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खाने को लेकर भिड़ंत, सिलेंडर से सिर कुचलकर कर दी साथी की हत्या

दुर्ग दुर्ग-भिलाई और आसपास के क्षेत्रों में आपराधिक वारदात लगातार बढ़ते जा रहे हैं। आए दिन हत्या और लूट जैसे मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे ही कोतवाली थाना दुर्ग क्षेत्र में एक और हत्या हो गई है।फास्ट फूड सेंटर में खाने को लेकर मामूली विवाद पर एक युवक ने अपने ही साथी के सिर पर सिलेंडर पटक कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। जानकारी के अनुसार घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के कचहरी वार्ड में शनिवार की रात लगभग 9:30 बजे की है। एक फास्ट फूड सेंटर में खाने को लेकर दो दोस्तों के बीच कहासूनी होने लगी। विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हत्या तक पहुंच गया। आरोपी भूपेंद्र ने युवक शंभू की हत्या कर दी। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।   जानकारी के मुताबिक जय हनुमान मुंबई वेज चाइनीज दुकान में भूपेंद्र सागर और शंभू सागर के बीच झगड़ा हुआ। विवाद बढ़ने पर आरोपी भूपेंद्र ने दुकान में रखे सिलेंडर से शंभू के सिर पर लगातार तीन बार हमला किया। इस वार से शंभू की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना के बाद आरोपी भूपेंद्र सागर मौके से फरार हो गया था। सूचना मिलने पर कोतवाली थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि मृतक और आरोपी दोनों ही नशे के आदी थे। किस बात को लेकर दोनों में इतना विवाद हुआ इसको लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। गौरतलब है कि शिक्षाधानी में युवक तेजी से नशे के आदी होते जा रहे हैं। कुछ समय पहले धमतरी में हुए हत्याकांड, जिसमें रायपुर के तीन युवकों को जान से मार दिया गया था। उस वारदात में भी सभी आरोपी नशे की हालत में थे और उसी कारण मामूली विवाद को लेकर उन्होंने 3 बेगुनाह युवकों की हत्या कर दी थी। पुलिस प्रशासन को क्षेत्र में बढ़ रही नशे की लत को रोकने की जरूरत है।

बच्चों की सेहत के साथ खतरा! स्कूल के खाने में कीड़े मिलने पर कार्रवाई

रायगढ़ सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक व स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। ताजा मामला घरघोड़ा विकासखंड के संकुल केंद्र टेरम स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है। यहां आकस्मिक निरीक्षण पर पहुंचे अधिकारी को मध्याह्न भोजन में कीड़े मिले हैं। मामले में बीईओ ने प्राचार्य को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।   प्रिंसिपल को मिला नोटिस टेरम स्कूल के प्राचार्य किशोर देवांगन पर यह आरोप है कि उनकी सीधी निगरानी में बच्चों को गंदा भोजन परोसा जा रहा था। यह आचरण न सिर्फ घोर लापरवाही है बल्कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का भी खुला उल्लंघन है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने इस गंभीर लापरवाही पर प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शासन द्वारा समय-समय में जारी साफ-सफाई, सावधानी एवं सतर्कता बरतने संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देशों को रसोईयों एवं स्व सहायता समूहों को आपके द्वारा निर्देशित नहीं किया गया। इससे प्रतीत होता है कि बच्चों के सेहत का कोई ख्याल नहीं रखते हुए बिना साफ-सफाई कर भोजन तैयार किया जा रहा है तथा अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही व अनुशासनहीनता बरती जा रही है जो कि छ०ग० सिविल सेवा आचरण अधिनियम-1965 के नियम-3 के विपरीत है। इस कृत्य के लिए क्यों न वरिष्ठ कार्यालय को आपके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु प्रस्तावित किया जाए। बहरहाल तीन दिवस के भीतर शालेय कार्यावधि के पश्चात अधोहस्ताक्षरकर्ता के समक्ष स्वतः उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण अनिवार्यतः प्रस्तुत करना सुनिश्चित करने का निर्देश दिए है। वहीं, स्पष्टीकरण संतोषजनक स्थिति नहीं पाये जाने पर आगामी माह का वेतन लंबित रखते हुए खिलाफ एकपक्षीय कार्यवाही की चेतावनी दी गई है। सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं के निर्देश से मचा हड़कंप स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी नोटिस में कई तथ्यों का उल्लेख किया गया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि बच्चों की जान से खिलवाड़ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों की इस सख्त चेतावनी और निर्देश से अन्य स्कूलों के प्रचार्य एवं प्रधान पाठकों में हड़कंप मच गया है। वही देखना यह भी होगा कि इस निर्देश और सख्ती बातों का कितना असर पड़ता है। क्या कहते हैं विकासखंड शिक्षा अधिकारी इस विषय मे जानकारी लेने जब हमने विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी संतोष सिंह से बच्चों के खाने में कीड़े निकलने पर उनके द्वारा जारी नोटिस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा मेरे ध्यान में नही है,अभी थोड़ा व्यस्त हूं। 

