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बूझमाड़ की बेटी वनिता नेताम ने रचा इतिहास: ‘आदि पर्व 2026’ में वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम

रायपुर अबूझमाड़ की बेटी वनिता नेताम ने ‘आदि पर्व 2026’ में रचा इतिहास नवा रायपुर स्थित आदिवासी संग्रहालय में 13 एवं 14 मार्च 2026 को आयोजित ‘आदि पर्व 2026’ में छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की भव्य झलक देखने को मिली। इस आयोजन में प्रदेश की विभिन्न जनजातियों के प्रतिभागियों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य, गीत और सांस्कृतिक परंपराओं की आकर्षक प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम में नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र से शामिल हुई प्रतिभागी वनिता नेताम ने पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में मंच पर अपनी संस्कृति की शानदार प्रस्तुति दी। उनकी पारंपरिक पोशाक और आभूषणों ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया और उपस्थित दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कार्यक्रम के दौरान आयोजित ट्राइबल अटायर शो को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में भाग लेकर वनिता नेताम ने भी अपना नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया, जो नारायणपुर जिले और अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। आदि पर्व 2026 का आयोजन आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत को संरक्षित करने तथा उसे देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया। इस मंच के माध्यम से जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक पहचान मिल रही है।

बोधघाट का भविष्य: नक्सल खत्म होते ही जंगल आधारित अर्थव्यवस्था में आ सकता है बड़ा बदलाव

