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छत्तीसगढ़ की नई नीति: ‘शहरी गैस वितरण नीति-2026’ से अब सीधे किचन तक पहुंचेगी गैस

रायपुर  स्वच्छ ऊर्जा और शहरी जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति, 2026 को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया यह निर्णय राज्य की ऊर्जा संरचना को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस (PNG) को सीधे घरों तक पहुंचाना है। इसके लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग, आपूर्ति में देरी या उपलब्धता को लेकर होने वाली अनिश्चितताओं से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।  रायपुर सहित राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से गैस पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे 24 घंटे निर्बाध और सुरक्षित गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी  राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में पाइपलाइन गैस वितरण प्रणाली पहले से संचालित है और इसे व्यापक रूप से प्रभावी माना गया है। इन महानगरों में रसोई गैस के पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी आई है और आपूर्ति अधिक नियमित व सुगम बनी है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय उसी दिशा में एक तार्किक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में लंदन, टोक्यो और सिंगापुर जैसे शहरों में पाइपलाइन आधारित गैस वितरण लंबे समय से स्थापित व्यवस्था है। इन शहरों के अनुभव बताते हैं कि यह प्रणाली न केवल उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक है, बल्कि ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से भी बेहतर विकल्प प्रदान करती है। निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी नीति के लागू होने से राज्य में गैस अवसंरचना के विकास के साथ निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे निर्माण, वितरण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इसके साथ ही स्वच्छ ईंधन के उपयोग से वायु प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है, जो तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल छत्तीसगढ़ को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख राज्य के रूप में स्थापित कर सकती है। उपभोक्ता सुविधा, औद्योगिक जरूरतों और पर्यावरणीय संतुलन—तीनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह नीति राज्य के शहरी विकास को नई गति देने की क्षमता रखती है।

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री साय

मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण हेतु विशेष सत्र: एक तिहाई आरक्षण के संकल्प को मिला व्यापक समर्थन महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति किया आभार प्रकट रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव याद रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों तथा उनके सशक्तिकरण के लिए सशक्त स्वर प्रदान किया। सदन में वरिष्ठ विधायकों और महिला नेतृत्व ने भी पूरे मनोयोग से चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए और इस महत्वपूर्ण संकल्प का समर्थन किया। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिशा में हर सकारात्मक पहल का समर्थन आवश्यक है।

पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल: बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी

पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल – बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी'                            बलौदाबाजार मन की बात' से राष्ट्रीय क्षितिज तक का सफर- प्रायः सभी प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि प्रकृति कभी भी अपना ऋण नहीं भूलती। यदि मनुष्य पूरी ईमानदारी से उसके संरक्षण की ओर एक कदम बढ़ाता है, तो प्रकृति उसे अपनी भव्यता से कई गुना वापस लौटाती है। छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो सदियों से अपनी नैसर्गिक संपदा और सघन वन क्षेत्रों के लिए विख्यात रही है, आज वन्यजीव संरक्षण के एक नए स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही है।   छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहाँ इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुँच गई है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया। हाल ही में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में जब बारनवापारा अभ्यारण्य के काले हिरणों की सफल वापसी का उल्लेख किया, तो यह केवल एक राज्य की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि भारत के पर्यावरण मानचित्र पर वन्यजीव संरक्षण का एक नया अध्याय बन गई।      विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता- इस गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हैं। उन्होंने इस सफलता को राज्य की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग और वहां के स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।        वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों (Blackbucks) का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था। लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ने इस असंभव लक्ष्य को वास्तविकता में बदल दिया। फरवरी 2026 का महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में 30 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में 'सॉफ्ट रिलीज' पद्धति से मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया केवल उन्हें जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वे नए वातावरण में बिना किसी तनाव (Stress-free) के रच-बस सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में वृद्धि हुई।      प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष- इस महाअभियान के पीछे उन जांबाज अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) श्रीमती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम ने एक ढाल की तरह काम किया। वर्तमान में इन हिरणों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है। रामपुर ग्रासलैंड:- एक सुरक्षित भविष्य का पालना बारनवापारा अभ्यारण्य का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक 'केस स्टडी' बन सकता है। यहाँ केवल काले हिरण की प्रजाति का पुनर्वास नहीं हुआ, बल्कि उनके लिए एक संपूर्ण आवास तंत्र विकसित किया गया। रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और घास की स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन वे मुख्य कारक हैं, जिन्होंने काले हिरणों को वहां फलने-फूलने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनूठी मिसाल पेश की है। काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।                   भविष्य की राह और राष्ट्रीय संदेश- बारनवापारा अभ्यारण्य में गूंजती काले हिरणों की चहल-कदमी और उनकी कुलाचें इस बात का जीवंत साक्ष्य हैं कि यदि इंसान प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी समझ ले, तो खोई हुई धरोहर को फिर से लौटाया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक 'लिविंग लैबोरेटरी' (जीवंत प्रयोगशाला) के रूप में कार्य करेगी, जहाँ वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीख सकेंगी।                मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' ने हमारे नवाचारों को एक वैश्विक मंच प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़कर एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रही है, जहाँ मनुष्य और वन्यजीव दोनों सुरक्षित हों।आज जब हम बारनवापारा अभ्यारण्य की खुली वादियों में कुलाचें भरते काले हिरणों को देखते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं मुस्कुराते हुए छत्तीसगढ़ के इस सराहनीय प्रयास को अपना आशीर्वाद दे रही है। यह छत्तीसगढ़ के गौरव का वह उत्कर्ष है, जिसकी चमक अब पूरे देश को प्रेरित कर रही है।  धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

