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अमृत मिशन 2.0 के तहत 20 एमएलडी क्षमता के टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट को मिली मंजूरी, प्रदूषण-मुक्त होगी नदी

रायपुर अमृत मिशन 2.0 के तहत 20 एमएलडी क्षमता के टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट ऊर्जाधानी कोरबा की जीवनरेखा मानी जाने वाली हसदेव नदी अब प्रदूषण के काले साये से मुक्त होकर फिर से कल-कल बहेगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘अमृत मिशन 2.0’ योजना ने कोरबा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है। छत्तीसगढ़ शासन के प्रयासों से भारत सरकार ने शहर के दूषित जल के वैज्ञानिक उपचार हेतु 165 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। सालों से शहर के 11 बड़े नालों का दूषित सीवरेज जल सीधे हसदेव नदी में मिलकर उसकी शुद्धता को प्रभावित कर रहा था। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए 20 एमएलडी क्षमता का अत्याधुनिक टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 3 करोड़ 30 लाख लीटर दूषित जल को नदी में गिरने से पहले ही रोककर अत्याधुनिक तकनीक से उपचारित किया जाएगा। इससे नदी के प्रदूषण में भारी कमी आएगी और उसका जल पुनः स्वच्छ बनेगा। परियोजना के पूर्ण होते ही कोरबा उन चुनिंदा 12 शहरों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहाँ जल शोधन की ऐसी उन्नत और वैज्ञानिक व्यवस्था उपलब्ध है। यह परियोजना केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी बनेगी। उपचारित किए गए करोड़ों लीटर पानी को बर्बाद करने के बजाय एनटीपीसी द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदा जाएगा। इससे उद्योगों को स्वच्छ जल उपलब्ध होगा, नगर निगम के राजस्व में वृद्धि होगी और भू-जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। कलेक्टर  कुणाल दुदावत ने इसे कोरबा जिले के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मानकों का पालन करते हुए नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा तैयार किए गए इस वैज्ञानिक समाधान को अब वास्तविक रूप मिलने जा रहा है। वर्तमान में निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है और जल्द ही निर्माण कार्य धरातल पर शुरू हो जाएगा। अमृत मिशन 2.0 के तहत यह प्लांट न केवल हसदेव नदी को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण की नई मिसाल भी पेश करेगा। इसके माध्यम से कोरबा औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वच्छता के क्षेत्र में भी अग्रणी बनेगा।

क्या है इस जगह का राज? छत्तीसगढ़ में ‘उछलती जमीन’ का रहस्य, कदम रखते ही महसूस होगा झटका