संविदा पदों की भर्ती में जारी हुई सूची, मिशन वात्सल्य में 10 सितंबर तक करें दावा-आपत्ति

 बालोद जिले में मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन और किशोर न्याय बोर्ड के संचालन के लिए संविदा पदों को लेकर प्रक्रिया एक बार फिर सुर्खियों में है। कुल 16 पदों (जिला बाल संरक्षण इकाई 8 और चाइल्ड हेल्पलाइन 8) पर की जा रही भर्ती में पात्र-अपात्र सूची जारी कर दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि आवेदन पत्रों का पुनः परीक्षण कर सूची प्रकाशित की गई है, जिसे विभागीय कार्यालय के सूचना पटल के साथ-साथ जिला बालोद की आधिकारिक वेबसाइट balod.gov.in पर देखा जा सकता है। अब विभाग ने अभ्यर्थियों को अपनी पात्रता साबित करने का पुनः अवसर दिया है। यदि किसी आवेदक को जारी सूची पर आपत्ति है, तो वह प्रमाण और साक्ष्य संलग्न करते हुए 10 सितंबर 2025 को शाम 5 बजे तक अपनी आपत्ति भेज सकता है। आपत्ति केवल स्पीड पोस्ट, कुरियर या रजिस्टर्ड डाक से ही स्वीकार की जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने साफ कहा है कि कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से आवेदन स्वीकार नहीं होंगे और न ही अंतिम तिथि के बाद मिले अभ्यावेदन पर विचार किया जाएगा। इस घोषणा के बाद संविदा पदों के दावेदारों में फिर से हलचल मच गई है। कई अभ्यर्थी दस्तावेज जुटाने में लगे हैं, तो वहीं सूची में नाम न आने से असंतुष्ट उम्मीदवार आपत्ति की तैयारी कर रहे हैं। अब देखना होगा कि 10 सितंबर के बाद पात्र उम्मीदवारों की अंतिम सूची में किसका नाम शामिल होता है।

एम्स रायपुर में ‘देव हस्त’ रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का मुख्यमंत्री साय ने किया शुभारंभ

