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कला, संस्कृति और सिनेमा के संरक्षण-संवर्धन के लिए सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में संस्कृति विभाग एवं छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माताओं, कलाकारों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों के सम्मान समारोह में शामिल हुए।  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और संवेदनाओं को दिशा देने वाली सशक्त विधा हैं। एक अच्छी फिल्म समाज में जागरूकता पैदा करती है और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है। भारतीय सिनेमा ने समय-समय पर सामाजिक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि मदर इंडिया जैसी फिल्मों ने भारतीय समाज में नैतिक मूल्यों, त्याग और आत्मसम्मान की भावना को सुदृढ़ किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा का गौरवशाली इतिहास रहा है। पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म कही देबे संदेश ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सार्थक संदेश दिया था। आज छालीवुड की फिल्में मनोरंजन के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल और ओटीटी प्लेटफॉर्म के विस्तार से फिल्मों की पहुंच समाज के हर वर्ग तक हुई है, ऐसे में जिम्मेदार, सकारात्मक और मूल्याधारित सिनेमा को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग को नई पहचान दिलाने और स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम को पुनः सक्रिय किया गया है। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष जनवरी में 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एवं कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का भूमिपूजन किया गया है। इस परियोजना से राज्य में फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, हजारों कलाकारों, तकनीशियनों एवं श्रमिकों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा फिल्म पर्यटन को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम एवं संस्कृति विभाग को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश की कला, संस्कृति और सिनेमा को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह सराहनीय पहल है। ऐसे सम्मान समारोह कलाकारों और रचनाकारों का मनोबल बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को भी प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में 11 देशों में सम्मानित छत्तीसगढ़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्म "छत्तीसगढ़ का भीम – चिंताराम" का विशेष प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन को जन्मदिवस की शुभकामनाएं भी दीं। इस अवसर पर उन्होंने गरियाबंद जिले के छुरा क्षेत्र स्थित गिधनी पाठ में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 20 लाख रुपये तथा धमतरी में सेन समाज भवन निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की घोषणा की। इस अवसर पर सर्व सेन समाज के प्रदेश अध्यक्ष  पुनीत सेन, वरिष्ठ फिल्म निर्माता  मोहन सुंदरानी, छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग से जुड़े निर्माता, निर्देशक, कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

राज्यगीत और भोजन मंत्र; शिक्षा विभाग ने जारी किए कड़े निर्देश

रायपुर छत्तीसगढ़ के सरकारी और निजी स्कूलों में अब बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, राष्ट्रीय चेतना और भारतीय संस्कृति से गहराई से जोड़ा जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने नवीन शिक्षा सत्र 2026-27 से प्रदेश की सभी शालाओं में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत सहित विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के नियमित व अनिवार्य संचालन के कड़े निर्देश जारी किए हैं।             मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) से जारी इस आदेश के तहत सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को अपने-अपने क्षेत्रों में इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तीन सत्रों में बंटा होगा शेड्यूल- सुबह से शाम तक का पूरा टाइम-टेबल            विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में अब प्रतिदिन तीन अलग-अलग समय पर निर्धारित क्रम में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रातःकालीन सत्र स्कूल प्रारंभ होने पर सुबह की प्रार्थना सभा में एक तय क्रम के अनुसार ये प्रस्तुतियां अनिवार्य होंगी। विद्यालय प्रारंभ होने पर प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में क्रमशः राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीपमंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र तथा महापुरुषों की जीवनी का वाचन कराया जाएगा। इसी प्रकार मध्यान्ह भोजन के समय विद्यार्थियों द्वारा भोजन मंत्र का सामूहिक पाठ किया जाएगा। वहीं विद्यालय की छुट्टी के समय संध्या सत्र में राज्यगीत, गायत्री मंत्र एवं शांति मंत्र का सामूहिक वाचन कराया जाएगा। बौद्धिक और नैतिक विकास है मुख्य उद्देश्य           स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि इन गतिविधियों के नियमित और प्रभावी संचालन से छात्रों में न केवल राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना मजबूत होगी, बल्कि उनके भीतर नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का भी सही विकास होगा। यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों से परिचित कराने में मील का पत्थर साबित होगी। लापरवाही पर होगी कार्रवाई   शासन ने स्पष्ट किया है कि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रतिदिन स्कूलों का औचक निरीक्षण करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि इन नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं। निर्धारित क्रम में अवहेलना पाए जाने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन या प्राचार्यों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

