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‘कमाई से 5 गुना ज्यादा खर्च कैसे?’ राहुल गांधी की फंडिंग को लेकर BJP ने घेरा

नई दिल्ली राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर खुलासा करते हुए BJP ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। BJP सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले 22 साल में किए अपने 54 दौरों पर राहुल गांधी ने करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह उनकी इनकम के 5 गुना से भी ज्यादा है। संबित पात्रा के मुताबिक, राहुल गांधी करीब 22 साल से निर्वाचित पद पर हैं। उन्होंने इन वर्षों में कई बार विदेश दौरे किए हैं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर 54 विदेश यात्राएं की हैं। ये यात्राएं सार्वजनिक हैं, लेकिन इनका खर्च पब्लिक नहीं है। राहुल गांधी की हर विदेश यात्रा पर करीब 3-4 लोग उनके साथ गए और उनकी विदेश यात्राओं का कुल खर्च 60 करोड़ रुपये है। राहुल गांधी ने विदेश यात्राओं पर इनकम से 5 गुना कैसे किया खर्च? उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास 2013-14 से 2022-23 तक राहुल गांधी की इनकम का विवरण है। इस दौरान, 10 साल में राहुल गांधी की इनकम 11 करोड़ रुपये थी। 11 करोड़ रुपये की इनकम वाले राहुल गांधी ने 60 करोड़ रुपये सिर्फ अपने विदेश दौरों पर खर्च किए हैं। ये कैसे मुमकिन है। उनको कौन फंड कर रहा है। क्या किसी विदेशी कंपनी ने फंड किया तो क्या राहुल गांधी ने नियमों का पालन किया। विदेशी दौरों पर खर्च 60 करोड़ संबित पात्रा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि साल 2004 से 2026 के बीच राहुल गांधी ने 54 व्यक्तिगत (निजी) विदेश यात्राएं की हैं। उन्होंने दावा किया कि इन यात्राओं पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें कोई भी आधिकारिक सरकारी या संसदीय दौरा शामिल नहीं है। पात्रा ने राहुल गांधी के चुनावी हलफनामों का जिक्र करते हुए कहा कि आकलन वर्ष 2013-14 से 2022-23 तक फॉर्म 26 के हलफनामों में उनके द्वारा घोषित आय के विवरण के आधार पर, 10 वर्षों में उनकी कुल घोषित आय 11 करोड़ रुपये थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आय 11 करोड़ रुपये थी, तो विदेशी यात्राओं पर 60 करोड़ रुपये कैसे खर्च किए गए? किस साल में राहुल गांधी ने कितने पैसे कमाए और कितने खर्च किए? संबित पात्रा बोले कि राहुल गांधी ने 2014-15 में अपनी विदेश यात्रा पर 4.5 करोड़ रुपये खर्च किए थे। वहीं, 2017-18 में राहुल गांधी ने 1.20 करोड़ रुपये कमाए थे और 6 करोड़ रुपये विदेश यात्रा में खर्च किए थे। वहीं, 2019-20 में राहुल गांधी ने 1.39 करोड़ रुपये कमाए थे और उन्होंने विदेश दौरे पर 4.6 करोड़ खर्च कर दिए थे। इसके बाद, 2018-19 में राहुल गांधी की इनकम 1.22 करोड़ थी और उन्होंने अपनी विदेश दौरे पर 3.9 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इसके बाद 2021-22 में राहुल गांधी ने 1.03 करोड़ रुपये कमाए और विदेश यात्रा पर 2.6 करोड़ रुपये खर्च किए। 20 साल में कितनी बढ़ी राहुल गांधी की संपत्ति? बीजेपी सांसद ने ये भी बताया कि 2004 में राहुल गांधी ने जब पहली बार चुनाव लड़ा था, तब उनके चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के मुताबिक, उनकी संपत्ति 55.58 लाख थी। वहीं, 2024 में जब आखिरी बार उन्होंने चुनाव आयोग को हलफनामा दिया तो अपनी संपत्ति करीब 21 करोड़ रुपये की बताई थी। ये कैसे मुमकिन है कि राहुल गांधी अपनी इनकम से कई गुना ज्यादा पैसे विदेश दौरों पर खर्च भी करते रहे और उनकी इनकम लगातार बढ़ती गई।  संबिता पात्रा को मंत्री बनने के लिए करना होगा कुछ काम बीजेपी के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि विश्वगुरु' होने के उनके दावे पूरी तरह से विफल हो गए हैं। वह दिन-ब-दिन चीन के सामने घुटने टेक रहे हैं। इसलिए यहां से ध्यान हटाने के लिए यह सब किया जा रहा है। राहुल गांधी की अतीत की विदेश यात्राओं के बारे में बात करने के बजाय, पात्रा को मंत्री पद पर दावा करने के लिए बेहतर विषय ढूंढने चाहिए। बीजेपी को देश को देना चाहिए जवाब कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने कहा कि देश नौकरियों, किसानों, मणिपुर और चीन पर जवाब चाहता है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया बीजेपी को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दुष्प्रचार वाला अभियान चलाने के बजाय बेरोजगारी, महंगाई, गिरती खपत, विदेश नीति में विफलताओं और कमजोर अर्थव्यवस्था पर सवालों का जवाब देना चाहिए।

