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मुजफ्फरनगर के यहियापुर गांव में बुधवार को लगी ‘कृषि चौपाल’

उत्तर प्रदेश की शान बने ‘खुशहाल किसान’ मुजफ्फरनगर के यहियापुर गांव में बुधवार को लगी ‘कृषि चौपाल’ चौपाल में शामिल हुए 500 से अधिक किसान, कहा- हमें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने उठाया अभूतपूर्व कदम  सभी जनपदों को समान रूप से बिजली-पानी उपलब्ध करा रही योगी सरकार  अन्नदाताओं ने योजनाओं के क्रियान्वयन, एमएसपी, समय से भुगतान और गन्ना मूल्य में वृद्धि के लिए योगी सरकार के प्रति जताया आभार   मुजफ्फरनगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में अन्नदाता किसानों के जीवन में खुशहाली लाई। किसान अब आत्महत्या नहीं करते, बल्कि खुशहाली का जीवन व्यतीत कर परिवार की तरक्की और उत्तर प्रदेश की समृद्धि में योगदान दे रहे हैं। किसानों को फसल का उचित दाम मिल रहा, उन्हें किसान सम्मान निधि, पीएम कुसुम योजना, एमएसपी के साथ ही समान रूप से हर जनपद को बिजली, सड़क, पानी की सुविधाएं मिल रही हैं। इससे खेती करने और फसल को बाजार तक पहुंचाने में आसानी हो रही है। यहियापुर गांव में बुधवार को लगी कृषि चौपाल में उपस्थित 500 से अधिक किसानों ने यह विचार रखे। सभी ने साढ़े आठ वर्ष में सरकार के सकारात्मक कदम के कारण किसानों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का भी जिक्र किया।  विकसित कृषि संकल्प अभियान बना कारगर, सरकार ने सीधे किसानों से किया संवाद  विकसित कृषि संकल्प अभियान के जरिए मुख्यमंत्री, केंद्र-राज्य सरकार के मंत्रियों समेत जनप्रतिनिधियों ने किसानों से संवाद किया। 15 दिन में प्रदेश के 14,170 गांवों में हुए कार्यक्रमों में 23 लाख से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया। किसान बिराम सिंह ने कहा कि मेरे सहित कई किसान इस अभियान में शामिल हुए। यहां हमने स्वायल कॉर्ड, भूमि सुधार, सिंचन क्षमता आदि से लेकर खेतीबाड़ी में सुधार को लेकर नई-नई जानकारी ली। इसके बाद विशेषज्ञों/अधिकारियों से संपर्क कर अपनी खेती में और सुधार किया।  तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए निःशुल्क मिनीकिट का वितरण  किसान अमरीश वालिया ने कहा कि सरकार कृषि विभाग के माध्यम से तिलहन-दहलन के क्षेत्र में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निःशुल्क मिनीकिट भी वितरित कर रही है। गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, तोरिया, राई-सरसो, अलसी फसलों के लिए अनुदान पर बीज भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे एक तरफ हमें आसानी से बीज भी मिलते हैं तो दूसरी तरफ खेती में इसका प्रयोग कर उत्पादकता बढ़ाने और विषमुक्त खेती की तरफ भी किसान कदम बढ़ाते हैं।  खेती में सहायक हो रहे अनुदान पर मिल रहे कृषि यंत्र किसान गंगाशरण कहते हैं कि खेती में सहायता के लिए किसानों को कृषि यंत्र की आवश्यकता पड़ती है। कृषि विभाग अनुदान पर किसानों को विभिन्न कृषि यंत्र उपलब्ध भी कराता है। कृषि यंत्र खेती में सहायक हो रहे हैं। योगी सरकार की मंशा से 5000 से अधिक कृषि यंत्र बैंक भी स्थापित किए गए हैं, जिससे मेरे जैसे हजारों-लाखों किसान लाभान्वित हो रहे हैं। जनपदों में निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए ई-लॉटरी निकलती है और किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र मिलता है।  किसान पाठशाला के जरिए नवीन जानकारियों से किया जा रहा अपडेट  किसान वेदपाल ने किसान पाठशाला की सकारात्मकता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए खेती से अलग किसानों में तकनीकी क्षमता भी विकसित की जा रही है। किसान फसलों के उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि के लिए नवीनतम तकनीकों को जान रहे हैं। हम कृषि विशेषज्ञों से संवाद कर कई समाधान भी पा जाते हैं। उन्नत कृषि से संबंधित व्यावहारिक व व्यापारिक समझ का विकास कर रहे हैं। कृषि विभाग की संचालित योजनाओं के बारे में भी जानकारी मिलती है।     गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी किसानों के लिए वरदान  किसान कंवर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली से पहले 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि कर गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा दिया था। योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ने की अगेती प्रजाति का मूल्य 370 से बढ़ाकर 400 रुपये और सामान्य प्रजाति का 360 रुपये से 390 रुपये प्रति क्विंटल किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी हो रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में यह वृद्धि किसानों को मिला सम्मान है।  कृषि चौपाल में सुनील प्रधान, कंवरपाल सिंह, मो. फसी, निर्दोष त्यागी, मनोज चौधरी, नूर मोहम्मद, शिवेश कुमार, कंवर सिंह, सुभाष राठी, शेर सिंह, जगमेर सैनी, पद्म सिंह, देवेंद्र कुमार, हरपाल, जयप्रकाश, नरेश पाल आदि किसान मौजूद रहे।  बृहस्पतिवार को दाहोद गांव में लगेगी ‘कृषि चौपाल’  1 से 11 दिसंबर तक पश्चिम उत्तर प्रदेश के चार जनपदों में ‘कृषि चौपाल’ का आयोजन हो रहा है। बागपत, हापुड़ और शामली में ‘कृषि चौपाल’ हो चुकी है। बुधवार को मुजफ्फरनगर के यहियापुर गांव में किसानों ने संवाद किया। 11 दिसंबर (गुरुवार) को दाहोद गांव में ‘कृषि चौपाल’ लगाई जाएगी।