सरगुजा   छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित मैनपाट केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी 'रहस्यमयी धरती' के लिए भी दुनिया भर में कौतूहल का विषय बना हुआ है। 'मिनी शिमला' के नाम से मशहूर यह हिल स्टेशन विज्ञान और रोमांच का एक ऐसा संगम है, जिसे देख कर पर्यटक दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। आइए जानते हैं कहां यह रहस्यमयी जगह। जहां कदम रखते ही कांपने लगती है जमीन मैनपाट का सबसे बड़ा आकर्षण 'जलजली' पॉइंट है। यहां की जमीन आम पत्थरों या मिट्टी की तरह कठोर नहीं है। जैसे ही आप इस जमीन पर कदम रखते हैं या थोड़ा सा उछलते हैं, पूरी धरती किसी स्पंज के गद्दे की तरह हिलने लगती है। ऐसा महसूस होता है जैसे आप जमीन पर नहीं, बल्कि पानी पर तैरती किसी चादर पर खड़े हों। क्या है इस रहस्य के पीछे का विज्ञान? विशेषज्ञों के अनुसार, इसे वैज्ञानिक भाषा में 'क्वेकिंग बॉग' (Quaking Bog) कहा जाता है। जमीन के नीचे पानी का एक बड़ा सोते (Internal water body) होने और ऊपर वनस्पति व दलदली मिट्टी की एक मोटी लचीली परत होने के कारण यह 'बाउंस' करती है। हालांकि, शोधकर्ता आज भी इस गुत्थी को पूरी तरह सुलझाने में जुटे हैं कि इतनी ऊंचाई पर यह संरचना स्थायी रूप से कैसे बनी हुई है। 'मिनी शिमला' की मनमोहक वादियां समुद्र तल से लगभग 3,300 फीट की ऊंचाई पर बसा मैनपाट अपनी ठंडी जलवायु और धुंध भरी पहाड़ियों के कारण पर्यटकों की पहली पसंद है। पर्यटन के अन्य प्रमुख केंद्र:     उल्टा पानी: यहां गुरुत्वाकर्षण के नियम फेल होते नजर आते हैं, क्योंकि पानी ढलान के बजाय ऊपर की ओर बहता है।     टाइगर और फिश पॉइंट: घने जंगलों के बीच गिरते दूधिया झरने मन को शांति प्रदान करते हैं।     मेहता पॉइंट: यहाँ से सूर्यास्त और घाटियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। संस्कृति का संगम: छोटा तिब्बत मैनपाट की एक और खासियत यहां का तिब्बती समुदाय है। 1962 के आसपास यहां बड़ी संख्या में तिब्बती शरणार्थी बसे थे, जिसके बाद इसे 'मिनी तिब्बत' कहा जाने लगा। यहां के भव्य और शांत बौद्ध मठ आत्मिक शांति का अनुभव कराते हैं। स्थानीय बाजारों में तिब्बती ऊनी कपड़े और पारंपरिक व्यंजनों (जैसे मोमोज और थुपका) का स्वाद सैलानियों को खूब लुभाता है।  

मंत्री गजेन्द्र यादव ने उचित मूल्य दुकान का किया औचक निरीक्षण

रायपुर दुर्ग विधानसभा अंतर्गत गयानगर वार्ड क्रमांक 04 में आज वार्ड भ्रमण के दौरान केबिनेट मंत्री  गजेन्द्र यादव ने शासकीय उचित मूल्य की दुकान का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित हितग्राहियों से सीधे संवाद कर राशन वितरण व्यवस्था की जानकारी ली तथा उन्हें मिलने वाली राशन सामग्री के संबंध में विस्तृत चर्चा की।  निरीक्षण के दौरान मंत्री  यादव ने स्वयं हितग्राही के चावल को मापकर दुकान में उपलब्ध माप यंत्र की सटीकता की जांच की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक पात्र हितग्राही को निर्धारित मात्रा में पूर्ण एवं सही राशन प्राप्त हो। इस पहल के माध्यम से वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने एवं आम नागरिकों का विश्वास सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया। मंत्री  यादव ने हितग्राहियों को उनके अधिकारों एवं निर्धारित राशन की जानकारी देने के निर्देश भी दिए, ताकि वे स्वयं भी व्यवस्था की पारदर्शिता में सहभागी बन सकें। मंत्री  यादव ने वार्डवासियों से चर्चा करते हुए उनकी समस्याओं एवं सुझावों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, जिससे राशन वितरण व्यवस्था को और अधिक सुचारु, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसके लिए सरकार एवं प्रशासन द्वारा निरंतर निगरानी रखी जा रही है तथा जनता से संवाद स्थापित किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

वन मंत्री ने जिले को दी 17.59 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

