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एमसीबी: ग्राम पंचायत मेरो की उचित मूल्य दुकान के लिए आवेदन आमंत्रित, अंतिम तिथि 11 सितंबर

एमसीबी कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चिरमिरी, जिला एमसीबी ब्लाक खड़गवां के आदेशानुसार ग्राम पंचायत मेरो स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान (आईडी क्रमांक 532004001) के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत मेरो के सरपंच एवं सचिव द्वारा निभाए जाने में असमर्थता व्यक्त की गई है। इस परिस्थिति को देखते हुए उक्त दुकान का संचालन किसी सक्षम समिति को सौंपे जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, ताकि क्षेत्र की जनता को खाद्यान्न वितरण की सुविधा सुचारु रूप से मिलती रहे। इस उद्देश्य से आदिम जाति सहकारी समिति, बहुउद्देशीय सहकारी समिति, महिला स्वंय सहायता समूह, वन सुरक्षा समिति एवं अन्य पात्र समितियों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक समितियां 19 अगस्त 2025 से 11 सितम्बर 2025 तक कार्यालयीन समय में आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं। आवेदन के साथ पंजीयन प्रमाण पत्र, पासबुक की छायाप्रति एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा। अंतिम तिथि के पश्चात प्राप्त होने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। अनुविभागीय अधिकारी (रा.) चिरमिरी ने स्पष्ट किया है कि उचित मूल्य दुकान का आबंटन नियमानुसार एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अंचल के पात्र हितग्राहियों को राशन वितरण में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

महासमुंद: बसना-पिथौरा उर्वरक दुकानों का औचक निरीक्षण

महासमुंद: बसना-पिथौरा उर्वरक दुकानों का औचक निरीक्षण बसना-पिथौरा में उर्वरक दुकानों पर अचानक जांच, महासमुंद अपडेट अनियमितता पाए जाने पर पांच उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी महासमुंद  कलेक्टर विनय लंगेह के मार्गदर्शन में प्रभारी उप संचालक कृषि भीमराव घोडेसवार एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ब्रजेश तुरकाने पिथौरा, श्रीमती उषा कांती खेश वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी बसना द्वारा विकासखंड बसना एवं पिथौरा के उर्वरक दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान संबंधित फर्म राजा बीज भंडार सांकरा, खत्री बीज भंडार  सांकरा, सिन्हा कृषि केन्द्र पिथौरा, नायक कृषि केन्द्र सागरपाली, किसान कृषि केन्द्र भूकेल का निरीक्षण किया गया। इस दौरान संबंधित फर्म में पी.ओ.एस. स्टाक एवं भौतिक स्टॉक में अंतर पाया गया। इसके अलावा संबंधित फर्म द्वारा मासिक प्रगति प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने के कारण संबंधित फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 03 दिवस के भीतर जवाब मांगा गया है। जवाब प्राप्त होने के पश्चात् आगे की कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले में इस प्रकार की कार्यवाही लगातार जारी रहेगी। उन्होंने कृषकों से अपील की है कि कृषक बिल लेकर ही उर्वरक का विक्रय करें एवं कालाबाजारी की शिकायत पाए जाने पर संबंधित विकासखण्डों के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से संपर्क करें।

रायपुर: प्रदेश में अब तक औसत 891.7 मि.मी. वर्षा दर्ज

रायपुर छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 891.7 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बस्तर जिले में सर्वाधिक 1292.9 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 432.1 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है।    रायपुर संभाग में रायपुर जिले में 756.4 मि.मी., बलौदाबाजार में 618.9 मि.मी., गरियाबंद में 747.1 मि.मी., महासमुंद में 651.2 मि.मी. और धमतरी में 797.6 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 843.2 मि.मी., मुंगेली में 829.7 मि.मी., रायगढ़ में 1055.4 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 721.2 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 1038.6 मि.मी., सक्ती में 920.4 मि.मी., कोरबा में 851.3 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 851.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 713.5 मि.मी., कबीरधाम में 627.5 मि.मी., राजनांदगांव में 798.3 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1143.2 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 666.9 मि.मी. और बालोद में 977.9 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 633.1 मि.मी., सूरजपुर में 965.0 मि.मी., बलरामपुर जिले में 1277.8 मि.मी., जशपुर में 871.3 मि.मी., कोरिया में 984.4 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 894.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में कोंडागांव जिले में 837.9 मि.मी., कांकेर में 1047.0 मि.मी., नारायणपुर में 1135.1 मि.मी., दंतेवाड़ा में 1243.6 मि.मी., सुकमा में 988.8 मि.मी. और बीजापुर में 1211.9 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

सभी प्रमुख मार्ग आपस में जुड़ जाएंगे और शहर के यातायात तंत्र में बड़ा बदलाव दिखाई देगाः कलेक्टर अबिनाश मिश्रा

