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बदलता यूपी: महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल, शिक्षा से रोजगार तक बड़ी छलांग

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के शासनकाल में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण को लेकर किए गए व्यापक प्रयास अब ठोस परिणामों के रूप में सामने आ रहे हैं। प्रदेश में महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय स्वतंत्रता और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से सुधार हुआ है। इसी परिवर्तन को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश आज महिला सशक्तीकरण के जरिए सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहा है। प्रदेश सरकार ने सबसे पहले महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी। एंटी रोमियो स्क्वाड की सक्रियता, 1090 वुमेन पावर लाइन का विस्तार और पिंक पेट्रोलिंग जैसे कदमों ने महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है। शहरों और गांवों दोनों में बदलते सामाजिक वातावरण का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। परिवारों में लड़कियों की शिक्षा को लेकर सकारात्मकता बढ़ी है और माता-पिता अब बिना किसी संकोच के बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। सामाजिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में मिशन शक्ति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके माध्यम से महिला समूहों को नेतृत्व, आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और जागरूकता से जोड़ा गया। बालिकाओं के लिए कायाकल्प, स्कूलों में जेंडर सेफ्टी प्रोग्राम और किशोरी स्वास्थ्य अभियान जैसे प्रयासों ने सामाजिक बदलाव की सुदृढ़ नींव रखी। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को जन्म से लेकर स्नातक तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, जिससे पढ़ाई में निरंतरता बनी। महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की बात करें तो यूपी आज देश में सबसे बड़े महिला स्वयं सहायता समूह नेटवर्क के रूप में उभर रहा है। प्रदेश में लाखों महिलाएं आज स्वयं सहायता समूहों के जरिए उद्यमिता की ओर बढ़ रही हैं। बैंक सखी, बीसी सखी और कृषि सखी जैसे मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को गति दे रहे हैं। बैंकिंग सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण बैंकिंग को नए स्तर पर पहुंचा रही है। ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट) योजना ने महिलाओं को स्थानीय उत्पादों पर आधारित रोजगार से जोड़ने का मजबूत अवसर दिया है। हथकरघा, हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग और स्थानीय उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। शासन की ओर से आसान ऋण, प्रशिक्षण, मार्केट लिंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहयोग मिलने से महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। स्टार्टअप नीति के अंतर्गत महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। महिला-आधारित स्टार्टअप को अनुदान और मार्गदर्शन मिलने से टेक्नोलॉजी-आधारित उद्यमों में भी उनकी भागीदारी बढ़ी है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के जरिए पोषण उपक्रम, यूनिफॉर्म निर्माण, समुदाय-आधारित स्वच्छता सेवाएं और स्थानीय उत्पादन यूनिट्स चलाने वाली महिलाओं ने साबित किया है कि आर्थिक सशक्तीकरण ग्रामीण विकास को भी गति देता है। सरकारी योजनाओं के प्रभाव से आज गांवों से लेकर शहरों तक महिलाओं की भूमिका केवल पारिवारिक सीमाओं तक ही केंद्रित नहीं है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में उनकी जिम्मेदारी, भूमिका और सक्रियता निरंतर बढ़ रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रयासों ने महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और अवसर प्रदान कर समाज में उनकी स्थिति को पहले से अधिक सशक्त बनाया है। उत्तर प्रदेश का यह परिवर्तन प्रदेश सरकार की नीतियों और प्रयासों का परिणाम है, जिसने महिलाओं को नई ऊर्जा और नई दिशा दी है। प्रदेश अब वास्तविक अर्थों में महिला सशक्तीकरण को सामाजिक और आर्थिक विकास की धुरी बनाने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से संबंधित आंकड़े पर नजर डाले तो, उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों की संख्या 2025 तक लगभग 83 लाख सदस्यों तक पहुंच गई है। बीसी सखी योजना के अंतर्गत 2024 तक 4,000 से अधिक बीसी सखी सक्रिय हैं, जिन्होंने गांवों में 20 करोड़ से अधिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन कराए हैं। इसके अलावा बैंक सखी मॉडल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह औसतन 1.2 करोड़ ट्रांजेक्शन की वृद्धि दर्ज हुई है। वहीं, ओडीओपी योजना में महिलाओं की भागीदारी 2018 की तुलना में 2024 तक लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विशेष रूप से यह वृद्धि हस्तशिल्प, हथकरघा, फूड प्रोसेसिंग और वुडक्राफ्ट क्षेत्रों में दर्ज हुई है। महिला उद्यमिता मिशन और स्टार्टअप नीति के अंतर्गत 2025 तक लगभग 3,200 से अधिक महिला संचालित स्टार्टअप रजिस्टर्ड हुए हैं। यूपी में संचालित स्वयं सहायता समूहों की वार्षिक आय 2017 में लगभग 4,000 करोड़ रुपए थी, जो 2025 तक बढ़कर 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गई है।