पनामा पेपर मामले में राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ीं, जबलपुर हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई

जबलपुर  लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में आज एक बार फिर गुरुवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई जो कि दो दिन पहले हुई थी, उसमें कर्तिकेय सिंह चौहान ने जवाब देने के लिए समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने मंजूर किया था। इससे पहले हुई सुनवाई में दोनों पक्षों राहुल गांधी और कार्तिकेय चौहान के वकीलों ने अपना-अपना पक्ष रखा था। दरअसल, भोपाल की विशेष अदालत में चल रहे मानहानि प्रकरण को MP हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है। झाबुआ में चुनावी सभा में दिया था बयान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान के द्वारा दायर मानहानि परिवाद से जुड़ा है। एमपी-एमएलए कोर्ट भोपाल के विशेष मजिस्ट्रेट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसी समन और परिवाद को निरस्त कराने के लिए राहुल गांधी ने बीते दिनों मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और अजय गुप्ता ने पक्ष रखा था। कोर्ट को बताया गया कि परिवाद पूरी तरह निराधार हैं और लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। कार्तिकेय सिंह चौहान की और से कहा गया कि साल 2018 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए राहुल गांधी ने झाबुआ की चुनावी सभा में भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर पनामा पेपर्स लीक का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान और कार्तिकेय का नाम लिया था। हालांकि इसके दूसरे दिन ही राहुल गांधी ने अपने बयान पर कहा था कि वे कन्फ्यूज हो गए थे। दरअसल वे छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह के बेटे का नाम लेना चाह रहे थे, लेकिन कार्तिकेय का नाम ले लिया। कार्तिकेय का दावा- इस बयान से उनकी छवि धूमिल हुई राहुल गांधी ने अपने बयान में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर हुई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए कहा था कि मध्यप्रदेश में ऐसी कार्रवाई नहीं हुई। इसे लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने दावा किया कि इस बयान से उनकी छवि धूमिल हुई और उन्होंने एमपीएमएलए कोर्ट में मानहानि का केस दायर किया। इसी मामले में विशेष अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था, जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। अब इस मामले पर संभवता आज अंतिम सुनवाई हो सकती है, जिस पर कि सभी की नजर बनी हुई है।

राहुल गांधी बोले, बीजेपी के सांसदों में है मतदाता धोखाधड़ी, हरियाणा की पूरी सरकार घुसपैठियों की

  नई दिल्ली कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक हमलावर पोस्ट साझा करते हुए बीजेपी पर एक बार फिर से 'वोट चोरी' का आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि वोट चोरी के जरिए कभी सीटें चुराई जाती हैं, तो कभी पूरी की पूरी सरकार ही हड़प ली जाती है. उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि लोकसभा में बीजेपी के जो 240 सांसद हैं, उनमें से मोटे तौर पर हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है।  राहुल ने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या इन सांसदों को बीजेपी की ही भाषा में 'घुसपैठिया' कहा जाना चाहिए?  उन्होंने वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया को लेकर तीखा हमला बोला है।  'असली डर सच्चा का…' राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "वोट चोरी से कभी सीटें चुराई जाती हैं, कभी पूरी सरकार. लोकसभा के 240 बीजेपी सांसदों में से मोटे तौर पर हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है. पहचानना मुश्किल नहीं- क्या उन्हें बीजेपी की भाषा में 'घुसपैठिए' कहें?" उन्होंने हरियाणा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां तो पूरी सरकार ही 'घुसपैठिया' है।  राहुल गांधी ने कहा, "जो संस्थाएं अपनी जेब में रखते हैं, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ देते हैं- वो ख़ुद 'रिमोट कंट्रोल्ड' हैं. उन्हें असली डर सच्चाई का है, क्योंकि निष्पक्ष चुनाव हो जाएं, तो आज ये 140 के पास भी नहीं जीत सकते।  इससे पहले राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजे आने के बाद चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमला बोला था। 

राज्यसभा चुनाव के बाद हरियाणा कांग्रेस में विवाद, राहुल गांधी ने निशाना साधा उन विधायकों पर जिन्होंने नौ वोट खराब किए