यूपी भाजपा अध्यक्ष पद की रेस तेज: नया चेहरा चुनने से पहले पार्टी रख रही है ये अहम शर्तें

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर मंथन तेज हो गया है। सूत्रों की मानें तो जातीय समीकरण और संगठनात्मक अनुभव के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के साथ मजबूत तालमेल इस बार चयन की सबसे अहम शर्त मानी जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इस बार चेहरा चुनने में सावधानी बरत रही है जो संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधते हुए 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत तैयारी सुनिश्चित कर सके, जहां पार्टी का सामना आक्रामक समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी कांग्रेस से होगा। 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा की सीटें 62 से घटकर 33 होने के बाद संगठन बनाम सरकार की कथित खींचतान और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का 'संगठन सरकार से ऊपर' वाला बयान सुर्खियों में रहा था। पार्टी का आकलन है कि संगठन और सरकार के बीच किसी भी तरह की दूरी 'कार्यकर्ताओं की अनदेखी' जैसे नैरेटिव को हवा देने का मौका दे सकती है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेता और वर्तमान सांसद के अनुसार, नेतृत्व इस बार यह सुनिश्चित करना चाहता है कि न तो संगठन सरकार पर हावी दिखे और न ही सरकार संगठन के ऊपर। दोनों के बीच तालमेल की कमी को जड़ स्तर पर गुटबाजी का कारण माना जा रहा है, जो चुनावी प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। सूत्रों ने संकेत दिया कि नया प्रदेश अध्यक्ष ऐसा होना चाहिए जो योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली का 'पूरक' बने, न कि उनके समानांतर कोई शक्ति केंद्र। इसलिए माना जा रहा है कि पार्टी अपने अगले प्रदेश अध्यक्ष से सरकारी योजनाओं की जमीनी स्तर पर सुचारु क्रियान्वयन और संगठन को मजबूत करने की दोहरी भूमिका निभाने की अपेक्षा रखती है। विशेषकर तब, जब निकट भविष्य में पंचायत चुनाव और उसके बाद 2027 के विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा के एक सांसद कहते हैं कि, 'हालांकि जोखिम भी मौजूद है। अगर नया अध्यक्ष अत्यधिक सरकार-झुकाव वाला हुआ तो कार्यकर्ताओं में शीर्ष-से-नीचे नियंत्रण का डर बन सकता है। दूसरी ओर, कमजोर तालमेल संगठन-सरकार के पुराने तनाव को फिर उभार सकता है।' सांसद ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भाजपा ऐसे 'मूल कार्यकर्ता' को आगे लाने की भी इच्छुक है, जिसका लंबा संगठनात्मक अनुभव, आरएसएस पृष्ठभूमि और पार्टी से मूलभूत जुड़ाव रहा हो। विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश देने का प्रयास है कि 'जमीनी कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ है।' भाजपा सांसद ने कहा, 'चुनाव रणनीति को देखते हुए जातीय समीकरणों पर भी गहन मंथन चल रहा है। बीजेपी ऐसा चेहरा सामने लाना चाहती है जो समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) एजेंडा का प्रभावी जवाब दे सके। 2024 में हुए वोट शिफ्टिंग-खासतौर पर गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्ग में-को पार्टी गंभीरता से ले रही है।' हालांकि भाजपा ब्राह्मण, ओबीसी और दलित सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों पर विचार कर रही है। अंतिम चयन इस संतुलन पर निर्भर करेगा कि कौन-सा चेहरा संगठन को ऊर्जा दे सके और सरकार के साथ मजबूत तालमेल रखते हुए आगामी चुनावी चुनौतियों में पार्टी को बढ़त दिला सके।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित माघ मेला संपन्न कराने की तैयारी

