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‘पांडुलिपियाँ’ हमारी पहचान, हमारा गर्व – संरक्षण के लिए आगे आएँ नागरिक : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारी पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों का यह छोटा-सा प्रयास हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में एक बड़ा योगदान सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँच सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों को सहेजते हुए इस सांस्कृतिक अभियान में सहभागी बनें और ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ाएँ। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा "ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान" एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित एवं डिजिटल माध्यम से भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। मार्च 2026 से प्रारंभ इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य की भी नियमित सहभागिता हो रही है।  छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समिति का गठन और नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो गई है, शेष 07 जिलों में गठन / नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है। जिलों में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर पाण्डुलिपि संग्रह कर्त्ता व्यक्तियों / संस्थाओं को चिन्हित किया जा रहा है, तथा ग्राम/क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। प्रशिक्षकों को नोडल विभाग (संस्कृति विभाग) द्वारा ज्ञानभारतम के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ज्ञानभारतम भारत सरकार से छत्तीसगढ़ में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 06 जिलों में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य आरम्भ हो गया है और अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे ज्ञानभारतम एप के माध्यम से किया जा चुका है।

खिलाड़ियों के लिए बड़ी खबर: चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में, जल्द होगा फैसला- अरुण साव

रायपुर. छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले सैकड़ों खिलाड़ी पिछले 7-8 वर्षों से रोजगार के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं। इस मामले में डिप्टी सीएम और खेल मंत्री अरुण साव ने स्पष्ट किया है कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके पूरा होते ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पात्र खिलाड़ियों को जल्द ही सम्मानित किया जाएगा। दरअसल, प्रदेशभर के पदक विजेता और अवॉर्ड प्राप्त खिलाड़ियों ने हाल ही में उपमुख्यमंत्री व खेल मंत्री अरुण साव से उनके नया रायपुर स्थित निवास पर मुलाकात की। इस दौरान खिलाड़ियों ने लंबे समय से लंबित उत्कृष्ट खिलाड़ी सूची जारी करने और राज्य खेल अलंकरण समारोह आयोजित करने की मांग रखी। खिलाड़ियों की बात सुनने के बाद खेल मंत्री ने आश्वासन दिया कि चयन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर उत्कृष्ट खिलाड़ियों की घोषणा और सम्मान किया जाएगा। इसके बाद खिलाड़ियों का प्रतिनिधिमंडल खेल एवं युवा कल्याण विभाग, रायपुर भी पहुंचा, जहां खेल सचिव यशवंत कुमार, उपसंचालक रश्मि ठाकुर, रवि अग्रवाल सहित सभी जिलों के जिला खेल अधिकारी (DSO) और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक के दौरान खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट खिलाड़ी समिति की बैठक और पूरी प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर सवाल उठाए। इस पर खेल सचिव ने स्पष्ट कहा कि चयन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और बहुत जल्द सूची जारी कर दी जाएगी। बैठक में खिलाड़ियों से जुड़े ओवर एज मामलों को भी गंभीरता से लिया गया है और इस पर उचित निर्णय लेने की बात कही गई है। लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब सरकार की सक्रियता के बाद खिलाड़ियों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

पांडुलिपियाँ: हमारी पहचान, हमारा गर्व – संरक्षण के लिए आगे आएँ नागरिक : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

