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नक्सलवाद उन्मूलन में छत्तीसगढ़ ने रचा नया इतिहास: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजनांदगांव में आयोजित  प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष राज्य के इतिहास में निर्णायक मोड़ साबित हुए हैं।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा निर्धारित लक्ष्य—“31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन”—की दिशा में छत्तीसगढ़ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और यह अब अंतिम सांसें गिन रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में न्यूट्रलाइज हुए, जबकि 4,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी दी, जो नक्सलवाद के कमजोर पड़ने का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के पराक्रम से बस्तर में दशकों से जमी हिंसा के विरुद्ध निर्णायक बढ़त मिली है। उन्होंने राज्य सरकार की नई पुनर्वास नीति की भी विस्तृत जानकारी दी। इसके तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15,000 प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति, 3 वर्षों तक 10,000 रुपये मासिक वित्तीय सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार-संबंधी कार्यक्रम शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि "गोलीबारी की भाषा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ना" अब बस्तर में हकीकत बन रहा है। पंडुम कैफ़े जैसे नवाचार आज सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में तेजी से सुरक्षा कैंप खुलने और प्रशासन की पहुंच बढ़ने के साथ ही 400 से अधिक गाँव पुनः आबाद हो चुके हैं। नियद नेल्ला नार  योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएँ और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएँ पहुँच रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा—“जहाँ कभी गोलीबारी की आवाज आती थी, आज वहाँ स्कूल की घंटियाँ बज रही हैं। कई गाँवों में वर्षों बाद ध्वजारोहण हुआ, चुनाव में लोग निर्भीक होकर भाग ले रहे हैं और राशन-कार्ड से लेकर मोबाइल नेटवर्क तक की सुविधाएँ अब सुगमता से उपलब्ध हो रही हैं।” मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर को भविष्य के विकास का बड़ा केंद्र बताते हुए कहा कि कृषि, सिंचाई, वन-उत्पाद, पशुपालन और छोटे उद्योगों के लिए अभूतपूर्व संभावनाएँ बन रही हैं। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति (2024–30) में नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वनोपज आधारित वैल्यू एडिशन, प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्थायी आय से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से बस्तर अब वैश्विक नक्शे पर तेजी से पहचान बना रहा है। कुटुमसर गुफा, झरने, अबूझमाड़ के जंगल और जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर विश्व आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। होम-स्टे मॉडल तेजी से फल-फूल रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद उन्मूलन की यह ऐतिहासिक प्रगति राज्य के शहीद जवानों, सुरक्षा बलों के अथक परिश्रम और जनता के विश्वास की जीत है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री श्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप बस्तर नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास की मुख्यधारा में शामिल होगा।

सुदूर ग्राम कुर्रा के रतिराम को मिला सपनों का पक्का आशियाना

रायपुर किसी भी सरकारी योजना का वास्तविक महत्व तभी सिद्ध होता है, जब उसका लाभ जमीनी स्तर पर आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाए। ऐसी ही एक सशक्त योजना है प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन), जिसका प्रभाव रायगढ़ जिले में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। इस योजना के अंतर्गत लैलूंगा विकासखंड के सुदूर ग्राम कुर्रा के निवासी श्री रतिराम बिरहोर को उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना-पक्का और सुरक्षित आवास-साकार हुआ।  जीवन में स्थायित्व, आत्मविश्वास और सम्मान भी लेकर आया पीएम-जनमन वर्षों तक कच्चे मकान में रहकर बरसात, ठंड और जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे के बीच जीवन-यापन करने वाले रतिराम और उनका परिवार जब पीएम जनमन योजना के तहत स्वीकृत आवास में प्रवेश किया, तो वह क्षण उनके लिए अविस्मरणीय बन गया। आवास स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और निर्धारित समय में पूर्ण भी हुआ। नया पक्का घर न केवल उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि उनके जीवन में स्थायित्व, आत्मविश्वास और सम्मान भी लेकर आया है।  जनजातीय समूहों के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्त्वाकांक्षी मिशन रतिराम का कहना है कि पहले जिस घर में रहना मजबूरी था, वहीं अब पक्के मकान में रहना गर्व की अनुभूति देता है। उल्लेखनीय है कि पीएम-जनमन योजना, जिसकी शुरुआत भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में की गई, विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्त्वाकांक्षी मिशन है। इस अभियान का उद्देश्य आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, बिजली, आजीविका और संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। गौरतलब है कि पीएम जनमन योजना आज केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों के लिए न्याय, समानता और आत्मसम्मान का मजबूत आधार बन चुकी है। ग्राम कुर्रा के रतिराम की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब योजनाएं सही ढंग से लागू होती हैं, तो वे लोगों की तस्वीर ही नहीं, तकदीर भी बदल देती हैं।