अभेद्य हुई अयोध्या: हाई-लेवल सिक्योरिटी चेक में सेना ने परखी हर परत

अयोध्या  पीएम नरेंद्र मोदी के आगमन को ध्यान में रखते हुए सभी सुरक्षा एजेंसियां हाई-अलर्ट पर हैं। अयोध्या में 25 नवंबर को होने वाले ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह से पहले अयोध्या पूरी तरह अभेद्य हो चुकी है। आज भारतीय सेना का हेलिकॉप्टर करीब 20 मिनट तक आसमान पर मंडराता रहा। इस दौरान हेलिकॉप्टर ने राम जन्मभूमि परिसर तथा आसपास के इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। इस एयर-सर्विलांस को सुरक्षा इंतजामों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, ताकि कार्यक्रम के दौरान कोई चूक न हो। ध्वजारोहण कार्यक्रम के मद्देनजर अयोध्या की सुरक्षा हुई अभेद्य रविवार दोपहर सेना का हेलिकॉप्टर करीब 20 मिनट तक अयोध्या के आसमान में उड़ता रहा और राम जन्मभूमि परिसर व आसपास के क्षेत्रों की निगरानी करता रहा। रामलला मंदिर क्षेत्र में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। राम जन्मभूमि चौक और हनुमानगढ़ी मार्ग पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। ड्रोन कैमरों से भी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। सुबह से लेकर रात तक सुरक्षा बलों की कई चरणों में चेकिंग चल रही है।  मंदिर परिसर, श्रद्धालुओं की व्यवस्था और VVIP मूवमेंट के लिए स्पेशल रूट तैयार किए गए हैं। शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीमें भी अलर्ट मोड में तैनात हैं। साइबर टीम सोशल मीडिया पर 24 घंटे लगातार निगरानी रखी जा रही है। SSP डॉक्टर गौरव ग्रोवर ने बताया कि किसी 25 नवंबर को होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम के मद्देनज़र सुरक्षा में किसी तरह की ढिलाई नहीं दी जा सकती। विवाह पंचमी के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों के आने की उम्मीद है, इसलिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

भारतीय स्काउट्स एंड गाइड्स को वैश्विक पहचान दिला रहा है 19वां राष्ट्रीय जंबूरी आयोजन

जंबूरी हॉस्पिटल व ब्लड डोनेशन कैम्प का उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने किया उद्घाटन राज्यपाल आनंदी बेन कल करेंगी भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी का उद्घाटन उद्घाटन समाहरोह के बाद राष्ट्रीय प्रतीकों पर आधारित ड्रोन शो का किया जाएगा आयोजन लखनऊ, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी के डायमंड जयंती कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन समारोह कल, 24 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल माननीय आनंदी बेन पटेल, राष्ट्रीय जंबूरी का उद्घाटन करेंगी। उद्घाटन अवसर पर ड्रोन शो और स्काउट्स एंड गाइड्स की परेड व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।19वीं राष्ट्रीय जंबूरी के इस ऐतिहासिक आयोजन की शुरूआत आज देश भर से आये स्काउट्स एंड गाइड्स के रजिस्ट्रेशन, कैम्पिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के साथ हुई। आयोजन के पहले दिन 100 बेड के जंबूरी हॉस्पिटल और ब्लड डोनेशन कैम्प का उद्घाटन भी किया गया। जंबूरी मैदान में सैकड़ों की संख्या में देश के विविध रंग रूप में लगे स्काउट्स के टेंटस् ने पूरे मैदान को स्काउट्स की वैश्विक राजधानी के रूप में बदल दिया है। स्काउट्स एंड गाइड्स की वैश्विक राजधानी बन गया है लखनऊ 19वें राष्ट्रीय जंबूरी की शुरूवात आज देश के कोने-कोने से और अन्य देशों से भी आये स्काउट्स एंड गाइड्स के पंजीकरण और कैम्पिंग की प्रक्रिया के साथ हुई। इस क्रम में स्काउट्स की टेंट की नगरी ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ को स्काउट्स एंड गाइड्स की वैश्विक राजधानी के रूप में बदल दिया है। विश्व के अनेक देशों और देश के अलग-अलग भाग से आये स्काउट्स के टेंट उनके सांस्कृतिक रंगों में रंगे नजर आये, जो विविधता में एकता के भाव को प्रतिबिंबित कर रहे हैं। राष्ट्रीय जंबूरी, देश-विदेश से आये स्काउट्स के लिए संस्कृतिक आदान-प्रदान एक का मंच बन गया है। जंबूरी के पहले दिन युवा स्काउट्स जोश, ऊर्जा और उत्साह से भरे हुए नजर आये, ये मंच उन्हें अपनी प्रतिभा को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर भी मिला। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने किया जंबूरी हॉस्पिटल एवं ब्लड डोनेशन कैम्प का उद्घाटन    राष्ट्रीय जंबूरी के पहले दिन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने 100 बेड के जंबूरी हॉस्पिटल व ब्लड डोनेशन कैम्प का उद्घाटन किया। साथ ही जंबूरी के पहले दिन स्काउट्स ने 24 नवंबर को आयोजित होने वाले भव्य उद्घाटन समारोह की रिहर्सल की और मनोरंजक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी की। यह आयोजन न केवल स्काउट्स एंड गाइड्स में सामजिक सेवा व राष्ट्र निर्माण की भावना जागृत कर रहा है, बल्कि भारतीय स्काउटिंग को वैश्विक पटल पर पहचान भी प्रदान कर रहा है। राज्यपाल आनंदी बेन करेंगी 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी का उद्घाटन भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी का उद्घाटन 24 नवंबर को प्रदेश की माननीय राज्यपाल आनंदी बेन पटेल करेंगी। उद्घाटन समारोह दोपहर 3 बजे से शुरू होगा। जिसमें माननीय राज्यपाल के उद्बोधन के बाद स्काउट्स की परेड व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। उद्घाटन समारोह के बाद रात्रि में राष्ट्रीय प्रतीकों पर आधारित ड्रोन शो का आयोजन किया जाएगा। प्रदेश की राजधानी में चलने वाले इस 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, 25 नवंबर को सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचेगें। मुख्यमंत्री इस अवसर पर स्काउट्स एंड गाइड्स को प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। 29 नवंबर को समापन के पहले जंबूरी में कई तरह की प्रतिस्पर्धाओं व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा।

