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परिवहन सुविधा की सौगात: नारायणपुर के परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय को मिलेगी बस

रायपुर. नारायणपुर के परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय को बस देने की घोषणा मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय आज नारायणपुर जिले के गरांजी स्थित परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय में अचानक छात्रों के बीच पहुंचे। विद्यालय पहुंचने पर संस्था में अध्ययनरत दिव्यांग छात्र रंजीत बड्डे सहित विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर बच्चों द्वारा स्वागत गीत, हनुमान चालीसा एवं बस्तर अंचल के पारंपरिक गीतों की सुंदर प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित सभी अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की मांग पर मुख्यमंत्री   साय ने विद्यालय को एक बस उपलब्ध कराने की घोषणा की। दिव्यांग बच्चों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री साय  मुख्यमंत्री   साय ने बच्चों से चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। विद्यालय में उपलब्ध सुविधाएं अच्छी हैं, उनका पूरा लाभ लेकर सभी अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएं। उन्होंने बच्चों को आईएएस, आईपीएस जैसे उच्च पदों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया और कहा कि किसी भी प्रकार की शारीरिक कमी से निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों पर ईश्वर का विशेष आशीर्वाद होता है। बच्चों ने जब उनसे पूछा गया कि उन्हें विद्यालय आकर कैसा लगा, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के बीच आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। एक बच्ची के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने बताया कि बचपन में उन्हें पिट्ठू, फुटबॉल जैसे खेल खेलना बहुत पसंद था।   मुख्यमंत्री ने संस्था के सभी बच्चों को चॉकलेट वितरित कर आशीर्वाद दिया। दिव्यांग बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मुख्यमंत्री   साय सहित राजस्व मंत्री   टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद   महेश कश्यप, अन्य जनप्रतिनिधियों, मुख्यमंत्री सचिव   राहुल भगत, कमिश्नर   डोमन सिंह एवं आईजी   सुंदरराज पी. ने सराहना की। उल्लेखनीय है कि परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय का शुभारंभ 11 सितंबर 2023 को किया गया था। इसका संचालन जिला खनिज न्यास निधि से किया जा रहा है। विद्यालय का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को समावेशी शिक्षा प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिससे उनका आत्मविश्वास सुदृढ़ हो और वे समाज में अपनी भूमिका प्रभावी रूप से निभा सकें। यह विद्यालय सामान्य और दिव्यांग बच्चों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। वर्तमान में विद्यालय में कुल 60 बच्चे अध्ययनरत हैं। विद्यालय में आडियोलॉजी, फिजियोथेरेपी, विशेष शिक्षा संगीत शिक्षा, खेलकूद, योग एवं व्यायाम, तथा कंप्यूटर शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध हैं। 

