samacharsecretary.com

सड़क दुर्घटना में हुई मौत पर कांकेर और मनेन्द्रगढ़ में परिवारों को मिलेगा वित्तीय संबल

उत्तर बस्तर कांकेर. अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) भानुप्रतापपुर श्री जी.डी. वाहिले द्वारा सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने के प्रकरण में उनके निकटतम परिजन के लिए 25 हजार रूपए और सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों के लिए 10-10 हजार रूपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत किया गया है। भानुप्रतापपुर तहसील के ग्राम भैंसमुण्डी, चौकी कच्चे निवासी धर्मेन्द्र कोला की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर उनकी पत्नी श्रीमती सोहन्तिन के लिए 25 हजार रूपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत किया गया है। इसी प्रकार सड़क दुर्घटना में घायल भानुप्रतापपुर तहसील के ग्राम कराठी निवासी शत्रुघन जैन और पखांजूर तहसील के ग्राम डोण्डे निवासी राजू मण्डल को 10-10 हजार रूपये की सहायता राशि स्वीकृत किया गया है। एमसीबी :सड़क दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता स्वीकृत मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी). भरतपुर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय द्वारा सड़क दुर्घटनाओं में मृत हुए व्यक्तियों के परिजनों को आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत की गई है। जारी आदेश के अनुसार, ग्राम जनकपुर निवासी स्वर्गीय जोहनदास के विधिक वारिस एन्थोनीदास (पिता घासीदास) को 25 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। इसी प्रकार स्वर्गीय बब्बू यादव (पिता भगवानदीन यादव) की पत्नी फुलमतिया यादव को 25 हजार रुपये तथा स्वर्गीय राहुल (निवासी ग्राम जनकपुर) के पिता संजू को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। उक्त सहायता राशि सड़क दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को वित्तीय संबल प्रदान करने के उद्देश्य से दी जा रही है। यह व्यय मांग संख्या-02, लेखा शीर्ष 2235 – सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण (800) के अंतर्गत “सड़क दुर्घटना में मृतकों के परिवार एवं घायलों को वित्तीय सहायता” मद से, चालू वित्तीय वर्ष 2025-2026 में वहन किया जाएगा।

भाजपा स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री साय ने फहराया झंडा, अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को साकार करने का किया वचन

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भाजपा के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने विधिवत ध्वजारोहण किया और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने भाजपा के 47वें स्थापना दिवस पर प्रदेश के सभी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पार्टी की विचारधारा और संगठन की ताकत ही उसे लगातार आगे बढ़ा रही है। इस मौके पर उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे अटल बिहारी वाजपेयी को नमन करते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद छत्तीसगढ़ पर हमेशा बना रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस कल्पना और दृष्टि के साथ अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया था, उनकी सरकार उसी दिशा में काम करते हुए उनके सपनों को पूरा करने का प्रयास करेगी। पत्रकारों से चर्चा के दौरान ही मुख्यमंत्री साय ने अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “देर आए, दुरुस्त आए।” उन्होंने कहा कि इस मामले में अमित जोगी मुख्य आरोपी रहे हैं और न्यायालय का निर्णय उचित है। वहीं पश्चिम बंगाल के आगामी चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हाल ही में वे वहां से होकर आए हैं और प्रदेश में ममता बैनर्जी के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है और बहन-बेटियों को भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के पक्ष में अच्छा माहौल बन चुका है और वहां परिवर्तन की लहर चल रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में भाजपा की सरकार बनेगी।

