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निकाय चुनाव पर विपक्ष का दबाव: बैलेट पेपर से चुनाव की मांग में शरद-उद्धव एकजुट

मुंबई शरद पवार की पार्टी एनसीपी-एसपी ने महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग की है। पार्टी ने निकाय चुनाव में वीवीपैट वाली ईवीएम इस्तेमाल न करने के राज्य चुनाव आयोग के फैसले की निंदा की है। शरद पवार के दल का कहना है कि इससे कैसे पता चलेगा कि चुनाव पारदर्शी तरीके से हुए हैं। ऐसी स्थिति में तो बैलेट पेपर से चुनाव कराना ही सही रहेगा। एनसीपी-एसपी ने कहा कि यदि वीवीपैट वाली मशीनें उपलब्ध नहीं हैं तो फिर परंपरागत बैलेट पेपर के माध्यम से ही चुनाव कराए जाएं। इससे पारदर्शिता रहेगी और जनता का भरोसा भी चुनावी व्यवस्था में कायम होगा। पार्टी नेता राहुल कलाते ने कहा कि निकाय चुनाव की तैयारी अब तेजी पर है। लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने निराश किया है। उसकी यह बात झटका देने वाली है कि वीवीपैट मशीनों की कमी है। इससे साफ है कि आयोग नहीं चाहता है कि पारदर्शी तरीके से चुनाव हो। ऐसी स्थिति में धांधली होने का भी डर रहेगा। राहुल कलाते ने पुणे की चिंचवाड़ विधानसभा सीट से इलेक्शन लड़ा था, लेकिन भाजपा के शंकर जगताप के मुकाबले हार गए थे। यही नहीं INDIA गठबंधन के एक और दल ने वीवीपैट न इस्तेमाल करने पर ऐतराज जताया है। उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को कहा कि यह फैसला गलत है। हमारी मांग है कि चुनाव वीवीपैट मशीनों से ही कराया जाए। वहीं एनसीपी-एसपी का कहना है कि यदि चुनाव आयोग वीवीपैट से चुनाव नहीं करा पा रहा है तो फिर बैलेट पेपर के पुराने सिस्टम पर ही वापस लौटा जाए। बता दें कि असेंबली इलेक्शन में हार के बाद राहुल कलाते ने दोबारा गिनती के लिए अर्जी डाली थी। उनका आरोप था कि काउंटिंग की प्रक्रिया में गड़बड़ी थी। इसी के खिलाफ फॉर्म 17 जमा करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग का रुख किया था। अब एक बार फिर निकाय चुनाव में उन्होंने मोर्चा खोला है। एसनीपी-एसपी का कहना है कि बिना वीवीपैट के चुनाव की कोई विश्वसनीयता नहीं रहेगी।  

सबूत हमारे पास हैं – राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर निशाना, उठाए पारदर्शिता पर सवाल