यूजीसी बिल के विरुद्ध सर्व सवर्ण समाज का प्रदर्शन कल

बिलासपुर. यूजीसी बिल के विरोध में सर्व सवर्ण समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इसके विरोध में 1 फरवरी को भारत बंद और विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। यूजीसी कानून के विरोध में समग्र सवर्ण समाज की बैठक गुरुवार को कान्यकुब्ज भवन में हुई। इसमें सभी ब्राम्हण समाज के अतिरिक्त अग्रवाल समाज, पूज्य सिंधी समाज, गुजराती समाज, महाराष्ट्रियन समाज, तेलगू समाज, क्षत्रीय समाज के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में बताया गया कि यूजीसी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक जरूर लगा दी है परन्तु इस एक्ट का विरोध करते रहना है जब तक कि इसे वापस नहीं लेती है। इसके लिए 1 फरवरी को भारत बंद एवं 2 फरवरी सोमवार को 12 बजे दोपहर देवकीनंदन चौक पर एकत्र होकर कलेक्टर कार्यालय पहुंच कर राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम पर ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया। बैठक में विभिन्न प्रतिनिधियों ने एक मत होकर सर्व समाज के संज्ञान में लाया जा रहा है कि पीड़ित शोषित वर्ग को सरकार संविधान के द्वारा पर्याप्त संरक्षण दे रही है संविधान में पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए पर्याप्त नियम है। शिक्षा संस्थानो में इस कानून से जाति भेद को बढ़ावा मिलेगा। जिससे समाज में वैमन्यस्ता बढ़ेगी एवं बच्चों के शिक्षा पर असर पड़ेगा। सरकार की यह बात की सबका साथ सबका विकास इसके विरुद्ध है एवं केन्द्रीय सरकार इस पर पुनः विचार करे समता मूलक भारत के लिए यह बिल पूर्णतः वापस लें। बैठक में डा प्रदीप शुक्ला, अरविन्द दीक्षित, ज्ञान अवस्थी, मनोज तिवारी, अनिल तिवारी, राजेश शुक्ला, विक्रात तिवारी, सुनील सोन्यालिया, विनोद मेघानी, किशोर, पमनानी, प्रियंक परिहार, मोहन देव पुजारी, बी महेश, महेश दुबे टाटा सुरेन्द्र शर्मा, गुडडा तिवारी, गजेन्द्र श्रीवास्तव, बी के पान्डेय, गोपाल वेलाणी, राघवेन्द्र गुप्ता आदि ने अपने विचार रखे । बैठक का संचालन पूर्व विधायक चन्द्र प्रकाश बाजपेयी ने किया। बैठक में अजय जाजोदिया, मनीष अग्रवाल, जयश्री शुक्ला, अर्चना तिवारी, किरण बाजपेयी, ममता दुबे, किरण मिश्रा, राजीव अवस्थी, कृष्ण मोहन पाण्डेय, मनोज शुक्ला, दिव्य प्रकाश दुबे, ज्योतिन्द्र उपाध्याय, रश्मि द्विवेदी, देवेन्द्र सिंह ठाकुर, अर्चना शुक्ला, लता मिश्रा, कमल बजाज, संतोष अग्रवाल, दयानन्द तीर्थानी, अतुल अवस्थी, अभिषेक शर्मा, गौरव तिवारी, अनुग्रह मिश्रा, श्याम मोहन दुबे, शक्ति सिंह ढाकुर, सुरेन्द्र गौरहा, विजय पाठक, जयेश तिवारी, प्रसुन्न सोनी, जगत सिंह राजपूत, प्रणव शर्मा, रोशन सिंह, लखन नागदेव, पवन श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।

पश्चिमी विक्षोभ के असर से 3 फरवरी को बारिश की संभावना

रायपुर. ठंड का प्रभाव खत्म होने के साथ प्रदेश में गर्मी धीमे-धीमे अपना प्रभाव दिखाने लगी है. पिछले चौबीस घंटे में अंबिकापुर का न्यूनतम तापमान 11.9 तक पहुंच गया, वहीं रायपुर का पारा 18.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया. अभी पश्चिमी विक्षोभ भी लगातार असर दिखा रहा है, जिसके प्रभाव से 3 फरवरी को बारिश भी होने की संभावना है. जनवरी के अंतिम दिनों में आए पश्चिमी विक्षोभ ने ठंड बढ़ने के सिलसिले को रोक दिया था. विक्षोभ की लगातार सक्रियता की वजह से तापमान में गिरावट का दौर रुक गया और धीरे-धीरे गर्मी अपना असर दिखाने लगी है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक भले ही मौसम में मामूली बदलाव हो, मगर अब ठंड का दायरा सिमटता जाएगा. अभी इसका प्रभाव सुबह के वक्त महसूस हो रहा है और आने वाले दिनों में इसका असर भी कम हो जाएगा. पिछले चौबीस घंटे में न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी दिखी है. अंबिकापुर का सामान्य से 2 डिग्री अधिक और रायपुर का पारा 3.8 डिग्री अधिक रहा. दिन का अधिकतम तापमान उत्तरी इलाकों को छोड़कर शेष क्षेत्रों में सामान्य से अधिक हो चुका है. अभी एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पूर्व ईरान के ऊपर 4.5 किलोमीटर से 5.8 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. दो नया पश्चिमी विक्षोभ 2 और 5 फरवरी को उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा. अभी न्यूनतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होगा, मगर 2 फरवरी से न्यूनतम तापमान में क्रमशः वृद्धि होने और 3 फरवरी को उत्तरी भाग में एक दो स्थानों पर हल्की वर्षा होने की संभावना है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी रायपुर में आज सुबह धुंध छाए रहने की संभावना है. आज अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है.