आत्मसमर्पण से पुनर्वास तक-पवन कुमार ने हिंसा का रास्ता छोड़ जीवन की नई शुरुआत की

आत्मसमर्पण से पुनर्वास तक-पवन कुमार ने हिंसा का रास्ता छोड़ जीवन की नई शुरुआत की विशेष आवास परियोजना से मिला पक्का आशियाना रायपुर  छत्तीसगढ़ में सुशासन सरकार की सरकार ने माओवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 हिंसा छोड़ मुख्यधारा से जुड़ने वाले नक्सलियों को नई जिंदगी दे रही है। छत्तीसगढ सरकार ने माओवादी  आत्मसमर्पितों को 5 लाख तक की सहायता, कौशल प्रशिक्षण, और सम्मानजनक जीवन प्रदान कर नक्सल-मुक्त बस्तर के सपने को साकार कर रही है। कोण्डागांव जिले के फरसगांव के सुदेर पंचायत चिंगनार के श्री पवन कुमार को पुनर्वास नीति के तहत पक्का आवास मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।          कोण्डागांव जिले के विकासखण्ड फरसगांव के दूरस्थ ग्राम पंचायत चिंगनार, जो मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, कभी इस क्षेत्र में माओवाद के प्रभाव के कारण भय और असुरक्षा का माहौल था। अब इन क्षेत्रों में राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत शांति और विकास स्थापित हो रहा हैं। इसी गांव में रहने वाले श्री पवन कुमार को पुनर्वास नीति के तहत पक्का आवास मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पवन कुमार पूर्व में माओवादी संगठन से जुड़े हुए थे। उस दौर में उनका जीवन असुरक्षित और कठिनाइयों से भरा हुआ था। उनका परिवार जंगल किनारे एक झोपड़ी और जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर था, जहां न तो पर्याप्त सुविधाएं थीं और न ही सुरक्षित भविष्य की कोई उम्मीद।        समय के साथ उन्होंने यह महसूस किया कि हिंसा का मार्ग केवल विनाश की ओर ले जाता है। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए माओवादी संगठन से नाता तोड़ लिया और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।         आत्मसमर्पण के बाद जिला प्रशासन द्वारा विशेष परियोजना आवास (आत्मसमर्पित परिवार) प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में उन्हें आवास स्वीकृत किया गया। शासन की सहायता से उन्हें चरणबद्ध तरीके से आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया, जिसमें प्रथम किश्त के रूप में 40 हजार रुपये, द्वितीय किश्त में 55 हजार रुपये तथा अंतिम किश्त के रूप में 25 हजार रुपये की राशि दी गई। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत 90 दिनों की मजदूरी भी प्रदान की गई। इन सभी सहायता राशि और योजनाओं के समुचित उपयोग से पवन कुमार ने निर्धारित समय में अपना पक्का घर पूर्ण कर लिया। यह घर केवल एक आशियाना नहीं, बल्कि उनके नए जीवन की मजबूत नींव है। अब उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और भविष्य को लेकर आश्वस्त है।          इसके अतिरिक्त शासन द्वारा उनके घर में बिजली कनेक्शन, रसोई गैस, शौचालय और नल-जल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इन सुविधाओं ने उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है और उन्हें एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है। आज पवन कुमार अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण, सुरक्षित और खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। और बेहतर भविष्य के लिए भी नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन की इस पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित किया है।

दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से अंधेरे रास्तों से लौटकर रोशनी तक- अरविंद हेमला की हिम्मत और बदलाव की कहानी

रायपुर  अंधेरे रास्तों से लौटकर रोशनी तक का सफर निराशा, संघर्ष और कठिनाइयों से निकलकर आशा, सफलता और ज्ञान की ओर जाने का प्रतीक है। यह एक ऐसी यात्रा है जो दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से पूरी की जा सकती है। 22 वर्षीय अरविंद हेमला का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। बीजापुर जिले के एक साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मे अरविंद बचपन से ही आर्थिक तंगी, अशिक्षा और सामाजिक चुनौतियों से जूझते रहे। परिवार की आजीविका कृषि मजदूरी पर निर्भर थी, जिससे दैनिक जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता था।                कम उम्र में ही माता-पिता का साया सिर से उठ जाना उनके जीवन का सबसे बड़ा आघात था, पिता का निधन 2009 में और माता का 2016 में हो गया। इस घटना ने अरविंद को पूरी तरह अकेला और असहाय बना दिया।  युवावस्था में गलत संगति, क्षेत्रीय परिस्थितियों और आर्थिक मजबूरियों के कारण अरविंद नक्सली गतिविधियों की ओर आकर्षित हो गए। धीरे-धीरे वे इस रास्ते में उलझते चले गए, जिससे उनका सामाजिक और पारिवारिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। लेकिन समय के साथ अरविंद को एहसास हुआ कि यह रास्ता उन्हें केवल भय और अनिश्चित भविष्य की ओर ले जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन को बदलने का दृढ़ संकल्प लिया। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने मार्च 2025 में स्वेच्छा से आत्मसमर्पण कर दिया।          आत्मसमर्पण के बाद शासन द्वारा उन्हें पुनर्वास केंद्र बीजापुर में आवश्यक मार्गदर्शन, सहयोग और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया। राज मिस्त्री कार्य का प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने निर्माण कार्य में तकनीकी दक्षता हासिल की। आज अरविंद तेलंगाना राज्य के मंचेरियल जिले में एक निर्माण श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं और प्रतिदिन 600 रूपए की मजदूरी अर्जित कर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। अपने परिश्रम और लगन से उन्होंने न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि समाज की मुख्यधारा में भी सफलतापूर्वक वापसी की है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति हिंसा की राह छोड़ने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने और समाज के साथ फिर से जुड़ने में मदद करना है। यह कहानी हमें सिखाती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सही निर्णय, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से जीवन को नई दिशा दी जा सकती है।

