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जनता दर्शन: प्रदेश भर से आये हर पीड़ित से मिले मुख्यमंत्री

परेशान न हों, इलाज में मदद करेगी सरकार: मुख्यमंत्री  जनता दर्शन: प्रदेश भर से आये हर पीड़ित से मिले मुख्यमंत्री सीएम योगी ने सुनीं समस्यायें और समाधान के लिए किया आश्वस्त  रायबरेली से आये किडनी-हृदय के मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने का दिया निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 'जनता दर्शन' किया। इस दौरान प्रदेश भर से आये हर पीड़ित के पास पहुंचे, शिकायतें सुनीं और समाधान का आश्वासन दिया। 'जनता दर्शन' में 50 से अधिक लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंचे। रायबरेली से आये किडनी व हर्ट के मरीज को सीएम योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के निर्देश दिए।  किडनी, हृदय के मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के निर्देश 'जनता दर्शन' में रायबरेली के थाना खीरो के ग्राम बरवलिया के एक युवक भी पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र देते हुए बताया कि उनके पिता किडनी-हृदय व यूरिन की बीमारी से पीड़ित हैं। प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने में अब आर्थिक दिक्कत आ रही है। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने इलाज के लिए अस्पताल से एस्टीमेट भी मंगवाने को कहा।  हर जरूरतमंद को इलाज में निरंतर आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है सरकार  'जनता दर्शन' में इलाज के लिए आर्थिक सहायता के लिए कई फरियादियों ने प्रार्थना पत्र दिया। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी से कहा कि सरकार हर जरूरतमंद मरीज को इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। आप भी अस्पताल से एस्टिमेट बनवाकर भिजवाएं। आपके इलाज के खर्च की चिंता सरकार करेगी। सरकार विगत 8 वर्ष से हर जरूरतमंद को निरंतर आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है।    नन्हे-मुन्नों को भी दुलारा, दी चॉकलेट  'जनता दर्शन' में कई फरियादियों के साथ बच्चे भी आए, जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुलार भी किया। नन्हे-मुन्नों के सिर पर हाथ फेर अपनत्व का अहसास कराया। सीएम योगी ने सभी बच्चों को चॉकलेट-टॉफी भी प्रदान की।     

यही है वह पावन स्थल, जहां पांडवों ने किया पितरों का तर्पण और पाया मोक्ष

हरदोई उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में स्थित हत्या हरण तीर्थ, पितृपक्ष के दौरान लोक और परलोक के बीच की दूरी को समाप्त कर देता है. यह पवित्र स्थल अनादि काल से पितरों के ऋण से मुक्ति, भटकती आत्माओं की शांति और मोक्ष के लिए जाना जाता है. रामायण और महाभारत काल से चली आ रही परंपराएं इस स्थान को और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं. पृथ्वी के मध्य में स्थित पवित्र स्थल यह तीर्थ स्थल हरदोई जिले के बेनीगंज क्षेत्र में स्थित है. कहा जाता है कि यह स्थान पृथ्वी के मध्य भाग में पड़ता है. मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान यह स्थल लोक और परलोक के बीच की दूरी को मिटा देता है. यहां किए गए कर्मकांड और पूजा-अर्चना सीधे पितरों तक पहुंचती है. यही कारण है कि पितृपक्ष में यहां श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है. हरदोई के बेनीगंज क्षेत्र में स्थित हत्याहरण तीर्थ का धार्मिक महत्व रामायण और महाभारत काल से है. वेदों के अनुसार, यह स्थान कभी भगवान शिव की तपोस्थली हुआ करता था.शिव पुराण के मुताबिक, माता पार्वती की प्यास बुझाने के लिए भगवान शिव ने सूर्य देवता से प्राप्त जल को यहां गिराकर एक कुंड का निर्माण किया था. इसी कुंड से देवी पार्वती ने जलपान किया था। महाभारत युद्ध के बाद, पांडवों ने अपने पारिवारिक जनों की हत्या के पश्चात् यहीं पर पितरों का तर्पण किया था.माना जाता है कि इस स्थान पर श्राद्ध और तर्पण करने से अतृप्त आत्माओं को शांति और मोक्ष मिलता है.इसी तरह, भगवान श्री राम ने भी अयोध्या लौटते समय ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए इस कुंड में स्नान किया था, जिसके बाद से यह स्थान मोक्ष प्रदान करने वाले तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हो गया। नैमिषारण्य से जुड़ा महत्व यह तीर्थ क्षेत्र 88 हजार ऋषियों की तपोस्थली नैमिषारण्य के नजदीक स्थित है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है. नैमिषारण्य को स्वयं वेदों और पुराणों में तप और ज्ञान का केंद्र माना गया है. इसलिए हत्या हरण का अध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व दोनों ही अत्यधिक गहरा है. पितृपक्ष में विशेष महत्व पितृपक्ष के दौरान यहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने आते हैं. मान्यता है कि यहां किए गए दान-पुण्य और स्नान से पितरों की कृपा बरसती है. स्थानीय लेखक पुनीत मिश्रा के अनुसार, यहां का वातावरण पितृपक्ष में मेले जैसा हो जाता है. कुंड के आसपास प्राचीन वृक्ष और पत्थर आज भी इस स्थल की प्राचीनता और दिव्यता का प्रमाण देते हैं.

