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योगी सरकार की पारदर्शी भर्ती से चयनित 491 महिला कॉन्स्टेबल, वाराणसी पुलिस लाइन से करेंगी सेवा शुरू

वाराणसी शिव की नगरी काशी की पुलिस लाइन में 491 महिला आरक्षी प्रशिक्षण ले रही हैं। योगी सरकार की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से चयनित इन बहादुर बेटियों के कंधों पर अब कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का दायित्व होगा। वाराणसी पुलिस लाइन में  महिला कांस्टेबलों का कठोर प्रशिक्षण पूरा होने वाला है। 20 अप्रैल को पासिंग आउट परेड के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को वाराणसी आरटीसी में प्रशिक्षित 491 महिला आरक्षी और मिल जाएंगी। मिशन शक्ति अभियान के तहत ये नारी शक्ति न केवल अपराधियों के छक्के छुड़ायेंगी,  बल्कि समाज में महिलाओं को सशक्त बनाने में भी अग्रणी भूमिका निभाएंगी। योगी सरकार प्रशिक्षु  महिला आरक्षियों के रहने खाने के साथ ही उन्हें इनडोर और आउटडोर प्रशिक्षण भी दिला रही है।  योगी सरकार की निष्पक्ष भर्ती के तहत पुरुषों के साथ ही बड़ी संख्या में महिलाओं को भी पुलिस सेवा में प्रवेश मिला है। मिशन शक्ति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना है, जो महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन पर केंद्रित है। मिशन शक्ति, पिंक बूथ और हेल्पलाइन नंबर 1090 जैसी सुविधाओं के साथ अब ये प्रशिक्षु महिला कांस्टेबल ट्रेनिंग पूरा करने के बाद सुरक्षा का जिम्मा उठाएंगी। इन्हें 9 माह की ट्रेनिंग में इनडोर और आउटडोर प्रशिक्षण दिया गया है।  पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि प्रशिक्षु महिला आरक्षियों को फिजिकल ट्रेनिंग के साथ ही पुलिसिंग के सभी गुण सिखाए गए हैं। इसमें सोशल पुलिसिंग, आधुनिक तकनीक से किये जा रहे अपराधों के रोकथाम, हथियार संचालन, सीसीटीएनएस, साइबर क्राइम, फॉरेंसिक साइंस, फॉरेंसिक  मेडिसिन, भारतीय पुलिस का इतिहास यूपी के संदर्भ में, पुलिस संगठन, अंतर विभागीय समन्वय, पुलिस कार्यप्रणाली एवं अनुशासन, अपराध शास्त्र एवं अपराध नियंत्रण, विवेचना, पुलिस अभियोजन, पुलिस रेगुलेशन, सुरक्षा, लोक व्यवस्था एवं बंदोबस्त, आपदा प्रबंधन, यातायात प्रबंधन, पुलिस रेडियो दूरसंचार प्रणाली, गार्ड ड्यूटी, बंदी एस्कॉर्ट, हवालात ड्यूटी को लेकर प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा  भारतीय संविधान, आरक्षी के कर्तव्य, भारतीय संविधान, मानवाधिकारों की अवधारणा एवं महत्व, लैंगिक संवेदनशीलता का मतलब और महत्व, महिला पुलिस एवं पुलिस कार्य में उनकी भूमिका, महिला पुलिस कर्मियों से व्यवहार, पुलिस कार्य में नैतिकता और जवाबदेही आदि के विषय में बताया गया। इसके अलावा आरक्षियों को श्रमदान, योगासन, खेल, वर्दी पहनने, पदवार अधिकारियों की वर्दी पहचानना और सैल्यूट के तरीके आदि के बारे में भी सिखाया जा रहा है।   वर्जन प्रशिक्षु महिला आरक्षी पुलिस लाइन के 12 मंजिला भवन व अन्य बैरकों में रह रहीं हैं। जहां बंक बेड, आरओ वाटर कूलर, कैंटीन और कूलर आदि की व्यवस्था है। पुलिस लाइन में ही बैंक के एटीएम हैं। यहां जवानों के पौष्टिक खाने के लिए मेस भी चल रही है।  डॉ. ईशान सोनी, अपर पुलिस उपायुक्त/सहायक पुलिस आयुक्त पुलिस लाइन ट्रेनिंग के दौरान महिला कांस्टेबल को सॉफ्ट स्किल, दंगा नियंत्रण, शस्त्र चलाना और कानून की बारीकियों आदि से दक्ष किया गया है। इनकी परीक्षा चल रही है। 20 अप्रैल को पासिंग आउट परेड होगी। इसके बाद सभी प्रशिक्षु आरक्षी बन कर सेवा करेंगी। मोहित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त, वाराणसी महिला आरक्षियों की जुबानी पुलिस की वर्दी में मिशन शक्ति की सिपाही बनकर हर महिला को सुरक्षित महसूस कराएँगे। योगी जी की सरकार ने हमें अवसर दिया, अब हम समाज की सेवा और सुरक्षा में पूरा योगदान देंगे। नीतू गौतम “हम केवल पुलिस कर्मी नहीं, समाज में बदलाव की प्रतिनिधि बनना चाहती हैं। महिला आरक्षी कानून की रक्षा के साथ-साथ महिलाओं की आवाज़ बनेंगी। महिला सशक्तीकरण के संकल्प को समाज के हर तबके तक पहुंचाएंगे।  कविता यादव योगी सरकार महिला सशक्तीकरण और नौकरी का वादा पूरा कर रही है। 81000 भर्ती की घोषणा से तैयारी कर रहे युवाओं को भी मौका मिलेगा।  रोशनी देवी प्रयागराज के फूलपुर की मुंशी बुजुर्ग गांव की पहली बेटी हूँ, जो पुलिस विभाग में भर्ती हुई है। अब गांव की अन्य बेटियां भी पुलिस भर्ती प्रक्रिया के बारे में पूछतीं हैं। पारदर्शी भर्ती ने हमें पैरों पर खड़ा होने का मौका दिया है।   सोनाली