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन में गड़बड़ियों को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने इस दौरान महाराष्ट्र और कर्नाटक की मतदाता सूची दिखाते हुए इन दोनों राज्यों की वोटर लिस्ट में फर्जी वोटर्स का आरोप लगाया.  राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के दौरान कहा कि संविधान की नींव वोट है. ऐसे में सोचना होगा कि क्या सही लोगों को वोट डालने दिया जा रहा है? क्या मतदाता सूची में फर्जी वोटर्स जोड़े गए? महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया गया. हम महाराष्ट्र में चुनाव हार गए.  महाराष्ट्र में 40 लाख वोटर रहस्यमयी हैं. यहां पांच महीने में कई वोटर जोड़े गए.  राहुल ने कहा कि महाराष्ट्र में पांच साल की तुलना में पांच महीने में बड़ी संख्या में नए वोटर जुड़े. महाराष्ट्र विधानसभा में वोटिंग के दिन शाम पांच बजे के बाद वोटिंग में तेज इजाफा होता है. हमें फिर पता चला कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच एक करोड़ नए वोटर्स मतदाता सूची में जुड़े. वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग जवाब देना चाहिए. उन्हें बताना चाहिए कि क्या वोटर लिस्ट सही है या गलत? कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक डेटा क्यों नहीं देता? हमने आयोग से बार-बार डेटा मांगा लेकिन हमें नहीं दिया गया. यहां तक कि चुनाव आयोग ने हमें जवाब देने से भी इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि देश मे फर्जी वोटिंग हो रही है. हमें इस चोरी को पकड़ने में लंबा समय लगा. हमने अपने स्तर पर जांच की, जिसमें हमें छह महीने का समय लगा. हमने बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर वोटर्स लिस्ट की पड़ताल की. महादेवपुरा सीट पर हम 32707 वोटों से हार गए थे. अकेली इसी सीट पर बीजेपी एक लाख से ज्यादा के मार्जिन से जीती थी. इसे हमें शक हुआ कि दाल में कुछ काला है. राहुल ने कहा कि बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा की महादेवपुरा विधानसभा सीट में 6.5 लाख वोटों में से एक लाख से अधिक वोटों की चोरी की गई. हमारी इंटर्नल पड़ताल में पता चला कि इनमें से एक लाख से अधिक वोटर्स डुप्लीकेट हैं या जिनके एड्रेस गलत हैं. उन्होंने कहा कि हमारी पड़ताल में वोटर्स लिस्ट में कई गड़बड़ियों का पता चला. इस वोटर लिस्ट में कई लोगों के पिता के नाम के आगे कुछ भी लिखा गया है. वोटर लिस्ट में 40 हजार मकानों के एड्रेस शून्य हैं. डुप्लीकेट वोटरों की संख्या बहुत ज्यादा है. 11 हजार संदिग्ध ऐसे हैं, जिन्होंने तीन बार वोट डाला. ये लोग कहां से आ रहे हैं? एक ही पते पर 46 वोटर्स हैं. एक कमरे के घर में 80 मतदाता हैं. ये चुनाव आयोग और बीजेपी की मिलीभगत है.  राहुल गांधी ने बताया कि वोट चोरी पांच तरीकों से की जाती है. डुप्लीकेट वोटर्स 11,965 हैं. वोटर लिस्ट में ऐसे वोटर जिनका एड्रेस फर्जी हैं, उनकी संख्या 40 हजार के आसपास है. एक ही पते पर 10 हजार से ज्यादा वोटर्स रजिस्टर्ड हैं. 4132 वोटर्स ऐसे हैं वोटर लिस्ट में जिनकी फोटो इनवैलिड हैं.  वोट चोरी 5 तरह से होती है? – डुप्लीकेट वोटर्स (11,965) – फेक और इनवैलिड एड्रेस (40,009) – एक ही पते पर बल्क वोटर्स (10,452) – इनवैलिड फोटो (4132) – फॉर्म 6 का दुरुपयोग (30,000)  

शशि थरूर का ट्रंप को दो टूक: भारत भी लगा सकता है भारी टैक्स, धमकियों से नहीं डरेगा देश

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के फैसले को अनुचित, दोहरे मानदंड वाला और भारत-अमेरिका संबंधों के प्रति असंवेदनशील बताया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर अमेरिका भारत के उत्पादों पर 50% शुल्क लगाएगा, तो भारत को भी चाहिए कि अमेरिकी वस्तुओं पर उतना ही टैरिफ लगाए। उन्होंने कहा, “हमारा अमेरिका के साथ 90 अरब डॉलर का व्यापार है। अगर हर चीज 50% महंगी हो जाएगी, तो वहां के खरीदार सोचेंगे कि भारतीय वस्तुएं क्यों खरीदें?” शशि थरूर ने गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “अमेरिका हमें धमकाकर कुछ नहीं कर सकता। अभी हम अमेरिकी उत्पादों पर औसतन 17% शुल्क लगाते हैं। तो हम वहीं क्यों रुकें? हम भी 50% टैरिफ लगा दें। अगर अमेरिका को भारत से रिश्ता नहीं चाहिए, तो भारत को भी अमेरिका की जरूरत नहीं।” आपको बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अगस्त को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत भारत से आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया गया है। यह कदम भारत के रूस से तेल खरीदने के चलते उठाया गया है। पहले ही 25% शुल्क की घोषणा हो चुकी थी। अब कुल टैरिफ 50% तक पहुंच चुका है। चीन को छूट, भारत को सजा क्यों? शशि थरूर ने अमेरिका की नीति को "दोहरे मापदंड" वाली बताते हुए कहा कि चीन रूस से भारत से भी ज्यादा तेल और सामग्रियां खरीदता है, लेकिन उसे 90 दिन की छूट दी गई है। उन्होंने कहा, “अगर चीन को राहत दी जा सकती है, तो भारत को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? ये मित्रता नहीं, दबाव की राजनीति है।”  