नए युग की ओर यूपी: हाई-टेक उद्योग देंगे राज्य को विश्वस्तरीय पहचान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार 'विकसित उत्तर प्रदेश-समर्थ उत्तर प्रदेश @2047' विजन को साकार करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर रही है। इस रूपरेखा में तीन मिशन- समग्र विकास, आर्थिक नेतृत्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा तीन थीम- अर्थ शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मत है कि अगले 22 साल में उत्तर प्रदेश की ग्लोबल पहचान भविष्योन्मुखी उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किए बगैर नहीं प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए सरकार का विशेष ध्यान एआई, बायोटेक, ग्रीन एनर्जी और एग्रीटेक आधारित उद्योगों पर है। इसके साथ ही सरकार प्रदेश के 12 प्रमुख सेक्टर (कृषि, औद्योगिक विकास, आईटी व इमर्जिंग टेक, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, नगर व ग्राम्य विकास, सतत विकास, पशुधन, पर्यटन, अवस्थापना और सुरक्षा-सुशासन) के जरिए भविष्य के उद्योगों की रूपरेखा तैयार करने में जुटी हुई है। इस व्यापक खाके का आर्थिक लक्ष्य 2030 तक प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश की गिनती बीमारू और विकास की दौड़ में पिछड़े राज्य की बन चुकी थी। सुरक्षा तंत्र की कमजोरी, निवेश के लिए असुरक्षित माहौल, हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और कौशल विकास की अनुपस्थिति के कारण निवेशकों का विश्वास घटा हुआ था। पुलिस सशक्तिकरण और स्मार्ट मॉनिटरिंग का ढांचा न होने से अपराध पर नियंत्रण ढीला था। यही कारण था कि रोजगार और उद्योग दोनों ही सीमित स्तर पर ठहर गए थे। यहां तक कि अधिकांश उद्यमी अन्य राज्यों की ओर पलायन कर चुके थे। योगी सरकार ने 2017 के बाद से कानून-व्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार किए। पुलिस भर्ती और आधुनिकीकरण, स्मार्ट निगरानी नेटवर्क, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई से प्रदेश का सुरक्षा वातावरण पूरी तरह बदल गया। ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ जैसी पहलों ने सजा दर बढ़ाई और निवेशकों के लिए विश्वासपूर्ण माहौल तैयार किया। इसका सीधा असर उद्योग और व्यापार पर पड़ा और प्रदेश निवेश का सुरक्षित गढ़ बन सका। यही वजह रही कि 2023 में आयोजित यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देश-विदेश की नामचीन कंपनियों ने यूपी में 45 लाख करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रख दिया। इसमें से 15 लाख करोड़ के निवेश धरातल पर उतर भी चुके हैं। यूपी ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) नीति लागू करके नोएडा और लखनऊ जैसे शहरों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का नया केंद्र बनाने की पहल की है। इस नीति का उद्देश्य फॉर्च्यून 500 कंपनियों को आकर्षित करना है ताकि प्रदेश में उच्च वेतन वाली नौकरियां, आरएंडडी, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसी उच्च मूल्य सेवाएं विकसित हो सकें। राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही जमीन, टैक्स छूट और बुनियादी ढांचे की सुविधा ने घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है। प्रदेश अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), बायोटेक, अक्षय ऊर्जा, एग्रीटेक, क्वांटम, साइबर सिक्योरिटी और मेटावर्स जैसे भविष्य के उद्योगों को अपनी अर्थव्यवस्था का आधार बना रहा है। एआई से उत्पादकता बढ़ेगी, जबकि अक्षय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी में नए विनिर्माण क्लस्टर और रोजगार सृजित होंगे। बायोटेक और हेल्थ-टेक पार्क राज्य को फार्मा और मेडिकल रिसर्च का हब बनाएंगे। एग्रीटेक और वर्टिकल फार्मिंग किसानों की आय बढ़ाकर ग्रामीण समृद्धि को मजबूत करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मूल्य सेवाएं, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीटेक सुधार प्रदेश को 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएंगे। जीसीसी और आईटी-एआई हब से सेवाओं का निर्यात बढ़ेगा, रिन्यूएबल और ई-मोबिलिटी क्लस्टर से विनिर्माण व एक्सपोर्ट में तेजी आएगी और कृषि आधारित प्रोसेसिंग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बायोटेक और मेडिकल आरएंडडी से विशेषीकृत रोजगार और निर्यात अवसर खुलेंगे। योगी सरकार का यह विजन रोजगार सृजन पर केंद्रित है। प्रत्यक्ष तौर पर लाखों उच्च-वेतन नौकरियां ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और आईटी हब से मिलेंगी। वहीं, रिन्यूएबल, स्मार्ट सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन में लाखों मध्यम और निम्न-कुशल नौकरियां बनेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में एग्रीटेक और कोल्ड चेन से स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और शहरी पलायन कम होगा। स्किल-विकास योजनाएं और प्राइवेट पार्टनरशिप इस रोजगार रोडमैप को व्यवहार्य बनाएंगी। 2047 तक उत्तर प्रदेश को 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य को लगातार 16 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। इस विज़न के अंतर्गत प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में प्रदेश का योगदान लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंचेगा। यह केवल तभी संभव होगा जब निजी और सार्वजनिक निवेश, क्लस्टर-बिल्डिंग, मानव संसाधन विकास और सुरक्षित निवेश माहौल निरंतर बनाए रखा जाए।