सामाजिक सामंजस्य और संसाधन प्रबंधन के लिए अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान जरूरी

सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेशव्यापी सत्यापन शुरू: अवैध घुसपैठ पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी नेपाल बॉर्डर और बड़े शहरों में सख्ती: यूपी में अवैध विदेशी नागरिक पहचान को मिली रफ़्तार लखनऊ,  देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक सामंजस्य और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य सरकारें अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान अभियान को तेज़ी से आगे बढ़ा रही हैं। उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे बड़ा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य है, इस दिशा में विशेष सतर्कता बरत रहा है। सरकार ने सभी डीएम और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे विदेशी नागरिकों के दस्तावेज़ों की गहन जांच कर अवैध रूप से रह रहे व्यक्तियों की पहचान को प्राथमिकता दें। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति—जिसमें आठ राज्यों, एक केंद्र शासित प्रदेश और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा शामिल है—इस अभियान को और महत्व देती है। हाल के वर्षों में सीमाई जिलों में अस्थिरता, फर्जी पहचान और घुसपैठ की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिनका सीधा असर यूपी पर दिखाई देता है। फर्जी पहचान के सहारे विभिन्न शहरों में बस रहे अवैध घुसपैठिए न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि सामाजिक संतुलन और संसाधनों पर भी गंभीर दबाव डालते हैं। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से सत्यापन और पहचान की प्रक्रिया को तेज़ कर रहे हैं। इसमें निर्दोष व्यक्तियों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। वहीं संदिग्ध गतिविधियों में शामिल या फर्जी दस्तावेज़ों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य के सभी जिलों में अस्थायी डिटेंशन सेंटर भी स्थापित किए जायेंगे, जहां ऐसे व्यक्तियों को दस्तावेज़ों के सत्यापन पूरा होने तक सुरक्षित रूप से रखा जा सकेगा। यह व्यवस्था प्रशासन को सही तथ्यों की जांच में मदद करेगी, साथ ही स्थानीय जनसुविधाओं पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा। तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 2016 में संसद को सूचित किया था कि अनुमानित 2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी भारत में निवास कर रहे होंगे। इसके अलावा, अगस्त 2017 में उन्होंने संसद में यह भी कहा था कि भारत में अवैध रोहिंग्या प्रवासियों की संख्या 40,000 से अधिक है। अवैध विदेशी नागरिकों की मौजूदगी से स्थानीय संसाधनों, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर असर पड़ता है। कई बार फर्जी पहचान बनाकर ये लोग सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश करते हैं, जिसका सीधा नुकसान वास्तविक पात्रों को होता है। तेजी से विकसित हो रहे शहर—जैसे लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और वाराणसी—इस समस्या का अधिक प्रभाव महसूस करते हैं, जहां जनसंख्या घनत्व पहले से ही अधिक है और संसाधनों पर दबाव भी। विशेषज्ञों के अनुसार नेपाल सीमा से सटे यूपी के जिलों में अवैध प्रवेश, फर्जी पहचान और संदिग्ध गतिविधियों का जोखिम अधिक रहता है, इसलिए समय पर पहचान बेहद आवश्यक है। समग्र रूप से, यह अभियान कानून-व्यवस्था, सामाजिक सदभाव और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने के साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने का महत्वपूर्ण कदम है, जो प्रदेश को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने में मदद कर रहा है।

सीएम योगी के नेतृत्व में ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में यूपी बना अन्य राज्यों के लिए उदाहरण