सीएम साय ने “अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन” को दिखाई झंडी

रायपुर. सीएम साय ने आज नारायणपुर में आयोजित “अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन” को झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा, नारायणपुर से बासिंग तक 21 किलोमीटर की इस ऐतिहासिक दौड़ में 60 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय धावकों सहित 10,000 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर आयोजन को यादगार बना दिया। देश-विदेश से आए धावकों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि अबूझमाड़ आज शांति, विश्वास और विकास के नए अध्याय की ओर तेज़ी से बढ़ रहा ह। यह मैराथन केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि सुरक्षित, समावेशी और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में हमारे संकल्प का प्रतीक है। अबूझमाड़ की धरती पर दौड़ते कदम, एक सशक्त और आत्मविश्वासी छत्तीसगढ़ की कहानी कह रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने नारायणपुर में जवानों के साथ किया रात्रि भोज

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नारायणपुर प्रवास के दौरान आईटीबीटी बटालियन परिसर नारायणपुर में आईटीबीटी, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, बीएसएफ, डीआरजी, सीएएफ के जवानों एवं अधिकारियों से मुलाकात और बस्तर की शांति और सुरक्षा के स्थापना में उनके योगदान की सराहना करते हुए सुरक्षा बल के जवानों की हौसला अफजाई की। मुख्यमंत्री साय और मत्रीगणों ने बटालियन परिसर में जवानों के साथ रात्रि भोज किया और उनसे आत्मीय चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने जवानों से चर्चा करते हुए कहा कि नैसर्गिक संसाधनों से और सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण बस्तर के कई इलाकें माओवाद आतंक के चलते विकास की मुख्यधारा से अलग-थलग पड़े थे। आप सबके अदम्य साहस, शौर्य, पराक्रम के कारण ही यहां शांति और सुरक्षा का वातावरण निर्मित हुआ है और विकास कार्यों को गति मिली है। उन्होंने देश की सुरक्षा में सुरक्षा बलों के जवानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में सेवा कर रहे जवानों का मनोबल बनाए रखना हम सबकी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने जवानों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके कल्याण और सुविधाओं के लिए निरंतर प्रयासरत है। जवानों ने भी मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए और इस आत्मीय मुलाकात को प्रेरणादायक बताया। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सुरक्षा बलों के जवानों द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प को यहां साकार करने का काम पूरी दृढ़ता से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब बम गोलियों की आवाज की जगह अब आमजन की चहल-पहल, स्कूलों में ककहरा की गंूज और गांवों में मांदर की थाप सुनाई दे रही हैं। कार्यक्रम में अतिथियों ने जवानों को उपहार भेंट किए। सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों को स्मृति चिह्न भेंट किए। ज्ञात हो कि नक्सल गतिविधि को नियंत्रण के लिए सुरक्षा कैम्प स्थापित कर केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य के सुरक्षा बलों के दस्तों को तैनात किया गया है। इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बस्तर महेश कश्यप, लघु वनोपज के अध्यक्ष रूपसाय सलाम सहित क्षेत्र के अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, आईटीबीटी, सीआरपीएफ, बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी एवं कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया, केन्द्रीय सुरक्षा बलों के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। आईजी सुंदरराज पी ने कार्यक्रम की रूपरेखा और बस्तर संभाग में शांति के लिए जवानों के योगदान की सराहना की। कार्यक्रम में पुलिस बैंड ने स्वागत में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी।