अदालत का फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद, पीड़िता को मिला 4 लाख का मुआवजा

बिलासपुर. नाबालिक को भागकर दुष्कर्म के मामले में आरोपी युवक को पास्को एक्ट के तहत 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई है. तखतपुर थाना क्षेत्र के इस मामले में जिला एवं जिला न्यायालय में विशेष अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम एफटीसी पास्को अधिनियम पीठासीन अधिकारी पूजा जायसवाल की अदालत ने आरोपी जयकुमार लहरे उर्फ कलुआ को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने 4 लाख पीड़िता को देने का आदेश भी दिया है. न्यायालय ने इस घटना को अपराधिकृत मानते हुए टिप्पणी की है कि जिस समय नाबालिक पीडि़ता को भगा कर ले गया. अपराधी घटना की गई उसमें पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी. पीड़ित बच्चों के मन में उसके स्वास्थ्य विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. न्यायालय ने कहा है कि आरोपी युवक का यह कृत्य पीड़ित बच्चों के मन पर घृणित कृत्य का प्रभाव आजीवन रहेगा. स्वास्थ्य विकास पर भी पड़ेगा. घटना के समय पीड़िता की आयु 18 वर्षों से कम थी. इसलिए हमारे पास उच्च न्यायालय के विवादित निर्णय को रद्द करने और ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बहाल करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. न्यायाधीश पूजा जायसवाल ने दोनों पक्षों की गवाही के बाद आरोपी जय कुमार लहरें को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई. साथ ही शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनीषा नंदी ने पैरवी की है. ये है पूरी घटना  तखतपुर थाना क्षेत्र के पीड़िता के पिता ने 2024 को थाना तखतपुर में उपस्थित होकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिक पुत्री को 8 नवंबर 2024 की सुबह 11 बजे बिना बताए कहीं चली गई है और आज तक वापस नहीं आई है. पूछताछ के दौरान पतासाजी में रिश्तेदारी में पता चला कि किसी ने बहला-फुसलाकर कर उनकी नाबालिक बेटी को अपहरण करके ले गया है. पुलिस ने अपनी विवेचना में पाया कि आरोपी ने हीं नाबालिक को भगा कर ले गया है. मौका नक्शा तैयार कर घटनास्थल का निरीक्षण व नक्शा तैयार कर पीडि़ता के माता-पिता के बयान दर्ज करने के बाद विवेचना के दौरान पता चला कि आरोपी जयकुमार लहरे ने 22 नवंबर 2024 को ईंट भट्टा उत्तर प्रदेश में इसे बहला फुसलाकर कर भगाकर ले गया था. पुलिस ने उत्तर प्रदेश के ईंट भट्टा से नाबालिक को बरामद किया. पीड़िता का बयान दर्ज कर 13 नवंबर 2024 को आरोपी जयकुमार लहरे को धारा 180 बीएनएस से महिला थाना को प्रतिवेदन प्रेषित कर गिरफ्तार किया गया.

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सिम्स में ‘जेंडर फॉर हेल्थ’ विषय पर आयोजन, 100 से अधिक छात्रों ने लिया भाग

बिलासपुर विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सिम्स चिकित्सालय, बिलासपुर में “जेंडर फॉर हेल्थ” थीम पर एक व्यापक एवं जागरूकता से भरपूर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं जेंडर समानता के महत्व को रेखांकित करना रहा। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताएं एवं शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान क्विज, पोस्टर मेकिंग एवं स्लोगन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, लैंगिक समानता एवं समाज में जागरूकता से जुड़े विषयों पर अपने विचार रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किए। प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ समाज के निर्माण में सभी वर्गों की समान भागीदारी आवश्यक है। यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन की थीम “जेंडर फॉर हेल्थ” के अनुरूप किया गया। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ, जिसमें स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में देशभर के सैकड़ों मेडिकल कॉलेजों में चल रही समान गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई, जिससे प्रतिभागियों को व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया एवं उनके प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर उपस्थित विशेषज्ञों ने छात्रों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में सिम्स चिकित्सालय के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह एवं नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप की विशेष उपस्थिति रही। इसके साथ ही डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. अर्चना सिंह  डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ. सचिन पांडे एवं डॉ. विवेक शर्मा सहित संस्थान के अन्य वरिष्ठ चिकित्सक, स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