महाकुंभ के भव्य आयोजन के बाद माघ मेला-2026 की तैयारियां अंतिम चरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित माघ मेला संपन्न कराने की तैयारी मुख्य सचिव ने प्रतीक चिन्ह के अनावरण, सेक्टरवार रंग योजना और अवसंरचनात्मक सुधारों पर बैठक में की चर्चा 7 सेक्टर्स और 7 पॉन्टून पुलों को 7 ऊर्जा चक्रों के रंगों से सजाया जाएगा हर क्षेत्र में माघ मेला का प्रतीक चिन्ह किया जाएगा अंकित लखनऊ  महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन के बाद अब राज्य सरकार माघ मेला-2026 को भी अभूतपूर्व, व्यवस्थित और सौंदर्यपूर्ण स्वरूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में माघ मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। अभी हाल ही में मुख्य सचिव के समक्ष प्रतीक चिन्ह का अनावरण, सेक्टरवार रंग योजना और अवसंरचनात्मक सुधारों पर विशेष चर्चा हुई थी। इस बार अनुमानित है कि प्रयागराज में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम पर पवित्र स्नान करेंगे, जिनमें प्रतिदिन आने वाले लाखों कल्पवासी भी शामिल होंगे। 7 सेक्टर्स – 7 ऊर्जा चक्रों के रंग पूरा मेला क्षेत्र रंग-समन्वित थीम पर आधारित होगा। हर सेक्टर एकरूपता का अनुभव कराएगा। मेले को सुसंगत और आकर्षक रूप देने के लिए सातों सेक्टर्स और सात पॉन्टून पुलों को "सात ऊर्जा चक्रों" के अनुरूप रंगों से सजाया जाएगा। हर सेक्टर की चहारदीवारी पर 3 फुट चौड़ी सीमांकन पट्टी बनाई जाएगी, जिससे मेले का आकार दृष्टिगत रूप से स्पष्ट, व्यवस्थित और सुंदर दिखाई देगा। सभी सेक्टर्स में उत्तर प्रदेश सरकार और माघ मेला-2026 का प्रतीक चिन्ह अंकित होगा। चेंजिंग रूम होंगे अधिक सुविधाजनक विभिन्न घाटों पर उपलब्ध चेंजिंग रूम भी सेक्टरवार रंग योजना के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। पहले की तुलना में दोगुनी क्षमता, रंग योजनाओं से मेल खाते हुए होंगे। अब 2 यूनिट में 2 के स्थान पर 4 लोग एक साथ सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इससे भीड़ प्रबंधन अधिक सुचारू और सुविधाजनक होगा तथा मेले की एकरूपता कायम रहेगी। पॉन्टून पुलों पर बढ़ेगी सौंदर्य और सुरक्षा दोनों सातों पॉन्टून पुलों को इंद्रधनुषी सात रंगों से सजाया जाएगा। पुलों पर लगे लाइट, पोलों पर एलईडी लाइटें धार्मिक चिन्हों के साथ प्रदर्शित होंगी, जो दिन और रात दोनों समय आकर्षण का केंद्र रहेंगी। हर पुल पर रंग अनुरूप झंडे लगाए जाएंगे।यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलों पर कैनोपी का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विश्वस्तरीय अनुभव देने पर फोकस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि माघ मेला-2026 न केवल धार्मिक भावना का प्रतीक हो, बल्कि साफ-सफाई, सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा सुविधाओं और आधुनिक अवसंरचना के मामले में भी देशभर के मेले आयोजनों के लिए एक आदर्श बने। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मेला प्रशासन श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, व्यवस्थित, आध्यात्मिक और विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करने में जुट गया है।