बढ़ती महंगाई के बीच यूपी की स्थिर बिजली दरें बनी जनता की ताकत सीएम योगी की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी योजना और वित्तीय अनुशासन से आम जनता को मिला वास्तविक लाभ राजस्व अधिशेष ने साबित किया, प्रबंधन सही तो व्यवस्था मजबूत ऊर्जा सुधारों ने बनाया यूपी को भरोसेमंद निवेश गंतव्य लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार ने लगातार छठे वर्ष बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी न करके देश के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो बताता है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी योजना और वित्तीय अनुशासन एक साथ मिलकर जनता को वास्तविक लाभ पहुंचा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में जो सुधार किए हैं, उनकी वजह से आज यूपी देश का पहला राज्य बन गया है, जहां छह वर्षों से बिजली दरें यथावत हैं।      वर्तमान समय में जब देश के कई राज्यों में बढ़ती लागत के कारण बिजली दरें ऊपर जा रही हैं, उसी समय उत्तर प्रदेश ने गरीब, किसान, मजदूर, व्यापारी और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत दी है। सरकार का उद्देश्य साफ है कि जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़े और घरेलू बजट स्थिर रहे।      इस निर्णय के पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक सुव्यवस्थित और दूरदर्शी योजना काम कर रही है। बिजली वितरण कंपनियों ने पिछले वर्षों में ₹15,000 करोड़ से अधिक का राजस्व अधिशेष अर्जित किया है। यह अधिशेष अचानक नहीं आया, बल्कि यह आर्थिक अनुशासन, बिजली चोरी पर नियंत्रण, तकनीक आधारित बिलिंग, लाइन लॉस में कमी, समय पर मेंटेनेंस और बड़े पैमाने पर संरचनात्मक सुधारों का परिणाम है।       प्रदेश में नई विद्युत उत्पादन परियोजनाओं, ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ते निवेश ने भी लागत नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बढ़ते माइग्रेशन, उद्योग विस्तार और शहरीकरण के बावजूद सरकार ने सब्सिडी को प्रभावी बनाकर व्यवस्था को संतुलित कर रखा है।     ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ओवरलोडिंग नियंत्रित करने, केबलिंग को भूमिगत करने, पुराने तारों और ट्रांसफॉर्मरों को बदलने जैसे कार्यों ने बिजली आपूर्ति प्रणाली को मजबूत किया है। ऊर्जा बचत अभियानों और स्मार्ट इलेक्ट्रिक मीटरों के व्यापक क्रियान्वयन ने भी बिलिंग और खपत प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया, जिससे राजस्व बढ़ा और लीकेज में कमी आई।      बिजली दरों में स्थिरता से उपभोक्ताओं को तुरंत राहत तो मिलती ही है, साथ ही उद्योगों की प्रोडक्शन लागत भी नियंत्रित रहती है। इसका सीधा असर निवेश माहौल पर पड़ता है। निवेशक ऐसे राज्यों को प्राथमिकता देते हैं जहां ऊर्जा की कीमतें स्थिर हों, आपूर्ति सुरक्षित हो और नीतियां पारदर्शी हों। यूपी ने इन तीनों मोर्चों पर भरोसे का वातावरण तैयार किया है। यही कारण है कि आज प्रदेश देश के उभरते औद्योगिक हब्स में अपनी जगह मजबूत कर रहा है।        योगी सरकार का स्थिर बिजली और मजबूत व्यवस्था मॉडल इस बात का प्रमाण है कि जनहित और अर्थव्यवस्था दोनों को साथ-साथ मजबूत किया जा रहा है। गरीब परिवारों की जेब सुरक्षित, किसानों पर सिंचाई लागत का बोझ नहीं, मजदूर और कामगारों पर अतिरिक्त भार नहीं, छोटे व्यापारियों का बजट नियंत्रित और उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धी माहौल को यह संतुलन कर उत्तर प्रदेश में स्थापित किया है।      छह साल से स्थिर बिजली दरें केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि सरकार की दूरदर्शिता, प्रबंधन क्षमता और नीतिगत प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण हैं। उत्तर प्रदेश ने यह दिखा दिया है कि मजबूत इच्छा-शक्ति हो तो जनता को राहत देते हुए भी व्यवस्था को लाभ में रखा जा सकता है।      सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ा है। खासतौर पर रूफटॉप सोलर और ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश में आज शहर या गांवों की छतों पर चमकते सोलर पैनल न सिर्फ बिजली पैदा कर रहे हैं, बल्कि नए भारत की परिकल्पना को साकार भी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के अंतराल बढ़ता औद्योगिक विस्तार और पर्यावरणीय क्षेत्र में सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा की जरूरत को बढ़ाया है। सौर ऊर्जा न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि उपभोक्ताओं के बिजली बिल में मददगार साबित हो रही है।      उत्तर प्रदेश में कुल 13,46,040 आवेदन प्राप्त हुए थे। यह स्वयं दिखाता है कि लोग बदलाव के लिए कितने तत्पर थे। मात्र 18 महीनों में 2,81,769 सोलर रूफटॉप संयंत्रों का इंस्टॉलेशन और पिछले 4.5 महीनों में रिकॉर्ड 1,30,000 संयंत्रों की स्थापना ने उत्तर प्रदेश को महाराष्ट्र और गुजरात के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य बना दिया।    सौर ऊर्जा क्रांति ने सिर्फ रोशनी नहीं फैलाई बल्कि इसने रोजगार के द्वार भी खोले। अकेले उत्तर प्रदेश में 54,000 से अधिक युवाओं को सीधा रोजगार मिला है। देशभर में सोलर मॉड्यूल निर्माण, इन्वर्टर, वायरिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में लाखों नौकरियां सृजित हुईं—यानी यह योजना ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार का भी उजाला लेकर आई है।       यूपी बिजली टैरिफ 2025-26 के प्रमुख आंकड़ों के अनुसार, राज्य में लगातार छठे साल बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि ग्रीन एनर्जी टैरिफ में राहत देते हुए HV कंज्यूमर्स के लिए इसे ₹0.36 से घटाकर ₹0.34 प्रति यूनिट और LV कंज्यूमर्स के लिए ₹0.17 प्रति यूनिट तय किया गया है। डिस्ट्रीब्यूशन लॉस के मामले में मध्यांचल और पश्चिमांचल डिस्कॉम ने FY 24-25 का लक्ष्य पूरा किया, जबकि सबसे कमजोर प्रदर्शन पूर्वांचल का रहा।          आयोग ने FY 2023-24 के लिए 85,082.83 करोड़ रुपये का एआरआर और 1,246.55 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी सरप्लस स्वीकृत किया। वहीं FY 2025-26 के लिए 1,10,993.33 करोड़ रुपये का एआरआर और 13.35% डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को मंजूरी दी गई है, जिसमें राज्य सरकार 17,100 करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी।        इस वर्ष 7,710.04 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी गैप दर्ज हुआ है, जबकि 1 अप्रैल 2025 तक यूपीपीसीएल के पास 18,592.38 करोड़ रुपये का जमा रेगुलेटरी सरप्लस उपलब्ध रहेगा। औसत सप्लाई कॉस्ट ₹8.18 और औसत बिलिंग रेट ₹7.61 प्रति यूनिट तय की गई है। आदेश के अनुसार PAN अपडेट, TDS सर्टिफिकेट जारी करने, ओपन एक्सेस क्रॉस-सब्सिडी में तर्कसंगत कमी और TOD टैरिफ को यथावत रखने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि मल्टी स्टोरी बिल्डिंग व टाउनशिप से जुड़े मुद्दों पर जल्द ही अलग कंसल्टेशन पेपर … Read more

