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रायपुर में मंत्री रामविचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान से की अहम मुलाकात

रायपुर : मंत्री रामविचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान से की मुलाकात मक्का एवं दलहन प्रोत्साहन के लिए मिली 30.42 करोड़ की स्वीकृति राज्य में मक्का एवं दलहन उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा  रायपुर छत्तीसगढ़ के कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री ने नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनके शासकीय निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। मंत्री नेताम ने राज्य में दलहन एवं तिलहन फसलों के विकास से जुड़ी प्रमुख मांगों को रखा। बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर केन्द्रीय स्तर से स्वीकृति प्रदान की गई, जिससे राज्य के कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी। कृषि मंत्री नेताम ने इसे राज्य के किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि केन्द्र-राज्य के समन्वय से राज्य में मक्का एवं दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। मंत्री नेताम ने इस मौके पर केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से कृषि विकास, आधुनिक कृषि उपकरणों सहित विभिन्न प्रस्ताव रखें। केन्द्रीय मंत्री चौहान ने राज्य में मक्का फसल प्रोत्साहन हेतु 6 करोड़ 32 लाख 50 हजार और दलहन-तिलहन फसलों के प्रोत्साहन के लिए 24 करोड़ 10 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। इससे राज्य में 55 हजार हेक्टेयर में मक्का फसल का प्रदर्शन होगा, जिससे लगभग 7 हजार किसान लाभान्वित होंगे। इसी प्रकार दलहन फसलों के अंतर्गत उड़द एवं मूंग के प्रोत्साहन के लिए 24 हजार 100 हेक्टेयर में फसल प्रदर्शन हो सकेगा, जिससे राज्य के लगभग 28 हजार तक के किसान लाभान्वित होंगे। यहां यह उल्लेखनीय है कि मंत्री रामविचार नेताम ने केन्द्रीय मंत्री से मुलाकात के दौरान जानकारी दी कि राज्य में परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 के लिए 27 करोड़ 68 लाख का प्रस्ताव कृषि मंत्रालय भारत सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। मंत्री नेताम ने केन्द्रीय मंत्री से उक्त लंबित की स्वीकृति का आग्रह किया।