रायपुर, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित टाटीबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मध्य भारत के शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों के प्रथम रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम ‘देव हस्त’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “रोबोटिक सर्जरी छत्तीसगढ़ में चिकित्सा सुविधाओं के विकास में एक नया आयाम है। यह ऐतिहासिक क्षण प्रदेश की जनता को अत्याधुनिक और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।” मुख्यमंत्री  साय ने स्वयं ‘देव हस्त’ पर पहला ड्राई लैब डिसेक्शन कर इस अत्याधुनिक तकनीक की औपचारिक शुरुआत की। यह सिस्टम मध्य भारत के किसी शासकीय स्वास्थ्य संस्थान में स्थापित होने वाला पहला रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम है। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर एम्स रायपुर में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भर्ती होने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने की सुविधा हेतु एम्स रायपुर में सर्व-सुविधायुक्त परिजन निवास निर्माण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि “डॉक्टरों को धरती पर भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि वे हमें जीवन प्रदान करते हैं। आज जिस रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का शुभारंभ हो रहा है, उसे ‘देव हस्त’ नाम दिया गया है। इसका लाभ न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि एम्स रायपुर में भर्ती होने वाले अन्य राज्यों के मरीजों को भी मिलेगा। एम्स रायपुर उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगातार मील का पत्थर साबित हो रहा है।” मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एम्स रायपुर से मुझे विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि “जब रायपुर एम्स के निर्माण को स्वीकृति मिली, उस समय मैं सांसद था और प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी से छत्तीसगढ़ में एम्स की शाखा स्थापित करने का आग्रह किया था। यह आवश्यक था ताकि दिल्ली स्थित एकमात्र एम्स पर मरीजों का दबाव कम हो और अन्य राज्यों के लोगों को भी उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उनके राज्य में ही उपलब्ध हो। हमारा सौभाग्य है कि जिन छह राज्यों में एम्स स्थापित करने की स्वीकृति मिली, उनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल था।” मुख्यमंत्री  साय ने परिजन निवास की घोषणा करते हुए कहा कि “दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने की सुविधा कितनी आवश्यक है, यह मैं भली-भांति समझता हूं। सांसद रहते हुए दिल्ली स्थित मेरे आवास को लोग ‘मिनी एम्स’ कहते थे क्योंकि वहां मैं मरीजों के परिजनों की रुकने की व्यवस्था करता था। जनसेवा का यह कार्य मेरे दिल के बेहद करीब है। 2014 से 2019 के संसदीय कार्यकाल में मैंने लगभग 12 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष से मरीजों को दिलवाए थे। रायपुर में भी कुनकुरी सदन में मरीजों के परिजनों की व्यवस्था की गई है, जिसका लाभ पूरे प्रदेश के लोग उठाते हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 20 महीनों में सरकार बनने के बाद राज्य में पाँच नए मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति मिली है और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में 5,000 बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय मात्र एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। उन्होंने कहा कि जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में वृद्धि हुई है और इनका इलाज भी महंगा होता है। इसी वजह से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना प्रारंभ की, जिसके अंतर्गत गरीब वर्ग के लोगों को पाँच लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध है। अब वय वंदन योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वर्गों के मरीजों को भी यह सुविधा प्रदान की जा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि समय के साथ जहाँ चिकित्सा सुविधाएँ बढ़ रही हैं, वहीं बीमारियों का दायरा भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रोबोटिक सर्जरी का विशेष महत्व है। इसके माध्यम से चिकित्सकीय क्षमता और गुणवत्ता में कई गुना वृद्धि की जा सकती है। छत्तीसगढ़ को ‘देव हस्त’ रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का अत्यधिक लाभ मिलेगा और शीघ्र ही राजधानी रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।” इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने ‘देव हस्त’ के नामकरण हेतु आयोजित प्रतियोगिता की विजेता सुश्री ज्योत्स्ना किराडू को पाँच हजार रुपये की पुरस्कार राशि भेंट की। कार्यक्रम में एम्स रायपुर के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) डॉ. अशोक जिंदल, विभागाध्यक्ष डॉ. देवज्योति मोहंती, बड़ी संख्या में चिकित्सा छात्र और गणमान्यजन उपस्थित थे।  

छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेज रायपुर में 65 करोड़ की लागत से बनेगा छात्रावास : मुख्यमंत्री साय