अयोध्या में ध्वजारोहण कार्यक्रम से महिला स्वंय सहायता समूहों का सशक्तिकरण, कार्यक्रम में महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी

•    अयोध्या के विकास में महिला स्वयं सहायता समूह का योगदान, स्थानीय उत्पादों की मिल रही पहचान •    महिलाओं के स्वाभिमान, सशक्तिकरण और आर्थिक उन्नयन के लिए योगी सरकार दृढ़संकल्पित  लखनऊ अयोध्या में ध्वजारोहण समारोह केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि विकास की एक अनवरत यात्रा है। विकास की इस यात्रा में महिला स्वंय सहायता समूह और युवा स्वयंसेवक भी भागीदार बन रहे हैं। ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने से लेकर आगंतुकों की सहायता में भी महिला स्वयं सहायता समूह और युवा स्वयंसेवक अपना योगदान दे रहे हैं। महिलाएं घर की चारदीवारी से निकलकर अब अयोध्या के विकास में अपना योगदान कर रही हैं और अपनी आजीविका भी चला रही हैं।   ध्वजारोहण कार्यक्रम में महिला स्वयं सहायता समूह का योगदान अयोध्या में श्रीराम मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भगवा ध्वज फहराएंगे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विशिष्ठ अतिथि भी आ रहे हैं। इनके स्वागत के लिए भी महिला स्वयं सहायता समूहों की सहायता ली जा रही है। आसपास के जिलों में संचालित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे है सामाग्रियों को भी इस समारोह में बाजार मिल रहा है। हस्तशिल्प, हथकरघा, प्रसाद, माला, बैग, गमछा, मूर्तियां जैसे अनेक उत्पाद इनके द्वारा बेंचे जा रहे हैं। इससे इनको धनार्जन भी हो रहा है और महिला सशक्तिकरण को बल मिल रहा है। अयोध्या की राधा लक्ष्मी बनी मिसाल मिल्कीपुर में डिवहारिन माई महिला स्वयं सहायता से जुड़ी राधा लक्ष्मी ने अपने प्रयासों से न केवल अपने परिवार को आर्थिक तौर पर मजबूत किया बल्कि अयोध्या के विकास में भी अपना योगदान दिया। राधा लक्ष्मी ने सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का फायदा उठाया और बीसी सखी के रूप में काम करने लगी। इनकी मासिक कमाई 40000 से 50000 के बीच है। जिले में ऐसी कई महिलाएं हैं जो राधा लक्ष्मी की तरह अपनी आजीविका चला रही हैं। विविध महिला सूक्ष्म उद्यम से रोजगार अयोध्या में एचडीएफसी बैंक के पीपुल्स एक्शन फॉर नेशनल इंटीग्रेशन (PANI-‘पानी’) कार्यक्रम ने ग्रामीण समुदायों, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, समग्र ग्रामीण विकास कार्यक्रम (HRDP) शुरू किया है। महिलाओं के समूह बनाने और व्यक्तियों और महिलाओं के समूहों के सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने वाले इस कार्यक्रम ने अयोध्या जिले के अमानीगंज ब्लॉक के गरीब परिवारों की मदद की है। सफल व्यवसाय चलाने से इन महिलाओं को अपने परिवारों और समुदायों में निर्णय लेने का हिस्सा बनने का आत्मविश्वास मिलता है। अयोध्या में क्रांति दीदी का कमाल अयोध्या जिले के मसौधा ब्लॉक के ग्राम पंचायत हाजीपुर सिंहपुर में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बन रहा है। अवधपुरी महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य क्रांति दीदी ने सीसीएल से 50,000 रुपये का ऋण लिया है। इस ऋण से उन्होंने अपनी आजीविका में वृद्धि की है। इसके माध्यम से महिलाओं को रोजगार देने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को ऋण और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। इससे वे अपनी आजीविका में सुधार कर रही हैं। स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा बनाकर धनार्जन अयोध्या में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महिला स्वयं सहायता समूहों ने 'हर घर तिरंगा' अभियान के अंतर्गत 2.5 लाख राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए थे। जिले के 300 स्वयं सहायता समूहों की 1080 महिलाओं ने एकजुट होकर राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए। इन तिरंगों को स्वंतत्रता दिवस पर सरकारी भवनों पर फहराया गया था। इसके लिए प्रति तिरंगा 20 रुपये का भुगतान महिलाओं को किया गया था। इससे न केवल उन्होंने कमाई की बल्कि महिला उत्थान का एक बेहतर उदाहरण पेश किया। अयोध्या का विकास और महिला स्वयं सहायता समूह एक दूसरे के पूरक हैं। अयोध्या के विकास से जहां महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं वहीं महिलाएं स्वरोजगार से अयोध्या के विकास में योगदान दे रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों का ही परिणाम है कि महिलाओं को उनका उचित स्थान और सम्मान मिल रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ में की शिरकत

