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वृंदावन चंद्रोदय मंदिर: कुतुब मीनार से तीन गुना ऊंचे मंदिर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में

 वृंदावन  वृंदावन में बन रहे दुनिया के सबसे ऊंचे चंद्रोदय मंदिर का दक्षिणी भाग मंदिर बनकर तैयार हो चुका है। इसका लोकार्पण करने की तैयारियां मंदिर में शुरू हो चुकी हैं। अब मुख्य मंदिर का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होने जा रहा है। ठाकुर श्रीश्री वृंदावनचंद्र का ये मंदिर कुतुब मीनार से तीन गुना ऊंचा होगा। कुतुब मीनार की ऊंचाई 73 मीटर है, जबकि दुनिया के सबसे ऊंचे 70 मंजिला मंदिर की ऊंचाई 212 मीटर होगी। इसकी मुख्यमंत्री की आधारशिला रखी जानी है। मंदिर प्रबंधन ने मंदिर के दक्षिणी भाग मंदिर के लोकार्पण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित करने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी मंदिर का लोकार्पण करने आते हैं तो वे दुनिया के सबसे ऊंचे चंद्रोदय मंदिर की आधारशिला भी रखेंगे। हालांकि प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वृंदावन के अक्षयपात्र स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे चंद्रोदय मंदिर का साउथ ब्लाक मंदिर जो बनकर लोकार्पण के लिए तैयार है। – फोटो: जागरण। मंदिर के साउथ ब्लॉक मंदिर के लोकार्पण की चल रहीं तैयारियां छटीकरा मार्ग स्थित अक्षयपात्र फाउंडेशन के 110 एकड़ परिसर में लगभग आठ एकड़ भूमि पर चंद्रोदय मंदिर स्थापित किया जा रहा है। जो 70 मंजिला एवं 212 मीटर ऊंचा मंदिर बनकर तैयार होगा। मंदिर के सबसे ऊपरी तल पर भगवान श्रीराधाकृष्ण के विग्रह स्थापित होंगे। इस मंदिर के शिखर से पूरे ब्रजमंडल का दर्शन संभव हो सके, ये व्यवस्था की जाएगी। मंदिर के आठ एकड़ परिसर में बरसाना, गोवर्धन, वृंदावन के प्रतिरूप बसाए जाएंगे, तो पृथ्वी लोक, स्वर्ग लोक, गोलोक वृंदावन मंदिर में ऊपर गैलरी में स्थापित किए जाएंगे। मंदिर में ऊपर पहुंचने के लिए आठ लिफ्टों का उपयोग होगा। साउथ ब्लॉक के लोकार्पण संग प्रधानमंत्री मोदी कर सकते हैं मुख्य मंदिर का शिलान्यास इस्कान बेंगलुरू द्वारा बनाए जा रहे इस मंदिर की शिलान्यास के दौरान 2014 में अनुमानित लागत 400 करोड़ बताई गई थी। लेकिन, अब समय बीतने के साथ अनुमानित लागत करीब 1400 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। खजुराहो और आधुनिक शैली के मिले जुले शिल्प में बन रहे इस मंदिर के इंटीरियर के डिजाइन की जिम्मेदारी विदेशी शिल्पकारों को सौंपी गई है। चारों तरफ बहेगी यमुना की कृत्रिम धारा चंद्रोदय मंदिर के चारों ओर कृत्रिम यमुना की धारा बहेगी। इसके तट पर खड़े होकर श्रद्धालु यमुना पूजन कर सकेंगे। इतना ही नहीं मंदिर के चारों ओर ब्रज के 12 वन इस उद्देश्य से स्थापित किए जाएंगे ताकि देश दुनिया के भक्त एक ही परिसर में पूरे ब्रज का दर्शन कर सकें। पूरा मंदिर 511 पिलरों पर टिका होगा, ये पिलर नौ लाख टन का वजन सहन कर सकते हैं। जबकि पूरी इमारत का वजन पांच लाख टन होगा। मंदिर में एक हाईस्पीट लिफ्ट भी स्थापित की जाएगी। 11 मंजिला है चंद्रोदय मंदिर का साउथ ब्लॉक मंदिर दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर के पहले भाग साउथ ब्लाक मंदिर के लोकार्पण की तैयारियां चल रही हैं। साउथ ब्लाक मंदिर की ऊंचाई 251 फीट है, जबकि ये 11 मंजिला इमारत है। मंदिर के दूसरे तल पर भगवान श्रीश्री वृंदावन चंद्र का मंदिर स्थापित है। मंदिर में नीचे विशालकाय हाल, प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है। भोजनालय भी मंदिर के ऊपरी तल पर मौजूद है। पहले मंदिर निर्माण की समय सीमा 2018 रखी गई थी मंदिर का शिलान्यास 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा रखी गई थी। तब इस मंदिर के पूरा होने की समय सीमा 2018 रखी गई थी। लेकिन, समय पर काम पूरा न होने पर इसकी समय सीमा 2028 तक बढ़ा दी गई। जबकि अब मुख्य मंदिर की आधारशिला संभवत: अगले महीने में रखी जाएगी तो इसे पूरा होने में आठ वर्ष की उम्मीद जताई जा रही है।  