जगदलपुर बस्तर के जंगलों में इन दिनों महुआ की खुशबू फैली हुई है। सुबह होते ही आदिवासी महिलाएं और बच्चे टोकरी लेकर पेड़ों के नीचे गिरे फूल बीनने निकल पड़ते हैं। यही महुआ कई परिवारों के लिए नकदी का बड़ा सहारा है। कुछ महीनों बाद बारिश आएगी और खेतों में धान, कोदो व कोसरा बोया जाएगा। फसल कटते ही खेत फिर खाली हो जाएंगे और ग्रामीणों के हाथ भी। यही कारण है कि प्रकृति से संपन्न होने के बावजूद बस्तर का बड़ा हिस्सा आज भी आर्थिक रूप से कमजोर बना हुआ है। दरअसल यहां की खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। बरसात खत्म होते ही खेत सूख जाते हैं और सिंचाई के अभाव में खेती रुक जाती है। ऐसे में ग्रामीणों की आय का बड़ा हिस्सा महुआ, तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज पर टिका रहता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की यही कमजोरी लंबे समय तक इस इलाके में माओवादी प्रभाव के फैलने की एक बड़ी वजह बनी। ऐसे में दक्षिण बस्तर की जीवनरेखा कही जाने वाली इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट परियोजना को इस स्थिति को बदलने वाली योजना के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह परियोजना जमीन पर उतरती है तो बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे जिलों में करीब सात लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिल सकती है। इससे खेती की तस्वीर बदलने के साथ-साथ उस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिल सकती है, जिसने कभी माओवादी आंदोलन को यहां जमीन दी थी। 60 साल बाद भी अधूरी इंद्रावती की सिंचाई योजनाएं     इंद्रावती नदी पर सिंचाई परियोजनाओं की परिकल्पना वर्ष 1960 में पं. जवाहरलाल नेहरु के दौर में की गई थी।     जनवरी 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने बहुउद्देशीय बोधघाट परियोजना की आधारशिला रखी थी।     इसके लिए केंद्र सरकार ने विश्व बैंक से करीब 300 करोड़ रुपये का ऋण भी लिया था।     करीब तीन वर्ष तक काम चलने के बाद वन एवं पर्यावरण संबंधी आपत्तियों और प्रभावित लोगों के विरोध के चलते 1986 में परियोजना पूरी तरह रोक दी गई।     दरअसल 1974 में बस्तर में 233 किमी बहने वाली इंद्रावती नदी पर बोधघाट सहित नौ सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हुई थीं।     1975 में नदी जल बंटवारे को लेकर ओडिशा से सहमति भी मिल गई थी, लेकिन आज तक एक भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी।     नतीजतन दक्षिण-मध्य बस्तर में केवल लगभग 12 प्रतिशत कृषि भूमि तक ही सिंचाई पहुंच पाई है, जिसके कारण किसान रबी की फसल मुश्किल से ले पाते हैं। बोधघाट पर राजनीति हावी, इसलिए रफ्तार सुस्त राज्य सरकार ने बोधघाट परियोजना को नए स्वरूप में आगे बढ़ाने की पहल की है और केंद्र से भी स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन डूबान क्षेत्र में आने वाले 52 जनजातीय गांवों के पुनर्वास और विस्थापन की चुनौती के कारण परियोजना की रफ्तार सुस्त है। यहीं कारण है कि एक ऐसी परियोजना जो पूरे बस्तर का भविष्य बदल सकती है, राजनीतिक दलों के नेता खुलकर पहल करने से बचते दिख रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि यदि विरोध हुआ तो उनकी राजनीतिक जमीन खिसक सकती है। प्रस्ताव के अनुसार बोधघाट को बहुउद्देशीय डैम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सिंचाई के साथ बिजली उत्पादन भी संभव होगा। साथ ही इसे नदी जोड़ो योजना से जोड़कर इंद्रावती के जल से बस्तर के बड़े हिस्से तक सिंचाई पहुंचाने की योजना है। इसके अलावा देउरगांव, मटनार और जगदलपुर की महादेव बैराज परियोजनाओं को भी इस बार राज्य बजट में शामिल किया गया है। यदि ये योजनाएं साकार होती हैं, तो बस्तर के हजारों गांवों की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। बोधघाट बनता तो कमजोर पड़ती माओवाद की जड़ें बस्तर में सिंचाई संकट के समाधान के लिए 1960 के दशक में इंद्रावती नदी की जल क्षमता के उपयोग हेतु बोधघाट परियोजना की अवधारणा बनाई गई थी। यदि यह योजना समय पर पूरी हो जाती, तो दक्षिण बस्तर की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव था। सिंचाई के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ते और गांवों में आर्थिक स्थिरता आती। 1980 के दशक में जब माओवादी संगठन दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय हुए, तब उन्होंने इस परियोजना का विरोध शुरू कर दिया। उन्हें आशंका थी कि बड़े विकास कार्यों से क्षेत्र में उनकी पकड़ कमजोर हो जाएगी। विकास के अभाव और कमजोर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का लाभ उठाकर माओवादियों ने अगले चार दशकों तक इस इलाके में अपनी जड़ें मजबूत कर लीं। इधर पड़ोसियों ने बदली तस्वीर     बस्तर की तुलना यदि पड़ोसी राज्य तेलंगाना और ओडिशा से की जाए तो अंतर साफ दिखाई देता है। बस्तर की सीमा से सटे राज्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा जलप्रबंधन और सिंचाई योजनाओं के मामले में 10 गुना आगे है।     इन राज्यों में बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाओं, जल प्रबंधन और तालाबों के पुनर्जीवन से खेती की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है।     कई क्षेत्रों में किसान साल में दो से तीन फसल ले रहे हैं।     आंध्रप्रदेश में पोलावरम, तेलंगाना में समक्का सागर परियोजना व गोदावरी-कृष्णा-कावेरी लिंक परियोजना, ओडिशा में खातीगुड़ा, कोलाब व तेलांगिरी डैम जैसी जल प्रबंधन योजनाओं के कारण कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।     इसके विपरीत बस्तर में खेती आज भी मानसून पर निर्भर है। सिचांई परियोजना बदल सकती है जंगल का गणित बस्तर की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां नदियां और वर्षा तो भरपूर हैं, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। दशकों पहले तैयार विकास योजनाओं में बताया गया था कि पूरे बस्तर में केवल एक प्रतिशत क्षेत्र में ही सिंचाई उपलब्ध थी। चार दशक बाद भी यह आंकड़ा मुश्किल से 1.5 से 2 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर देश के करीब 44 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। सिंचाई की कमी के कारण बस्तर के अधिकांश किसान साल में केवल एक ही फसल ले पाते हैं। पानी की नियमित उपलब्धता हो तो किसान दो या तीन फसल उगा सकते हैं, जिससे उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है। बस्तर में लगभग छह से सात लाख किसान परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे … Read more