NDA की रणनीति अंतिम दौर में, उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर जल्द मुहर संभव

नई दिल्ली इलेक्शन कमिशन ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होगा। इसी के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने प्रत्याशियों ढूंढ़ने में लग गए हैं। हालांकि इसके लिए अभी किसी भी गठबंधन की ओर से उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया गया है। उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर केंद्र सरकार और एनडीए निश्चिंत है और वह उम्मीदवार चयन में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाह रही है। खबर है कि NDA राखी के बाद नाम फाइनल करेगी। साथ ही सरकार उम्मीदवार तय करने से पहले विपक्ष के नेताओं से भी बात करेगी। पहले, उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार के नाम पर आम राय बनाने की कोशिश की जाएगी, इसके लिए विपक्ष के नेताओं से भी बात करने की कोशिश होगी। केंद्र के कुछ बड़े मंत्री विपक्ष के बड़े नेताओं से उपराष्ट्रपति के नाम पर चर्चा करके आम राय बनाने की मुहिम शुरू करेंगे। बातचीत का जिम्मा उन वरिष्ठ मंत्रियों को सौंपा जाएगा जिनकी विपक्ष के नेताओं से बढ़िया संपर्क और अच्छे संबंध है। सूत्र बताते हैं कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को विपक्ष के नेताओं से बात करके उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम पर आम राय बनाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। एनडीए के सहयोगियों से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य दूसरे वरिष्ठ मंत्री भी बात कर सकते हैं। बता दें कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अचानक पद से इस्तीफा दिया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 जुलाई को धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया था। 74 साल के धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। 9 सितंबर को कराए जाएंगे चुनाव देश के अगले उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 9 सितंबर को कराए जाएंगे. कड़ा मुकाबला के आसार लग रहे हैं क्योंकि बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए से मुकाबले के लिए कांग्रेस की अगुवाई वाला विपक्ष भी एक साझा उम्मीदवार खड़ा कर सकता है। ऐसे में कड़ा मुकाबला होने के आसार हैं। पिछले महीने 21 जुलाई को अप्रत्याशित तरीके से जगदीप धनखड़ ने अपना इस्तीफा दे दिया। यह आजाद भारत की पहली ऐसी घटना रही जब किसी उपराष्ट्रपति ने पद पर रहते हुए इस्तीफा दे दिया। साथ ही उन्होंने किसी उच्च पद के लिए दावेदारी नहीं की।