वापसी के संकेत: मायावती ने दिया अशोक सिद्धार्थ को चार राज्यों का कड़ा जिम्मा

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने अपने समधी अशोक सिद्धार्थ के माफी मांगने के बाद हाल ही में पार्टी में उनकी वापसी कराई थी। अब उन्होंने अशोक सिद्धार्थ को केंद्रीय कोआर्डिनेटर बनाकर चार राज्यों का जिम्मा सौंप दिया है। अशोक सिद्धार्थ को हिमाचल, छत्तीसगढ़, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में पार्टी संगठन को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। बता दें कि इसके पहले बसपा में इस सेक्टर का काम रणधीर सिंह बेनीवाल देख रहे थे। अब उन्हें सेक्टर-चार का केंद्रीय कोऑडिनेटर बनाया गया है। अब तक सेक्टर चार का काम देख रहे डॉ.लालजी मेधांकर को अब सेक्टर पांच का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं पूर्व विधायक अतर सिंह राव को सेक्टर छह की जिम्मेदारी मिली है। इसकी जिम्मेदारी पहले पूर्व विधायक धर्मवीर सिंह के पास थी। इन बदलावों के बीच सेक्टर एक में पूर्व सांसद रामजी गौतम और सेक्टर दो में पूर्व सांसद राजाराम पहले की तरह काम करते रहेंगे। बसपा सुप्रीमो मायावती ने संगठन की दृष्टि से देश भर में छह सेक्टर बनाए हैं। हर सेक्टर में तीन-चार राज्यों को रखा गया है। सेक्टर के केंद्रीय कोऑडिनेटरों के कामों की समीक्षा राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद करेंगे। कांशीराम की पुण्यतिथि पर बडे़ कार्यक्रम की तैयारी इसके साथ ही बसपा में इन दिनों पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर बड़े कार्यक्रम की तैयारी है। इसमें कार्यकर्ताओं से ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि मायावती इस बार पंचायत चुनाव के जरिए 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों के लिए बड़ा संदेश देना चाहती हैं। कांशीराम की पुण्यतिथि नौ अक्टूबर को है। पार्टी इस दिन बड़ी भीड़ जुटाकर अपनी ताकत जुटाने की तैयारी में है। पिछले दिनों बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में तैयारियों का जायज़ा लिया था और इसे सफल बनाने के निर्देश दिया था। इस दिन बसपा लखनऊ में प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम आयोजित करने जा रही हैं। बसपा,सालों बाद इसमें अपनी ताक़त दिखाएगी। इस कार्यक्रम में मायावती के साथ आकाश आनंद भी रहेंगे।  

गंगा एक्सप्रेसवे अपडेट: 594 किलोमीटर पर गाड़ियों की रफ्तार कब बढ़ेगी?