यूपी वेदर अपडेट: राजधानी समेत कई जिलों में तूफान और बिजली गिरने का खतरा

लखनऊ  मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों में सुबह 8.30 से 10.30 बजे के तेज आंधी, मेघगर्जन, आकाशीय बिजली, भारी वर्षा और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में मौसम का सबसे अधिक कहर बरपने की आशंका जताई गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एसडीआरआएफ की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दी हैं और पुलिस बल को हाई अलर्ट पर रखा गया है। कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं और मौसम की लगातार निगरानी की जा रही है। राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों में सबसे गंभीर स्थिति की आशंका है। यहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, भारी वर्षा और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। पेड़ गिरने, कमजोर संरचनाओं को नुकसान और यातायात बाधित होने की आशंका के चलते विशेष सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं。 दूसरे जिलों में मौसम की स्थिति रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, बस्ती, बाराबंकी, सीतापुर, बहराइच, गोंडा और लखीमपुर खीरी में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। इन जिलों में ओलावृष्टि की संभावना कम है, लेकिन फसलों, बिजली लाइनों और अस्थायी ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है। अन्य जिलों की चेतावनी जौनपुर, प्रतापगढ़, आजमगढ़, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर, उन्नाव, हरदोई, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बरेली और पीलीभीत में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाओं के साथ हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना है। हालांकि इन जिलों में प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा, फिर भी आकाशीय बिजली को लेकर सावधानी जरूरी है। नागरिकों के लिए अपील प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवधि में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। पेड़ों, बिजली के खंभों और निर्माणाधीन स्थलों से दूरी बनाए रखें। किसानों को फसल और कृषि उपकरण सुरक्षित करने की सलाह दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या हेल्पलाइन से तत्काल संपर्क करें।

आम आदमी पार्टी से जुड़े पूर्व मंत्रियों व कुमार विश्वास को कोर्ट का समन, 15 मई तय

सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और जाने-माने कवि कुमार विश्वास के साथ- साथ दिल्ली सरकार के दो पूर्व मंत्रियों सत्येंद्र जैन और सोमनाथ भारती को समन भेजा है। यह मामला 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने इन सभी नेताओं को 15 मई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। क्या है 12 साल पुराना मामला? सरकारी वकील कालिका प्रसाद मिश्र के अनुसार, यह घटना 6 मई 2014 की है, जब देश में लोकसभा चुनाव हो रहे थे। उस समय कुमार विश्वास अमेठी से आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव आयोग के नियमानुसार, वोटिंग शुरू होने से 48 घंटे पहले जो लोग उस क्षेत्र के वोटर नहीं होते हैं, उन्हें वहां से जाना होता है। उस समय पुलिस ने कुमार विश्वास और उनके साथियों को अमेठी छोड़ने को कहा था, क्योंकि वे वहां के वोटर नहीं थे। आरोप है कि प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कुमार विश्वास, तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन और सोमनाथ भारती ने अपने समर्थकों के साथ क्षेत्र नहीं छोड़ा। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज कर लिया था।   कोर्ट का सख्त रुख और आगे की प्रक्रिया यह मामला पहले एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रहा था। लेकिन हाल ही में इसे स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया है और सभी आरोपियों को समन भेजा है। वहीं अगली सुनवाई 15 मई को होगी, जिसमें सभी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा। काफी चर्चा में था 2014 का अमेठी चुनाव साल 2014 का अमेठी लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक था। इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी थी और वहीं कुमार विश्वास का सीधा- सीधा मुकाबला कांग्रेस मंत्री राहुल गांधी और बीजेपी मंत्री स्मृति ईरानी से था। अब इतने साल बाद, कोर्ट के इस कदम से यह पुराना राजनीतिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला सही, विवाद से बचने की दी सलाह : मौलाना रजवी

