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मुख्यमंत्री साय ने किया कुरूसनार से बस में यात्रियों के साथ सफर

रायपुर. मुख्यमंत्री साय ने किया कुरूसनार से बस में यात्रियों के साथ सफर राज्य के दूरस्थ और सीमांत जनजातीय अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री बस सेवा अब नारायणपुर जिले में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय ने जिले के प्रवास के दौरान कुरूसनार से लगभग 4 किमी तक ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा की।  मुख्यमंत्री का बस सेवा से सफर करना इस योजना की विश्वसनीयता और जनोन्मुखी सोच को रेखांकित करता है। उन्होंने अपने सह यात्रियों से अब इस नक्सल प्रभावित इलाके में बस सेवा शुरू होने से हुए फायदों के बारे में भी ग्रामीणों से पूछा। मुख्यमंत्री का यह दौरा और बस सेवा से किया जाने वाला सफर नारायणपुर जिले में विकास, विश्वास और सुशासन की दिशा में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।  वर्तमान में नारायणपुर जिले में मुख्यमंत्री बस सेवा के अंतर्गत चार बसें संचालित की जा रही हैं, जिनमें से तीन बसें नियद नेल्ला नार मार्गों पर नियमित परिवहन सेवाएं प्रदान कर रही हैं। ये बसें उन क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं, जो बीते एक दशक से माओवादी उग्रवाद के कारण सार्वजनिक परिवहन से लगभग वंचित रहे थे। पहला मार्ग नारायणपुर-नेलंगूर का है, जिसके अंतर्गत डूमरतराई, कुकडाझोर, आंकाबेडा, कस्तूरमेटा, मोहंदी, कोडलियार, कुत्तूल, बेडमाकोटी तथा नेलंगूर ग्राम लाभान्वित हो रहे हैं। दूसरा मार्ग नारायणपुर-कुतूल का है, जिसमें कच्चापाल, कोडलियार एवं कुतूल के साथ कुरूषनार, बासिंग, कुन्दला, कोहकामेटा और इरकभट्टी ग्रामों को परिवहन सुविधा मिल रही है। तीसरा मार्ग नारायणपुर-गारपा का है, जिससे कुरूषनार, बासिंग, कुन्दला, सोनपुर, मसपुर और होरादी ग्राम लाभान्वित हो रहे हैं। यह बस सेवा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित की जा रही है, जिसमें संचालन की जिम्मेदारी एक निजी बस ऑपरेटर को सौंपी गई है, जबकि शासन द्वारा मार्ग निर्धारण और निगरानी की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमांत जनजातीय समुदायों को विश्वसनीय, सुलभ और सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना, सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना तथा क्षेत्र में आवागमन और कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना है।

मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस के धान खरीदी आंदोलन पर साधा निशाना, कहा– मुद्दाविहीन राजनीति कर रही है कांग्रेस

रायपुर धान खरीदी का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश में गर्म है. इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस मुद्दाविहीन है, इसलिए इस तरह का आंदोलन कर रही है. कांग्रेस का धर्म ही विरोध करना है. नारायणपुर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आज धान खरीदी की अंतिम तारीख है, धान खरीदी अच्छे से हो रही है. दो दिन पहले ही समीक्षा कर अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि किसानों का धान समय पर बिके और टोकन मिलने में देर न हो. अधिकारी लगातार इस पर काम कर रहे हैं. वहीं जमीन गाइडलाइन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि गाइडलाइन में संशोधन किए गए हैं. सुझाव भी मांगे गए थे. अभी इस पर वर्किंग चल रही है. वहीं निजी अस्पतालों के आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं करने के ऐलान पर उन्होंने कहा कि जो भी बकाया है, उसे जारी किया जाएगा. बता दें कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नारायणपुर में दो दिन के प्रवास पर रहेंगे. राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा भी मुख्यमंत्री के साथ जा रहे हैं. इस दौरान 361 करोड़ के अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन होगा.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बालक आश्रम के निरीक्षण के दौरान मौके पर ही दी स्वीकृति