बस्तर–सरगुजा सहित दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का फोकस कैंसर के शोध, रोकथाम और इलाज में उपयोगी साबित होगी एरोकॉन 2025 संगोष्ठी रायपुर, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रदेशवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में वित्तीय संसाधन कभी बाधा नहीं बनेंगे। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सभागार में ‘एरोकॉन 2025’ छत्तीसगढ़–मध्यप्रदेश चैप्टर के दो दिवसीय आयोजन का शुभारंभ कर विशेषज्ञों और उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज रायपुर के छात्रों के लिए 65 करोड़ रुपये की लागत से नए छात्रावास निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हजारों मरीज आज विशेषज्ञ चिकित्सकों के परिश्रम और नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों के कारण संजीवनी प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीते दो दशकों में कैंसर की प्रारंभिक पहचान और उपचार के क्षेत्र में हुए शोध से भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रत्येक जिले में कैंसर डे-केयर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं और छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत प्रदेश में अनेक मरीजों का इलाज संभव हुआ है। जीएसटी में कैंसर की दवाइयों और उपकरणों को सस्ता किए जाने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है।  साय ने बताया कि राज्य के अस्पतालों में कैंसर उपचार के लिए अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं और आज ही एम्स रायपुर में रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का शुभारंभ किया जा रहा है, जो यह प्रमाणित करता है कि सरकारी अस्पताल नवीनतम तकनीक अपनाने में अग्रणी हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कैंसर की पहचान में बेहद उपयोगी सिद्ध हो रही है और राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में इसे तेजी से शामिल कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार लगातार स्वास्थ्य बजट में वृद्धि कर रही है और नये मेडिकल कॉलेज खोल रही है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में 5,000 बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार हर विकल्प पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरगुजा, धरमजयगढ़ और बस्तर में नये अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एरोकॉन 2025 संगोष्ठी कैंसर की रोकथाम और उपचार की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एरोकॉन 2025 के सातवें आयोजन में कैंसर उपचार से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक मंच पर आए हैं। इससे इस बीमारी के इलाज में नये आयाम खुलेंगे। उन्होंने कहा कि रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि मध्यभारत के अन्य राज्यों के मरीजों के लिए भी प्रमुख उपचार केंद्र है। भविष्य में अत्याधुनिक तकनीकों और मशीनों के माध्यम से यहां चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मेडिकल कॉलेज रायपुर राज्य का सबसे बड़ा कैंसर सेंटर है, जहाँ आधुनिकतम सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि आने वाले समय में प्रदेश में छह फिजियोथेरेपी कॉलेज स्थापित होंगे, बस्तर और सरगुजा में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रारंभ होंगे, मानसिक रोगियों के लिए पृथक चिकित्सालय और नेचुरोपैथी कॉलेज खोले जाएंगे। मेकाहारा में 232 करोड़ रुपये की लागत से 700 बिस्तरों की वृद्धि की जाएगी तथा रोबोटिक सर्जरी और आईवीएफ सेंटर जैसी नवीनतम सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, मेडिकल कॉलेज रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. विवेक चौधरी, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. पात्रा, विशेषज्ञ चिकित्सकगण, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

चिरमिरी-नागपुर रेल परियोजना: छह ग्रामों में भूमि अधिग्रहण सर्वेक्षण 8 सितम्बर से शुरू

एमसीबी कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (रा०) मनेंद्रगढ़ द्वारा सर्वसाधारण आमजनता, ग्रामीणजन और कृषकजनों को सूचित किया गया है कि चिरमिरी-नागपुर रोड हाल्ट रेल परियोजना (17 किलोमीटर) हेतु प्रस्तावित ग्राम बंजी, चिरईपानी, चित्ताझोर (तहसील चिरमिरी), खैरबना, सरोला और सरभोका में भूमि अधिग्रहण के संबंध में धारा 20E का प्रकाशन किया जा चुका है। अधिसूचना के उपरांत रेल अधिनियम 1989 की धारा 20(च) अंतर्गत मुआवजा निर्धारण हेतु आवश्यक सर्वेक्षण कार्य संपन्न किया जाएगा। इस सर्वेक्षण में प्रस्तावित भूमि पर स्थित संरचनाओं, भूमि उपयोग प्रवर्ग, पेड़, कुआं, नलकूप आदि का पंचनामा, फोटोग्राफ और अक्षांश-देशांतर सहित प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। संयुक्त सर्वे टीम द्वारा यह सर्वेक्षण 08 सितम्बर 2025, सोमवार को प्रातः 11 बजे ग्राम बंजी से प्रारंभ किया जाएगा। सर्वेक्षण में लगने वाला समय प्रत्येक ग्राम में प्रभावित खसरों और उनमें निर्मित संरचनाओं की संख्या पर निर्भर करेगा। ग्राम बंजी की 56 प्रभावित खसरा और सरोला की 11 प्रभावित खसरा का सर्वेक्षण 08 से 12 सितम्बर 2025 तक होगा। इसके साथ ग्राम चिरई पानी की 45 प्रभावित खसरा एवं सरभोका की 14 प्रभावित खसरा का सर्वेक्षण 15 से 20 सितम्बर 2025 तक होगा। वहीं ग्राम खैरबना की 57 प्रभावित खसरा एवं चित्ताझोर की 23 प्रभावित खसरा का सर्वेक्षण 22 से 26 सितम्बर 2025 तक किया जाएगा। कुल मिलाकर इन छह ग्रामों में 206 खसरे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में प्रभावित होंगे। इस संबंध में सभी भूमि स्वामी, सह-स्वामी और कृषकगण को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने भूमि संबंधी दस्तावेज जैसे खसरा, बी-1, ऋण पुस्तिका, विक्रय पत्र, नामांतरण, डायवर्जन, न्यायालयीन प्रकरणों से संबंधित जानकारी एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों सहित स्थल पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर सहयोग प्रदान करें। यदि कोई भूमिस्वामी सर्वेक्षण के समय अनुपस्थित रहता है और आवश्यक तथ्य प्रस्तुत नहीं करता तो भविष्य में वादबहुल्यता की स्थिति में उसकी स्वयं की जिम्मेदारी होगी। ऐसे मामलों में आगे की कार्यवाही स्थल जांच और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर ही की जाएगी।