चुनावी चुप्पी: SIR मसौदा सूची पर दावे कम, दलों की दिलचस्पी और भी कम

नई दिल्ली बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर संसद में जारी संग्राम के बीच चुनाव आयोग ने गुरुवार को कहा कि SIR प्रकिया के बाद जारी किए गए मतदाताओं की मसौदा सूची के संबंध में अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने एक भी दावा या आपत्ति प्रस्तुत नहीं किया है। इसके साथ ही आयोग ने कहा है कि बिहार की अंतिम मतदाता सूची में किसी भी पात्र मतदाता को नहीं छोड़ा जाएगा और न ही किसी अपात्र मतदाता को शामिल किया जाएगा। आयोग ने सभी लोगों से 1 अगस्त को प्रकाशित बिहार की मसौदा मतदाता सूची में किसी भी त्रुटि को सुधारने के लिए दावे और आपत्तियाँ प्रस्तुत करने की अपील की है। चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर एक दैनिक बुलेटिन में कहा कि आज तक मसौदा सूची के संबंध में चुनाव आयोग को मतदाताओं से सीधे 5,015 दावे और आपत्तियाँ ही प्राप्त हो सकी हैं। आयोग ने कहा कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु प्राप्त करने वाले नए मतदाताओं से प्राप्त आवेदनों की संख्या 27,517 है। सात दिनों के अंदर दावों का होना है निपटारा आयोग की बुलेटिन में कहा गया है कि नियमों के अनुसार, दावों और आपत्तियों का निपटारा संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी/सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ/एईआरओ) द्वारा 7 दिनों की समाप्ति के बाद कर दिया जाएगा। एसआईआर के आदेशों के अनुसार, 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा सूची से किसी भी नाम को ईआरओ/एईआरओ द्वारा जाँच करने और उचित एवं उचित अवसर दिए जाने के बाद स्पष्ट आदेश पारित किए बिना नहीं हटाया जा सकता है। SIR पर सियासी संग्राम, पटना से दिल्ली तक माहौल गरम बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक ने आरोप लगाया है कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी दल बिहार एसआईआर पर चर्चा की मांग कर रहे हैं और संसद में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। SC ने मांगा 65 लाख हटाए गए वोटरों का ब्योरा इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग से एक गैर सरकारी संगठन- एसोसिएसन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की नई अर्जी पर 9 अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा है। इस अर्जी में एसआईआर अभियान के बाद बिहार की मसौदा मतदाता सूची से बाहर किए गए 65 लाख मतदाताओं के विवारण का खुलासा करने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने आयोग से कहा है कि 9 अगस्त तक उन 65 लाख लोगों को विवरण सौंपे और एक कॉपी ADR के वकील को भी दें। एक गैर सरकारी संगठन की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई है कि कौन मर चुका है और कौन स्थायी रूप से पलायन कर गया है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने चुनाव आयोग के वकील से कहा कि वे हटाए गए मतदाताओं का विवरण, राजनीतिक दलों के साथ साझा किया गया डेटा, और उसकी एक प्रति एनजीओ को दें। 30 सितंबर तक कर सकेंगे दावा चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों को सभी आवश्यक जानकारी दे दी गई है। पीठ ने भूषण से कहा कि नाम हटाने का कारण बाद में बताया जाएगा, क्योंकि अभी यह केवल एक मसौदा सूची है। हालांकि, भूषण ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों को हटाए गए मतदाताओं की सूची दी गई है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि मतदाता की मृत्यु हो गई है या वह कहीं और चला गया है। बता दें कि 1 अगस्त को, चुनाव आयोग ने एसआईआर 2025 के तहत गणना चरण पूरा होने के बाद, बिहार के लिए मसौदा मतदाता सूची जारी की थी।  

