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तमिलनाडु में थलपति विजय की राजनीति से कांग्रेस में हलचल, गठबंधन पर उठे सवाल

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव 2029 अभी दो साल दूर है, लेकिन तमिलनाडु में इसे लेकर पेच फंसा हुआ है। कुछ महीने पहले ही सत्ता में आए तमिलनाडु सीएम सी. जोसेफ विजय को उनकी पार्टी लगातार पीएम फेस प्रोजेक्ट करने की कोशिश कर रही है। इससे साथी दल कांग्रेस असहज नजर आ रहा है। पिछल कई दिनों से चले आ रहे इस विवाद को दोबारा हवा उस वक्त मिली जब कांग्रेस के पूर्व राज्य प्रमुख के. सेल्वापेरुंथगाई ने तमिलझा वेट्री कड़गम (TVK) के साथ कांग्रेस के गठबंधन पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन करती है, उसे एक बाद पर सहमत होना चाहिए कि 2029 में राहुल गांधी की पीएम पद के उम्मीदवार होंगे। कांग्रेस की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष ने टीवीके के साथ पार्टी के गठबंधन को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अगर वह पीएम फेस को लेकर राहुल गांधी को स्वीकार नहीं करते हैं, फिर उनके साथ गठबंधन करने का मतलब ही क्या है। सेल्वापेरुंथगाई ने साफ किया कि प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी ही दावेदार हैं। पूर्व कांग्रेस राज्य अध्यक्ष के इस बयान सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने टिप्पणी की। हालांकि, उन्होंने थलपति विजय की पार्टी को लेकर नरम रुख अपनाया। उन्होंने मतभेदों को कमतर बताते हुए आने वाले समय में गठबंधन को मजबूत रखने पर सहमति जताई। तमिलनाडु के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष पर सांसद का निशाना पूर्व तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष की बात का जवाब देते हुए सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा कि पार्टी के पूर्व राज्य प्रमुख को फिलहाल गठबंधन पर बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और TVK के रिश्ते को लेकर कोई अनिश्चितता नहीं है और बताया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत दोस्ताना रही है। कांग्रेस और टीवीके के बीच में असमंजस की स्थिति गौरतलब है दोनों पार्टियों के बीच यह विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब विजय की पार्टी से बड़े नेताओं ने इस तरह के दावे किए थे कि वह अब मुख्यमंत्री नहीं बल्कि प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं। इससे दोनों पार्टियों के बीच में थोड़ी असहज करने वाली स्थिति बनी थी। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों की तरफ से सब कुछ ठीक होने का संकेत दिया गया। राहुल गांधी की होंगे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार- मणिकम टैगौर अभी कुछ दिन पहले तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी ने अपने गठबंधन के नाम पर मुहर लगाने के लिए सभी गठबंधन साथियों को बुलाया था। इस बैठक में कांग्रेस पार्टी के नेता भी पहुंचे थे। इस दौरान तमिलनाडु का कांग्रेस के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने दोनों पक्षों के बीच में सब कुछ ठीक होने के संकेत दिए। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी की 2029 में कांग्रेस पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। हालांकि, इसके बाद भी दोनों पार्टियों के बीच में एक असहज करने वाली स्थिति बनी हुई है। दोनों पार्टियों के बीच में यह मतभेद इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं। क्योंकि तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके के साथ आ चुकी है। ऐसे में आने वाले लोकसभा चुनाव में भी वह विजय की पार्टी के साथ ही खड़ी नजर आ सकती है।

PM मोदी पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मानहानि केस खारिज करने से किया इनकार

