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सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेश भर में महिलाओं, बेटियों और उनके परिवार के स्वास्थ्य परीक्षण को चलाया जाएगा अभियान

  – मोटापे को कम करने के लिये चीनी और तेल के प्रयोग को 10 प्रतिशत तक कम करने पर दिया जाएगा जोर – कैंसर, रक्तचाप, मधुमेह, आंख समेत होंगी विभिन्न जांचें, आयुष्मान और मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड का किया जाएगा वितरण लखनऊ,  योगी सरकार ने महिलाओं, बेटियों और उनके परिवार के स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में नई पहल की शुरुआत की है। इसके तहत सीएम योगी के निर्देश पर 17 सितंबर से पूरे प्रदेश में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश भर में 2 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत स्वास्थ्य शिविर, पोषण जागरूकता और मातृत्व लाभ वितरण आदि कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।  इसका उद्​देश्य महिलाओं और उनके परिवार का स्वास्थ्य मजबूत कर समाज को मजबूत करना है। कैंसर समेत होंगी विभिन्न तरह की जांचें, आयुष्मान कार्ड का किया जाएगा वितरण स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश में चिकित्सा और स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इसमें महिलाओं की संपूर्ण स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ पोषण जागरूकता पर विशेष कार्यक्रम होंगे। साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत मातृत्व लाभ भी वितरित किया जाएगा। अभियान के स्वास्थ्य शिविर में महिलाअों के रक्तचाप, मधुमेह, दांत, आंख और ईएनटी की जांच की जाएगी। इसके अलावा कैंसर (मुख, स्तन और ग्रीवा), गर्भवती महिलाओं आदि की जांच की जाएगी। साथ ही एनीमिया के स्तर, टीकाकरण, टेलीमानस सुविधाएं और सिकल सेल परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बनाने के लिए मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड, आयुष्मान कार्ड और पोषण ट्रैकिंग का पंजीकरण भी किया जाएगा। स्वस्थ जीवनशैली और पोषण पर दिया जाएगा जोर अभियान के तहत लोगों को संतुलित आहार, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसमें मोटापे को कम करने चीनी और तेल के प्रयोग को 10 प्रतिशत तक कम करने, स्थानीय और मौसमी भोजन को बढ़ावा देने तथा बच्चों, किशोरियों के आहार व आयरन सेवन को सुनिश्चित करने पर बल दिया जाएगा। इसके अलावा टेक होम राशन  का वितरण और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। अभियान में प्रदेश के हर नागरिक को भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसमें रक्तदान शिविर, मित्र स्वयंसेवी पंजीकरण और आंगनबाड़ी पंजीकरण जैसी गतिविधियों के माध्यम से आमजन को अभियान से जोड़ा जाएगा।

सीएम योगी के विजन व कुशल मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीक का केंद्र बनकर उभर रहे यूपी की शक्ति की साक्षी बनेगी दुनिया

