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अक्षय तृतीया से पहले बाल विवाह पर सख्ती, डॉ. वर्णिका शर्मा के सख्त निर्देश

रायपुर.  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा दिनांक 10-04-2026 को आगामी 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया पर्व के परिप्रेक्ष्य में ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों एवं जिलों में बाल विवाह की रोकथाम संबंधी सक्रियता बढ़ाये जाने के आशय से आयोग कार्यालय में अपरान्ह 02ः00 से 05ः00 बजे तक एक वीडियो काॅन्फ्रेसिंग का आयोजन किया गया । वीडियो काॅफे्रेसिंग में आयोग की माननीय अध्यक्ष महोदया डाॅ. वर्णिका शर्मा, श्रीमती संगीता बिन्द सहायक संचालक तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सर्व जिला कार्यक्रम अधिकारी, सर्व जिला बाल संरक्षण अधिकारियों ने प्रतिभागी के रूप में भाग लिया। वीडियो काॅन्फ्रेसिंग में बाल विवाह की रोकथाम पर जिलेवार जानकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा प्राप्त हुई । डाॅ. वर्णिका शर्मा द्वारा समस्त जिलों से मुख्य बिन्दुओं यथा बाल विवाह के संबंध में मुनादी, संबंधितों को आवश्यक निर्देश पत्र जारी किये जाने, कार्यवाही हेतु टीम का गठन कर उसे सक्रिय किये जाने, बाल विवाह की रोकथाम हेतु पूर्व जागरूकता संबंधी कार्यवाही यथा बैठक, प्रचार-प्रसार की रणनीति एवं नवाचारों पर प्रतिभागियों से वीडियो काॅन्फ्रेसिंग में संवाद किया गया ।   वीडियो काॅन्फ्रेसिंग में विभिन्न जिलों के अधिकारियों द्वारा बाल विवाह संबंधी रोकथाम हेतु टीम का गठन किये जाने तथा मार्च एवं अप्रैल माह के शुरूआत में ग्राम पंचायत तथा नगरीय क्षेत्रों में बैठक का आयोजन किये जाने, प्रचार प्रसार हेतु दीवालों पर लेखन, नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल विवाह को रोके जाने पर स्थानीय प्रशासन के माध्यम से किये गये कार्यों से अवगत कराया गया।   संबंधित वीडियो काॅन्फ्रेसिंग में बाल विवाह की रोकथाम के संबंध में नवाचारों पर कांकेर जिले से ’’मेरी आवाज सुनो’’ जिसमें 17-18 वर्ष की आयु की बालिकाओं द्वारा अपने मन की बात खुलकर रखने एवं अपनी समस्याओं को व्यक्त करने के सशक्त मंच प्रदान करने संबंधी नवाचारी कैम्पेन के माध्यम से सराहनीय कार्य हो रहा है। इस