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खनिजो के अवैध परिवहन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, 02 हाइवा व 03 ट्रैक्टर ट्राली जप्त

बिलासपुर कलेक्टर बिलासपुर के निर्देशानुसार एंव उप संचालक के मार्गदर्शन मे जिला बिलासपुर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एंव भण्डारण पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।  खनिज अमला बिलासपुर द्वारा सकरी, गनियारी, तुरकाडीह, कोनी, मस्तूरी, पचपेड़ी, जोंधरा, गोपालपुर, कुकुरदिकला, भिलोनी, मानिकचौरी क्षेत्र की जाँच की गयी। जाँच के दौरान सकरी क्षेत्र में खनिज गिट्टी का परिवहन करते 1 हाइवा वाहन को जप्त किया गया। पचपेड़ी क्षेत्र में खनिज ईट मिट्टी का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली वाहन को जप्त किया गया। गोपालपुर क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली को जप्त किया गया। जोंधरा क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली वाहन को जप्त किया गया।मानिकचौरी क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली को जप्त किया गया। इस प्रकार जप्त कुल 05 वाहनों को पुलिस थाना सकरी व पचपेड़ी कि अभिरक्षा में रखा गया है। खनिजों के  अवैध उत्खनन,परिवहन, और भण्डारण पर खनिज विभाग,राजस्व विभाग व पुलिस विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है।

70 ट्रैक्टर अवैध डंप रेत जब्त, कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई

70 ट्रैक्टर अवैध डंप रेत जब्त, कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई अवैध खनन करते रंगे हाथ पकड़ाया जेसीबी और हाइवा बिलासपुर कलेक्टर  संजय अग्रवाल के सख्त निर्देशों के पालन में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ जिले में बड़ी कार्रवाई की गई। एसडीएम तखतपुर के मार्गदर्शन में आज सुबह ग्राम निरतु के घाट पर राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने दबिश दी।कार्रवाई के दौरान मौके पर अवैध रूप से रेत उत्खनन एवं परिवहन करते हुए एक जेसीबी और हाइवा को रंगे हाथों पकड़ा गया। दोनों वाहनों को तत्काल जब्त कर थाना कोनी के सुपुर्द किया गया। इस दौरान टीम ने ग्राम निरतु में अवैध रूप से डंप की गई रेत पर भी बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 70 ट्रैक्टर रेत को जब्त किया। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से अवैध खनन करने वालों में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने चेतावनी दी  है कि अवैध खनन एवं परिवहन के खिलाफ इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

कानून का कड़ा शिकंजा: बस्तर में बाल विवाह मामले में 5 आरोपी, दोनों पक्षों पर FIR

बस्तर. बस्तर जिले में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन ने पहली बार कड़ा रुख अपनाया है. नगर कोतवाली में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई. मामला जगदलपुर ब्लॉक के 21 मार्च 2026 को हुए विवाह समारोह से जुड़ा है. शुरुआत में यह सामान्य शादी लगी, लेकिन शिकायत के बाद जांच शुरू हुई. जांच में सामने आया कि वधु की उम्र 18 वर्ष से कम थी. सत्यापन के बाद बाल संरक्षण विभाग ने तत्काल कानूनी कार्रवाई की. वर और वधु पक्ष के कुल 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है. जिले में चार वर्षों में 15 मामले सामने आने की जानकारी मिली है. पहले ऐसे मामलों में समझाइश देकर छोड़ने की परंपरा रही. अब प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से समझौता नहीं होगा. 18 से कम लड़की और 21 से कम लड़के की शादी अपराध है. दोषियों को 2 साल सजा या 1 लाख जुर्माना हो सकता है. यह कार्रवाई सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

