछ के लिए यह सादगी, त्याग और आत्मिक शांति का संदेश देता है. हालांकि, इतिहास में इसका कोई पक्का कारण नहीं मिलता कि बाबा हर मौसम में कंबल क्यों पहनते थे, लेकिन भक्त मानते हैं कि इसका महत्व सिर्फ उपयोग तक सीमित नहीं था. दादा मुखर्जी ने कहा, 'उस कंबल के नीचे बाबा दुनिया का सारा दुख अपने ऊपर ले लेते थे. यह हमें कर्म और दुखों से बचाने का उनका तरीका था. यह कंबल हमें याद दिलाता है कि जो कुछ हम बाहर ढूंढते हैं, वह सब हमारे अंदर ही है. असली महत्व बाहरी चीजों का नहीं, बल्कि अंदर की यात्रा का है.'

बुध ग्रह वक्री होने से मिथुन धनु वृषभ राशि पर पड़ेगा गहरा प्रभाव रहेगा

 29 जून 2026 से 23 जुलाई 2026 तक बुध ग्रह कर्क और मिथुन राशि में वक्री (उल्टी चाल) होने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, व्यापार और संवाद का कारक माना गया है, इसलिए इनकी प्रतिकूल स्थिति जीवन के इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उथल-पुथल मचा सकती है.  इस बदलाव के दौरान जिन तीन राशियों को अपने कदम बहुत संभालकर रखने होंगे. इन 3 राशियों को बरतनी होगी विशेष सावधानी मिथुन राशि: बुध आपकी राशि के स्वामी ग्रह हैं, इसलिए इसका सबसे गहरा और सीधा प्रभाव आप पर पड़ेगा. इस दौरान आपके अनावश्यक खर्च अचानक बढ़ सकते हैं, जिससे आपका वित्तीय बजट बिगड़ सकता है. बातचीत करते समय शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर करें, क्योंकि आपके कटु वचन किसी बड़े विवाद का कारण बन सकते हैं. धनु राशि: बुध की उल्टी चाल आपके लिए मानसिक तनाव और अनावश्यक चिंताएं लेकर आ सकती है. इस समय व्यापार में अपेक्षित लाभ न मिलने से या किसी गलत निर्णय के कारण आर्थिक नुकसान की संभावना रहेगी. आपको अपने स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखना होगा, क्योंकि पुरानी बीमारियां दोबारा उभर सकती हैं. वृषभ राशि: बुध आपकी राशि के तीसरे भाव (संचार और पराक्रम) में वक्री होने जा रहे हैं. मीडिया, लेखन, मार्केटिंग या सोशल मीडिया से जुड़े जातकों को अपने काम में बार-बार रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है. निवेश से जुड़े मामलों में कोई भी बड़ा कदम उठाने से बचें . अपनी योजनाओं को किसी के साथ साझा न करें. बुध वक्री के दौरान क्या न करें? नया काम शुरू न करें: इस 25 दिनों की अवधि में कोई नया बिजनेस या प्रोजेक्ट शुरू करने से बचें. दस्तावेजों पर जल्दबाजी में हस्ताक्षर न करें: किसी भी वित्तीय या कानूनी अनुबंध पर बिना ठीक से पढ़े साइन न करें. बड़ी खरीदारी टालें: इस समय महंगे गैजेट्स, वाहन या प्रॉपर्टी खरीदना नुकसानदेह साबित हो सकता है.

Friday Horoscope 27 June 2026: जानें किस राशि पर रहेगी मां लक्ष्मी की कृपा, किन्हें मिलेगी बड़ी खुशखबरी