  -ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में हो रहे भव्य आयोजन में एआई मॉडल के लाइव डेमॉन्सट्रेशन के जरिए तकनीकी उन्नति को किया जाएगा प्रदर्शित -आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग द्वारा 200 स्क्वेयर मीटर क्षेत्र में पवेलियन का होगा निर्माण, यूपीएलसी द्वारा कार्य पूरा किया जाएगा लखनऊ, उत्तर प्रदेश को उन्नत तकनीकी का गढ़ बनाने की दिशा में कार्य कर रही योगी सरकार ने यूपीआईटीएस 2025 को लेकर विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन व कुशल मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश का कायाकल्प न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए सुखद आश्चर्य का विषय बना हुआ है। योगी सरकार की नीतियों का ही परिणाम है कि कभी पिछड़ा कहा जाने वाला प्रदेश आज देश में उद्यम, उत्पादकता, तकनीकी कौशल व नवाचार का केंद्र बनकर उभरा है। प्रदेश की इसी सकारात्मक शक्ति को प्रदर्शित करने के लिए ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में 25 से 29 सितंबर के बीच यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के तृतीय संस्करण (यूपीआईटीएस 2025) का आयोजन किया जा रहा है।          इस कड़ी में, आईटी व इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल का लाइव डेमॉन्सट्रेशन भी करेगा, जो दुनियाभर से यहां आने वाले आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस उद्देश्य से विभाग ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। कार्ययोजना के अनुसार, आयोजन स्थल के हॉल-5 के 200 वर्ग मीटर क्षेत्र में भव्य पवेलियन का संचालन किया जाएगा, जिसे उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएलसी) की देखरेख में तैयार किया जाएगा। कर्व्ड एलईडी वॉल समेत विभिन्न आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा पवेलियन योजना के अनुसार, यूपीएलसी की देखरेख में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग का थीम आधारित कॉन्सेप्च्युलाइज्ड पवेलियन बनाया जाएगा। इसमें स्टार्टअप्स के लिए विशेष क्षेत्र भी तैयार किया जाएगा। विभाग के पंडाल में स्मार्ट एलईडी वीडियो वॉल तथा स्टार्टअप्स के लिए अलॉटेड एरिया में आधुनिक कर्व्ड वीडियो वॉल लगाई जाएगी। इनके माध्यम से योगी सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और तकनीकी प्रगति की गाथाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। पंडाल में मुख्य मंच (स्टेज) के साथ ही बैठकों के लिए वीआईपी लाउंज, कैफेटेरिया और कॉमन विजिटिंग एरिया जैसी सुविधाएं भी वैश्विक मानकों के अनुरूप उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे आगंतुकों को भव्यता के साथ ही भविष्य की तकनीकों तथा इस दिशा में योगी सरकार के प्रयासों की जानकारी मिलेगी। लाइव सेटअप के आधार पर कार्य करेगा एआई मॉडल आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के पवेलियन में प्रस्तुत किया जाने वाला एआई मॉडल लाइव सेटअप पर आधारित होगा। यह न केवल कई भविष्य आधारित विशेषताओं से युक्त होगा, बल्कि तकनीकी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति को प्रदर्शित करने का माध्यम भी बनेगा। उल्लेखनीय है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। जहां एआई प्रज्ञा जैसे कार्यक्रम प्रदेश की युवा पीढ़ी व वर्कफोर्स को एआई दक्ष बना रहे हैं, वहीं महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों से लेकर विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और रोजमर्रा के कार्यों के कुशल निष्पादन में एआई की भूमिका अहम रही है। इसके अतिरिक्त,पंडाल में कंटेंट डिस्प्ले के लिए करीब 150 वर्ग फीट की एनामॉर्फिक डिस्प्ले स्क्रीन लगाई जाएगी। साथ ही, पंडाल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए लाइव फीड सेटअप भी उपयोग में लाया जाएगा।

रोड और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े स्तर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही योगी सरकार

– राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क दोगुना से ज्यादा बढ़ा – सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे के साथ यूपी बनेगा लॉजिस्टिक हब – 2047 तक हर मंडल को एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट देने का मुख्यमंत्री का संकल्प – पीएमजीएसवाई से गांव-गांव तक पहुंची सड़क – जेवर एयरपोर्ट बनेगा एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश 'विकसित यूपी @2047' के विजन की ओर बढ़ते हुए परिवहन और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव का साक्षी बन रहा है। पिछले साढ़े आठ वर्षों में जिस तेजी से सड़क, एक्सप्रेसवे और एविएशन सेक्टर में प्रगति हुई है, उसने न केवल प्रदेश की रफ्तार बढ़ाई है बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश और विकास का नया केंद्र बना दिया है। 2017 से पहले की स्थिति : धीमी प्रगति, सीमित संसाधन वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सड़क और एविएशन अवसंरचना विकास की रफ्तार बेहद धीमी थी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत सड़क लंबाई 2013-14 में 51,549 किलोमीटर से बढ़कर 2016-17 में मात्र 56,846 किलोमीटर हो सकी। हवाई कनेक्टिविटी भी सीमित थी और 17 वर्षों (1999 से 2016 तक) में विमान यात्रियों की संख्या में केवल 55 लाख की वृद्धि हुई थी। प्रदेश में उस समय मात्र तीन एक्सप्रेसवे और गिने-चुने हवाई अड्डे संचालित थे। साढ़े आठ साल में बड़ा बदलाव : जमीन से आकाश तक नई उड़ान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 2017 के बाद सड़क, हवाई और जल परिवहन में समन्वित दृष्टिकोण के साथ ठोस कदम उठाए। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क लंबाई 2024-25 तक 77,425 किलोमीटर तक पहुंच गई। वहीं, एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे आगे निकलते हुए 22 एक्सप्रेसवे का जाल बिछाने के महाअभियान में जुटी हुई है। एविएशन सेक्टर में भी यूपी ने छलांग लगाई और 12 घरेलू तथा 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे संचालित हो चुके। एक्सप्रेसवे प्रदेश बना उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश अब 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' के रूप में जाना जा रहा है। 1949-50 में जहां कोई एक्सप्रेसवे नहीं था, वहीं 2016-17 तक यह संख्या केवल 3 तक पहुंच सकी थी। लेकिन 2025-26 तक यह बढ़कर 22 हो गई है, इसमें संचालित और निर्माणाधीन दोनों शामिल हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट न केवल आंतरिक कनेक्टिविटी बढ़ा रहे हैं, बल्कि लॉजिस्टिक हब के रूप में यूपी की स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। प्रमुख निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और व्यापक बनाने के लिए कई नए प्रोजेक्ट शुरू हो गये हैं। इनमें गंगा एक्सप्रेसवे के साथ ही चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे, विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे (मुजफ्फरनगर के रास्ते) और चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश का सड़क नेटवर्क न केवल और मजबूत होगा बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार 2004-05 में उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 5,599 किलोमीटर था, जो 2023-24 तक बढ़कर 12,292 किलोमीटर हो गया। इस दोगुनी से अधिक वृद्धि ने राज्य के भीतर व्यापार, माल ढुलाई और औद्योगिक विकास को नई गति दी है। इससे न केवल रसद लागत कम हुई है, बल्कि यूपी उत्तर भारत में एक रणनीतिक ट्रांजिट हब बन गया है। हवाई कनेक्टिविटी में आई क्रांति 1950 में जहां प्रदेश में एक भी हवाई अड्डा नहीं था, वहीं 2025 तक इनकी संख्या 16 (पांच निर्माणाधीन सहित) हो चुकी है। इसमें 12 घरेलू और 4 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट शामिल हैं। विशेष रूप से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आने वाले समय में एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार होगा और कार्गो तथा ट्रांजिट हब के रूप में उत्तर प्रदेश को नई पहचान देगा। विमान यात्रियों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि 2017 से पहले 17 वर्षों में हवाई यात्रियों की संख्या में 55 लाख की वृद्धि हुई थी, जबकि पिछले आठ वर्षों में यह वृद्धि 82 लाख तक पहुंच गई। 2025 में विमान यात्रियों की संख्या 1.42 करोड़ तक अनुमानित है। इस तेजी ने यूपी को विमानन क्षेत्र में नई उड़ान दी है। भविष्य की राह 2030 तक : कनेक्टिविटी का महाजाल प्रदेश में पूरब से पश्चिम की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव के बाद अब योगी सरकार 2030 तक उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी का विशाल नेटवर्क खड़ा करने की दिशा में काम कर रही है। सभी जिला मुख्यालयों को एक्सप्रेसवे से जोड़ने, नेपाल सीमा पर बहुउद्देशीय ट्रांजिट हब विकसित करने और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विश्वस्तरीय रोपवे निर्माण की योजना है। विजन 2047 : एक मंडल-एक एयरपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रमुख विजन है कि 2047 तक उत्तर प्रदेश में हर मंडल का अपना एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट हो। सभी 75 जिलों को एक्सप्रेसवे और एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही ग्रीन स्मार्ट हाईवे, एयर कार्गो हब, हेलिपोर्ट और आधुनिक एविएशन इकोसिस्टम से उत्तर प्रदेश को एक ग्लोबल कनेक्टिविटी सेंटर के रूप में स्थापित करने की योजना है।