राजनांदगांव में खेल सुविधाओं का विस्तार: 5 एकड़ भूमि पर खेल मैदान और क्रिकेट अकादमी, मुख्यमंत्री साय को धन्यवाद

राजनांदगांव को मिली खेल विकास की बड़ी सौगात: आधुनिक खेल मैदान व क्रिकेट अकादमी के लिए 5 एकड़ भूमि आवंटित, राजनांदगांववासियों के साथ विस अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने जताया मुख्यमंत्री साय का  आभार युवाओं के सपनों को मिलेगा नया आसमान: कैबिनेट के ऐतिहासिक निर्णय से राजनांदगांव में खेल अधोसंरचना को बढ़ावा रायपुर  विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के पश्चात राजनांदगांव के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी से उनके विधानसभा स्थित कक्ष में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान हाल ही में आयोजित कैबिनेट बैठक में राजनांदगांव के खेल विकास को लेकर लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय पर विस्तार से चर्चा हुई। कैबिनेट द्वारा आधुनिक खेल मैदान एवं क्रिकेट अकादमी के निर्माण हेतु जिला क्रिकेट एसोसिएशन राजनांदगांव को सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा अंतर्गत दर्ज भूमि में से 5 एकड़ भूमि रियायती दर पर आवंटित करने के निर्णय पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने इस निर्णय को क्षेत्र के खेल प्रतिभाओं के लिए एक नई दिशा देने वाला कदम बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। इस पहल से न केवल क्षेत्र में खेल अधोसंरचना सुदृढ़ होगी, बल्कि युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के बेहतर अवसर भी प्राप्त होंगे।