चंडीगढ़  हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सभी दलों के निशाने पर है। चुनाव में पांच विधायकों द्वारा क्रास वोटिंग करने और चार विधायकों की वोट रद होने के बाद जहां कांग्रेस में जबरदस्त तरीके से गुटबाजी बढ़ी है, वहीं इनेलो काफी हद तक भाजपा की बी टीम होने के कांग्रेस के आरोपों को खारिज करने में सफल साबित हुई है। कांग्रेस में गुटबाजी की स्थिति यह है कि सभी धड़े एक दूसरे पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं। इस गुटबाजी के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के पूर्व सांसद बेटे बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा का सिलसिला नहीं थमा है। बृजेंद्र सिंह ने चुनाव से पहले भी कांग्रेस विधायकों को क्रास वोटिंग नहीं करने की नसीहत दी थी। साथ ही कहा था कि यदि क्रास वोटिंग हुई तो आरोपित विधायकों की खैर नहीं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव से सीधे तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। राहुल गांधी ने कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया था। यह बात सही है कि कर्मवीर बौद्ध को न तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा पसंद करते थे और न ही कांग्रेस का कोई विधायक उनके नाम को पचा पा रहा था, लेकिन कहीं न कहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को यह आभास था कि अगर कर्मवीर बौद्ध चुनाव हार गए तो उनके राजनीतिक भविष्य के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता के वशीभूत ही सही, कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस नेता चुनाव जिताने में कामयाब हो गए, लेकिन उनकी जीत भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल से मात्र 0.44 प्रतिशत मतों से हुई है, जो बहुत बढ़िया स्थिति नहीं है। कांग्रेस के 37 विधायकों में से कर्मवीर बौद्ध को सिर्फ 28 वोट मिले, जबकि पांच वोट क्रास हो गए और चार वोट रद हो गए। कांग्रेस नेता अपनी झेंप मिटाने के लिए बार-बार दावा कर रहे हैं कि सिर्फ पांच नेताओं ने क्रास वोट की है, जबकि जिन चार कांग्रेस विधायकों की वोट रद हुई है, वह पता नहीं किया जा सकता, मगर सच्चाई यह है कि कांग्रेस के नौ वोट खराब हुए हैं अथवा खराब किए गए हैं। हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने स्पष्ट दावा किया है कि सतीश नांदल के संपर्क में 12 कांग्रेस विधायक थे। कांग्रेस के जिस तरह से नौ वोट खराब हुए हैं, उससे मोहन लाल बडौली का दावा सही प्रतीत हो रहा है। हुड्डा गुट के लिए अगर संतोषजनक है तो वह ये कि जिन पांच कांग्रेस विधायकों ने वोट क्रास की है, उसमें दो कुमारी सैलजा गुट की विधायक हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में कुमारी सैलजा ने नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी के पति रामकिशन गुर्जर की अनदेखी कर स्पष्ट संदेश दे दिया कि राहुल गांधी के उम्मीदवार को हराने की कोशिश करने वाला कोई विधायक उनका अपना नहीं हो सकता। लेकिन हुड्डा गुट को हाईकमान के समक्ष यह कहने का मौका मिल गया है कि सैलजा गुट के विधायकों ने भी गड़बड़ की है, जबकि सैलजा गुट के पास हुड्डा गुट के बारे में हाईकमान के समक्ष कहने के लिए उनसे ज्यादा तथ्य मौजूद हैं। हरियाणा में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह पिछले कई माह से सद्भाव यात्रा निकाल रहे हैं। कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह हालांकि बृजेंद्र सिंह यात्रा को सिरे से खारिज कर चुके थे, लेकिन राहुल गांधी ने बृजेंद्र सिंह की पीठ पर हाथ धरा तो सब चुप्पी साध गए। अपनी यात्रा के बाद से अब तक राहुल गांधी मुलाकात व बातचीत के लिए बृजेंद्र सिंह को तीन बार दिल्ली बुला चुके हैं। बृजेंद्र सिंह की यात्रा अप्रैल-मई तक संचालित होगी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यदि राज्य में हुड्डा व सैलजा गुट की लड़ाई इसी तरह से चलती रही और कांग्रेस आपसी फूट का शिकार रही तो आने वाले समय में राहुल गांधी की ओर से बृजेंद्र सिंह को कांग्रेस के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया जा सकता है।  