मौसम में बदलाव: कई जिलों में गहराए बादल, आज रात से भारी बारिश का अलर्ट जारी

लखनऊ मौसम में बदलाव हुआ है। सोमवार की सुबह से धूप की बजाय बादल छाए हुए हैं। इधर कई दिनों से उमस से परेशान लोगों को मौसम से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान से शुरू हुई मानसून वापसी के बीच आगामी सप्ताह पूर्वी उत्तर प्रदेश में अच्छी वर्षा की संभावना है। सोमवार शाम तक प्रदेश के कई जिलों में बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून रविवार को राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापस चला गया है। अगले दो से तीन दिनों के दौरान राजस्थान के कुछ और हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की पश्चिमी राजस्थान से वापसी हो रही है। पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी में निम्न दाब का क्षेत्र बन रहा है। इसके मध्य भारत की ओर बढ़ने के साथ ही मानसून द्रोणी निष्प्रभावी हुई है। परिणामस्वरुप बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के उत्तर प्रदेश के पूर्वी व मध्यवर्ती भाग तक पहुंचने से वर्षा की गतिविधियों में फिर से वृद्धि होगी। रविवार को कानपुर रहा सबसे ज्यादा गर्म मौसम विभाग के अनुसार, तराई, पूर्वांचल और मध्यांचल के जिलों में आगामी सप्ताह के दौरान कहीं मध्यम तो कहीं भारी बारिश की संभावना है। इस दौरान कई जगहों पर बारिश के दौरान मेघगर्जन के भी आसार हैं। 17-18 सितंबर के दौरान राजधानी लखनऊ में भी मध्यम से तेज वर्षा होने की संभावना है। रविवार को कानपुर सबसे गर्म रहा जहां अधिकतम तापमान 37 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं दूसरे नंबर पर उरई का अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री दर्ज किया गया। सोमवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी बारिश की संभावना है, वहीं पूर्व उत्तर प्रदेश में भी कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। दो दिन बाद अच्छी बारिश के आसार  पिछले कई दिनों से उमस ने परेशान कर रखा है। माैसम विभाग ने दो दिन बाद राहत मिलने के संकेत दिए हैं। माैसम विभाग के अनुसार 17 और 18 सितंबर को राजधानी में मध्यम या तेज बारिश हो सकती है। सोमवार की शाम या रात में बूंदाबांदी की भी संभावना बन रही है। आंचलिक मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि सोमवार को राजधानी के आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। देर शाम से रात तक बादल छिटपुट बारिश कर सकते हैं। इससे तापमान में गिरावट होगी और उमस से थोड़ी राहत मिल सकती है। बुधवार एवं बृहस्पतिवार को अच्छी बारिश होने के आसार हैं। शनिवार के मुकाबले रविवार को तापमान में मामूली वृद्धि दर्ज की गई। ऐेसे में लाेग पूरे दिन उमस भरी गर्मी से परेशान रहे। आसमान में कुछ देर के लिए बादल आए तो, मगर बिना बरसे ही चले गए। रविवार को अधिकतम तापमान 35.9 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से 2.5 डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 27.4 डिग्री रहा जो सामान्य से 2.7 डिग्री अधिक रहा।  

रोड और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े स्तर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही योगी सरकार