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बालक आश्रम के निरीक्षण के दौरान मौके पर ही दी स्वीकृति मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय आज अबुझमाड़ क्षेत्र के ग्राम कुरुषनार स्थित बालक आश्रम पहुंचकर छात्रों से रूबरू हुए आश्रम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री   साय ने छात्रों की मांग पर यहां एक नए हॉस्टल निर्माण की स्वीकृति प्रदान की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने यहां उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण किया। इस मौके पर राजस्व मंत्री   टंकराम वर्मा और वन मंत्री   केदार कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री   साय ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि कहा आप सभी खूब पढ़ाई करें और अपने माता पिता सहित देश प्रदेश का नाम गौरव करें। उन्होंने आश्रम में रहने वाले विद्यार्थी रामजी से कहा की आप पढ़ लिखकर क्या बनना चाहते हैं तब रामजी ने कहा की मैं बड़ा होकर शिक्षक बनना चाहता हूँ। तब मुख्यमंत्री ने उनकी प्रशंसा की और मेहनत से पढ़ाई करने की समझाइश दी। इसी तरह छात्र सोप सिंह ने मुख्यमंत्री को पहाड़ा सुनाया। स्कूली बच्चों से संवाद के दौरान कक्षा दूसरी में पढ़ने वाला आदित्य ने मुख्यमंत्री से पूछा आपको स्कूल जाने में कैसा लगता था? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे स्कूल जाना अच्छा लगता था। बचपन में पढ़ाई को भरपूर समय दे, बड़ा आदमी बनने के लिए पढ़ाई आवश्यक है। मुख्यमंत्री   साय ने बच्चों से पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता की जानकारी ली और कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल गतिविधियों में शामिल होना चाहिए। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने मुख्यमंत्री को अंतरिक्ष अभियान के मॉडल की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने मॉडल प्रदर्शित करने वाले सभी विद्यार्थियों को खूब पढ़ाई करने और वैज्ञानिक बनने का प्रयास के लिए बधाई दी। उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय ने शासकीय कार्यक्रमों की क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत देखने कुरूषनार के शासकीय उचित मूल्य दुकान पहुंचे। उचित मूल्य दुकान में मौजूद राशनकार्डधारियों ने मुख्यमंत्री   साय को बताया कि उन्हें नियमित रूप से समय पर राशन मिल रहा है।  मुख्यमंत्री ने उचित मूल्य दुकान में मौजूद डुटाखार के मेहरो, दशरी, तिलो एवं सुनिता, गुमियाबेड़ा की रजनी बाई एवं अनिता और ग्राम कंदाड़ी की वीणाबाई से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की और उनके परिवार के सदस्यों की जानकारी भी ली। इन सभी ने बताया कि उन्हें हर माह चांवल मिल रहा है और इसकी गुणवत्ता अच्छी है। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान उचित मूल्य दुकान में स्टॉक की उपलब्धता, रखरखाव , साफ सफाई, स्टॉक रजिस्टर, भंडारण क्षमता आदि की जानकारी ली। गौरतलब है कि शासकीय उचित मूल्य दुकान से आसपास के 12 गांव आलवर, कंदाड़ी, कुरुषनार, कोडोली (विरान), गुमियबेड़ा, जिवलापदर, अरसगढ़, डुटाखार, कंकाल, जामपारा, कावड़वार और नदीपारा संलग्न है तथा 408 राशन कार्ड धारकों को राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