मुंबई कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित टिप्पणियों से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने माना कि भारतीय जनता पार्टी एक पहचान योग्य राजनीतिक संगठन है और इस मामले में शिकायतकर्ता के तौर पर भाजपा कार्यकर्ता की याचिका प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी के खिलाफ चल रहा आपराधिक मानहानि मामला आगे बढ़ेगा. हालांकि अदालत ने उन्हें छह सप्ताह की अंतरिम राहत भी प्रदान की है।  मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप से कोर्ट का इनकार न्यायमूर्ति नितिन बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि 'मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेश में कोई स्पष्ट अवैधता या गंभीर त्रुटि नहीं दिखती. इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत हस्तक्षेप करने का यह उपयुक्त मामला नहीं है.' कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए समन आदेश में कोई कमी नजर नहीं आती।  उच्च न्यायालय ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा का एक प्रमुख चेहरा हैं और इसलिए उनके खिलाफ की गई किसी भी टिप्पणी का भाजपा के सदस्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता।  अदालत ने कहा कि गांधी द्वारा की गई टिप्पणियां व्यक्तिगत प्रकृति की थीं या केवल प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाकर की गई थीं या नहीं, यह सबूतों और गवाहों के बयानों की जांच के बाद मुकदमे के दौरान ही निर्धारित किया जा सकता है।  भाजपा कार्यकर्ता की शिकायत को माना सुनवाई योग्य राहुल गांधी की ओर से दलील दी गई थी कि उनकी कथित टिप्पणियों में भाजपा या किसी विशेष समूह का नाम नहीं लिया गया था, इसलिए भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है. हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि भाजपा एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और एक स्पष्ट रूप से पहचानी जाने वाली संस्था है. कोर्ट ने माना कि प्रारंभिक स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणियां केवल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक सीमित थीं. गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता सुदीप पसबोला और अधिवक्ता कुशल मोर ने दलील दी कि शिकायत निराधार है तथा शिकायतकर्ता को इसे दायर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था. उन्होंने कहा था कि शिकायतकर्ता इस मामले में पीड़ित पक्ष नहीं है और इसलिए वह ऐसी शिकायत दायर नहीं कर सकता।  क्या है पूरा मामला? यह मानहानि शिकायत भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता श्रीश्रीमल ने उच्च न्यायालय में गांधी की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सदस्य होने के नाते वह अपने नेता के खिलाफ की गई टिप्पणियों से आहत हैं. शिकायत 2018 में राजस्थान की एक रैली में राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित बयान को लेकर की गई थी. शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया था. महेश श्रीश्रीमल का कहना था कि इन टिप्पणियों से न केवल प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची, बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं को भी गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया।  2019 में जारी हुआ था समन शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद मजिस्ट्रेट अदालत ने अगस्त 2019 में राहुल गांधी को समन जारी किया था. इसके बाद राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए समन आदेश और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।  सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए मिली राहत हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी, लेकिन उन्हें तत्काल राहत भी दी है. अदालत ने छह सप्ताह तक मजिस्ट्रेट अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से संरक्षण प्रदान किया है, ताकि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकें। 

राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में उमड़ी दिलचस्पी, 20 हजार से अधिक लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन

इंदौर  19 सितंबर को इंदौर में होने वाले राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए कांग्रेस नेताओं ने कमर कस ली है। इस आयोजन में न तो कांग्रेस के नेता राहुल के साथ मंच साझा करेंगे और न ही कांग्रेस का झंडा आयोजन में कहीं नजर आएगा, लेकिन पर्दे के पीछे कांग्रेस नेता इस आयोजन की बागडोर संभाले हुए हैं। विद्यार्थियों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का विकल्प दिया गया है। इसमें अब तक 20 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों के रजिस्ट्रेशन की बात कही जा रही है। इस आयोजन में 70 हजार से ज्यादा लोगों के जुटने की उम्मीद है। आयोजन स्थल को भी समतल किया जा रहा है, लेकिन शुक्रवार को हुई बारिश की वजह से काम रुक गया। पहले यह कार्यक्रम इंदौर के नेहरू स्टेडियम में होना था, लेकिन वहां नगर निगम ने इसकी अनुमति नहीं दी। गैर-राजनीतिक आयोजन बता रही कांग्रेस राहुल गांधी के 19 सितंबर के आयोजन को कांग्रेस नेता गैर-राजनीतिक बता रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा को इस आयोजन को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए। राहुल गांधी शामिल युवाओं से उनके सपनों, शिक्षा के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद करेंगे। इस कारण इसे 'छात्रों की गूंज' नाम दिया गया है, लेकिन भाजपा ने स्टेडियम नहीं देकर छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की है। विजयवर्गीय को भी आमंत्रण देगी कांग्रेस आयोजन की तैयारियों को लेकर बैठक हो रही थी। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने इस आयोजन में शामिल होने के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भी आमंत्रण पत्र भेजने की बात कही। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को दी है।