तेन्दूपत्ता से बदली जिंदगी, बढ़ी आय और सम्मान बढ़ी आय और सम्मान

रायपुर तेन्दूपत्ता से बदली जिंदगी, बढ़ी आय और सम्मान तेन्दूपत्ता संग्रहण आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए आजीविका का एक अत्यंत सशक्त और महत्वपूर्ण आधार है। इसे जंगलों का हरा सोना भी कहा जाता है। यह कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है और विशेष रूप से भीषण गर्मी के महीनों में जब अन्य रोजगार के साधन कम होते हैं, तब यह आय का एक बड़ा जरिया बनता है। छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता संग्रहण आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए आजीविका का एक मजबूत आधार है। यहां उत्पादित तेन्दूपत्ता अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।  कटघोरा वनमण्डल में यह कार्य संगठित रूप से संचालित हो रहा है, जहां 7 परिक्षेत्रों में 44 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियां सक्रिय हैं। हर वर्ष मई के पहले सप्ताह से तेन्दूपत्ता संग्रहण शुरू होता है। इससे पहले फड़ों (संग्रहण केंद्रों) का चयन और शाखा कर्तन का कार्य किया जाता है, जिससे अच्छी गुणवत्ता के पत्ते प्राप्त हों। वर्ष 2026 में केवल शाखा कर्तन कार्य के लिए ही 47 लाख 54 हजार रूपए से अधिक का भुगतान किया गया, जिससे स्थानीय लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिला।     वर्ष 2025 में कटघोरा वनमण्डल के 486 फड़ों में 78, हजार 300 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से 71,737 मानक बोरा (94.02 प्रतिशत) तेन्दूपत्ता संग्रहण किया गया। इस कार्य में 66 हजार 331 संग्राहकों ने भाग लिया, जिन्हें 5 हजार 500 रूपए प्रति मानक बोरा की दर से कुल 39 करोड़ 45 लाख रूपए से अधिक पारिश्रमिक सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया गया। इससे भुगतान में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं। सरकार की पहल से तेन्दूपत्ता का संग्रहण दर भी बढ़ा है। वर्ष 2023 में 4 हजार  रूपए प्रति मानक बोरा मिलने वाली दर को वर्ष 2024 से बढ़ाकर 5 हजार 500 रूपए कर दिया गया, जो वर्ष 2026 में भी लागू है। इसके साथ ही तेन्दूपत्ता व्यापार से होने वाली आय का 80 प्रतिशत हिस्सा संग्राहकों को बोनस के रूप में दिया जाता है। वर्ष 2019 से 2022 के बीच करोड़ों रूपए का बोनस सीधे हजारों संग्राहकों के खातों में पहुंचाया गया, जिससे उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। तेन्दूपत्ता संग्राहकों के कल्याण के लिए कई जनहितकारी योजनाएं  चरणपादुका योजना के तहत वर्ष 2025 में 63 हजार 636 महिला संग्राहकों को निःशुल्क जूते प्रदान किए गए। राजमोहिनी देवी सामाजिक सुरक्षा योजना में 84 संग्राहकों को 1.07 करोड़ रूपए से अधिक की सहायता दी गई। समूह बीमा योजना के तहत 90 हितग्राहियों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई और शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से सैकड़ों बच्चों को लाखों रूपए की छात्रवृत्ति दी गई, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिली।  इन योजनाओं का प्रभाव यह है कि अब तेन्दूपत्ता संग्रहण केवल एक मौसमी काम नहीं रहा, बल्कि यह स्थायी आय और सामाजिक सुरक्षा का माध्यम बन गया है। संग्राहकों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है और जीवन स्तर में स्पष्ट सुधार दिखाई दे रहा है। यह सफलता दिखाती है कि जब शासकीय योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो जंगल से जुड़ी आजीविका भी सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि का मार्ग बन सकती है।