प्रभावित राज्यों की पुलिस ने मंथन किया, नक्सलवाद खत्म करने के लिए बनाई March 26 की योजना

जगदलपुर  नक्सलवाद के खात्मे के लिए बस्तर में पुलिस और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों की आज बड़ी बैठक हुई. बैठक में नक्सल प्रभावित तमाम राज्यों के अधिकारी शामिल हुए. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश-प्रदेश से मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की समय सीमा तय किए हुए हैं. इस कड़ी में छत्तीसगढ़ सहित अन्य नक्सलवाद से प्रभावित राज्यों में सुरक्षाबल स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई को अंजाम दे रही है. इस कड़ी में जगदलपुर में हुई बैठक में एंटी नक्सल ऑपरेशन के लिए अलग-अलग राज्यों की फोर्स के बीच समन्वय को लेकर छत्तीसगढ़ के साथ महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा के पुलिस अधिकारियों के साथ सीआईएसएफ के उच्च अधिकारियों ने चर्चा की.

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से मनेंद्रगढ़ के लोगों की बड़ी मांग पूरी होने की कगार पर

चिरमिरी नागपुर रोड हॉल्ट परियोजना के लिए रेल मंत्रालय ने दावा आपत्ति के बाद 198 भूखंडों के अधिग्रहण के लिए जारी किया अधिसूचना अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण,  जल्द ही शुरू होगा मुआवजा वितरण का कार्य रायपुर,  स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल का प्रयास जिले में यात्री सुविधाओं और रेल परियोजनाओं के विस्तार के लिए  रंग ला रहा है। उनकी कोशिशों से रेल मंत्रालय ने चिरमिरी नागपुर हॉल्ट रेल परियोजना के लिए दावा आपत्ति के बाद भू अर्जन की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। रेल मंत्रालय ने इसके लिए एक अधिसूचना जारी की है।  केंद्रीय सरकार ने रेल अधिनियम 1989 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में चिरमिरी नागपुर रोड हाल्ट रेल परियोजना (17 किलोमीटर) के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के अंतर्गत 36.392 हेक्टेयर रकबे की कुल 198 भूमि खंडों को परियोजना के लिए अधिग्रहित करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही अब शीघ्र ही प्रभावितों को मुआवजा वितरण का कार्य शुरू किया जाएगा। केंद्र सरकार ने सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट पर सहमति प्रदान करते हुए अंतिम रूप से भूमि अधिग्रहण की घोषणा की है। अधिसूचना के अनुसार, यह भूमि अब भारत सरकार (रेल मंत्रालय) के नाम दर्ज होगी और परियोजना कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी। रेल मंत्रालय (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस परियोजना को वर्ष 2018-19 में मंजूरी दी गई थी। भूमि अर्जन की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित समयावधि में कुल 32 आपत्तियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 5 आपत्तियां सही पाई गईं। सक्षम प्राधिकारी द्वारा शेष आपत्तियों का निराकरण कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी गई।

महिला आरक्षक दुष्कर्म मामला: अनिला भेड़िया ने पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप, डीजी और आईजी से करेंगे शिकायत