मानहानि मामले में आज आएगा बड़ा फैसला, राहुल गांधी की नजरें MP हाईकोर्ट पर

 जबलपुर  मध्य प्रदेश में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह की ओर से दायर मानहानि के केस में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को व्यक्तिगत उपस्थिति से राहत मिलेगी या नहीं, इसका निर्णय बुधवार को होगा। इसके लिए दायर राहुल की याचिका पर मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रकरण में कार्तिकेय सिंह का आरोप है कि वर्ष 2018 में झाबुआ जिले में एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स प्रकरण में उनके पिता शिवराज सिंह चौहान और उनके नाम का उल्लेख किया, जिससे उनकी मानहानि हुई। केस की सुनवाई भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट कर रही है। वहां से सुनवाई में पेश न होने पर राहुल गांधी को समन जारी किया गया था। इसे समन को हाई कोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ में चुनौती देते हुए राहुल की ओर से ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दिए जाने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में ट्रायल कोर्ट से केस संबंधित रिकार्ड तलब किया था। मंगलवार की सुनवाई में कोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद प्रकरण में निर्णय बुधवार के लिए पुनः सूचीबद्ध कर दिया। अब हाई कोर्ट यह तय करेगी कि अंतिम निर्णय तक राहुल गांधी को कोई अस्थायी संरक्षण दिया जाए या नहीं।

क्रिकेट में द्रविड़ परिवार की नई एंट्री! अन्वय द्रविड़ को मिली टीम इंडिया में जगह, श्रीलंका में दिखेगा दम