मेरठ  मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेसवे का काम लगभग पूरा हो गया है. अमरोहा जिले के हसनपुर तहसील इलाके में गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा किया जा चुका है. फिनिशिंग का काम बाकी है, लेकिन वो भी अंतिम फेज में है. एक महीने में वाहन भी यहां दौड़ते दिखेंगे. हसनपुर तहसील इलाके में गंगा एक्सप्रेसवे पर पूरी सड़क बनकर तैयार हो गई है. लाइटिंग का काम भी किया जा चुका है. हसनपुर तहसील इलाके में 23.60 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण 12 अक्टूबर 2025 तक पूरा किया जाना है. गंगा एक्सप्रेसवे के ऊपर से बरसात का पानी नीचे उतारने के लिए पाइप लाइन का काम भी हो चुका है. मंगरौला में हसनपुर रहरा मार्ग के ऊपर ओवरब्रिज और टी प्वाइंट बन चुका है. टी प्वाइंट के दोनों ओर चारों जगहों पर टोल बूथ भी बन चुके हैं. गंगा पर पाइंदापुर में पुल बनाया जा चुका है. गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर है लंबा अधिकारियों ने बताया कि बारिश की वजह से फिनिशिंग काम रुका हुआ था. इस काम को अगले महीने तक खत्म कर लिया जाएगा. हालांकि सुत्रों के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे के नवंबर में चालू होने की उम्मीद जताई जा रही है. बता दें कि गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा है. एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज तक का सफर फर्राटेदार और आसान हो जाएगा. मेरठ से प्रयागराज का सफर होगा आसान मेरठ, हापुड़ और अमरोहा के लोग जो संगम में आस्था की डुबकी लगाने प्रयागराज आने की ख्वाहिश रखते हैं, उनके लिए भी प्रयागराज का सफर काफी आसान हो जाएगा. पश्चिमी यूपी के वादकारियों और अधिवक्ताओं को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचने में आसानी होगी. यहां के वादकारी सुबह हाईकोर्ट में अपने मामलों की पैरवी करके रात तक वापस आ सकेंगे.

योगी आदित्यनाथ ने रखा है उत्तर प्रदेश को 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