ग्रामीण कनेक्टिविटी को बूस्ट: 250 करोड़ से बनेंगी 235.45 किमी सड़कें

बस्तर. बस्तर जिले में विकास को नई गति देने वाली बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत हुई. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेस-4 के तहत 86 कार्यों की आधारशिला रखी गई. इन सड़कों की कुल लंबाई 235.45 किलोमीटर बताई गई है परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 250 करोड़ रुपये है. कार्यक्रम का प्रसारण कुम्हरावंड सभागार में किया गया. ग्रामीण अंचलों की कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर दिया गया. लोहंडीगुड़ा, दरभा, बास्तानार और तोकापाल को बड़ा लाभ मिलेगा. दशकों पुरानी आवागमन समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है. जनप्रतिनिधियों ने इसे विकास की नई लकीर बताया. स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होगी. सड़कें गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देंगी. अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ समय पर काम पूरा करने निर्देश दिए गए. बस्तर के दूरस्थ इलाकों में अब विकास की रफ्तार और तेज होगी. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नई तकनीक की एंट्री जगदलपुर. बस्तर संभाग की स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी तकनीकी सौगात मिली है. शहर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आधुनिक स्टेरलाइजर मशीन लगी है. यह सुविधा संभाग के सरकारी या निजी अस्पतालों में पहली बताई जा रही है. अब संवेदनशील उपकरणों को बाहर भेजने की जरूरत कम होगी. रायपुर या विशाखापत्तनम पर निर्भरता घटेगी. इलाज की लागत और समय दोनों में राहत मिलेगी. कैथेटर, ट्यूब, ग्लव्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित होंगे. गर्मी से खराब होने वाले उपकरण अब सुरक्षित तरीके से साफ होंगे. 250 लीटर क्षमता वाली मशीन अस्पताल में स्थापित की गई है. क्रॉस इन्फेक्शन का खतरा कम होने की उम्मीद है. आपातकालीन सर्जरी में भी तेज तैयारी संभव होगी. स्थानीय मरीजों को अब उच्च स्तरीय सुविधा घर के पास मिलेगी. यह उपलब्धि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है.

अवैध बोर खनन पर सख्ती : तुरकाडीह में कार्रवाई, बोर मशीन जब्त

अवैध बोर खनन पर सख्ती : तुरकाडीह में कार्रवाई, बोर मशीन जब्त बिलासपुर जिले के सकरी तहसील अंतर्गत ग्राम तुरकाडीह में अवैध बोर खनन की सूचना पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बोर मशीन वाहन को जब्त कर लिया। तहसीलदार सकरी, थाना प्रभारी सकरी, थाना स्टाफ, हल्का पटवारी तुरकाडीह एवं थाना कोनी की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच की गई। जांच के दौरान बोर खनन कार्य में संलग्न व्यक्ति द्वारा किसी भी प्रकार की वैध अनुमति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इस पर कलेक्टर के 06 अप्रैल 2026 के जारी आदेश के उल्लंघन के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए बोर मशीन को जब्त कर थाना कोनी के सुपुर्द किया गया। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिले में गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए 6 अप्रैल 2026 से बोर खनन पर प्रतिबंध लागू किया है। प्रशासन द्वारा इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है तथा अवैध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग में मुख्यमंत्री ने क्रिएटर्स को दी नई पहचान दिखाने की चुनौती

डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग में मुख्यमंत्री का आह्वान: क्रिएटर्स दिखाएं बदलते छत्तीसगढ़ की नई पहचान रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग में देशभर से आए कंटेंट क्रिएटर्स का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और प्रकृति का संगम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह भूमि भगवान श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या के मायके के रूप में जानी जाती है। वनवास के 14 वर्षों में से अधिकांश समय भगवान श्रीराम ने यहीं व्यतीत किया, जिसके प्रमाण आज भी प्रदेश के विभिन्न स्थलों पर मिलते हैं। उन्होंने माता शबरी की भक्ति, दंडकारण्य और अबूझमाड़ जैसे ऐतिहासिक-आध्यात्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने संत गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को याद करते हुए कहा कि सत्य और अहिंसा की यह परंपरा आज भी प्रदेश की आत्मा में समाहित है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कभी नक्सलवाद से प्रभावित रहा छत्तीसगढ़ आज तेजी से बदल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के परिणामस्वरूप प्रदेश अब नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में निर्णायक सफलता हासिल कर चुका है। उन्होंने बताया कि पहले जहां प्रदेश का बड़ा हिस्सा नक्सल प्रभावित था, वहीं अब विकास की मुख्यधारा गांव-गांव तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री ने बस्तर संभाग को प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की अपार संभावनाओं से परिपूर्ण बताते हुए कहा कि यहां के जलप्रपात, घने वन, संस्कृति और जनजातीय जीवन देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूनेस्को द्वारा बस्तर के धुड़मारास गांव को विश्व के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में शामिल किया जाना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए बस्तर और छत्तीसगढ़ की सकारात्मक छवि देश-दुनिया तक पहुंचाएं। मुख्यमंत्री साय ने उदाहरण देते हुए बताया कि बस्तर के दिव्यांग बालक मड्डा राम का वीडियो वायरल होने पर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर द्वारा उन्हें क्रिकेट किट भेजी गई—यह सोशल मीडिया की ताकत का प्रमाण है। प्रदेश में विकास कार्यों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति के तहत पिछले दो वर्षों में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। साथ ही, “छत्तीसगढ़ विजन 2047” के माध्यम से राज्य को विकसित बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “नियद नेल्ला नार योजना” के माध्यम से सड़क, बिजली, पानी, राशन, वनाधिकार पट्टा और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाएं सुदूर गांवों तक पहुंचाई गई हैं। बस्तर ओलंपिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। डिजिटल युग पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया विजन का प्रभाव आज गांव-गांव में दिखाई दे रहा है, जहां आम नागरिक भी डिजिटल भुगतान कर रहा है। उन्होंने क्रिएटर्स से इस परिवर्तन को और आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि नक्सलवाद की छाया से बाहर निकलकर उभरता नया छत्तीसगढ़ आज देश के सामने एक सकारात्मक और प्रेरक उदाहरण के रूप में स्थापित हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र को कभी केवल संघर्ष और चुनौतियों के संदर्भ में देखा जाता था, वही आज विकास, शांति और संभावनाओं की नई कहानी लिख रहा है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से अपील करते हुए कहा कि वे पूर्वाग्रहों से परे जाकर छत्तीसगढ़ को समझें और यहां हो रहे वास्तविक परिवर्तन, जनजीवन में आए सकारात्मक बदलाव, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास की नई गति को अपने मंचों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल माध्यम केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि धारणा निर्माण की सबसे प्रभावशाली शक्ति बन चुका है, ऐसे में क्रिएटर्स की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे सच्चाई और सकारात्मकता पर आधारित कंटेंट प्रस्तुत कर समाज में नई सोच और विश्वास का संचार करें। इस अवसर पर विधायक किरण सिंह देव, मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, डॉ. गुरु पासवान, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव एवं जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बंगाली नववर्ष मिलन समारोह में लिया भाग