मुंबई  भारतीय क्रिकेट में द्रविड़ परिवार का एक और नाम नेशनल लेवल पर पहुंच गया है. पूर्व भारतीय कप्तान और महान बल्लेबाज राहुल द्रव‍िड़ के छोटे बेटे अन्वय द्रविड़ को अगले महीने होने वाले श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंड‍िया की अंडर-19 वनडे टीम में शामिल किया गया है. 17 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज को घरेलू आयु वर्ग क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन का इनाम मिला है।  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की जून‍ियर सेलेक्शन कमेटी, जिसकी अगुवाई शरत श्रीधरन कर रहे हैं. उन्होंने ने गुरुवार को श्रीलंका दौरे के लिए वनडे और मल्टी-डे दोनों टीमों का ऐलान किया. यह दौरा 4 जुलाई 2026 से श्रीलंका के हंबनटोटा में शुरू होगा, जिसमें तीन वनडे और दो मल्टी-डे मुकाबले खेले जाएंगे।  अन्वय को 15 सदस्यीय वनडे टीम में जगह मिली है. वह टीम के दो विकेटकीपरों में शामिल हैं, जबकि दूसरे विकेटकीपर  रजत बघेल हैं. मध्य प्रदेश के यशवर्धन सिंह चौहान को टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि लक्ष्य रायचंदानी उपकप्तान होंगे।  यह चयन अन्वय के करियर का अब तक का सबसे बड़ा मुकाम माना जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि उनके बड़े भाई समित द्रविड़ कर्नाटक की अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, लेकिन नेशनल लेवल पर टीम इंड‍िया की अंडर-19 टीम में जगह बनाने वाले परिवार के पहले सदस्य अन्वय बने हैं।  क्यों म‍िला अन्वय द्रव‍िड़ को टीम इंड‍िया में मौका  अन्वय हाल ही में वीनू मांकड़ ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के कारण चर्चा में आए थे. उन्होंने कर्नाटक अंडर-19 टीम की कप्तानी करते हुए टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाया था. टूर्नामेंट में उन्होंने छह पारियों में 220 रन बनाए. उनकी सबसे यादगार पारी हिमाचल प्रदेश के खिलाफ आई थी, जहां उन्होंने दबाव भरे रनचेज में नाबाद 82 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई थी. इससे पहले वह अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्रॉफी में शतक भी जड़ चुके हैं, जिसने सेलेक्टर्स का ध्यान उनकी ओर खींचा।  अंडर-19 वर्ल्ड कप 2028 की तैयारी नेशनल सेलेक्टर इस दौरे को अगले अंडर-19 वर्ल्ड कप राउंड की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं. चूंकि अन्वय अभी केवल 17 साल के हैं, इसलिए वह दो साल बाद होने वाले अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए भी पात्र रहेंगे. ऐसे में श्रीलंका की परिस्थितियों में मिलने वाला यह अनुभव उनके विकास के लिए काफी अहम माना जा रहा है. भारतीय टीम जून के अंत में श्रीलंका रवाना होगी. वनडे सीरीज खत्म होने के बाद मल्टी-डे मुकाबले खेले जाएंगे, जिनके लिए अलग टीम का चयन किया गया है।  टीम इंड‍िया की अंडर-19 वनडे टीम: सागर व‍िर्क, लक्ष्य रायचंदानी (उपकप्तान), यशवर्धन सिंह चौहान (कप्तान), विनीत वीके, अर्जुन राजपूत, कुशाग्र ओझा, रजत बघेल (विकेटकीपर), अन्वय द्रविड़ (विकेटकीपर), अनमोलजीत सिंह, वुटकुरी यशवीर गौड़, रोहित अनिल यादव, शाविन वी, काव्या परेश पटेल, मोहित उलवा और ईशान सूद।  भारत पुरुष अंडर-19 श्रीलंका दौरा पूरा शेड्यूल     पहला वनडे: 04 जुलाई 2026 (शनिवार) – सुबह 10:00 बजे, हम्बनटोटा     दूसरा वनडे: 06 जुलाई 2026 (सोमवार) – सुबह 10:00 बजे, हम्बनटोटा     तीसरा वनडे: 09 जुलाई 2026 (गुरुवार) – सुबह 10:00 बजे, हम्बनटोटा     पहला मल्टी-डे मैच: 13–16 जुलाई 2026 (सोमवार–गुरुवार) – सुबह 10:00 बजे, गॉल     दूसरा मल्टी-डे मैच: 20–23 जुलाई 2026 (सोमवार–गुरुवार) – सुबह 10:00 बजे, कोलंबो     नोट: मैच टाइम श्रीलंका के समयानुसार.   