रायपुर, वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।  वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने नारायणपुर जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान नारायणपुर को 17 करोड़ 59 लाख 57 हजार रुपए से अधिक लागत के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर जिले के विकास को नई गति प्रदान की।          वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि नालंदा परिसर के निर्माण से जिले के विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा और अबूझमाड़ सहित नारायणपुर के बच्चे भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर इंजीनियर, डॉक्टर एवं शासकीय सेवाओं में स्थान प्राप्त कर सकेंगे। नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि इस अवसर पर नेशनल हाईवे 130डी के मजबूतीकरण कार्य, नालंदा परिसर (सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन) सहित डीएमएफ और नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत स्वीकृत कुल 11 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया।            कार्यक्रम के दौरान वन मंत्री केदार कश्यप ने राष्ट्रीय परिवार सहायता राशि के 03 हितग्राहियों को 20-20 हजार रुपए का चेक, प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 अंतर्गत 25 हितग्राहियों को अनुज्ञा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। उन्होंने गढ़बेंगाल चौक से बखरूपारा मार्ग के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग 130 डी के मजबूतीकरण कार्य को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे आवागमन सुगम होगा और क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं जनप्रतिनिधियों के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी तरह टीमवर्क के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया। वन मंत्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प साकार हुआ है, जिससे अब नारायणपुर और अबूझमाड़ के विकास का मार्ग और अधिक सुगम हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों, महिलाओं, बच्चों और युवाओं सहित सभी वर्गों के विकास एवं समृद्धि के लिए सतत प्रयासरत है।           कार्यक्रम में राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, नगर पालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल, उपाध्यक्षजयप्रकाश शर्मा, संध्या पवार, गौतम एस. गोलछा, बृजमोहन देवांगन सहित पार्षदगण एवं जनप्रतिनिधिगण, पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत , वन मंडल अधिकारी, अपर कलेक्टर, एसडीएम, मुख्य नगर पालिका अधिकारी रामचंद्र यादव सहित जिला स्तरीय अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दुर्ग के प्राथमिक विद्यालय का किया निरीक्षण

रायपुर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दुर्ग के प्राथमिक विद्यालय का किया निरीक्षण छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि-विधायी मंत्री  गजेन्द्र यादव आज दुर्ग के शनिचरी बाजार स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल प्राथमिक शाला पहुँचकर विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया तथा विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर उनकी पढ़ाई, आवश्यकताओं एवं सीखने के अनुभवों की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मंत्री  यादव ने विद्यार्थियों से आत्मीय चर्चा करते हुए उन्हें नियमित रूप से अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित  किया। बच्चों द्वारा बताई गई आवश्यकताओं को शीघ्र पूर्ण करने हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। मंत्री  यादव ने शिक्षकों को निर्देश दिए कि बच्चों की पढ़ाई को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए गंभीरता एवं समर्पण के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मजबूत शिक्षा ही उनके उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। इस अवसर पर विद्यालय में विकसित किए जा रहे स्मार्ट क्लास के प्रति विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंत्री  यादव ने बताया कि आगामी शैक्षणिक सत्र से विद्यालय में स्मार्ट क्लास के माध्यम से पढ़ाई प्रारंभ की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा सुविधाओं का लाभ मिलेगा और उनका भविष्य अधिक सशक्त बनेगा। यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद एवं अन्य सह-पाठयक्रम गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। इस अवसर पर सभापति  श्याम शर्मा,  कमलेश फेकर, पार्षद  नरेंद्र बंजारे,  मनीष कोठारी,  गोविंद देवांगन, मती हर्षिका संभव जैन,  दिनेश देवांगन,  अमित पटेल,  नवीन साहू सहित वार्ड के नागरिक उपस्थित रहे।

कुपोषण पर बड़ा अभियान: 8वां पोषण पखवाड़ा 9 अप्रैल से शुरू, जागरूकता को मिलेगा नया विस्तार