RS में कांग्रेस के LoP पद पर तलवार, ठाकरे से सीट के लिए पीछे हटने की गुहार

मुंबई  महाराष्ट्र में विपक्ष के पास जीतने योग्य एक ही राज्यसभा सीट है, जिसपर कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी दोनों ही दावा पेश कर चुके हैं। अब खबरें हैं कि कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे से सीट पर दावेदारी छोड़ने की अपील की है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के लिए यह सीट राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी और केरल विधायक रमेश चेन्नीथला ने ठाकरे से बात की थी। उन्होंने ठाकरे से कहा कि यह सीट कांग्रेस को दी जानी चाहिए, जिसके बदले में शिवसेना यूबीटी को एमएलसी सीट दी जाएगी। खास बात है कि राज्यसभा सीट पर नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च है। इसपर नतीजों का ऐलान 16 मार्च को होगा। इन नेताओं का पूरा हो रहा कार्यकाल अप्रैल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी, राकांपा (एसपी) की फौजिया खान, आरपीआई (आठवले) के रामदास आठवले, भाजपा के भागवत कराड, कांग्रेस की रजनी पाटिल और राकांपा के धैर्यशील पाटिल का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। सत्तारूढ़ महायुति के पक्ष में भारी बहुमत को देखते हुए एमवीए संसद के ऊपरी सदन और विधान परिषद में केवल एक-एक सदस्य को निर्वाचित कराने में सफल हो सकती है। क्या बात हुई रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि चेन्नीथला ने ठाकरे को बताया कि महाराष्ट्र की यह एकमात्र सीट कांग्रेस के लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि अगर कांग्रेस को यह सीट नहीं मिलती है, तो संभावनाएं हैं कि पार्टी नेता प्रतिपक्ष के पद पर दावा गंवा सकती है। सूत्र ने कहा, 'राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए किसी भी विपक्षी दल को कुल सीटों का 10 फीसदी या कम से कम 25 सदस्य रखने होते हैं। मौजूदा स्थिति है कि कांग्रेस के पास संख्या बल 27 का है, लेकिन कई सांसद ऐसे हैं जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।ऐसे में 25 का आंकड़ा बनाए रखना चुनौती हो सकता है। ऐसे में एक राज्यसभा सीट भी अहम साबित हो सकती है।' उन्होंने कहा, 'इसके चलते कांग्रेस नेतृत्व ने उद्धव ठाकरे से इस मुद्दे पर नहीं अड़ने का अनुरोध किया है। इसके बदले में कांग्रेस शिवसेना यूबीटी को एक एमएलसी सीट देने के लिए तैयार है।' MVA के तीनों दलों की नजर खास बात है कि इस सीट पर महाविकास अघाड़ी के तीनों बड़े दलों की नजर है। एक ओर जहां आदित्य ठाकरे ने एक पोस्ट में कहा, 'राज्यसभा चुनाव के लिए हो रही वार्ता में कोई गतिरोध नहीं है; सभी दल एक-दूसरे के संपर्क में हैं। हमने एक राज्यसभा सीट पर अपना दावा पेश किया है, क्योंकि संख्यात्मक ताकत और एमवीए के लिए तय 'रोटेशन' नीति के अनुसार इस सीट पर शिवसेना यूबीटी को चुनाव लड़ना चाहिए।' वहीं, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी इस सीट से चुनाव लड़ने के अपने दावे पर अडिग है, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है और विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिए जाएंगे। इधर, वरिष्ठ राजनेता शरद पवार भी इस सीट के दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। खबर है कि उनकी बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने गठबंधन के साथियों से पिता का समर्थन करने की अपील की है। किसके पास कितनी संख्या शिवसेना यूबीटी के पास 20, कांग्रेस के पास 16 और राकंपा शरद पवार के पास 10 विधायकों का समर्थन है। हाल ही में शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि 16 मार्च को होने वाले चुनावों से पहले राज्यसभा की एकमात्र सीट को लेकर एमवीए के भीतर चर्चा हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते शिवसेना यूबीटी का रुख इस फैसले के लिए अहम होगा।