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीमद्भगवदगीता के 18 अध्यायों के 700 श्लोक को भारत का हर सनातन धर्मावलंबी जीवन का मंत्र मानकर आदर भाव के साथ आत्मसात करने का प्रयास करता है। श्रीमद्भगवदगीता नई प्रेरणा देती दिखाई देती है। श्रीमद्भगवदगीता धर्म से ही शुरू होती है और अंत में भी उसी मर्म के साथ विराम लेती है। श्रीमद्भगवदगीता धर्म की वास्तविक प्रेरणा है। भारत की मनीषा ने धर्म को कर्तव्य के साथ जोड़कर देखा है। हमने धर्म को उपासना विधि मात्र नहीं माना है। उपासना विधि उसका छोटा सा भाग है। हर व्यक्ति अपने पंथ, संप्रदाय, उपासना विधि के अनुरूप आस्था को तय कर लेता है, लेकिन मुख्य रूप से धर्म हमारे यहां जीवन जीने की कला है। हमने इसे ही ‘वे ऑफ लाइफ’ के रूप में कहा है। मुख्यमंत्री व गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ में रविवार को यह बातें कहीं। हमने हर कर्तव्य को पवित्र भाव के साथ माना, सब कुछ होते हुए भी कभी श्रेष्ठता का डंका नहीं पीटा सीएम योगी ने कहा कि श्रीमद्भगवदगीता भगवान की दिव्य वाणी है। सीएम ने श्लोक ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः’ को सुनाया। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी ऐसा नहीं होता होगा, जहां युद्ध का मैदान धर्म क्षेत्र के रूप में जाना जाता हो, लेकिन हमने हर कर्तव्य को पवित्र भाव के साथ माना है। अच्छा करेंगे तो पुण्य और गलत करेंगे तो पाप के भागीदार बनेंगे। यह मानकर हर सनातन धर्मावलंबी अच्छा करने का प्रयास करता है। भारत ने विश्व मानवता को प्राचीन काल से ही संदेश दिया है। हमने कभी नहीं कहा है कि जो मैं कह रहा हूं, वही सब कुछ है या हमारी उपासना विधि सर्वश्रेष्ठ है। सब कुछ होते हुए भी हमने कभी श्रेष्ठता का डंका नहीं पीटा। जो भी आया, उसे शरण दिया। जिसके ऊपर भी विपत्ति और चुनौती आई, सनातन धर्मावलंबी उसके सहयोग के लिए खड़ा हो गया। जहाँ धर्म और कर्तव्य होगा, वहां जय ही होनी है सीएम योगी ने कहा कि भारत की भूमि ने जियो और जीने दो की प्रेरणा दी। ‘अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्’ की प्रेरणा भी भारत की धरती ने ही दी है। हमने पूरी भारत की धरती को धर्म क्षेत्र माना, इसलिए युद्ध का मैदान भी हमारे लिए धर्म क्षेत्र है। यह कर्तव्यों से जुड़ा हुआ क्षेत्र है, क्योंकि धर्म क्षेत्र में युद्ध भी कर्तव्यों के लिए लड़ा जा रहा है। सीएम ने कहा कि अंत में धृतराष्ट्र पूछ ही पड़ते हैं कि बताओ तो क्या होने जा रहा है। इस युद्ध का क्या परिणाम है तो उन्हें बताया जाता है कि युद्ध का परिणाम तो पहले से तय है: यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः। तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥ हम मानते रहे हैं कि यतो धर्मस्ततो जयः—जहाँ धर्म और कर्तव्य होगा, वहीं जय होनी है। अधर्म के मार्ग पर चलने वाले की कभी विजय नहीं हो सकती। यही भारत के सनातन धर्म की परंपरा व प्रकृति का अटूट नियम है। भगवान श्रीकृष्ण ने दी निष्काम कर्म की प्रेरणा सीएम योगी ने आज के समय के लिए दो उदाहरण भी दिए। कहा कि ‘स्वधर्मे निधनं श्रेयः, परधर्मो भयावहः’ यानी अपने धर्म और कर्तव्य पर चलकर मृत्यु को वरण करना श्रेयस्कर है, लेकिन स्वार्थ के लिए कर्तव्य से च्युत होना पतन का कारण बनेगा। कभी भी धोखे से यह मत करना। भगवान ने कर्म की प्रेरणा दी, वह कर्म, जिसमें फल की इच्छा न हो। सीएम ने कहा कि बीज लगते ही हम फल की इच्छा करते हैं। बीज सही लगेगा तो पेड़ फलेगा और फल दे ही देगा। भगवान श्रीकृष्ण ने भी निष्काम कर्म की प्रेरणा दी। निष्काम कर्म के प्रेरणास्रोत हैं सरसंघ चालक जी सीएम योगी ने मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत को निष्काम कर्म का प्रेरणास्रोत बताया। बोले-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रम से जुड़ रहा है। दुनिया से आए अंबेसडर, हाई कमिश्नर्स हमसे पूछते हैं कि आप लोगों का आरएसएस से जुड़ाव है, तब हम कहते हैं कि हां! हमने स्वयंसेवक के रूप में कार्य किया है। वे इसकी फंडिंग का पैटर्न पूछते हैं, तब हम बताते हैं कि यहां ओपेक के देश या इंटरनेशनल चर्च पैसा नहीं देता। यहां संगठन समाज के सहयोग से खड़ा हो रहा है और समाज के लिए हर क्षेत्र में समर्पित भाव से कार्य करता है। किसी भी पीड़ित की जाति, मत-मजहब, क्षेत्र, भाषा की परवाह किए बिना हर स्वयंसेवक उसकी सेवा को ही अपना कर्तव्य मानता है। आरएसएस ने सेवा के साथ सौदेबाजी नहीं की, लेकिन कुछ लोगों ने सेवा को ही सौदे के माध्यम बना लिया सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ हर पीड़ित संग खड़ा होना (जो भारत को परम वैभव तक ले जाने में सहायक हो सकता है) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा है। आरएसएस ने पिछले 100 वर्षों में सेवा के साथ कोई सौदेबाजी नहीं की, लेकिन कुछ लोगों ने दुनिया व भारत में सेवा को ही सौदे के माध्यम बनाया है। वे लोभ, लालच और दबाव से भारत की डेमोग्राफी को बदलने के लिए छल व छद्म का सहारा लेकर अपना ताना-बाना बदलकर भारत की आत्मा पर प्रहार करने का प्रयास कर रहे हैं। इन स्थितियों में भगवान की वाणी श्रीमद्भगवदगीता नई प्रेरणा बन सकती है। 140 करोड़ भारतवासियों के लिए दिव्य मंत्र है श्रीमद्भगवदगीता सीएम ने स्वामी ज्ञानानंद का अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने जिओ गीता को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में इसे बहुत छोटे-छोटे उदाहरण के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। श्रमिक, किसान, महिला, छात्र, नौजवान, नौकरीपेशा, चिकित्सक, अधिवक्ता, व्यापारी, योद्धा, सैनिक के लिए गीता की प्रेरणा क्या है, उन्होंने इसे जिओ गीता के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उनकी छोटी-छोटी पुस्तकें अत्यंत प्रेरणादाई होती हैं। श्रीमद्भगवदगीता केवल जेल के कैदियों के लिए नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों के लिए दिव्य मंत्र है। यह जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करने के साथ ही जीवन जीने की कला का मार्ग है। हर व्यक्ति को इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। इस दौरान मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन … Read more

सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान से राज्य में बदला सामाजिक परिदृश्य, मिशन शक्ति से गांव तक पहुंचा स्वावलंबन का संदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व वाली सरकार के शासनकाल में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर किए गए व्यापक प्रयास अब ठोस परिणामों के रूप में सामने आ रहे हैं। प्रदेश में महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय स्वतंत्रता और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से सुधार हुआ है। इसी परिवर्तन को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश आज महिला सशक्तिकरण के जरिए सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहा है। प्रदेश सरकार ने सबसे पहले महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी। एंटी रोमियो स्क्वाड की सक्रियता, 1090 वुमेन पावर लाइन का विस्तार और पिंक पेट्रोलिंग जैसे कदमों ने महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है। शहरों और गांवों दोनों में बदलते सामाजिक वातावरण का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। परिवारों में लड़कियों की शिक्षा को लेकर सकारात्मकता बढ़ी है और माता-पिता अब बिना किसी संकोच के बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में मिशन शक्ति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके माध्यम से महिला समूहों को नेतृत्व, आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और जागरूकता से जोड़ा गया। बालिकाओं के लिए कायाकल्प, स्कूलों में जेंडर सेफ्टी प्रोग्राम और किशोरी स्वास्थ्य अभियान जैसे प्रयासों ने सामाजिक बदलाव की सुदृढ़ नींव रखी। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को जन्म से लेकर स्नातक तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, जिससे पढ़ाई में निरंतरता बनी। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की बात करें तो यूपी आज देश में सबसे बड़े महिला स्वयं सहायता समूह नेटवर्क के रूप में उभर रहा है। प्रदेश में लाखों महिलाएं आज स्वयं सहायता समूहों के जरिए उद्यमिता की ओर बढ़ रही हैं। बैंक सखी, बीसी सखी और कृषि सखी जैसे मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को गति दे रहे हैं। बैंकिंग सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण बैंकिंग को नए स्तर पर पहुंचा रही है। ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना) ने महिलाओं को स्थानीय उत्पादों पर आधारित रोजगार से जोड़ने का मजबूत अवसर दिया है। हथकरघा, हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग और स्थानीय उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। शासन की ओर से आसान ऋण, प्रशिक्षण, मार्केट लिंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहयोग मिलने से महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।  स्टार्टअप नीति के अंतर्गत महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। महिला आधारित स्टार्टअप को अनुदान और मार्गदर्शन मिलने से टेक्नोलॉजी आधारित उद्यमों में भी उनकी भागीदारी बढ़ी है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के जरिए पोषण उपक्रम, यूनिफॉर्म निर्माण, समुदाय आधारित स्वच्छता सेवाएं और स्थानीय उत्पादन यूनिट्स चलाने वाली महिलाओं ने साबित किया है कि आर्थिक सशक्तिकरण ग्रामीण विकास को भी गति देता है। सरकारी योजनाओं के प्रभाव से आज गांवों से लेकर शहरों तक महिलाओं की भूमिका केवल पारिवारिक सीमाओं तक ही केंद्रित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में उनकी जिम्मेदारी, भूमिका और सक्रियता निरंतर बढ़ रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रयासों ने महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और अवसर प्रदान कर समाज में उनकी स्थिति को पहले से अधिक सशक्त बनाया है। उत्तर प्रदेश का यह परिवर्तन प्रदेश सरकार नीतियों और प्रयासों का परिणाम है। जिसने महिलाओं को नई ऊर्जा और नई दिशा दी है। प्रदेश अब वास्तविक अर्थों में महिला सशक्तिकरण को सामाजिक और आर्थिक विकास की धुरी बनाने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित आंकड़े… – उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों की संख्या 2025 तक लगभग 95 लाख सदस्यों तक पहुंच गई है । – सभी ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती की गई है। वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण को गति देने वाले इस प्रयास के अंतर्गत बीसी सखियों ने लगभग 32 हजार करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय लेनदेन किया है।  – ओडीओपी योजना में महिलाओं की भागीदारी 2018 की तुलना में 2024 तक लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विशेष रूप से यह वृद्धि हस्तशिल्प, हथकरघा, फूड प्रोसेसिंग और वुडक्राफ्ट क्षेत्रों में दर्ज हुई है। – महिला उद्यमिता मिशन और स्टार्टअप नीति के अंतर्गत 2025 तक लगभग 3200 से अधिक महिला संचालित स्टार्टअप रजिस्टर्ड हुए हैं। – विगत साढ़े 08 वर्षों में श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी 14 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई है।