संघर्ष से सफलता तक: पीवीटीजी महिलाओं ने रची आत्मनिर्भरता की कहानी

रायपुर. पीवीटीजी महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) की महिलाएं स्व-सहायता समूहों (एसएचजी), सरकारी योजनाओं और स्थानीय संसाधनों के दम पर आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल कायम कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत संचालित केशोडार वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) के माध्यम से इन महिलाओं को आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध हो रहे हैं।  केशोडार वन-धन विकास केंद्र की स्थापना सहकारी समिति मर्यादित, गरियाबंद द्वारा की गई है। वर्तमान में इस केंद्र से 8 स्वयं सहायता समूहों की कुल 87 पीवीटीजी महिलाएं जुड़ी हुई हैं। महिलाएं अपने पारंपरिक औषधीय ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग कर आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। केंद्र में निर्मित उत्पादों को आयुष निदेशालय से औषधि निर्माण का लाइसेंस प्राप्त है, जिससे इन उत्पादों को वैधानिक पहचान मिली है। यहां 13 से अधिक आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें महाविषगर्भ तेल, भृंगराज तेल, तुलसी पाउडर, अश्वगंधा, शतावरी, आंवलक्यादि चूर्ण, पुनर्नवा पाउडर, कृमिघ्न, प्रदरांतक एवं वैश्वानर पाउडर प्रमुख हैं। साथ ही कई क्लासिकल आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण की अनुमति भी केंद्र को प्राप्त है। केशोडार वन धन विकास केंद्र की विशेष पहचान पारंपरिक ‘तेल पाक पद्धति’ है, जिसमें औषधीय जड़ी-बूटियों को सात दिनों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। इस पद्धति से औषधीय गुण सुरक्षित रहते हैं और उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। पीएम जनमन योजना एवं छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के सहयोग से केंद्र को आधुनिक मशीनें, प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उत्पादों का विपणन ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के अंतर्गत संजीवनी स्टोर्स के माध्यम से किया जा रहा है। जनवरी 2024 से मार्च 2025 के बीच केंद्र द्वारा लगभग 159.59 लाख रूपए का विक्रय किया गया, जिससे करीब 10 लाख रूपए का शुद्ध लाभ अर्जित हुआ है। इससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बनी हैं।  इस उपलब्धि पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री   केदार कश्यप ने कहा कि गरियाबंद की पीवीटीजी महिलाओं द्वारा संचालित केशोडार वन धन विकास केंद्र आत्मनिर्भर भारत की सोच को साकार कर रहा है। पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बाजार से जोड़कर जनजातीय महिलाओं को सशक्त बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह केंद्र अन्य जनजातीय क्षेत्रों के लिए प्रेरणास्रोत है। उल्लेखनीय है कि राज्योत्सव 2025 के अवसर पर प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी द्वारा की गई सराहना से महिलाओं को प्रात्साहन मिला और उनका उत्साह बढ़ा है। आज केशोडार वन- धन विकास केंद्र न केवल गरियाबंद बल्कि पूरे प्रदेश के लिए जनजातीय सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का सफल मॉडल बन चुका है।

एआई और डिजिटल सुरक्षा पर फोकस: श्रम विभाग की ‘लैब-राइट’ कार्यशाला सम्पन्न

रायपुर. श्रम विभाग की राज्य स्तरीय ‘लैब-राइट’ कार्यशाला संपन्न, डिजिटल सुरक्षा और एआई पर केंद्रित रहा सत्र छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग द्वारा इंडस एक्शन के सहयोग से आयोजित “लैब-राइट” कार्यशाला श्रृंखला के अंतर्गत आज एकदिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अपर श्रम आयुक्त  सविता मिश्रा, उप श्रम आयुक्त श्री एस. एस. पैकरा और श्री डी.पी. तिवारी सहित छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत 20 नवंबर 2025 को की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य जिला श्रम अधिकारियों और श्रम निरीक्षकों को डिजिटल युग की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। कार्यशाला के दौरान गैर-तकनीकी उपयोगकर्ताओं को डेटा सुरक्षा प्रणाली से परिचित कराने हेतु विशेष सत्र आयोजित किए गए। विधि एवं नीति विशेषज्ञ श्री के के प्रह्लाद ने सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से डेटा संरक्षण और गोपनीयता जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मोबाइल नंबर, ईमेल और लोकेशन जैसी व्यक्तिगत जानकारियां दैनिक जीवन में साझा होती हैं और उनके दुरुपयोग की क्या संभावनाएं हो सकती हैं। सत्र में विशेष रूप से डेटा साझा करने, सहमति लेने और डेटा ब्रीच जैसी स्थितियों में विभागीय सावधानियों पर गहन चर्चा की गई। तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की आधारभूत जानकारी, एलिजिबिलिटी इंजन और मोबाइल ऐप के व्यावहारिक उपयोग के बारे में प्रशिक्षित किया गया। इसके साथ ही ई-केवाईसी की प्रक्रिया, नवीन विभागीय पोर्टल की विशेषताओं और आवेदनों के त्वरित निराकरण हेतु अपनाई जाने वाली नई कार्यप्रणालियों का पुनरावलोकन किया गया। कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों ने श्रम योजनाओं के सरलीकरण और पारदर्शिता बढ़ाने हेतु अपने बहुमूल्य सुझाव और फीडबैक भी साझा किए। यह आयोजन राज्य में श्रमिक सेवाओं को पूरी तरह तकनीक-सक्षम और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  

सेवा को मिला सम्मान: सेवानिवृत्ति पर अवर सचिव अरूण कुमार हिंगवे, खुमान सिंह और कन्हैया लाल को दी गई विदाई