साहित्य उत्सव से छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान

आलेख – छगन लोन्हारे उप संचालक (जनसंपर्क विभाग) रायपुर, बसंत पंचमी 23 जनवरी से नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देश भर के 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होने जा रहे हैं। इस तीन दिवसीय उत्सव से छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर पूरा प्रदेश रजत महोत्सव मना रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह उत्सव न केवल छत्तीसगढ़ को बल्कि पूरे देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ को साहित्यिक जगत में एक नई पहचान प्रदान करेगा तथा जनसमुदाय को साहित्य, लेखन और पठन-पाठन की ओर प्रेरित करेगा। साहित्य महोत्सव के दौरान साहित्य विमर्श खुले संवाद, समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श होगा। साहित्य महोत्सव को लेकर आम-लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। आज जब सोशल मीडिया के कोलाहल मंे ज्ञान की धारा अक्सर सूचनाओं के शोर में दब जाती है। ऐसे समय में साहित्य उत्सव एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। जहां विचार-विमर्श के बीच संवाद की संस्कृति जीवित रहती है। सृजन वही जन्म लेता है, जहां मन खुला हो और कथा वही आकार लेती हैं जहां मनुष्य अपने सत्य से संवाद करने का साहस रखता है। साहित्य महोत्सव के लोगो (डिजाइन) में अंकित ‘‘आदि से अनादि’’ तक वाक्य साहित्य के उस अटूट यात्रा को दर्शाता है, जिसमें आदिकालीन रचनाओं से लेकर निरंतर विकसित हो रहे आधुनिक साहित्य तक सभी रूप समाहित हैं। साहित्य कालातीत है, वह समय, समाज भाषा और पीढ़ियों को जोड़कर चलने वाली निरंतर धारा हैै। तीन दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन में साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कला-प्रदर्शनियों का जीवंत केंद्र बनेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सांस्कृतिक गर्व का विषय है क्योंकि इसमें राज्य की हजारों साल पुरानी साहित्यिक जड़े, जनजातीय परंपराएं, सामाजिक समरसता और आधुनिक रचनात्मक दृष्टि सभी का सुंदर सार्थक और कलात्मक संगम दिखाई देगा। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा आदि से अनादि तक अविचल, जीवंत और समृद्ध रही है, और आगे भी इसी धारा में निरंतर विकास की नई कहानियां लिखती रहेंगी। साहित्य उत्सव में कुल 11 सत्र शामिल होंगे, इनमें 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र और 3 संवाद सत्र आयोजित किये जाएंगे जिनमें साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा। रायपुर साहित्य उत्सव साहित्य, विचार और संस्कृति के संगम का उत्सव है, इसमें युवाओं, शिक्षकों, लेखकों और आम पाठकों की सहभागिता रहेगी। नई पीढ़ी को साहित्य विचार और संस्कृति से जोड़ना इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य है। उत्सव के दौरान पुस्तक मेला का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 40 स्टॉल लगाएं जाएंगे जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें प्रदर्शित की जाएगी एवं विक्रय के लिए उपलब्ध रहेगी। रायपुर साहित्य उत्सव में विशेष रूप से चाणक्य नाटक का मंचन किया जाएगा जो भारतीय बौद्धिक परंपरा और नाट्य कला का प्रभावशाली उदाहरण होगा। इसके साथ ही लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शको को राज्य की जीवंत लोक संस्कृति से रू-ब-रू कराया जाएगा। विख्यात कवियों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन आयोजित होगी, जहाँ उनकी सशक्त रचनाएँ श्रोताओं को साहित्यिक रसास्वादन कराएँगी। साथ ही पत्रकारों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ खुले संवाद सत्र आयोजित किए जाएँगे, जिनमें समकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर सार्थक चर्चा होगी। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना, विचार परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा को राष्ट्रीय संवाद से जोड़ने की एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 न केवल लेखकों और पाठकों के बीच सेतु बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और विचार के प्रति संवेदनशील बनाने का भी माध्यम बनेगा। साहित्यिक विमर्श, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध यह तीन दिवसीय उत्सव नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय सिद्ध होगा। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक आत्मा और लोक स्मृति में बसे भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की एक रचना – हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था, मैं व्यक्ति को नहीं, हताशा को जानता था, हम दोनों साथ चले, साथ चलने को जानते थें यही वह साहित्य है जो मनुष्य को धैर्य देता और साथ चलने की सभ्यता सिखाता है।

उद्यानिकी खेती से बदली किसान की आर्थिक तस्वीर, धान की तुलना में स्ट्रॉबेरी की खेती में डबल मुनाफा