रबी क्षेत्र विस्तार एवं दलहन-तिलहन उत्पादकता बढ़ाने कृषि विभाग करेगा जागरूकता शिविरों का आयोजन

रायपुर प्रधानमंत्री धन.धान्य कृषि योजना (PMDDKY) 2025.26 से शुरू की गई एक सरकारी पहल है, जिसका लक्ष्य कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों में किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है, जिसके लिए 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को समन्वित किया गया है।  इसमें सिंचाई, भंडारण, आसान ऋण तथा फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया हैए, ताकि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके और देश को दालों सहित विभिन्न फसलों में आत्मनिर्भर बनाने के मिशन का समर्थन किया जा सके। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत कृषकों को रबी फसल की आधुनिक तकनीक से अवगत कराने तथा मत्स्यपालन, पशुपालन सहित अन्य कृषि-संबद्ध व्यवसायों की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रत्येक समिति में विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।   किसानों आधुनिक खेती से जोडकर लाभान्वित करना है शिविरों में जशपुर जिले के ऐसे उत्कृष्ट एवं प्रगतिशील कृषकों को प्रशिक्षक के रूप में जोड़ा गया है, जो आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर खेती में अधिक उत्पादन एवं बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। ये प्रशिक्षक कृषक अपने अनुभव, कठिनाईयों तथा विभागीय योजनाओं से प्राप्त लाभों को अन्य कृषकों के साथ साझा करेंगे, जिससे अधिक से अधिक किसान आधुनिक खेती अपनाकर लाभान्वित हो सकें। साथ ही कृषि एवं संबद्ध विभाग के अधिकारी किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, अनुदान प्राप्ति की प्रक्रिया, तथा वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के मार्गदर्शन की जानकारी प्रदान करेंगे। इन शिविरों में कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक भी शामिल रहेंगे, जो आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार कर किसानों को उन्नत खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। दलहन-तिलहन उत्पादक कृषकों को समर्थन मूल्य पर उपज बेचने की सुविधा जशपुर जिले में कुल 09 आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों का पंजीयन किया गया है, जहाँ दलहन-तिलहन फसलें उगाने वाले कृषक अपनी उड़द, मूंग एवं मूंगफली को बाजार मूल्य कम होने की स्थिति में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विक्रय कर सकते हैं। कृषकों के हित में प्रशासन ने अपील की है कि वे एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन अवश्य कराएँ। पंजीयन कराने में किसी भी प्रकार की सहायता हेतु संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। किसान बढ़ा सकते हैं अपनी आय कृषक उत्पादक संगठन से जुड़कर  शिविर के दौरान जिले के जशपुर जिले के प्रत्येक विकासखंड के कृषक उत्पादक संगठन के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। जिन कृषकों ने अभी तक किसी कृषक उत्पादक संगठन की सदस्यता नहीं ली है, वे शिविर में उपस्थित प्रतिनिधियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सदस्यता हेतु आवेदन कर सकते हैं। कृषक उत्पादक संगठन से जुड़कर किसान न केवल आधुनिक कृषि तकनीक, समूह विपणन और सामूहिक क्रय-बिक्री का लाभ उठा सकते हैं, बल्कि अपनी आय दोगुनी करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकते हैं।

कोरिया : जवानों के त्याग और बलिदान से ही हम सुरक्षित हैं-कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी

कोरिया : जवानों के त्याग और बलिदान से ही हम सुरक्षित हैं-कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी सशस्त्र सेना झण्डा दिवस पर हुआ आत्मीय संवाद और सम्मान समारोह कोरिया सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के अवसर पर आज कलेक्ट्रेट सभागृह, बैकुण्ठपुर में सादगी और गरिमा से परिपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश की रक्षा में जुटे सैनिकों के अदम्य साहस व अनुकरणीय बलिदान को नमन किया गया। मुख्य अतिथि कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी ने कहा-हम सभी नागरिक आज सुरक्षित जीवन जी पा रहे हैं तो इसका श्रेय हमारे सेना और सुरक्षा बलों के जवानों को जाता है। उनका त्याग केवल उनका अपना नहीं, बल्कि पूरे परिवार का त्याग होता है। कड़ाके की ठंड हो, बारिश हो या भीषण गर्मी- हमारे जाँबाज़ सैनिक राष्ट्र की सेवा में हर पल तत्पर रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जवानों का समर्पण न केवल राष्ट्र की रक्षा करता है बल्कि नागरिकों के जीवन और भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। कार्यक्रम में लेफ्टिनेन्ट कर्नल जितेन्द्र कुमार देवांगन (से.नि.), जिला सैनिक कल्याण अधिकारी द्वारा कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी, अपर कलेक्टर श्री सुरेन्द्र प्रसाद वैद्य, डिप्टी कलेक्टर श्री डी.डी. मंडावी, अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण तथा क्षेत्र के प्रसिद्ध सैन्य-गाथा कवि श्री जी.पी. नेमा, सुबेदार सुनील कुमार सिंह, भूतपूर्व सैनिक और वीर नारियों का लेपल पिन लगाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। जिला सैनिक कल्याण कार्यालय द्वारा उपस्थित सभी अधिकारी-कर्मचारी, पूर्व सैनिकों, शहीद परिवारों की विधवाओं, सेवारत सैनिकों एवं उनके आश्रितों को ध्वज लगाकर सम्मानित किया गया। बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और भी अधिक अर्थपूर्ण बनाया। सभी अतिथियों ने सैनिकों के अद्वितीय साहस, अनुशासन और बलिदान को सलाम करते हुए उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

उत्तर बस्तर कांकेर : जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन 12 दिसम्बर से

उत्तर बस्तर कांकेर : जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन 12 दिसम्बर से उत्तर बस्तर कांकेर कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार जिले के आम ग्रामीणजनों की आवश्यकताओं, शिकायतों एवं समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन आगामी 12 दिसम्बर से 25 मार्च 2026 तक किया जाएगा। उक्त शिविरों में सभी जिला स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय एवं क्लस्टर स्तर के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने शिविरों के सुचारू रूप से आयोजन के लिए अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री स्टेला खलखो को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। प्राप्त जानकारी अनुसार कोयलीबेड़ा विकासखण्ड की ग्राम पंचायत चारगांव में 12 शुक्रवार दिसम्बर को शिविर लगाया जाएगा, जिसमें ग्राम पंचायत चारगांव, छोटेबोदेली, पोरोण्डी, सिकसोड़, सुलंगी, तुरसानी और बदरंगी के ग्रामीण शामिल होंगे। इसी प्रकार अंतागढ़ विकासखण्ड में शुक्रवार 19 दिसम्बर को हाईस्कूल प्रांगण भैंसगांव में ग्राम बैहासाल्हेभाट, फुलपाड़, कोलर, कोसरोण्डा, मंगतासाल्हेभाट, तालाबेड़ा, ताड़ोकी और बोंदानार तथा दुर्गूकोंदल विकासखण्ड में 26 दिसम्बर शुक्रवार को स्कूल ग्राउंड चेमल में चिहरो, गुलालबोड़ी, आमागढ़, हानपतरी, बोदेली, गुदूम, तुमड़ीसुर, भेजर, हिंगनपुरी और मेरेगांव ग्राम पंचायत के ग्रामीण शिविर में शामिल होंगे। इसके अलावा भानुप्रतापपुर विकासखण्ड में बुधवार 07 जनवरी को हायर सेकेण्डरी स्कूल कच्चे में ग्राम पंचायत साल्हे, भैंसाकन्हार, ईरागांव, टेढ़ईकोंदल, भैंसमुण्डी, चौगेल तथा मुल्ला, विकासखण्ड कोयलीबेड़ा में बुधवार 04 फरवरी को हाई स्कूल प्रांगण कौड़ोसाल्हेभाट में ग्राम पंचायत जिरामतराई, दड़वीसाल्हेभाट, उदनपुर, कामतेड़ा, कोयलीबेड़ा, केसेकोड़ी और कड़मे के ग्रामीण शामिल होंगे। इसी प्रकार 13 फरवरी शुक्रवार को दुर्गूकोंदल विकासखण्ड के स्कूल ग्राउण्ड मेड़ो में शिविर लगाया जाएगा, जिसमें ग्राम पंचायत चाहचाड़, हाहालद्दी, सिहारी, खुटगांव, दोड़दे, साधुमिचगांव, पड़गाल, भुसकी, पलाचूर, दुर्गूकांदल एवं भुरकागुदूम में, भानुप्रतापपुर विकासखण्ड में 18 फरवरी को शीतला मंदिर मैदान चिचगांव में ग्राम पंचायत भानबेड़ा, डोंगरकट्टा, बयानार, उंचपानी, कुल्हाड़कट्टा, रानवाही, मुंगवाल, बुदेली, दाबकट्टा, जलीनकसा, चिचगांव और रानीडोंगरी, 26 फरवरी को अंतागढ़ विकासखण्ड के माध्यमिक शाला खेल मैदान सरेवाही में ग्राम पंचायत भैंसासुर, टेमरूपानी, मण्डागांव, हिन्दुबिनापाल, कानागांव, बुलावण्ड, मासबरस, जेठेगांव, अमोड़़ी, कोदागांव तथा 13 मार्च को कांकेर विकासखण्ड के कलमुच्चे चौक में ग्राम पंचायत कलमुच्चे, पीढ़ापाल, मुरागांव, तुलतुली, मांदरी, कुरिष्टीकुर, कोकपुर, मालगांव,कोड़ेजुंगा और बारदेवरी के ग्रामीण शामिल होंगे। इसी तरह 18 मार्च 2026 को चारामा विकासखण्ड के पंडरीपानी हाईस्कूल मैदान में शिविर लगाया जाएगा, जिसमें ग्राम पंचायत हाराडुला, हल्बा, भिलाई, पंडरीपानी, भिरौद, करिहा, जेपरा, गितपहर, भानपुरी, रानीडोंगरी, कुर्रूभाट, टांहकापार, किलेपार, कोटेला एवं तुएगहन तथा 25 मार्च 2026 को नरहरपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत मुसुरपुट्टा मंगल भवन में ग्राम बासनवाही, साईंमुण्डा, मावलीपारा, मांडाभर्री, बांगाबारी, दुधावा, सारवण्डी, मालगांव, दलदली, घोटियावाही, देवडोंगर, शामतरा, धनोरा और भिरौद के ग्रामीण शामिल रहेंगे। उक्त शिविर में कलेक्टर ने अनुभाग स्तर, ब्लॉक स्तरीय एवं क्लस्टर स्तर के अधिकारी-कर्मचारी के अलावा सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर विभागीय योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को देने तथा यथासम्भव शिविर स्थल पर प्राप्त आवेदनों का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