नवाचार के जरिए बालिकाओं में जागरूकता एवं आत्मविश्वास बढ़ेगा जिससे वे बाल विवाह जैसी कुरीतियों के विरूद्ध आवाज उठा सकेंगी। बीजापुर जिले से ’’बीजा दूतिन’’ के माध्यम से स्वयं सेवी किशोर किशोरियों द्वारा बाल विवाह की स्थिति में संबंधित बालिका को क्या करना चाहिए ? इस संबंध में जागरूक किया जा रहा है। सुकमा जिले से स्थानीय गोंडी भाषा व जशपुर जिले से स्थानीय सादरी व कुरूख भाषा में बाल विवाह रोकने संबंधी प्रचार प्रसार की पहल को डाॅ. वर्णिका शर्मा ने काफी सराहा एवं अन्य जिलों से भी आवश्यकतानुसार बाल विवाह रोकथाम के प्रचार प्रसार में स्थानीयता का पुट डाले जाने का वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से आग्रह किया। बाल विवाह बाहुल्य जिला सूरजपुर से वर्षवार बाल विवाह के प्रकरणांे में क्रमिक रूप से कमी आना एवं गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले अंतर्गत आने वाली विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय की बालिका द्वारा स्वयं अपने बाल विवाह रोकने के लिए पूर्व सूचना दिये जाने जैसे नवाचारों पर वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से हर्ष व्यक्त किया।  अध्यक्ष महोदया द्वारा वीडियो काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से जिलों के अधिकारियों को 14 अप्रैल को आयोजित होने वाली आगामी विशेष ग्राम सभा में अनिवार्यतः बाल विवाह के रोकथाम के संबंध में पंचायत स्तरीय अमले में पुनः सक्रियता लाने के आशय से जानकारी दिये जाने हेतु निर्देश दिये । साथ ही कतिपय जिलों द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध 2006 की धारा 16 की उपधारा 3 अंतर्गत बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के कर्तव्यों को सरल भाषा में प्रसारित कराये जाने के अनुरोध को डाॅ. वर्णिका शर्मा द्वारा संज्ञान में लिया गया। अंत में प्रचार प्रसार में स्थानीय भाषा के अधिक से अधिक उपयोग, की गई कार्यवाहियों का लगातार अनुवर्तन, स्वयंसेवी युवाओं का सहयोग लिये जाने, चाइल्ड हेल्प लाईन नम्बर 1098, बाल विवाह की रोकथाम में प्रयोग किये जाने वाले प्रचार प्रसार माध्यमों को जन जन तक पहुँचा कर समाज में बाल विवाह की कुरीति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाये जाने का परामर्श दिया गया।

खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने टूर्नामेंट आवश्यक : अरुण साव

रायपुर.  उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव आज रायपुर के जोरा स्थित इंटरनेशनल टेनिस स्टेडियम में आयोजित गोंडवाना कप ऑल इंडिया टेनिस टूर्नामेंट-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने मिश्रित और एकल के विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किए। उप मुख्यमंत्री साव ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में गोंडवाना कप का आयोजन अनेक वर्षों से हो रहा है। प्रदेश में लगातार खेल प्रतियोगिताएं होने से खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलता है और अच्छे खिलाड़ी निकल कर आते हैं। टूर्नामेंट में 20 राज्यों के 120 खिलाड़ियों का भाग लेना इसकी सफलता को बताता है। साव ने कहा कि खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए खिलाड़ी टूर्नामेंट आवश्यक हैं। इसके बिना खेल और खिलाड़ी दोनों आगे नहीं बढ़ सकते। गोंडवाना कप जैसी प्रतियोगिताएं लगातार होने चाहिए।  इन विजेता खिलाड़ियों को प्रदान की ट्रॉफी महिला डबल्स के फाइनल मुकाबले में शताक्षी चौधरी और अनन्या जैन (उत्तर प्रदेश) की जोड़ी ने स्निग्धा पाटिबंडला और इरम जैदी को 3-6, 6-3, 10-7 से हराकर खिताब जीता। वहीं पुरुष डबल्स में निरव शेट्टी और अनुप बंगार्गी (महाराष्ट्र) की जोड़ी ने प्रसाद इंगाले और परितोष पवार को 6-2, 6-4 से हराया। वहीं महिला एकल में राजस्थान की आयुषी तनवार ने उत्तरप्रदेश की शताक्षी चौधरी को 2-6, 6-2, 6-2 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पुरुष एकल में तेलंगाना के नैशिक रेड्डी गनागामा ने महाराष्ट्र के प्रसाद इंगाले को 7-6 (7-4), 6-3 से हराकर विजेता बने। उप मुख्यमंत्री साव ने सभी विजेता खिलाड़ियों को ट्रॉफी प्रदान की। समापन समारोह में एआईटीए (AITA) के महासचिव अनिल धुपर, स्टेट टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष और हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी, गुरुचरण सिंह होरा, उपाध्यक्ष नरेश गुप्ता और आशीष सराफ सहित बड़ी संख्या में खिलाड़ी एवं खेलप्रेमी मौजूद थे। 24-26 अप्रैल तक खेल मंत्रियों का चिंतन शिविर साव ने बताया कि 24 अप्रैल से 26 अप्रैल तक श्रीनगर में चिंतन शिविर का आयोजन हो रहा है। इसमें सभी राज्यों के खेल मंत्री और भारत सरकार के मंत्री व अधिकारी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि 2047 में जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरा करे तो देश विकसित बने, इसके साथ ही खेल के क्षेत्र में भी भारत दुनिया में अग्रणी देश बने, इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए योजना बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में काम हो रहा है। निश्चित रूप से इस चिंतन शिविर से बड़ा लाभ होगा।