राहुल गांधी-खड़गे के साथ भोपाल किसान महासम्मेलन, शहरभर में यातायात पर असर

भोपाल भोपाल में आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का महत्वपूर्ण दौरा है. राजधानी में आयोजित किसान महा चौपाल कार्यक्रम में दोनों नेता शामिल होंगे और किसानों से सीधे संवाद करेंगे इस दौरे को प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राहुल गांधी दोपहर 12 बजे दिल्ली से भोपाल के लिए रवाना होंगे और लगभग 1 बजे भोपाल पहुंचेंगे. एयरपोर्ट पर संक्षिप्त स्वागत के बाद वे दोपहर 1:30 बजे जवाहर चौक के लिए प्रस्थान करेंगे और करीब 1:55 बजे वहां पहुंचेंगे. किसान महा चौपाल कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से किसान महा चौपाल कार्यक्रम की शुरुआत होगी, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे किसानों को संबोधित करेंगे. यह कार्यक्रम लगभग डेढ़ घंटे तक चलेगा. दोपहर 2 बजे से 3:30 बजे तक राहुल गांधी किसानों के बीच मौजूद रहेंगे और अलग-अलग कृषि मुद्दों, समर्थन मूल्य, फसल नुकसान, कर्ज, और अन्य समस्याओं पर खुलकर चर्चा करेंगे. बताया जा रहा है कि इस दौरान वे किसानों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और पार्टी की नीतियों को साझा करेंगे. कार्यक्रम समाप्त होने के बाद राहुल गांधी दोपहर 3:35 बजे जवाहर चौक से एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे. वे शाम 4 बजे भोपाल एयरपोर्ट पहुंचेंगे और 4:15 बजे दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे. यह दौरा आगामी राजनीतिक रणनीति और किसानों से बातचीत के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें पार्टी नेतृत्व जमीनी स्तर पर संपर्क मजबूत करने का प्रयास करेगा. राहुल-खड़गे के साथ मंच पर 250 नेता बैठेंगे मंच पर मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ करीब 250 नेता बैठेंगे। इनमें एमपी कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, कांग्रेस मीडिया डिपार्टमेंट के नेशनल चेयरमैन पवन खेड़ा भी रहेंगे। साथ ही पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, एमपी के सभी कांग्रेस विधायक, तीनों राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, विवेक तन्खा, अशोक सिंह, पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के मेंबर और सभी 71 जिला कांग्रेस अध्यक्ष बैठेंगे। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, सीईसी मेंबर भी शामिल होंगे। तीन दिन की तैयारी में लाखों लोग जुटेंगे: पटवारी मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा- देश के हर किसान को चाहे वह भाजपा की विचारधारा को एक्सेप्ट करता हो, लेकिन जो किसान खेती से जुड़ा है। उसे ये एहसास हो गया है कि नरेंद्र मोदी ने दबाव में आकर ट्रेड डील की है। उसी का असर है कि तीन दिन की तैयारी में लाखों लोग भोपाल आ रहे हैं। 21 फरवरी को यह तय हुआ कि 24 को भोपाल में चौपाल होगी। उसमें लाखों की तादाद में लोग आएंगे। भोपाल की सड़कें पट जाएंगी। ये अपने आप में मैसेज है कि ये ट्रेड डील देश विरोधी, किसान विरोधी है। नरेंद्र मोदी दबे हुए हैं। उन्होंने कंप्रोमाइज किया है। दुनिया भर में चल रही सेक्स फाइल का भी इस डील पर असर पड़ा है। यह कोई इल्जाम नहीं है। ट्रम्प ने एक बार कहा था कि मैं नरेंद्र मोदी का पॉलिटिकल करियर खत्म नहीं करना चाहता। यह हमारे देश की बेइज्जती है। PM का अपमान होगा तो हर भारतवासी को गुस्सा आएगा जीतू पटवारी ने कहा- आखिर नरेंद्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री हैं। उनके खिलाफ विदेश का कोई राष्ट्राध्यक्ष इस तरह की बात करता है तो भारत के हर नागरिक को गुस्सा आएगा, लेकिन सवाल यह है कि इस पर नरेंद्र मोदी ने कोई बयान क्यों नहीं दिया। इस ट्रेड डील से किसानों की गर्दन ट्रम्प की तलवार पर रख दी गई है। ट्रेड डील से एमपी के 70 फीसदी किसान प्रभावित जीतू पटवारी ने कहा- राहुल जी और खड़गे जी को धन्यवाद। इस ट्रेड डील से सबसे ज्यादा किसान अगर कहीं प्रभावित हुए हैं तो मप्र में हुए हैं। सोयाबीन उत्पादक किसान सबसे ज्यादा हमारे यहां के हैं। हम सोया स्टेट थे। कपास, मक्का सबसे ज्यादा यहां पैदा होते हैं। 70% किसान इससे प्रभावित हैं तो उन्होंने मप्र को सबसे पहले चुना। मेरी और उनकी आपस में बात हुई। पार्टी ने निर्णय लिया और अब हम किसान की लड़ाई लड़ेंगे। शहरभर में रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन कार्यक्रम के दौरान जवाहर चौक और आसपास के मार्गों पर यातायात प्रतिबंधित रहेगा। डिपो चौराहा से पीएनटी या पॉलिटेक्निक चौराहा होकर आवागमन किया जा सकेगा। प्लेटिनम चौराहा से आने वाले वाहन माता मंदिर या टीटी नगर मार्ग का उपयोग करेंगे। रंगमहल से आने वाले वाहन बाणगंगा या माता मंदिर मार्ग से गुजरेंगे। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को कंट्रोल रूम तिराहा, पीएचक्यू, लिली टॉकीज, तलेया, भारत टॉकीज, हमीदिया रोड और लालघाटी होकर जाने की सलाह दी गई है, ताकि किसी प्रकार की देरी से बचा जा सके। दिक्कत होने पर करें संपर्क पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का पालन करें और अनावश्यक रूप से कार्यक्रम स्थल के आसपास न जाएं। किसी भी असुविधा की स्थिति में यातायात कंट्रोल रूम के नंबर 0755-2677340 और 2443850 पर संपर्क किया जा सकता है।  शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र से करेंगे लड़ाई की शुरुआत जीतू पटवारी ने कहा- यहां के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान देश के कृषि मंत्री हैं। जब अमेरिका के कृषि मंत्री का बयान आया तो उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी को बहुत साधुवाद वो विश्व के ऐसे नेता हैं कि जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने भारत के किसानों को बचा लिया। क्या भारत के किसानों की कोई गर्दन पकड़कर हत्या कर रहा था? अगर बचा लिया तो जीरो प्रतिशत टैरिफ के एग्रीकल्चर प्रोडक्शन आएगा। 18% टैरिफ पर यहां से अमेरिका जाएंगे। हम विदिशा, बुधनी से यह किसान संवाद यात्रा शुरू करेंगे। प्रदेश का हर नेता कार्यकर्ता इसे आगे लेकर जाएंगे। जैसे नरेंद्र मोदी को तीन काले कानून वापस लेने पडे़ थे। वैसे ही ये ट्रेड डील भी वापस लेना पड़ेगी।

भिवंडी कोर्ट में राहुल गांधी की पेशी, RSS केस में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने दिखाए काले झंडे