रायपुर. छत्तीसगढ़ मंत्रालय (महानदी भवन) में आज मुख्य सचिव कार्यालय के अवर सचिव अरुण कुमार हिंगवे, सामान्य प्रशासन विभाग के दफ़्तरी   खुमान सिंह ध्रुव एवं  कन्हैया लाल सोम के सेवानिवृत्त होने पर मंत्रालय में गरिमामय एवं भावभीनी विदाई समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य सचिव विकाशशील ने सेवानिवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को उनके दीर्घकालीन, निष्ठापूर्ण एवं समर्पित शासकीय सेवा के लिए धन्यवाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि शासन को उनकी सेवाओं से लंबे समय तक लाभ मिला है, जिसे सदैव स्मरण किया जाएगा। समारोह में मुख्य सचिव विकाशशील एवं अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ द्वारा सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों को शाल,  फल, स्मृति चिन्ह एवं अवकाश नकदीकरण की राशि भेंट की गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्यगण सहित मंत्रालय के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सेवानिवृत्त साथियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। 

जैव विविधता की बड़ी पुष्टि: उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में नजर आया पेरेग्रीन फाल्कन

रायपुर. उदंती-सीतानदी में दिखा दुनिया का सबसे तेज़ उड़ने वाला पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन पेरेग्रीन फाल्कन दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी है, जो शिकार करते समय गोता लगाते हुए अविश्वसनीय गति प्राप्त कर सकता है। यह बाज़ प्रजाति ऊँचाई से शिकार पर झपट्टा मारने में माहिर है और इसे 'आसमान का चीता' भी कहा जाता है। पेरेग्रीन बाज़ तेज़ और बड़े शिकारी पक्षी होते हैं। इनके मज़बूत, नुकीले पीले पंजे इन्हें उड़ते हुए भी दूसरे पक्षियों को पकड़ने में सक्षम बनाते हैं। छत्तीसगढ़ अब दुनिया भर के पक्षियों के लिए पसंदीदा स्थल बनता जा रहा है। अनुकूल जलवायु और समृद्ध जैव विविधता के कारण कई दुर्लभ पक्षी लंबी दूरी तय कर यहां पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से एक अत्यंत उत्साहजनक जानकारी सामने आई है। यहां दुनिया के सबसे तेज़ उड़ने वाले पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन (स्थानीय नाम शाहीन बाज) को एक बार फिर देखा गया है। इस दुर्लभ दृश्य को वन रक्षक   ओमप्रकाश राव ने अपने कैमरे में कैद किया है। इससे पूर्व भी इस पक्षी को आमामोरा ओड़ क्षेत्र के पास शेष पगार जलप्रपात के समीप ड्रोन कैमरों में दर्ज किया गया था, जो इस क्षेत्र में इसकी सक्रिय उपस्थिति की पुष्टि करता है। उल्लेखनीय है कि पेरेग्रीन फाल्कन अपनी अद्भुत तेज़ उड़ान के लिए विश्व प्रसिद्ध है। शिकार का पीछा करते समय यह लगभग 320 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गोता लगा सकता है, जबकि सामान्य उड़ान में इसकी गति करीब 300 किमी प्रति घंटा रहती है। यह छोटे पक्षियों, कबूतरों और तोतों का शिकार करता है। ऊंचाई से तेज़ी से गोता लगाकर सटीक प्रहार करना इसकी सबसे प्रभावी शिकार तकनीक है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पक्षी न केवल अपनी गति बल्कि अपनी वफादारी के लिए भी जाना जाता है। ये आमतौर पर अकेले या जोड़े में रहते हैं और अक्सर जीवनभर एक ही साथी चुनते हैं। लगभग 12 से 15 वर्ष के जीवनकाल वाले इस पक्षी का उदंती-सीतानदी के वनों में दिखना यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ का पर्यावरण वन्यजीवों के लिए कितना अनुकूल है। हाल ही में आयोजित बर्ड सर्वे के दौरान बारनवापारा अभ्यारण्य में भी दुर्लभ और खूबसूरत पक्षी ऑरेंज ब्रेस्टेड ग्रीन पिजन तथा ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर देखे गए हैं। गौरतलब है कि वन मंत्री   केदार कश्यप वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहे हैं। वन मंत्री के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)   अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में वन विभाग की पूरी टीम सतत प्रयासों में जुटी है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। वन विभाग की यह उपलब्धि न केवल अभिलेखीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी नई ऊर्जा प्रदान करती है।