लखनऊ और नोएडा बनेंगे वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) हब, बड़े पैमाने पर होगा रोजगार सृजन रोजगार सृजन में एग्रीटेक और रिन्युएबल एनर्जी सेक्टर निभाएगा अहम रोल लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार 'विकसित उत्तर प्रदेश-समर्थ उत्तर प्रदेश @2047' विज़न को साकार करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर रही है। इस रूपरेखा में तीन मिशन- समग्र विकास, आर्थिक नेतृत्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा तीन थीम- अर्थ शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मत है कि अगले 22 साल में उत्तर प्रदेश की ग्लोबल पहचान भविष्योन्मुखी उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किये बगैर नहीं प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए सरकार का विशेष ध्यान एआई, बॉयोटेक, ग्रीन एनर्जी और एग्रीटेक आधारित उद्योग पर है। इसके साथ ही सरकार प्रदेश के 12 प्रमुख सेक्टर (कृषि, औद्योगिक विकास, आईटी व इमर्जिंग टेक, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, नगर व ग्राम्य विकास, सतत विकास, पशुधन, पर्यटन, अवस्थापना और सुरक्षा-सुशासन) के जरिए भविष्य के उद्योगों की रूपरेखा तैयार करने में जुटी हुई है। इस व्यापक खाके का आर्थिक लक्ष्य 2030 तक प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। 2017 से पहले की चुनौतियां 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश की गिनती बीमारू और विकास की दौड़ में पिछड़े राज्य की बन चुकी थी। सुरक्षा तंत्र की कमजोरी, निवेश के लिए असुरक्षित माहौल, हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और कौशल विकास की अनुपस्थिति के कारण निवेशकों का विश्वास घटा हुआ था। पुलिस सशक्तिकरण और स्मार्ट मॉनिटरिंग का ढांचा न होने से अपराध पर नियंत्रण ढीला था। यही कारण था कि रोजगार और उद्योग दोनों ही सीमित स्तर पर ठहर गए थे। यहां तक कि अधिकांश उद्यमी अन्य राज्यों की ओर पलायन कर चुके थे। 2017-2025 : सुशासन और सुरक्षा का नया युग योगी सरकार ने 2017 के बाद से कानून-व्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार किए। पुलिस भर्ती और आधुनिकीकरण, स्मार्ट निगरानी नेटवर्क, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई से प्रदेश का सुरक्षा वातावरण पूरी तरह बदल गया। ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ जैसी पहलों ने सजा दर बढ़ाई और निवेशकों के लिए विश्वासपूर्ण माहौल तैयार किया। इसका सीधा असर उद्योग और व्यापार पर पड़ा और प्रदेश निवेश का सुरक्षित गढ़ बन सका। यही वजह रही कि 2023 में आयोजित यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देश-विदेश की नामचीन कंपनियों ने यूपी में 45 लाख करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रख दिया। इसमें से 15 लाख करोड़ के निवेश धरातल पर उतर भी चुके हैं। 2017-2025 : ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और टेक इन्वेस्टमेंट यूपी ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) नीति लागू करके नोएडा और लखनऊ जैसे शहरों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का नया केंद्र बनाने की पहल की है। इस नीति का उद्देश्य फॉर्च्यून 500 कंपनियों को आकर्षित करना है ताकि प्रदेश में उच्च वेतन वाली नौकरियां, आरएंडडी, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसी उच्च मूल्य सेवाएं विकसित हो सकें। राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही जमीन, टैक्स छूट और बुनियादी ढांचे की सुविधा ने घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है। भविष्य के उद्योग : यूपी की नई आर्थिक धमनियां प्रदेश अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), बायोटेक, अक्षय ऊर्जा, एग्रीटेक, क्वांटम, साइबर सिक्योरिटी और मेटावर्स जैसे भविष्य के उद्योगों को अपनी अर्थव्यवस्था का आधार बना रहा है। एआई से उत्पादकता बढ़ेगी, जबकि अक्षय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी में नए विनिर्माण क्लस्टर और रोजगार सृजित होंगे। बायोटेक और हेल्थ-टेक पार्क राज्य को फार्मा और मेडिकल रिसर्च का हब बनाएंगे। एग्रीटेक और वर्टिकल फार्मिंग किसानों की आय बढ़ाकर ग्रामीण समृद्धि को मजबूत करेंगे। 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मूल्य सेवाएं, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीटेक सुधार प्रदेश को 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएंगे। जीसीसी और आईटी-एआई हब से सेवाओं का निर्यात बढ़ेगा, रिन्युएबल और ई-मोबिलिटी क्लस्टर से विनिर्माण व एक्सपोर्ट में तेजी आएगी और कृषि आधारित प्रोसेसिंग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बायोटेक और मेडिकल आरएंडडी से विशेषीकृत रोजगार और निर्यात अवसर खुलेंगे। रोजगार सृजन पर केंद्रित है सरकार का विजन योगी सरकार का यह विजन रोजगार सृजन पर केंद्रित है। प्रत्यक्ष तौर पर लाखों उच्च-वेतन नौकरियां ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और आईटी हब से मिलेंगी। वहीं, रिन्युएबल, स्मार्ट सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन में लाखों मध्यम और निम्न-कुशल नौकरियां बनेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में एग्रीटेक और कोल्ड चेन से स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और शहरी पलायन कम होगा। स्किल-विकास योजनाएं और प्राइवेट पार्टनरशिप इस रोजगार रोडमैप को व्यवहार्य बनाएंगी। 2047 तक उत्तर प्रदेश को 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य को लगातार 16% वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। इस विज़न के अंतर्गत प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में प्रदेश का योगदान लगभग 20% तक पहुंचेगा। यह केवल तभी संभव होगा जब निजी और सार्वजनिक निवेश, क्लस्टर-बिल्डिंग, मानव संसाधन विकास और सुरक्षित निवेश माहौल निरंतर बनाए रखा जाए।