बालोद बीजापुर डिप्टी कलेक्टर पर महिला आरक्षक ने गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में एफआईआर के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने, FIR के 22 दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने और मुख्य सचिव सहित बीजापुर कलेक्टर को पीड़िता द्वारा निलंबन कार्रवाई के लिए लिखे गए पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक अनिला भेड़िया ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोपी डिप्टी कलेक्टर को बचाने के उद्देश्य से बालोद पुलिस पर भाजपा सरकार के दबाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। बता दें कि पीड़िता ने बीजापुर में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके के खिलाफ शादी का झांसा देकर लगातार आठ वर्षों से शारीरिक शोषण करने, तीन बार जबरदस्ती गर्भपात कराने और लाखों रुपए लेने का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर डौंडी थाने में लिखित शिकायत भी की है। बीएनएस की धारा 69 के तहत अपराध पंजीबद्ध होने के 22 दिन गुजर जाने के बाद भी आरोपी डिप्टी कलेक्टर फरार है। वहीं पीड़िता द्वारा बैंक स्टेटमेंट जमा करने के बाद भी आज पर्यंत तक आर्थिक शोषण किए जाने की धारा भी नहीं जोड़ी गई है। इस मामले को लेकर पूर्व महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री अनिला ने उक्त पीड़िता समेत पूरे प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय और अनाचार के दोषियों को संरक्षण देने का आरोप भाजपा सरकार पर लगाया है। अनिला भेड़िया ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वाली भाजपा सरकार महिलाओं के साथ अनाचार करने वालों को बचाने के लिए अपराधियों के साथ खड़े होकर ऐसे ही सम्मान करती है। अभी तक इतने दिन बीत जाने के बाद भी डिप्टी कलेक्टर को जमानत का लाभ दिलाने जानबूझकर गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। पुलिस भाजपा सरकार के दबाव में काम कर रही है इसीलिए पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था चरमरा गई है। पीड़िता से मिलेगी पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने कहा कि वो पीड़िता से मिलेगी। पीड़िता को न्याय दिलाने और बालोद जिले की लचर पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर डीजी और आईजी से भी बात की जाएगी। उन्होंने कहा, डिप्टी कलेक्टर के शोषण की शिकार युवती सहित प्रदेश की हर महिला के साथ वे खड़ी हैं।

गेरसा बांध टूटने से किसानों की चिंता बढ़ी, 30 एकड़ में फैली फसलें खतरे में

सरगुजा छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश के बाद नदियों नालों का जलस्तर बढ़ गया है. सरगुजा के लुंड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत गेरसा में आज सुबह अचानक तेज बहाव के और अधिक जलस्तर के चलते गेरसा बांध टूट गया है, जिससे क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल है. बांध के टूटने से नीचे की ओर लगभग 30 एकड़ फसल पानी में डूबकर खराब होने की आशंका जताई जा रही है. सूचना मिलते ही कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 9 बजे जब चरवाहे अपने मवेशी चराने जंगल की ओर जा रहे थे, तभी उन्हें पानी की तेज आवाज सुनाई दी. मौके पर पहुंचने पर पता चला कि बांध के एक साइड गेट के पास सुराख बन गया था, जो धीरे-धीरे बढ़ते-बढ़ते लगभग 3 मीटर चौड़ा हो गया और बांध का हिस्सा टूट गया. अचानक पानी फैल जाने से किसान और ग्रामीण परेशान हैं. मौके पर पहुंची प्रशासन और एरिगेशन विभाग की टीम घटना की जानकारी मिलते ही एरिगेशन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन पानी की अधिकता के चलते कोई ठोस बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिट्टी का कटाव जारी रहा तो पूरा बांध क्षतिग्रस्त हो सकता है. अधिकारियों ने बताया कि पानी का स्तर कम होने के बाद ही बांध को दोबारा बांधने या मरम्मत का कार्य किया जा सकेगा. कब बना था गेरसा बांध? गेरसा जलाशय बांध का निर्माण 1991-92 में किया गया था. तीन दशक पुराने इस बांध की मजबूती पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब टूटने से बड़ी समस्या सामने आ गई है. बांध के टूटने से ग्रामीणों की फसलों पर भी खतरा मंडरा रहा है.