ममता बनर्जी का तीखा संदेश: बंगाली भाषा के लिए लड़ाई आखिरी सांस तक जारी रहेगी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को झारग्राम में एक विशाल विरोध रैली का नेतृत्व किया और राज्य के बाहर बांग्ला भाषी प्रवासियों पर कथित हमलों की निंदा की। बांग्ला भाषा और पहचान को ‘कभी दबाया नहीं जा सकता’ के संदेश के साथ निकाली गई रैली का नेतृत्व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो बनर्जी ने किया। उन्होंने कहा कि भले ही आप मुझे गिरफ्तार करने या मुझे गोली मारने आएं, मैं बंगाली भाषा के अपमान के खिलाफ विरोध करती रहूंगी। उन्होंने कहा कि अगर आप बांग्ला भाषा और बंगाल के लोगों पर हमला करेंगे, तो मैं भाजपा को दुनिया के सामने बेनकाब कर दूंगी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने झारग्राम रैली में दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को पिछले दरवाजे से लाने के लिए की जा रही है। असम सरकार को पश्चिम बंगाल के लोगों को एनआरसी नोटिस भेजने का क्या अधिकार है। भाजपा नेता लोगों से उनकी पहचान साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र मांग रहे हैं, लेकिन क्या उनके पास खुद के दस्तावेज हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर एक भी मतदाता को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने आदिवासी बहुल क्षेत्र में लगभग तीन किलोमीटर की पदयात्रा की, जिसमें तृणमूल नेता, सांस्कृतिक हस्तियां और नागरिक शामिल हुए। उनके हाथों में तख्तियां थी जिनपर बंगाल का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और बंगाल, मेरी मां, जैसे नारे लिखे थे। यह विरोध प्रदर्शन देश के विभिन्न हिस्सों में बांग्ला भाषी प्रवासियों के कथित उत्पीड़न के मद्देनजर आयोजित किया गया। वहीं, ममता बनर्जी ने मतदाता सूची तैयार करने में कथित चूक को लेकर राज्य सरकार के चार अधिकारियों और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर को निलंबित करने पर बुधवार को चुनाव आयोग (ईसी) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस कदम की वैधता पर सवाल उठाया और चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को धमकाया जा रहा है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, "अधिकारियों को कल निलंबन नोटिस दिया गया था। क्या अभी तक चुनावों की घोषणा भी हुई है? कौन सा कानून उन्हें इस समय निलंबित करने की अनुमति देता है? आप सभी की सुरक्षा करना हमारी ज़िम्मेदारी है। हम ऐसा करेंगे। हम उन्हें निलंबित नहीं करेंगे।" तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने चुनाव आयोग पर सरकारी अधिकारियों को धमकाने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि उनका प्रशासन अपने कर्मचारियों के साथ खड़ा रहेगा।  

हथियार लाइसेंस के जरिए बढ़ेगी सुरक्षा, असमिया मूल के नागरिकों को मिलेगा लाभ

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपनी मुखर राय और सख्त फैसलों के लिए चर्चित रहे हैं। अब उन्होंने ऐसा ही एक फैसला और लिया है, जिसकी देश भर में चर्चा हो रही है। इसके तहत असम के मूल निवासियों को शस्त्र लाइसेंस प्रदान किए जाएंगे। मुख्यमंत्री का कहना है कि सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मूल असमिया लोगों को सुरक्षा के लिए प्रैक्टिकल तरीके अपनाने होंगे। असम सरकार ‘संवेदनशील क्षेत्रों’ में रहने वाले मूलनिवासी लोगों को शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन करने की सुविधा देने के उद्देश्य से एक पोर्टल लॉन्च करने वाली है। यह जानकारी मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई स्तरों पर जांच और सत्यापन के बाद ही लाइसेंस दिया जाएगा। सरमा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘एक समर्पित पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिसके माध्यम से ऐसे मूलनिवासी लोग शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे, जो अपने जीवन को खतरा महसूस करते हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में रहते हैं।’ मुख्यमंत्री के अनुसार ऐसे व्यक्ति जो असम के ‘मूल निवासी या भारतीय नागरिक’ हैं और जो अपने निवास क्षेत्र की संवेदनशीलता के कारण ‘अपने जीवन और सुरक्षा को लेकर वास्तविक खतरा महसूस करते हैं’, वे आवेदन के पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा ऐसे लोग जो जिला प्रशासन द्वारा अधिसूचित या अधिकृत सुरक्षा एजेंसियों के आंकलन के अनुसार ‘अत्यधिक संवेदनशील या दूरदराज क्षेत्रों’ में निवास करते हैं, वे भी शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में सुरक्षा संबंधी गहन आकलन, सत्यापन, वैधानिक अनुपालन, गैर-हस्तांतरणीय शर्तें, समय-समय पर समीक्षा, निगरानी और रिपोर्टिंग आदि शामिल होंगे। राज्य मंत्रिमंडल ने 28 मई को निर्णय लिया था कि ‘संवेदनशील और दूरदराज’ क्षेत्रों में रहने वाले मूलनिवासी लोगों को शस्त्र लाइसेंस प्रदान किए जाएंगे ताकि उनमें सुरक्षा की भावना उत्पन्न की जा सके। मुख्यमंत्री ने बताया था कि कुछ ऐसे संवेदनशील क्षेत्र धुबरी, मोरीगांव, बारपेटा, नागांव, दक्षिण सालमारा-मनकाचर, रुपाही, धिंग और जानिया हैं। इन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत अधिक है। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया था कि असम आंदोलन (1979 से 1985) के समय से ही इन क्षेत्रों में रहने वाले मूलनिवासी लोग अपनी सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस की मांग करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा था ‘असमिया लोग अब केवल आंदोलन से नहीं, बल्कि व्यावहारिक कदम उठाकर ही अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।’  