CM Dashboard Ranking: हमीरपुर अव्वल, बरेली दूसरे और रामपुर तीसरे स्थान पर, यूपी में विकास को मिली रफ्तार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले नौ वर्षों से समग्र विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस दौरान प्रदेश में न केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, बल्कि समाज के हर वर्ग का उत्थान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। सीएम योगी के सपनों को साकार करने में सीएम डैशबोर्ड अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। सीएम डैशबोर्ड से जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे जिलों को बेहतर प्रशासनिक मानक स्थापित करने में मदद मिल रही है। इसी कड़ी में सीएम डैशबोर्ड की मार्च की रिपोर्ट में प्रदेशभर में हमीरपुर ने बेहरीन प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि बरेली ने दूसरा और रामपुर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।  49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की हर माह सीएम डैशबोर्ड से की जाती है समीक्षा सीएम डैशबोर्ड द्वारा हर माह जिलों के राजस्व कार्यों, विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था पर रिपोर्ट जारी की जाती है। डैशबोर्ड द्वारा प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा की जाती है। इसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। सीएम डैशबोर्ड की मार्च माह की रिपोर्ट के अनुसार हमीरपुर ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं बरेली जिले ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है जबकि रामपुर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जिलाधिकारी रामपुर अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। टॉप फाइव जिलों में मैनपुरी और हरदोई ने बनाई जगह डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप रामपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि रामपुर पिछले कई माह से मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की रिपोर्ट में टॉप टेन जिलों में अपने जगह बनाए हुए है। वहीं, हमीरपुर ने विकास एवं राजस्व कार्यों की संयुक्त रैंकिंग में 10 में से 9.55 अंक प्राप्त किए हैं। इसी तरह बरेली ने 9.54 अंक हासिल किये हैं। सीएम डैशबोर्ड रिपोर्ट के अनुसार रामपुर ने 10 में से 9.51 अंक प्राप्त किये हैं। इसी तरह मैनपुरी चौथे और हरदोई पांचवे पायदान पर है। वहीं टॉप टेन जिलों में शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, जालौन, सोनभद्र और कौशांबी ने जगह बनाई है।

CM अभ्युदय योजना का असर: RO/ARO परीक्षा में 10 होनहारों ने पाई सफलता, बढ़ा युवाओं का आत्मविश्वास