बंगाली नववर्ष मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश के विकास में बंगाली समाज की अहम भूमिका – मुख्यमंत्री साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  मुख्यमंत्री निवास में आयोजित बंगाली समाज के नववर्ष मिलन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने समाज के सभी लोगों को बंगाली नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में बंगाली समाज का सदैव महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विशेष रूप से मत्स्य पालन एवं उन्नत कृषि के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में बंगाली समाज की बड़ी भूमिका रही है। साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं में भी समाज के लोग उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पश्चिम बंगाल की भूमि सदैव महान विभूतियों की जन्मस्थली रही है, जहां रविंद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद अपने युवाकाल में लंबे समय तक रायपुर में रहे। उनके निवास स्थल को सरकार विरासत के रूप में संरक्षित कर रही है तथा राजधानी का विमानतल उनके सम्मान में स्वामी विवेकानंद विमानतल के नाम से जाना जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में बंगाली समाज की अहम भूमिका रहेगी।  उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी इस अवसर पर बंगाली नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बंगाल का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस, मेघनाद साहा, स्वामी विवेकानंद और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी महान विभूतियों का स्मरण करते हुए इस विरासत को सहेजने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में विधायक किरण सिंह देव ने भी समाज के प्रतिनिधियों को नववर्ष की बधाई दी। इस अवसर पर अखिलेश सोनी, प्रबल प्रताप जूदेव, पूर्व न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी, प्रवीण सेन, विवेक वर्धन सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

रायपुर: यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर पर किया गया प्रदर्शन

रायपुर : यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में टिकाऊ और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उद्देश्य से हरी खाद के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में इस वर्ष 600 हेक्टेयर क्षेत्र में हरी खाद का प्रदर्शन किया जा रहा है। किसानों से अपील की गई है कि वे कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क कर हरी खाद तकनीक अपनाएं, जिससे मिट्टी की सेहत में सुधार के साथ दीर्घकालीन उत्पादकता सुनिश्चित हो सके। हरी खाद के अंतर्गत ढेंचा, सनई, मूंग, उड़द और बरसीम जैसी फसलों को खेत में उगाकर 40 से 50 दिन बाद जुताई कर मिट्टी में मिला दिया जाता है। इसके पश्चात 2 से 3 सप्ताह बाद मुख्य फसल की बुवाई की जाती है। यह प्रक्रिया मिट्टी में प्राकृतिक पोषक तत्वों की पूर्ति करती है। हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में नाइट्रोजन, पोटाश एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, साथ ही जैविक पदार्थों में वृद्धि होती है। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बेहतर होती है और भूमि भुरभुरी एवं अधिक उपजाऊ बनती है। हरी खाद अपनाने से रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, की आवश्यकता में कमी आती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हरी खाद का उपयोग कम लागत में अधिक लाभ देने वाला उपाय है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक है। राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