मेष राशि- आपका दिन ठीक-ठाक रहेगा। जिस काम को लेकर पिछले कुछ दिनों से परेशान थे, उसमें राहत मिल सकती है। ऑफिस में काम समय पर पूरा करने की कोशिश करें। घर का माहौल अच्छा रहेगा। पैसों के मामले में जल्दबाजी न करें। वृषभ राशि- मन थोड़ा हल्का रहेगा। परिवार के किसी सदस्य से अच्छी खबर मिल सकती है। नौकरी करने वालों का दिन सामान्य रहेगा। कारोबार में छोटी-सी कमाई भी खुशी दे सकती है। सेहत का ध्यान रखें। मिथुन राशि- लोगों से खुलकर बात करें। आपकी बात का असर होगा। कोई नया काम शुरू करने का मन बन सकता है। खर्च और बचत में संतुलन बनाकर चलें। शाम तक कोई अच्छी खबर मिल सकती है। कर्क राशि- काम थोड़ा ज्यादा रहेगा, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। एक-एक करके सभी काम पूरे हो जाएंगे। परिवार का साथ मिलेगा। किसी पुराने दोस्त से बात हो सकती है। सेहत सामान्य रहेगी। सिंह राशि- मेहनत का फायदा मिलने के योग हैं। ऑफिस में आपकी बात सुनी जाएगी। कारोबार करने वालों को नया मौका मिल सकता है। घर में हंसी-खुशी का माहौल रहेगा। कन्या राशि- जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, लेकिन आप उन्हें अच्छी तरह निभा लेंगे। नौकरी में मेहनत रंग लाएगी। घर में किसी शुभ काम की चर्चा हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें। तुला राशि- किसी जरूरी काम में सफलता मिल सकती है। अगर कहीं पैसा फंसा हुआ है तो उसके मिलने की उम्मीद है। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। बेवजह की बातों में समय खराब न करें। वृश्चिक राशि- नई उम्मीद के साथ दिन की शुरुआत होगी। किसी पुराने काम का अच्छा नतीजा मिल सकता है। दोस्तों से मुलाकात होगी। मन खुश रहेगा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। धनु राशि- दिन आपके पक्ष में रहेगा। कामकाज में अच्छे नतीजे मिल सकते हैं। किसी अपने से मदद मिलेगी। खर्च सोच-समझकर करें। शाम का समय परिवार के साथ अच्छा बीतेगा। मकर राशि- आत्मविश्वास बना रहेगा। लंबे समय से रुका काम आगे बढ़ सकता है। नौकरी और कारोबार दोनों में स्थिति ठीक रहेगी। गुस्से में कोई फैसला लेने से बचें। कुंभ राशि- किस्मत आपका साथ दे सकती है। नए काम की शुरुआत के लिए दिन अच्छा है। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। पैसों से जुड़ा कोई मामला आपके पक्ष में जा सकता है। मीन राशि- दिन राहत देने वाला रहेगा। कई दिनों से चली आ रही चिंता कम हो सकती है। परिवार का साथ मिलेगा। कामकाज में धीरे-धीरे सफलता मिलेगी। आराम के लिए भी थोड़ा समय निकालें।

गरुड़ पुराण के अनुसार रात में अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता, जानिए धार्मिक कारण

जैसे दिन के बाद रात होना निश्चित है, ठीक उसी प्रकार यह भी निश्चित है कि जिसने इस मृत्यु लोक में जन्म लिया है, उसे एक न एक दिन मृत्यु का सामना अवश्य करना पड़ता है. यानी पृथ्वी लोक का सबसे बड़ा सत्य है- मृत्यु. फिर भी कुछ लोग इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पाते है. आपने अक्सर देखा होगा कि हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव का दाह संस्कार किया जाता है. लेकिन अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसका अंतिम संस्कार उसी समय नहीं किया जाता, बल्कि अगले दिन किया जाता है. ऐसे में एक बात और ध्यान देने वाली होती है कि शव को रात भर कभी भी अकेला नहीं छोड़ा जाता है. लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है? आइए, इसके पीछे के धार्मिक कारणों को समझते हैं, जिनका उल्लेख गरुड़ पुराण में मिलता है. किन परिस्थितियों में टाल दिया जाता है अंतिम संस्कार? किन स्थितियों में दाह संस्कार को कुछ समय के लिए रोका जाता है? गरुड़ पुराण के मुताबिक, यदि मृत्यु सूर्यास्त के बाद हो जाए या यदि मृत्यु पंचक काल में हो तो ऐसी परिस्थितियों में शव को घर पर ही रखा जाता है. शुभ समय आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाता है. मान्यता है कि इन समयों में दाह संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष प्राप्त नहीं होता है. शव को अकेला क्यों नहीं छोड़ा जाता है? 1. जानवरों से सुरक्षा गरुड़ पुराण के मुताबिक, अगर शव को अकेला छोड़ दिया जाए, तो कुत्ते या अन्य जानवर उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं. मान्यता है कि इससे मृत आत्मा को भी यमलोक की यात्रा में कष्ट झेलने पड़ते हैं. 2. दुर्गंध से बचाव मृत शरीर से कुछ समय बाद दुर्गंध आने लगती है. इसलिए वहां किसी का उपस्थित रहना जरूरी होता है, जो धूप या अगरबत्ती जलाकर वातावरण को शुद्ध रखे. 3. नकारात्मक शक्तियों का डर गरुड़ पुराण में बताया गया है कि रात के समय आसपास भटकने वाली नकारात्मक या दुष्ट आत्माएं मृत शरीर में प्रवेश कर सकती हैं. इससे मृतक और उसके परिवार को कष्ट झेलने पड़ सकते हैं. 4. आत्मा की उपस्थिति ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के बाद कुछ समय तक आत्मा अपने शरीर के आसपास ही रहती है और अपने परिजनों को देखती रहती है. इसलिए शव को अकेला नहीं छोड़ा जाता. संतान का इंतजार भी होता है जरूरी गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु, गरुड़ जी से कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए और उसकी संतान उपस्थित न हो, तो अंतिम संस्कार को तब तक टाला जा सकता है जब तक पुत्र या पुत्री आ न जाए. मान्यता है कि जब तक संतान मुखाग्नि नहीं देती, तब तक आत्मा को पूर्ण मुक्ति नहीं मिलती है. रात में अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार किया जाए, तो आत्मा को मोक्ष प्राप्त नहीं होता है और उसे निम्न योनि जैसे असुर, पिशाच आदि, में जन्म लेना पड़ सकता है.

