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नई नियुक्ति सूची प्रकाशित: छत्तीसगढ़ के हिस्से आए 3 IAS अधिकारी

रायपुर केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC-CSE 2024) के परिणामों के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चुने गए उम्मीदवारों को कैडर आवंटित कर दिया है. ऑल इंडिया टॉपर शक्ति दुबे को होम स्टेट कैडर उत्तर प्रदेश मिला है. वहीं छत्तीसगढ़ को इस बार 3 नए आईएएस मिले हैं. यूपीएससी 2024 में 65 वीं रैंक हासिल करने वाली छत्तीसगढ़ कैडर की आईपीएस पूर्वा अग्रवाल को झारखंड कैडर मिला है. किसे मिला छत्तीसगढ़ कैडर ? छत्तीसगढ़ को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 3 अधिकारी मिले हैं. गोकुल आरके ने यूपीएससी 2024 की परीक्षा में 424 रैंक हासिल किया. वी. यशवंथ ने यूपीएससी 2024 की परीक्षा में 424 रैंक हासिल किया. वहीं इशांत जायसवाल ने 441 रैंक हासिल किया है. कैंडिडेट        होम स्टेट            अलॉट हुआ कैडर गोकुल आरके             तमिलनाडू            छत्तीसगढ़ वी. यशवंथ             तेलंगाना            छत्तीसगढ़ इशांत जायसवाल        यूपी            छत्तीसगढ़   UPSC परीक्षा टॉपर्स और उनके कैडर:     शक्ति दुबे – यूपी     हर्षिता गोयल – गुजरात     डोंगरे अर्चित पराग – कर्नाटक     शाह मार्गी चिराग – गुजरात     आकाश गर्ग – AGMUT     कोमल पुनिया – यूपी     आयुषी बंसल – मध्य प्रदेश     राजकृष्ण झा – बिहार     आदित्य विक्रम अग्रवाल – यूपी     मयंक त्रिपाठी – यूपी  

प्रदेश में बड़ा अभियान शुरू: 11 जिलों में बाल विवाह रोकने पर रहेगा फोकस

रायपुर  छत्तीसगढ़ में बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसम 23.3 प्रतिशत से लगभग आधी है लेकिन 11 जिलों को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 5 के अनुसार छत्तीसगढ़ में बाल विवाह की दर 12 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत लगभग आधी है जबकि सूरजपुर में यह 34.3 प्रतिशत है. इसी तरह बलरामपुर, कोरिया, जशपुर और मुंगेली में भी बाल विवाह की दर 20 से 30 प्रतिशत के बीच है, जो राज्य के अन्य जिलों से काफी अधिक है. उक्त जिलों के साथ रामानुजगंज, मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर, कोरबा, कबीरधाम, गरियाबंद, जशपुर, नारायणपुर के संवेदनशील गांवों की पहचान करके उन्हें बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. अभियान के तहत राज्य, जिला और गांव स्तर पर इस अभियान को तीन चरणों में बांटा गया है. पहले चरण में स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में जागरूकता के प्रसार पर जोर रहेगा. दूसरे चरण में मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारों जैसे धार्मिक स्थलों पर जहां विवाह संपन्न कराए जाते हैं. साथ ही विवाह में सेवाएं देने वाले बैंक्वेट हाल, बैंड बाजा वाले, कैटरर, डेकोरेटर इत्यादि पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा. तीसरे और आखिरी चरण में बाल विवाह की रोकथाम के लिए ग्राम पंचायतों, नगरपालिका के वाडों व समुदाय स्तरीय भागीदारी और जिम्मेदारी को मजबूत किया जाएगा. 1 साल में रोके गए 3935 बाल विवाह जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य के तहत अगले एक साल में एक लाख गांवों को बाल विवाह मुक्त बनाएगा. दावा किया गया है कि जेआरसी से जुड़े संगठनों ने एक साल में छत्तीसगढ़ में 3935 बाल विवाह रोकने में सफलता हासिल की है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल विवाह के खात्मे के लिए 100 दिवसीय सघन जागरूकता अभियान शुरू किया है. इसका समापन 8 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर होगा.