पांडुलिपि संरक्षण में आगे आएँ : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का प्रदेशवासियों से आह्वान पांडुलिपियाँ: हमारी पहचान, हमारा गर्व – संरक्षण के लिए आगे आएँ नागरिक : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय   ज्ञान की विरासत को डिजिटल युग में सुरक्षित करने का संकल्प – जनभागीदारी से होगा संरक्षण डिजिटल युग में सुरक्षित होगी हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा – जनसहभागिता से बढ़ेगा अभियान सर्वेक्षण से संरक्षण तक- छत्तीसगढ़ में पांडुलिपि अभियान को नई गति रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारी पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों का यह छोटा-सा प्रयास हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में एक बड़ा योगदान सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँच सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों को सहेजते हुए इस सांस्कृतिक अभियान में सहभागी बनें और ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ाएँ। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा "ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान" एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित एवं डिजिटल माध्यम से भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। मार्च 2026 से प्रारंभ इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य की भी नियमित सहभागिता हो रही है।  छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समिति का गठन और नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो गई है, शेष 07 जिलों में गठन / नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है। जिलों में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर पाण्डुलिपि संग्रह कर्त्ता व्यक्तियों / संस्थाओं को चिन्हित किया जा रहा है, तथा ग्राम/क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। प्रशिक्षकों को नोडल विभाग (संस्कृति विभाग) द्वारा ज्ञानभारतम के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ज्ञानभारतम भारत सरकार से छत्तीसगढ़ में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 06 जिलों में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य आरम्भ हो गया है और अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे ज्ञानभारतम एप के माध्यम से किया जा चुका है।

लग्जरी से स्वदेशी की ओर: सीएम साय ने बदली गाड़ी, अब स्कॉर्पियो बनी नई सवारी

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का काफिला आज जब प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे तो बहुत से पदाधिकारी और कार्यकर्ता आश्चर्य में पड़ गए. दरअसल, सीएम साय के काफिले में टोयोटा फार्च्यूनर की जगह नई नवेली स्कार्पियों नजर आ रही थी. करीबन ढाई साल के कार्यकाल के बाद मुख्यमंत्री को नई गाड़ी में देख लोग उत्सुकतावश गाड़ी के संबंध में पूछताछ भी करने लगे. दरअसल, मुख्यमंत्री साय के अब तक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में खरीदी गई फार्च्यूनर का ही इस्तेमाल कर रहे थे. इसके स्थान पर अब स्कार्पियो का इस्तेमाल करेंगे. ऐसी एक नहीं बल्कि सीएम के काफिले में छह नई स्कार्पियो को शामिल किया गया है. सीएम साय बुलेटप्रूफ स्कार्पियों में सवारी करेंगे. इस बदलाव पर भाजपा नेताओं और मीडिया की उत्सुकता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि गाड़ियां पुरानी हो गई थी. उसे चेंज करने का प्रयास कर रहे थे. कभी-कभी भी बंद हो जाती थी, इसलिए आज बदलाव किए हैं. 

रायपुर : विशेष लेख – स्वाभिमान की नई पहचान, छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का स्वर्णिम दौर

रायपुर : विशेष लेख : स्वाभिमान की नई पहचान : छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का स्वर्णिम दौर रायपुर छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा दी जा रही है। विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाएं अब जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रही हैं, जिसका स्पष्ट प्रतिबिंब आंकड़ों में दिखाई देता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महतारी गौरव वर्ष महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का व्यापक अभियान है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने बजट में महिलाओं और बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंगनबाड़ी संचालन के लिए 800 करोड़ रुपए, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपए तथा कुपोषण मुक्ति व पोषण अभियान के लिए 235 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निवेश है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना एक मील का पत्थर साबित हुई है। 10 मार्च 2024 को प्रारंभ इस योजना के तहत लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1 हजार रुपए की सहायता मिल रही है। अब तक 26 किस्तों के माध्यम से 16 हजार 881 करोड़ रुपए से अधिक राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में अंतरित की जा चुकी है, वहीं इस योजना के लिए 8 हजार 200 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रस्तावित रानी दुर्गावती योजना के तहत 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी, जिसके लिए 15 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। राज्य में महिलाओं के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार भी तेजी से हो रहा है। महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत अब तक 368 सदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है और 137 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। साथ ही 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच और मजबूत होगी। मातृत्व सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत 3 लाख 73 हजार से अधिक पंजीयन दर्ज किए गए हैं तथा 235 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। वर्ष 2023-24 में जहां 1 लाख 75 हजार से अधिक पंजीकरण हुए, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 2 लाख 19 हजार से अधिक हो गई। वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 2 लाख 4 हजार से अधिक पंजीयन हो चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का 93 प्रतिशत से अधिक है। पोषण अभियान में भी राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पोषण माह 2024 के दौरान प्रति केंद्र प्रदर्शन में प्रदेश को प्रथम स्थान तथा कुल गतिविधियों में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। वहीं न्योता भोज जैसे नवाचारों के तहत 9 हजार 700 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 1 लाख 83 हजार से अधिक बच्चों को लाभ मिला। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट जैसे कार्यों से जोड़ा जा रहा है तथा लखपति दीदी योजना के माध्यम से उन्हें व्यवसायिक अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उज्ज्वला योजना के तहत लगभग 38 लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं, जिससे उन्हें स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 27 से बढ़ाकर 34 कर दी गई है, जहां 14 हजार 300 से अधिक प्रकरणों में से 8 हजार 900 से अधिक का निराकरण किया जा चुका है। स्पष्ट है कि “महतारी गौरव वर्ष” केवल एक प्रतीकात्मक पहल नहीं, बल्कि ठोस परिणाम देने वाला अभियान है। विष्णु देव साय और लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाएं अब विकास की धुरी बनकर उभर रही हैं और राज्य को नई दिशा दे रही हैं। •    डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक   