प्रकृति में जनजातीयों की अटूट आस्था, देवी-देवताओं के वास से जल जंगल का हो रहा संरक्षण व संवर्धन: मंत्री रामविचार नेताम

रायपुर.  आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि देश के लगभग सभी राज्यों में जनजातीय समुदाय के लोग निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 10 करोड़ से अधिक जनजातीय समुदाय हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीयों का जल, जंगल, जमीन, नदी-नालों और पहाड़ों में अटूट आस्था है। जनजातीय समुदाय पेड़ पौधों, नदी-नालों में देवी-देवताओं का वास मानते हैं और इन्ही संस्कृति और परंपराओं के कारण वनवासी समुदाय प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन में पहले पायदान पर है।  छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह में शामिल हुए मंत्री नेताम मंत्री नेताम ने आज नवा रायपुर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राज्य-स्तरीय संवाद सम्मेलन ’छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गहन मंथन हुआ है। इस मंथन में जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उसकी उपयोगिता नीति निर्माण और जनहित में कैसी होगी इसके लिए हमारी सरकार तत्परता के साथ काम करेगी।  मंत्री नेताम कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समुदायों के विभिन्न समस्याओं और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है। इस टास्क फोर्स की संवेदनशीलता और महत्व को देखते हुए इसकी कमान स्वयं मुख्यमंत्री संभालेंगे, जो इसके अध्यक्ष होंगे। नीतिगत निर्णयों के धरातल पर प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष कार्यान्वयन समिति भी बनाई जाएगी, जो बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी । नेताम ने कहा कि पेसा (पंचायत उपबंध अधिनियम) और एफआरए (वनाधिकार अधिनियम) के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, विशेष रूप से सीमाओं के निर्धारण (डिमार्केशन ऑफ बॉउंड्रिस) जैसी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की बात कही। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जागृत करते हुए कहा, “हम केवल इन साझा संसाधनों के उपयोगकर्ता ही नहीं, बल्कि इनके संरक्षक भी हैं, और हमारा उपभोग केवल अपनी वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित होना चाहिए”। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य राज्य भर में जनजातीय कल्याण से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और समुदायों को उनके अधिकार दिलाना है । आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि यह टास्क फोर्स विशेष रूप से पेसा और वनाधिकार अधिनियम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी विरासत में जनजातीय बोली, भाषा, समुदायिक नेतृत्व समृद्ध है। जल, जंगल, जमीन के संरक्षण व संवर्धन में इन जनजातीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति उनके ज्ञान, उनका उद्देश्य, जल जंगल से जुड़े हुए हैं। उनका रिश्ता प्रकृति से है। वे प्रकृति को मां के रूप में, देवता के रूप में पूजते हैं। उनके दैनिक क्रियाकलापों से लेकर मृत्यु तक के उत्सव प्रकृति के संरक्षण में सहायक सिद्ध होती है। प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि इन दो दिनों तक चले अधिवेशन में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के 300 से अधिक प्रतिभागियों, नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और ग्राम प्रमुखों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र राज्य की 70 लाख एकड़ ’कॉमन्स’ भूमि (जंगल, चारागाह और जल निकाय) रही, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी की जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना, धरतीआबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, नियद नेल्ला नार जैसे विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों एवं जनजातीय समुदाय के सम्पूर्ण विकास के साथ ही प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम कर रहे हैं। आगे भी सामुदायिक सहयोग से बेहतर दिशा में काम किया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी. श्रीनिवास राव ने जोर दिया कि सामुदायिक सहयोग के बिना विशाल वनों और जैव विविधता की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की वन नीतियां प्रतिबंधात्मक नहीं, बल्कि विनियामक हैं। मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने कहा कि जल संरक्षण जनजातीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने मनरेगा के माध्यम से वंचित समुदायों को जल प्रबंधन में जोड़ने पर बल दिया। रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने रेखांकित किया कि जल संरक्षण कोई ’रॉकेट साइंस’ नहीं है, बल्कि यह सदियों के अनुभव से उपजा सामुदायिक ज्ञान है। संवाद सम्मेलन में यह बात उभर कर आई कि कॉमन्स केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आधार हैं। इस अवसर पर सोनमणि बोरा ने जनजातीय लोक गीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के दस्तावेजीकरण और कॉपीराइट संरक्षण के लिए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना साझा की। सम्मेलन में नेल्सन मंडेला पुरस्कार विजेता शेर सिंह आंचला, पद्म पांडी राम मंडावी, पद्मजगेेश्वर यादव और गौर मारिया कलाकार सुलक्ष्मी सोरी, इंदु नेताम ने भी अपने अनुभव साझा किए और संसाधनों के संरक्षण की अपील की।  कार्यक्रम को सफल बनाने में अपर संचालक संजय गौड़, टीआरटीआई की संयुक्त संचालक श्रीमती गायत्री नेताम की विशेष योगदान रही। यह कार्यक्रम आदिम जाति विकास विभाग, टीआरटीआई और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी द्वारा प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स पहल के तहत संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें यूएनडीपीए आईआईटी-भिलाई, बीआरएलएफ, एक्सिस बैंक फाउंडेशन और अन्य प्रमुख संस्थान सहयोगी रहे।