तकनीकी मार्गदर्शन, शासन की सब्सिडी से घटा खर्च, बढ़ी आमदनी रायपुर, जिले में शासन की उद्यानिकी प्रोत्साहन योजनाओं से किसान अब परंपरागत खेती की सीमाओं को तोड़कर नई संभावनाओं की ओर आगे बढ़ रहे हैं। अब किसान केवल धान पर निर्भर न रहकर अधिक लाभ देने वाली  फसलों को अपना रहे हैं। किसान लाल बहादुर सिंह बताया कि ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 2 लाख रुपये की लागत आई है। इससे उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है।          सरगुजा जिले के भगवानपुरखुर्द निवासी किसान श्री लाल बहादुर सिंह ने भी इसी सोच के साथ खेती में नवाचार अपनाया और आज वे एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं उन्नत किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। धान से उद्यानिकी की ओर किया सफल बदलाव        कृषक श्री लाल बहादुर सिंह ने बताया कि वर्षों से धान की खेती करने के बाद भी अपेक्षाकृत सीमित लाभ ही मिल पाता था। लागत बढ़ने और मौसम पर निर्भरता के कारण मुनाफा कम हो जाता था। इसी बीच उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसल की जानकारी दी और इसके फायदे समझाए। इससे उन्हें अपनी खेती में बदलाव करने की प्रेरणा मिली। छोटे क्षेत्र से शुरुआत, बड़े रकबे तक विस्तार       उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत उन्होंने मात्र 50 डिसमिल क्षेत्र से की थी। लाभ मिलने पर अगले वर्ष एक एकड़ में खेती की और फिर तीसरे व चौथे वर्ष इसे बढ़ाकर ढाई एकड़ तक कर दिया। वर्तमान में वे ढाई एकड़ क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की सफल खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। स्ट्रॉबेरी की खेती में लागत कम अधिक मुनाफा        कृषक श्री सिंह ने बताया कि ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 2 लाख रुपये की लागत आई है। इससे उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। लागत निकालने के बाद लगभग 7 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि यही ढाई एकड़ यदि धान की खेती में लगाया जाता, तो लगभग 90 क्विंटल उत्पादन होता, जिससे शासकीय उपार्जन केन्द्र में बेचने पर करीब 3 लाख रुपये की आमदनी होती। धान की खेती में लगभग 1 लाख रुपये की लागत आने के बाद शुद्ध लाभ मात्र 2 लाख रुपये के आसपास ही रहता। उद्यानिकी में सब्सिडी से घटा खर्च, बढ़ा लाभ            किसान श्री लाल बहादुर सिंह ने बताया कि उद्यानिकी विभाग की इस योजना के अंतर्गत पौध, खाद और बीज की राशि डीबीटी के माध्यम से वापस कर दी जाती है। उन्हें लगभग 80 से 85 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्राप्त होगी। विभाग द्वारा समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है, जिससे खेती और अधिक सफल हो रही है। अधिकारियों का मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी         श्री लाल बहादुर सिंह ने बताया कि वे पौधे स्वयं मंगवाते हैं और उद्यानिकी विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार खेती करते हैं। विभागीय अधिकारियों द्वारा खेत का निरीक्षण कर आवश्यक सलाह दी जाती है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होता है और बाजार में अच्छी कीमत मिल जाती है। अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने लाल बहादुर सिंह         श्री सिंह ने कहा कि शासन की उद्यानिकी योजना से अन्य किसान भी लाभ ले सकते हैं। धान जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं। आज वे स्वयं उद्यानिकी खेती से सशक्त और आत्मनिर्भर बने हैं तथा अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित कर रहे हैं। उद्यानिकी प्रोत्साहन के लिए शासन का जताया आभार          किसान श्री लाल बहादुर सिंह ने उद्यानिकी खेती को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं से प्रदेश का किसान आज सशक्त, आत्मनिर्भर और उन्नत कृषक बन रहा है।

विष्णुदेव साय सरकार की 21 जनवरी को महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक, अहम मुद्दों पर होगा फैसला

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक 21 जनवरी को आयोजित की जाएगी। यह बैठक सुबह 11 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय, महानदी भवन में होगी। बैठक में राज्यहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार की विभिन्न योजनाओं, नीतिगत निर्णयों और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर मंत्रिपरिषद विचार-विमर्श कर सकती है। बजट से पहले होने वाली इस बैठक को खास माना जा रहा है, जिसमें विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं।

ऑटो एक्सपो–2026: वाहन खरीदी पर आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट

रायपुर,  छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन द्वारा 20 जनवरी 2026 से 05 फरवरी 2026 तक श्री राम बिजनेस पार्क, एमजीएम हॉस्पिटल के सामने, विधानसभा रोड, सड्डू रायपुर में ऑटो एक्सपो–2026 का आयोजन किया जा रहा है। उक्त ऑटो एक्सपो में विक्रय होने वाले वाहनों पर परिवहन विभाग द्वारा एकमुश्त 50 प्रतिशत जीवनकाल कर (आरटीओ टैक्स) में छूट प्रदान की जा रही है, जिससे प्रदेश के आम नागरिकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। ऑटो एक्सपो–2026 का आयोजन 20 जनवरी 2026 से 05 फरवरी 2026 तक श्री राम बिजनेस पार्क, रायपुर में किया जा रहा है। इस अवधि में वाहन क्रय करने वाले ग्राहकों को आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। यह प्रदेश का पहला ऑटो एक्सपो है, जिसमें पूरे छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों को लाभ मिलेगा। वाहन खरीदने के लिए आमजन को रायपुर आने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि वे अपने शहर अथवा गांव के निकटतम प्रतिभागी/पंजीकृत डीलरों के माध्यम से इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। ऑटो एक्सपो–2026 के अंतर्गत सभी नागरिकों को अपने गृह जिले में ही वाहन पंजीयन कराने की सुविधा उपलब्ध होगी। अर्थात, क्रय किए गए वाहन पर अपने गृह जिले के परिवहन कार्यालय का पंजीयन चिन्ह (आरटीओ कोड) प्राप्त किया जा सकेगा। दूरस्थ क्षेत्रों के डीलर्स भी इस ऑटो एक्सपो में भाग ले रहे हैं, जिससे छोटे व्यावसायिक विक्रेताओं को रोजगार के उपयुक्त अवसर प्राप्त होंगे और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। रायपुर ऑटो एक्सपो में छत्तीसगढ़ की जनता को एक ही स्थान पर सभी प्रकार के वाहन मॉडल एवं नवीनतम तकनीक से युक्त नए मॉडलों को देखने, परखने और चुनने का अवसर मिलेगा। इससे आमजन नवीनतम ऑटोमोबाइल तकनीकों से भी अवगत हो सकेंगे। रायपुर ऑटो एक्सपो–2026 में देश के विभिन्न फाइनेंसर एवं बैंक न्यूनतम दरों पर वाहन ऋण उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं इंश्योरेंस कंपनियां न्यूनतम दरों पर वाहन बीमा की सुविधा प्रदान कर रही हैं। इससे वाहन क्रय करने वाले नागरिकों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। ऑटो एक्सपो–2026 में आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत छूट के साथ-साथ फाइनेंस कंपनियों, बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों एवं विभिन्न डीलरों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण न्यूनतम दरों पर वाहन उपलब्ध होंगे, जिससे आमजन को व्यापक आर्थिक राहत मिलेगी। रायपुर के इस ऑटो एक्सपो में रायपुर जिले के 95 डीलर्स तथा अन्य जिलों के 171 डीलर्स, कुल 266 डीलर्स भाग ले रहे हैं, जिससे प्रदेशभर के नागरिकों को विविध विकल्प उपलब्ध होंगे। उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष 2025 के ऑटो एक्सपो में कुल 29,348 वाहनों की बिक्री हुई थी, जिसके माध्यम से आम जनता को लगभग 120 करोड़ रुपये की आरटीओ टैक्स में छूट प्रदान की गई थी, जिससे नागरिकों को उल्लेखनीय आर्थिक सहायता प्राप्त हुई थी। इस प्रकार, ऑटो एक्सपो–2026 प्रदेश के नागरिकों के लिए किफायती दरों पर वाहन क्रय करने, स्थानीय स्तर पर पंजीयन सुविधा प्राप्त करने तथा व्यापक आर्थिक लाभ उठाने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हो रहा है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना: 57 मार्गों पर बस संचालन, पहली बार यात्री बस सुविधा से जुड़े 330 गाँव

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 से दूरस्थ गाँवों को सुलभ आवागमन की सौगात रायपुर छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अंचलों में आवागमन की सुविधा सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह योजना उन ग्रामों तक सार्वजनिक परिवहन पहुँचाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है, जहाँ अब तक यात्री बस सुविधा उपलब्ध नहीं थी। योजना के प्रथम चरण में बस्तर एवं सरगुजा संभाग के जिलों को सम्मिलित किया गया है। अब तक मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत कुल 57 चयनित मार्गों पर 57 बसों का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। इन बसों के माध्यम से कुल 330 नए गाँवों तक पहली बार यात्री बस सुविधा पहुँची है, जिससे ग्रामीण जनजीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। योजना का प्रमुख उद्देश्य ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों को जनपद मुख्यालय, नगरीय क्षेत्र, तहसील मुख्यालय तथा जिला मुख्यालयों से जोड़ना है, जहाँ पूर्व में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं थी। इससे ग्रामीण नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं तक सुगम पहुँच सुनिश्चित हो रही है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत बस संचालकों को राज्य शासन द्वारा प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। प्रथम वर्ष ₹26 प्रति किलोमीटर, द्वितीय वर्ष ₹24 प्रति किलोमीटर तथा तृतीय वर्ष ₹22 प्रति किलोमीटर की दर से सहायता दी जा रही है। इसके अतिरिक्त योजना के तहत गासिक कर में पूर्णतः छूट अधिकतम तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण मार्गों पर बस संचालन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके। मार्ग चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है। इस योजना के अंतर्गत मार्गों का चयन जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है, ताकि वास्तविक आवश्यकता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता मिल सके। चयनित मार्गों पर बस संचालन हेतु निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती है। निविदा के माध्यम से न्यूनतम वित्तीय दर प्रस्तावित करने वाले पात्र आवेदक का चयन किया जाता है, जिससे शासन पर न्यूनतम वित्तीय भार पड़े और सेवा सतत बनी रहे। निविदा में चयनित आवेदक से विधिवत परमिट आवेदन प्राप्त कर सुनवाई की प्रक्रिया के उपरांत बस संचालन हेतु परमिट जारी किया जाता है। इससे नियामकीय प्रक्रिया का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाता है। वर्तमान में 12 नवीन ग्रामीण मार्गों पर बस संचालन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। इसके अतिरिक्त 15 नए ग्रामीण मार्गों का चयन कर लिया गया है, जिन पर बस संचालन हेतु निविदाएँ आमंत्रित की गई हैं। जिलावार स्थिति की बात करें तो सुकमा में 8, नारायणपुर में 4, जगदलपुर में 2, कोण्डागांव में 4, कांकेर में 6, दंतेवाड़ा में 7, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 2, सूरजपुर में 6, कोरिया में 5, जशपुर में 7, बलरामपुर में 4 तथा अंबिकापुर में 2 बसों का संचालन किया जा रहा है। इस प्रकार कुल 57 मार्गों पर 57 बसें संचालित हैं। आगामी कार्ययोजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 200 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाकर समावेशी विकास, सामाजिक सशक्तिकरण और आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान करेगा।