सूची निरस्त होने पर सियासी वार: अरुण साव बोले—अंदरूनी कलह से जूझ रही कांग्रेस

रायपुर. रायपुर. रायपुर कांग्रेस वार्ड अध्यक्षों की सूची को निरस्त किए जाने पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस कांग्रेस-कांग्रेस खेल रही है. आपस में ही लड़कर कांग्रेस समाप्त हो रही है. जनता भी चाहती है, कांग्रेस न रहे तो ही अच्छा है. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मीडिया से चर्चा में महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस के बयान पर कहा कि हर एक मामले में कांग्रेस का घिसापिटा मामला है. देश में कहीं न कहीं चुनाव है. 75 साल महिलाओं को उनके वाजिब अधिकार से वंचित रखा. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनका अधिकार मिलने जा रहा है. देश की जनता सशक्त हो, ये कांग्रेस कभी अच्छा चाहती नहीं है. देश में चुनाव होते रहता हैं. जनता को जवाब देना पड़ेगा. वहीं पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर अरुण साव ने कहा कि पश्चिम बंगाल की आम जनता परेशान है. वहां कानून का राज नहीं है. भाजपा ने घोषणा पत्र जारी किया है. आम जनता के बेहतरी और खुशहाली के लिए घोषणा पत्र जारी किया है. पश्चिम बंगाल में परिवर्तन होने जा रहा है. बीजेपी का कमल खिलने जा रहा है. कांग्रेस में वार्ड अध्यक्षों की सूची को लेकर विवाद नहीं: श्रीकुमार मेनन पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सभी जिला अध्यक्षों को बूथ स्तर से लेकर जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी 15 अप्रैल तक गठित करने की समय सीमा दी है. इसके बाद रायपुर शहर कांग्रेस ने वार्ड अध्यक्षों की सूची घोषित की, लेकिन इसे महज कुछ घंटों में ही पीसीसी द्वारा निरस्त कर दिया गया. पीसीसी ने इस सूची को अवैधानिक माना है. इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस में सूची को लेकर विवाद की स्थिति नजर आ रही है. हालांकि, जिला अध्यक्ष श्री कुमार मेनन का कहना किया टकराव जैसा कुछ नहीं है, वह दीपक बैज और पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे. दरअसल, दो दिन पहले ही समीक्षा के दौरान अब तक कार्यकारिणी समेत वार्ड अध्यक्ष नहीं बनाए जाने को लेकर नाराजगी सामने आई थी. शुक्रवार को शहर कांग्रेस ने रायपुर के 66 वार्डो में वार्ड अध्यक्षों की सूची जारी की थी, लेकिन पीसीसी ने इसे निरस्त कर दिया. पीसीसी ने दो टूक कह दिया कि वार्ड अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्ष की सूची जारी करने से पहले अनुमोदन नहीं लिया गया. मामले में रायपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने कहा कि इस विषय पर प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा की जाएगी. उन्होंने कहा कि संगठन के भीतर किसी प्रकार का कोई टकराव नहीं है और सभी मुद्दों को आपसी बातचीत से सुलझा लिया जाएगा.

