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अब्बास अंसारी की विधायकी बहाल होने की संभावना, राजनीतिक हलचल तेज

 प्रयागराज मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अब्बास अंसारी की विधायकी बहाल हो सकती है। उत्तर प्रदेश की की मऊ सदर सीट पर अब उपचुनाव नहीं होगा। हेट स्पीच मामले में एमपी एमएलए कोर्ट मऊ के फैसले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। आपको बता दें कि हेट स्पीच मामले में एमपी एमएलए कोर्ट मऊ की ओर से सुनाई गई दो साल की सजा पर रोक की मांग करते हुए दाखिल क्रिमिनल रिवीजन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के चलते अब्बास अंसारी की विधायकी अब बहाल हो जाएगी। तीन मार्च 2022 को दर्ज हुआ मुकदमा नफरती भाषण और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में अभियोजन के अनुसार एसआई गंगाराम बिंद की तहरीर पर शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई। इसमें सदर विधायक अब्बास अंसारी और अन्य को आरोपी बनाया गया। आरोप था कि तीन मार्च 22 को विधानसभा चुनाव के दौरान सदर विधानसभा सीट से सुभासपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे अब्बास अंसारी ने नगर क्षेत्र के पहाड़पुर मैदान में जनसभा के दौरान कहा कि जनपद मऊ के प्रशासन को चुनाव के बाद रोक कर हिसाब किताब करने व इसके बाद सबक सिखाने की धमकी मंच से दी गई थी। यह है पूरा मामला विधानसभा चुनाव-2022 के अब्बास अंसारी पर सपा की सरकार बनने पर राज्य अधिकारियों को परिणाम भुगतने की धमकी देने और दो समुदायों में वैमनस्यता फैलाने का आरोप लगा था। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया। एमपी/एमएलए कोर्ट ने अब्बास अंसारी को विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी देने के अपराध का दोषी करार देते हुए दो साल कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ अब्बास अंसारी ने विशेष अपर सत्र न्यायाधीश के समक्ष सजा को स्थगित करने के लिए प्रार्थना दाखिल किया था जिसे पांच जुलाई को खारिज कर दिया गया। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।  

यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अखिलेश पर साधा निशाना

अखिलेश के समय आत्महत्या को मजबूर होते थे किसान, 86 लाख किसानों का योगी सरकार ने किया कर्जमाफ : कृषि मंत्री  – यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अखिलेश पर साधा निशाना – बोले- सपा सरकार में न बोआई कर पाते थे किसान, न मिलता था न्यूनतम समर्थन मूल्य  – प्रदेश में खाद-यूरिया की कोई कमी नहीं, जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वालों के खिलाफ कसा जा रहा शिकंजा : शाही  – अनियमिता पाए जाने पर अबतक 1196 फुटकर विक्रेताओं के लाइसेंस किये गये निरस्त : कृषि मंत्री  – हाई प्राइज़ और टैगिंग करने वाले 132 थोक विक्रेताओं को नोटिस, 13 के लाइसेंस सस्पेंड और 4 के रद्द : कृषि मंत्री – खाद-यूरिया की कालाबाजारी करने वाले 93 लोगों के खिलाफ दर्ज किये गये हैं मुकदमे : सूर्य प्रताप शाही  – सीमावर्ती जनपदों में बढ़ाई गई है चौकसी, खाद-यूरिया के तस्करों और माफिया को बख्शा नहीं जाएगा : कृषि मंत्री  – रबी 2025-26 सीजन के लिए इस बार 138.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य : शाही  – प्रदेश में 15 लाख 91 हजार मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के फर्टिलाइजर उपलब्ध : कृषि मंत्री – खाद वितरण में अनियमिता पाए जाने पर सीतापुर, बलरामपुर और श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारियों को किया गया है निलंबित : शाही  लखनऊ  प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने  प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को किसानों के बारे में बोलने का कोई हक नहीं है। उनके शासनकाल में किसान न तो समय से बोआई कर पाते थे और न ही उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की सुविधा मिलती थी। उस दौर में कर्ज में डूबे 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये योगी सरकार को माफ करने पड़े। यदि सपा सरकार इतनी ही किसान हितैषी थी तो किसानों को आत्महत्या क्यों करनी पड़ी। कालाबाजारी और जमाखोरी पर सरकार कस रही शिकंजा कृषि मंत्री ने साफ कहा कि प्रदेश में खाद और यूरिया की कोई कमी नहीं है। दिक्कत केवल जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वाले तत्व पैदा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 1196 फुटकर विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। 132 थोक विक्रेताओं को नोटिस, 13 को निलंबन और 4 का लाइसेंस रद्द किया गया है। 93 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। सीतापुर, बलरामपुर और श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारियों को निलंबित किया गया है। वहीं, महाराजगंज और सिद्धार्थनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग पकड़े गए हैं जिन्होंने बिना जोत के ही दर्जनों बोरी यूरिया उठा ली। मंत्री ने चेतावनी दी कि ऐसे माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों को हर हाल में मिलेगी खाद सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि राज्य सरकार हर किसान को समय से खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। फिलहाल प्रदेश में 15 लाख 91 हजार मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के फर्टिलाइजर उपलब्ध हैं। खरीफ 2024 में अब तक 32 लाख 7 हजार मीट्रिक टन खाद की बिक्री हुई है, जो पिछले साल की तुलना में साढ़े चार लाख मीट्रिक टन अधिक है। उन्होंने कहा कि 15 से ज्यादा जनपदों में 10 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया की खपत हुई है, फिर भी कहीं कमी नहीं होने दी गई। रबी सीजन के लिए सरकार ने किये हैं बड़े इंतजाम कृषि मंत्री ने बताया कि रबी 2025-26 सीजन के लिए इस बार 138.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले वर्ष 132.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुवाई हुई थी। इस बार 4 लाख हेक्टेयर का विस्तार किया जाएगा। किसानों को 10 लाख क्विंटल अनुदानित बीज उपलब्ध कराया जाएगा। गेहूं, जौ, मक्का, राई और अलसी समेत दलहन-तिलहन के बीज किसानों तक पहुंचाए जाएंगे। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग 12.80 लाख मिनी किट भी उपलब्ध कराई जाएगी। गन्ना किसानों को गन्ने के साथ ही दलहन-तिलहन की बोवाई के लिए प्रेरित किया जाएगा और उन्हें नि:शुल्क बीज उपलब्ध कराई जाएगी।  