विकसित यूपी @2047: यूपी का नया अवतार : जमीन पर रफ्तार, आकाश में विस्तार  रोड और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े स्तर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही योगी सरकार  2017 से पहले धीमी प्रगति, योगी सरकार ने दी रफ्तार – राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क दोगुना से ज्यादा बढ़ा – सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे के साथ यूपी बनेगा लॉजिस्टिक हब – 2047 तक हर मंडल को एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट देने का मुख्यमंत्री का संकल्प  – पीएमजीएसवाई से गांव-गांव तक पहुंची सड़क – जेवर एयरपोर्ट बनेगा एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश 'विकसित यूपी @2047' के विजन की ओर बढ़ते हुए परिवहन और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव का साक्षी बन रहा है। पिछले साढ़े आठ वर्षों में जिस तेजी से सड़क, एक्सप्रेसवे और एविएशन सेक्टर में प्रगति हुई है, उसने न केवल प्रदेश की रफ्तार बढ़ाई है बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश और विकास का नया केंद्र बना दिया है। 2017 से पहले की स्थिति : धीमी प्रगति, सीमित संसाधन वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सड़क और एविएशन अवसंरचना विकास की रफ्तार बेहद धीमी थी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत सड़क लंबाई 2013-14 में 51,549 किलोमीटर से बढ़कर 2016-17 में मात्र 56,846 किलोमीटर हो सकी। हवाई कनेक्टिविटी भी सीमित थी और 17 वर्षों (1999 से 2016 तक) में विमान यात्रियों की संख्या में केवल 55 लाख की वृद्धि हुई थी। प्रदेश में उस समय मात्र तीन एक्सप्रेसवे और गिने-चुने हवाई अड्डे संचालित थे। साढ़े आठ साल में बड़ा बदलाव : जमीन से आकाश तक नई उड़ान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 2017 के बाद सड़क, हवाई और जल परिवहन में समन्वित दृष्टिकोण के साथ ठोस कदम उठाए। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क लंबाई 2024-25 तक 77,425 किलोमीटर तक पहुंच गई। वहीं, एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे आगे निकलते हुए 22 एक्सप्रेसवे का जाल बिछाने के महाअभियान में जुटी हुई है। एविएशन सेक्टर में भी यूपी ने छलांग लगाई और 12 घरेलू तथा 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे संचालित हो चुके। एक्सप्रेसवे प्रदेश बना उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश अब 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' के रूप में जाना जा रहा है। 1949-50 में जहां कोई एक्सप्रेसवे नहीं था, वहीं 2016-17 तक यह संख्या केवल 3 तक पहुंच सकी थी। लेकिन 2025-26 तक यह बढ़कर 22 हो गई है, इसमें संचालित और निर्माणाधीन दोनों शामिल हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट न केवल आंतरिक कनेक्टिविटी बढ़ा रहे हैं, बल्कि लॉजिस्टिक हब के रूप में यूपी की स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। प्रमुख निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और व्यापक बनाने के लिए कई नए प्रोजेक्ट शुरू हो गये हैं। इनमें गंगा एक्सप्रेसवे के साथ ही चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे, विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे (मुजफ्फरनगर के रास्ते) और चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश का सड़क नेटवर्क न केवल और मजबूत होगा बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार 2004-05 में उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 5,599 किलोमीटर था, जो 2023-24 तक बढ़कर 12,292 किलोमीटर हो गया। इस दोगुनी से अधिक वृद्धि ने राज्य के भीतर व्यापार, माल ढुलाई और औद्योगिक विकास को नई गति दी है। इससे न केवल रसद लागत कम हुई है, बल्कि यूपी उत्तर भारत में एक रणनीतिक ट्रांजिट हब बन गया है। हवाई कनेक्टिविटी में आई क्रांति 1950 में जहां प्रदेश में एक भी हवाई अड्डा नहीं था, वहीं 2025 तक इनकी संख्या 16 (पांच निर्माणाधीन सहित) हो चुकी है। इसमें 12 घरेलू और 4 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट शामिल हैं। विशेष रूप से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आने वाले समय में एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार होगा और कार्गो तथा ट्रांजिट हब के रूप में उत्तर प्रदेश को नई पहचान देगा। विमान यात्रियों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि 2017 से पहले 17 वर्षों में हवाई यात्रियों की संख्या में 55 लाख की वृद्धि हुई थी, जबकि पिछले आठ वर्षों में यह वृद्धि 82 लाख तक पहुंच गई। 2025 में विमान यात्रियों की संख्या 1.42 करोड़ तक अनुमानित है। इस तेजी ने यूपी को विमानन क्षेत्र में नई उड़ान दी है। भविष्य की राह 2030 तक : कनेक्टिविटी का महाजाल प्रदेश में पूरब से पश्चिम की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव के बाद अब योगी सरकार 2030 तक उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी का विशाल नेटवर्क खड़ा करने की दिशा में काम कर रही है। सभी जिला मुख्यालयों को एक्सप्रेसवे से जोड़ने, नेपाल सीमा पर बहुउद्देशीय ट्रांजिट हब विकसित करने और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विश्वस्तरीय रोपवे निर्माण की योजना है। विजन 2047 : एक मंडल-एक एयरपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रमुख विजन है कि 2047 तक उत्तर प्रदेश में हर मंडल का अपना एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट हो। सभी 75 जिलों को एक्सप्रेसवे और एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही ग्रीन स्मार्ट हाईवे, एयर कार्गो हब, हेलिपोर्ट और आधुनिक एविएशन इकोसिस्टम से उत्तर प्रदेश को एक ग्लोबल कनेक्टिविटी सेंटर के रूप में स्थापित करने की योजना है।      

जौनपुर सड़क हादसा: दर्शनार्थियों की बस और ट्रेलर में भिड़ंत, चार मृत, नौ लोग घायल

जौनपुर जौनपुर जिले के लाइन बाजार थाना क्षेत्र के सीहीपुर में रविवार की रात भीषण सड़क हादसा हुआ। श्रद्धालुओं से भरी बस ट्रेलर से टकरा गई। हादसे में अब तक चार श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। जबकि नौ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी श्रद्धालु छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। कैसे हुआ हादसा छत्तीसगढ़ से 50 श्रद्धालुओं से भरी बस अयोध्या गई थी। अयोध्या दर्शन करने के बाद सभी श्रद्धालु वाराणसी श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए जा रहे थे। भोर में करीब तीन बजे बस लाइन बाजार थाना क्षेत्र के सीहीपुर में पहुंची थी। जहां ट्रेलर को ओवरटेक करने के चक्कर में बस टकरा गई। टक्कर के बाद मची चीख- पुकार हादसा इतना भीषण था कि टक्कर के बाद मौके पर चीख-  पुकार मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस से सभी श्रद्धालुओं को जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने चार श्रद्धालुओं को मृत घोषित कर दिया। जबकि अन्य श्रद्धालुओं का इलाज जारी है। क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी एसपी जौनपुर डॉक्टर कौस्तुभ के मुताबिक हादसे में चार श्रद्धालुओं की मौत हुई है। सभी छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। जबकि नौ लोग घायल हैं। जिनका इलाज किया जा रहा है। मामले की छानबीन की जा रही है।