बरेली यूपी के बरेली शहर में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का समर्थन किया है। मौलाना ने शरीयत का हवाला देते हुए इस फैसले को सही बताया है। शनिवार को मौलाना शहाबुद्दीन ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि कोर्ट का निर्णय पूरी तरह सही और दुरुस्त है। शरियत के नजरिये का हवाला देते हुए मौलाना ने कहा कि अगर किसी जगह नमाज पढ़ने से विवाद की स्थिति बनती हो या किसी को आपत्ति हो सकती हो, तो ऐसी जगहों पर नमाज पढ़ने से बचना चाहिए। मौलाना ने आगे कहा कि इस्लाम अमन और भाईचारे का पैगाम देता है, इसलिए ऐसे किसी भी कार्य से बचना जरूरी है जिससे सामाजिक सौहार्द्र प्रभावित हो। दरअसल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर बड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक स्थान सबके लिए है। धार्मिक आजादी के नाम पर इस पर कब्जे की अनुमति नहीं दी जा सकती। जब सार्वजनिक भूमि की बात आती है तो ये साफ है कि ये सबके लिए है और कानून से कंट्रोल होती है। कोई भी शख्स नियमित धार्मिक आयोजनों के इस्तेमाल के लिए इस पर दावा नहीं कर सकता। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए ऐसा कहा। अदालत ने आबादी भूमि के हिस्से के निजी परिसर में नमाज की अनुमति मांगने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा कि इस स्थान के इस्तेमाल पर आम जनता के आने-जाने और सुरक्षा पर असर पड़ता है। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक स्थानों पर सभी की बराबर पहुंच करे। आपराधिक केस है तो शासनादेश के तहत जारी करें चरित्र प्रमाण पत्र : हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्यआदेश में स्पष्ट किया है कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र रोका नहीं जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को शासन द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार याची को प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने नीतीश कुमार की याचिका पर उसके अधिवक्ता निर्भय कुमार भारती व सरकारी वकील को सुनकर दिया है। याची ने याचिका में एडीजी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें याची का चरित्र प्रमाण पत्र आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया था कि याची के विरुद्ध आपराधिक मामला लंबित है।

योगी सरकार का स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल, एक्सप्रेसवे निर्माण में तकनीक का बढ़ा इस्तेमाल