एमसीबी: जिला प्रशासन की त्वरित संवेदनशीलता, दिव्यांग रामकृपाल को मिली मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल

एमसीबी आज मानवीय संवेदना, त्वरित कार्रवाई और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया। जनपद भरतपुर के ग्राम कुदरा निवासी दिव्यांग रामकृपाल अगरिया (पिता हीरालाल अगरिया) के लिए यह दिन नई उम्मीद और खुशियों की सौगात लेकर आया। रामकृपाल अगरिया, जो लंबे समय से आवागमन की समस्या से जूझ रहे थे, अपनी समस्या लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। उनकी स्थिति को समझते हुए डिप्टी कलेक्टर श्रीमती इंदिरा मिश्रा ने तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए मामले पर संज्ञान लिया। उन्होंने मौके पर ही समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि हितग्राही को बिना विलंब मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जाए। प्रशासनिक सक्रियता से सुगम हुई राह डिप्टी कलेक्टर के निर्देश के बाद विभागीय अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए आवश्यक औपचारिकताओं को तेजी से पूर्ण किया और कुछ ही समय में रामकृपाल को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्रदान कर दी गई। इस त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ जनहित के कार्यों में देरी की कोई गुंजाइश नहीं रहती। रामकृपाल के चेहरे पर लौटी मुस्कान ट्राई साइकिल की चाबी हाथ में मिलते ही रामकृपाल के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। अब वे अपने दैनिक कार्यों और आजीविका के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगे। उनकी यह मुस्कान वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए एक भावुक क्षण बन गई। रामकृपाल अगरिया ने भावुक होकर कहा “मैंने सोचा नहीं था कि इतनी जल्दी मेरी समस्या का समाधान हो जाएगा। जिला प्रशासन और इंदिरा मिश्रा मैडम का मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। इस ट्राईसाइकिल से अब मेरी जिंदगी आसान हो जाएगी और मैं अपने काम खुद कर पाऊंगा।“ संवेदनशील प्रशासन का सशक्त उदाहरण जिला प्रशासन की इस त्वरित एवं मानवीय कार्यप्रणाली ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि मंशा स्पष्ट हो और व्यवस्था संवेदनशील हो, तो शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने में देर नहीं लगती। यह पहल न केवल एक दिव्यांग व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली साबित हुई है, बल्कि आमजन के बीच प्रशासन के प्रति विश्वास को भी और मजबूत करती है।

एमसीबी :प्रवासी मजदूरों को 5 किलोग्राम FTL एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी

एमसीबी जिले में प्रवासी मजदूरों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने हेतु संचालनालय, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, नवा रायपुर द्वारा 5 किलोग्राम फी ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर प्रदाय करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में कार्यरत एलपीजी वितरकों के माध्यम से पात्र मजदूरों तक योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रवासी मजदूरों को 5 किलोग्राम FTL एलपीजी सिलेंडर केवल अधिकृत वितरण केंद्रों के माध्यम से ही उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे श्रमिकों को राहत प्रदान करना है, जो अस्थायी रूप से निवास कर रहे हैं और नियमित घरेलू गैस कनेक्शन से वंचित हैं। निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य लाभार्थियों को सिलेंडर प्रदान करते समय उनसे पहचान प्रमाण (आधार कार्ड) प्राप्त किया जाएगा। साथ ही उनकी सहमति से श्रम विभाग द्वारा जारी श्रमिक पंजीयन प्रमाण पत्र की प्रति भी ली जाएगी। इन दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार गैस कनेक्शन एवं रिफिल की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहे। स्टॉक एवं वितरण पर कड़ी निगरानी एलपीजी वितरकों को निर्देशित किया गया है कि वे दैनिक स्टॉक, विक्रय तथा शेष सिलेण्डरों का नियमित अभिलेख संधारित करें। संबंधित अधिकारियों द्वारा इन अभिलेखों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा, ताकि वितरण व्यवस्था में किसी प्रकार की अनियमितता न हो। दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योजना के अंतर्गत किसी भी प्रकार के दुरुपयोग या व्यपवर्तन को गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्तियों या एजेंसियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं एलपीजी वितरकों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है, ताकि प्रवासी मजदूरों तक इस सुविधा का लाभ समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पहुंच सके।