जनता दर्शन में सीएम का सख्त रुख, बच्चों को दुलारा, मरीजों को मिली तुरंत मदद

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 'जनता दर्शन' किया। इस दौरान प्रदेश भर से आये हर पीड़ित के पास पहुंचे, शिकायतें सुनीं और समाधान का आश्वासन दिया। 'जनता दर्शन' में 50 से अधिक लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंचे। रायबरेली से आये किडनी व हर्ट के मरीज को सीएम योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के निर्देश दिए। किडनी, हृदय के मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के निर्देश 'जनता दर्शन' में रायबरेली के थाना खीरो के ग्राम बरवलिया के एक युवक भी पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र देते हुए बताया कि उनके पिता किडनी-हृदय व यूरिन की बीमारी से पीड़ित हैं। प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने में अब आर्थिक दिक्कत आ रही है। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने इलाज के लिए अस्पताल से एस्टीमेट भी मंगवाने को कहा। हर जरूरतमंद को इलाज में निरंतर आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है सरकार 'जनता दर्शन' में इलाज के लिए आर्थिक सहायता के लिए कई फरियादियों ने प्रार्थना पत्र दिया। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी से कहा कि सरकार हर जरूरतमंद मरीज को इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। आप भी अस्पताल से एस्टिमेट बनवाकर भिजवाएं। आपके इलाज के खर्च की चिंता सरकार करेगी। सरकार विगत 8 वर्ष से हर जरूरतमंद को निरंतर आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है।    नन्हे-मुन्नों को भी दुलारा, दी चॉकलेट 'जनता दर्शन' में कई फरियादियों के साथ बच्चे भी आए, जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुलार भी किया। नन्हे-मुन्नों के सिर पर हाथ फेर अपनत्व का अहसास कराया। सीएम योगी ने सभी बच्चों को चॉकलेट-टॉफी भी प्रदान की।

जनता दर्शन: प्रदेश भर से आये हर पीड़ित से मिले मुख्यमंत्री

परेशान न हों, इलाज में मदद करेगी सरकार: मुख्यमंत्री  जनता दर्शन: प्रदेश भर से आये हर पीड़ित से मिले मुख्यमंत्री सीएम योगी ने सुनीं समस्यायें और समाधान के लिए किया आश्वस्त  रायबरेली से आये किडनी-हृदय के मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने का दिया निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 'जनता दर्शन' किया। इस दौरान प्रदेश भर से आये हर पीड़ित के पास पहुंचे, शिकायतें सुनीं और समाधान का आश्वासन दिया। 'जनता दर्शन' में 50 से अधिक लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंचे। रायबरेली से आये किडनी व हर्ट के मरीज को सीएम योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के निर्देश दिए।  किडनी, हृदय के मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के निर्देश 'जनता दर्शन' में रायबरेली के थाना खीरो के ग्राम बरवलिया के एक युवक भी पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र देते हुए बताया कि उनके पिता किडनी-हृदय व यूरिन की बीमारी से पीड़ित हैं। प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने में अब आर्थिक दिक्कत आ रही है। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने इलाज के लिए अस्पताल से एस्टीमेट भी मंगवाने को कहा।  हर जरूरतमंद को इलाज में निरंतर आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है सरकार  'जनता दर्शन' में इलाज के लिए आर्थिक सहायता के लिए कई फरियादियों ने प्रार्थना पत्र दिया। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी से कहा कि सरकार हर जरूरतमंद मरीज को इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। आप भी अस्पताल से एस्टिमेट बनवाकर भिजवाएं। आपके इलाज के खर्च की चिंता सरकार करेगी। सरकार विगत 8 वर्ष से हर जरूरतमंद को निरंतर आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है।    नन्हे-मुन्नों को भी दुलारा, दी चॉकलेट  'जनता दर्शन' में कई फरियादियों के साथ बच्चे भी आए, जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुलार भी किया। नन्हे-मुन्नों के सिर पर हाथ फेर अपनत्व का अहसास कराया। सीएम योगी ने सभी बच्चों को चॉकलेट-टॉफी भी प्रदान की।     