आज से शुरू होगा सुशासन तिहार 2026: 01 मई से 10 जून तक प्रदेश भर में चलेगा अभियान

रायपुर  छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” की शुरुआत आज से होने जा रही है। यह अभियान 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में चलाया जाएगा, जिसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे।                 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण ही सुशासन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आमजन को पारदर्शी, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पहले चरण में लंबित मामलों के निराकरण पर जोर                अभियान के पूर्व चरण में ही कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि 30 अप्रैल तक सभी लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से समाधान सुनिश्चित करें। इसमें—  * नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरण * मनरेगा के लंबित मजदूरी भुगतान * हितग्राहीमूलक योजनाओं के लंबित भुगतान * आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र * बिजली, ट्रांसफार्मर और पेयजल (हैंडपंप) समस्याएं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान रखा जाएगा, साथ ही पात्र हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रदेशभर में लगेंगे समाधान शिविर सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून तक लगेंगे शिविर  * ग्रामीण क्षेत्रों में 15–20 ग्राम पंचायतों के समूह में शिविर * शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर आधारित आयोजन * मौके पर ही आवेदन स्वीकार और लाभ वितरण * अधिकतम एक माह में आवेदनों का निराकरण                  शिविरों में शासन की योजनाओं के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी और प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और सीधा संवाद                 अभियान के दौरान मंत्रीगण, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव और प्रभारी सचिव समय-समय पर शिविरों में पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे और आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। CM करेंगे औचक निरीक्षण और समीक्षा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर— * विकास कार्यों का औचक निरीक्षण * हितग्राहियों से सीधा फीडबैक * जिला स्तर पर समीक्षा बैठकें करेंगे                निरीक्षण के बाद वे प्रेसवार्ता के माध्यम से जानकारी साझा करेंगे और नागरिकों व सामाजिक संगठनों से सुझाव भी लेंगे। व्यापक प्रचार से बनेगा जन आंदोलन   जनसम्पर्क विभाग और जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। डिजिटल, प्रिंट और स्थानीय माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाएगा

कातिलाना इश्क: राजनांदगांव में प्रेमिका ने पूर्व प्रेमी संग मिलकर युवक की हत्या, दोनों को उम्रकैद

राजनांदगांव फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चर्चित हत्या मामले में प्रेमिका और उसके पूर्व प्रेमी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर अर्थदंड भी लगाया है। मामला 13 जुलाई 2022 का है, जब लिटिया गांव निवासी हिरावन मंडले की हत्या कर दी गई थी। लंबी सुनवाई के बाद 30 अप्रैल को फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार साहू ने फैसला सुनाया। मृतक हिरावन मंडले (31) और गांव की ही महिला मोम‍िन वर्मा उर्फ मोना (28) के बीच प्रेम-प्रसंग था, लेकिन महिला का उसके मायके कोलिहापुरी के पूर्व प्रेमी डिकेश्‍वर वर्मा (37) भी संपर्क में था। 

श्रमिक समाज की आधारशिला हैं और उनके बिना विकास की कल्पना अधूरी: श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन

रायपुर अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (मई दिवस) के अवसर पर प्रदेश के श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने राज्य के श्रमिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी मेहनतकश श्रमिकों के सुखमय और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि 1 मई का दिन श्रमिकों के परिश्रम, समर्पण और योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने का विशेष अवसर है।                     मंत्री  देवांगन ने कहा कि श्रमिक समाज की आधारशिला हैं और उनके बिना विकास की कल्पना अधूरी है। उन्होंने श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक खुशहाली के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार श्रमिकों सहित सभी जरूरतमंद वर्गों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों और उनके परिवारों को विभिन्न योजनाओं का लाभ तेजी से उपलब्ध कराया जा रहा है। श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित तीनों मंडलों- भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, संगठित कर्मकार मंडल और राज्य सामाजिक सुरक्षा एवं श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।                 मंत्री  देवांगन ने कहा कि बीते सवा दो वर्षों में विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 800 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे न केवल श्रमिकों बल्कि उनके परिवारों के सामाजिक और आर्थिक स्तर में भी सुधार आया है।

डबल इंजन की रफ्तार, योजनाओं की बौछार- किसान, आदिवासी, महिला और युवा बने केंद्र में