कुनकुरी नगर को स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिया बड़ा तोहफ़ा

रायपुर, कई प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, योग केंद्र और वेलनेस हब खुद को नेचुरोपैथी  कहते हैं। जो प्राकृतिक चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान करता है और बापू भवन इसका ऐतिहासिक घर है, जिसे गांधीजी ने अपनाया था। खासकर छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का उद्देश्य प्राकृतिक उपचार, योग, आहार, मिट्टी स्नान और हर्बल दवाओं के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य प्रदान करना है।  जशपुर जिले के कुनकुरी नगर की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नेचुरोपैथी भवन निर्माण के लिए 2 करोड़ 62 लाख रुपए की मंजूरी प्रदान की है। निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। भवन तैयार हो जाने के बाद कुनकुरी नगरवासियों को प्राकृतिक चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधा अपने ही नगर में उपलब्ध होगी। यह भवन न सिर्फ लोगों को आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की ओर प्रोत्साहित करेगा, बल्कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उपचार के लिए बड़ी राहत भी देगा। अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर दराज जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नगरवासियों ने इस दूरदर्शी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सुविधा स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा और नई उम्मीद लेकर आएगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई ऊंचाई को छूता जशपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सौगातें मिल चुकी है। मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ा कदम उठाते हुए वित्त विभाग से 359 करोड़ की सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है । इसी प्रकार 220 विस्तर अस्पताल के लिए 32 करोड़ की मंजूरी, नर्सिंग महाविद्यालय भवन के 8 करोड़ की मंजूरी, फिजियोथेरेपी महाविद्यालय के 14 करोड़ की मंजूरी, कल्याण आश्रम अत्याधुनिक चिकित्सालय भवन के लिए 35 करोड़ की मंजूरी, ग़िनाबहर में मातृत्व शिशु चिकित्सालय भवन निर्माण के 8 करोड़ की मंजूरी सहित कई सौगातें दी गई है, जो जिले वासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वरदान साबित होंगी।