​बलौदाबाजार को 3.5 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात: राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने किया भूमिपूजन और लोकार्पण

​रायपुर छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने आज बलौदाबाजार नगर पालिका क्षेत्र को करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। मंत्री  वर्मा ने कुल 3 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत वाले विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया, साथ ही दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए 12.32 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित रैन बसेरा का लोकार्पण भी किया। ​विकास कार्यों का लेखा-जोखा    भूमिपूजन एवं लोकार्पण के इन विकास कार्यों  पर नजर डालें तो नगर पालिका क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। इसके तहत वार्ड क्रमांक 16 में 56.86 लाख रुपए की लागत से 12 नग राहत शिविरों का निर्माण किया जाएगा, वहीं वार्ड क्रमांक 12 में भी 60.25 लाख रुपए की राशि से 10 नग राहत शिविरों की आधारशिला रखी गई है। स्थानीय नागरिकों की संवेदनशीलता और जरूरत को देखते हुए वार्ड क्रमांक 17 में 61.44 लाख रुपए खर्च कर मुक्तिधाम का उन्नयन एवं जीर्णोद्धार कार्य कराया जाएगा।  इसी तरह ​शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए अधिसंरचना एवं पर्यावरण निधि के अंतर्गत 1.17 करोड़ रुपए की एक बड़ी राशि स्वीकृत की गई है, जिससे विभिन्न वार्डों में 10 अलग-अलग विकास कार्य पूरे किए जाएंगे। इसके साथ ही, आम जनता को स्वच्छ और सुचारू पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अलग-अलग क्षेत्रों में 40.72 लाख रुपए की लागत से पाइपलाइन विस्तार का कार्य शुरू किया गया है। इन सभी भूमिपूजन कार्यों के साथ-साथ, सामाजिक सरोकार को प्राथमिकता देते हुए बस स्टैंड के पास विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए 12.32 लाख रुपए की लागत से एक आधुनिक रैन बसेरे का निर्माण पूरा कर उसका लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर  राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों को पूरी गति के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि गाँव हो या शहर, विकास की राह में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। हमारी डबल इंजन की सरकार तेज गति से विकास के पथ पर दौड़ रही है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। युवा, महिला, किसान और बुजुर्ग—हर वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू हैं और जनता इनका सीधा लाभ उठाकर खुशहाल है। ​भूमिपूजन कार्यक्रम के पश्चात मंत्री  वर्मा ने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने पास में स्थित डबरी (तलाब) की मेढ़ पर आंवले का पौधा लगाया। इसके साथ ही उन्होंने जनपद पंचायत कार्यालय परिसर में नीम का पौधा भी रोपा। इस दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरीशंकर अग्रवाल, नगर पालिका अध्यक्ष  अशोक जैन, जनपद अध्यक्ष मती सुलोचना यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और अधिकारी उपस्थित थे।