फर्टिलाइजर की मांग और सब्सिडी की दी जानकारी शाही ने कहा कि रबी सीजन के लिए 41 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 17 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 7.08 लाख मीट्रिक टन एनपी, 1.78 लाख मीट्रिक टन एसएसपी और 2 लाख मीट्रिक टन पोटाश की मांग भारत सरकार से की जाएगी। उन्होंने बताया कि यूरिया पर केंद्र सरकार 1908 रुपये प्रति बोरी तक सब्सिडी दे रही है और किसानों को मात्र 266.50 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। अगर यह सब्सिडी न हो तो यूरिया की कीमत 2200 रुपये तक पड़ती। डीएपी, एनपी, एसएसपी और पोटाश पर भी सरकार बड़ी मात्रा में सब्सिडी दे रही है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। खाद्यान उत्पादन और जीएसवीए में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कृषि मंत्री ने दावा किया कि समय से खाद, बेहतर बीज और सिंचाई सुविधाओं के कारण प्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में करीब 200 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है। इस समय यह 737 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है। गन्ना उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। किसानों की बढ़ी पैदावार का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जीएसवीए में जबरदस्त उछाल आया है, जो सपा शासन के दौरान दो लाख करोड़ रुपये था और अब बढ़कर सात लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। किसानों को किया आश्वस्त प्रेस वार्ता के अंत में सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि किसानों को किसी भी हाल में निराश नहीं होने दिया जाएगा। राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना है। सीमावर्ती जिलों में खाद की तस्करी रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने दोहराया कि असली किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वाले माफियाओं को हर हाल में सख्त कार्रवाई झेलनी पड़ेगी। पत्रकार वार्ता के दौरान राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख और कृषि विभाग के अधिकारीगण मौजूद रहे।  प्रेस वार्ता के महत्वपूर्ण बिंदु * प्रदेश में खरीफ 2024 का रकबा बढ़कर 105.93 लाख हेक्टेयर पहुंचा। * 2013-14 में खरीफ का रकबा 90.46 लाख हेक्टेयर था। * अब तक खरीफ रकबे में 15.47 … Read more

डीएम करेंगे प्रतिदिन समीक्षा, पिछड़ रहे जिलों पर रहेगा विशेष फोकस

16 सितम्बर से शुरू होगा विशेष अभियान, किसानों की 100% रजिस्ट्री का लक्ष्य डीएम करेंगे प्रतिदिन समीक्षा, पिछड़ रहे जिलों पर रहेगा विशेष फोकस किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में अब तक जनपद बिजनौर सबसे आगे  लखनऊ उत्तर प्रदेश में किसानों की फार्मर रजिस्ट्री को लेकर बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 16 सितम्बर, 2025 से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत जिलाधिकारियों को फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति पर प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि राजस्व अधिकारियों को मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) उपलब्ध कराई जाए, ताकि अधिकार अभिलेख में “मालिकों के नाम” को आधार के अनुसार सही किया जा सके।  फार्मर रजिस्ट्री में बिजनौर सबसे आगे  प्रदेश में कुल 2.88 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष अब तक 50 प्रतिशत से अधिक लगभग 1.45 करोड़ किसानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में अब तक बिजनौर जिला सबसे आगे है, जहां 58% से अधिक रजिस्ट्री पूर्ण हो चुकी है। इसके बाद हरदोई (57.84%), श्रावस्ती (57.47%), पीलीभीत (56.89%) और रामपुर (56.72%) टॉप-5 जिलों में शामिल हैं। जो किसान अभी तक रजिस्ट्री का हिस्सा नहीं हैं, उनके डाटा का फील्ड ऑफिसर्स द्वारा वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इसमें अमरोहा, आजमगढ़, बलरामपुर, एटा और जौनपुर जैसे जिलों में 100 प्रतिशत वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है। पीएम किसान योजना में 100% पंजीकरण पर जोर योगी सरकार ने जिलाधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत किसानों का 100% पंजीकरण अगली किस्त जारी होने से पहले पूरा हो। इसके साथ ही सभी जिलाधिकारियों को व्यापक आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियां चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को विशेष रूप से चेताया गया है कि पिछड़ रहे जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाए और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएं।

साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उसे तोड़ने के लिए वैश्विक समन्वय और संगठित प्रयास की आवश्यकता जताया गया जोर

चीन, पाकिस्तान जैसे देशों की 'ऑफेंसिव स्ट्रैटेजी' का डटकर मुकाबला करना बेहद जरूरी  -सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपीएसआईएफएस में जारी तीन दिनी सेमिनार के अंतिम दिन एक्सपर्ट्स ने कई प्रमुख विषयों पर पैनल डिस्कशन में लिया हिस्सा -साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उसे तोड़ने के लिए वैश्विक समन्वय और संगठित प्रयास की आवश्यकता जताया गया जोर -अपराधियों को सजा दिलाने तथा न्यायिक प्रक्रिया को सही तरीके से लागू कराने के लिए पारंपरिक तौर-तरीकों से साथ भविष्य आधारित तकनीक के प्रयोग पर हुआ मंथन -फॉरेंसिक साइंस में उन्नति, जीनोम मैपिंग, जिनियोलॉजिकल डाटाबेस निर्माण व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग जैसे विषयों और बदलते परिदश्यों को लेकर हुई सकारात्मक चर्चा लखनऊ  उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए प्रदेश के समक्ष उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कर रही है। इस दिशा में सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेस (यूपीएसआईएफएस) में जारी तीन दिवसीय सेमिनार के तीसरे व अंतिम दिन बुधवार को कई अहम विषयों पर लेकर चर्चा हुई। इसमें साइबर सुरक्षा से लेकर फॉरेंसिक साइंस की उन्नति से लेकर कई विषयों पर पैनल डिस्कशन का आयोजन हुआ जिसमें जीनोम मैपिंग, जिनियोलॉजिकल डाटाबेस निर्माण, एआई व आंत्रप्रेन्योरशिप जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।              इसी कड़ी में साइबर क्राइम को लेकर एक्सपर्ट्स ने माना कि चीन-पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की ओर से भारत की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाने की बढ़ती कोशिशों पर लगाम लगाने की जरूरत है। एक्सपर्ट्स ने माना कि चीन-पाकिस्तान की ऑफेंसिव स्ट्रैटेजी का सामना करने के लिए भारत को तेजी से सिक्योर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करनेकी जरूरत है। साइबर क्राइम की सबसे अहम कड़ी साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। वहीं, फॉरेंसिक की फील्ड में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए पीड़ितों को न्याय व सहायता दिलाने के साथ दोषियों को दंड दिलाने पर जोर दिया गया। इस दौरान भारत समेत विश्व के कई मामलों का न केवल उल्लेख किया गया बल्कि, उससे मिलने वाली सीख पर भी चर्चा की गई।         छोटा सा परिवर्तन ला सकता है बहुत बड़ा इंपैक्ट बुधवार को पैनल डिस्कशन में हिस्सा लेते हुए महाराष्ट्र के प्रमुख सचिव ब्रजेश सिंह ने साइबर खतरे व पुलिसिंग के वैश्विक परिदृश्य को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दुनिया में आज छोटा सा परिवर्तन बहुत बड़ा इंपैक्ट ला सकता है। हिज्बुल्ला पेजर अटैक इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि साइबर किल चेन रक्तबीज की तरह है। भारत का सबसे बड़े पोर्ट यानी 3 महीने के लिए जीएनपीटी का पोर्ट ऑपरेट नहीं हो पाया एक मालवेयर के कारण। यह साइबर किल चेन का उदाहरण था। साइबर क्राइम इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि लॉकबिट को तोड़ने के लिए 11 देशों की सुरक्षा एजेंसियों को साथ आकर काम करना पड़ा। यानी, साइबर क्राइम पर आकर ट्रेडिशनल पुलिसिंग के मेथड फेल हो जाते हैं। साइबर किल चेन मॉड्यूलर होता है। रेकॉन, वेपनाइजेशन, डिलीवरी व उत्पीड़न समेत 7 स्टेज इसका हिस्सा हैं।  संकट को रियल टाइम में मैप करना जरूरी ब्रजेश सिंह ने कहा कि संकट को रीयल टाइम में मैप करना जरूरी है। एक बार खतरा भांपने के बाद सबूतों को चिह्नित कर उन्हें सुरक्षित करने की जरूरत है। साइबर केसेस की भी चेन ऑफ कस्टडी भी फॉरेंसिक्स की तरह ही काम करती है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में मनी कटऑफ जरूरी हो जाता है। इसमें वॉलेट, ब्लॉकचेन, डिजिटल मनी समेत जैसी सभी तथ्यों पर कार्य करने की जरूरत है। इसके अगले चरण में क्रिमिनल इंफ्रास्ट्रक्चर को सीज करने की जरूरत है। इसके अतिरिक्त, पोटेंशियल विक्टिम को अलर्ट करने व रिस्पॉन्स मैकेनिज्म पर कार्य करने की जरूरत है और उनकी मदद की जानी चाहिए। साइबर क्राइम पीड़ितों के लिए मदद, परामर्श और न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया त्वरित होनी चाहिए। डिजिटल अरेस्ट समेत जितने भी साइबर फ्रॉड हैं उसे न केवल रोकना है बल्कि हर केस से सीख लेकर एक विस्तृत मैकेनिज्म तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने आरबीआई का साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क की तारीफ करते हुए जोर देकर कहा कि भारत में डिजिटल सॉवरेनिटी में फोकस करना होगा, इससे केस सॉल्विंग में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भी कहा कि हेल्थ डेटा कितना जरूरी है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अगर हमें पता होता कि जिन्ना को तपेदिक है तो शायद स्थिति अलग होती। साइबर सिक्योरिटी भी कृषि की तरह है, इसे बाहर से इंपोर्ट नहीं किया जा सकता है, इसे भारत में ही विकसित करना होगा।  तेजी से बदल रही है हैकिंग की प्रक्रिया ऑस्ट्रेलिया के साइबर एक्सपर्ट रॉबी अब्राहम ने वर्चुअल माध्यम से पैनल डिस्कशन में जुड़कर हैकिंग की बदलती प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले प्रोग्रामिंग, स्क्रिप्टिंग, ओएस, नेटवर्किंग प्रोटेकॉल,शेलकोड राइटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता था। उन्होंने विभिन्न मालवेयर की जानकारी देते हुए बताया कि फिलीपींस के एक स्टूडेंट ने आई लव यू वॉर्म बनाया था जिसे ईमेल से सर्कुलेट किया गया जिससे 8.7 बिलियन यूएस डॉलर का विश्व को नुकसान हुआ। इसी प्रकार, कन्फिगर वॉर्म के जरिए एक रूसी साइबर क्राइम ग्रुप ने 9 बिलियन यूएस डॉलर का नुकसान कुल 190 देशों में किया। क्रिप्टोलॉकर के पीछे रूसी साइबर क्राइम ग्रुप का हाथ होने की आशंका है जिसके जरिए 27 मिलियन बिटक्वॉइन की ग्लोबली कमाई की गई और इसको फिरौती के रूप में इस्तेमाल किया गया। पर आज के परिदृष्य में चीजें बदल चुकी हैं। उनके अनुसार, अब ई-मेल व सोशल मीडिया पर रैनसमवेयर और फिशिंगवेयर के जरिए साइबर हमले हो रहे हैं। इसके जरिए ब्राउजिंग डाटा, क्रिप्टो वॉलेट समेत कॉन्फिडेंशियल जानकारियों तक हैकर्स का एक्सेस बढ़ जाता है। अब हैकिंग के बजाए हैकर्स लॉगिंग पर फोकस करते हैं। इससे वह सिस्टम एक्सेस कर ऐसे क्रिडेंशियल्स को हासिल कर लेते हैं जो या तो सीधे तौर पर फायदा पहुंचाता है या उसे डार्क वेब पर बेच देते हैं। इसे रोकने के लिए रेगुलर सिक्योरिटी ट्रेनिंग, सभी अकाउंट को एमएफए इनेबल करना, एंटीवायरस का इस्तेमाल, ई-मेल और मैसेज के प्रति … Read more

निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट का प्रावधान

फुटवियर-लेदर नीति 2025 : निजी औद्योगिक पार्कों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट का प्रावधान 25 से 100 एकड़ तक के पार्कों को 45 करोड़ तक मिलेगी आर्थिक सहायता  100 एकड़ से बड़े औद्योगिक पार्कों को 80 करोड़ रुपए तक मिलेगा प्रोत्साहन  औद्योगिक पार्कों के जरिये हजारों युवाओं को मिलेंगे रोज़गार के अवसर  फुटवियर और लेदर सेक्टर को मिलेगी वैश्विक पहचान, यूपी बनेगा निवेश का नया केंद्र लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने फुटवियर, लेदर और नॉन लेदर क्षेत्र विकास नीति-2025 के तहत सबसे ज़्यादा फोकस निजी औद्योगिक पार्कों पर किया है। इन पार्कों को निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट दी जाएगी। सरकार ने नीति में स्पष्ट किया है कि ऐसे पार्कों को विकसित करने वाले डेवलपर्स को 25 प्रतिशत पात्र पूंजी निवेश या अधिकतम राशि के रूप में वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह मदद पार्क के आकार के अनुसार होगी।  सरकार की मंशा, रोजगार के साथ मिले वैश्विक पहचान इस नीति के जरिये सरकार चाहती है कि राज्य में बड़े पैमाने पर निजी औद्योगिक पार्कों की स्थापना हो। ऐसे पार्कों के जरिये हजारों युवाओं को रोज़गार मिलेगा। फुटवियर और लेदर सेक्टर को वैश्विक पहचान मिलेगी। यूपी निवेश का नया केंद्र बनेगा। यह नीति अधिसूचना जारी होने की तिथि से 5 साल तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत सभी नए प्रोजेक्ट, विस्तार या विविधीकरण करने वाले औद्योगिक उपक्रम वित्तीय प्रोत्साहनों के पात्र होंगे। पात्र औद्योगिक इकाइयों में कंपनी, साझेदारी, सोसाइटी, ट्रस्ट और निजी उपक्रम शामिल होंगे। कैसा होना चाहिए निजी औद्योगिक पार्क? ▪️न्यूनतम 25 एकड़ भूमि पर विकसित होना अनिवार्य। ▪️प्रत्येक पार्क में कम से कम 5 औद्योगिक इकाइयां होंगी। ▪️कोई भी इकाई 80% से अधिक भूमि का उपयोग नहीं कर सकेगी। ▪️कुल क्षेत्रफल का 25% हिस्सा हरियाली और सामान्य अवसंरचना के लिए सुरक्षित रखना होगा। ▪️25 एकड़ से 100 एकड़ तक के पार्कों का निर्माण 5 वर्षों में पूर्ण करना होगा।  ▪️100 एकड़ एवं इससे अधिक के पार्कों का निर्माण 6 वर्षों में पूर्ण करना होगा।  कितनी वित्तीय सहायता मिलेगी? ▪️25 से 100 एकड़ तक के पार्क : पात्र पूंजी निवेश का 25% या अधिकतम ₹45 करोड़। ▪️100 एकड़ से बड़े पार्क : पात्र पूंजी निवेश का 25% या अधिकतम ₹80 करोड़। ▪️सभी पार्क विकासकर्ताओं को 100% स्टाम्प शुल्क में छूट। किन मदों पर खर्च मान्य वित्तीय सहायता केवल बुनियादी ढांचा विकास पर खर्च की जा सकेगी। इसमें सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, ड्रेनेज, बाउंड्री वॉल, पावर सप्लाई, जल आपूर्ति, बैंकिंग सुविधाएं, वेयरहाउस, होटल, हॉस्पिटल, ट्रेड फेयर/डिस्प्ले सेंटर, ट्रांसपोर्ट सुविधा और स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट जैसे कार्य शामिल होंगे। किस पर नहीं मिलेगा लाभ? ▪️भूमि की खरीद लागत। ▪️ईंधन, वाहन, फर्नीचर, पुरानी मशीनरी। ▪️अन्य सेवा शुल्क।    