आवास निर्माण में मिसाल: पीएम आवास योजना में बलौदाबाजार नंबर वन

रायपुर पीएम आवास निर्माण में बलौदाबाजार छत्तीसगढ राज्य में अव्वल प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक आवास योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण बेघर नागरिकों को पक्का मकान प्रदान करना है।इस योजना के तहत कच्चे मकानों में रहने वाले या बिना छत वाले परिवारों को पक्के मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जिसमें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। बलौदाबाजार- भाटापारा जिले की उपलब्धियों की फेहरिश्त में एक और कामयाबी शुमार हो गया है। जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2025-26 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बलौदाबाजार -भाटापारा जिला पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में प्रथम स्थान पर है।       बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं सीईओ जिला पंचायत के नेतृत्व में  जिले ने न केवल आवासों की स्वीकृति में तेजी दिखाई है, बल्कि धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करने में भी रिकॉर्ड कायम किया है।        वर्ष 2025-26 में कुल 26843 आवास स्वीकृत किया है जिसमें  24 हजार 313 आवासों को प्रथम किश्त जारी, 20 हजार 480 आवास का निर्माण प्रारम्भ हो गया है और 15 हज़ार 120 आवास प्लिंथ स्तर तक पूर्ण हो गया है। सर्वाधिक प्लिंथ निर्माण – बलौदाबाजार- भाटापारा जिले में 15 हजार 120 आवासों का प्लिंथ स्तर तक का कार्य पूर्ण हो चुका है, जो राज्य के किसी भी जिले की तुलना में सर्वाधिक है।26 हजार 439 आवासों का एफटीओ किया जा चुका है जिसमें से 24 हजार 313 हितग्राहियों के खातों में पहली किश्त का सफलतापूर्वक हस्तांतरण किया जा चुका है।          कुल स्वीकृत आवासों में से 20 हजार 480 मकानों पर काम शुरू हो जाना एवं 139 आवास पूर्ण प्रशासन की मुस्तैदी और ग्रामीणों के उत्साह को दिखाता है। पीएम जनमन योजना अंतर्गत भी जिला में प्राथमिकता से कार्य कराके 25 पात्र हितग्राहियों का आवास स्वीकृत कर सभी का शतप्रतिशत आवास पूर्ण करा लिया गया है। रेनवाटर हार्वेस्टिंग संरचना निर्माण         जिले को जल संचयन में देश मे द्वितीय पुरुस्कार प्राप्त हुआ है जिसमें  प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के हितग्राहियों का विशेष योगदान रहा है। आवास योजनान्तर्गत पूर्ण आवासो में 15 हजार 260 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचना का निर्माण कराया गया है।          इस उपलब्धि से जिले के हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना अब हकीकत में बदल रहा है। यह न केवल ग्रामीण विकास को गति दे रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर. श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वास्थ्य सेवाओं को मिशन मोड में सुदृढ़ करने के दिए निर्देश नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में आयोजित मुख्य चिकिसा एवं स्वास्थ्य अधिकारी व सिविल सर्जन की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दूसरे दिन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, किंतु सरकार की प्राथमिकता अब भी यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ, वनांचल और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचें। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि दुर्गम क्षेत्रों में 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से निरंतर सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इन यूनिटों की नियमित समीक्षा करने और लाभार्थियों से फीडबैक लेना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष फोकस करते हुए उन्होंने प्रत्येक माह आवश्यक समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए। आपातकालीन सेवाओं को लेकर मंत्री   जायसवाल ने 102 महतारी एक्सप्रेस, 108 संजीवनी एक्सप्रेस तथा 1099 से संबंधित शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है और इसके लिए सभी स्तरों पर मिशन मोड में कार्य किया जाना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने प्रदेश के 5,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप-स्वास्थ्य केंद्रों को पूरी तरह क्रियाशील करने, पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने तथा अधोसंरचना सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। डायग्नोस्टिक सेवाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मंत्री ने अस्पतालों में लैब टेक्नीशियन की उपलब्धता तथा जांचों की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही नए जांच उपकरणों की खरीदी कर सभी अस्पतालों में जांच सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही बाहर की दवाएँ लिखने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए मानव संसाधन को स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए   जायसवाल ने नए जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और सिविल सर्जनों को भर्ती से संबंधित विज्ञापन एक सप्ताह के भीतर जारी करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम को एक महत्वाकांक्षी योजना बताते हुए उन्होंने प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर डायलिसिस यूनिट स्थापित करने तथा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक जन औषधि केंद्रों के विस्तार पर विशेष जोर दिया। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के शासकीय अस्पताल किसी भी दृष्टि से निजी अस्पतालों से कमतर नहीं हैं । जिला अस्पतालों में बेहतर उपचार सुविधाओं के साथ-साथ उच्च स्तरीय स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। शासकीय अस्पतालों की छवि को और अधिक सशक्त बनाने को सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए उन्होंने सभी जिला अस्पतालों में अनिवार्य रूप से ब्लड बैंक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