पूरा हुआ मनीषा का सपना, मिला सुरक्षित आशियाना मनीषा

रायपुर एक सुरक्षित और पक्का घर हर परिवार के जीवन में स्थिरता, सम्मान और सुकून लेकर आता है। जब वर्षों का सपना हकीकत बनता है, तो वह केवल एक मकान नहीं बल्कि खुशियों और आत्मविश्वास की नई शुरुआत भी होता है। ऐसा ही सुखद बदलाव कोरबा नगर निगम के बुधवारी बाजार की मती मनीषा शुक्ला के जीवन में आया, जब प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के माध्यम से उनका पक्के घर का सपना साकार हुआ। मती मनीषा शुक्ला एक निजी स्कूल में शिक्षिका है। उनके पति  विपिन कुमार शुक्ला और वे लंबे समय से अपने परिवार के लिए एक पक्का मकान बनवाने का विचार कर रहे थे, लेकिन सीमित आय के कारण एक साथ बड़ी राशि जुटा पाना उनके लिए आसान नहीं था। वे जिस पुराने घर में रहते थे, वह पुराना हो चुका था। बारिश के मौसम में घर में पानी टपकने और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता था। घर की स्थिति खराब होने के कारण समय-समय पर मरम्मत करानी पड़ती थी और जगह कम होने से मेहमानों के आने पर भी असुविधा होती थी। वर्ष 2025-26 में हुए सर्वे के दौरान उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 की सूची में शामिल हुआ। आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनका आवास स्वीकृत हो गया। जल्दी ही योजना की पहली किस्त उनके बैंक खाते में आ गई, जिससे उन्होंने अपने सपनों के घर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया। मनीषा ने योजना से मिली राशि के साथ अपनी वर्षों की जमा पूंजी भी जोड़ी और एक मजबूत तथा सुंदर पक्का मकान बनवाया। अब उनका घर पूरी तरह तैयार हो चुका है। वे अपने परिवार के साथ नए घर में आराम और सुकून के साथ जीवन व्यतीत कर रही हैं। पक्का मकान बनने से मनीषा की न केवल दैनिक जीवन की परेशानियाँ खत्म हुई हैं, बल्कि समाज में उनकी प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में रह रहा है। वह कहती हैं प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके जैसे कई परिवारों को पक्के घर का सपना पूरा करने का अवसर दिया है।

HPV टीके का सुरक्षा कवच: सरकार का बड़ा कदम, किशोरियों के लिए मुफ्त वैक्सीनेशन अभियान