भीषण सड़क हादसा: थार ने श्रद्धालुओं की कार को मारी टक्कर , दो की मौत, 8 घायल

भरतपुर मथुरा बाईपास स्थित गोलपुरा मोड़ के पास देर रात एक भीषण सड़क हादसा हुआ। हादसे में श्रद्धालुओं से भरी ईको कार को सामने से डिवाइडर तोड़कर आई तेज रफ्तार थार ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हो गए। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनमें से एक को डॉक्टरों ने जयपुर रेफर कर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, थार गाड़ी अखड्ड की ओर से तेज रफ्तार में डिवाइडर तोड़कर सीधे इको कार से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि इको कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार श्रद्धालु अंदर फंस गए। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का आक्रोश स्थानीय लोगों का कहना था कि थार गाड़ी का चालक नशे हालत में था और ओवरस्पीड में वाहन चला रहा था। गुस्साए ग्रामीणों ने चालक की पिटाई भी कर दी। लोगों ने ही घायल कार में फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद की। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और थार में सवार चारों युवकों को डिटेन कर लिया। पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है। घायलों को आरबीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने इको कार चालक 25 वर्षीय नरेंद्र और महिला श्रद्धालु नीतू को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को जयपुर रेफर किया गया है। सेवर थानाधिकारी सतीशचंद शर्मा के अनुसार, सभी घायलों का उपचार आरबीएम में जारी है और थार चालक सहित अन्य सवारों से पूछताछ की जा रही है।

रात में चली गोलियों की गूंज: सपा नेता का बेटा ढेर, एक गंभीर रूप से घायल

प्रतापगढ़  यूपी के प्रतापगढ़ में कोतवाली इलाके के ताजपुर सरियावां गांव में शनिवार देर रात बच्चों के विवाद को लेकर सपा नेता पूर्व ग्राम प्रधान के एक बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी गई। सिर में गोली लगने से घायल दूसरा बेटा प्रयागराज रेफर किया गया है। झगड़े में दूसरे पक्ष के भी लोग घायल हुए हैं। मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। गांव में तनाव फैला हुआ है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।   बताया जा रहा है कि ताजपुर सरियावां गांव निवासी सपा नेता व पूर्व प्रधान मोअज्जम उर्फ गुड्डू से पड़ोस के ही तनवीर आदि से पुरानी रंजिश चल रही है। आरोप है कि बच्चों के विवाद को लेकर शनिवार रात करीब 9:00 बजे दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने हो गए। दोनों पक्षों के बीच मारपीट होने लगी। इसी दौरान तनवीर, उसके भाई सोहराब आदि ने मोअज्जम के बेटों एहतेशाम उर्फ साहिल के सिर और फुरकान के गले में गोली मार दी। फुरकान की गोली लगने से मौत हो गई। वहीं साहिल के सिर में गोली लगी है और उसका इलाज जारी है। पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस के साथ कोतवाल अवन कुमार दीक्षित मौके पर पहुंचे। उन्होंने दो आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। वहीं, हत्या की बात फैलते ही सीएचसी कुंडा में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। गांव में तनाव फैल गया। भारी पुलिस बल के साथ एएसपी ने इलाके में माहौल को देखते हुए सुरक्षा बल तैनात कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों सपा नेता तनवीर और शाहबाज को गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से राइफल भी बरामद की गई है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।