गढ़बेगाल घोटुल में गूंजी मांदर की थाप

रायपुर. आधुनिक घोटुल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगा: मुख्यमंत्री  साय   मुख्यमंत्री   विष्णुदेव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान आज ‘गढ़बेंगाल घोटुल‘ पहुंचकर बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और लोक-संस्कृति के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। इस मौके पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि और ग्रामीणों के आत्मीय स्वागत के बीच मुख्यमंत्री   साय स्वयं लोक-रंग में रंगे नजर आए।     मुख्यमंत्री   साय ने घोटुल की अनूठी स्थापत्य कला का अवलोकन किया और बस्तर की विभूतियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री   साय ने कहा कि घोटुल प्राचीन काल से ही आदिवासी समाज के लिए शैक्षणिक एवं संस्कार केंद्र रहा है। चेंद्रु पार्क के समीप स्थित यह आधुनिक घोटुल न केवल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगा, बल्कि देश-दुनिया के पर्यटकों को भी आदिवासी जीवनशैली और सामाजिक व्यवस्था से परिचित कराने का सशक्त माध्यम बनेगा। गढ़बेंगाल का यह घोटुल हमारी गौरवशाली विरासत को सहेजने का प्रतीक है। हमारी सरकार बस्तर की इस अनूठी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।    मुख्यमंत्री   साय ने घोटुल परिसर के लेय्योर एवं लेयोस्क कुरमा: युवाओं और युवतियों के लिए निर्मित कक्षों के साथ ही बिडार कुरमा: पारंपरिक वेशभूषा, प्राचीन वाद्ययंत्र एवं सांस्कृतिक सामग्रियों का संग्रह का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रामीणों की आग्रह पर मुख्यमंत्री   साय ने सगा कुरमा में बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर क्षेत्र की खान-पान संस्कृति का सम्मान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री के भोजन में विशेष रूप से भोजन गाटो-भात, कोदो-भात, उड़िद दार, हिरुवा दार, जीरा भाजी, कनकी पेज, भाजी घिरोल फुल, चाटी भाजी, कांदा भाजी, मुनगा भाजी, इमली आमट, मड़िया पेज, टमाटर चटनी, चिला रोटी, रागी कुरमा, रागी केक, रागी लट्टू, रागी जलेबी परोसा गया।      इस दौरान वन मंत्री   केदार कश्यप, राजस्व मंत्री   टंकराम वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष   रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष   नारायण मरकाम, पद्म    पंडीराम मंडावी, लोककलाकार   बुटलू राम, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि  मती संध्या पवार ने साथ बैठकर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया। बस्तर की विभूतियों से आत्मीय भेंट     मुख्यमंत्री ने इस प्रवास को केवल एक औपचारिक दौरा न रखते हुए इसे एक आत्मीय मिलन का रूप दिया। क्षेत्र की महान प्रतिभाओं – वैद्यराज पद्म  हेमचंद मांझी, पद्म  पंडीराम मंडावी और सुप्रसिद्ध लोक-कलाकार बुटलू राम से भेंट कर उनका सम्मान किया। उन्होंने टाइगर ब्वॉय चेंदरू के परिवारजनो से भी मुलाकात की।  इको-फ्रेंडली घोटुल:     वन विभाग और पद्म  पंडीराम मंडावी के मार्गदर्शन में निर्मित यह घोटुल पूर्णतः इको-फ्रेंडली (लकड़ी, मिट्टी और बांस) सामग्री से बना है। मुख्यमंत्री ने घोटुल के खंभों पर की गई बारीक नक्काशी की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, जिसे स्वयं पद्म  पंडीराम मंडावी ने उकेरा है। जिसमें नक्काशी, सांस्कृतिक जुड़ाव, विरासत का संरक्षण का प्रभावी प्रयास किया गया है।