पति की जिद: पत्नी से रोज 3-3 घंटे वर्कआउट कराता, पूरा न करने पर रखता भूखा

गाजियाबाद गाजियाबाद से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति खिलाफ महिला थाने में गंभीर शिकायत दर्ज कराई है. महिला का आरोप है कि उसका पति उसे बॉलीवुड एक्टर नोरा फतेही जैसी दिखने और बनने के लिए मजबूर करता था. इसके लिए वह रोज़ाना तीन-तीन घंटे एक्सरसाइज करने का दबाव डालता और जिस दिन वह इतना वर्कआउट नहीं करती तो उसे भूखा रखा जाता. मुझे तो फिल्मी हिरोइन जैसी पत्नी मिल सकती थी महिला ने बताया कि उसका पति, जो कि एक सरकारी फिजिकल एजुकेशन टीचर है, अक्सर उसे ताने मारता है. पति कहता कि उसकी जिंदगी बर्बाद हो गई है क्योंकि उसे तो बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही जैसी सुंदर और आकर्षक पत्नी मिल सकती थी. शिकायत में कहा गया है कि पति न केवल इस तरह की बातें करता, बल्कि पत्नी से कहता कि वह रोज़ाना तीन घंटे वर्कआउट करे ताकि उसका शरीर बॉलीवुड एक्टर जैसा दिखे. जब महिला शारीरिक कमजोरी, थकान या स्वास्थ्य कारणों से वर्कआउट पूरा नहीं कर पाती, तो पति कई-कई दिनों तक उसे खाना तक नहीं देता. मार्च में हुई थी दोनों की शादी  शिकायतकर्ता महिला की शादी मार्च 2025 में गाजियाबाद में बड़े धूमधाम से हुई थी. उसने बताया कि शादी में गहने, लगभग 24 लाख रुपये की महिंद्रा स्कॉर्पियो, 10 लाख कैश और अन्य उपहार शामिल थे. कुल मिलाकर शादी में 76 लाख रुपये से अधिक का खर्च हुआ. इसके बावजूद, विवाह के कुछ ही समय बाद ससुराल पक्ष ने और अधिक दहेज की मांग शुरू कर दी. महिला का कहना है कि पति और उसके परिजन लगातार जमीन, कैश और महंगे सामान की मांग करते थे. जब वह इन मांगों को पूरा करने से इनकार करती, तो उसे ताने दिए जाते और शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना सहनी पड़ती. अश्लील सामग्री और विरोध पर मारपीट पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि उसका पति अक्सर दूसरी महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो देखता रहता था. जब उसने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई और उसे धमकाया गया कि अगर उसने चुप्पी नहीं साधी तो उसे घर से निकाल दिया जाएगा. महिला ने अपनी शिकायत में पति के अलावा सास, ससुर और ननद पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उसने कहा कि ससुराल पक्ष लगातार दहेज की मांग करता और गाली-गलौज करता था. मायके से कपड़े, ओवन और गहने लाने के लिए उस पर दबाव बनाया जाता. गर्भवती होने पर भी प्रताड़ना शिकायत के अनुसार, विवाह के कुछ समय बाद महिला गर्भवती हुई. इस दौरान भी उसे परेशान किया गया. आरोप है कि ससुराल पक्ष ने उसे ऐसा भोजन दिया, जिससे उसकी सेहत बिगड़ गई. जुलाई 2025 में उसे अचानक अत्यधिक रक्तस्राव और असहनीय दर्द की स्थिति में अस्पताल ले जाना पड़ा. डॉक्टरों ने जांच में पाया कि लगातार मानसिक तनाव, शारीरिक प्रताड़ना और गलत खान-पान की वजह से उसका गर्भपात हो गया. महिला ने पुलिस को बताया कि इस समय भी पति और ससुरालवालों ने उसे कोई भावनात्मक या शारीरिक सहयोग नहीं दिया. मायके जाने के बाद भी नहीं मिला चैन गर्भपात और प्रताड़ना से टूटी महिला अपने मायके चली गई. आरोप है कि वहां रहने के दौरान भी पति, सास और ननद ने वीडियो कॉल कर उसे और उसके परिवार को गालियां दीं. साथ ही तलाक की धमकी भी दी. 26 जुलाई को जब महिला अपने माता-पिता के साथ ससुराल लौटी और बातचीत करने की कोशिश की, तो उसे घर के भीतर तक घुसने नहीं दिया गया. शिकायत में यह भी दर्ज है कि तीज-त्योहार पर मायके से जो गहने दिए गए थे, उन्हें वापस करने से ससुरालवालों ने साफ इंकार कर दिया. पुलिस से न्याय की गुहार महिला ने अपनी तहरीर में पति, सास, ससुर और ननद के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, गर्भपात कराने, धमकी और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता ने पुलिस से मांग की है कि इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की जाए ताकि उसे न्याय मिल सके. क्या कहती है पुलिस महिला थाने में दर्ज हुई शिकायत की जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस का कहना है कि मामला बेहद गंभीर है और पीड़िता के आरोपों की जांच सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर की जाएगी. साथ ही मेडिकल रिपोर्ट और अस्पताल के दस्तावेज भी सबूत के तौर पर जुटाए जा रहे हैं.

चुनावी संग्राम तेज: अखिलेश ने ‘तीन तिगाड़ा’ पर साधा निशाना

लखनऊ सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन को लेकर करारा हमला बोला है. अखिलेश यादव ने तीनों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और कुछ सवाल पूछे हैं. साथ ही लोकतंत्र पर डाका डालने का आरोप भी लगाया है. खासकर जिलाधिकारी की संलिप्तता की जांच की मांग उठाई है. अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, डीएम लोगों से जनता का एक मासूम सवाल है, क्यों इतने सालों बाद आया जवाब है? जिस तरह कासगंज, बाराबंकी, जौनपुर के DM हमारे 18000 शपथपत्रों के बारे में अचानक अति सक्रिय हो गए हैं, उसने एक बात तो साबित कर दी है कि जो चुनाव आयोग कह रहा था कि ‘एफ़िडेविट की बात गलत है’ मतलब एफिडेविट नहीं मिले, उनकी वो बात झूठी निकली. अगर कोई एफिडेविट मिला ही नहीं, तो ये जिलाधिकारी लोग जवाब किस बात का दे रहे हैं. अब सतही जवाब देकर खानापूर्ति करेन वाले इन जिलाधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच होनी चाहिए. कोर्ट संज्ञान ले, चुनाव आयोग या डीएम में से कोई एक तो गलत है ही ना? आगे अखिलेश यादव ने कहा, जो सीसीटीवी पर पकड़े गये हों उनके द्वारा अपने घपलों पर दी गयी सफाई पर किसी को भी रत्ती भर विश्वास नहीं है. झूठ का गठजोड़ कितना भी ताकतवर दिखे पर आखिरकार झूठ हारता ही है, क्योंकि नकारात्मक लोगों का साझा-गोरखधंधा अपने-अपने स्वार्थों की पूर्ति करने के लिए होता है, ऐसे भ्रष्ट लोग न तो अपने ईमान के सगे होते हैं, न परिवार, न समाज के, तो फिर भला अपने साझेदारों के कैसे होंगे. ये बेईमान लोग देश और देशवासियों से ताउम्र दगा करते हैं और अंततः पकड़े जाने पर अपमान से भरी जिंदगी जीने की सजा काटते हैं. भाजपा सरकार, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत वो ‘चुनावी तीन तिगाड़ा’ हैं, जिसने सारा काम बिगाड़ा है और देश के लोकतंत्र पर डाका डाला है. अब जनता इस ’त्रिगुट’ की अदालत लगाएगी.