लखनऊ उत्तर प्रदेश में युवाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना एक बार फिर सफलता की नई कहानी लिखते हुए चर्चा में है। हाल ही में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग  द्वारा घोषित आरओ/एआरओ परीक्षा परिणाम में इस योजना से जुड़े 10 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल कर नाम रोशन किया है। इन सफल अभ्यर्थियों में 9 पुरुष और 1 महिला हैं। यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी बाधा को पार कर सकती है।  उच्च गुणवत्ता की निःशुल्क कोचिंग, शांत वातावरण के साथ बेहतर खानपान की सुविधा चयनित अभ्यर्थियों में चित्रकूट के दिवाकर सिंह, महोबा के दीपेश कुमार खरे, सहारनपुर के विशेष प्रजापति और मोहित कनौजिया, महोबा के प्रदीप राजपूत, बाराबंकी के संजीत कुमार वर्मा, लखनऊ के मृत्युंजय सिंह, पीलीभीत के अविनाश कुमार, खुशबू पटेल और औरैया के धर्मेंद्र शामिल हैं। सहारनपुर निवासी विशेष प्रजापति की सफलता खास तौर पर प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 37वीं रैंक हासिल की। विशेष प्रजापति ने बताया कि उन्होंने करीब 25 महीनों तक अभ्युदय योजना के तहत तैयारी की, जहां उन्हें उच्च गुणवत्ता की निःशुल्क कोचिंग, अनुशासित और शांत वातावरण के साथ-साथ बेहतर खानपान की सुविधा भी मिली।  योगी सरकार की अभ्युदय योजना ने बढ़ाया आत्मविश्वास विशेष ने कहा कि योगी सरकार की अभ्युदय योजना ने उन्हें न केवल शैक्षणिक रूप से मजबूत किया, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाया, जिससे वे पूरी एकाग्रता के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सके। वहीं महोबा के दीपेश कुमार खरे ने बताया कि उन्हें इस योजना की जानकारी एक नोटिफिकेशन के माध्यम से मिली थी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए धैर्य, निरंतर अभ्यास और अपनी गलतियों से सीखना बेहद जरूरी होता है। दीपेश ने बताया कि उनका चयन होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप विभाग कर रहा कामः उपनिदेशक समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप विभाग पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। हर वर्ष इस योजना से जुड़ने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, जो इसकी लोकप्रियता और सफलता का प्रमाण है। उनका लक्ष्य है कि प्रदेश के हर जरूरतमंद और प्रतिभाशाली छात्र तक इस योजना का लाभ पहुंचे। दरअसल, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराई जाती है। अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और नियमित कक्षाएं इस योजना को खास बनाती हैं।

यूपी में 1098 हेल्पलाइन बनी बच्चों की रक्षक: 2025-26 में 26 हजार मामलों का निस्तारण, हजारों बच्चे घर लौटे

लखनऊ योगी सरकार में महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में तेजी से काम किया जा रहा है। खासतौर पर गुमशुदा बच्चों की तलाश और उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर योगी सरकार का अभियान लगातार असर दिखा रहा है। शुक्रवार को महिला कल्याण निदेशालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 26 हजार से ज्यादा शिकायतों का निस्तारण किया गया है। ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि सरकार इस दिशा में लगातार गंभीरता से प्रयत्नशील है। गुमशुदा बच्चों के लिए 1098 हेल्पलाइन काफी कारगर प्रदेश में महिला कल्याण निदेशालय के मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का संचालन किया जा रहा है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एक इमरजेंसी सेवा है, जो 24×7 काम करती है। इसके माध्यम से संकट में फंसे बच्चों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यहां 18 साल से कम उम्र के गुमशुदा बच्चों-किशोरों की शिकायतें दर्ज की जाती हैं। इस संबंध में यूपी चाइल्ड हेल्पलाइन कंट्रोल रूम की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में गुमशुदा या खोए हुए बच्चों की कुल 28,945 शिकायतें दर्ज की गई थी। 26 हजार से ज्यादा शिकायतों का हो चुका निस्तारण कंट्रोल रूम के आंकड़ों के मुताबिक, जिसमें से करीब 26,239 शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। जबकि 2,706 मामलों में अभी भी कार्रवाई जारी है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योगी सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से काम कर रही है। वहीं सरकार के प्रयासों का असर जमीनी स्तर पर भी दिख रहा है। बांदा जिले की रहने वाली एक महिला का 6 वर्षीय बेटा 2015 में चित्रकूट परिक्रमा के दौरान लापता हो गया था। तमाम प्रयास के बावजूद बेटे की तलाश नहीं हो पाई थी। लेकिन चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस के समन्वय से करीब 10 साल बाद उसको खोज निकाला गया और उसे उसकी मां को सौंप दिया गया था। बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता योगी सरकार में सिर्फ गुमशुदगी ही नहीं, बल्कि बाल शोषण के मामलों में भी हेल्पलाइन 1098 सक्रिय भूमिका निभा रही है। इसी तरह एटा जिले में एक बच्चे को बाल श्रम और शारीरिक उत्पीड़न से मुक्त कराकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। काउंसिलिंग और इलाज के बाद उसे उसके माता-पिता को सौप दिया गया था। इस तरह प्रदेश की योगी सरकार में बच्चों की सुरक्षा भी प्राथमिकता में शामिल है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के जरिए न सिर्फ शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो रहा है, बल्कि बच्चों को नया जीवन भी मिल रहा है।