विशेष सचिव शीतल वर्मा के कड़े निर्देश, हर हफ्ते तय हो निराकरण की तिथि

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी और स्वरोजगार योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक तेजी से पहुंचाने के लिए शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) में वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स उप समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जनहित की योजनाओं से जुड़े ऋण (लोन) और अनुदान (सब्सिडी) के मामलों को बैंकर्स बिना किसी देरी के जल्द से जल्द स्वीकृत करें। प्रमुख योजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा          बैठक में मुख्य रूप से महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए महिला स्व-सहायता समूहों के बैंक लिंकेज को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, विभिन्न केंद्रीय व राज्य स्तरीय योजनाओं के तहत 31 मार्च तक बैंकों द्वारा दिए गए लोन और वित्तीय सहायता के मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें  प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, पीएम स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना, अंत्योदय स्वरोजगार योजना सहित अन्य योजनाओं के 31 मार्च तक के हितग्राहियों को बैंकों द्वारा प्रदत्त लोन एवं अन्य वित्तीय सहायता के प्रकरणों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। अनावश्यक रूप से पेंडिंग न रखें फाइलें- विशेष सचिव          विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा ने बैंक प्रतिनिधियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत आने वाले हितग्राहियों के आवेदनों को बेवजह लंबित न रखा जाए। फाइलों के त्वरित निपटारे के लिए उन्होंने बैंकर्स को एक व्यावहारिक व्यवस्था बनाने को कहा है। लोन के लिए हर हफ्ते तय हो एक दिन        बैंकर्स से कहा गया है कि वे स्वरोजगार और अन्य योजनाओं के हितग्राहियों के ऋण प्रकरणों के निराकरण के लिए प्रति सप्ताह एक निर्धारित दिन (फिक्स डे) तय करें, ताकि उसी दिन सभी आवेदनों की जांच कर उनका तत्काल निपटारा किया जा सके।         इस उच्च स्तरीय बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और विभिन्न राष्ट्रीयकृत व क्षेत्रीय बैंकों के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। शासन की इस पहल से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आम नागरिकों और ग्रामीण उद्यमियों को बैंकों से ऋण मिलने की प्रक्रिया बेहद सुगम और पारदर्शी हो जाएगी।

सूरज की रोशनी से चमका राजनांदगांव

रायपुर  स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले  ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने उसे देशभर में नई पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर राजनांदगांव देश में सर्वाधिक सोलर क्षमता वाले कनेक्शन स्थापित करने वाला जिला बन गया है। शहरों के साथ-साथ गांवों में भी सौर ऊर्जा को लेकर लोगों का उत्साह तेजी से बढ़ रहा है। कलेक्टर  जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन तथा विद्युत विभाग के समन्वित प्रयासों से यह सफलता संभव हुई है। योजना के तहत जिले में अब तक 6776 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 6381 हितग्राहियों ने वेंडर का चयन कर लिया है। वहीं 3255 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और 2218 लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान भी किया जा चुका है। जिले में 3255 घरेलू सोलर कनेक्शनों के माध्यम से लगभग 9 मेगावाट, 162 व्यावसायिक सोलर कनेक्शनों से 3.40 मेगावाट तथा 31 पावर प्लांटों के जरिए 383 मेगावाट क्षमता विकसित की गई है। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि ढाबा स्थित मेसर्स सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के 160 मेगावाट क्षमता वाले सोलर कनेक्शन की है, जो देश में अपनी तरह का सबसे बड़ा कनेक्शन माना जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हितग्राहियों को सम्मानित कर अन्य नागरिकों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राजनांदगांव की यह उपलब्धि हरित ऊर्जा की दिशा में देश के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है।

छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबल

रायपुर कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।  छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर (पथ विक्रेताओं) को 256 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है।    कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (च्ड ैट।छपकीप) योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।      योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं।      पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।     छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।

डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में बाल श्रम पर बड़ी कार्रवाई

रायपुर  विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नेतृत्व में बच्चों के संरक्षण हेतु प्रदेशभर में विशेष कार्रवाई की गई। इस दौरान रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र से 9 नाबालिग बच्चों, बिलासपुर में आरपीएफ के माध्यम से 7 बच्चों तथा रायपुर जीआरपी के माध्यम से 4 बच्चों का रेस्क्यू कर कुल 20 बच्चों को संरक्षण में लिया गया। इसी क्रम में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में राजधानी रायपुर के उरला स्थित मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज में विशेष औचक छापामार कार्रवाई की गई। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि लोहे की फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों से गंभीर एवं जोखिमपूर्ण प्रकृति का कार्य कराया जा रहा था। मौके से 9 बच्चों को तत्काल संरक्षण में लेकर नियमानुसार प्रकरण दर्ज किया गया तथा उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि रेस्क्यू किए गए बच्चे ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली तथा पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निवासी हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें एक ठेकेदार के माध्यम से रायपुर लाया गया था, जो बिहार का रहने वाला है। मामले में संबंधित ठेकेदार, बच्चों को यहां लाने वाले अन्य व्यक्तियों तथा संभावित बाल तस्करी के पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। बच्चों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। प्रकरण में प्रथम दृष्टया बच्चों के साथ क्रूरता, शोषण एवं अवैध रूप से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने के तथ्य सामने आने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75, 79 एवं 143 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही बाल श्रम एवं संभावित बाल तस्करी से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं की भी विस्तृत जांच की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि, बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, विशेषकर तब जब उनसे जोखिमपूर्ण उद्योगों में कार्य कराया जाता है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। बाल श्रम एवं बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध आयोग पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तथा बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इस कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला, विपिन ठाकुर, श्रम विभाग की टीम एवं संबंधित अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति रही। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को आवश्यक संरक्षण, परामर्श, चिकित्सकीय सहायता एवं पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना का अभियान तेज, ई-केवाईसी में रायगढ़ जिला रहा अव्वल