CM साय देंगे सिरपुर महोत्सव में 200 करोड़ के विकास कार्यों की देंगे सौगात

रायपुर. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी सिरपुर में आयोजित होने वाले सिरपुर महोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय जिले को विकास की बड़ी सौगात देंगे. वे जिले में कुल 199 करोड़ 28 लाख 59 हजार रुपए की लागत की 99 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे. इनमें 40 करोड़ 88 लाख 2 हजार रुपए की लागत के 64 विकास कार्यों का लोकार्पण और 158 करोड़ 40 लाख 57 हजार रुपए की लागत के 35 विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है. कार्यक्रम अंतर्गत लोकार्पण किए जाने वाले कार्यों में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के 98 लाख 80 हजार रुपए की लागत के 4 विकास कार्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 6 करोड़ 64 लाख 20 हजार रुपए की लागत के 19 विकास कार्य, आदिवासी विकास विभाग के 1 करोड़ 52 लाख 97 हजार रुपए की लागत का 1 विकास कार्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 17 करोड़ 95 लाख 86 हजार रुपए की लागत के 26 विकास कार्य और विद्युत विभाग के 13 करोड़ 76 लाख 19 हजार रुपए की लागत के 14 विकास कार्य शामिल हैं. इसी प्रकार भूमिपूजन के अंतर्गत लोक निर्माण विभाग द्वारा 141 करोड़ 19 लाख 19 हजार रुपए की लागत से 22 विकास कार्य, जल संसाधन विभाग के 10 करोड़ 32 लाख 72 हजार रुपए की लागत से 3 विकास कार्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 2 करोड़ 18 लाख 93 हजार रुपए की लागत से 8 विकास कार्य और परिवहन विभाग के 4 करोड़ 69 लाख 73 हजार रुपए की लागत से 2 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया जाएगा.

वीबी-जी राम जी के विरोध पर शिवराज बोले- ‘कांग्रेस का काम सिर्फ विरोध करना’

रायपुर. एक दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीबी-जी राम जी को लेकर विरोध कर रही कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का काम सिर्फ विरोध करना है, गरीब-मजदूर और किसानों के लिए ये योजनाएं वरदान है. पहले काका-बाबा लड़ते थे, अब अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लड़ रहे हैं और कार्यकर्ता पिस रहा है. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि हमने 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन रोजगार देने की व्यवस्था की. हर पैसे का उपयोग गांव के विकास में किया जाएगा विकसित भारत ग्राम योजना (जी राम जी) के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर प्लान बनेगा. गांव को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने पर  किसानों और युवाओं से केंद्रीय मंत्री करेंगे सीधा संवाद रायपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान दुर्ग के लिए रवाना हो गए हैं. जहां वे किसान मेला में शामिल होंगे. केंद्रीय मंत्री ग्राम गिरहोला और खपरी में कृषि फार्म भ्रमण व पौधरोपण करेंगे.  राजधानी रायपुर स्थित मंत्रालय में 31 जनवरी को CM विष्णु देव साय और कृषि मंत्री राम विचार नेताम के साथ हाई लेवल बैठक करेंगे. छत्तीसगढ़ पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री शिवराज ने कहा कि वह आज किसानों से संवाद के लिए पहुंचे हैं. किसानों के बीच जाकर प्रगतिशील खेती के प्रयोग देखेंगे. दुर्ग जिले में किसानों के बीच खेतों में जाकर संवाद करेंगे. किसान मेले में हिस्सा लेंगे. ‘यंग लीडर’ कार्यक्रम के तहत दिल्ली गए युवाओं से भी संवाद करेंगे. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कृषि मंत्री से भी मुलाकात करके कृषि और ग्रामीण विकास की योजनाओं पर चर्चा करेंगे. भारत सरकार की योजनाओं को छत्तीसगढ़ में बेहतर तरीके से लागू करने पर मंथन होगा. छत्तीसगढ़ की कृषि कार्ययोजना केंद्र और राज्य मिलकर बनाएंगे. ग्रामीण विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ में अद्भुत काम हुआ है. 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत, निर्माण कार्य जारी है.  केंद्रीय बजट पर मंत्री शिवराज सिंह की प्रतिक्रिया इतिहास में पहली बार रविवार को पेश होने वाले केंद्रीय बजट मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत का निर्माण, बजट इसे और गति देगा है.