योगी आदित्यनाथ का पाकिस्तान पर तीखा बयान, लखीमपुर में भूमि वितरण और विकास परियोजनाओं का लोकार्पण

लखीमपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को भूमिधरी अधिकार पत्र वितरित करते हुए कहा कि पापी पाकिस्तान और टुकड़ों में बंटने वाला है। उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और टीएमसी पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति का सबसे बड़ा दंश हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों ने झेला है। मुख्यमंत्री ने मियांपुर का नाम बदलकर ‘रविंद्र नगर’ करने की घोषणा की और कहा कि अब किसी क्षेत्र की पहचान गुलामी के प्रतीकों से नहीं होगी। इस अवसर पर उन्होंने तीन विधानसभा क्षेत्रों की 417 करोड़ रुपये की 213 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने बड़ी संख्या में लाभार्थियों को चेक भी प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लखीमपुर खीरी जनपद में लगभग 7,000 परिवारों यानी लगभग 35,000 लोगों को भौमिक अधिकार प्रदान किए गए हैं। पलिया के बाद अब मोहम्मदी में भी 1,000 परिवारों को यह अधिकार उपलब्ध कराया जा रहा है। यह योजना बांग्लादेश से 1947 और 1971 में आए परिवारों को उनका अधिकार देने की है। पापी पाकिस्तान ने अपने कर्मों से भारत का विभाजन कराया, फिर पाकिस्तान के भी टुकड़े हुए। इंतजार करिए, अभी यह और टुकड़ों में बंटने वाला है। लेकिन पाकिस्तान के पापों की सजा वहां रह रहे हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को मिली, क्योंकि उनके यहां किसी अन्य धर्म के लिए कोई जगह नहीं है। कांग्रेस ने अधिकार नहीं दिया उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने इन लोगों को ठुकराया और उनकी जमीन व पैतृक संपत्ति पर कब्जा किया। लेकिन, त्रासदी के बाद यहां आने वालों को कांग्रेस ने भी अधिकार नहीं दिया। उनके वोट तो लिए, लेकिन मालिकाना हक कभी नहीं दिया। बल्कि, उनकी पहचान छिपाने के लिए गांव का नाम मियांपुर रख दिया गया, जबकि वहां एक भी मियां नहीं है। अब मियांपुर नहीं, रविंद्र नगर होगा नाम मुख्यमंत्री ने कहा कि अब आपकी पहचान मियांपुर नहीं, बल्कि राष्ट्रगान के रचयिता गुरुदेव रविंद्रनाथ ठाकुर के नाम पर ‘रविंद्र नगर’ के रूप में होगी। बंगाल की भूमि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की भूमि है। भारत को राष्ट्रगान गुरुदेव ने दिया और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय हैं। यह वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने का वर्ष है। इस अवसर पर आपको उस भूमि का स्वामित्व प्राप्त हुआ है, जहां आप दशकों पहले आकर बसे थे, लेकिन अब तक अधिकार नहीं मिला था। पीएम मोदी के संकल्प के तहत आपको मिला अधिकार सीएम योगी ने कहा कि दशकों पहले आपसे किए गए अधूरे वायदों को पूरा करने के लिए वह प्रधानमंत्री मोदी की ओर से आए हैं। आपके पूर्वज बांग्लादेश में रह रहे थे, लेकिन आपको मालिकाना अधिकार पीएम मोदी के “सबका साथ-सबका विकास” संकल्प के कारण भारत में मिल रहा है। बांग्लादेश में प्रताड़ित हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन भारत की ओर आशा व विश्वास से देखते हैं। भारत उनके साथ खड़ा होगा। आप लोग केवल सीमा पार कर के नहीं आए थे, अपने साथ टूटे हुए सपनों की पीड़ा लेकर आए थे। भारत ने आपको गले लगाया। आपकी जाति, संप्रदाय या मत नहीं पूछा,  आपको अपनाया और आपके साथ खड़ा रहा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संघर्ष से आज आपको यह अधिकार मिल पाया है। जाति पर समाज बांटने वाले सबसे बड़े देशद्रोही सीएम योगी ने कहा कि 1947 का विभाजन समाज के बंटवारे का परिणाम था। जो लोग जाति, मत व संप्रदाय के आधार पर समाज को बांटते हैं, वे देश और आने वाली पीढ़ियों के साथ विश्वासघात करते हैं। विभाजन और 1971 के युद्ध के दौरान हिंदू, सिख, बौद्ध व जैन समुदायों ने ऐसी त्रासदियों का सामना किया। प्रारंभ में 1,031 परिवार यहां बसे थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 5,000 से अधिक परिवारों तक पहुंच गई है, लेकिन उन्हें अब तक उनका अधिकार नहीं मिल पाया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कानून पारित कराया, लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट का विरोध किया। ये दल हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदायों को अधिकार दिए जाने के पक्ष में नहीं थे, वे सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। जिन्ना का महिमामंडन करती है सपा मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाता है, तब समाजवादी पार्टी जिन्ना का महिमामंडन करती है। ये लोग एकता के बजाय जातीय विभाजन कर समाज के ताने-बाने को कमजोर करते हैं। और यह इनके सुनियोजित दृष्टिकोण का हिस्सा है। इसी के तहत सपा, कांग्रेस व टीएमसी ने नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध किया था। दिल्ली के शाहीन बाग में महीनों तक इस एक्ट के विरोध में धरना प्रदर्शन किया गया। लेकिन, मोदी जी हटे नहीं, डिगे नहीं। आज उसी की बदौलत हम आप सबको ये अधिकार पत्र प्रदान कर रहे हैं। अब आपको कोई वंचित या विस्थापित नहीं कर सकेगा। अब आपको बांग्लादेशी नहीं, बल्कि भारत के बांग्लाभाषी नागरिकों के रूप में पहचाना जाएगा। मजहबी कट्टरता ने कुचले हिंदुओं-सिखों के सपने सीएम योगी ने कहा कि 1947 हो या 1971, मजहबी कट्टरता ने हिंदुओं और सिखों के सपनों को चकनाचूर करने का काम किया। बांग्लादेश बना, फिर हिंदुओं का नरसंहार हुआ। न कांग्रेस बोलती है, न समाजवादी पार्टी बोलती है, न टीएमसी बोलती है। इन सबके मुंह सिले हुए हैं, क्योंकि मरने वाला हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन है। उनके लिए इन पार्टियों के मुंह नहीं खुलेंगे, क्योंकि जिस तुष्टीकरण की ये लोग राजनीति करते आए हैं, वह इनके अस्तित्व के सामने संकट न खड़ा कर दे, इसलिए इनका मुंह बंद हो जाता है। विस्थापित हिंदू-सिख परिवारों के लिए प्रतिबद्ध है सरकार सीएम योगी ने कहा कि लखीमपुर खीरी, गोला गोकर्णनाथ, धौरहरा और मोहम्मदी में बसे लगभग 1,031 परिवारों को 542 हेक्टेयर भूमि का मालिक बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर सहित चार जनपदों में बांग्लादेश से आए लगभग 65 हजार विस्थापित हिंदू व सिख रह रहे हैं, जिन्हें सरकार मालिकाना अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत के इतिहास में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर भौमिक अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं। यहां गरीबों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजनाओं का लाभ दिया गया है तथा शेष पात्र लोगों को भी लाभ मिलेगा। हर घर में शौचालय, … Read more