साय कैबिनेट की कल बैठक में रायपुर पुलिस कमिश्नरी सहित कई नीतिगत प्रस्तावों पर होगी चर्चा

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (साय कैबिनेट) की महत्वपूर्ण बैठक कल आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में कई अहम नीतिगत और प्रशासनिक प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण एजेंडे में रायपुर पुलिस कमिश्नरी प्रणाली से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है, जिस पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट बैठक में रायपुर पुलिस कमिश्नरी प्रणाली के अधिकार क्षेत्र और प्रशासनिक सीमाओं के निर्धारण को अंतिम मंजूरी दी जा सकती है। यदि प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो राजधानी रायपुर के साथ-साथ नवा रायपुर को भी पुलिस कमिश्नरी क्षेत्र में शामिल किया जा सकता है। इससे राजधानी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी तथा सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी। पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस प्रशासन को त्वरित निर्णय लेने और अपराध नियंत्रण में अधिक अधिकार मिलेंगे। इस व्यवस्था के तहत पुलिस आयुक्त को मजिस्ट्रेटी शक्तियां भी प्राप्त होंगी, जिससे कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी। मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी। कैबिनेट बैठक में गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्यपाल द्वारा दिए जाने वाले अभिभाषण के प्रारूप को भी स्वीकृति दी जा सकती है। इस अभिभाषण में राज्य सरकार की उपलब्धियों, आगामी योजनाओं और विकास कार्यों का उल्लेख किया जाएगा। ऐसे में कैबिनेट की मंजूरी के बाद अभिभाषण को अंतिम रूप दिया जाएगा।

स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर 50 बसों की हुई जांच

कोंडागांव. सड़क सुरक्षा माह के तहत परिवहन विभाग द्वारा 1 जनवरी से 31 जनवरी तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को परिवहन एवं यातायात विभाग द्वारा जिले के अंतर्गत संचालित 50 स्कूली बसों की जांच की गई। जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूली बसों के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों के साथ-साथ फिटनेस, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की गई। निरीक्षण के दौरान 6 वाहन बिना फिटनेस, 2 वाहन बिना परमिट, 3 वाहन बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र तथा 7 वाहनों के अग्निशमन यंत्र बंद पाए गए। इस प्रकार कुल 18 वाहनों पर मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 40 हजार 900 रुपये का चालान काटा गया। स्कूली बसों की जांच के साथ-साथ सभी बस चालकों एवं परिचालकों का स्वास्थ्य विभाग द्वारा नेत्र एवं स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया, ताकि बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा सके। जांच के दौरान परिवहन अधिकारी ने सभी चालकों एवं परिचालकों को यातायात नियमों का पालन करने, निर्धारित वर्दी में रहने, ओवर स्पीड वाहन न चलाने, शराब सेवन कर वाहन न चलाने तथा सड़क सुरक्षा से संबंधित नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए।