सड़क हादसे में दर्दनाक मौत: टक्कर के बाद धधके वाहन, चालक और क्लीनर नहीं बच सके

उन्नाव उन्नाव-हरदोई मार्ग पर बुधवार सुबह तीन बजे मौरंग लदे डंपर और केमिकल ड्रम लड़े डीसीएम में आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे के तुरंत बाद दोनों वाहनों में आग लग गई। संभल जिला निवासी डीसीएम चालक और कानपुर देहात निवासी डंपर चालक व क्लीनर जिंदा जल गए। डीसीएम के क्लीनर ने कूदकर जान बचाई। पुलिस दमकल की मदद से आग बुझाई। हादसे के कारण मार्ग तीन घंटे जाम रहा। पुलिस के मुताबिक हादसा चालक को झपकी आने से हुआ है। संभल जिला के थाना असमौली के गांव गहरे की माड़िया निवासी डीसीएम चालक महिपाल (30) अपने भांजे/क्लीनर, संभल जिले के ही फतेहपुर उनमा निवासी सोनू के साथ कानपुर जा रहा था। उन्नाव-हरदोई मार्ग पर बुधवार सुबह बांगरमऊ कोतवाली के कस्बा गंजमुरादाबाद पहुचा था तभी मुरे कंपनी मोड़ पर मौरंग लदे डंपर से आमने-सामने टक्कर हो गई। तेज टक्कर होने से दोनों वाहनों बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और आग लग गई। डीसीएम क्लीनर सोनू ने कूदकर खुद की जान बचाई, वहीं डीसीएम चालक महिपाल और कानपुर देहात जिले के थाना भोगनीपुर के गांव चोरा निवासी चालक पवन (30) और जालौन जिला निवासी क्लीनर सुमित वाहनों में ही फंस गए और तीनों की जिंदा जल गए। पीआरवी की सूचना पर अग्निशमन विभाग की टीम पहुंची और दमकल की मदद से  आग पर बुझाई। बांगरमऊ कोतवाल चंद्रकांत सिंह ने बताया कि दोनों में किसी चालक को झपकी आने यह हादसा होने का अनुमान है। मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है। क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर यातायात सामान्य कर दिया गया है।

बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट पर भड़के रामभद्राचार्य, उठाया धार्मिक समानता का सवाल

वृंदावन  प्रख्यात रामकथा वाचक और पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर को अपने नियंत्रण में लेने के कदम पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा है कि अगर मस्जिदों और चर्चों के खिलाफ ऐसा कदम नहीं उठाया जा सकता, तो मंदिरों को इससे बचना चाहिए.  मंदिर के लिए एक ट्रस्ट बनाने और बांके बिहारी कॉरिडोर विकसित करने की राज्य सरकार की योजना पर पूछे गए सवालों के जवाब में, उन्होंने कड़ी असहमति जताई. रामभद्राचार्य ने कहा- "मैं मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाने के सरकार के फैसले से सहमत नहीं हूं." आपको बता दें कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य  वृंदावन स्थित तुलसी पीठ छत्तीसगढ़ कुंज में एक सप्ताह तक श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करने पहुंचे हैं. इस दौरान उन्होंने संवाददाताओं से बात करते हुए बांके बिहारी मंदिर को लेकर यूपी सरकार के कदम से अपनी असहमति जाहिर की.  उन्होंने आगे कहा, "मुझे समझ नहीं आ रहा कि सरकार मंदिरों को अपने नियंत्रण में क्यों लेना चाहती है और उनका धन क्यों जब्त करना चाहती है, जबकि वह किसी मस्जिद या चर्च का अधिग्रहण नहीं कर सकती." मालूम हो कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता को अध्यादेश के माध्यम से ट्रस्ट की स्थापना और गलियारे के निर्माण का कारण बताया है.  रामभद्राचार्य का बयान मथुरा पहुंचे तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा- जो लोग सनातन धर्म का विरोध करेंगे, उनको लेकर हमने वचन दिया है कि उन्हें उचित और कठोरतम प्रसाद देंगे.  वहीं, धर्मांतरण के मसले पर उन्होंने कहा कि ये मामला बहुत संवेदनशील है और हमें संयम से काम लेना पड़ेगा. आज आवश्यकता है कि अपनी  कन्याओं को समझाया जाए. वह वीरांगना लक्ष्मीबाई बने. जबकि, मंदिरों के अधिग्रहण के बारे में रामभद्राचार्य ने कहा- जब मस्जिद और चर्च का अधिग्रहण नहीं हो सकता है तो मंदिर का भी अधिग्रहण नहीं होना चाहिए. हम इसका विरोध करते हैं. भगवान श्री कृष्ण जन्म स्थान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह श्री कृष्ण जन्मस्थान के मामले में भी गवाही देने आएंगे और सबको अपने उत्तर से चुप करेंगे. रामभद्राचार्य ने राम जन्म भूमि मंदिर के लिए गवाही दी थी. 