लखनऊ यूपी में एक्सप्रेसवे निर्माण का मॉडल अब पारंपरिक ढांचे से आगे निकलकर तकनीक-आधारित निगरानी और प्रबंधन की दिशा में प्रवेश कर चुका है। एक ओर तेज गति से एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, वहीं अब इन परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और स्विस सेंसर तकनीक को केंद्र में रखा गया है। यूपी एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा स्विट्जरलैंड की ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेट्रीज एजी के साथ की गई साझेदारी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सड़क निर्माण को ‘डेटा-ड्रिवन’ और ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ आधारित बनाया जा रहा है। पीएम मोदी द्वारा लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे में भी इस तकनीक का उपयोग किया गया है। निर्माण के साथ-साथ निगरानी अब तक सड़क निर्माण में गुणवत्ता का आकलन पहले निर्माण पूरा होने के बाद होता था, जिससे खामियों के सुधार में समय और लागत दोनों बढ़ते थे। नई प्रणाली में यह पूरी प्रक्रिया बदल गई है। सेंसर आधारित मॉड्यूल के जरिए निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी कमी को उसी समय दुरुस्त किया जा सके। सड़क की ‘रीयल कंडीशन’ का वैज्ञानिक आंकलन इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह विशेष वाहन है, जिसमें सात एक्सेलेरोमीटर सेंसर लगाए गए हैं। यह वाहन एक्सप्रेसवे की हर लेन पर चलकर सतह की एकरूपता, ऊंचाई में उतार-चढ़ाव और कंपन का डेटा जुटाता है। यह डेटा सड़क की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक विजुअल इंस्पेक्शन से कहीं अधिक सटीक माना जा रहा है। डेटा से तय होगी सड़क की गुणवत्ता सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को एआई सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोसेस कर सड़क की गुणवत्ता को ‘एक्सीलेंट’, ‘गुड’ और ‘पुअर’ जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इससे न केवल गुणवत्ता का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन संभव होता है, बल्कि निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होती है। खास बात यह है कि एआई आधारित यह सिस्टम सड़क की छोटी-से-छोटी खामी को भी पहचान लेता है, जिससे समय रहते सुधार किया जा सकता है। स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, सुरक्षा पर सीधा असर योगी सरकार का फोकस केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। एक्सप्रेसवे के संचालन चरण में भी एआई का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। एआई-सक्षम कैमरे ओवरस्पीडिंग या गलत लेन में चलने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को स्वतः चिन्हित करेंगे। इससे न केवल प्रवर्तन मजबूत होगा, बल्कि मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाने में भी मदद मिलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे, ‘स्मार्ट नेटवर्क’ की ओर बढ़ता यूपी यह पहल उत्तर प्रदेश को पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल से आगे ले जाकर ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ की श्रेणी में स्थापित करती है। एक्सप्रेसवे अब केवल कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और प्रबंधन के समन्वय से संचालित एक इंटेलिजेंट नेटवर्क के रूप में विकसित हो रहे हैं। स्पष्ट है कि योगी सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां फोकस केवल निर्माण पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन पर है।