रायपुर छत्तीसगढ़ में 9 से 23 अप्रैल तक 8वां पोषण पखवाड़ा, कुपोषण के खिलाफ जन-आंदोलन को मिलेगा नया विस्तार प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चल रहे जन-आंदोलन को और सशक्त बनाने के लिए 9 से 23 अप्रैल तक 8वां पोषण पखवाड़ा आयोजित किया जाएगा। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत आयोजित इस अभियान का उद्देश्य जन-भागीदारी के माध्यम से “कुपोषण मुक्त भारत” के संकल्प को मजबूती देना है। इस वर्ष पखवाड़ा की थीम “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना” रखी गई है, जो बच्चों के प्रारंभिक वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य और समुचित देखभाल के महत्व को केंद्र में रखती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जीवन के पहले छह वर्ष बच्चे के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की नींव होते हैं, इसलिए इस अवधि में उचित पोषण अत्यंत आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 से संचालित पोषण अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसके तहत जन-जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में इस वर्ष का पोषण पखवाड़ा भी सामुदायिक भागीदारी को केंद्र में रखकर आयोजित किया जाएगा। पोषण पखवाड़ा के सफल क्रियान्वयन के लिए 7 अप्रैल को शाम 4 बजे राज्य स्तर पर विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।बैठक मे महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ रेणुका श्रीवास्तव, संयुक्त संचालक डी. एस. मरावी, उपसंचालक श्रुति नेलकर, अभय देवांगन सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्कूल शिक्षा, नगरीय प्रशासन, कृषि, खाद्य, आयुष, जल संसाधन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सहित विभिन्न विभागों के अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में विभागों को अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार कर अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पोषण पखवाड़ा के दौरान प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें बच्चों और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श, अन्नप्राशन, गोदभराई, स्वच्छता एवं संतुलित आहार के प्रति जागरूकता कार्यक्रम प्रमुख रूप से शामिल हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देते हुए पोषण व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह अभियान न केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करेगा, बल्कि समाज में पोषण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को भी सुदृढ़ करेगा। छत्तीसगढ़ में इस पहल के माध्यम से कुपोषण दर में कमी लाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि “सुपोषित छत्तीसगढ़” का सपना साकार हो सके।  