रायपुर छत्तीसगढ़ में बीते लगभग ढाई वर्षों में शासन की कार्यशैली को लेकर एक नई परिभाषा गढ़ने की कोशिश दिखाई देती है। विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 'सुशासन' को केवल एक नारा नहीं, बल्कि जमीनी क्रियान्वयन का आधार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सीमित समयावधि करीब 2 वर्ष 4 माह 17 दिन में ही सरकार ने विकास का जो खाका तैयार किया है, उसे भविष्य की बड़ी तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश की पहचान ‘धान का कटोरा’ के रूप में रही है, लेकिन इस पहचान को सम्मान देने का काम हालिया नीतिगत निर्णयों में स्पष्ट दिखता है। किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय करना केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि अन्नदाताओं के आत्मविश्वास को मजबूत करने की पहल भी है। इसके साथ ही, तेंदूपत्ता संग्राहकों जिन्हें ‘हरा सोना’ से जुड़ा श्रमिक वर्ग कहा जाता है, के लिए पारिश्रमिक दर को 5500 रुपये करना और चरण पादुका वितरण जैसे निर्णयों ने आदिवासी क्षेत्रों में राहत पहुंचाई है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही लगभग 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देना सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। बेघर और जरूरतमंद परिवारों को छत उपलब्ध कराना सुशासन की पहली सीढ़ी के रूप में देखा गया।राज्य सरकार ने 70 लाख से अधिक विवाहित महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता राशि देने की पहल की। यह राशि भले सीमित लगे, लेकिन ग्रामीण और जरूरतमंद परिवारों के लिए यह आर्थिक संबल का काम कर रही है। यह कदम महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों ने असर दिखाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री श्री अमित शाह की रणनीति और संकल्प के साथ 31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्ति का लक्ष्य एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। इससे विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है।   विष्णु देव साय सरकार ने युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 'छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग' से जुड़े मामलों में जांच कराना सरकार के जवाबदेही वाले दृष्टिकोण को दर्शाता है। साथ ही, खेल गतिविधियों विशेषकर बस्तर व सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया गया है। विगत वर्ष आयोजित ‘सुशासन तिहार’ को इस वर्ष भी 1 मई से 10 जून तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य योजनाओं की जमीनी हकीकत को परखना, नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और प्रशासन को सीधे जनता से जोड़ना है। श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य के समन्वय को 'डबल इंजन सरकार' के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि इस समन्वय से विकास योजनाओं को गति मिली है और इसका लाभ प्रदेश के लगभग तीन करोड़ नागरिकों तक पहुंच रहा है। ‘बगिया के विष्णु’ के रूप में पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों ईब से इंद्रावती तक विकास का जो रोडमैप तैयार किया है, वह समावेशी विकास की अवधारणा को दर्शाता है। लक्ष्य स्पष्ट है, अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना। छत्तीसगढ़ में सुशासन की यह यात्रा अभी 'प्रारंभिक चरण' में है, लेकिन दिशा स्पष्ट दिखाई देती है। सरकार की प्राथमिकताओं में किसान, महिला, आदिवासी, युवा और ग्रामीण समाज केंद्र में हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये नीतियां किस तरह स्थायी बदलाव का रूप लेती हैं, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि विकास की यह कहानी गति पकड़ चुकी है।

कटघोरा एवं पाली क्षेत्र के उपभोक्ताओं को होगी निर्बाध बिजली की आपूर्ति

रायपुर 132 केव्ही उपकेन्द्र छुरीखुर्द में 40 एमव्हीए का अतिरिक्त ट्रांसफार्मर उर्जीकृत छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधाओं में उत्तरोत्तर वृद्धि करते हुये ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में विद्यमान उपकेन्द्रों में स्थापित पॉवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का कार्य सर्वाेच्च प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। इसी क्रम में 132 केव्ही उपकेन्द्र कोरबा जिले के छूरीखुर्द में 4 करोड़ 31 लाख रूपये की लागत से 40 एम.व्ही.ए. क्षमता का अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। विद्युत कंपनी के विशेष प्रयासों से विद्युत विकास के लिए स्वीकृत इस कार्य से उपकेन्द्र के परिधि में आने वाले उपभोक्ताओं को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा अब उन्हे उच्च गुणवत्तापूर्ण तथा निर्बाध विद्युत की आपूर्ति होगी।  ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक  आर.के.शुक्ला ने स्वीच का बटन ऑन कर नये ट्रांसफार्मर के माध्यम से विद्युत सप्लाई प्रारंभ की तथा उन्होने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्युत विभाग उपभोक्ताओं की सुविधाओं में निरंतर वृद्धि करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कडी में आज इस उपकेन्द्र में अतिरिक्त 40 एमव्हीए क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर को उर्जीकृत किया गया है, जिसका लाभ इस क्षेत्र के 50 गांवों के उपभोक्ताओं को मिलेगा।