जगदलपुर. बस्तर में अब स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने एचपीवी टीकाकरण शुरू हुआ। जिला अस्पताल में अभियान की शुरुआत के साथ ही टीके लगाए गए। 14 से 15 वर्ष की करीब 9500 किशोरियों को यह वैक्सीन दी जाएगी। यह वही टीका है जो बाजार में महंगा होता है, लेकिन यहां मुफ्त दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे सभी ब्लॉकों तक पहुंचाने की तैयारी कर ली है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह टीका कैंसर के खतरे को काफी कम करता है। पिछले वर्षों में इस बीमारी से कई महिलाओं की जान जा चुकी है। अधिकारियों ने कहा समय पर टीकाकरण ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। अभियान स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी चलाया जाएगा। लक्ष्य है कि कोई भी किशोरी इस सुरक्षा से वंचित न रहे। यह पहल बस्तर में महिला स्वास्थ्य को लेकर नई उम्मीद बनकर उभरी है। किशोरियों को मिलेगा कैंसर से सुरक्षा एचपीवी वैक्सीन के माध्यम से महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जाती है। यह टीका विशेष रूप से किशोरियों के लिए प्रभावी माना जाता है। टीकाकरण के लिए वही किशोरियां पात्र होंगी जिन्होंने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो, लेकिन 15 वर्ष का जन्मदिन न मनाया हो। आयु प्रमाण के लिए आधार कार्ड या अन्य फोटो पहचान पत्र मान्य होगा। पहचान पत्र उपलब्ध न होने की स्थिति में अभिभावक द्वारा हस्ताक्षरित शपथ पत्र भी मान्य किया जाएगा। टीकाकरण के बाद लाभार्थियों का पंजीकरण यू-विन पोर्टल पर किया जाएगा और उन्हें डिजिटल प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक लाभार्थी को टीकाकरण के बाद 30 मिनट तक निगरानी में रखा जाएगा तथा सभी सत्रों में चिकित्सा अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से सुरक्षित मातृत्व को दिया जा रहा बढ़ावाः मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मातृ वंदन योजना में छत्तीसगढ़ ने ऐसे ही नहीं मारी बाजी शिकायतों का तेज निराकरण और मंजूरी पर फोकस कर हासिल किया देश में पहला स्थान प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से सुरक्षित मातृत्व को दिया जा रहा बढ़ावाः मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय  आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों ने सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की उपलब्धि रायपुर प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना को लाभार्थियों तक पहुंचाने में छत्तीसगढ़ अव्वल रहा है। इससे एक बार फिर साबित हुआ है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में  डबल इंजन की सरकार न सिर्फ जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से अमल में लाती है, बल्कि प्रशासनिक सक्रियता से उसे हर तबके तक समय पर पहुंचाने के अपने वादे को पूरा करती है।  गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रोत्साहित करने की इस केंद्रीय योजना के तेजी से क्रियान्वयन और शिकायतों का त्वरित निपटान कर छत्तीसगढ़ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह सिर्फ एक सरकारी योजना का राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वयन भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर पर्यवेक्षक, परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर के अधिकारियों तक के सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की गई उपलब्धि है। जच्चा एवं बच्चा का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान इस दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। ऐसे मिली उपलब्धि प्रशासनिक अमले द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लगातार मॉनिटरिंग की गई और लाभार्थियों के पंजीयन पर मुख्य रूप से फोकस किया गया। इस योजना का लाभ लेने के लिए वर्ष 2023-24 में जहां 1,75,797 गर्भवती महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, वहीं वर्ष 2024-25 में 2,19,012 रजिस्ट्रेशन किए गए। इसे ही लक्ष्य मानते हुए वर्ष 2025-26 में  फरवरी तक 2,04,138 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया जो लक्ष्य का 93.3 प्रतिशत है। रजिस्ट्रेशन के बाद इसे तुरंत मंजूरी देने पर फोकस किया गया। तय प्रक्रिया के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा फार्म भरने, पर्यवेक्षक द्वारा इसके सत्यापन और परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर पर मंजूरी देने में तेजी लाई गई। भरे गए  आवेदनों के 83 प्रतिशत का परीक्षण कर इसे भुगतान के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से छत्तीसगढ़ को मिली स्वीकृति की दर भी सबसे ज्यादा 83.87 रही है। इसके बाद तीसरी कैटेगरी शिकायतों के निराकरण के संबंध में आंकड़ों का परीक्षण किया गया। लाभार्थियों की ज्यादातर शिकायतें भुगतान न होने को लेकर थी। इस पर तत्काल ध्यान दिया गया और कोई कमी थी तो उसे दूर किया गया। हालांकि राज्य सरकार ने सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया गया, लेकिन केंद्र सरकार के आंकड़ों में 30 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतों की संख्या 7 प्रतिशत पाई गई है। इसके बावजूद 93 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण कर राज्य पहले स्थान पर रहा।  यदि तीन वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत कुल 5,98,947 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया, जिनमें से 5,40,624 को स्वीकृति दे दी गई।  गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और उससे पूर्व पौष्टिक आहार व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार इस योजना के तहत 5 हजार रुपये और दूसरी बेटी के जन्म पर एकमुश्त 6 हजार रुपये देती है। यह राशि तीन किस्तों में दी जाती है। गर्भवती महिलाओं के रजिस्ट्रेशन के समय 1,000 रुपये, 6 माह बाद 2,000 रुपये और बच्चे के जन्म, पंजीकरण और टीकाकरण के बाद 2,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसका मकसद संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और शिशु मृत्यु दर को कम करना है।