सरकार को है किसानों के हितों की चिंता: कृषि मंत्री रामविचार नेताम

रायपुर छत्तीसगढ़ में रासायनिक उर्वरकों की कालाबाजारी करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई तय है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि खाद की जमाखोरी या अधिक मूल्य पर बिक्री करने वालों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे जेल भी भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया संकट के कारण रासायनिक उर्वरकों की कमी की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार पूरी तरह सजग है। खाद की कमी नहीं होगी। इसके साथ ही किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आपूर्ति और बेहतर होगी, इसलिए किसानों को किसी भी प्रकार से घबराहट या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। कृषि मंत्री नेताम ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित समेति कक्ष में रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों की आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान इस आशय के वक्तव्य दिए।               मंत्री नेताम ने बताया कि राज्य सरकार खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर पूरी तरह सक्रिय है और उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। जिलों के संबंधित विभागीय अमले को नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आते ही तत्काल कार्रवाई की जा सके।                श्री नेताम ने बैठक में आगामी 5 मई से 20 मई तक पूरे प्रदेश में “विकसित भारत संकल्प अभियान” की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और मैदानी अमले की टीम गांव-गांव जाकर किसानों, किसान समूहों और संगठनों से सीधे संवाद करेगी। इस दौरान किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, वैकल्पिक उर्वरकों और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। अभियान के दौरान कृषि के साथ-साथ अन्य विभाग जैसे-मछली पालन, उद्यानिकी, पशुपालन, कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञ भाग लेंगे, जिसमें विभिन्न विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार तथा विभागीय प्रकरण तैयार करने हेतु निर्देशित किया।                मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान को प्राथमिकता और गंभीरता के साथ संचालित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौके पर ही किसानों की समस्याओं का समाधान और योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाएगी।               बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पिछले वर्ष डीएपी की आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए इस बार एनपीके,  एसएसपी और अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। सरकार का फोकस केवल उर्वरक उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बनाने पर है। किसानों की आय बढ़ाने और लागत घटाने के उद्देश्य से दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।              बैठक में फार्मर आई डी के तहत एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन हेतु शेष बचे हुए कृषकों का एक सप्ताह के भीतर पंजीयन करने हेतु निर्देश दिए गए ताकि कोई भी किसान पी.एम.किसान योजना से लाभान्वित होने से वंचित न रहे। उन्होंने खरीफ सीजन में किसानों को सुगमतापूर्वक उर्वरक व्यवस्था हेतु दूरस्थ अंचलों में प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक का भण्डारण करने हेतु निर्देशित किया।                        मंत्री नेताम ने विभागीय योजनाओं में वर्ष 2025-26 में हुए व्यय की समीक्षा के दौरान विशेष रूप से फसल प्रदर्शन योजना एवं ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन-तिलहन को बढावा देने हेतु समीक्षा की, जिसमें रायपुर संभाग के अधीन जिलों में और अधिक प्रयास कर ग्रीष्मकालीन धान के रकबे को कम करके दलहन तिलहन एवं मक्का फसल को बढावा देने हेतु निर्देशित किया गया साथ ही धमतरी जिले में विगत् दो वर्षाे में दलहन तिलहन के रकबे में वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की गई तथा अन्य जिलों में भी दलहन एवं तिलहन के रकबे में वृद्धि करने हेतु निर्देशित किया गया।                  मंत्री नेताम ने रायपुर और दुर्ग संभाग के पी.एम.आशा की समीक्षा के दौरान पाया कि धमतरी जिले को छोडकर अन्य जिलों में प्रगति नगण्य है आगामी एक सप्ताह के भीतर मार्कफेड, नाफेड एवं समिति स्तर पर समन्वय करके दलहन तिलहन की खरीदी हेतु और अधिक प्रयास करने पर बल दिया।               मंत्री नेताम ने बैठक में वाटर बॉडी में मखाना एवं सिंघाडा की खेती के लिए उद्यानिकी विभाग को विशेष कार्ययोजना बना कर कृषक एवं कृषक समूहों से आवश्यक चर्चा कर उन्हें प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मखाना की खेती हेतु जिला धमतरी में किए गए कार्य की सराहना की गई। मखाना की खेती के साथ-साथ मछली पालन के लिए किसानों को जागरूक करने निर्देश दिए।             बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्तमती शहला निगार, कृषि, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के संचालक अजय अग्रवाल, मत्स्य पालन विभाग के संचालक एस.एस. नाग, पशुधन विकास विभाग के संचालक चन्द्रकांत वर्मा, उद्यानिकी विभाग के संचालक लोकेश चन्द्राकर, रायपुर के संयुक्त संचालक गयाराम और दुर्ग की संयुक्त संचालकमती गोपिका गबेल सहित जिले एवं राज्य के अधिकारी उपस्थित थे।