लाल आतंक से रूके विकास को अब मिल रही है गति

रायपुर. नारायणपुर जिले को मिली 351 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बस्तर के नारायणपुर जिले के दो दिवसीय प्रवास पर जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां पर उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होकर जिलावासियों को अनेक सौगातें दीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हाई स्कूल मैदान में आयोजित बस्तर पण्डुम के जिला स्तरीय कार्यक्रम में 351 करोड़ 49 लाख 45 हजार रूपए के 357 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री   साय ने इस अवसर पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लाल आतंक समाप्ति की ओर है, जिससे विकास को गति मिल रही है। माओवाद के कारण यह क्षेत्र लम्बे समय से विकास से अछूता रहा, अब यहां नवाचार हो रहे है।     नारायणपुर के हाई स्कूल मैदान में आयोजित आज अपराह्न में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री   साय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री   नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री   अमित शाह के दृढ़ संकल्प से प्रदेश सरकार ने माओवाद मुक्त करने के लगातार प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना से चलते बस्तर के 400 से अधिक गांवों में विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों के विकास की पहुंच सुनिश्चित हुई है। आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की दिशा में उन्हें कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आजीविका प्राप्त करते हुए आत्मनिर्भर बन सकें। साथ ही बस्तर को विकास के सभी आयामों से जोड़ने यहां पर्यटन विकास, खेती-बाड़ी, पशुपालन जैसे कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प मुख्यमंत्री ने दोहराया।   साय ने यह भी कहा कि आदिवासी संस्कृति और पारम्परिक विरासतों को सहेजने व संजोकर रखने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार बस्तर पण्डुम का आयोजन कर रही है। उन्होंने उपस्थित जनों से जनजातीय सभ्यता और धरोहरों की जड़ों से जुड़कर रहने का आह्वान किया।  मुख्यमंत्री ने की 332 करोड़ के छह निर्माण कार्यों की घोषणा इस दौरान मुख्यमंत्री ने 06 निर्माण कार्यों की घोषणा की, जिनकी अनुमानित लागत 332 करोड़ रूपए है। इसमें 125 किलोमीटर लम्बे मार्ग नारायणपुर के ओरछा-आदेर-लंका-बेदरे -कुटरूमैमेड जिसकी लागत राशि-250 करोड़ रूपए है। यह नारायणपुर जिले को बीजापुर जिले से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसमें जिले के अंदरूनी क्षेत्र के ईदवाया, एडजुम, आदेर, कुड़मेल, ढोढरीबेड़ा, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका जैसे ग्राम जुड़ते हैं। इसी तरह राजनांदगांव-बैलाडिला मार्ग में सतह मजबूतीकरण कार्य की घोषणा की, इसकी लंबाई 28 कि.मी जो लगभग 34 करोड़ से तैयार होगी। यह नारायणपुर जिले को दंतेवाड़ा जिले में जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इसी तरह नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग पर 28 किमी के सतह मजबूतीकरण कार्य, लंबाई 28 कि.मी. की घोषणा (राशि-34 करोड़ 12 लाख) – यह मार्ग जिले को महाराष्ट्र बार्डर तक जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसमें जिले के ब्रेहबेड़ा, कुरूषनार, बासिंग, सोनपुर ग्राम जुड़ते हैं। इसके अलावा ब्रेहबेड़ा (नारायणपुर)-कंदाड़ी-कीहीकाड़-मुरनार-बेचा मार्ग पर घुड़साल नाला पर उच्चस्तरीय सेतुमय पहुंच मार्ग निर्माण कार्य, जिसकी लंबाई 80 मीटर तथा लागत राशि-12 करोड ़ 42 लाख है। साथ ही नारायणपुर जिला अंतर्गत अबुझमाड़ के अंदरूनी क्षेत्रों में प्रारंभ किये गए 10 वैकल्पिक प्राथमिक शाला ‘घमण्डी, वाला, जटवर, नेलनार, रोहताड़, हितावाड़ा, मोडनार, तोके, कोडटामरका एवं कोडोली‘ के स्कूल सेटअप एवं भवन, तथा तोके में आश्रम शाला भवन की स्वीकृति की घोषणा की, जो 01 करोड़ 06 लाख रूपए से तैयार होगा। इसी तरह जिले के एज्युकेशन हब, गरांजी मे खेल मैदान की घोषणा की घोषणा की जिसका निर्माण 50 लाख रूपए की लागत से होगा।      कार्यक्रम में वन मंत्री  केदार कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री   नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री   अमित शाह जी के सशक्त और निर्णायक नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक देश से सशस्त्र माओवाद के आतंक का पूर्णतः अंत हो जाएगा। नारायणपुर जिला भी शीघ्र ही नक्सल मुक्त होकर शांति, विकास और समृद्धि के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री   साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से हर गांव, हर टोले को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। राजस्व मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री   टंकराम वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री   साय ने जिले को 351 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी है। उनके नेतृत्व में राज्य सफलता की नित नई उंचाइयों को छू रहा है और हर क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है। इसके पहले, बस्तर सांसद  महेश कश्यप ने संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। बस्तर की संस्कृति और विरासत की पूरे विश्व में अलग पहचान है। आज की नई पीढ़ी हमारी सस्कृति और परंपरा को सहेजकर रखने की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री   साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम के 12 विधाओं में जनजातीय संस्कृति के प्रदर्शन के माध्यम से सरकार द्वारा इन परंपराओं को सहेजने और संरक्षित करने का कार्य किया जा रहा है। बस्तर ओलंपिक के माध्यम से युवाओं को प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है। ऐसे आयोजनों से आदिवासी संस्कृति व परंपरा आगे बढ़ेगी और बस्तर विकास और शांति के पथ पर सतत् आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पित माओवादी नव दम्पति को दिया आशीर्वाद मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर पण्डुम के जिला स्तरीय कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने आदिवासी व्यंजन, वेशभूषा, आभूषण तथा प्राचीन धरोहरों का अवलोकन कर संरक्षित करने की बात कही। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत माओवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटे 04 जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री से आशीर्वाद प्राप्त करने वाले जोड़ों में ग्राम पोदावाड़ा की कमला गोटा तथा ग्राम ऐनमेटा के सुकलाल जुर्री, ग्राम कुर्सींग की सुशीला कोवाची और ग्राम तुषवाल के सन्नी सलाम, ग्राम पूसालामा की रीता कोवाची और इसी ग्राम के मासो मण्डावी तथा ग्राम डूंगा की कोसी मण्डावी एवं इसी ग्राम के अर्जुन सिंह शामिल थे। मुख्यमंत्री ने सभी विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होने की बधाई दी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष  रूपसाय सलाम सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पंचायती राज और नगरीय संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे।