धान तस्करी पर कसा शिकंजा, बॉर्डर एरिया से 1370 क्विंटल धान बरामद

गरियाबंद छत्तीसगढ़–ओडिशा सीमावर्ती क्षेत्रों में धान तस्करी पर लगातार चल रही कार्रवाई है. सीमा का आड़ लेकर धान को एक राज्य से दूसरे राज्य में खपाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लगभग एक महीने में पुलिस की मुस्तैद कार्रवाई ने तस्करों की कमर तोड़ दी है. मगररोडा जांच नाका से महज 500 मीटर दूर पर स्थित ओडिसा चंदाहांडी थाना क्षेत्र के जामलीपारा में ट्रक से धान लाकर डंप किया गया, जिसे पिकअप के जरिए देवभोग इलाके में लाने की तैयारी थी. देवभोग पुलिस ने पुख्ता सूचना पर मौके पर पहुंची तो ट्रक डंप कर भाग चुका था. थाना प्रभारी फैजुल शाह हुदा ने बताया कि किसी भी स्थानीय ने इस धान को अपना नहीं होना बताया. जिसके बाद चंदाहांडी पुलिस और वहां के फूड इंस्पेक्टर पृथ्वी राज मेहर को सूचना कर पुलिस ने 25 तो राजस्व अमला ने 6 वाहन किए जब्त कर लिया गया. पुलिस के इस संयुक्त कार्रवाई के बाद तस्करों का सीमापार डंपिंगयार्ड बनाने की रणनीति भी ध्वस्त पड़ गई. थाना प्रभारी फैजुल शाह ने कहा कि गैर कानूनी कार्य में सीमाएं बाधा नहीं बनेंगे. कानून अपना काम करना जानती है, पुलिस कप्तान के दिशा निर्देश में सीमावर्ती पुलिस थानों में समन्वय बना कर आगे भी इसी तरह कार्रवाई किया जाएगा. इधर अमलीपदर में भी बीती रात तीन बड़ी कार्रवाई ने बिचौलियों के नींद उड़ा दिया है. थाना प्रभारी दिलीप मेश्राम ने बताया कि अवैध तस्करी रोकने बनाई टीम को दो ट्रेक्टर और एक मेटाडोर में ओडिसा के रास्ते अवैध धान आने की सूचना मिली थी. सीमा पार के चुके वाहन चालक को भनक लगी तो वापस जाने की आपाधापी में लगा रहा, लेकिन मुस्तैद टिम ने पकड़ लिया. मेश्राम ने बताया कि रात को ही कार्रवाई में 314 पेकेट धान जब्त किया गया है, दो ट्रेक्टर में कूल 110 पैकट शेष मात्रा मेटाडोर में जब्त हुआ है. पुलिस ने 25 तो राजस्व अमला ने 6 वाहन किए जब्त पिछले 27 दिनों में देवभोग पुलिस ने 17 वाहन और डंप मिलाकर 670 क्विंटल धान जब्त किया है.जबकि राजस्व अमला ने 6 वाहनों के साथ 200 क्विंटल धान जब्त किया. अमलीपदर पुलिस ने भी 8 वाहनों में 500 क्विंटल जप्त किया है. इस तरह अब तक 28 वाहन और 1370 क्विंटल धान जप्त किया गया. ओडिसा के इस अवैध धान के एवज में सरकार को लगभग 45 लाख का भुगतान करना पड़ता. कार्रवाई से खरीदी आधी हो गई अंतिम खरीदी तारीख तक देवभोग ब्लॉक के 12 खरीदी केंद्र में 8 हजार क्विंटल की खरीदी हुई थी.जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 16 हजार पार कर गया था. ऐसा ही परिवर्तन गोहरापदर ब्रांच के अधीन आने वाले 9 से ज्यादा सीमावर्ती खरीदी केंद्रों में देखने को मिला है. लगातार वाहनों के धर पकड़ के चलते इस बार कोचियों और सप्लायर में हड़कंप मचा हुआ है. प्रशासन का दबाव आगे भी इसी तरह बना रहा तो सरकार को बोगस खरीदी में होने वाले प्रति वर्ष के करोड़ों का नुकसान, इस बार नहीं होगा. ओडिसा से धान आवक की दो बड़ी वजह 1. स्थानीय उत्पादन तय मात्रा से कम देवभोग तहसील क्षेत्र की औसतन पैदावारी प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल है. अमलीपदर तहसील क्षेत्र में भी लगभग यही स्थिति.सरकार समर्थन मूल्य में प्रति एकड़ रकबे में 21 क्विंटल खरीदी करती है. ऐसे में खरीदी के लिए प्रावधिक मात्रा और उत्पादन मात्रा के अंतर के लिए किसान ओडिसा की पैदावारी पर निर्भर है.पिछले पांच सालों से ओडिसा के धान पर निर्भरता बढ़ गई है. 2. उड़ीसा की धान खरीदी नीति में झोल झाल दो साल पहले तक ओडिसा में 2300 प्रति क्विंटल में धान खरीदी होती थी.सत्र 2024 से बोनस 800 देना शुरू कर 3100 में खरीदी तय तो किया पर,खरीदी प्रक्रिया मिलर के सहूलियत पर निर्भर होती है.इस साल 28 नवंबर से समर्थन मूल्य खरीदी शुरू कर दिया गया,लेकिन मिलर से अनुबंध नहीं होने के कारण ,धान खरीदी बंद है.कब शुरू होगा,आगे क्या होगा यह बताने वाले भी नहीं.ऐसे में बिचौलिए ओडिसा के किसान के घर घर पहुंच कर 2000 में धान नगद खरीद रही,जिसे 2300 से 2500 रुपए तक में सीजी सीमावर्ती किसान ओडिसा का धान खरीदी करने तैयार हैं.