प्रशासनिक हलचल: छत्तीसगढ़ के 38 अफसरों का तबादला, आदेश जारी

रायपुर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्य सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के एक साथ अधिकारियों का एक साथ तबादला किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है। जारी आदेश में कुल 38 अधिकारियों का नाम शामिल है। यह आदेश छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) द्वारा जारी किया गया है और इसमें राज्य प्रशासनिक सेवा (State Administrative Service) एवं सचिवालय सेवा (Secretariat Service) के अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला किया गया है। छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 38 अधिकारियों का तबादला छत्तीसगढ़ शासन ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने आज, 08 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा एवं सचिवालय सेवा के 38 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से नवीन विभागों में पदस्थ किया है। प्रमुख अधिकारियों की नवीन पदस्थापनाएं तबादला सूची में शामिल कुछ महत्वपूर्ण अधिकारियों और उनके नए प्रभार निम्नलिखित हैं: राजीव अहिरे (संयुक्त सचिव) वर्तमान: आवास एवं पर्यावरण विभाग (अतिरिक्त प्रभार- योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग) नवीन: कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग सूर्यकिरण तिवारी (रा.प्र.से., उप सचिव) वर्तमान: कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (अतिरिक्त प्रभार- पशुधन विकास एवं मछली पालन विभाग) नवीन: पशुधन विकास एवं मछली पालन विभाग दुर्गेश कुमार वर्मा (रा.प्र.से., उप सचिव) वर्तमान: सामान्य प्रशासन विभाग (पूल) नवीन: योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग लवीना पाण्डेय (रा.प्र.से., उप सचिव) वर्तमान: आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक विकास विभाग (अति. प्रभार- चिकित्सा शिक्षा विभाग) नवीन: चिकित्सा शिक्षा विभाग कुसुम एक्का (उप सचिव) वर्तमान: योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग नवीन: गृह विभाग श्रीमती विजया खेस्स (उप सचिव) वर्तमान: विमानन विभाग नवीन: ग्रामोद्योग विभाग अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किए गए अधिकारी तबादला सूची में कई अधिकारियों को उनके मौजूदा अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है, जबकि उनका मूल प्रभार यथावत रहेगा- अरूण कुमार मरकाम (रा.प्र.से., उप सचिव) को ग्रामोद्योग विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। रामप्रसाद चौहान (रा.प्र.से., उप सचिव) को समाज कल्याण विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। श्रीकांत वर्मा (रा.प्र.से., उप सचिव) को गृह विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। अंकिता गर्ग (रा.प्र.से., उप सचिव) को श्रम विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। विभोर अग्रवाल (रा.प्र.से., उप सचिव) को उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। अन्वेष धृतलहरे (रा.प्र.से., उप सचिव) को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल नवीन पदस्थापना में कार्यभार ग्रहण करें और पालन प्रतिवेदन सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

कुनकुरी नगर को स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिया बड़ा तोहफ़ा

रायपुर कई प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, योग केंद्र और वेलनेस हब खुद को नेचुरोपैथी  कहते हैं। जो प्राकृतिक चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान करता है और बापू भवन इसका ऐतिहासिक घर है, जिसे गांधीजी ने अपनाया था। खासकर छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का उद्देश्य प्राकृतिक उपचार, योग, आहार, मिट्टी स्नान और हर्बल दवाओं के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य प्रदान करना है।  जशपुर जिले के कुनकुरी नगर की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नेचुरोपैथी भवन निर्माण के लिए 2 करोड़ 62 लाख रुपए की मंजूरी प्रदान की है। निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। भवन तैयार हो जाने के बाद कुनकुरी नगरवासियों को प्राकृतिक चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधा अपने ही नगर में उपलब्ध होगी। यह भवन न सिर्फ लोगों को आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की ओर प्रोत्साहित करेगा, बल्कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उपचार के लिए बड़ी राहत भी देगा। अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर दराज जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नगरवासियों ने इस दूरदर्शी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सुविधा स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा और नई उम्मीद लेकर आएगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई ऊंचाई को छूता जशपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सौगातें मिल चुकी है। मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ा कदम उठातेे हुए वित्त विभाग से 359 करोड़ की सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है । इसी प्रकार 220 विस्तर अस्पताल के लिए 32 करोड़ की मंजूरी, नर्सिंग महाविद्यालय भवन के 8 करोड़ की मंजूरी, फिजियोथेरेपी महाविद्यालय के 14 करोड़ की मंजूरी, कल्याण आश्रम अत्याधुनिक चिकित्सालय भवन के लिए 35 करोड़ की मंजूरी, ग़िनाबहर में मातृत्व शिशु चिकित्सालय भवन निर्माण के 8 करोड़ की मंजूरी सहित कई सौगातें दी गई है, जो जिले वासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वरदान साबित होंगी।