कांग्रेस-टीएमसी के रवैये से विपक्ष में दरार, संसद चलाने की अपील भी न आई काम

नई दिल्ली. बिहार के SIR को लेकर संसद में हंगामा थमने के आसार नहीं हैं। अब एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी गठबंधन INDIA के बड़े दलों ने छोटी पार्टियों की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें संसद चलने का तरीका खोजने की बात कही गई थी। हालांकि, किसी भी पार्टी ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। विपक्षी गठबंधन SIR पर चर्चा की मांग कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, INDIA गठबंधन के कुछ सदस्यों ने बड़े दलों से संसद चलने का तरीका खोजने की अपील की, लेकिन इस बात को खारिज कर दिया गया। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि मंगलवार सुबह INDIA गठबंधन की बैठक में CPM के जॉन ब्रिटास, RSDP के एनके प्रेमचंद और IUML के ईटी मोहम्मद बशीर ने सुझाव दिया कि संसद सत्र खाली नहीं जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, इन सांसदों की याचिका को कांग्रेस, द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल जैसे बड़ी पार्टियों की तरफ से खारिज कर दिया गया। बड़े दलों का मानना है कि मतदाता सूची समीक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा से सरकार को बचने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए। खबरें ये भी हैं कि विपक्ष ने आने वाले दिनों में ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया है। 11 अगस्त को विपक्ष का मार्च पहले विपक्षी दलों ने 8 अगस्त को चुनाव आयोग तक मार्च का फैसला किया था, लेकिन झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के कारण इसे बढ़ाकर 11 अगस्त कर दिया गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तरफ से दिए गए रात्रि भोज का कार्यक्रम 7 अगस्त को होने वाला है। इसके अलावा सोरेन के निधन के चलते कांग्रेस द्वारा मंगलवार को बेंगलुरु में किया जाने वाला विरोध प्रदर्शन अब आठ अगस्त को होगा। इस प्रदर्शन का नेतृत्व राहुल करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बेंगलुरु की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई थी। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है।

BJP की राह पर प्रियंका चतुर्वेदी? पीएम मोदी से मीटिंग के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म

नई दिल्ली शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बीते दिन सोमवार (04 अगस्त, 2025) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसकी तस्वीरें उन्होंने आज मंगलवार (05 अगस्त, 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर कीं। इसके बाद से लोग इस पर रिएक्शन देने लगे हैं और कहने लगे हैं कि वो जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। उन्होंने तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, "कल मैंने संसद में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मैं उनके बहुमूल्य समय और भारत के आकर्षक सांस्कृतिक इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर उनकी अंतर्दृष्टि के लिए धन्यवाद करती हूं।" पीएम मोदी से मुलाकात की इन तस्वीरों को पोस्ट किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर लोग कहने लगे हैं कि वो जल्द ही बीजेपी में शामिल होगीं। हालांकि प्रियंका चतुर्वेदी ने जिस तरह का रिएक्शन दिया है, उससे लगता नहीं है कि ऐसा कुछ होने वाला है। प्रियंका चतुर्वेदी ने दिया ये इशारा राज्यसभा सांसद ने इसको लेकर कोई टिप्पणी तो नहीं की लेकिन एक पोस्ट को रीपोस्ट करके कुछ इशारा जरूर किया। दरअसल अमित शांडिल्य नाम के एक यूजर ने लिखा, "सिर्फ एक साथी सांसद के रूप में मिलना ही कुछ लोगों को चुभ गया है। यही लोग दूसरों को असहिष्णु कहते हैं।" इस लिखी हुई टिप्पणी को प्रियंका चतुर्वेदी ने रीपोस्ट किया है। कौन हैं प्रियंका चतुर्वेदी? शिवसेना (यूबीटी) में शामिल होने से पहले वो कांग्रेस में हुआ करती थीं। उनकी पहचान एक तेज तर्रार प्रवक्ता के रूप में है, जो टीवी डिबेट में शामिल होती हैं। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हाल ही में सरकार ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेशों में भेजा था, जिसका वो हिस्सा थीं। उन्होंने 2019 में कांग्रेस को छोड़ शिवसेना (यूबीटी) का दामन थामा था। इसके बाद वो 2020 में राज्यसभा सांसद बनीं और अगले साल उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है।