स्पोर्ट्स और कल्चरल मीट में आए कई रेल अफसरों को फूड पॉइजनिंग

बिलासपुर. स्पोर्ट्स और कल्चरल मीट में शामिल होने के बाद देर रात तक कार्यक्रम आयोजित हुए, फिर तीनों डिवीजन के अधिकारियों और उनके परिजन ने भोजन भी किया, जिसमें से 100 से अधिक रेल अफसर और उनके परिजन फूड पाइजनिंग का शिकार हो गए। आनन-फानन में सभी को उपचार के लिए रेलवे केन्द्रीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम अफसरों का इलाज कर रही है। यह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन अंतर्गत स्पोर्ट्स एंड कल्चरल मीट कार्यक्रम का आयोजन पिछले तीन दिन से बिलासपुर डिवीजन में किया जा रहा है, जिसमें बिलासपुर के अलावा रायपुर और नागपुर डिवीजन के अलावा मोतीबाग एवं जोन के सभी विभागों के अफसरों के साथ उनके परिजन भी शामिल हुए थे। आयोजन सेकेरसा ग्राउंड के अलावा रेलवे नार्थ ईस्ट इंस्टीट्यूट, न्यू रेल क्लब आडिटोरियम सहित अन्य स्थानों पर हो रहा था। रविवार की शाम स्पोटर्स एंड कल्चरल मीट कार्यक्रम का अंतिम दिन था। इस कार्यक्रम के समापन के उपरांत रात में न्यू रेल क्लब आडिटोरियम के अलावा अन्य स्थानों पर भोजन का भी प्रबंध किया गया था। भोजन करने के करीब 100 से अधिक रेल अफसर और उनके परिजन को अचानक उल्टी व दस्त होनी शुरु हो गई। अचानक रेल अफसरों व उनके परिजन की तबीयत बिगड़ने के बाद आनन-फानन में सभी को केन्द्रीय रेलवे चिकित्सालय के इमरजेंसी, आईसीयू और वीआईपी वार्ड में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने कुछ का उपचार और दवाई देने के बाद छुट्टी दे दी, लेकिन दूसरे दिन सोमवार को भी एक दर्जन से अधिक अधिकारी व उनके परिजन हास्पिटल में अपना उपचार करा रहे हैं। वहीं आधे से अधिक अधिकारियों व उनके परिजन की घर में भी उपचार कराने की सूचना मिली है। इसके अलावा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के एसडीजीएम मनोज गुरुमुखी को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनके परिजन भी अस्वस्थ बताए जा रहे हैं।

गृहमंत्री विजय शर्मा के बंगले के सामने पहुंचे CAF कैंडिडेट्स

रायपुर. छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्ड (CAF) के लिए 2018 में 1786 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इनमें लगभग 417 कैंडिडेट वेटिंग लिस्ट में थे। जिन्हें 7 साल बाद भी नौकरी नहीं मिल पाई है। जबकि CAF में 3 हजार से ज्यादा पोस्ट खाली है। इनमें से कुछ उम्मीद हारकर दूसरा करियर ऑप्शन देख चुके हैं। कुछ 7 साल से लगातार दफ्तरों और मंत्री बंगलों के चक्कर काट रहे हैं। पिछले एक महीने से परिवार-बच्चों सहित तूता धरना स्थल पर बैठे हैं। मंगलवार को चौथी बार पर गृहमंत्री सदन अपनी मांग लेकर पहुंचे। इस दौरान कैंडिडेट्स और पुलिस के अधिकारियों के बीच तीखी नोंक-झोंक हो गई। बता दें कैंडिडेट्स ने गृहमंत्री विजय शर्मा का बंग्ला घेर रखा है। मुलाकात और चर्चा की मांग पर कैंडिडेट्स अड़े हुए हैं। कैंडिडेट्स को हटाने पुलिस पहुंची हुई है। कैंडिडेट्स का आरोप है कि पुलिस महिलाओं और बच्चों पर जोर आजमाइश कर रही है। इस बात को लेकर विवाद उपजा हुआ है। कैंडिडेट्स का साफ कहना है कि वो गृहमंत्री से मुलाकात किए बिना नहीं जाएंगे। बता दें दो मुलाकात में गृह मंत्री विजय शर्मा से कैंडिडेट्स को आश्वासन मिला था। तीसरी बार कैंडिडेट्स से गृहमंत्री की मुलाकात नहीं हो पाई थी।