अतिक्रमण पर सख्त वार: पार्किंग में गोदाम-दुकान बनाने वालों पर गिरी गाज, कई सील

बिलासपुर. अरपा-पार सरकंडा के 6 जाम पॉइंट का सबसे बड़ा कारण बड़े प्रतिष्ठानों द्वारा पार्किंग का गलत इस्तेमाल है। लोग पार्किंग में वाहन खड़े करने के बजाय इसे गोदाम और सर्विसिंग सेंटर के रूप में चला रहे हैं, जिससे सड़क पर गाड़ियां खड़ी हो रही हैं, और ट्रैफिक जाम बन रहा है। शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के अभियान में नगर निगम ने सख्त कार्रवाई की। डी-मार्ट गेट के पास सड़क की ओर बढ़ाए गए लोहे के अवैध ग्रिल हटाए गए। डी-मार्ट प्रबंधन को निगम ने 48 घंटे के भीतर नक्शे अनुरूप बाउंड्रीवॉल बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले सरकंडा क्षेत्र के तीन बड़े प्रतिष्ठानों ‘मौसाजी स्वीट्स, पुष्पेंद्र साहू की दुकान और रॉयल स्वीट्स’ की पार्किंग को सील कर दिया गया। निगम टीम ने मैदान में जाकर निरीक्षण किया। मौसाजी स्वीट्स की पार्किंग पूरी तरह से सर्विस सेंटर और गोदाम में बदल दी गई थी, यहां शोरूम की नई बाइक खड़ी थीं और सर्विसिंग भी हो रही थी। साइंस कॉलेज के पास पुष्पेन्द्र साहू की बिल्डिंग में बनाए गए पार्किंग स्थल को कोचिंग संस्थान को किराए पर दिया गया था, जिसे सील किया गया है। वहीं वसंत विहार चौक के रॉयल स्वीट्स में भी पार्किंग का दुरुपयोग पाया गया। यहां पार्किंग का गोदाम के रूप में उपयोग रहा था। कार्रवाई में भवन अधिकारी अनुपम तिवारी, आशीष पांडेय, जुगल किशोर, अरुण यादव संतोष वर्मा,शिव बहादुर जायसवाल समेत अन्य शामिल थे। पार्किंग गायब, सड़क बनी पार्किंग जोन बड़े प्रतिष्ठान अपनी पार्किंग में गोदाम या सर्विसिंग सेंटर चला रहे हैं। इससे ग्राहक सड़क पर वाहन खड़े कर रहे हैं और जाम की स्थिति बन रही है। इसका असर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों पर भी पड़ रहा है।

जंगल सफारी में बदला मेन्यू: टाइगर जोड़ी ने खाया चिकन, सांपों को 17 दिन बाद मिला भोजन