मेगा स्वास्थ्य शिविर में उमड़ा जनसैलाब

रायपुर  मेगा हेल्थ कैंप एक प्रमुख निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर है, जहाँ नामी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर कैंसर, हृदय रोग, स्त्री रोग, और नेत्र रोग जैसी बीमारियों का मुफ्त इलाज, जांच और दवाइयां प्रदान करते हैं। इसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा, दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग वितरण और आधुनिक जांचकी सुविधाएं भी मिलती हैं। लाल आतंक की समाप्ति के इस दौर में जब क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल बना है, तब प्रशासन की पहुँच अंतिम छोर के व्यक्ति तक आसान हुई है।            जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के साझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय सुपर स्पेशलिटी मेगा स्वास्थ्य शिविर का गत दिवस आयोजन किया गया। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री एवं सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप के द्वारा शुभारंभ पश्चात इस मेगा स्वास्थ्य शिविर में उन संवेदनशील और अंदरूनी क्षेत्रों के 3,700 से अधिक ग्रामीण बेखौफ होकर पहुँचे, जो कभी मुख्यधारा से कटे हुए थे। कमिश्नर बस्तर  डोमन सिंह के निर्देशानुसार कलेक्टर  अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित उक्त मेगा स्वास्थ्य शिविर में कुल 6,500 से अधिक लाभार्थियों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि अब ग्रामीण बंदूकों के साये से निकलकर आधुनिक चिकित्सा और विशेषज्ञ परामर्श पर भरोसा जता रहे हैं। शिविर के दौरान 21 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 40 स्वास्थ्य योद्धाओं की टीम ने इन वनवासियों के लिए देवदूत बनकर काम किया।              बस्तर के सुदूर अंचलों में कभी लाल आतंक की धमक से सहमे रहने वाले सुकमा जिले की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। दशकों पुराने संघर्ष और भय के बादलों को चीरकर अब यहाँ विकास और खुशहाली की नई किरणें बिखर रही हैं। जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के साझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय सुपर स्पेशलिटी मेगा स्वास्थ्य शिविर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अब सुकमा नक्सलवाद की बेड़ियों को तोड़कर स्वस्थ और सशक्त होने की राह पर निकल पड़ा है। मिनी स्टेडियम में विगत 28 और 29 मार्च को आयोजित इस शिविर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जहाँ कभी गोलियों की गूँज थी, आज वहाँ सेवा और संकल्प के गीत गाए जा रहे हैं।          शिविर में केवल सामान्य बीमारियों का ही नहीं, बल्कि कैंसर, हृदय रोग और न्यूरोलॉजी जैसी गंभीर समस्याओं का भी विशेषज्ञ उपचार किया गया। नक्सलवाद के दौर में स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहे बुजुर्गों के लिए 989 चश्मों का वितरण किया गया, जिससे उनकी धुंधली दुनिया एक बार फिर रोशनी से भर उठी। वहीं 1,500 बच्चों का व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण कर आने वाली पीढ़ी को कुपोषण और बीमारियों से मुक्त करने का संकल्प लिया गया। विशेष रूप से 85 महिलाओं की कैंसर स्क्रीनिंग और 2,300 आभा आईडी का निर्माण इस बात का प्रतीक है कि सुकमा अब डिजिटल स्वास्थ्य और सुरक्षा कवच से लैस हो रहा है।         लाल आतंक के खात्मे के बाद सुकमा का यह बदलाव पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल है। यह शिविर केवल एक चिकित्सकीय आयोजन नहीं था, बल्कि शासन-प्रशासन के प्रति जनता के अटूट विश्वास का उत्सव था। 153 आयुष्मान कार्डों का मौके पर निर्माण यह सुनिश्चित करता है कि अब सुदूर अंचल का गरीब से गरीब व्यक्ति भी पैसे के अभाव में इलाज से वंचित नहीं रहेगा। सुकमा आज नक्सलवाद की पहचान को पीछे छोड़कर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक रोल मॉडल बनकर उभर रहा है, जहाँ हर चेहरा मुस्कुरा रहा है और हर कदम एक खुशहाल भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ महिला आयोग का कड़ा रुख: भरण-पोषण मामले में BSP को लगाई फटकार