ठाणे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शनिवार को ठाणे जिले के भिवंडी में मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश हुए. राहुल ने मानहानि केस में नया जमानत दिया. उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को नए जमानतदार के तौर पर पेश किया. इससे पहले, भिवंडी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गांधी से केस में नया जमानत देने को कहा था, क्योंकि पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल, जो उनके जमानतदार या गारंटर थे, का पिछले साल दिसंबर में निधन हो गया था. राहुल गांधी के वकील नारायण अय्यर ने पहले कहा था कि जज ने राहुल गांधी को खास तौर पर नए जमानत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए खुद कोर्ट में मौजूद रहने का निर्देश दिया था. क्योंकि शिवराज पाटिल चाकुरकर, जो उनके मौजूदा जमानतदार थे, की 12 दिसंबर को मौत हो गई थी. जब राहुल गांधी को इस मामले में जमानत मिली थी, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल उनकी जमानत के लिए खड़े हुए थे. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी को दिखाए काले झंडे वहीं, कोर्ट में पेशी के लिए राहुल गांधी जब मुंबई पहुंचे तो बीजेपी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने इसे एआई समिट में यूथ कांग्रेस के विरोध का जवाब बताया. राहुल गांधी सुबह छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे और कोर्ट में पेश होने के लिए सड़क के रास्ते ठाणे जिले के भिवंडी गए. बीजेपी समर्थकों के एक ग्रुप ने मुलुंड टोल नाका पर विरोध प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ नारे लगाए. हालांकि, पुलिस ने कांग्रेस नेता के दौरे के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे ताकि भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच किसी भी टकराव को रोका जा सके. पत्रकारों से बात करते हुए, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का विरोध करते हैं और उन पर देश की छवि खराब करने का आरोप लगाया. एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री के हर काम का विरोध करते हैं. देश से जुड़े मुद्दों पर भी. यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने AI समिट में नारे लगाए, जिससे भारत की छवि खराब हुई. इसीलिए हमने उनके खिलाफ विरोध किया." इस बीच, कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने बीजेपी के विरोध प्रदर्शन को राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया. सावंत ने सत्ताधारी बीजेपी पर ड्रामा करने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में महाराष्ट्र और देश के किसानों के हितों को दांव पर लगाकर उनके भविष्य से समझौता किया है. राहुल के खिलाफ मानहानि का केस राहुल के बयानों को लेकर एक RSS कार्यकर्ता राजेश कुंते ने उनके खिलाफ मानहानि का केस किया है. राजेश कुंते ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई कि कांग्रेस नेता राहुल ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान सोनाले गांव में एक रैली में कहा था कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे संघ का हाथ था. कुंते ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 (मानहानि) के तहत अपनी शिकायत में कहा कि इस झूठी टिप्पणी से आरएसएस की छवि धूमिल हुई है. ट्रायल के दौरान कुंते का क्रॉस-एग्जामिनेशन और पुनर्परीक्षा खत्म हो गया है. इसस पहले, सुनवाई 20 दिसंबर, 2025 को होनी थी, लेकिन नए जमानतदार की जरूरत के कारण इसे 17 जनवरी तक के लिए टाल दिया गया था. 17 जनवरी को मजिस्ट्रेट ने मामले को 21 फरवरी तक के लिए आगे बढ़ा दिया.

भूपेन बोरा ने कांग्रेस को ठुकराया, भाजपा में शामिल होने का लिया फैसला, CM हिमंत ने स्वागत किया

गुवाहाटी  असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे को लेकर नया ट्विस्ट नजर आ रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने  दावा किया कि 22 फरवरी को भाजपा ज्वॉइन करेंगे। उन्होंने यह भी कहाकि उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता भी भाजपा में आएंगे। बता दें कि सोमवार को भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बाद में शीर्ष नेतृत्व के मनाने पर उन्होंने अपने फैसले पर फिर से विचार करने की बात कहते हुए इस्तीफा वापस ले लिया था। बताया जाता है कि राहुल गांधी ने भी उन्हें मनाया था। लेकिन मंगलवार को उनके भाजपा जॉइन करने की बातें होने लगीं। हिमंत बोले उनके लिए घरवापसी हिमंत ने अपने बयान में कहाकि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पहले ही उनकी जॉइनिंग अप्रूव कर दी है। भाजपा में उनका स्वागत है। उन्होंने कहाकि भूपेन बोरा को वह सभी सम्मान दिया जाएगा, जिसके वह हकदार हैं। भाजपा से जुड़ना उनके लिए घरवापसी जैसा होगा, क्योंकि यह उनके जैसे लोगों की ही पार्टी है, जो अपने पिता की विरासत वाली सियासत नहीं करते हैं। इससे पहले सरमा, गुवाहाटी के घोरमारा इलाके में बोरा के आवास पर गए, जहां उनकी पत्नी और बेटे ने मुख्यमंत्री की आरती की और स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने पूर्व में कहा था कि बोरा के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं और वादा किया था कि वह उन्हें विधानसभा चुनाव में सुरक्षित सीट से जीतने में मदद करेंगे। दिन में क्या बोले थे भूपेन बोरा वहीं, आज दिन में कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कहा कि वह केंद्रीय नेतृत्व द्वारा पूछे जाने पर मंगलवार रात तक इस बारे में अपना अंतिम निर्णय घोषित करेंगे कि वह इस्तीफा वापस लेंगे या नहीं। बोरा ने आज सुबह पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि अंतिम निर्णय लेने से पहले वह अपने शुभचिंतकों, करीबी सहयोगियों और लखीमपुर जिले के लोगों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा करना चाहेंगे, जहां से वह ताल्लुक रखते हैं। बोरा ने बिना नाम लिए कांग्रेस के कुछ नेताओं पर हमला करते हुए कहा कि वह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) में रहने को तैयार हैं, लेकिन एपीसीसी (आर) में नहीं, जो स्पष्ट रूप से पार्टी के धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन की ओर इशारा था। उन्होंने कहाकि मैंने अपने त्यागपत्र में भी इस बात को स्पष्ट कर दिया है। आरोप भी लगाया था बोरा ने आरोप लगाया कि समागुरी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनके नाम का सुझाव दिया गया था, लेकिन उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया गया। हुसैन के धुबरी लोकसभा सीट से चुने जाने के बाद समागुरी विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया था। पार्टी का टिकट उनके बेटे तंजील हुसैन को दिया गया था, जो भाजपा के दीप्लू रंजन शर्मा से चुनाव हार गए थे। बोरा ने दावा किया कि 2021 के विधानसभा चुनाव में, कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन का विरोध किया था और मैंने इस संबंध में पार्टी आलाकमान को कई बार पत्र लिखा था। चुनावों के बाद, गठबंधन खत्म हो गया और पिछले लोकसभा चुनाव में हुसैन को इसका सबसे बड़ा फायदा हुआ, उन्होंने एआईयूडीएफ नेता बदरुद्दीन अजमल को रिकॉर्ड अंतर से हराकर सीट जीती।