ज्ञानवापी मस्जिद में ‘गेरुआ’ पेंटिंग का विवाद, मुस्लिम पक्ष ने जताया विरोध, सुरक्षा बढ़ी

वाराणसी ज्ञानवापी मस्जिद की दीवार पर भगवा पेंटिंग पर शहर मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने नाराजगी जताई है। इस नाराजगी के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुमे की नमाज अदा कराई गई। पेंटिंग को हटाने के लिए उन्होंने डीसीपी काशी और एसीपी ज्ञानवापी/सुरक्षा को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि यदि यह पेंटिंग नहीं हटाई गई तो हम विरोध जारी रखेंगे। इस दौरान शहर मुफ्ती ने लोगों से शांति से काम लेने की अपील भी किया। मामला अतिसंवेदनशील होने और जुमे की नमाज को देखते हुए क्यूआरटी, पीएसी और आसपास के थानों की फोर्स तैनात की गई थी। नमाज को तय समय पर शान्तीपूर्वक तरीके से कराया गया। ज्ञानवापी की दीवार पर की गयी भगवा पेंटिंग शहर मुफ्ती ने बताया- ज्ञानवापी मस्जिद की दीवार पर गेरुआ रंग लगाया गया और आपत्तिजनक चित्र बनाए गए। हमने एक सप्ताह तक बड़े अधिकारियों से बात किया और हटवाने के लिए कहा लेकिन उसपर कोई सुनवाई नहीं हुई। तो आज दोबारा हमने यहां के बड़े अधिकारी से मुलाकात की और लिखित रूप से उन्हें ज्ञापन देते हुए उसे हटवाने के लिए कहा है। जिसपर हमें आश्वासन दिया गया है। बिना इजाजत के किया गया रंग शहर मुफ्ती ने बताया- हमारे कैंपस के अंदर इस तरह से रंग करना बिना हमारी इजाजत के गलत है। मस्जिद के दरवाजे के पास इसे लगाया गया जो की हमारी जगह पर है ऐसे में हमने अधिकारियों को सूचित किया था। आज हमने विरोध किया है। आगे भी इसका विरोध जारी रहेगा। क्योंकि यह हमारी जगह और यह इस्लाम के अनुसार रंग भी नहीं है। यह धार्मिक मर्यादाओं और परंपरा के अनुसार नहीं है। 1 मई को जुमे की नमाज पढ़ने आए सैकड़ों मुसलमानों के साथ ज्ञानवापी मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने इस घटना को लेकर विरोध व्यक्त किया. मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि हमारी परिसर में किसी भी तरह के पेंट का पुरजोर विरोध करेंगे. मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि पत्र लिखकर पेंटिंग को हटाने के लिए प्रशासन से गुजारिश की है. उन्होंने आगे कहा कि अगर मस्जिद के दीवारों से भगवा पेंट नहीं हटाए गए तो हम इस मामले को हैंडल करने के लिए दूसरा तरीका अपनाएँगे।  वहीं, जुमे की नमाज के बाद भारी विरोध प्रदर्शन की आशंका के चलते बड़ी संख्या में फोर्स तैनात की गई थी, ताकि कानून व्यवस्था बिगड़ न जाए और शांति बनी रहे. 500 से ज्यादा की संख्या में पुलिस बल तैनाती की गई थी और काशी विश्वनाथ मंदिर आने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग किया गया था. मंदिर के रास्तों पर भारी पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती के बीच ड्रोन कैमरों से निगरानी भी की गई।  रेड जोन में आती है मस्जिद वाराणसी के श्रीकाशी विश्वनाथ धाम परिसर में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद रेड जोन में आती है। इसे अतिसंवेदनशील इलाका माना जाता है। श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मस्जिद के वाद में ASI के सर्वे के बाद मस्जिद के वजूखाने को कोर्ट ने सील किया है। ऐसे में यह और संवेदनशील बन गयी है। यहां हर वक्त सुरक्षा में सीआरपीएफ मौजूद रहती है। भारी फोर्स के बीच अदा हुई नमाज विरोध के एलान के बाद डीसीपी काशी जोन के नेतृत्व में शुक्रवार को भारी फोर्स तैनात की गई थी। एसीपी अतुल अंजान त्रिपाठी, पीएसी, क्यूआरटी और पुलिस फ़ोर्स के साथ मौके पर नमाज खत्म होने तक मौजूद रहे। एसीपी ने बताया शांतिपूर्वक तरीके से नमाज अदा करा ली गई है। .