नक्सलियों को बड़ा झटका: रामधेर और 11 साथी सरेंडर, तिहरी राज्यों में कमजोर पड़ा नेटवर्क

खैरागढ़ छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता दर्ज करते हुए CPI (माओवादी) के शीर्ष नेता और केंद्रीय समिति सदस्य रामधेर मज्जी ने अपने 11 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. यह सरेंडर आज सुबह गांव कुम्ही, थाना बकर कट्टा में किया गया, जहां सभी कैडरों ने हथियार नीचे रखकर पुलिस के सामने खुद को समर्पित किया. इस कदम को सुरक्षा एजेंसियां नक्सली ढांचे पर निर्णायक प्रहार मान रही हैं, क्योंकि यह पूरा समूह MMC— महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़— स्पेशल जोनल कमेटी का सक्रिय हिस्सा था, जो तीन राज्यों के छह जिलों में अपनी पैठ बनाए हुए था. रामधेर मज्जी द्वारा AK-47 के साथ आत्मसमर्पण किए जाने को नक्सली संगठन की सबसे बड़ी टूट मानी जा रही है. उसके साथ DVCM रैंक के चंदू उसेंडी, ललिता, जानकी और प्रेम ने भी सरेंडर किया, जिनमें से दो के पास AK-47 और इंसास जैसे हथियार मौजूद थे. इनके अलावा ACM स्तर के नक्सली रामसिंह दादा और सुकेश पोट्टम ने भी हथियार डाले, जबकि क्षेत्रीय महिला मिलिशिया (PM) की लक्ष्मी, शीला, योगिता, कविता और सागर ने पुलिस के सामने समर्पण कर दिया. समूह के पास AK-47, इंसास, SLR, 303 और 30 कार्बाइन जैसे हथियार बरामद हुए हैं. इस सरेंडर ने MMC स्पेशल जोन को लगभग निष्प्रभावी बना दिया है. इससे पहले MMC जोन के प्रवक्ता अनंत गोंदिया में आत्मसमर्पण कर चुका था, जबकि बीते एक दिन में ही बालाघाट में सुरेंद्र सहित नौ अन्य माओवादी हथियार डाल चुके हैं. लगातार हो रही ये सरेंडर श्रृंखलाएं बताती हैं कि नक्सल संगठन की जमीनी पकड़ तेजी से कमजोर हो रही है और सुरक्षा बलों की रणनीति कारगर साबित हो रही है. सभी 12 माओवादी अब पुलिस कस्टडी में हैं और उनसे पूछताछ की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. पुलिस जल्द ही प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर पूरे ऑपरेशन और नक्सली नेटवर्क से संबंधित विस्तृत खुलासा करने वाली है.