ग्राम में दहशत: हाथी ने 80 वर्षीय महिला को कुचला, बेटी भी घायल

कोरबा कोरबा के कटघोरा वनमंडल  के पसान क्षेत्र के गोलाबाहरा गांव में रविवार की देर शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई। आग ताप रहे मां बेटी पर हाथी ने हमला कर दिया। किसी तरह बेटी तो बच गई। लेकिन मां को हाथी ने कुचल कर मार डाला। इस घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते ग्रामीण को भीड़ एकत्रित हो गई और इसकी सूचना तत्काल वन विभाग और पुलिस को दी गई। बताया जा रहा है कि इंद्रकुंवर और बेटी अपने घर से लगभग 50 मीटर दूर पर खेत स्थित खनियार में धान साफ कर आग ताप रहे थे। इस दौरान अचानक हाथी ने हमला कर दिया जहा 80 वर्षीय वृद्धा इंद्रकुंवर की मौत हो गई। स्थानीय लोगों की माने तो हाथी को आते देख महिला घर की ओर भागने लगीं, लेकिन तभी हाथी ने उन्हें पीछे से आ घेरा और बुरी तरह कुचल दिया। घटना स्थल पर ही उनकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है। वन विभाग ने लोगों से जंगल या खेत की ओर अकेले न जाने और सतर्क रहने की अपील की है।

उत्तर बस्तर कांकेर : महापरीक्षा अभियान अंतर्गत कांकेर जिला में 9765 नवसाक्षरों ने दी परीक्षा

उत्तर बस्तर कांकेर : महापरीक्षा अभियान अंतर्गत कांकेर जिला में 9765 नवसाक्षरों ने दी परीक्षा उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में 90 प्रतिशत असाक्षर हुए शामिल उत्तर बस्तर कांकेर कलेक्टर एवं अध्यक्ष निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत रविवार 07 दिसंबर को महापरीक्षा अभियान जिला में आयोजित किया गया, जिसके लिए 426 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे जहां महिला नवसाक्षर 6216 और पुरुष नवसाक्षर 3549 कुल 9765 नवसाक्षर ने परीक्षा दी। इसके अंतर्गत 15 वर्ष से अधिक उम्र के असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए 2027 तक शत-प्रतिशत साक्षर किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जिले के सातों विकासखंडों की प्राथमिक शाला और माध्यमिक शाला को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। इस बर परीक्षा में अलग नजारा देखने को मिला जहां एक ही परिवार के कई सदस्यों ने एक साथ परीक्षा दी। उम्रदराज महिला एवं पुरुष शिक्षार्थियों ने भी साक्षर होने के लिए बढ़-चढ़कर परीक्षा दी। इसी क्रम में विधानसभा कांकेर के विधायक महोदय श्री आशाराम नेताम द्वारा अन्नपूर्णापारा के प्राथमिक शाला परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया गया। साथ ही प्राथमिक शाला बागोडार के परीक्षा केंद्र का जिला शिक्षा अधिकारी श्री रमेश निषाद ने भी परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया। बताया गया कि जिले के 4 विकासखंडों में क्रमशः परीक्षा केंद्र शासकीय माध्यमिक शाला बेवरती, माध्यमिक शाला पटौद, प्राथमिक शाला करप, प्राथमिक शाला सरईटोला, माध्यमिक शाला करप, माध्यमिक शाला सरंगपाल, माध्यमिक शाला माटवाड़ा मोदी, प्राथमिक शाला तेलगरा, प्राथमिक शाला हिंगनझर का निरीक्षण परीक्षा के दौरान विभाग के अधिकारियों के द्वारा किया गया। इसके अलावा विकासखंड भानुप्रतापपुर में नक्सली पुनर्वास केंद्र मुल्ला में भी विशेष तौर पर 34 असाक्षरों के द्वारा साक्षर बनने के लिए परीक्षा दी गई। निरीक्षण के दौरान सभी परीक्षा केन्द्रों में परीक्षार्थी परीक्षा दिलाते हुए पाए गए। इसी प्रकार जिले में लक्ष्य के अनुसार 9765 नवसाक्षरों ने परीक्षा में सम्मिलित हुए, जहां नवसाक्षरों की उपस्थिति 90 प्रतिशत रही।