धोवाताल की 60 महिलाओं ने रची आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर. बकरी और मुर्गीपालन ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का एक सशक्त और कम लागत वाला जरिया है। बिहान जैसी सरकारी योजनाओं से प्रशिक्षित होकर महिलाएं न केवल स्व-रोजगार कर रही हैं, बल्कि सालाना एक लाख से अधिक की कमाई कर परिवार की स्थिति सुदृढ़ बना रही हैं। यह व्यवसाय कम जगह में अधिक मुनाफा और पशु सखी के माध्यम से सही प्रबंधन प्रदान करती हैं। महिलाएं संगठित होकर बकरी पालन और पोल्ट्री; मुर्गीपालन के माध्यम से लखपति बन रही हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रही है। छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर जिले के वनांचल क्षेत्र का छोटा सा गांव धोवाताल आज आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की मिसाल बनकर उभर रहा है। जहां कई जगह गौठान योजनाएं निष्क्रिय पड़ी हैं, वहीं इस गांव की 60 महिलाओं ने गौठान को किराए पर लेकर उसे आजीविका के मजबूत केंद्र में बदल दिया है। करीब 150 घरों और 510 की आबादी वाले इस गांव में महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक क्रांति की शुरुआत की है। इनकी मेहनत से न केवल परिवारों की आय बढ़ी है, बल्कि गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। 5 समूह, एक लक्ष्य-आत्मनिर्भर गांव बजरंगबली समूह (बकरी पालन) – अध्यक्ष सूरजवती के नेतृत्व में फूलमती, मानमती, सोनमती, सुभद्रा, गुड़िया, कमलिया, पुष्पलता, सुमित्रा सहित सदस्य बकरी पालन कर रही हैं। सिद्धबाबा समूह (मुर्गी पालन) – अध्यक्ष कृष्णकुमारी के साथ आभा, उर्मिला, केवली, प्रेमिया, कुन बाई, गुलबिया एवं सोनकुवर मुर्गी पालन से जुड़ी हुई हैं। महिला सशक्तिकरण समूह (किराना दुकान) – अध्यक्ष इन्द्र कुंवर के नेतृत्व में फूलमतिया, संतोषी, धरम कुमारी, राजकुमारी, रूकमनी, मान कुंवर एवं सेती बाई किराना दुकान का संचालन कर रही हैं। सीता महिला समूह (बहुआयामी आजीविका) – अध्यक्ष दुरपतिया के साथ रूनिया, बसंती, लीलावती, कुशमिला, सूरजवती, चंदा एवं बिलासो बाई सुकर पालन के साथ बटेर और मछली पालन का कार्य कर रही हैं और दुर्गा महिला समूह (किराना व मनिहारी दुकान) – अध्यक्ष गीता के नेतृत्व में मानमती, कुसुम कली, रामकली, मंगलिया, सुमन, शांति, रूपा एवं चम्पाकली दुकान संचालन में जुटी हैं। सहायता को बनाया निवेश, खड़ा किया व्यवसाय महिलाओं को कलस्टर स्तर से मिली 60-60 हजार रुपये की सहायता को खर्च करने के बजाय उन्होंने इसे निवेश में बदल दिया। आज उनके उत्पाद बहरासी और चुटकी जैसे हाट-बाजारों के साथ-साथ मध्यप्रदेश तक पहुंच रही हैं। बकरी पालन के लिए 50 प्रतिशत तक सरकारी सब्सिडी प्रदान कर रही है, जिससे युवाओं को स्वरोजगार में मदद मिल रही है। गांव में ही रोजगार के अवसर इस पहल का सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि लोगोें को राजगार के लिए भटकना नहीं पडता। अब युवाओं को उनके ही गांव में राजगार मिल जा रहे हैं।  गांव के युवा प्यारेलाल, उस्मान चेरवा और रामकुमार का कहना है कि अब उन्हें रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। गांव में ही काम मिलने से आय के साथ संतुष्टि भी मिल रही है।  NRLM से मिली दिशा, बढ़ा आत्मविश्वास समूह अध्यक्ष फूलमती सिंह के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से मिली प्रेरणा और सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया। आज वे पशुपालन और दुकान संचालन के माध्यम से लगातार आय अर्जित कर रही हैं। समूह सदस्य मानमती का कहना है कि बकरी पालन अब उनकी आय का मजबूत स्रोत बन चुका है। कम लागत और कम जगह में शुरू किए जा सकने वाले इन व्यवसायों से ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। अधिकारियों ने सराहा मॉडल ग्राम सरपंच गोकुल प्रसाद परस्ते के अनुसार गौठान में संचालित गतिविधियों से गांव में आर्थिक समृद्धि आई है और रोजगार के लिए दूसरे जगह जाना रूक गया है। जनपद पंचायत भरतपुर के एडीईओ ऋषि कुमार ने बताया कि विकासखंड में हजारों समूह सक्रिय हैं, लेकिन धोवताल का मॉडल विशेष रूप से प्रेरणादायक है। एक मिसाल, जो सिखाती है धोवाताल की यह कहानी बताती है कि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है।