वाराणसी में 800 करोड़ की लागत से शुरू होगी रोप कार सेवा, श्रद्धालु सीधे काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंच सकेंगे

वाराणसी     उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रेलवे स्टेशन से काशी विश्वनाथ मंदिर तक तीर्थयात्रियों को ले जाने के लिए रोप कार सर्विस के लिए काम चल रहा है. यह सर्विस मई 2026 तक शुरू हो जाएगी. एजेंसी के मुताबिक, एक बड़े सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी है. वाराणसी डिविजनल कमिश्नर एस राजलिंगम ने कहा कि 800 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हो रही यह सर्विस शहर के अंदर चलने वाली भारत की पहली सर्विस मानी जा रही है. उन्होंने कहा, "हम इसे मई 2026 तक चालू करने की योजना बना रहे हैं. अभी काम चल रहा है." रोप कार सर्विस के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी शहर के कई दौरों के बाद लिया गया, जिससे शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न बनाया जा सके. PM मोदी तीसरी बार वाराणसी लोकसभा सीट से सांसद हैं. हर दिन 5 हजार लोग… राजलिंगम ने एजेंसी को बताया, "कुल 60,000 करोड़ रुपये में से 40,000 करोड़ रुपये शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए दिए गए हैं. इस प्लान (रोप कार) के पीछे वजह यह है कि पहले काशी विश्वनाथ मंदिर में हर दिन 5,000 लोग आते थे. लेकिन आज यह तादाद करीब दो लाख है, यह रोप कार सर्विस भी शहर के मॉडर्नाइजेशन प्लान का हिस्सा है." उन्होंने कहा कि वाराणसी में करीब 42 लाख लोग रहते हैं. राजलिंगम तमिलनाडु के तेनकासी के कदयानल्लूर के रहने वाले हैं और उन्होंने अप्रैल 2025 में वाराणसी के डिविजनल कमिश्नर का चार्ज संभाला था.  रेलवे स्टेशन से 20 मिनट में मंदिर… सड़कें पतली होने और इलाके 'घने इलाके' बनने की वजह से, शहर के लिए मेट्रो रेल प्रोजेक्ट मुमकिन नहीं था. इसलिए, उन्होंने कहा कि रोप कार सर्विस शुरू करने का फैसला किया गया. उन्होंने कहा, "यह पहली रोप कार सर्विस होगी, जो शहर के अंदर 4 किलोमीटर के हिस्से में चलेगी. रेलवे स्टेशन से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक का सफर करीब 15-20 मिनट का होने की उम्मीद है." उन्होंने कहा, "हम हर शख्स के लिए टिकट की कीमत 50 रुपये या 100 रुपये तय करने की उम्मीद कर रहे हैं. हर गंडोला (लोगों को ले जाने के लिए एरियल केबल कार) में करीब 10 लोग बैठ सकेंगे. हम रोप कार सर्विस में करीब 148 गंडोला लगाने की प्लानिंग कर रहे हैं." उन्होंने आगे कहा, "एक बार रोप कार चालू हो जाने के बाद, हमें उम्मीद है कि हर दिन 1 लाख लोग इसमें सफर कर पाएंगे." एक सवाल के जवाब में, उन्होंने कहा कि इस साल जिला प्रशासन को शहर में करीब 7 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद है. 2024 में, यह संख्या 6.5 करोड़ थी. राजलिंगम ने कहा कि पानी के रास्तों का इस्तेमाल करके ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ाने की भी योजना है. हमने ड्रेजिंग का काम शुरू कर दिया है, हमने पानी के रास्तों के किनारे आठ कम्युनिटी जेटी भी लगाई हैं. राजलिंगम ने कहा कि इनलैंड वॉटरवेज़ को मज़बूत करने के लिए, एडमिनिस्ट्रेशन ने गंगा नदी पर नावों का इस्तेमाल भी बढ़ाया है. पहले 600 नावें चलती थीं, लेकिन आज हम जनता की सेवा के लिए करीब 2,000 नावें चला रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि सरकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट को भी बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है और अब ज़रूरी रूट्स पर इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही हैं.  