सर्वोदय विद्यालयों व छात्रावासों में शुरू हुआ श्रमदान अभियान

अनुशासन, सहयोग और जिम्मेदारी की सीख देंगे श्रमदान कार्यक्रम सदनवार जिम्मेदारी से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा और स्वच्छता की ललक बागवानी से विद्यालयों में खिलेगी हरियाली और पर्यावरण चेतना डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए QR कोड से अपलोड होंगी तस्वीरें लखनऊ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को नई गति देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक और अभिनव कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के निर्देश पर प्रदेश के सभी जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों और राजकीय छात्रावासों में प्रत्येक रविवार श्रमदान कार्यक्रम शुरू हो गया है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, सहयोग और श्रम के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। परिसर की साफ-सफाई और मरम्मत कार्य श्रमदान कार्यक्रम के तहत प्रत्येक रविवार को विद्यालय और छात्रावास परिसर की साफ-सफाई की जाएगी। टूटी हुई कुर्सियाँ, मेज और अन्य फर्नीचर की मरम्मत, पानी की टंकियों व नालियों की सफाई तथा कचरा निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आवश्यक उपकरण—झाड़ू, फावड़े, बाल्टी, तसला और कूड़ेदान—की व्यवस्था पहले से कर दी गई है। बागवानी से हरियाली को बढ़ावा बागवानी पर जोर देते हुए पेड़-पौधों की निराई-गुड़ाई, नए पौधों का रोपण और सूखे पत्तों व टहनियों से खाद बनाने का कार्य भी किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना मजबूत होगी। सदनवार जिम्मेदारी और डिजिटल मॉनिटरिंग विद्यालयों को सदनों में बाँटकर श्रमदान की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इससे विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना जागेगी और परिसर को सुंदर बनाने की प्रेरणा मिलेगी। श्रमदान कार्य की पहले और बाद की तस्वीरें निर्धारित प्रारूप में QR कोड के माध्यम से अपलोड की जाएंगी, जिससे निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।  

केशव मौर्य ने राहुल गांधी के दौरे पर लगाई कटाक्ष की झड़ी, कहा – ‘पटाखा ही सही था’

लखनऊ  राहुल गांधी के रायबरेली दौर को लेकर उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, शुरुआत में राहुल गांधी को हाइड्रोजन बम के स्थान पर छोटा-मोटा पटाखा देना चाहिए था। राहुल गांधी के रायबरेली दौरे के दौरान दिए गए बयान को लेकर रविवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा, कांग्रेस को अपने मनमौजी नेता राहुल गांधी के हाथों में सीधे एटम बम या हाइड्रोजन बम नहीं थमाना चाहिए था। शुरुआत में उन्हें कोई छोटा-मोटा पटाखा देना चाहिए था। गौरतलब है कि बीते गुरुवार को अपने रायबरेली दौरे के दौरान राहुल गांधी ने मीडिया को बयान दिया था कि भाजपा के लोग बहुत आंदोलित हो रहे हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि जब हाइड्रोजन बम आएगा तो सब साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में वोट चोरी करके सरकारें बनाई जा रही हैं। इस दौरान राहुल गांधी ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक के चुनाव में वोट चोरी हुई है। हमने ब्लैक एंड व्हाइट सबूत दिए हैं। इंतजार कीजिए बहुत जल्द वोट चोरी के और खुलासे आने वाले हैं। भाजपा वाले परेशान न हों, वोट चोरी का हाइड्रोजन बम आने वाला है। सारा सब कुछ साफ हो जाएगा। वोट चोरी का आरोप लगाने के बाद से ही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इसको लेकर लगातार भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साध रहे हैं। बिहार में वोटर अधिकार यात्रा के दौरान भी उन्होंने वोट चोर-गद्दी छोड़ के नारे लगवाए।  