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्य सरला कोसरिया एवं ओजस्वी मंडावी ने आज आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। भिलाई स्टील प्लांट अपने पुरूष कर्मचारियों को किस तरह से बचाता है यह महिला आयोग में साबित हुआ है। पुरूष कर्मचारी दो-दो महिलाओं से अवैध रिश्ता रखता है और अपने पत्नी बच्चे को भरण-पोषण नहीं देता। महिला आयोग की सुनवाई में इनके अधिकारी उपस्थित होते हैं और आश्वासन देते हैं कि पत्नी और उनके बच्चों को पर्याप्त भरण-पोषण पति के वेतन से दिया जाएगा। सुनवाई के बाद में आफिस में जाकर मामले की लिपापोती करते हैं। इसकी पुष्टि होने पर जब पूछताछ की गई तो भिलाई स्टील प्लांट ने कहा कि हमने लाॅ डिपार्टमेंट को भेजा था, कर्मचारी ने लिखकर दे दिया इसलिए हम भरण-पोषण व वेतन की राशि नहीं दे सकते। भिलाई स्टील प्लांट ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। कुल मिलाकर कोई भी पुरूष जो भिलाई स्टील प्लांट में कार्यरत् है वह अपनी पत्नी बच्चों को परेशान कर सकता है, अवैध रिश्ते में रह सकता है, पत्नी-बच्चों को भूखे मारने के लिए छोड़ सकता है। फिर भी भिलाई स्टील प्लांट कुछ भी कार्य नहीं करेगा। अपने कर्मचारियों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं करेगा। इस बात पर आज महिला आयोग ने बीएसपी के शीर्ष अधिकारी को जमकर लताड़ लगाई। एक प्रकरण में आवेदिका पत्नी अपने ससुराल में रहना चाहती है, लेकिन पति उसे ले जाने के लिए तैयार नहीं है। अनावेदक पक्ष द्वारा आवेदिका पर दबाव डालकर स्टाम्प पेपर पर लिखा-पढ़ी करके तलाक दिया, जिसमें समाज के कुछ लोगों ने उपस्थित होकर आवेदिका को कहा कि तुम्हारा तलाक हो गया। इस मामले में आयोग ने कहा कि इस तरह के दस्तावेज से वैधानिक तलाक नहीं होता। अनावेदक पक्ष आवेदिका को कोई भरण-पोषण नहीं देता, आवेदिका का स्त्रीधन भी वापस नहीं किया। आवेदिका अपने पति के साथ रहना चाहती है, लेकिन अनावेदक के माता, पिता व भाई उसके वैवाहिक जिंदगी में बाधा बन रहे हैं। अनावेदक को पूछने पर वह सुलहवार्ता के लिए तैयार नहीं है। इस स्तर पर आवेदिका ससुराल पक्ष के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज करवा सकती है। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका के स्व. पति से दो बेटियां है। अनावेदक उसका देवर है। गांव की संयुक्त संपत्ति बरौडा व कांपा में है, मकान व खेत भी है, जिसमें आवेदिका अपनी दोनों बेटियों का हक व हिस्सा चाहती है, जिसे अनावेदक ने स्वीकारा और बताया कि संयुक्त संपत्ति में आवेदिका की दोनों बेटियों का नाम है और हिस्सा देने के लिए वह तैयार है। आयोग ने समझाइश दिया कि आवेदिका आज ही जाकर बरौंडा व कांपा के मकान में अपना कब्जा ले व खेती की जमीन पर तहसील न्यायालय में नाम व खाता अलग कराने की कार्यवाही कर सकते हैं। कब्जा प्राप्त करने के पश्चात् आयोग को सूचित करें, ताकि प्रकरण नस्तीबध्द किया जा सके। एक अन्य प्रकरण में अनावेदक ने बताया कि भारत माला परियोजना में कोलिहापुरी की लगभग ढाई एकड़ जमीन निकली, जिसका मुआवजा लगभग 1 करोड़ 64 लाख रुपए अनावेदक के एकाउंट में है। इस संपत्ति में आवेदिका अपना एक चौथाई हिस्सा चाहती है। उसके अन्य दो भाई और है। आवेदिका के अनुसार कलेक्टर दुर्ग से इस परियोजना के तहत 2 गुना कीमत प्राप्त हुआ है, शेष 2 गुना कीमत के लिए मामला लंबित है। आयोग द्वारा कलेक्टर दुर्ग को पत्र प्रेषित कर बैंक ऑफ बडौदा के ब्रांच मैनेजर गंजपारा में अनावेदक के बैंक एकाउंट में दर्ज मो. नं. के बैंक खाते के ट्रांजेक्शन को तत्काल प्रभाव से रोक लगाने अनुशंसा की जाएगी, ताकि सुलहनामा की प्रक्रिया पूर्ण किया जा सके। अनावेदक को अगली सुनवाई में सभी अनावेदकगणों को साथ लाने को कहा गया, ताकि आयोग के समक्ष उपस्थित होकर सुलहनामा पर चर्चा किया जा सके। एक अन्य प्रकरण में आवेदक ने अपनी पत्नी व बहू की ओर से प्रकरण दर्ज किया था, जिसमें अनावेदक आरक्षक व उसकी पत्नी महिला आरक्षक के विरूध्द अपराध दर्ज किया था। शेष अनावेदक थाना- पिपरिया, जिला- कबीरधाम के पुलिस अधिकारी व कर्मचारी हैं। सभी अनावेदक पुलिस कर्मचारी है। इस प्रकरण में आरक्षक व उसकी पत्नी महिला आरक्षक आवेदकों के पड़ोसी है। वह अपनी पुलिसिया हथकंडों का इस्तेमाल करते हुए फर्जी एफआईआर दर्ज कराकर षड्यंत्र पूर्वक आवेदक की पत्नी, बहू व उसके नाबालिग 4 माह के बेटा को 2 माह तक जेल में रखा गया था। आवेदक पक्ष उनकी पत्नी व बहू ग्रामीण होने के कारण अनावेदकों के पुलिसिया चक्रव्हूह से नहीं निकल पाए और उन्हें न्यायालय से 45 दिन की सजा हुई। आवेदक पक्ष की शिकायत को किसी भी पुलिस अधिकारी ने इसलिए दर्ज नहीं किया, क्योंकि शिकायतकर्ता स्वयं पुलिस है। सभी पुलिस वालों ने अपने ही विभाग के आरक्षक की शिकायत पर आवेदक की बहू, पत्नि को नाबालिग बच्चे सहित जेल में डाल दिया था। आयोग द्वारा प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच कराने छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकार कार्यालय शंकर नगर को पत्र प्रेषित करने का आदेश दिया था। इस प्रकरण को छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकार कार्यालय में भेजकर सभी पुलिस अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर प्रतिवेदन 1 माह के भीतर प्रेषित करने का आदेश आयोग ने दिया। साथ ही डीजीपी छत्तीसगढ़ को पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ अपने पद का दुरूप्योग करने के लिए उचित कार्रवाई की अनुशंसा भी आयोग द्वारा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ सरकार का कड़ा रुख: RTE के तहत प्रवेश नहीं देने पर स्कूलों पर गिरेगी गाज