रायपुर में पक्का घर बनने के बाद, अब बरसात की चिंता से मुक्त हुआ जीवन

रायपुर : पक्का घर बना तो बरसात की चिंता से मुक्त हुआ जीवन रायपुर   ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री आवास योजना प्रभावी साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से न केवल लोगों को सुरक्षित आवास मिल रहा है, बल्कि उनके जीवन में स्थायित्व और सम्मान भी बढ़ रहा है। इसी परिवर्तन की एक मिसाल है ग्राम पंचायत गिरारी के निवासी श्री मदन।     गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गिरारी गांव में रहने वाले मदन पूर्व में अपने परिवार सहित कच्चे मकान में निवास करते थे। बरसात के मौसम में उनके घर की छत से पानी टपकता था, जिससे परिवार को गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ता था। हर वर्ष वर्षा ऋतु उनके लिए चिंता और असुरक्षा का कारण बन जाती थी।     वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मदन को पक्का आवास स्वीकृत हुआ। शासन से प्राप्त आर्थिक सहायता तथा स्वयं के श्रम के समन्वय से उन्होंने अपने सपनों के घर का निर्माण पूर्ण किया। आज उनका परिवार एक मजबूत, सुरक्षित और व्यवस्थित पक्के घर में निवास कर रहा है।     मदन बताते हैं कि पहले बरसात के समय घर में पानी भर जाता था और परिवार को भय बना रहता था, लेकिन अब इस समस्या से पूरी तरह राहत मिल गई है। उनका कहना है कि इस योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास और सुख-शांति का संचार किया है।     प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) इस प्रकार ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के साथ ही उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

खीरा की खेती ने बदली सुभद्रा की जिंदगी, बिहान योजना से बनीं लखपति दीदी

खीरा की खेती ने बदली सुभद्रा की जिंदगी, बिहान योजना से बनी लखपति दीदी रायपुर सुभद्रा पहले गरीबी से जूझ रही थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूह जुड़कर एवं ऋण लेकर उन्होंने खीरा की खेती शुरू की l खीरा की खेती से प्राप्त आय से आज वह 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं l          बिलासपुर जिला के कोटा के ग्राम करका की सुभद्रा ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन, समूह की शक्ति और मेहनत साथ हो, तो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता का सपना आसानी से साकार किया जा सकता है। सुभद्रा समूह से जुड़कर खीरा की खेती कर आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ अब लखपति दीदी बन चुकी हैl सुभद्रा मुख्यमन्त्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकारी योजना ने उनका जीवन बदल दिया है।     आदिवासी बहुल गांव करका की सुभद्रा आर्मी ने आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत मां सरस्वती समूह से जुड़कर खीरा की खेती को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया। शुरुआत में समूह को 15 हजार रुपये रिवाल्विंग फण्ड, 60 हजार रुपये सी आई एफ तथा 3 लाख रुपये बैंक ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहयोग ने महिलाओं को खेती के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में बड़ी मदद दी। समूह की महिलाओं ने मेहनत, लगन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए खीरा की खेती शुरू की। उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि आज वे 2 एकड़ में खेती कर लगभग 10 क्विंटल खीरा की बिक्री हर दूसरे दिन कर रही हैं। इससे उन्हें लगभग 7 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।       इस अतिरिक्त आय से समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। अब वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं l बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दे रही हैं और भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। सुभद्रा बताती हैं कि इस सफलता के पीछे समूह की बीमा सखी हबीबुन निशा का विशेष सहयोग और मार्गदर्शन रहा, जिन्होंने समय-समय पर महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता प्रदान कर ऋण सबंधी प्रक्रिया को पूरा करने में  सहायता की साथ ही खेती की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।     सुभद्रा आर्मी की मेहनत लगन और सरकारी योजनाओं की मदद से अब वह लखपति दीदी” बनने का गौरव हासिल कर चुकी है।