असंगठित श्रमिकों के लिए बड़ी राहत: श्रम योगी मानधन योजना में फिरोजाबाद, हरदोई बने मॉडल जिले

लखनऊ प्रदेश में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने वाली प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM) में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की जा रही है। 15 जनवरी से 15 मार्च 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान के दौरान कई जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर नए मानक स्थापित किए हैं, जिससे पूरे प्रदेश में योजना की गति तेज हुई है। विशेष अभियान के तहत फिरोजाबाद ने 349 नामांकन के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि गाजियाबाद (262) और बस्ती (238) ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए अग्रणी जिलों में अपनी जगह बनाई। इसके अलावा बांदा, बरेली, अंबेडकर नगर, हापुड़ और बिजनौर जैसे जिलों ने भी सक्रिय भागीदारी दिखाते हुए अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 की समग्र प्रगति पर नजर डालें तो हरदोई 929 नामांकन के साथ पहले स्थान पर रहा। आजमगढ़ (597) और गाजियाबाद (547) ने भी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर खुद को मॉडल जिलों के रूप में स्थापित किया है। प्रतापगढ़, बस्ती, बलिया, मेरठ और वाराणसी जैसे जिलों की सक्रियता भी उल्लेखनीय रही। योगी सरकार द्वारा चलाए गए इस विशेष अभियान का सकारात्मक असर यह रहा कि अधिकांश जिलों में नामांकन की गति में तेजी आई है। जिन जिलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम रहा है, वहां भी सुधार की प्रक्रिया जारी है और प्रशासनिक स्तर पर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब बड़ी संख्या में असंगठित श्रमिकों को पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है। प्रदेश सरकार के सतत प्रयासों और जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी के चलते यह योजना जमीनी स्तर पर मजबूत होती जा रही है। इस पीएम श्रम योगी मानधन योजना प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत आधार तैयार कर रही है और आने वाले समय में इससे और अधिक श्रमिकों के जुड़ने की उम्मीद है।