कक्षा से 20 मीटर दूर हुई हत्या: क्यों मारा आदित्य को, नाबालिगों ने बताई वजह

गाजीपुर गाजीपुर के सनबीम स्कूल महराजगंज में 10वीं के छात्र आदित्य वर्मा (15) की हत्या में नामजद दोनों छात्रों को मंगलवार को पुलिस ने पूछताछ के बाद बाल सुधार गृह भेज दिया। एएसपी सिटी ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद ने बताया कि पूछताछ में दोनों आरोपी छात्रों ने क्लास रूम से 20 मीटर दूर बाथरूम में वारदात को अंजाम देने की बात कबूल की है। जांच में सामने आया है कि यह वारदात जूनियर-सीनियर छात्रों के बीच गुटबंदी के कारण हुई है। एएसपी सिटी ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद ने बताया कि आदित्य के पिता शिवजी वर्मा ने सनबीम स्कूल के कक्षा नौ के दो छात्रों पर हत्या और स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है। एएसपी सिटी ने बताया कि दोनों छात्रों से चाकू को छिपाकर स्कूल लाने के बारे में पूछा गया था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बाथरूम जाने वाले छात्र-छात्राओं, उसके आसपास दिखे छात्रों से भी पूछताछ की। सनबीम स्कूल में छात्रों के बीच गुटबंदी अब तक की जांच में सामने आया है कि सनबीम स्कूल में छात्रों के बीच गुटबंदी है। हत्या में नामजद नाबालिग छात्र मनबढ़ हैं। बीते दिनों स्कूल में आते-जाते सीनियर छात्र आदित्य के एक साथी से जूनियर छात्र को धक्का लग गया था। पहले से खार खाए था मुख्य आरोपी और उसका नाबालिग दोस्त इसके बाद दोनों गुटों में 15 अगस्त और घटना वाले दिन भी विवाद हुआ था, जिसमें आदित्य वर्मा ने भी हस्तक्षेप किया था। पहले से खार खाए मुख्य आरोपी और उसके दूसरे नाबालिग दोस्त आदित्य को मारने के लिए चाकू स्कूल लेकर आए थे। शरीर पर चार जगह घाव एएसपी सिटी ने बताया कि पोस्टमार्टम में आदित्य के शरीर पर चार जगह घाव मिले। घाव से इस बात की पुष्टि हो रही है कि दोनों आरोपियों ने बेरहमी से आदित्य पर चाकू से वार किए थे। तीन किमी तक निकाला कैंडल मार्च सनबीम स्कूल महराजगंज के छात्र आदित्य की हत्या के बाद लोग शोक जता रहे हैं। नगर में मंगलवार को लोगों ने करीब तीन किमी तक कैंडल मार्च निकाला। देर शाम शहीद पार्क से कैंडल मार्च निकाला, जो यूसुफपुर बाजार, फाटक, फलमंडी, बैंक रोड, मशीनरी रोड, हाटा रोड़ होते हुए वापस शहीद पार्क पहुंचा। यहां शहीद स्तंभ पर कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि दी। बिना पंजीकरण चल रहा मुख्य आरोपी के पिता का अस्पताल छात्र आदित्य की हत्या में मुख्य आरोपी का पिता बिना पंजीकरण के अस्पताल चलाता है। सीएमओ कार्यालय से महज दो किमी दूर आदर्श बाजार में उसका अस्पताल है। बड़ी बात तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं है। जिले में बिना पंजीयन संचालित हो रहे अस्पताल और क्लीनिक के खिलाफ कार्रवाई का सिर्फ स्वास्थ्य विभाग आश्वासन ही देता है। सीएमओ कार्यालय के जिम्मेदार उस क्षेत्र के सरकारी अस्पताल के अधीक्षक की जिम्मेदारी की बात कहकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। कुछ वर्षों से हत्यारोपी का पिता आदर्श बाजार में निजी अस्पताल का संचालन कर रहा है। सीएमओ कार्यालय से दो किमी दूर पर है अस्पताल बोर्ड और मकान की दीवार पर क्लीनिक एंड हॉस्पिटल लिखा गया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग में अस्पताल का पंजीकरण नहीं है। इसकी जानकारी के लिए विभाग के जिम्मेदारों को रजिस्टर पलटने पड़े। सीएमओ डा. एसके पांडेय ने बताया कि अस्पताल का पंजीकरण नहीं है। जांच कर कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को जल्द ही निर्देश दिया जाएगा। स्कूल में कक्षा 9 के छात्र ने किया साथी का कत्ल गाजीपुर की शहर कोतवाली इलाके के महराजगंज स्थित सनबीम स्कूल में सोमवार को कक्षा नौ के छात्र ने फल काटने वाले चाकू से हमला कर दसवीं के छात्र आदित्य वर्मा (15) को मार डाला। चाकूबाजी में आरोपी सहित तीन छात्र घायल हो गए। सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने वारदात स्थल से चाकू बरामद किया है। जो आरोपी छात्र पानी की बोतल में छिपाकर लाया था। पुलिस के साथ ही फॉरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिए हैं। कोतवाली पुलिस के मुताबिक, 15 अगस्त को छात्रों के दो गुटों में विवाद हुआ था।