मातृ-शिशु स्वास्थ्य में बेहतर परिणामों हेतु दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें – श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर.  प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति, गुणवत्ता और प्रभावशीलता का समग्र आकलन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में शुक्रवार को सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियो की एक दिवसीय राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक माननीय स्वास्थ्य मंत्री के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं सेवा प्रदायगी की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जोखिम की समय पर पहचान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चिन्हित मामलों को आवश्यकता अनुसार उच्च स्तरीय शासकीय अथवा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में समय रहते रेफर किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि रेफरल प्रक्रिया के दौरान संबंधित चिकित्सक एवं अस्पताल प्रबंधन प्रसूता एवं शिशु के डिस्चार्ज तक सतत संपर्क में रहें तथा सभी आवश्यक उपचार एवं सुविधाएं सुनिश्चित करें। साथ ही, मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं प्रबंधन के लिए अग्रिम तैयारियों को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए। समीक्षा के दौरान सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया। चिकित्सकों को प्रभावी औषधियां लिखने तथा आवश्यक जांच सुविधाएं संस्थागत स्तर पर ही उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े। बैठक का संचालन करते हुए सचिव अमित कटारिया ने मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रत्येक प्रकरण की अनिवार्य रिपोर्टिंग एवं पंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित डेटा विश्लेषण के माध्यम से मृत्यु के कारणों की पहचान कर भविष्य में प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।  विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी विशेष बल दिया गया, ताकि हितग्राहियों तक समयबद्ध एवं सरल जानकारी पहुँच सके और योजनाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित हो। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के संचालक संजीव कुमार झा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक रणबीर शर्मा, महामारी नियंत्रण के संचालक डॉ. एस.के. पामभोई सहित सभी संभागों के संयुक्त संचालक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, कुष्ठ एवं टीबी उन्मूलन सहित प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की गई। समापन संबोधन में सचिव कटारिया ने कहा कि प्रदेश को टीबी एवं मलेरिया मुक्त बनाना, मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार लाना तथा प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से सेवा भावना, प्रतिबद्धता एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है।

आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की पाठशाला बने : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर.  महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तक सीमित न रखते हुए उन्हें ‘संस्कार निर्माण की पाठशाला’ के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के सर्वांगीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें दिए गए संस्कार जीवनभर उनकी सोच और व्यवहार को दिशा देते हैं। मंत्री राजवाड़े अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में राज्य शैक्षणिक अनुसंधान केंद्र के ईसीसीई के राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन एवं विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर रही थीं। बैठक में प्रदेश के 52,518 आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को संस्कारपरक शिक्षा से जोड़ने के लिए ठोस पहल करने पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि बच्चे का पहला विद्यालय उसका घर और आंगनबाड़ी होता है, इसलिए यहां दी जाने वाली शिक्षा में भारतीय जीवन मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। संस्कारपरक शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से ही बड़ों का सम्मान, सत्य बोलना, स्वच्छता, अनुशासन, प्रकृति प्रेम तथा ‘धन्यवाद’ और ‘क्षमा’ जैसे व्यवहारिक गुणों का विकास करना है। मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों में इस प्रकार की शिक्षा को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कई व्यवहारिक सुझाव दिए। उन्होंने दिन की शुरुआत प्रार्थना, योग और प्राणायाम से करने, पंचतंत्र एवं लोककथाओं के माध्यम से नैतिक शिक्षा देने, त्योहारों और महापुरुषों की जयंती के जरिए सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ाने, तथा दैनिक व्यवहार में ‘नमस्ते’, स्वच्छता और अनुशासन को शामिल करने पर बल दिया। साथ ही बच्चों में श्रम के प्रति सम्मान और प्रकृति प्रेम विकसित करने के लिए पौधारोपण एवं स्वच्छता जैसे छोटे-छोटे कार्यों को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महीने में ‘संस्कार सभा’ आयोजित कर माता-पिता को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जाए, ताकि घर और आंगनबाड़ी दोनों स्थानों पर बच्चों को समान वातावरण मिल सके। मंत्री राजवाड़े ने कहा कि इस पहल से बच्चों में आत्मविश्वास, भाषा कौशल और सामाजिक व्यवहार का विकास होगा, साथ ही कुपोषण के साथ ‘चरित्र पोषण’ भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि संस्कारित बच्चे आगे चलकर अनुशासित विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनते हैं, जिससे समाज और राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार होती है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ‘दूसरी माँ’ की भूमिका निभाते हुए बच्चों को प्रेमपूर्वक संस्कार देने का आह्वान किया। वर्तमान सामाजिक परिवेश में बढ़ती सामाजिक बुराइयों और मानवीय मूल्यों में गिरावट को देखते हुए उन्होंने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को ‘संस्कार-केन्द्र’ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