गिरते जलस्तर को रोकने के लिए बिलासपुर में नलकूप निर्माण पर रोक

बिलासपुर. जिले में गिरते भू-जल स्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए नए नलकूप एवं ट्यूबवेल खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध 6 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी संजय अग्रवाल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिले के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में नए नलकूप/ट्यूबवेल खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर यह निर्णय लिया गया है, जिसमें बताया गया है कि भू-जल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। इस स्थिति को नियंत्रित करने तथा पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-3 के तहत यह आदेश जारी किया गया है। आदेश के तहत बिलासपुर जिले के विकासखंड बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर एवं कोटा को 6 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक जलाभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति या संस्था नए नलकूप खनन नहीं कर सकेगी। हालांकि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगर निगम एवं नगर पंचायतों जैसी शासकीय एजेंसियों को केवल पेयजल आपूर्ति हेतु आवश्यकता अनुसार नलकूप खनन की अनुमति दी गई है। इसके लिए उन्हें पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन संबंधित कार्यों की जानकारी अधिकृत अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। जन सुविधा को ध्यान में रखते हुए अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में नलकूप खनन की अनुमति प्रदान करने के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिलासपुर, बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर एवं कोटा को अधिकृत किया गया है। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप अनुमति देने की प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

जिंदल स्टील ने कोयला गैसीफिकेशन क्रांति से रचा इतिहास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल स्टील की दिशा दिखाई

जिन्दल स्टील ने रचा इतिहास, कोयला गैसीफिकेशन क्रांति से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल स्टील की राह दिखाई  रायपुर  जिन्दल स्टील ने उन्नत कोयला गैसीफिकेशन के माध्यम से 'स्वदेशी' कोयले के बेहतरीन उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे कम कार्बन वाले स्टील के उत्पादन के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।  जिन्दल स्टील ने दुनिया में पहली बार एक ऐसी तकनीक (कोयला गैसीफिकेशन) का सफल प्रयोग किया है, जिससे स्वदेशी कोयले से गैस (सिनगैस) बनाकर लोहा (डीआरआई) तैयार किया जा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी ने विदेशी गैस या महंगे आयातित कोयले के बजाय अपने देश के कोयले को साफ-सुथरी गैस में बदलकर स्टील बनाने की बड़ी कामयाबी हासिल की है। प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन की कमी को दूर करने के लिए जिन्दल स्टील ने अब गैल्वनाइजिंग और कलर कोटिंग लाइन भट्टियों में सिनगैस का सफल प्रयोग किया है, जो स्टील इंडस्ट्री में पहली बार हुआ है। यह प्रयोग आज की कठिन परिस्थितियों में ईंधन की कमी को दूर करने में मददगार साबित हुआ है।  स्टील जगत को नई दिशा दिखाते हुए जिन्दल स्टील ने सिनगैस से ब्लास्ट फर्नेस संचालित कर आयातित कोकिंग कोल पर देश की निर्भरता घटाई है और प्रति टन स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन की मात्रा उल्लेखनीय स्तर तक कम करने में भी कामयाबी हासिल की है। स्टील उत्पादन की वैल्यू चेन में सिनगैस का उपयोग निश्चित रूप से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचेगा।  गौरतलब है कि भारत सरकार की भावी नीतियों और प्रोत्साहनों में राष्ट्रीय कोयला गैसीफिकेशन मिशन शामिल है, इसलिए उम्मीद है कि कोयला गैसीफिकेशन तकनीक को अपनाने में तेजी आएगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए देश में हो रहे इस प्रयास को समर्थन मिलेगा।  इस संबंध में जिन्दल स्टील, अंगुल के कार्यकारी निदेशक श्री पी.के. बीजू नायर ने कहा: "स्वदेशी कोयले से बनी यह गैस (सिनगैस) विदेशों से आने वाले महंगे मेथनॉल, अमोनिया और एलएनजी की जगह ले सकती है। भारत को अपनी तरक्की और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए अपने पास मौजूद कोयले के विशाल भंडार का सही उपयोग करना चाहिए। अगर हम कोयला गैसीफिकेशन के साथ कार्बन नियंत्रण की तकनीक (CCUS) का उपयोग करें तो न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों (CBAM) पर खरा उतरकर हमारा स्टील, विदेशी बाजारों में और भी मजबूत बनेगा।" स्वदेशी कोयले का उपयोग और उन्नत स्वच्छ कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के माध्यम से जिन्दल स्टील, सस्टेनेबल और सस्ता स्टील उपलब्ध कराते हुए 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टि को आगे बढ़ा रहा है।  जिन्दल स्टील के बारे में  जिन्दल स्टील भारत के शीर्ष स्टील उत्पादकों में से एक है, जो अपनी कार्यक्षमता और बेहतरीन क्वालिटी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। कंपनी का 'माइन-टू-मेटल' मॉडल इसे खास बनाता है, जहां खदानों से लेकर तैयार स्टील तक, सारा काम अपने संसाधनों और आधुनिक तकनीक से होता है। 12 बिलियन डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा निवेश के साथ कंपनी के पास अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में विश्वस्तरीय स्टील प्लांट हैं। जिन्दल स्टील आज  न केवल भारत में, बल्कि अफ्रीका तक अपने मजबूत नेटवर्क के जरिये देश की तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।  