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि RTE के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। बता दें कि प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने पर RTE के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं देने का ऐलान किया था, जिसके बाद सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों में RTE के तहत प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिया जाता है।सरकार ने यह भी साफ किया है कि छत्तीसगढ़ में दी जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों के मुकाबले बेहतर या उनके बराबर है। कक्षा 1 से 5 तक: ₹7,000 प्रतिवर्ष, कक्षा 6 से 8 तक: ₹11,400 प्रतिवर्ष दिया जा रहा है। वहीं, दूसरे राज्यों में मध्य प्रदेश में ₹4,419, बिहार में ₹6,569, झारखंड में ₹5,100, उत्तर प्रदेश में ₹5,400 दिया जा रहा है। हालांकि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक बताई गई है, लेकिन समग्र रूप से छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति को संतुलित और उचित बताया गया है। वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में RTE के माध्यम से लगभग 3,63,515 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं इस वर्ष कक्षा पहली में करीब 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति संवेदनशील छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) के आधार पर निर्धारित की जाती है। ​अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रतिपूर्ति छत्तीसगढ़ में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष है। प्रदेश में वर्ष 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक 7000 रूपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रूपए वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। तुलनात्मक रूप से देखें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रूपए बिहार में 6,569 रूपए, झारखंड में 5,100 रूपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रूपए वार्षिक दिए जाते हैं। यद्यपि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, किंतु समग्र मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि संतुलित और उचित है। ​साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे ले रहे लाभ वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस वर्ष भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। चूंकि सभी निजी विद्यालयों को आर.टी.ई. अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही मान्यता दी गई है, अतः यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करें। ​नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई यदि कोई निजी विद्यालय आरटीई के तहत प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है तो राज्य शासन उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।