यही है वह पावन स्थल, जहां पांडवों ने किया पितरों का तर्पण और पाया मोक्ष

हरदोई उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में स्थित हत्या हरण तीर्थ, पितृपक्ष के दौरान लोक और परलोक के बीच की दूरी को समाप्त कर देता है. यह पवित्र स्थल अनादि काल से पितरों के ऋण से मुक्ति, भटकती आत्माओं की शांति और मोक्ष के लिए जाना जाता है. रामायण और महाभारत काल से चली आ रही परंपराएं इस स्थान को और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं. पृथ्वी के मध्य में स्थित पवित्र स्थल यह तीर्थ स्थल हरदोई जिले के बेनीगंज क्षेत्र में स्थित है. कहा जाता है कि यह स्थान पृथ्वी के मध्य भाग में पड़ता है. मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान यह स्थल लोक और परलोक के बीच की दूरी को मिटा देता है. यहां किए गए कर्मकांड और पूजा-अर्चना सीधे पितरों तक पहुंचती है. यही कारण है कि पितृपक्ष में यहां श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है. हरदोई के बेनीगंज क्षेत्र में स्थित हत्याहरण तीर्थ का धार्मिक महत्व रामायण और महाभारत काल से है. वेदों के अनुसार, यह स्थान कभी भगवान शिव की तपोस्थली हुआ करता था.शिव पुराण के मुताबिक, माता पार्वती की प्यास बुझाने के लिए भगवान शिव ने सूर्य देवता से प्राप्त जल को यहां गिराकर एक कुंड का निर्माण किया था. इसी कुंड से देवी पार्वती ने जलपान किया था। महाभारत युद्ध के बाद, पांडवों ने अपने पारिवारिक जनों की हत्या के पश्चात् यहीं पर पितरों का तर्पण किया था.माना जाता है कि इस स्थान पर श्राद्ध और तर्पण करने से अतृप्त आत्माओं को शांति और मोक्ष मिलता है.इसी तरह, भगवान श्री राम ने भी अयोध्या लौटते समय ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए इस कुंड में स्नान किया था, जिसके बाद से यह स्थान मोक्ष प्रदान करने वाले तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हो गया। नैमिषारण्य से जुड़ा महत्व यह तीर्थ क्षेत्र 88 हजार ऋषियों की तपोस्थली नैमिषारण्य के नजदीक स्थित है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है. नैमिषारण्य को स्वयं वेदों और पुराणों में तप और ज्ञान का केंद्र माना गया है. इसलिए हत्या हरण का अध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व दोनों ही अत्यधिक गहरा है. पितृपक्ष में विशेष महत्व पितृपक्ष के दौरान यहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने आते हैं. मान्यता है कि यहां किए गए दान-पुण्य और स्नान से पितरों की कृपा बरसती है. स्थानीय लेखक पुनीत मिश्रा के अनुसार, यहां का वातावरण पितृपक्ष में मेले जैसा हो जाता है. कुंड के आसपास प्राचीन वृक्ष और पत्थर आज भी इस स्थल की प्राचीनता और दिव्यता का प्रमाण देते हैं.