फर्जीवाड़े में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सस्पेंड, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की जांच जारी

कांकेर. सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए एक पहले से शादीशुदा जोड़े द्वारा दोबारा विवाह करने का मामला सामने आया है। यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत पखांजूर में आयोजित कार्यक्रम से जुड़ी है। मामले के उजागर होने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच कर कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को पखांजूर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में ग्राम पीवी-34 निवासी सुदीप विश्वास और पीवी-64 निवासी स्वर्ण मिस्त्री ने विवाह किया। जबकि इन दोनों की शादी इससे पहले ही 3 जून 2025 को हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि यह जोड़ा संगम सेक्टर का निवासी है, लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए इनका पंजीयन 20 किलोमीटर दूर हरनगढ़ सेक्टर में कराया गया। जांच के बाद कार्रवाई मामले के संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर निलेश क्षीरसागर के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच शुरू की। जांच में दोबारा विवाह की पुष्टि हुई। इसके बाद हरनगढ़ सेक्टर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जानवी शाह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, पूरे मामले में निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाली सुपरवाइजर पुष्पलता नायक के खिलाफ भी विभाग ने कार्रवाई करते हुए उनका वेतन रोक दिया है।

खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन का शिकंजा, अधिकारियों ने दुकानों की जांच की

मुंगेली. जिले में यूरिया की निर्धारित कीमत से अधिक दर पर बिक्री की शिकायतों को प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की है. कलेक्टर कुंदन कुमार और जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पांडेय के निर्देश पर एसडीएम अजय शतरंज, उप संचालक कृषि और नायब तहसीलदार की संयुक्त टीम ने जिला मुख्यालय के विभिन्न निजी कृषि केंद्रों पर औचक निरीक्षण किया. जांच के दौरान सुपर एजेंसी, पंजाब एजेंसी, कैलाश ट्रेडर्स और शक्ति माई कृषि केंद्र सहित कई दुकानों में पहुंचकर अधिकारियों ने मौके पर मौजूद किसानों से सीधे बातचीत की. यूरिया की वास्तविक बिक्री दर, उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर विस्तार से जानकारी ली गई, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने लाई जा सके. सरकार के मुताबिक खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित किया गया है। वर्तमान में राज्य के गोदामों और समितियों में लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जिससे शुरुआती जरूरतों को पूरा करने की तैयारी है। हाल ही में हुई वर्चुअल बैठक में विभिन्न राज्यों में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई। इस दौरान छत्तीसगढ़ की स्थिति भी साझा की गई, जिसमें बताया गया कि राज्य में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार राज्य को आवंटित कुल उर्वरकों में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी शामिल हैं। वहीं 30 मार्च 2026 की स्थिति में उपलब्ध स्टॉक में भी इन सभी उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा मौजूद है, जिससे किसानों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया गया है। संभावित कमी की स्थिति से निपटने के लिए सरकार किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रेरित कर रही है। इसके तहत जैविक खाद, हरी खाद और नैनो उर्वरकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही सहकारी समितियों और निजी विक्रय केंद्रों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए राज्य में जल्द ही ई-उर्वरक वितरण प्रणाली लागू करने की तैयारी है। इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए किसानों को उनके पंजीकृत रकबे के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे अनियमितता पर रोक लगेगी। इसके अलावा कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों को सक्रिय किया जा रहा है। किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।