17 सितंबर से दो अक्टूबर तक विभाग चलाएगा विशेष स्वच्छता अभियान

शासन स्तर पर नोडल अधिकारी बने सचिव पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन वन विभाग ने विभाग स्तर पर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (परियोजना)  को नामित किया नोडल अधिकारी   जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में कराए जाएंगे आयोजन,  बाघ मित्र, सारस मित्र, वेटैंलड मित्र आदि भी कार्यक्रम में होंगे शामिल लखनऊ, 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक चलने वाले सेवा पर्व को वन विभाग 'स्वच्छ उत्सव' के रूप में भी मनाएगा। इस दौरान स्वच्छता अभियान, सिंगल यूज प्लास्टिक विरोधी अभियान, पक्षी अभयारण्यों में खर-पतवारों की सफाई के लिए भी आयोजन किया जाएगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के संरक्षण आदि विषयों पर जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने इस संबंध में मुख्यालय व जनपद स्तर पर सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। वहीं अभियान की देखरेख के लिए शासन व विभाग स्तर पर नोडल अधिकारी को भी नामित किया गया है। शासन स्तर पर सचिव वन-पर्यावरण को बनाया नोडल अधिकारी 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक होने वाले सेवा पर्व के समन्वय व निगरानी के लिए शासन स्तर पर उप्र के पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशांत शर्मा को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। वहीं वन विभाग ने विभागीय स्तर पर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (परियोजना) रामकुमार को आयोजन की सफलता के लिए नोडल अधिकारी नामित किया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर भी होगा पौधरोपण श्री चौधरी ने बताया कि पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती (25 सितंबर) को प्रत्येक जनपद में पौधरोपण कार्यक्रम होगा। वन विभाग की ओर से आमजन, संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों को पौधा उपलब्ध कराया जाएगा। पं. उपाध्याय की जन्मदिवस पर एक घंटे का वृहद कार्यक्रम किया जाएगा। इसमें सभी विभागों, जनप्रतिनिधियों, स्कूली बच्चों, एनजीओ, रोटरी-लायंस क्लब, ग्राम पंचायत सदस्यों, शिक्षकों, उद्योगपतियों, मेडिकल एसोसिएशन आदि को भी शामिल किया जाएगा। साथ ही वन विभाग की सहयोगी संस्थाएं बाघ मित्र, सारस मित्र, वेटलैंड मित्र आदि भी इस कार्यक्रम की वाहक बनेंगी। 15 लाख पौधरोपण अभियान को भव्य बनाने को सौंपी गई जिम्मेदारी पौधरोपण महाभियान-2025 के मिशन निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि सेवा पर्व के दौरान प्रदेश में 15 लाख पौधरोपण होंगे। सेवा पर्व का शुभारंभ 17 सितंबर को होगा। इसमें सभी 34 नगर वन में कम से कम 100 पौधे रोपित किए जाएंगे। इसमें जनसहयोग, स्वयंसेवी संगठनों, स्कूलों, ईको क्लब, स्वयं सहायता समूह, सिविल सोसायटी आदि का भी सहयोग रहेगा। जिलाधिकारी, नगर विकास व अन्य विभागों से परामर्श कर स्थल का चयन किया जाएगा। नगरीय क्षेत्रों, नदी के कैचमेंट, तालाबों के किनारे आदि स्थानों पर पौधरोपण अभियान को प्राथमिकता दी जाएगी। आयोजन में महापौर, सांसद, विधायक समेत सभी जनप्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रहेगी। विभाग ने हर जनपद में नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही नवाचार पर भी जोर दिया है।

हर संडे अब स्कूलों में श्रमदान, यूपी सरकार की अनोखी योजना का पूरा प्लान

लखनऊ  स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में अनुशासन, जिम्मेदारी और एक दूसरे का सहयोग करने की भावना को जाग्रत करने के लिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने अभिनव कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के निर्देश पर प्रदेश के सभी जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों और राजकीय छात्रावासों में हर रविवार श्रमदान कार्यक्रम शुरू हो गया है। श्रमदान कार्यक्रम के तहत प्रत्येक रविवार को विद्यालय और छात्रावास परिसर की साफ-सफाई की जाएगी। टूटी हुई कुर्सियाँ, मेज और अन्य फर्नीचर की मरम्मत, पानी की टंकियों व नालियों की सफाई तथा कचरा निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आवश्यक उपकरण—झाड़ू, फावड़े, बाल्टी, तसला और कूड़ेदान—की व्यवस्था पहले से कर दी गई है। बागवानी से हरियाली को बढ़ावा बागवानी पर जोर देते हुए पेड़-पौधों की निराई-गुड़ाई, नए पौधों का रोपण और सूखे पत्तों व टहनियों से खाद बनाने का कार्य भी किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना मजबूत होगी। सदनवार जिम्मेदारी और डिजिटल मॉनिटरिंग विद्यालयों को सदनों में बाँटकर श्रमदान की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इससे विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना जागेगी और परिसर को सुंदर बनाने की प्रेरणा मिलेगी। श्रमदान कार्य की पहले और बाद की तस्वीरें निर्धारित प्रारूप में QR कोड के माध्यम से अपलोड की जाएंगी, जिससे निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।