EVM विवाद पर INDI अलायंस में खटपट, लोकसभा में अध्यक्ष सुले ने उठाया सवालों से दूरी

नई दिल्ली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद और वरिष्ठ नेता शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने कहा है कि वह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल नहीं उठाएंगी, क्योंकि इन्हीं मशीनों से वह चार बार सांसद चुनी गई हैं। सुप्रिया सुले की पार्टी NCP (शरद पवार), विपक्षी गठबंधन 'महाराष्ट्र विकास आघाडी' का हिस्सा है, जिसमें कांग्रेस और शिवसेना (UBT) भी शामिल हैं। महाराष्ट्र के बारामती से चार बार की लोकसभा सदस्य और NCP (शरद पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुले ने लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हो रही बहस के दौरान यह बात कही। सुले ने सदन में कहा, “मैं इसी मशीन से चुनकर आई हूं, इसलिए मैं ईवीएम या वीवीपैट पर सवाल नहीं उठाऊंगी।” उन्होंने कहा, "मैं मशीन के खिलाफ बात नहीं कर रही हूं। मैं एक बहुत सीमित बात रख रही हूं और भारतीय जनता पार्टी से मुझे बड़ी अपेक्षाएं हैं, जिसे महाराष्ट्र में इतना बड़ा जनादेश मिला है।" सुले के बयान के गहरे मायने EVM पर सुप्रिया सुले का यह बयान काफी अहम है क्योंकि इसके राजनीतिक मायने और सियासी संदेश गहरे हो सकते हैं। अब इस बात के बी कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या इंडिया अलायंस में सहयोगी दलों के बीच खटपट शुरू हो गई है। अभी तक संसद में भी सभी विपक्षी दल किसी मुद्दे पर मिलकर सरकार से लड़ते रहे हैं और सदन के अंदर और बाहर सरकार को घेरते रहे हैं लेकिन चुनाव सुधारों के दौरान जहां कांग्रेस और उसके नेता ईवीएम के गलत इस्तेमाल का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं सुप्रिया ने अपनी चार बार की जीत का हवाला देकर उस पर सवाल उठाने से इनकार कर दिया। बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती एक दिन पहले ही दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी की दी थी। उन्होंने कहा कि भाजपा अगर बैलेट पर चुनाव लड़े, वोट चोरी न करें तो वह एक भी चुनाव नहीं जीत सकती है। चुनाव आयोग के बिना भाजपा चुनाव जीत ही नहीं सकती है। चुनाव आयोग सरकार की मदद कर रहा है और लोकतंत्र को खत्म रहा है। चुनाव की घोषणा से लेकर वोटर लिस्ट, मतदान, मतगणना, ईवीएम सबका इस्तेमाल आयोग भाजपा को मदद पहुंचाने के लिए कर रहा है। जनता का विश्वास भाजपा से, सरकार से, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से हट चुका है।

सोनिया-राहुल गांधी को बड़ी राहत, नेशनल हेराल्ड केस में कोर्ट ने ED की चार्जशीट को खारिज किया