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य पर मुकदमा, विवादित बयान के बाद हिंदू महासभा की नेत्री ने की थी शिकायत

 मथुरा    वृंदावन के मशहूर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की मुश्किलें बढ़ गई हैं. महिलाओं पर की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मथुरा की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने उनके खिलाफ परिवाद दर्ज कर लिया है. अब इस मामले में 1 जनवरी को अदालत में वादी के बयान दर्ज किए जाएंगे, जिससे कथावाचक की परेशानी और बढ़ सकती है. आपको बता दें कि कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के विरुद्ध परिवाद दर्ज किया गया है. मथुरा के सीजेएम कोर्ट में यह कार्रवाई हुई है. हाल ही में महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी किए जाने के मामले में यह शिकायत दायर हुई है. अखिल भारतीय हिंदू महासभा आगरा की जिला अध्यक्ष मीरा राठौर ने याचिका दाखिल की थी. अक्टूबर माह में सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कथावाचक ने बेटियों पर टिप्पणी की थी. याचिका को स्वीकार करते हुए सीजेएम अदालत ने परिवाद दर्ज किया है. अनिरुद्धाचार्य ने अक्टूबर माह में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में यह विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि आजकल की बेटियों की शादी 25 वर्ष में होती है, तब तक वे 'कई जगह मुंह मार चुकी होती हैं'. यह बयान सामने आने के बाद काफी हंगामा हुआ था और यह मामला तुरंत तूल पकड़ गया था. इस मामले को लेकर शुरुआत में थाना वृंदावन कोतवाली में तहरीर भी दी गई थी, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया था. इसके बाद अखिल भारतीय हिंदू महासभा की जिला अध्यक्ष मीरा राठौर ने सीधे सीजेएम की कोर्ट में याचिका दाखिल की. कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे स्वीकार किया और अब कथावाचक के खिलाफ परिवाद दर्ज हो चुका है, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं.  

गोरखनाथ मंदिर आगमन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का अभिनंदन

उत्तराखंड के राज्यपाल ने गोरखनाथ मंदिर में किया दर्शन-पूजन गोरखनाथ मंदिर आगमन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का अभिनंदन मंदिर परिसर का भ्रमण कराकर गोरक्षपीठाधीश्वर ने दी नाथपंथ और इसके महान संतों के बारे में विस्तार से जानकारी गोरखपुर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने मंगलवार शाम गुरु गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन किया। उनके गोरखनाथ मंदिर आगमन पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका हार्दिक अभिनंदन किया। गोरक्षपीठाधीश्वर ने उन्हें मंदिर परिसर का भ्रमण कराया और नाथपंथ तथा इसके महान संतो के बारे में विस्तार से जानकारी दी।  उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, बुधवार (10 दिसंबर) को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय परिसर में होने वाले महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह समारोह के मुख्य महोत्सव एवं पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित होने के लिए गोरखपुर आए हैं। मंगलवार शाम को वह गोरखनाथ मंदिर पहुंचे जहां गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल श्री सिंह ने मुख्यमंत्री के साथ गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ का दर्शन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि विधान से पूजन किया। मंदिर में मुख्यमंत्री ने उन्हें शिव गोरक्ष नामकृत अंगवस्त्र, मंदिर का प्रसाद और उपहार भेंट किया।।  गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने के बाद, उत्तराखंड के राज्यपाल ने सीएम योगी के साथ मंदिर परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें नाथपंथ के इतिहास, विस्तार-प्रसार, इस पंथ के प्रवर्तक महायोगी गुरु गोरखनाथ के जीवन दर्शन और नाथपंथ के प्रसिद्ध संतों के बारे में बताया। मंदिर परिसर भ्रमण करने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सीएम योगी की मेजबानी में रात्रि भोज में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड से अपने साथ लाए उपहार, अंगवस्त्र और मंदिर की प्रतिकृति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किए।