केमिकल और औद्योगिक आपदा के लिए सचेत रहने की जरूरत : राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाईज की जायेगी

रायपुर.  औद्योगिक एवं केमिकल डिजास्टर के संबंध में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारियों के लिए राज्य स्तरीय औद्योगिक आपदा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत सरकार गृह मंत्रालय राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मार्गदर्शन दिया गया। प्रशिक्षण में औद्योगिक या केमिकल आपदा के अवसर की जाने वाली सावधानियां डिजास्टर के समय की व्यापक तैयारियां पहले से करने के संबंध में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को मार्गदर्शन दिया गया।  राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नई दिल्ली के अधिकारियों ने वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जानकारी दी गई कि आगामी दिनों में छत्तीसगढ़ में केमिकल एवं औद्योगिक आपदा के संबंध में राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाईज कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें औद्योगिक या केमिकल आपदा के समय कैसे व्यापक प्रबंधन एवं सुरक्षा किया जाये। आपदा के समय आपातकालीन तैयारियां, अग्निशामक तैयारियां, आपदा के समय जन सामान्य में जागरूकता सहित विविध आपदा प्रबंधन के तौर-तरीकों और तैयारियां के संबध में व्यापक मार्गदर्शन दिया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित इस बैठक में गृह मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, एन.डी.आर.एफ., एस.डी.आर.एफ. अन्य पुलिस फोर्सेस के अधिकारी सहित उद्योग, परिवहन, स्वास्थ्य, गृह, और राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सभी जिलों के जिला आपदा प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हुये। 

श्रमिक सम्मेलन में विकास की नींव रखने वाले हाथों का सम्मान

रायपुर जगदलपुर के स्थानीय वीर सावरकर भवन में शुक्रवार को निर्माण श्रमिकों के सशक्तिकरण और उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के मार्गदर्शन में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में विकास की रीढ़ कहे जाने वाले श्रमिकों का न केवल सम्मान किया गया, बल्कि उन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। इस सम्मेलन में समूचे जिले के सुदूर अंचलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिकों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरा परिसर उनकी उत्साहजनक उपस्थिति से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद बस्तर महेश कश्यप और नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में श्रमिकों को राष्ट्र का असली निर्माता बताते हुए कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार लाना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद महेश कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रमिक केवल मजदूरी करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का आधार है। उन्होंने श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए विश्वास दिलाया कि सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है। कश्यप ने शासन द्वारा श्रमिकों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न 31 योजनाओं की जानकारी और अन्य सुरक्षा योजनाओं के लाभ पर जोर देते हुए कहा कि हर श्रमिक का पंजीकरण होना अनिवार्य है ताकि शासन की मदद उन तक बिना किसी बाधा के पहुँच सके। इस अवसर पर नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। मंच से जनप्रतिनिधियों के कर-कमलों द्वारा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत सहायता राशि के चेक वितरित किए गए, जिसे पाकर श्रमिकों के चेहरों पर संतोष और खुशी के भाव स्पष्ट नजर आए। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता मौके पर ही समाधान की रही, जहाँ श्रम विभाग द्वारा लगाए गए विशेष पंजीकरण शिविरों के माध्यम से नए श्रमिकों का तत्काल पंजीयन किया गया। श्रम पदाधिकारी भूपेंद्र नायक ने बताया कि इस मुहिम का उद्देश्य बस्तर के उन मेहनतकश लोगों को विभागीय योजनाओं के दायरे में लाना है जो अब तक जागरूकता के अभाव में लाभ से वंचित थे। इस सार्थक प्रयास से बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिक भी अब सरकार की कल्याणकारी नीतियों से सीधे जुड़ सकेंगे। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।