नई दिल्ली  दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य को राहत दी है। अदालत ने मामले में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ईडी द्वारा दायर आरोप पत्र आधारहीन है, क्योंकि यह किसी प्राथमिकी के बाजए एक निजी शिकायत पर आधारित है। गांधी परिवार के खिलाफ ईडी की शिकायत को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि बिना प्राथमिकी के मामले में कार्यवाही आधारहीन है। कोर्ट ने कहा कि क्योंकि मामले में अभी दिल्ली आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया, ऐसे में इस पर अभी ईडी द्वारा दिए गए बयान पर निर्णय देना जल्दबाजी होगी। अदालत ने कहा कि ईडी मामले में आगे की जांच जारी रख सकती है।  सोनिया और राहुल को FIR की कॉपी पाने का अधिकार नहीं- कोर्ट साथ ही राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं को झटका देते हुए फैसला सुनाया है कि नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य आरोपियों को एफआईआर की कॉपी पाने का अधिकार नहीं है, यह फैसला दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) द्वारा मामले में दर्ज की गई नई एफआईआर से जुड़ी कार्यवाही के दौरान दिया। कोर्ट के फैसले में क्या-क्या नेशनल हेराल्ड केस की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसी सीबीआई ने अब तक कोई प्रीडिकेट अपराध दर्ज नहीं किया है, इसके बावजूद ईडी ने जांच आगे बढ़ाई. एफआईआर के अभाव में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच और उसके आधार पर दायर अभियोजन शिकायत (प्रोसिक्यूशन कम्प्लेंट) कायम नहीं रह सकती.     कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसी शिकायत पर मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही भी बनाए रखने योग्य नहीं है. निजी व्यक्ति द्वारा दायर शिकायत पर संज्ञान लेना कानूनन अनुमेय नहीं है. इस मामले के गुण-दोष (मेरिट्स) आदि से जुड़े अन्य तर्कों पर विचार/निर्णय की आवश्यकता नहीं है. अब कौन सी एफआईआर अहम? कोर्ट के इस फैसले के बाद अब दिल्ली पुलिस की EOW द्वारा दर्ज FIR महत्वपूर्ण होगी. पिछले कुछ समय पहले ही नेशनल हेराल्ड केस में EOW ने मामला दर्ज किया था. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से दर्ज एफआईआर की कॉपी आरोपियों को उपलब्ध कराने के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली पुलिस की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई. इससे पहले सोमवार को भी सुनवाई हुई थी. राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई आज यानी मंगलवार के लिए टल गई थी. कब दर्ज हुई एफआईआर दरअसल, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 3 अक्टूबर को नेशनल हेराल्ड केस से संबंधित एक नई एफआईआर दर्ज की थी. इस एफआईआर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड और अन्य को आरोपी बनाया गया है.एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपियों की ओर से इसकी कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की गई थी. मगर अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आरोपियों को एफआईआर की कॉपी नहीं मिलेगी. क्या है नेशनल हेराल्ड केस दरअसल, नेशनल हेराल्ड केस पहले से ही राजनीतिक हलचल का केंद्र बना हुआ है. नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी. इसका प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की ओर से किया जाता था. आर्थिक संकट के कारण 2008 में अखबार बंद कर दिया गया, जिसके बाद विवाद की शुरुआत हुई. साल 2010 में ‘यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है. ईडी की जांच में क्या खुलासा नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में खुलासा हुआ कि यंग इंडियन ने 50 लाख रुपए में एजेएल की करीब 2,000 करोड़ रुपए की संपत्तियां हासिल कीं, जबकि उनकी बाजार कीमत कहीं अधिक थी. नवंबर 2023 में ईडी ने कार्रवाई करते हुए लगभग 661 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां और 90.2 करोड़ रुपए के एजेएल शेयर जब्त किए थे, जिन्हें अपराध की आय माना गया है. .सुनवाई के दौरान क्या हुआ? मामले की सुनवाई के दौरान जज ने आदेश पढ़ना शुरू किया. सबसे पहले अदालत ने EOW (Economic Offences Wing) की शिकायत से जुड़े रिवीजन पिटीशन पर आदेश सुनाया. अदालत ने जांच की बुनियाद पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक CBI की ओर से कोई प्रेडिकेट (Scheduled) अपराध दर्ज नहीं किया गया है, इसके बावजूद ED ने PMLA के तहत जांच आगे बढ़ाई. नेशनल हेराल्ड केस में गांधी परिवार को बड़ी राहत, कोर्ट ने ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से किया इनकार दिल्ली कोर्ट ने ED की जांच पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा, 'CBI ने अब तक कोई प्रेडिकेट ऑफेंस दर्ज नहीं किया है, इसके बावजूद ED ने जांच जारी रखी.' कोर्ट ने यह भी कहा कि जब मूल अपराध (Predicate Offence) ही दर्ज नहीं है, तो मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कैसे आगे बढ़ाई जा सकती है. कांग्रेस ने कहा- सत्य की जीत हुई कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस ने कहा कि सत्य की जीत हुई है. मोदी सरकार की दुर्भावना और गैरकानूनी गतिविधियों का पर्दाफाश हो चुका है. वहीं कांग्रेस ने सभी आरोपों को नकारते हुए इसे राजनीति से प्रेरित मामला बताया है और कहा है कि इसमें किसी तरह का निजी आर्थिक लाभ नहीं लिया गया. यह मामला राउज़ एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के लिए आया था, जहां अदालत ने ED की ओर से दाखिल विस्तृत रिकॉर्ड की जांच के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. अब कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने से इनकार किए जाने के बाद, ED के अगले कानूनी कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं. 'यह मामला ही निराधार था' इस मामले पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'यह निराधार मामला था.'