लखीमपुर में 213 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, हजारों को मिला भूमि अधिकार

 लखीमपुर खीरी सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी के एक और गांव का नाम बदलने का ऐलान किया। लखीमपुर खीरी में जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने खीरी जिले के गांव मियांपुर का नाम बदलने की घोषणा की। सीएम योगी ने कहा, गुरुदेव के नाम पर मियांपुर को अब रविंद्रनगर के नाम से जाना जाएगा। सीएम योगी ने तत्कालीन सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, पहले की सरकारों ने पहचान छिपाने के लिए गांव का नाम मियांपुर रख दिया था, लेकिन गांव में एक भी मियां नहीं था। सीएम योगी ने 331 हिंदू बांग्लादेशी परिवारों को सौगात देते हुए कहा, डबल इंजन सरकार में सभी वर्ग का विकास हुआ है। 1971 में पाकिस्तान के बंटवारे पर सीएम योगी ने कहा, पाकिस्तान के अभी और टुकड़े होंगे। पाकिस्तान की वजह से हिंदुआ पर बहुत अत्याचार हुआ है। शनिवार को लखीमपुर खीरी पहुंचे सीएम योगी ने 213 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसके बाद जनसभा को संबोधित किया। सीएम योगी ने बांग्लादेश से विस्थापित विभिन्न हिंदू परिवारों को संक्रमणीय एवं असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र वितरित करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि न्याय का वह क्षण है, जिसने इतिहास की अधूरी तमन्ना को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धर्म की व्याख्या परहित सरिस धरम नहीं भाई के रूप में की गई है और इसी भावना के साथ डबल इंजन सरकार पिछले नौ वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में पहली बार थारू समुदाय, जो महाराणा प्रताप को अपना पूर्वज मानता है, उसे भूमि अधिकार उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वर्तमान वंशजों को भी अधिकार पत्र दिए गए हैं, जिन्हें पूर्ववर्ती सरकारों ने बसाया तो था, लेकिन स्वामित्व अधिकार नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से विस्थापित परिवार वर्षों पूर्व भारत आए थे और अपने साथ पीड़ा, असुरक्षा तथा अनिश्चित भविष्य लेकर आए थे। अब उन्हें भारत की धरती पर सम्मान और अधिकार मिल रहे हैं। सपा-कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने कहा, हिंदू-सिख के मरने पर विपक्षी दल नहीं बोलते हैं। सपा के लोग जिन्ना का महिमामंडल करते हैं। सपा की पहचान सिर्फ सैफई से है। कांग्रेस-सपा सरकार में सिर्फ वादे होते थे। सीएम योगी ने पाकिस्तान को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा, पाकिस्तान के पाप की वजह से वहां के हिंदू विस्थापित हुए। कांग्रेस ने विस्थापितों को कोई अधिकार नहीं दिया सीएम योगी ने कहा, कांग्रेस ने विस्थापितों को कोई अधिकार नहीं दिया, उल्टा गांव का नाम रख दिया मियांपुर। पाकिस्तान जाति में बांटने वाला सबसे बड़ा विश्वासघाती रहा है। हम हिंदू परिवारों को न्याय दे रहे हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचार का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा, बांग्लादेश में हिंदुओं, सिखों की हत्या पर कांग्रेस, सपा, टीएमसी का मुंह सिल जाते हैं। हिंदुओं, सिखों, जैनों की संपत्ति पर कब्जों पर बोलने में विपक्ष के होठ सिल जाते हैं। योगी ने कहा कि इन परिवारों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के अंतर्गत अधिकार दिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस कानून का विरोध किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के सभी वर्गों को न्याय और सम्मान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा यह निर्णय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चंदन चौकी में मुख्यमंत्री ने दिया भौमिक अधिकार पत्र सीएम योगी ने खीरी को कई बड़ी परियोजनाओं की सौगात दी। चंदन चौकी में सीएम योगी ने थारू समाज के 4356 परिवारों को 5338 हेक्टेयर जमीन का अधिकार पत्र भी सौंपा। सीएम योगी ने 1955 में पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए 2350 परिवारों को 4251 हेक्टेयर जमीन का अधिकार पत्र भी दिया। सीएम ने कहा कि अब थारू और पूर्वी समाज के लोगों को न वन विभाग परेशान करेगा और न राजस्व और पुलिस विभाग। अब लेखपाल कागजों में हेरफेर कर उनकी जमीन पर कोई दबंग का कब्जा करा पाएगा।