बलरामपुर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 400 बोरी अवैध धान से भरा ट्रक जब्त

रायपुर : बलरामपुर जिला प्रशासन की सतर्कता से 400 बोरी अवैध धान से भरा ट्रक जब्त रायपुर बलरामपुर जिले में धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा अवैध धान परिवहन पर सतत निगरानी रखी जा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की ओर से एक ट्रक में अवैध रूप से धान लाए जाने की जानकारी प्राप्त हुई। प्रशासन द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध धान से भरे ट्रक को पकड़ा गया। जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रक नंबर सीजी 29 एएफ 0480 में लगभग 400 बोरी अवैध धान लोड था, जिसे बिना वैध दस्तावेजों के जिले की सीमा में लाया जा रहा था। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर ट्रक को रोका, सामग्री की जांच की और धान को कब्जे में लेकर वाहन को संबंधित थाने के सुपुर्द कर दिया है। अनुविभागीय अधिकारी श्री नीर नंदेहा ने बताया कि जिले में धान खरीदी सीजन के दौरान प्रत्येक स्तर पर अवैध गतिविधि पर निगरानी रखी जा रही है। चेक पोस्टों  पर निगरानी को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। उन्होंने कहा है कि आगे भी अवैध परिवहन , भंडारण गतिविधियों पर सतत निगरानी रखते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध रूप से धान का परिवहन या खरीद-बिक्री दिखाई दे, तो इसकी सूचना तुरंत दें, ताकि समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

सीएम विष्णु देव साय ने मध्यप्रदेश की नई सिंचाई तकनीक ‘प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क’ का किया निरीक्षण

रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने मध्यप्रदेश में नई सिंचाई तकनीक 'प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क' की प्रस्तुति का किया अवलोकन सीएम विष्णु देव साय ने मध्यप्रदेश की नई सिंचाई तकनीक ‘प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क’ का किया निरीक्षण छत्तीसगढ़ में भी इस तकनीक के व्यापक उपयोग को सुनिश्चित किया जाएगा – मुख्यमंत्री  साय रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय को मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव  राजेश राजौरा ने भोपाल में सिंचाई की नवीनतम तकनीक PIN (Pressure Irrigation Network) के संबंध में विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों की तुलना में यह प्रणाली कहीं अधिक कुशल, आधुनिक और जल संरक्षण के अनुरूप है। अपर मुख्य सचिव  राजौरा ने प्रस्तुति के दौरान बताया कि जहाँ पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में लगभग 35 प्रतिशत एफिशिएंसी प्राप्त होती है, वहीं प्रेशर इरिगेशन प्रणाली में दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत तक पहुँच जाती है। इस तकनीक में प्रेशर आधारित पाइपलाइनों से सिंचाई की जाती है, जिससे पानी का रिसाव और अपव्यय कम होता है तथा बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रणाली में भू-अधिग्रहण की आवश्यकता न्यूनतम होती है, जिससे परियोजनाएं समय पर और लागत प्रभावी तरीके से पूरी की जा सकती है।   प्रस्तुति में उल्लेख किया गया कि मध्यप्रदेश में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इस तकनीक से सिंचाई की जा रही है और आगामी वर्षों में इसे 40 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। इस मॉडल से न केवल जल उपयोग दक्षता बढ़ी है, बल्कि किसानों की उत्पादकता और सिंचाई सुविधा में भी महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिला है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रेजेंटेशन की सराहना करते हुए कहा कि सिंचाई की यह उन्नत तकनीक जल प्रबंधन की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा, “हम इस तकनीक का छत्तीसगढ़ में भी अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेंगे, ताकि राज्य के किसानों को कम पानी में अधिक सिंचाई सुविधा और बेहतर उत्पादन मिल सके। जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और त्वरित क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से यह तकनीक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस तकनीक के माध्यम से भूमि अधिग्रहण किए बिना भी सिंचाई का लाभ मिल सकेगा।” मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विभागीय अधिकारियों को इस तकनीक के अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध सिंह,  मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता  विनोद देवड़ा, अधीक्षण यंत्री  विकास राजोरिया और अधीक्षण यंत्री  शुभंकर विश्वास भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में पानी का एक बड़ा हिस्सा रिसाव, वाष्पीकरण और अनियंत्रित बहाव के कारण व्यर्थ हो जाता है, जिससे खेतों तक वास्तविक जल आपूर्ति सीमित रहती है और पूरी कमांड एरिया में समान सिंचाई नहीं हो पाती। सामान्यतः पारंपरिक प्रणाली की कुल सिंचाई दक्षता केवल 35 प्रतिशत मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर PIN (Pressure Irrigation Network) प्रणाली में पानी पाइपलाइनों के माध्यम से नियंत्रित दबाव के साथ सीधे खेतों तक पहुँचाया जाता है, जिससे पानी का अपव्यय लगभग शून्य हो जाता है। इस तकनीक से सिंचाई दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो जल संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। PIN प्रणाली में सिंचाई पूरी तरह पाइपलाइन आधारित होने के कारण नहर निर्माण की आवश्यकता कम हो जाती है और भू-अधिग्रहण भी न्यूनतम होता है। इससे परियोजनाओं की लागत घटती है और कार्य समय पर पूरे होते हैं। पारंपरिक सिंचाई की तुलना में इस तकनीक में पंपिंग दक्षता अधिक होती है, जिससे बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। समान दबाव से पानी वितरण होने के कारण खेतों के टेल एंड के क्षेत्रों को भी पर्याप्त पानी मिलता है। इस प्रणाली से फसलों की उत्पादकता में वृद्धि, जल प्रबंधन में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि जैसे व्यापक लाभ प्राप्त होते हैं।

अंबिकापुर में पारा 4.6°C पर पहुंचा, छत्तीसगढ़ के कई जिलों में शीत लहर के आसार

रायपुर प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। लगातार तापमान में गिरावट दर्ज किया जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के मुताबिक, आज उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में शीत लहर चलने की संभावना है। प्रदेश में अगले 24 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, हालांकि इसके बाद तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम का हाल राज्य में बीते 24 घंटों के दौरान मौसम पूरी तरह शुष्क रहा। प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 29.4°C जगदलपुर में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 4.6°C अंबिकापुर में दर्ज किया गया। आज के लिए पूर्वानुमान प्रदेश में आज मौसम शुष्क रहने की संभावना है। किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की गई है। अगले दो दिनों के बाद भी मौसम में किसी खास बदलाव की उम्मीद नहीं है और स्थिति शुष्क ही रहने की संभावना है। रायपुर का कैसा रहेगा मौसम राजधानी रायपुर में आज धुंध छाए रहने की संभावना है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 28°C और 13°C के आसपास रहने की संभावना है।

लूट का झूठा नाटक कर उड़ाए 14 लाख! कंपनी के कैश लोडर की साजिश का पुलिस ने किया पर्दाफाश