‘कमाई से 5 गुना ज्यादा खर्च कैसे?’ राहुल गांधी की फंडिंग को लेकर BJP ने घेरा

नई दिल्ली राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर खुलासा करते हुए BJP ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। BJP सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले 22 साल में किए अपने 54 दौरों पर राहुल गांधी ने करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह उनकी इनकम के 5 गुना से भी ज्यादा है। संबित पात्रा के मुताबिक, राहुल गांधी करीब 22 साल से निर्वाचित पद पर हैं। उन्होंने इन वर्षों में कई बार विदेश दौरे किए हैं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर 54 विदेश यात्राएं की हैं। ये यात्राएं सार्वजनिक हैं, लेकिन इनका खर्च पब्लिक नहीं है। राहुल गांधी की हर विदेश यात्रा पर करीब 3-4 लोग उनके साथ गए और उनकी विदेश यात्राओं का कुल खर्च 60 करोड़ रुपये है। राहुल गांधी ने विदेश यात्राओं पर इनकम से 5 गुना कैसे किया खर्च? उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास 2013-14 से 2022-23 तक राहुल गांधी की इनकम का विवरण है। इस दौरान, 10 साल में राहुल गांधी की इनकम 11 करोड़ रुपये थी। 11 करोड़ रुपये की इनकम वाले राहुल गांधी ने 60 करोड़ रुपये सिर्फ अपने विदेश दौरों पर खर्च किए हैं। ये कैसे मुमकिन है। उनको कौन फंड कर रहा है। क्या किसी विदेशी कंपनी ने फंड किया तो क्या राहुल गांधी ने नियमों का पालन किया। विदेशी दौरों पर खर्च 60 करोड़ संबित पात्रा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि साल 2004 से 2026 के बीच राहुल गांधी ने 54 व्यक्तिगत (निजी) विदेश यात्राएं की हैं। उन्होंने दावा किया कि इन यात्राओं पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें कोई भी आधिकारिक सरकारी या संसदीय दौरा शामिल नहीं है। पात्रा ने राहुल गांधी के चुनावी हलफनामों का जिक्र करते हुए कहा कि आकलन वर्ष 2013-14 से 2022-23 तक फॉर्म 26 के हलफनामों में उनके द्वारा घोषित आय के विवरण के आधार पर, 10 वर्षों में उनकी कुल घोषित आय 11 करोड़ रुपये थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आय 11 करोड़ रुपये थी, तो विदेशी यात्राओं पर 60 करोड़ रुपये कैसे खर्च किए गए? किस साल में राहुल गांधी ने कितने पैसे कमाए और कितने खर्च किए? संबित पात्रा बोले कि राहुल गांधी ने 2014-15 में अपनी विदेश यात्रा पर 4.5 करोड़ रुपये खर्च किए थे। वहीं, 2017-18 में राहुल गांधी ने 1.20 करोड़ रुपये कमाए थे और 6 करोड़ रुपये विदेश यात्रा में खर्च किए थे। वहीं, 2019-20 में राहुल गांधी ने 1.39 करोड़ रुपये कमाए थे और उन्होंने विदेश दौरे पर 4.6 करोड़ खर्च कर दिए थे। इसके बाद, 2018-19 में राहुल गांधी की इनकम 1.22 करोड़ थी और उन्होंने अपनी विदेश दौरे पर 3.9 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इसके बाद 2021-22 में राहुल गांधी ने 1.03 करोड़ रुपये कमाए और विदेश यात्रा पर 2.6 करोड़ रुपये खर्च किए। 20 साल में कितनी बढ़ी राहुल गांधी की संपत्ति? बीजेपी सांसद ने ये भी बताया कि 2004 में राहुल गांधी ने जब पहली बार चुनाव लड़ा था, तब उनके चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के मुताबिक, उनकी संपत्ति 55.58 लाख थी। वहीं, 2024 में जब आखिरी बार उन्होंने चुनाव आयोग को हलफनामा दिया तो अपनी संपत्ति करीब 21 करोड़ रुपये की बताई थी। ये कैसे मुमकिन है कि राहुल गांधी अपनी इनकम से कई गुना ज्यादा पैसे विदेश दौरों पर खर्च भी करते रहे और उनकी इनकम लगातार बढ़ती गई।  संबिता पात्रा को मंत्री बनने के लिए करना होगा कुछ काम बीजेपी के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि विश्वगुरु' होने के उनके दावे पूरी तरह से विफल हो गए हैं। वह दिन-ब-दिन चीन के सामने घुटने टेक रहे हैं। इसलिए यहां से ध्यान हटाने के लिए यह सब किया जा रहा है। राहुल गांधी की अतीत की विदेश यात्राओं के बारे में बात करने के बजाय, पात्रा को मंत्री पद पर दावा करने के लिए बेहतर विषय ढूंढने चाहिए। बीजेपी को देश को देना चाहिए जवाब कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने कहा कि देश नौकरियों, किसानों, मणिपुर और चीन पर जवाब चाहता है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया बीजेपी को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दुष्प्रचार वाला अभियान चलाने के बजाय बेरोजगारी, महंगाई, गिरती खपत, विदेश नीति में विफलताओं और कमजोर अर्थव्यवस्था पर सवालों का जवाब देना चाहिए।

पनामा पेपर मामले में राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ीं, जबलपुर हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई

जबलपुर  लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में आज एक बार फिर गुरुवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई जो कि दो दिन पहले हुई थी, उसमें कर्तिकेय सिंह चौहान ने जवाब देने के लिए समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने मंजूर किया था। इससे पहले हुई सुनवाई में दोनों पक्षों राहुल गांधी और कार्तिकेय चौहान के वकीलों ने अपना-अपना पक्ष रखा था। दरअसल, भोपाल की विशेष अदालत में चल रहे मानहानि प्रकरण को MP हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है। झाबुआ में चुनावी सभा में दिया था बयान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान के द्वारा दायर मानहानि परिवाद से जुड़ा है। एमपी-एमएलए कोर्ट भोपाल के विशेष मजिस्ट्रेट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसी समन और परिवाद को निरस्त कराने के लिए राहुल गांधी ने बीते दिनों मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और अजय गुप्ता ने पक्ष रखा था। कोर्ट को बताया गया कि परिवाद पूरी तरह निराधार हैं और लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। कार्तिकेय सिंह चौहान की और से कहा गया कि साल 2018 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए राहुल गांधी ने झाबुआ की चुनावी सभा में भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर पनामा पेपर्स लीक का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान और कार्तिकेय का नाम लिया था। हालांकि इसके दूसरे दिन ही राहुल गांधी ने अपने बयान पर कहा था कि वे कन्फ्यूज हो गए थे। दरअसल वे छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह के बेटे का नाम लेना चाह रहे थे, लेकिन कार्तिकेय का नाम ले लिया। कार्तिकेय का दावा- इस बयान से उनकी छवि धूमिल हुई राहुल गांधी ने अपने बयान में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर हुई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए कहा था कि मध्यप्रदेश में ऐसी कार्रवाई नहीं हुई। इसे लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने दावा किया कि इस बयान से उनकी छवि धूमिल हुई और उन्होंने एमपीएमएलए कोर्ट में मानहानि का केस दायर किया। इसी मामले में विशेष अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था, जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। अब इस मामले पर संभवता आज अंतिम सुनवाई हो सकती है, जिस पर कि सभी की नजर बनी हुई है।

राहुल गांधी बोले, बीजेपी के सांसदों में है मतदाता धोखाधड़ी, हरियाणा की पूरी सरकार घुसपैठियों की

  नई दिल्ली कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक हमलावर पोस्ट साझा करते हुए बीजेपी पर एक बार फिर से 'वोट चोरी' का आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि वोट चोरी के जरिए कभी सीटें चुराई जाती हैं, तो कभी पूरी की पूरी सरकार ही हड़प ली जाती है. उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि लोकसभा में बीजेपी के जो 240 सांसद हैं, उनमें से मोटे तौर पर हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है।  राहुल ने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या इन सांसदों को बीजेपी की ही भाषा में 'घुसपैठिया' कहा जाना चाहिए?  उन्होंने वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया को लेकर तीखा हमला बोला है।  'असली डर सच्चा का…' राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "वोट चोरी से कभी सीटें चुराई जाती हैं, कभी पूरी सरकार. लोकसभा के 240 बीजेपी सांसदों में से मोटे तौर पर हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है. पहचानना मुश्किल नहीं- क्या उन्हें बीजेपी की भाषा में 'घुसपैठिए' कहें?" उन्होंने हरियाणा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां तो पूरी सरकार ही 'घुसपैठिया' है।  राहुल गांधी ने कहा, "जो संस्थाएं अपनी जेब में रखते हैं, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ देते हैं- वो ख़ुद 'रिमोट कंट्रोल्ड' हैं. उन्हें असली डर सच्चाई का है, क्योंकि निष्पक्ष चुनाव हो जाएं, तो आज ये 140 के पास भी नहीं जीत सकते।  इससे पहले राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजे आने के बाद चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमला बोला था। 

राज्यसभा चुनाव के बाद हरियाणा कांग्रेस में विवाद, राहुल गांधी ने निशाना साधा उन विधायकों पर जिन्होंने नौ वोट खराब किए