सीएम अभ्युदय विद्यालयों का हो रहा प्रदेशव्यापी विस्तार, हर पंचायत तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक व दूरगामी बदलाव की बुनियाद रखते हुए ऐसे शैक्षिक मॉडल को मजबूती दी है, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक अवसर पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्थापित अटल आवासीय विद्यालय श्रमिकों और निम्न आय वर्ग के बच्चों के जीवन को नई दिशा दे रहे हैं। इसके द्वितीय चरण में 'सीएम अभ्युदय विद्यालय' के विस्तार की ठोस योजना धरातल पर उतारी जा रही है। ये प्रयास आधुनिक गुरुकुल मॉडल की नींव रख रहा है, जो प्राचीन परंपरा के मूल्यों को समाहित कर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विद्यार्थियों के समग्र विकास को सुनिश्चित कर रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में शिक्षा विभाग के माध्यम से द्वितीय चरण के अंतर्गत सीएम अभ्युदय विद्यालयों की स्थापना का काम हो रहा है। तृतीय चरण में सीएम अभ्युदय विद्यालयों को प्रदेश के 825 निकायों और चतुर्थ चरण में लगभग 8000 न्याय पंचायतों तक ले जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का हर बच्चा शिक्षित हो और वह समृद्ध भारत के निर्माण में अपना योगदान दे। ललितपुर के अटल आवासीय विद्यालय के प्रधानाचार्य जिया लाल ने बताया कि विद्यालय में योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। श्रमिकों के बच्चों को मुख्यधारा में लाने के मकसद से उठाया गया सरकार का यह कदम अद्वितीय है। इससे बच्चों का भविष्य सुधर रहा है।    अटल आवासीय विद्यालयों से बदला विद्यार्थियों का जीवन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा शुरू किए गए अटल आवासीय विद्यालय श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए 'आधुनिक गुरुकुल' के रूप में उभरकर सामने आए हैं। वर्तमान में सभी 18 मंडलों में 18 अटल आवासीय विद्यालय सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इनका विस्तार प्रदेश के सभी 75 जिलों में करने का लक्ष्य तय किया गया है। इन विद्यालयों में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चे, कोरोना महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चे तथा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से आच्छादित बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा, भोजन, आवास, यूनिफॉर्म, किताबें और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन विद्यालयों का पाठ्यक्रम सीबीएसई आधारित है। यहां आधुनिक एसटीईएम लैब, स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशालाएं तथा खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी यह साबित कर रहे हैं कि अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी वर्ग की हो, वह श्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकती है। शिक्षा से ही समाज का सशक्तिकरण संभव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विचार है कि समाज का सशक्तिकरण शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। अटल आवासीय विद्यालय और सीएम अभ्युदय विद्यालय जैसे प्रयास इसी सोच का परिणाम हैं। इन योजनाओं के जरिए श्रमिक, वंचित और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों को वह मंच मिल रहा है, जिसकी कल्पना पहले उनके परिवारवाले भी नहीं कर सकते थे। सरकार का यह मॉडल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में समानता को मजबूत कर रहा है, बल्कि आने वाले वर्षों में प्रदेश को कुशल, आत्मनिर्भर और प्रतिभाशाली युवा शक्ति भी देने वाला है।