नई दिल्ली में बस्तर की प्रसिद्ध मांदरी नृत्य की प्रस्तुति देंगे कलाकार

रायपुर  राज्य स्तरीय शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति लोक कला महोत्सव में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला कोण्डागांव जिले का लिंगो घोटुल मांदरी नृत्य दल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला का प्रदर्शन करेगा। यह दल नई दिल्ली में आयोजित भारत ट्राइब फेस्ट-2026 में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व करेगा।      उल्लेखनीय है कि जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर अंबिकापुर में आयोजित राज्य स्तरीय शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति लोक कला महोत्सव में इस दल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया था। इस उपलब्धि के लिए देश की राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु के हाथों दल को सम्मानित भी किया गया था।     कलेक्टर कोंडागांव मती पन्ना ने जिले के मांदरी नृत्य दल के कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह कोण्डागांव जिले के लिए गर्व का विषय है कि यहां के लोक कलाकारों का दल राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कलाकार अपनी प्रस्तुति से बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति को देशभर में पहचान दिलाते हुए छत्तीसगढ़ राज्य और कोण्डागांव जिले का नाम रोशन करेंगे।  सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग ने बताया कि भारत ट्राइब फेस्ट का आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज द्वारा 18 मार्च से 21 मार्च 2026 तक सुंदर नर्सरी, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित 7 राज्यों के कलाकार विभिन्न जनजातीय कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कोण्डागांव जिले के ग्राम राहटीपारा, बालेंगा के मांदरी नृत्य दल द्वारा किया जाएगा।  

महतारी वंदन योजना: हर किस्त के साथ बढ़ा भरोसा, महिलाओं की जिंदगी में आया बड़ा सकारात्मक बदलाव

रायपुर  छोटे-छोटे सहयोग से बड़े बदलाव की तस्वीर आज शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक देखने को मिल रही है।  कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड के ग्राम रमपुरा, सेक्टर गोछिया में रहने वाली मती भारती वैष्णव के जीवन में महतारी वंदन योजना ने नई उम्मीद और आत्मविश्वास लाया है। महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें अब तक 25 किस्तों के माध्यम से कुल 25 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। यह राशि उनके लिए किसी सहारे से कम नहीं रही। पहले जहां घर के छोटे-छोटे खर्चों को संभालना चुनौतीपूर्ण था, वहीं अब योजना से मिली नियमित सहायता ने उनकी आर्थिक स्थिति को काफी हद तक स्थिर किया है। भारती वैष्णव बताती हैं कि इस राशि का सबसे बड़ा लाभ उनके बच्चों की पढ़ाई में मिल रहा है। अब वे बच्चों के लिए समय पर किताबें, कॉपी और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करा पा रही हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी हुई है और उनका भविष्य बेहतर दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही यह राशि घर के दैनिक खर्चों जैसे राशन, दवाई और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में भी मददगार साबित हो रही है। अब उन्हें छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है। भारती वैष्णव ने शासन की इस योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी है। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करती है। यदि महिलाओं को समय पर सहयोग और अवसर मिले, तो वे न केवल अपने परिवार की स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