पलिया के चंदन चौकी कार्यक्रम में बड़ा ऐलान: Yogi Adityanath ने थारू जनजाति समेत कई परिवारों को दिए भूमि अधिकार और सरकारी लाभ

लखीमपुर खीरी  चंदन चौकी (पलिया) में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने थारू जनजाति के परिवारों व पूर्वी उत्तर प्रदेश से आकर बसे परिवारों को भौमिक अधिकार पत्र प्रदान किए। इस मौके पर सीएम योगी ने विभिन्न लाभार्थियों को भी अपने हाथ से नियुक्ति पत्र, आवास की चाबी व चेक सौंपे। सीएम योगी के हाथों भौमिक अधिकार पत्र प्राप्त करने वालों में बालकृष्ण, रामखेलावन, भज्जीराम, रामनरेश व रामकुमार शामिल रहे।  आंगनवाड़ी भर्ती के तहत ऊषा देवी (ध्यानपुर), संध्या कुमारी (पुरैना) तथा मीना कुमारी (सूरमा) को मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र सौंपे।  मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत ध्यानपुर की बल्लू देवी, शीतल व बेबी को अपने आवास की चाबी मिली। एक जिला-एक उत्पाद के तहत लाभार्थी अंशु गुप्ता, शिव गुप्ता व संस्कार अग्रवाल को चेक प्रदान किए गए।  प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत कुंवर सेन, अमित जिंदल व रामचंद्र को भी चेक प्रदान किए गए।  मुख्यमंत्री ने नाबार्ड द्वारा संचालित योजना के तहत पूनम विश्वकर्मा को चेक प्रदान किया।

एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी स्वास्थ्य सेवाएं, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

 बहराइच यूपी के बहराइच मेडिकल कॉलेज में पांच मंजिला ओपीडी काम्पलेंस बनाया जाएगा। एक ही छत के नीचे सभी विभागों की ओपीडी संचालित होगी। दवा व पर्चा काउंटर भी अलग-अलग होने से मरीजों को सहूलियत मिलेगी। संबंद्ध जिला अस्पताल परिसर में खाली पड़ी जमीन पर भवन निर्माण की औपचारिकता पूरी हो गई है। भवन निर्माण के प्रस्ताव संग शासन ने 28 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर कर दिया है। शासन के इस कदम से मरीजों को सुविधा मिलेगी। मेडिकल कॉलेज में साल दर साल मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान समय में संचालित आठ विभागों की ओपीडी में औसतन हर रोज 2000 से 2500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ओपीडी के बाहर व अंदर मरीजों की भारी भीड़ न केवल चिकित्सक बल्कि मरीजों के स्वयं के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओपीडी को लेकर कक्षों की व्यवस्था नहीं है। कॉलेज प्रशासन की ओर से सभी विभागों की ओपीडी संग पर्चा व दवा काउंटर को एक ही छत के नीचे संचालित करने का प्रस्ताव तैयार किया था। डीएम अक्षय त्रिपाठी व कॉलेज प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ संजय खत्री की ओर से पिछले दिनों शासन में इसको रखा गया था। जिसके बाद पांच मंजिला ओपीडी काम्पलेक्स निर्माण को मंजूरी दी गई है। प्रिंसिपल ने बताया कि सरकार के इस फैसले से अब प्रमुख विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी ओपीडी संचालित करने में मदद मिलेगी। मरीज एक ही छत के नीचे सभी तरह की सुविधा आसानी से पा सकेंगे। इस पसर निर्माण के लिए 28 करोड़ का बजट भी मंजूर किया गया है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इस जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी। परामर्श संग मरीजों के बैठने की होगी सुविधा:पांच मंजिला भवन में हर ओपीडी के सामने मरीजों के बैठने के लिए बेहतर व्यवस्था होगी। ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। मरीज परामर्श लेने के बाद संबंधित काउंटर पर जाकर आसानी से दवा भी ले सकेंगे,जबकि वर्तमान समय में जगह की कमी के चलते मरीजों को थोड़ी समस्या हो रही है। पहली मंजिल पर आर्थोपैडिक विभाग संचालित होगा विभागवार निर्धारित की गई ओपीडी :प्रिंसिपल ने बताया कि बेसमेंट फ्लोर में पार्किंग सुविधा होगी। ग्राउंड फ्लोर पर पंजीयन, दवा काउंटर, रिकार्ड रूम व इंक्वारी काउंटर होगा। पहली मंजिल पर आर्थोपैडिक विभाग संचालित होगा। इसमें माइनर ओटी, प्लास्टर रूम, ओपीडी संग फिजियोथेरेपी संग दवा काउंटर होगा। इसी में स्किन व पीडियाट्रिक्स विभाग की भी ओपीडी रहेगी। दूसरी मंजिल पर ईएनटी विभाग की ओटी, आडियो रूम व ओपीडी, डेंटल विभाग की ओपीडी रहेगी। तीसरी मंजिल पर पल्मोनरी विभाग, चौथे पर मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी विभाग, पांचवे मंजिल पर सर्जरी, कॉर्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी संग प्लॉस्टिक सर्जरी विभाग की ओपीडी व ओटी संचालित की जाएगी। 28 करोड़ से यह कार्य कराया जाएगा प्रोफेसर डॉ संजय खत्री, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज बहराइच ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में पांच मंजिला ओपीडी काम्लेक्स के निर्माण की मंजूरी मिली है। 28 करोड़ से यह कार्य कराया जाएगा। इससे कई मुख्य विभागों की ओपीडी संचालित करने में मदद मिलेगी। इसकी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।