चंडीगढ़  हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सभी दलों के निशाने पर है। चुनाव में पांच विधायकों द्वारा क्रास वोटिंग करने और चार विधायकों की वोट रद होने के बाद जहां कांग्रेस में जबरदस्त तरीके से गुटबाजी बढ़ी है, वहीं इनेलो काफी हद तक भाजपा की बी टीम होने के कांग्रेस के आरोपों को खारिज करने में सफल साबित हुई है। कांग्रेस में गुटबाजी की स्थिति यह है कि सभी धड़े एक दूसरे पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं। इस गुटबाजी के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के पूर्व सांसद बेटे बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा का सिलसिला नहीं थमा है। बृजेंद्र सिंह ने चुनाव से पहले भी कांग्रेस विधायकों को क्रास वोटिंग नहीं करने की नसीहत दी थी। साथ ही कहा था कि यदि क्रास वोटिंग हुई तो आरोपित विधायकों की खैर नहीं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव से सीधे तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। राहुल गांधी ने कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया था। यह बात सही है कि कर्मवीर बौद्ध को न तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा पसंद करते थे और न ही कांग्रेस का कोई विधायक उनके नाम को पचा पा रहा था, लेकिन कहीं न कहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को यह आभास था कि अगर कर्मवीर बौद्ध चुनाव हार गए तो उनके राजनीतिक भविष्य के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता के वशीभूत ही सही, कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस नेता चुनाव जिताने में कामयाब हो गए, लेकिन उनकी जीत भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल से मात्र 0.44 प्रतिशत मतों से हुई है, जो बहुत बढ़िया स्थिति नहीं है। कांग्रेस के 37 विधायकों में से कर्मवीर बौद्ध को सिर्फ 28 वोट मिले, जबकि पांच वोट क्रास हो गए और चार वोट रद हो गए। कांग्रेस नेता अपनी झेंप मिटाने के लिए बार-बार दावा कर रहे हैं कि सिर्फ पांच नेताओं ने क्रास वोट की है, जबकि जिन चार कांग्रेस विधायकों की वोट रद हुई है, वह पता नहीं किया जा सकता, मगर सच्चाई यह है कि कांग्रेस के नौ वोट खराब हुए हैं अथवा खराब किए गए हैं। हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने स्पष्ट दावा किया है कि सतीश नांदल के संपर्क में 12 कांग्रेस विधायक थे। कांग्रेस के जिस तरह से नौ वोट खराब हुए हैं, उससे मोहन लाल बडौली का दावा सही प्रतीत हो रहा है। हुड्डा गुट के लिए अगर संतोषजनक है तो वह ये कि जिन पांच कांग्रेस विधायकों ने वोट क्रास की है, उसमें दो कुमारी सैलजा गुट की विधायक हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में कुमारी सैलजा ने नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी के पति रामकिशन गुर्जर की अनदेखी कर स्पष्ट संदेश दे दिया कि राहुल गांधी के उम्मीदवार को हराने की कोशिश करने वाला कोई विधायक उनका अपना नहीं हो सकता। लेकिन हुड्डा गुट को हाईकमान के समक्ष यह कहने का मौका मिल गया है कि सैलजा गुट के विधायकों ने भी गड़बड़ की है, जबकि सैलजा गुट के पास हुड्डा गुट के बारे में हाईकमान के समक्ष कहने के लिए उनसे ज्यादा तथ्य मौजूद हैं। हरियाणा में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह पिछले कई माह से सद्भाव यात्रा निकाल रहे हैं। कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह हालांकि बृजेंद्र सिंह यात्रा को सिरे से खारिज कर चुके थे, लेकिन राहुल गांधी ने बृजेंद्र सिंह की पीठ पर हाथ धरा तो सब चुप्पी साध गए। अपनी यात्रा के बाद से अब तक राहुल गांधी मुलाकात व बातचीत के लिए बृजेंद्र सिंह को तीन बार दिल्ली बुला चुके हैं। बृजेंद्र सिंह की यात्रा अप्रैल-मई तक संचालित होगी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यदि राज्य में हुड्डा व सैलजा गुट की लड़ाई इसी तरह से चलती रही और कांग्रेस आपसी फूट का शिकार रही तो आने वाले समय में राहुल गांधी की ओर से बृजेंद्र सिंह को कांग्रेस के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया जा सकता है।  