नए युग की ओर यूपी: हाई-टेक उद्योग देंगे राज्य को विश्वस्तरीय पहचान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार 'विकसित उत्तर प्रदेश-समर्थ उत्तर प्रदेश @2047' विजन को साकार करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर रही है। इस रूपरेखा में तीन मिशन- समग्र विकास, आर्थिक नेतृत्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा तीन थीम- अर्थ शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मत है कि अगले 22 साल में उत्तर प्रदेश की ग्लोबल पहचान भविष्योन्मुखी उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किए बगैर नहीं प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए सरकार का विशेष ध्यान एआई, बायोटेक, ग्रीन एनर्जी और एग्रीटेक आधारित उद्योगों पर है। इसके साथ ही सरकार प्रदेश के 12 प्रमुख सेक्टर (कृषि, औद्योगिक विकास, आईटी व इमर्जिंग टेक, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, नगर व ग्राम्य विकास, सतत विकास, पशुधन, पर्यटन, अवस्थापना और सुरक्षा-सुशासन) के जरिए भविष्य के उद्योगों की रूपरेखा तैयार करने में जुटी हुई है। इस व्यापक खाके का आर्थिक लक्ष्य 2030 तक प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश की गिनती बीमारू और विकास की दौड़ में पिछड़े राज्य की बन चुकी थी। सुरक्षा तंत्र की कमजोरी, निवेश के लिए असुरक्षित माहौल, हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और कौशल विकास की अनुपस्थिति के कारण निवेशकों का विश्वास घटा हुआ था। पुलिस सशक्तिकरण और स्मार्ट मॉनिटरिंग का ढांचा न होने से अपराध पर नियंत्रण ढीला था। यही कारण था कि रोजगार और उद्योग दोनों ही सीमित स्तर पर ठहर गए थे। यहां तक कि अधिकांश उद्यमी अन्य राज्यों की ओर पलायन कर चुके थे। योगी सरकार ने 2017 के बाद से कानून-व्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार किए। पुलिस भर्ती और आधुनिकीकरण, स्मार्ट निगरानी नेटवर्क, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई से प्रदेश का सुरक्षा वातावरण पूरी तरह बदल गया। ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ जैसी पहलों ने सजा दर बढ़ाई और निवेशकों के लिए विश्वासपूर्ण माहौल तैयार किया। इसका सीधा असर उद्योग और व्यापार पर पड़ा और प्रदेश निवेश का सुरक्षित गढ़ बन सका। यही वजह रही कि 2023 में आयोजित यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देश-विदेश की नामचीन कंपनियों ने यूपी में 45 लाख करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रख दिया। इसमें से 15 लाख करोड़ के निवेश धरातल पर उतर भी चुके हैं। यूपी ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) नीति लागू करके नोएडा और लखनऊ जैसे शहरों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का नया केंद्र बनाने की पहल की है। इस नीति का उद्देश्य फॉर्च्यून 500 कंपनियों को आकर्षित करना है ताकि प्रदेश में उच्च वेतन वाली नौकरियां, आरएंडडी, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसी उच्च मूल्य सेवाएं विकसित हो सकें। राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही जमीन, टैक्स छूट और बुनियादी ढांचे की सुविधा ने घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है। प्रदेश अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), बायोटेक, अक्षय ऊर्जा, एग्रीटेक, क्वांटम, साइबर सिक्योरिटी और मेटावर्स जैसे भविष्य के उद्योगों को अपनी अर्थव्यवस्था का आधार बना रहा है। एआई से उत्पादकता बढ़ेगी, जबकि अक्षय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी में नए विनिर्माण क्लस्टर और रोजगार सृजित होंगे। बायोटेक और हेल्थ-टेक पार्क राज्य को फार्मा और मेडिकल रिसर्च का हब बनाएंगे। एग्रीटेक और वर्टिकल फार्मिंग किसानों की आय बढ़ाकर ग्रामीण समृद्धि को मजबूत करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मूल्य सेवाएं, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीटेक सुधार प्रदेश को 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएंगे। जीसीसी और आईटी-एआई हब से सेवाओं का निर्यात बढ़ेगा, रिन्यूएबल और ई-मोबिलिटी क्लस्टर से विनिर्माण व एक्सपोर्ट में तेजी आएगी और कृषि आधारित प्रोसेसिंग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बायोटेक और मेडिकल आरएंडडी से विशेषीकृत रोजगार और निर्यात अवसर खुलेंगे। योगी सरकार का यह विजन रोजगार सृजन पर केंद्रित है। प्रत्यक्ष तौर पर लाखों उच्च-वेतन नौकरियां ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और आईटी हब से मिलेंगी। वहीं, रिन्यूएबल, स्मार्ट सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन में लाखों मध्यम और निम्न-कुशल नौकरियां बनेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में एग्रीटेक और कोल्ड चेन से स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और शहरी पलायन कम होगा। स्किल-विकास योजनाएं और प्राइवेट पार्टनरशिप इस रोजगार रोडमैप को व्यवहार्य बनाएंगी। 2047 तक उत्तर प्रदेश को 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य को लगातार 16 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। इस विज़न के अंतर्गत प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में प्रदेश का योगदान लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंचेगा। यह केवल तभी संभव होगा जब निजी और सार्वजनिक निवेश, क्लस्टर-बिल्डिंग, मानव संसाधन विकास और सुरक्षित निवेश माहौल निरंतर बनाए रखा जाए।