बिलासपुर. बर्ड फ्लू का खतरा टलते ही चिकन और अंडा खाने पर से प्रतिबंध ​हटते ही कानन पेंडारी के वन्यप्राणियों को शुक्रवार काे 17 दिन बाद चिकन खाने मिला। सांप के केज में चूजा डालते ही सांपों ने तेजी के साथ उन्हें पकड़कर निगल लिया। वहीं टाइगर, लॉयन, पैंथर, लेपर्ड व अन्य मांसाहारी वन्यप्राणियों को भोजन में चिकन और अंडा दिया गया। कोनी स्थित सरकारी कुक्कुट पालन क्षेत्र में बर्ड फ्लू फैलने की वह से 25 मार्च से 10 से 12 किलोमीटर के दायरे में चिकन और अंडा खाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। दो दिन पहले दिल्ली और छत्तीसगढ़ राज्य के सहयोग डाक्टर्स की एक टीम ने कुक्कुट पालन क्षेत्र का निरीक्षण किया।आसपास की स्थितियों का जायजा लिया। इसके बाद अंडा और चिकन खाने की अनुमति इस शर्त पर दी कि यह सामग्री अपने ही क्षेत्र से लेकर खरीदी–बिक्री की जाए। इस आदेश के आने के बाद कानन पेंडारी में शुक्रवार से वन्यप्राणियों को चिकन, चूजा और अंडा दिया जाने लगा है। मांसाहारी वन्यप्राणियों को सप्ताह में दो–दो दिन अलग–अलग तरह का मांस दिया जाता है। इसमें चिकन के अलावा बकरे और सूअर का मांस शामिल है। कुछ वन्यप्राणियों को भोजन में उबला हुआ अंडा भी दिया जाता है। इन सभी का आहार फिर से शुरू कर दिया गया है।

सूखे से राहत की बड़ी पहल: सिकासार जल से जुड़ेगा महासमुंद, 3400 करोड़ की परियोजना मंजूर

गारियाबंद. सिकासार जलाशय के अतिरिक्त जल से आने वाले दिनों में महासमुंद जिले का सूखा दूर होगा। सीकासार-कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना के लिए 3400 करोड़ की मंजूरी मिली है। डेम से डेम को जोड़ने वाली इस पहली परियोजना से अतिरिक्त 25 हजार हेक्टेयर रकबे को सिंचाई सुविधा मिलेगी। भाजपा सरकार ने सीकासार कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना के लिए 3400 करोड़ की मंजूरी दे दिया है। परियोजना को वर्ष 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। मंजूरी के बाद सिंचाई विभाग ने टेंडर की प्रकिया शुरू कर दी है। कई मायने में यह परियोजना भाजपा सरकार की सबसे अलग-थलग और अहम योजना मानी जा रही है। विभाग के ईई एसके बर्मन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में टेंडर कॉल की तैयारी की जा रही है।कार्य किसी अनुभवी और पारंगत ठेका कम्पनी को ही दी जाए इसकी तैयारी विभाग कर रही है। 79,650 परिवार होंगे लाभान्वित सिकासार जलाशय के प्रमुख नहरों से अब तक गरियाबंद और मगररोड क्षेत्र के 101 गांव में रवि और खरीफ़ मिलकर 58 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा दी जाती थी। लेकिन नई परियोजना से अतिरिक्त 178 गांव में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक क्षेत्र के लिए पानी की सप्लाई होगी। 41780 एसटी और 6145 एससी परिवार समेत कुल 79650 परिवार इससे लाभान्वित होंगे। परियोजना में बागबाहरा और झलप क्षेत्र के कई असिंचित रकबा तक न केवल सिंचाई सुविधा मिलेगी, बल्कि वाटर लेबल रिचार्ज कर पेयजल संकट को भी दूर किया जाना योजना का मकसद होगा। भूमिगत स्टील पाइप से जुड़ेंगे जलाशय यह पहली परियोजना है, जिसमें इंजीनियरिंग के नए तकनीकी मापदंडों का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। 88 किमी लंबे भूमिगत स्टील पाइप से सीकासार बैराज का अनुपयुक्त जल सीधे कोडार पहुंचेगा, सोखने और वाष्पीकरण का प्रभाव से 25 फीसदी तक नष्ट होने वाला जल सुरक्षित हो जाएगा।विभाग का दावा है कि इस पद्धति से 30 से 35 मिलियन घन मीटर पानी की बचत होगी जिससे अतिरिक्त सिंचाई या जल संचय किया जाएगा। यही वजह है कोडार के अलावा प्रोजेक्ट में केशवा जलाशय के सूखे को दूर किया जाएगा। स्काडा तकनीकी से गांवों में पहुंचेगा पानी डेम टू डेम जोड़ने की पहली परियोजना में सेंसर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।जिन गांव से पाइप लाइन गुजरेगी वहां प्रत्येक गांव के लिए एक आउट लेट भी होगा।जरूरत के मुताबिक इस आउटलेट में पानी ओटोमेटिक होगा।इसे इंजीनियरों ने स्काडा तकनीकी से कंट्रोल करेंगे।कमांड रूम में सेंसर टेक्नोलॉजी इसकी मॉनिटरिंग करेगा। नवाचार की जिद से मिली सफलता संभाग में कार्यपालन अभियंता एसके बर्मन महासमुंद में सेवा देने के बाद गरियाबंद में 4 साल से सेवा से रहे हैं। इन्होंने बांध को बांध से जोड़ने पर विचार किया, और 2022 में इसे बड़े अफसरों के सामने प्रस्तुत किया. सिंचाई विभाग के सचिव राजेश टोप्पो को भी योजना रास आ गई। तकनीकी में नवाचार था, ऐसे में इसकी सर्वे की मंजूरी 2023 में मिल गई। बर्मन ने बताया कि वर्तमान में 58 हजार हेक्टेयर को पर्याय सिंचाई सुविधा देने के अलावा सिकासार का प्रवाह व्यर्थ जा रहा था। द्वितीय चरण की भी शुरू हो गई है तैयारी नदी को नदी से, नहर को नहर से जोड़ने की परियोजना चल रहे थे, इसी कॉन्सेप्ट पर हमने बांध को बांध से जोड़ने की योजना का प्रारूप सरकार के समक्ष रखी, ड्रोन और आधुनिक लिडार सर्वे के अलावा, जिसकी कई चरणों के परीक्षण और दूरदर्शिता को देखते हुए सरकार ने मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि द्वितीय चरण में सिकासार को अमानाला और सोन नदी से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