भिलाई हिताची कंपनी के एटीएम में कैश लोडिंग करने वाले वर्कर द्वारा 14 लाख 60 हजार रुपये की लूट की मनगढ़ंत कहानी रचने का मामला कुम्हारी पुलिस ने सुलझा लिया है। युवक ने खुद के साथ लूट होने की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराकर पुलिस को घंटों गुमराह किया, लेकिन पूछताछ और जांच के दौरान पूरी सच्चाई सामने आ गई। अब प्रार्थी ही आरोपित बन चुका है और पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है। एसएसपी विजय अग्रवाल ने खुद की पूछताछ मामले में लूट की बड़ी रकम की सूचना मिलते ही एसएसपी विजय अग्रवाल, एएसपी शहर सुखनंदन राठौर और कुम्हारी थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच के दौरान ही पुलिस को लूट की कहानी में कई तथ्यों पर संदेह हुआ, और आखिरकार पर्दाफाश हो गया कि पूरी कथा झूठी थी। लूट की घटना फर्जी साबित होने पर पुलिस ने राहत की सांस तो ली लेकिन साथ ही आरोपित के खिलाफ अपराध दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।   एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि 6 दिसंबर की शाम करीब साढ़े 7 बजे कुम्हारी पुलिस को सूचना मिली कि कपसदा गांव स्थित ग्लोबल स्कूल के पास तीन अज्ञात युवकों ने 14 लाख 60 हजार रुपये से भरा बैग लूट लिया है। शिकायतकर्ता चरोदा निवासी आशीष राठौर (34 वर्ष) ने बताया कि वह हिताची कंपनी के एटीएम बूथों में कैश लोडिंग का कार्य करता है और वही रकम लेकर जा रहा था। उसने दावा किया कि वह अपने भांजे मनीष राठौर के साथ मोटरसाइकिल से रायपुर के हीरापुर तेंदुआ वाले एटीएम में कैश लोड करने के बाद मुरमुंदा और दादर के एटीएम में कैश डालने के लिए जा रहा था। इसी दौरान तीन युवकों ने गाड़ी रोककर चाकू दिखाते हुए उससे भरा बैग छीन लिया और खेतों की ओर भाग गए। उसके अनुसार बैग में मुरमुंदा एटीएम के लिए 8 लाख 60 हजार रुपये और दादर एटीएम के लिए 6 लाख रुपये रखे थे। यहीं से शुरू हुआ संदेह कुम्हारी पुलिस की एक टीम संयोग से बोरसी गांव से लौटते समय पास ही थी, इसलिए कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गई। जांच के दौरान पुलिस के संदेह बढ़ने के कारण: घटना के वक्त साथ होने की बात कही गई भांजा मनीष मौके पर मौजूद नहीं था। मोटरसाइकिल गिरने का दावा किया गया, लेकिन न बाइक पर न ही आशीष के शरीर पर एक भी खरोंच नहीं थी। पूछताछ में बयानों में लगातार विरोधाभास मिलते रहे। इन बिंदुओं के सामने आने पर पुलिस ने आशीष को थाना लाकर पूछताछ की। एसएसपी विजय अग्रवाल और एएसपी सुखनंदन राठौर द्वारा कड़ी पूछताछ के दौरान अंततः आशीष टूट गया और स्वीकार किया कि लूट की पूरी कहानी झूठी है। अब प्रार्थी ही आरोपित पुलिस ने लूट की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराकर पुलिस और प्रशासन को गुमराह करने, साजिश रचने और सबूतों को छुपाने के आरोपों के तहत आशीष राठौर के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर उसे हिरासत में ले लिया है। पुलिस का कहना है कि आगे की पूछताछ में यह पता लगाया जाएगा कि नकली लूट का मकसद रकम हड़पना था या किसी और वजह से यह कहानी रची गई।

प्रदेश में अवैध भण्डारण, परिवहन एवं विक्रय करते हुए लगभग 1 लाख 52 हजार क्विंटल धान जब्त