RS में कांग्रेस के LoP पद पर तलवार, ठाकरे से सीट के लिए पीछे हटने की गुहार

मुंबई  महाराष्ट्र में विपक्ष के पास जीतने योग्य एक ही राज्यसभा सीट है, जिसपर कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी दोनों ही दावा पेश कर चुके हैं। अब खबरें हैं कि कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे से सीट पर दावेदारी छोड़ने की अपील की है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के लिए यह सीट राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी और केरल विधायक रमेश चेन्नीथला ने ठाकरे से बात की थी। उन्होंने ठाकरे से कहा कि यह सीट कांग्रेस को दी जानी चाहिए, जिसके बदले में शिवसेना यूबीटी को एमएलसी सीट दी जाएगी। खास बात है कि राज्यसभा सीट पर नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च है। इसपर नतीजों का ऐलान 16 मार्च को होगा। इन नेताओं का पूरा हो रहा कार्यकाल अप्रैल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी, राकांपा (एसपी) की फौजिया खान, आरपीआई (आठवले) के रामदास आठवले, भाजपा के भागवत कराड, कांग्रेस की रजनी पाटिल और राकांपा के धैर्यशील पाटिल का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। सत्तारूढ़ महायुति के पक्ष में भारी बहुमत को देखते हुए एमवीए संसद के ऊपरी सदन और विधान परिषद में केवल एक-एक सदस्य को निर्वाचित कराने में सफल हो सकती है। क्या बात हुई रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि चेन्नीथला ने ठाकरे को बताया कि महाराष्ट्र की यह एकमात्र सीट कांग्रेस के लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि अगर कांग्रेस को यह सीट नहीं मिलती है, तो संभावनाएं हैं कि पार्टी नेता प्रतिपक्ष के पद पर दावा गंवा सकती है। सूत्र ने कहा, 'राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए किसी भी विपक्षी दल को कुल सीटों का 10 फीसदी या कम से कम 25 सदस्य रखने होते हैं। मौजूदा स्थिति है कि कांग्रेस के पास संख्या बल 27 का है, लेकिन कई सांसद ऐसे हैं जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।ऐसे में 25 का आंकड़ा बनाए रखना चुनौती हो सकता है। ऐसे में एक राज्यसभा सीट भी अहम साबित हो सकती है।' उन्होंने कहा, 'इसके चलते कांग्रेस नेतृत्व ने उद्धव ठाकरे से इस मुद्दे पर नहीं अड़ने का अनुरोध किया है। इसके बदले में कांग्रेस शिवसेना यूबीटी को एक एमएलसी सीट देने के लिए तैयार है।' MVA के तीनों दलों की नजर खास बात है कि इस सीट पर महाविकास अघाड़ी के तीनों बड़े दलों की नजर है। एक ओर जहां आदित्य ठाकरे ने एक पोस्ट में कहा, 'राज्यसभा चुनाव के लिए हो रही वार्ता में कोई गतिरोध नहीं है; सभी दल एक-दूसरे के संपर्क में हैं। हमने एक राज्यसभा सीट पर अपना दावा पेश किया है, क्योंकि संख्यात्मक ताकत और एमवीए के लिए तय 'रोटेशन' नीति के अनुसार इस सीट पर शिवसेना यूबीटी को चुनाव लड़ना चाहिए।' वहीं, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी इस सीट से चुनाव लड़ने के अपने दावे पर अडिग है, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है और विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिए जाएंगे। इधर, वरिष्ठ राजनेता शरद पवार भी इस सीट के दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। खबर है कि उनकी बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने गठबंधन के साथियों से पिता का समर्थन करने की अपील की है। किसके पास कितनी संख्या शिवसेना यूबीटी के पास 20, कांग्रेस के पास 16 और राकंपा शरद पवार के पास 10 विधायकों का समर्थन है। हाल ही में शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि 16 मार्च को होने वाले चुनावों से पहले राज्यसभा की एकमात्र सीट को लेकर एमवीए के भीतर चर्चा हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते शिवसेना यूबीटी का रुख इस फैसले के लिए अहम होगा।