बिलासपुर में खाद वितरण में गड़बड़ी, दो दुकानों की 21 दिन की बिक्री पर रोक, लाइसेंस निलंबित

बिलासपुर : खाद वितरण में गड़बड़ी : दो दुकानों पर 21 दिन की बिक्री पर रोक, लाइसेंस निलंबित उर्वरक जांच में अनियमितता उजागर, दो केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किसानों के हित में कार्रवाई : स्टॉक में गड़बड़ी पर दो खाद दुकानें सील बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड में खाद वितरण में गंभीर अनियमितता सामने आने पर कृषि विभाग की उड़नदस्ता टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में स्टॉक और मशीन रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने पर दो खाद दुकानों की बिक्री पर 21 दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है।          कृषि विभाग की उड़नदस्ता टीम द्वारा तखतपुर विकासखंड में संचालित दो खाद दुकानों पर छापामार कार्रवाई करते हुए खाद वितरण में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। जांच के दौरान दुकानों के पास मशीन और भौतिक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया, जिसके चलते दोनों केंद्रों को 21 दिनों के लिए खाद बिक्री से प्रतिबंधित कर दिया गया है। उप संचालक कृषि पीडी हथेश्वर ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन में किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है। इसी कड़ी में तखतपुर क्षेत्र के मेसर्स किसान सेवा केंद्र और मेसर्स अमन कृषि केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया।          निरीक्षण के दौरान किसान सेवा केंद्र में मशीन स्टॉक में यूरिया 750 बोरी दर्ज थी, जबकि भौतिक रूप से 550 बोरी ही पाई गई। वहीं 200 बोरी स्टॉक बिना मशीन में दर्ज किए रखी गई थी। इसी तरह अमन कृषि केंद्र में मशीन रिकॉर्ड में 1679 बोरी यूरिया दर्शाई गई, जबकि मौके पर स्टॉक नहीं मिला। दोनों प्रतिष्ठानों में उर्वरक भंडारण और वितरण का निर्धारित रजिस्टर भी संधारित नहीं पाया गया। इसे उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 का उल्लंघन मानते हुए संबंधित दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर आगामी 21 दिनों के लिए विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कार्रवाई के दौरान कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित अमला उपस्थित रहा। हाथेश्वर ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।