‘स्किल्ड’ हो रहा उत्तर प्रदेश, लाखों युवाओं के हुनर को मिल रहा हौसला

ईवी, सोलर व रोबोटिक्स जैसे कोर्सेज उद्योगों को प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध कराने का बन रहे माध्यम प्रदेश में स्वरोजगार के खुले नए अवसर, वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी में भी हुआ इजाफा  लखनऊ उत्तर प्रदेश में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार का विजन यूपी को 'स्किल्ड' बनाने की दिशा में  सार्थक बदलाव की कहानी लिख रहा है। बदलते दौर की तकनीकों और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर लाखों युवाओं को रोजगार के योग्य बनाया जा रहा है। सरकार की नीतियों का असर यह है कि प्रदेश में लाखों युवाओं को विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जा चुका है। प्रशिक्षण न सिर्फ युवाओं को नया भविष्य दे रही है, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक विकास को भी नई गति दे रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार की यह नीति रही है कि युवाओं को केवल डिग्री नहीं, बल्कि हुनर दिया जाए। इसी सोच के तहत ईवी मेंटेनेंस, सोलर टेक्नीशियन, रोबोटिक्स, सीएनसी ऑपरेशन और हॉस्पिटैलिटी जैसे नई पीढ़ी के कोर्स शुरू किए गए हैं। प्रदेश भर में सैंकड़ों प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि अब उद्योगों को बाहर से वर्कफोर्स बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि उन्हें यूपी में ही प्रशिक्षित युवा उपलब्ध हो रहे हैं।  महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आत्मनिर्भरता की नई कहानी प्रदेश के वर्कफोर्स में महिलाओं का प्रतिशत पिछली सरकारों की अपेक्षा में काफी बढ़ा है, जो लगभग 36 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। वहीं, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कैंडिडेट्स में भी महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह साबित करता है कि सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर तक असर दिखा रही हैं। पहले जहां तकनीकी प्रशिक्षण को पुरुष प्रधान क्षेत्र माना जाता था, वहीं आज महिलाएं भी सोलर टेक्नीशियन, रोबोटिक्स और सीएनसी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। स्वरोजगार के माध्यम से हजारों युवतियां अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं। ऐसा ही एक उदाहरण बेकार सामानों से कलाकृतियां तैयार करने वाली झांसी की नीलम सारंगी के स्टार्टअप 'बेकार के आकार' का भी है, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने सम्मानित करने के साथ ही प्रोत्साहित भी किया है। वह झांसी नगर निगम के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान के अंतर्गत निष्प्रयोज्य सामानों से पार्कों में सुंदर कलाकृतियां तैयार करने का काम कर रही हैं। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नीलम सारंगी को अनूठे स्टार्टअप को नवदेवी सम्मान भी दिया है। उनका स्टार्टअप इस समय बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंक्यूबेशन सेंटर में पंजीकृत है। प्रदेश में नीलम जैसे कई उदाहरण हैं, जहां महिलाएं प्रदेश सरकार के सहयोग से अपने कौशल को निखारकर स्वरोजगार स्थापित कर रही हैं और न केवल प्रेरणा बन रही हैं बल्कि अन्य महिलाओं व लोगों के लिए रोजगार सृजन कर रही हैं।   प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ताकत नीलम सारंगी के अनुसार, नगर निगम, स्मार्ट सिटी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके स्टार्टअप 'बेकार को आकार' को प्रोत्साहित करने में जो मदद की, वह अनुकरणीय है और सार्थकता का उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि उत्तर प्रदेश को देश का स्किल हब बनाया जाए। इसी दिशा में कौशल विकास की विभिन्न योजनाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दे रही हैं। प्रशिक्षित युवा न केवल खुद आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि उद्योगों को भी मजबूती दे रहे हैं। यह साबित करता है कि सही नीति, सही दिशा और मजबूत इच्छाशक्ति से किसी भी राज्य की तकदीर बदली जा सकती है।

योगी सरकार का घुसपैठियों के खात्मे के लिए सर्जिकल स्ट्राइक प्लान तैयार

योगी सरकार जीरो टॉलरेंस नीति के तहत घुसपैठियों पर करेगी करारा प्रहार  घुसपैठियों पर कार्रवाई से सरकारी योजनाओं में आएगी और पारदर्शिता, हर पात्र को आसानी से मिलेगा योजना का लाभ प्रदेश में बढ़ेंगे युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर, सरकारी धन की रुकेगी बर्बादी  मुख्यमंत्री योगी के निर्देश से नागरिक सेवाओं में हो रहा सुधार, अवैध गतिविधियों पर लग रही लगाम  सीमा पर सुरक्षा होगी और मजबूत, पासपोर्ट के सत्यापन आदि का टर्नअराउंड टाइम तेजी से होगा कम  लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की आतंरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए घुसपैठियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का खाका तैयार कर लिया है। योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत घुसपैठियों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। योगी सरकार के इस कदम से जहां प्रदेश की आतंरिक सुरक्षा और सुदृढ़ होगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेशवासियों को सरकारी योजनाओं का लाभ और पारदर्शी तरीके से मिलेगा। इस निर्णय से पात्र व्यक्ति ही योजनाओं का लाभ उठा सकेगा।  अपराधियों और अवैध गतिविधियों पर लगेगी लगाम योगी आदित्यनाथ सरकार घुसपैठियों की पहचान कर उन्हे डिटेंशन सेंटर में शिफ्ट करेगी। इन डिटेंशन सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था अभेद होगी, जिसे भेद पाना किसी के लिए भी नामुमकिन होगा। योगी सरकार के सख्त कदम से प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था पर एक सकारात्मक असर पड़ेगा। यह कदम अपराधियों और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण को आसान बनाएगा। प्रदेश में अपराधों की संख्या कम होगी और इसके साथ ही लोगों का विश्वास भी सरकार की कार्यप्रणाली पर बढ़ेगा। इतना ही नहीं इस कदम से कानून-व्यवस्था में और सुधार होगा, जिससे प्रदेशवासियों की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। सीएम योगी की सख्ती से प्रदेश में अपराध के ग्राफ में और कमी होगी। वहीं पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाें की सीमावर्ती जिलों में अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से लगाम लग सकेगी। पात्र लाभार्थियों को आसानी से मिलेगा योजनाओं का लाभ, बढ़ेंगें राेजगार के अवसर प्रदेश में घुसपैठियों की वजह से सरकारी योजनाओं का लाभ अपात्र लोग भी उठे रहे हैं। ऐसे में इनकी पहचान होने से सरकारी योजनाओं का लाभ असली हकदारों तक पहुंचेगा। इससे सरकारी धन की बर्बादी भी रुकेगी। साथ ही भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। योगी सरकार के इस कदम से स्थानीय युवाओं और कामगारों के लिए रोजगार के अवसरों का नया रास्ता खुलेगा। घुसपैठियों के खिलाफ उठाए गए कदमों से अब रोजगार की प्रतिस्पर्धा और स्पष्ट होगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर अधिक आसानी से और सुरक्षित तरीके से मिल सकेंगे। नागरिक सेवाओं में होगा सुधार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस कदम से न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के अवसरों में सुधार होगा, बल्कि नागरिक सेवाओं का भी सुधार होगा। अब नागरिकों की शिकायतों और सेवाओं जैसे पासपोर्ट, सत्यापन, लाइसेंस आदि का टर्नअराउंड टाइम तेजी से कम होगा। इससे लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ जल्दी और प्रभावी तरीके से मिलेगा। इसके साथ ही फर्जी आईडी, धोखाधड़ी और अपराध से जुड़ी घटनाओं में भी कमी आएगी। साथ ही उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का माहौल बेहतर होगा और प्रदेशवासियों का विश्वास सरकार की कार्यप्रणाली में बढ़ेगा।