मार्कफेड ने जारी किए 1 नवंबर से 06 दिसम्बर तक के आंकड़े रायपुर  छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रारम्भ होने के पूर्व से ही प्रदेश में अवैध धान के भण्डारण एवं परिवहन से आने वाले धान की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पिछले एक नवंबर से 6 दिसम्बर तक प्रदेश के विभिन्न जिलों से एक लाख  51 हजार 809 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इस बार मार्कफेड द्वारा राज्य में अवैध परिवहन के जरिए अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले धान को रोकने के लिए राज्य के सीमावर्ती जिलों में चेकपोस्ट और कलेक्टर की अध्यक्षता में टॉस्कफोर्स भी बनाए गए हैं। इसके साथ ही मार्कफेड में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था की सतत् निगरानी की जा रही है।  मार्कफेड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक नवंबर से 6 दिसम्बर के अवधि में मण्डी अंिधनियम 1972 के तहत  सीमावर्ती विभिन्न जिलों से छत्तीसगढ़ राज्य में अवैध परिवहन के माध्यम से आने वाले धान पर कार्यवाही की जा रही है। इनमें सर्वाधिक महासमुंद जिले में 25,718 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इसी प्रकार धमतरी में 23,859 क्विंटल रायगढ़ जिले में 21,331 क्विंटल, राजनांदगांव 14,977 क्विंटल, बलरामपुर जिले में 9771 क्विंटल, बेमेतरा में 6490 क्विंटल, कवर्धा में 5734 क्विंटल, बालोद में 4595 क्विंटल, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 3770 क्विंटल, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 2868 क्विंटल, जशपुर जिले में 2771 क्विंटल, सूरजपुर जिले में 2650 क्विंटल, दुर्ग में 2350 क्विंटल, जांजगीर-चांपा में 2014 क्विंटल, बलौदाबाजार में 1855 क्विंटल, बीजापुर जिले में 1842 क्ंिवटल, रायपुर में 1679 क्विंटल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 1583 क्विंटल, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 1500 क्विंटल, बस्तर जिले में 1560 क्विंटल, मोहला-मानपुर-चौकी में 1402 क्विंटल, गरियाबंद में 1393 क्विंटल, कोरबा में 1346 क्विंटल, सरगुजा में 1282 क्विंटल, कोरिया में 1237 क्विंटल, सक्ती में 1201 क्विंटल, कोण्डागांव जिले में 1148 क्विंटल, बिलासपुर में 1060 क्विंटल, कांकेर जिले में 1012 क्ंिवटल, मुंगेली में 917 क्विंटल, दंतेवाड़ा में 445 क्विंटल, नारायणपुर में 323 क्विंटल, सुकमा में 216 क्विंटल धान जब्त किए गए हैं।  उल्लेखनीय है कि सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाए जाने और त्वरित अलर्ट-रिस्पॉन्स सिस्टम की बदौलत अन्य राज्यों से धान की अवैध आमद को रोकने में प्रभावी सफलता मिल रही है।शासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता और अवैध गतिविधि को हर स्तर पर जीरो टॉलरेंस के साथ रोका जाएगा।खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मार्कफेड द्वारा धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए एकीकृत कंट्रोल सेंटर के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। साथ ही अवैध परिवहन के माध्यम से राज्य में आने वाले धान को रोकने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सतत् निगरानी रखी जा रही है।