अब कॉपी मूल्यांकन में नहीं चलेगा मोबाइल: बोर्ड का सख्त कदम, पारदर्शिता पर जोर

जगदलपुर. बोर्ड परीक्षा के बाद अब कॉपियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता पर जोर है। जगदलपुर के बस्तर हाईस्कूल में मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। शुरुआत से पहले शिक्षकों को नियमों और सावधानियों की विस्तृत ब्रीफिंग दी गई। अब मूल्यांकन के दौरान मोबाइल और स्मार्ट गैजेट्स पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। शिक्षकों को रोजाना कम से कम 40 उत्तर पुस्तिकाएं जांचना अनिवार्य किया गया है। दो पालियों में मूल्यांकन होगा, बीच में आधे घंटे का ब्रेक मिलेगा। पहले दिन शिक्षकों को 5-5 कॉपियों से प्रक्रिया की शुरुआत कराई गई। करीब 1.25 लाख कॉपियों का मूल्यांकन 9 अप्रैल तक पूरा करना लक्ष्य है। पहली खेप में 65 हजार कॉपियां स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखी गई हैं। बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी सख्ती से रोक लगाई गई है। इस बार शिक्षकों की ड्यूटी रद्द करने का अधिकार स्थानीय स्तर पर नहीं है। प्रशासन का फोकस—समयबद्ध और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करना है। टैलेंट हंट आयोजित जगदलपुर. बस्तर की प्रतिभाएं अब स्थानीय मंच तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान की ओर कदम बढ़ा रही हैं। इसी सोच के साथ शिक्षा प्रकाश पुंज संस्थान ने टैलेंट हंट आयोजित किया। गायन, नृत्य, मॉडलिंग और अभिनय में युवाओं ने दमदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रतिभाओं का आकलन किया। आत्मविश्वास और प्रस्तुति के आधार पर 40 से ज्यादा युवाओं का चयन हुआ। इन चयनित प्रतिभाओं को अब मुंबई में खुद को साबित करने का मौका मिलेगा। संस्थान ने सिर्फ मंच ही नहीं, बल्कि आगे की मार्गदर्शन व्यवस्था भी की है। संस्थान प्रमुख ने कहा—बस्तर में प्रतिभा की कमी नहीं, मंच की जरूरत है। कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षणिक और कला क्षेत्र के 80 लोगों को सम्मानित किया गया। इस आयोजन ने युवाओं में नई उम्मीद और दिशा दोनों जगाई है। विजेताओं में मिस बस्तर, मिस्टर जगदलपुर सहित कई प्रतिभाएं शामिल रहीं। बस्तर के युवाओं का यह आत्मविश्वास अब बड़े मंच पर नजर आएगा।

नक्सल कनेक्शन का सुराग: मंगेश के ठिकाने से मिला पत्र, सरेंडर को लेकर उठे सवाल

मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी. जिले के औंधी थाना क्षेत्र में महाराष्ट्र और बस्तर की सीमा से लगे ग्राम कोहकाटोला के जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन चलाया। जवानों के पहुंचने की भनक लगते ही नक्सली घने जंगल का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। हालांकि सर्चिंग के दौरान पुलिस को नक्सल ठिकाने से हथियार, गोला-बारूद और नक्सली मंगेश द्वारा अपने शीर्ष नेता को लिखा गया एक पत्र भी बरामद किया गया है। जानकारी के मुताबिक, घटना बीते रविवार शाम की बताई जा रही है। ऑपरेशन के बाद सोमवार को पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह ने प्रेस वार्ता में पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीआरजी, सीएएफ और औंधी थाना पुलिस की संयुक्त टीम नक्सल ठिकाने पर दबिश देने निकली थी, जबकि बस्तर के कांकेर जिले से भी बैकअप लगाया गया था। इलाके में संदिग्ध गतिविधियां देखकर जब जवानों ने घेराबंदी की, तो सिविल ड्रेस में मौजूद नक्सली भागने लगे। जवानों ने पीछा किया, लेकिन घने जंगल का फायदा उठाकर वे बच निकले। मंगेश के ठिकाने से मिला हथियार और पत्र सर्चिंग के दौरान पुलिस ने नक्सल ठिकाने से एक इंसास राइफल, 15 जिंदा कारतूस और अन्य नक्सली सामग्री बरामद की। जानकारी के अनुसार, यह राइफल वर्ष 2010 में कांकेर जिले के दुर्गुकोंदल थाना क्षेत्र के भुस्की गांव से पुलिस से लूटी गई थी, जिसे महिला नक्सली हिड़मे के पास रखा गया था। पुलिस के मुताबिक मौके पर एसीएम स्तर के तीन नक्सली मंगेश, उसकी पत्नी हिड़मे और एक अन्य महिला नक्सली राजे मौजूद थे। उनकी तस्वीरें पुलिस के पास उपलब्ध है और जवानों ने भागते समय उनकी पहचान भी की है। सबसे अहम बरामदगी मंगेश द्वारा अपने शीर्ष नक्सली नेतृत्व को लिखा गया एक पत्र है। इस पत्र में उसने आत्मसमर्पण को लेकर दिशा-निर्देश मांगे हैं। पत्र में लिखा गया है कि “सभी साथी आत्मसमर्पण कर रहे हैं, हमारे लिए क्या आदेश है?” इससे नक्सली संगठन के भीतर बढ़ते दबाव और असमंजस के संकेत मिल रहे हैं। इलाके में गिने-चुने नक्सली बचे पुलिस अधीक्षक के अनुसार, मोहला-मानपुर क्षेत्र में अब केवल 6 सक्रिय नक्सली ही शेष बचे हैं। उन्होंने शेष नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने की अपील की है। पूर्व में मारे जा चुके स्पेशल जोनल कमेटी के नक्सली विजय रेड्डी के बाद आरकेबी डिवीजन लगभग कमजोर पड़ चुका है, लेकिन हिड़मे, राजे और अन्य कुछ नक्सलियों की मौजूदगी की सूचनाएं समय-समय पर मिलती रही हैं। नक्सल मुक्त होने पर सवाल गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय डेडलाइन में अब करीब एक पखवाड़ा ही बचा है। इसके बावजूद मोहला-मानपुर क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई हैं। पुलिस लगातार अभियान चला रही है, लेकिन न तो सभी नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं और न ही गिरफ्तार हो पा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या तय समय सीमा में यह इलाका पूरी तरह नक्सल मुक्त हो पाएगा।