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 पर मेष, मिथुन, सिंह, तुला और धनु राशि को मिलेगा बड़ा लाभ

 सनातन धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इस दिन स्नान-दान और लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 जून को प्रातः 3:06 बजे से होगी और इसका समापन 30 जून को सुबह 5:26 बजे होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल की ज्येष्ठ पूर्णिमा कई राशियों के लिए बेहद भाग्यशाली रहने वाली है. सोमवार का दिन होने और ग्रहों की शुभ स्थिति के कारण कुछ विशेष राशियों का अच्छा टाइम शुरू होने जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस पूर्णिमा से किन राशियों के जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव आने वाले हैं. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा वरदान की तरह साबित हो सकती है. लंबे समय से रुके हुए काम इस अवधि में गति पकड़ेंगे. कार्यक्षेत्र में आपके प्रदर्शन की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आय के नए स्रोत बन सकते हैं. परिवार के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बने रहेंगे. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के लोगों के लिए यह समय करियर में बड़ी छलांग लगाने का है. यदि आप नौकरी बदलने का विचार कर रहे हैं, तो अच्छे अवसर मिल सकते हैं. व्यापार से जुड़े जातकों को इस दौरान कोई बड़ा सौदा हाथ लग सकता है, जिससे मुनाफे में वृद्धि होगी. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि वालों के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा से सुनहरे दिनों की शुरुआत हो सकती है. आपकी नेतृत्व क्षमता में निखार आएगा. निवेश के दृष्टिकोण से यह समय काफी लाभदायक रहने वाला है. पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ सकते हैं. जीवनसाथी के साथ रिश्ते और मजबूत होंगे. आप दोनों मिलकर भविष्य की योजनाएं बनाएंगे. तुला राशि (Libra) तुला राशि के जातकों के लिए यह पूर्णिमा आर्थिक रूप से बेहद शुभ रहने वाली है. फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या वेतन वृद्धि की खुशखबरी मिल सकती है. जो लोग कला, लेखन या डिजिटल मीडिया से जुड़े हैं, उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतरीन मंच मिलेगा. स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलेगा. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के जातकों का भाग्य इस अवधि में पूरी तरह से उनका साथ देगा. कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिल सकती है. विद्यार्थियों के लिए यह समय बेहद अनुकूल है, परीक्षाओं में अच्छे परिणाम मिलेंगे. धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों की ओर आपका झुकाव बढ़ेगा, जिससे मन को शांति मिलेगी. ज्येष्ठ पूर्णिमा पर जरूर करें ये उपाय यदि आप इस शुभ दिन का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय के समय कच्चे दूध में चीनी और चावल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें. इसके साथ ही 'ऊं सों सोमाय नमः' मंत्र का जप करें. चूंकि इस बार पूर्णिमा सोमवार को है, इसलिए शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करना भी बेहद फलदायी रहेगा.

आत्म-ज्ञान पर शंकराचार्य की सीख, नाम-धन से ऊपर है वास्तविक आत्म-शांति का मार्ग

इसका सीधा सा मतलब यह है कि हम जिंदगी भर बाहरी चीजों को पाने में लगे रहते हैं, लेकिन अपने असली रूप को पहचानना भूल जाते हैं. स्वयं को जानने का मतलब क्या है? अक्सर हम खुद को अपने नाम, अपने काम (नौकरी), या अपनी सुख-सुविधाओं से जोड़कर देखते हैं. शंकराचार्य कहते हैं कि ये सब तो बस बाहरी पहचान हैं. स्वयं वह शक्ति है जो हमारे भीतर है, जो हमारी भावनाओं और विचारों को महसूस करती है. जब हम यह समझ जाते हैं कि हम सिर्फ एक शरीर नहीं हैं, बल्कि उससे कहीं बढ़कर हैं, तो जीवन जीने का तरीका बदल जाता है. हम दुखी क्यों रहते हैं? हम अक्सर उन चीजों के पीछे भागते हैं जो आज हैं और कल नहीं रहेंगी.  जब हम बाहर की चीजों (जैसे पैसा, नाम या पद) में खुशी ढूंढते हैं, तो वह खुशी हमेशा के लिए नहीं रहती. इसीलिए हमें हमेशा डर और चिंता बनी रहती है. आचार्य कहते हैं कि जब तक हम खुद को नहीं पहचानेंगे, तब तक हमें बाहर की किसी भी चीज से सच्ची और स्थायी शांति नहीं मिल पाएगी. इसीलिए उन्होंने कहा कि खुद को जाने बिना बाकी सब कुछ व्यर्थ है. इसका फायदा क्या है? खुद को जानने का मतलब है अपने मन को समझना. जब आप खुद को पहचानने लगते हैं, तो छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना, दूसरों से तुलना करना या भविष्य का डर सताना कम हो जाता है. आप शांत और स्थिर हो जाते हैं. आप समझ जाते हैं कि जो असली खुशी है, वो कहीं बाहर नहीं, बल्कि आपके अपने अंदर ही है.