घर बैठे भर सकेंगे जनगणना फॉर्म, 21 मई तक मिलेगा ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन का मौका

लखनऊ यूपी में जगणना की तैयारियां पूरी हो गई हैं। सात मई से स्व गणना (सेल्फ एन्युमिरेशन) कोई भी व्यक्ति कर सकता है। 21 मई तक अवसर मिलेगा। इसमें एक आईडी जनरेट होगी जिसे प्रगणक को देना होगा। इससे दोनों का काम आसान हो जाएगा। प्रगणक 22 मई से दरवाजे पर दस्तक देंगे। जनगणना में सेल्फ एन्युमिरेशन पोर्टल (एसई) नागरिकों को जनगणना 2027 के लिए घर बैठे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने की सुविधा देगा। यह 16 भाषाओं में उपलब्ध है। जिला जगणना अधिकारी ममता मालवीय ने बताया कि जनगणना के लिए घर बैठे स्व-जनगणना (सेल्फ एन्युमिरेशन) करने के लिए आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर जाना होगा। इसके लिए परिवार के मुखिया का मोबाइल नंबर डालना होगा। आधार और मकान से जुड़ी जानकारी इसमें भरनी होगी। एक मोबाइल नंबर से एक ही घर का लॉगिन किया जा सकेगा। सबसे पहले पोर्टल खोलें फिर अपना राज्य और कैप्चा भरें। इसके बाद स्वागत स्क्रीन आगे का मार्गदर्शन करेगी। परिवार का मुखिया अपना नाम मोबाइल नंबर भर कर अपनी भाषा चुनेगा। ओटीपी से कन्फरमेशन होने के बाद जिला भरेंगे। लैंडमार्क मैप के साथ हाईलाइट होगा उसे चुना जाएगा। इसके बाद अपने घर का डिटेल भरेंगे। कोई गलती होने पर पोर्टल पर विकल्प मिलेगा और कोई चीज छूटेगी तो उसका भी संकेत मिलेगा। इसके बाद ड्राफ्ट सहेजें, संशोधन भी कर सकते हैं अंत में सबमिट कर दें। इसके बाद एच के साथ 11 अंकों का एसईआईडी नंबर दिखेगा। एसएमएस से भी यह नंबर आएगा। जब प्रगणक आपके घर आए तो उसे यह एसईआईडी नंबर दे दें तो समय बचेगा और सूचना भी सही से भरी जा सकेंगी। जनगणना कार्यों की लगातार होगी मानीटरिंग जनगणना प्रबंधन डिजिटली होगा। इस पोर्टल का नाम सीएमएसएस है। लखनऊ से सहायक निदेशक जनगणना राजेंद्र कुमार व सांख्यिकी अन्वेषक संस्कृति तिवारी भी इस कार्य में मुरादाबाद में मानीटरिंग कर रहे हैं। साथ ही मुरादाबाद स्तर से एसडीएम स्निग्धा चतुर्वेदी, माधव उपाध्याय पर्यवेक्षक अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। जिले में आठ हजार से ज्यादा कर्मचारी जनगणना कार्य में लगेंगे। घर की स्थिति से इस्तेमाल होने वाले अनाज तक सवाल घर का नंबर, जनगणना का नंबर, घर की छत, फर्श कैसी, परिवार का क्रमांक, मुखिया का नाम, मकान का स्वामित्व, उपलब्ध कमरों की संख्या, विवाहित दंपतियों की संख्या, पेयजल के मुख्य स्रोत, पेयजल स्रोत की उपलब्धता कितने निकट, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय की स्थिति, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी किससे जुड़ी, परिसर के अंदर स्नान की सुविधा है या नहीं, रसोई घर में एलपीजी, पीएनजी अथवा अन्य सुविधा, रेडियो, मोबाइल, स्मार्ट फोन की स्थिति, टेलिविजन में मुफ्त दूरदर्शन, डिश, केबिल कनेक्शन या अन्य व्यवस्था, इंटरनेट की सुविधा का इस्तेमाल, लैपटॉप डेस्कटॉप या मोबाइल यूज में होता, साइकिल, मोटर साइकिल, मोपेड है अथवा कार व अन्य 4 पहिया वाहन है अंतिम सवाल परिवार में उपभोग किए जाने वाला अनाज कौन सा है होगा। जिला जनगणना अधिकारी, ममता मालवीय ने कहा कि जनगणना की हमारी तैयारी पूरी है। समय से सभी कार्य संपन्न करवाएंगे। 7 से 21 मई तक स्व गणना के बाद 22 मई से प्रगणक जाएंगे। अगर स्व गणना से आईडी बनाएंगे तो सहूलियत मिलेगी। प्रगणकों की ट्रेनिंग हो चुकी है।