प्रदेश में अव्वल कोरिया: e-KYC में शानदार प्रदर्शन, गांवों के विकास को मिली गति

कोरिया. ग्रामीण विकास को नई गति देने के उद्देश्य से लागू की गई वीबीजी रामजी योजना के तहत कोरिया जिले ने तकनीकी पारदर्शिता की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले में मनरेगा के अंतर्गत पंजीकृत सभी श्रमिकों का ई-केवाईसी कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। इसके साथ ही कोरिया प्रदेश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जिसने निर्धारित समय में यह लक्ष्य हासिल किया है। कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन और पंचायत अमले के समन्वित प्रयासों से जिले की सभी ग्राम पंचायतों के पंजीकृत श्रमिक परिवारों के प्रत्येक सदस्य का आधार आधारित ई-केवाईसी कार्य पूरा किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश स्तर पर अभी औसत ई-केवाईसी लगभग 92 प्रतिशत है, जबकि कोरिया जिले ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर नई मिसाल पेश की है। ‘G RAM G’ के विरोध में कांग्रेस शून्यकाल में लाई स्थगन प्रस्ताव रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को मनरेगा को ‘जी राम जी’ किए जाने के विरोध में कांग्रेस ने शून्यकाल में स्थगन प्रस्ताव लाई. आसंदी के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने से नाराज विपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए सदन से निकले. विधानसभा शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जी राम जी की तुलना में पहले के मनरेगा को बेहतर बताते हुए स्थगन को ग्राह्य कर चर्चा कराने की मांग की. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि सदन विपक्ष की राजनीति का अड्डा नहीं, ये सदन कांग्रेस का राजनीति का मंच नहीं, ये जनता का मंच है. सदन का समय कीमती है. कल ही इन्होंने बता दिया था कि इस मुद्दे पर सदन में नहीं रहेंगे. इसके साथ ही पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई. पक्ष-विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि जनता के मुद्दे पर राजनीति करनी हो तो हम करेंगे. आखिरकार सत्ता पक्ष और विपक्ष के हंगामे के बीच आसंदी ने सदन की कार्यवाही 5 मिनट स्थगित कर दी. 5 मिनट के बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने स्थगन सूचना पर बोलते हुए कहा कि मामला सिर्फ नीति बदलने का नहीं है, नियत का भी है. गरीबों से जुड़ा हुआ मामला है. इस पर स्थगन प्रस्ताव ग्राह्य कर चर्चा होनी चाहिए. कवासी लखमा और विपक्ष के अन्य कई सदस्यों ने कहा कि गरीबों से जुड़ा मामला है, इस पर चर्चा होनी चाहिए. लेकिन आसंदी के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने पर विपक्षी सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए सदन से बहिर्गमन किया.