SC नहीं बताएगा देशभक्त कौन है, सवाल पूछना देशद्रोह नहीं: प्रियंका गांधी का बयान

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने अपने भाई और नेता विपक्ष का बचाव करते हुए दो टूक कहा है कि कौन सच्चा भारतीय है? यह सुप्रीम कोर्ट तय नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल पूछना राहुल गांधी की ड्यूटी है क्योंकि वह लोकसभा में नेता विपक्ष हैं। प्रियंका गांधी का यह बयान सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें अदालत ने कहा था कि कोई भी सच्चा भारतीय ऐसी बातें नहीं कर सकता। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, “माननीय न्यायाधीशों के प्रति पूरा सम्मान रखते हुए मैं ये कहना चाहती हूं कि वो यह तय नहीं कर सकते कि सच्चा भारतीय कौन है? सरकार से सवाल पूछना विपक्ष के नेता का कर्तव्य है। मेरा भाई कभी भी सेना के खिलाफ नहीं बोलेगा, वह उनके प्रति उच्च सम्मान रखता है। इसका गलत मतलब निकाला गया है।” क्या थी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी? बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान भारतीय सेना के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा था, ‘‘अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो ऐसी बात नहीं कहेंगे।’’ हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मामले में लखनऊ की एक अदालत में गांधी के खिलाफ जारी कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, ‘‘आप विपक्ष के नेता हैं। आप संसद में बातें क्यों नहीं कहते हैं, आप सोशल मीडिया पर क्यों कहते हैं?’’ पीठ ने पूछा था, ‘‘आपको कैसे पता चला कि 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन चीनियों ने कब्जा कर ली है? क्या आप वहां थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है?’’ पीठ ने पूछा, ‘‘बिना किसी सबूत के आप ये बयान क्यों दे रहे हैं? अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो आप ऐसी बात नहीं कहेंगे।’’ विपक्ष के नेता मुद्दे नहीं उठा सकते, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि अगर विपक्ष के नेता मुद्दे नहीं उठा सकते, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी। उन्होंने दलील देते हुए कहा, ‘‘अगर वह प्रेस में छपी ये बातें नहीं कह सकते, तो वह विपक्ष के नेता नहीं हो सकते।’’ पीठ की ‘‘सच्चे भारतीय’’ टिप्पणी पर सिंघवी ने कहा, ‘‘यह भी संभव है कि एक सच्चा भारतीय कहे कि हमारे 20 भारतीय सैनिकों को पीटा गया और मार डाला गया। यह भी चिंता का विषय है।’’ इस पर शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘जब सीमा पार संघर्ष होता है, तो क्या दोनों पक्षों में हताहत होना असामान्य बात है?’’ सिंघवी ने कहा कि गांधी केवल उचित खुलासे और सूचना के दमन पर चिंता जताने की बात कर रहे थे। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि विपक्ष के एक जिम्मेदार नेता होने के नाते गांधी को ऐसा नहीं कहना चाहिए था क्योंकि ऐसे सवाल उठाने के लिए एक उचित मंच मौजूद है। सिंघवी ने इस बात से सहमति जताई कि गांधी इस मामले में बेहतर तरीके से टिप्पणी कर सकते थे। उन्होंने कहा कि यह शिकायत याचिकाकर्ता को परेशान करने के प्रयास के अलावा और कुछ नहीं है।