कृषि यंत्रों पर अनुदान देकर किसानों को सशक्त कर रही योगी सरकार

किसानों द्वारा विभागीय पोर्टल पर की जाती है बुकिंग पारदर्शिता पूर्ण ई-लॉटरी के माध्यम से कृषकों को मिलता है कृषि यंत्रों का लाभ  प्रदेश में 5000 से अधिक फार्म मशीनरी बैंक स्थापित, हजारों किसानों को हुआ लाभ लखनऊ योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश के किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्रों का लाभ देती है। किसानों को पारदर्शिता से इसका लाभ मिले, इसके लिए सभी 75 जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कृषि विभाग द्वारा ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन भी किया जाता है। यह प्रक्रिया सभी जनपदों में समान रूप से चलती है। प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेज्ड्यू एवं सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के अंतर्गत कृषि यंत्रों की बुकिंग तथा नेशनल मिशन ऑन एडिबल (ऑइलसीड) योजना के अंतर्गत मिनी ऑइल मिल एक्स्ट्रैक्सन यूनिट एवं तिरपाल की बुकिंग किसानों द्वारा विभागीय पोर्टल पर की जाती है। इसका पारदर्शी पूर्ण चयन ई-लाटरी के माध्यम से कृषि विभाग द्वारा कराया जाएगा। 2.31 लाख से अधिक कृषि यंत्रों का किया जा चुका वितरण  कृषि यंत्रों के वितरण के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं में 2017-18 से 2024-25 तक कुल 2,31,012 उन्नत कृषि यंत्रों का वितरण, 8405 कस्टम हायरिंग सेंटर व 7351 फॉर्म मशीनरी बैंक की स्थापना कराई जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अक्टूबर तक 8531 कृषि यंत्र व 82 फार्म मशीनरी बैंक के बिल पोर्टल पर अपलोड कराए जा चुके हैं।  चयनित नहीं होने वाले किसानों की जमानत धनराशि की जाती है वापस  ई लॉटरी में चयनित किसानों को मोबाइल पर एसएमएस भेजा जाता है। सूचना एवं बिल अपलोड की अंतिम तिथि की सूचना के साथ-साथ प्रतीक्षा सूची में चयनित कृषकों को भी सूचित किया जाता है। ई लॉटरी में चयनित नहीं होने वाले किसानों की जमानत धनराशि अधिकतम छह महीने में वापस कर दी जाती है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनायें किसान हित में पारदर्शिता से संपादित हो और इसका लाभ किसानों को मिले। कृषि विभाग ने अपील की है कि जिन किसानों ने कृषि विभाग के पोर्टल पर कृषि यंत्रों की बुकिंग की है, वे जनपद में होने वाली ई-लाटरी प्रक्रिया में अवश्य प्रतिभाग करें।