यूपी में 49 विभागों की समीक्षा, सीएम डैशबोर्ड से तय हो रही जिलों की रैंकिंग

लखनऊ बीते नौ वर्षों में प्रदेश में जहां बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, वहीं समाज के हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में सीएम डैशबोर्ड एक अहम टूल के रूप में उभरा है, जिसके जरिए जनसुनवाई, जनकल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से हर महीने प्रदेश के सभी जिलों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की जाती है। इसमें 49 विभागों के 110 कार्यक्रमों को विभिन्न मानकों पर परखा जाता है, जिसके आधार पर जिलों की रैंकिंग तय होती है। मार्च माह की जारी रिपोर्ट में हमीरपुर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं बरेली दूसरे और रामपुर तीसरे स्थान पर रहे। सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग में हमीरपुर टॉप पर रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, यह रैंकिंग प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों की प्रगति और राजस्व प्रबंधन के आधार पर तैयार की जाती है। उन्होंने बताया कि जिले में मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जा रहा है, जिससे रामपुर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमीरपुर को 10 में से 9.55 अंक, बरेली को 9.54 और रामपुर को 9.51 अंक प्राप्त हुए हैं। वहीं टॉप-5 जिलों में मैनपुरी चौथे और हरदोई पांचवें स्थान पर रहे। इसके अलावा टॉप-10 जिलों में शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, जालौन, सोनभद्र और कौशांबी ने भी अपनी जगह बनाई है। 49 विभागों के 110 सरकारी कार्यक्रमों की महीनेवार समीक्षा सीएम डैशबोर्ड की यह रैंकिंग न सिर्फ जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सीएम डैशबोर्ड पर 49 विभागों के 110 सरकारी कार्यक्रमों की महीनेवार समीक्षा की जाती है। इसमें जनसुनवाई, जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, राजस्व प्रबंधन, विकास कार्यों की प्रगति, और कानून-व्यवस्था जैसे बिंदु शामिल हैं। प्रत्येक जिले को विभिन्न मापदंडों पर अंक दिए जाते हैं। अधिकतम अंक पाने वाले जिले उच्च रैंक प्राप्त करते हैं । यह रैंकिंग प्रशासनिक दक्षता, विकास योजनाओं के स्थायी परिणाम, योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन और जनसुनवाई में बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित करती है। वहीं आज मुख्यमंत्री योगी ने आदित्यनाथ ने शनिवार को लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से आए 331 हिंदू परिवारों और थारु जनजाति के परिवारों को भौमिक अधिकार पट्टों का आवंटन किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने 1300 करोड़ से ज्यादा की योजनाओं का शिलान्यास भी किया।