रायपुर. महतारी वंदन योजना के तहत पात्र हितग्राहियों का ई-केवाईसी कार्य रायगढ़ जिले में तेज गति से पूरा किया जा रहा है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक तथा वीएलई की संयुक्त टीम घर-घर पहुंचकर उन महिलाओं का ई-केवाईसी कर रही है, जो वृद्धावस्था, बीमारी या दिव्यांगता के कारण केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। अभियान के अंतर्गत सेक्टरवार और ग्रामवार सूची तैयार कर शेष हितग्राहियों की पहचान की गई है। टीम दस्तावेज सत्यापन के साथ ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर रही है, जिससे किसी भी पात्र महिला के योजना से वंचित रहने की संभावना समाप्त हो रही है। रानीसागर खड़ियापारा क्षेत्र में विशेष अभियान के दौरान तीन अस्वस्थ महिलाओं के घर पहुंचकर ई-केवाईसी कराया गया, जिनमें दो मामलों में प्रक्रिया सफल रही, जबकि एक प्रकरण तकनीकी कारणों से लंबित है। गौरतलब है कि रायगढ़ जिले ने महतारी वंदन योजना के ई-केवाईसी अभियान में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार जिले ने 96.47 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण कर लिया है, जबकि विभागीय आंकड़ों के अनुसार यह प्रगति लगभग 97 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। योजना के तहत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य किया गया है।

किसानों से जुड़े मुद्दों पर मंथन, समीक्षा बैठक में खाद-बीज और योजनाओं की स्थिति का आकलन

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी ने महासमुंद जिले के कृषि एवं समवर्गीय विभागों की समीक्षा बैठक लेकर खरीफ सीजन की तैयारियों, खाद-बीज की उपलब्धता और किसान हितैषी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक उप संचालक कृषि कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में चंद्रवंशी ने जिले की सभी सहकारी समितियों में किसानों के लिए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा निर्धारित दर पर वितरण व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराना शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विभागीय कार्ययोजना में किसानों के सुझावों और समस्याओं को शामिल कर शासन स्तर पर भेजने के निर्देश भी दिए। बैठक में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत रासायनिक खेती के बजाय जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने, किसानों को प्रशिक्षण देने तथा व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, सिंचाई, विपणन संघ, सहकारी बैंक और कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

सक्ती की दूरपती की सफलता की कहानी, बिहान योजना के सहारे सिलाई से कमाए 1.20 लाख रुपये

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार 2026 ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई कहानियां गढ़ रहा है। इसी कड़ी में सक्ती जिले के ग्राम कुसुमझर की निवासी दूरपती सिदार को जनसमस्या निवारण शिविर में ‘लखपति दीदी’ के रूप में सम्मानित किया गया। ग्राम पंचायत खुरघटी में आयोजित समाधान शिविर में दूरपती को उनकी उपलब्धियों के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। आर्थिक तंगी से जूझ रहीं दूरपती ने स्व-सहायता समूह के माध्यम से प्राप्त आरएफ और सीआईएफ राशि से सिलाई मशीन खरीदी और अपना व्यवसाय शुरू किया। बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने बैंक से ऋण लेकर व्यवसाय का विस्तार किया। आज वह सिलाई कार्य के जरिए प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी इस सफलता ने उन्हें गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया है। दूरपती सिदार का कहना है कि बिहान योजना ने उन्हें रोजगार के साथ आत्मविश्वास और सम्मान भी दिया है। अब वह परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।