अब तक 22.25 लाख मीट्रिक टन धान की हो चुकी है खरीदी

4.39 लाख से अधिक किसानों ने बेचा धान इस वर्ष 27.30 लाख किसान पंजीकृत ‘टोकन तुंहर एप्प‘ से किसानों को मिल रही है सहुलियत किसानों को अब तक 8 लाख 97 हजार 779 टोकन जारी किए गए रायपुर राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सिलसिला तेजी के साथ जारी हैं। पिछले माह के 14 नवंबर से शुरू हुए धान खरीदी महाअभियान में पांच दिसम्बर को सवेरे 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार 22 लाख 39 हजार 433 लाख मीट्रिक टन से  अधिक की धान की खरीदी हो चुकी है। अब तक 4 लाख 39 हजार 511 पंजीकृत किसानों ने धान बेचा है। धान खरीदी के एवज में किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत भुगतान हेतु मार्कफेड द्वारा 5277 करोड़ रूपए जारी किए गए है। चालू खरीफ सीजन के लिए इस वर्ष 27 लाख 30 हजार 96 किसानों ने पंजीयन कराया है, जिसमें 31 लाख 51 हजार 771 हेक्टेयर रकबा शामिल है।  राज्य में सभी जिलों में धान खरीदी जारी है। धान खरीदी से अब तक  महासमुंद जिला सर्वाधिक 15 लाख 19 हजार 650 क्विंटल धान खरीदकर पहले पायदान पर है। वहीं गरियाबंद जिले 6 लाख 73 हजार 495 क्विंटल धान खरीदकार दूसरे नम्बर पर है। इसी तरह बिलासपुर जिले 6 लाख 73 हजार 65 क्विंटल धान खरीदकर तीसरे स्थान हासिल की है। हांलाकि कांकेर जिला 6 लाख 15 हजार 431 क्विंटल धान खरीदी कर चौथे पायदान पर बने हुए है। पांच लाख क्विंटल से अधिक धान खरीदी वाले जिले में धमतरी और मुंगेली जिले शामिल हैं, वहीं  चार लाख क्विंटल से अधिक खरीदी वाले जिले सूरजपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, बेमेंतरा, बालोद और कोण्डागांव शामिल हैं।  किसानों को अब तक 8 लाख 97 हजार 779 टोकन जारी किए गए हैं। वहीं आगामी दिवस 8 दिसम्बर को धान खरीदी के लिए किसानों को 50 हजार 234 टोकन जारी हुए हैं।  इस वर्ष शुरू किए गऐ टोकन तुहर एप्प ऑनलाईन व्यवस्था से किसानों को काफी सहुलियत मिल रही है। किसान समितियों द्वारा की जा रही सभी आवश्यक व्यवस्थाओं से संतुष्ट हैं। राज्य शासन गठित राज्य और जिला स्तरीय दलों द्वारा प्रदेश सहित राज्य के सीमावर्ती इलाकों में अवैध धान परिवहन, भंडारण तथा विक्रय पर कड़ी निगरानी की जा रही है।  गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार धान खरीदी के साथ-साथ किसानों को समर्थन मूल्य का भुगतान भी शुरू कर दिया गया है। राज्य के किसानों से क्रय किए गए धान के मूल्य भुगतान के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने मार्कफेड को 26,200 करोड़ रूपए की बैंक गांरटी पहले से दे रखी है। किसानों को धान बेचने में किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए सभी केन्द्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई है। धान खरीदी की व्यवस्था पर निगरानी के लिए सभी केन्द्रों में अधिकारी तैनात किए गए हैं। राज्य स्तर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और जिला स्तर के अधिकारी लगातार दौरा कर धान खरीदी एवं केन्द्रों की व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।  राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने पाए इसको लेकर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। बाहर से धान की आवक की रोकथाम के लिए चेकपोस्ट पर अधिकारी तैनात किए गए हैं। जगह-जगह मॉलवाहकों की औचक जांच भी की जा रही है।  किसानों का मानना है कि धान खरीदी के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई टोकन तुंहर एप्प की ऑनलाईन व्यवस्था से टोकन प्राप्त करने और धान बेचने में सहुलियत हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व और किसान हितैषी नीतियों के चलते किसानों को जहां उनकी मेहनत का वाजिम दाम मिला हैं, वहीं किसानों का सम्मान भी बढ़ा है। बता दें कि सरकार अपने घोषणा के अनुरूप प्रति एकड़ 21 क्विंटल समर्थन मूल्य एवं कृषि उन्नति योजना के तहत 31 सौ रूपए प्रति क्विंटल की भाव से धान खरीदी कर रही है।