प्रदेश में 43 लाख से ज्यादा 1 किलोवाट घरेलू कनेक्शन के उपभोक्ता

लखनऊ  योगी सरकार ने बीते दिनों बिजली उपभोक्ताओं, खासकर लोवर और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत देते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में अहम बदलाव किए थे। योगी सरकार ने 1 किलोवाट तक के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं का बैलेंस समाप्त होने के बाद भी उनकी बिजली आपूर्ति 30 दिनों तक जारी रखने का फैसला लिया था। सरकार के इस फैसले से कम लोड वाले करीब 67 लाख से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिली है। इसमें 43 लाख से ज्यादा  1 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा राहत मिली है। 1 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दरअसल प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू होने के बाद सभी उपभोक्ताओं को केवल 3 दिन का ही समय मिलता था, जिसके बाद बिजली स्वतः कट जाती थी। इससे खासकर 1 और 2 किलोवाट के घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही थी। इसी को देखते हुए योगी सरकार ने बीते दिनों 1 किलोवाट और 2 किलोवाट वाले घरेलू उपभोक्तओं को राहत देने का फैसला लिया था। सरकार के फैसले के बाद अब 1 किलोवाट तक के कनेक्शन वाले घरेलू उपभोक्ताओं का बैलेंस खत्म होने के बाद भी उनकी बिजली तुरंत नहीं कटेगी। 30 दिन तक नहीं कटेगी बिजली नए प्रावधान के तहत ऐसे उपभोक्ताओं को 30 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दी जाएगी। इस अवधि के दौरान घरेलू उपभोक्ता अपना बैलेंस रिचार्ज कर सकते हैं और बिजली आपूर्ति जारी रहेगी। हालांकि अगर उपभोक्ता 30 दिनों के भीतर भी अपना बैलेंस ठीक नहीं करते हैं, तो इसके बाद बिजली आपूर्ति स्वतः बंद कर दी जाएगी। इसी तरह 1 किलोवाट से अधिक और 2 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं को भी इमरजेंसी क्रेडिट की सुविधा दी गई है। ऐसे उपभोक्ताओं को कम से कम 3 दिन या 200 रुपए तक के नेगेटिव बैलेंस (जो बाद में हो) तक बिजली मिलती रहेगी।  2 किलोवॉट तक के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 रुपए तक निगेटिव बैलेंस पर भी कनेक्शन चालू उदाहरण के तौर पर अगर बैलेंस खत्म होने के 3 दिन बाद तक उपभोक्ता का बैलेंस माइनस 100 रुपए है, तो बिजली जारी रहेगी। लेकिन जैसे ही बैलेंस माइनस 200 रुपए तक पहुंच जाएगा और रिचार्ज नहीं कराया गया, तो ऐसा कनेक्शन स्वतः कट जाएगा। योगी सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 67 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिली है। विभाग के मुताबिक, प्रदेश में अभी तक लगभग 83 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। जिसमें 43 लाख 17 हजार के लगभग 1 किलोवाट घरेलू कनेक्शन के उपभोक्ता हैं और 24 लाख 51 हजार के लगभग 2 किलोवॉट घरेलू कनेक्शन के बिजली उपभोक्ता हैं।  इस्तेमाल की गई बिजली का बिल अगले रिचार्ज में होगा समायोजित नई व्यवस्था के तहत इमरजेंसी क्रेडिट अवधि के दौरान उपभोग की गई बिजली की राशि अगले रिचार्ज से स्वतः कट जाएगी। ऐसे में उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे UPPCL Smart ऐप के माध्यम से अपना मौजूदा बैलेंस और अनुमानित खपत देखते हुए समय पर रिचार्ज कराएं। साथ ही सरकार ने उपभोक्ता सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए एक और अहम प्रावधान किया है। अब किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन काटने से पहले 5 अनिवार्य एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे। ताकि उन्हें समय रहते रिचार्ज करने का अवसर मिल सके। इस तरह उपभोक्ताओं को समय-समय पर लो बैलेंस की सूचना दी जाती रहेगी। रविवार, दूसरे शनिवार और छुट्टियों में नहीं कटेगी बिजली नई व्यवस्था में कुछ विशेष समय भी निर्धारित किए गए हैं, जिनमें बिजली नहीं काटी जाएगी। शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक बिजली नहीं काटी जाएगी। इसके अलावा रविवार, दूसरे शनिवार और सभी सार्वजनिक अवकाश पर बिजली सप्लाई जारी रहेगी। भले ही बैलेंस समाप्त या नेगेटिव ही क्यों न हो। हालांकि इस दौरान इस्तेमाल की गई बिजली का भुगतान अगले रिचार्ज में स्वतः कट जाएगा। गौरतलब है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर एक आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रणाली है, जो मोबाइल के प्रीपेड सिस्टम की तरह काम करती है पहले रिचार्ज करें, फिर उपयोग करें।

889 ऑफलाइन शिकायतों का भी किया गया समाधान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का असर जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। समाज कल्याण विभाग की योजनाएं और शिकायत निवारण व्यवस्था आम जनता के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी हैं। खासकर आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम) पोर्टल के जरिए शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण ने प्रशासनिक कार्यशैली में एक सकारात्मक बदलाव लाया है। इससे न केवल लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो रहा है, बल्कि सरकारी तंत्र के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों पर विभाग सक्रिय समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज 9604 शिकायतों में से 8896 यानी 92.6 प्रतिशत मामलों का सफल निस्तारण किया जा चुका है। यह उपलब्धि विभाग की कार्यकुशलता और जवाबदेही को दर्शाती है। वहीं, ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में भी विभाग ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले दो वर्षों में आई 1035 शिकायतों में से 889 का समाधान कर 85.9 प्रतिशत की सफलता दर हासिल की गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योगी सरकार शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। वृद्धावस्था पेंशन और छात्रवृत्ति पर विशेष फोकस सरकार द्वारा संचालित वृद्धावस्था पेंशन और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जा रहा है। इससे बुजुर्गों और छात्रों को समय पर आर्थिक सहायता मिल रही है, जो उनके जीवन में स्थिरता और सुरक्षा प्रदान कर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए ये योजनाएं काफी सहायक साबित हो रही हैं। विभाग की कोशिश है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को योजना का लाभ पाने में देरी या परेशानी का सामना न करना पड़े। जरूरतमंदों तक सीधे पहुंच रही मदद समाज कल्याण विभाग की सक्रियता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले एक वर्ष में 3168 जरूरतमंदों तक सीधी सहायता पहुंचाई गई है। वहीं, केवल पिछले चार महीनों में ही 991 लोगों का समाधान कर विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया गया है। यह आंकड़े बताते हैं कि योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तविक रूप से लोगों के जीवन में बदलाव ला रही हैं। तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता और जवाबदेही डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग ने शिकायत दर्ज करने और उसके निस्तारण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। आईजीआरएस पोर्टल के जरिए लोग घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और उसकी प्रगति की निगरानी भी कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत भी कम हुई है। वहीं ऑफलाइन प्रक्रिया के चलते ग्रामीण इलाकों से जुड़ाव रखने वाले लोग लिखित शिकायत कर अपनी समस्याओं का समाधान करवा रहे हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे पर 15 दिनों तक टोल फ्री, जिलों के लोगों में खुशी की लहर

गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिनों तक टोल फ्री रखने पर कई जिलों के लोगों ने जताई खुशी श्रद्धालुओं, व्यापारियों, हाईकोर्ट जाने वाले वकीलों और वादकारियों को होगी सुगमता  लखनऊ/प्रयागराज/बरेली  गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिनों तक टोल-फ्री रखने के योगी सरकार के निर्णय पर कई जिलों के लोगों ने खुशी जताई है। लोगों का कहना है कि इस फैसले से श्रद्धालुओं के अलावा हाईकोर्ट जाने वाले वकीलों, वादकारियों, गवाहों के साथ-साथ व्यापारियों को इस सुविधा का लाभ निशुल्क मिलेगा। मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला यह हाईवे 12 जिलों को जोड़ता है। प्रयागराज के पर्यटक, व्यापारी, अधिवक्ता और वादकारियों ने जताई खुशी  गंगा एक्सप्रेस वे पूर्वी और पश्चिमी यूपी के आवागमन का सेतुबंध साबित होने वाला है। इसका अंतिम बिंदु प्रयागराज है। यहां के रहने वाले कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल कहते हैं कि इससे व्यापारियों को काफी सुविधा होगी। पश्चिमी यूपी से इलाहाबाद हाईकोर्ट आने वाले हजारों वादकारियों और वकीलों को निशुल्क यात्रा का लाभ मिलेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे का कहना है कि वादकारी और वकीलों को दो हफ्ते गंगा एक्सप्रेसवे की यात्रा को समझने के लिए काफी हैं। बरेली और आसपास के जिलों से हाईकोर्ट और संगम पहुंचना हुआ आसान   बरेली से प्रयागराज जाने वालों की संख्या काफी बड़ी है। इस एक्सप्रेसवे से उन लोगों को काफी लाभ मिलेगा। गंगा एक्सप्रेसवे से बरेली, शाहजहांपुर और बदायूं आदि जिलों के लोगों का हाईकोर्ट जाना, त्रिवेणी पर गंगा स्नान करना बहुत आसान हो गया है। दो दिनों में पांच हजार से ज्यादा लोगों ने निशुल्क हाईस्पीड सफर का आनंद लिया है। बरेली के सीबीगंज के रहने वाले सर्वेश सिंह ने बताया कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए यह एक्सप्रेसवे बेहद अहम है। 15 दिन की टोल छूट से लागत और समय दोनों कम होंगे, जिससे कारोबार को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। कारोबारियों को मेरठ से प्रयागराज के बीच के 12 जिलों में व्यापार बढ़ाने में काफी सहूलियत हो जाएगी। माडल टाउन के रहने वाले इंद्रप्रीत सिंह ने कहा कि टोल फ्री शुरुआत से लोगों में सकारात्मक माहौल बनेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मिथिलापुरी के रहने वाले अशोक सक्सेना ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे को 15 दिन टोल फ्री रखने का फैसला दूरदर्शी कदम है। स्टेट बैंक कालोनी के रहने वाले अमित आनंद ने बताया कि लंबी दूरी का सफर अब आसान और सस्ता हो गया है। टोल फ्री से बड़ी राहत मिलेगी।