सामाजिक-आर्थिक विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर समन्वय के लिए 50 बिंदुओं पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर. सामाजिक-आर्थिक विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर समन्वय के लिए 50 बिंदुओं पर हुई विस्तृत चर्चा नवा रायपुर में आज हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17 वीं बैठक में परिषद के सदस्य राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चारों राज्यों में सामाजिक- आर्थिक विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित विषयों के निराकरण और बेहतर समन्वय के लिए 50 बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान मध्य क्षेत्र के इन चारों राज्यों से संबंधित प्रशासनिक, आर्थिक एवं सामाजिक मुद्दों का समाधान निकालने तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। बैठक में मौजूद अधिकारी चारों राज्यों के नवाचारों और बेस्ट प्रेस्टिसेस से भी रू-ब-रू हुए।  मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की इस बैठक का विशेष महत्व है क्योंकि इसमें मध्य क्षेत्रीय परिषद की मुख्य बैठक से पहले एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाता है, इसमें लिए गए निर्णय और सिफारिशें परिषद की आगामी बैठक में प्रस्तुत किए जाते हैं। बैठक में परिषद के सदस्य राज्यों के लंबित अंतर्राज्यीय मामलों के समाधान, नीतिगत समन्वय को सुदृढ़ करने तथा विकास परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को दूर किया जाता है। मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव   विकास शील, केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव   आशीष  वास्तव, अतिरिक्त सचिव  मती शुभा ठाकुर, मध्यप्रदेश की अपर मुख्य सचिव  मती रश्मि अरुण शामी, उत्तरप्रदेश के अपर मुख्य सचिव   पार्थ सारथी सेन शर्मा और उत्तराखंड के प्रमुख सचिव   रमेश कुमार सुंधाशु सहित केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी तथा चारों राज्यों के संबंधित विभागों के अधिकारी बैठक में शामिल हुए।  मुख्य सचिव   विकास शील ने मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक में कहा कि आज चारों राज्यों एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच राज्य सरकारों और भारत सरकार से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर रचनात्मक और उपयोगी चर्चा हुई है। निरंतर संवाद और अंतर्राज्यीय सहयोग के जरिए मध्य क्षेत्र के राज्यों के साझा हितों को प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव   आशीष  वास्तव ने कहा कि आज हुई चर्चा के निष्कर्षों के अनुरूप चारों राज्य तत्काल कार्यवाही प्रारंभ करें। उन्होंने कहा कि चारों राज्यों और केंद्र सरकार के बीच विचार-विमर्श से आपसी संवाद बेहतर होंगे। केंद्र सरकार एवं मध्य क्षेत्रों के राज्यों की साझा समस्याओं के समाधान के लिए ठोस व व्यावहारिक निर्णय लेने में इससे मदद मिलेगी। इन मंत्रालयों एवं विभागों से जुड़े विषयों पर हुई चर्चा      मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ ही केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, आवास और शहरी विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, रेल मंत्रालय, खान मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, कोयला मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, जल जीवन मिशन, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अभिकरण, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, वित्त सेवा विभाग, डाक विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, वाणिज्य विभाग तथा मछली पालन विभाग से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।  चारों राज्यों के बेस्ट प्रेक्टिसेस से रू-ब-रू हुए अधिकारी मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक में अंतर्राज्यीय समन्वय, विकास और सुशासन के साथ-साथ चारों राज्यों द्वारा अपनाई गई बेस्ट प्रेक्टिसेस की भी प्रस्तुति हुई। इस दौरान छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड एवं उत्तरप्रदेश के अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों के नवाचारों और प्रभावी योजनाओं की जानकारी साझा की। छत्तीसगढ़ द्वारा वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 की प्रस्तुति दी गई, जिसे जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय द्वारा लॉन्च किया गया है। यह उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं को एकीकृत करता है, जिससे औद्योगिक निवेश, भूमि प्रबंधन, पर्यावरणीय स्वीकृति और सब्सिडी प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी आई है। इसके साथ ही दंतेवाड़ा मॉडल के तहत ब्लॉक-चेन आधारित सुरक्षित भूमि अभिलेख प्रणाली और एआई-आधारित विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) को शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की अभिनव पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।    मध्यप्रदेश ने ग्रामीण पर्यटन विकास को अपनी प्रमुख बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में प्रस्तुत किया। इसके तहत 125 गांवों में होम-स्टे और स्थानीय संस्कृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही ऊर्जा बचत एवं नवीकरणीय ऊर्जा नीति- 2025 के माध्यम से 2030 तक 50 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने के लक्ष्य तथा पीएम   टूरिज्म हेली सर्विस के जरिए पर्यटन एवं क्षेत्रीय संपर्क को सशक्त बनाने की पहल की जानकारी दी गई। उत्तराखंड द्वारा किसान-से- आईटीबीपी आपूर्ति श्रृंखला योजना के माध्यम से सीमावर्ती किसानों की आय वृद्धि, डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम से प्लास्टिक कचरा प्रबंधन तथा स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (SARA) द्वारा जल स्रोतों के पुनर्जीवन की पहलों का प्रस्तुतीकरण किया गया। उत्तरप्रदेश के अधिकारियों ने शहरी क्षेत्रों में आवासीय सुधारों की नई पहलों, श्रम न्याय सेतु पोर्टल तथा सेवा मित्र जैसे नवाचारों पर प्रस्तुतिकरण दिया।

महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त जारी

रायपुर. महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त जारी मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय द्वारा आज जिला नारायणपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम से छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त की राशि जारी किया गया। इस अवसर पर प्रदेश की 68 लाख 39 हजार 592 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 641 करोड़ 34 लाख रुपए की राशि का अंतरण किया गया। मुख्यमंत्री   साय ने राशि का अंतरण करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना से छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण को नया आयाम मिला है।   उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना का शुभारंभ 1 मार्च 2024 को किया गया था। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 21 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु की विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें। योजना के शुभारंभ से अब तक 23 किस्तों के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को कुल 14 हजार 954.42 करोड़ रुपए की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। यह व्यवस्था वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल सिद्ध हो रही है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 24वीं किस्त के रूप में 641.34 करोड़ रुपए की राशि जारी किए जाने के पश्चात महतारी वंदन योजना के अंतर्गत कुल वितरित राशि बढ़कर 15 हजार 595.77 करोड़ रुपए हो जाएगी। यह राज्य सरकार की महिला कल्याण एवं सशक्तिकरण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा यह प्रमाणित करती है कि योजना से प्रदेश की लाखों महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रही हैं। नारायणपुर जिले में महतारी हितग्राहियों की संख्या 27 हजार 272 है। इन हितग्राहियों के खातों में 2 करोड़ 72 लाख 72 हजार रुपए अंतरित किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री   केदार कश्यप, उच्च शिक्षा मंत्री   टंकराम वर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।