धमतरी शहरवासियों को शीघ्र ही आवागमन की और अधिक सुगम सुविधाएँ  सभी प्रमुख मार्ग आपस में जुड़ जाएंगे और शहर के यातायात तंत्र में बड़ा बदलाव दिखाई देगाः कलेक्टर अबिनाश मिश्रा धमतरी धमतरी शहरवासियों को शीघ्र ही आवागमन की और अधिक सुगम सुविधाएँ मिलने जा रही हैं। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने लोक निर्माण विभाग को शहर के लिए नवीन सड़क निर्माण का नक्शा और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में विभाग द्वारा 12 विभिन्न मार्गों के सुदृढ़ीकरण एवं नवनिर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। जिनकी कुल लंबाई 23 किलोमीटर होगी ।   इस स्वीकृति के तहत शहर के मुख्य मार्गों से लेकर मोहल्लों और बस्तियों को जोड़ने वाले आंतरिक मार्गों तक सड़क निर्माण का कार्य होगा। प्रस्तावित परियोजनाओं में अमलतास कॉलोनी से पॉलीटेक्निक कॉलेज कलेक्टोरेट मार्ग, श्यामतराई से भटगांव मार्ग, रूद्रेश्वर मंदिर से नहर किनारे के मार्ग, रूद्री बैराज से राज्य मार्ग तक तथा रूद्रेश्वर मंदिर से करैथा गाँव होते हुए राज्य मार्ग तक बी.टी. सड़क का निर्माण शामिल है।   प्रस्ताव में सी.सी. सड़क निर्माण कार्यों में भी शहर को बड़ी सौगात मिली है। इसके अंतर्गत बेंद्रानवागांव चौक से नहर तक पुलिस ग्राउंड मार्ग, डाक बंगला मुक्तिधाम से पंचवटी कॉलोनी मार्ग, दानीटोला स्कूल चौक से कन्या महाविद्यालय होते हुए शीतकुंड मार्ग, कन्या महाविद्यालय से दुलारी नागरा स्ट्रीट, जलविहार कॉलोनी की विभिन्न गलियों तथा जोधपुर गौठान से पंचवटी कॉलेज मार्ग को शामिल किया गया है।   कलेक्टर मिश्रा ने प्रस्तावित नक्शे का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही जल्द शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन सड़कों के निर्माण से शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को सुगम व सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।   उन्होंने यह भी कहा कि धमतरी शहर तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार नागरिकों को आधुनिक शहरी सुविधाएँ उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त करेगा। शहर की आंतरिक गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक निर्माण कार्य होने से व्यापार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच आसान होगी।   ’कलेक्टर  मिश्रा ने नागरिकों से पहले से ही अपील की कि निर्माण कार्य के दौरान असुविधा होने पर सहयोग दें ताकि कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण हो सके। शासन और प्रशासन की प्राथमिकता है कि सड़कें टिकाऊ, मजबूत और दीर्घकालिक हों, जिससे आने वाले वर्षों तक शहरवासी लाभान्वित हो सकें।   प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने पर लगभग सभी प्रमुख मार्ग आपस में जुड़ जाएंगे और शहर के यातायात तंत्र में बड़ा बदलाव दिखाई देगा। यह कदम न केवल शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर की ओर भी अग्रसर करेगा।

रायुपर : कुसमी नहर विस्तार कार्य हेतु करीब 76 लाख रुपये स्वीकृत

रायुपर छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा रायपुर जिले की महानदी परियोजना के अतंर्गत शाखा नहर के गोड़ा से कुसमी (आर.सी.सी ट्रफ) नहर के विस्तार कार्य के लिए 75 लाख 98 हजार रुपये स्वीकृत किये है। योजना के कार्य पूर्ण होने पर क्षेत्रीय किसानों को 80 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से योजना के कार्य पूर्ण कराने के लिए मुख्य अभियंता महानदी परियोजना जल संसाधन विभाग रायपुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।

रायपुर: श्रमिकों की हेल्थ चेकअप में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, श्रम मंत्री के सख्त निर्देश

रायपुर श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग के विभागीय कामकाज की समीक्षा की। बैठक में मंत्री देवांगन ने निजी उद्योगों द्वारा कराए जाने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य जांच की गहन समीक्षा की। जोखिम वाले (खतरनाक) 913 कारखानों में मात्र 682 ने ही श्रमिकों की चिकित्सा रिपोर्ट अपलोड की गई, शेष की रिपोर्ट अपलोड नहीं करने और जिनके द्वारा किये गए है उनके द्वारा बरती जा रही खानापूर्ति को लेकर मंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए निर्देश दिए। उन्होने कहा कि श्रमिकों के स्वास्थ जांच में किसी तरह की मनमानी न हो इसके लिए फील्ड पर विभागीय अधिकारी स्वास्थ्य जांच पर नियमित निगरानी रखे। उन्होंने जोखिम कारखानों का विभागीय अधिकारियों द्वारा निरिक्षण के बाद पाई गई कमियों के निराकरण के सम्बन्ध में 929 कारखानो में 222 में पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करने को लेकर तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। बैठक में श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, संयुक्त सचिव फरिहा आलम, उप सचिव अंकिता गर्ग, श्रम विभाग अपर आयुक्त श्रीमती सविता मिश्रा, एस.एल.जांगड़े, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के सचिव गिरीश रामटेके सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री देवांगन ने बैठक में संगठित, असंगठित और श्रम कल्याण मण्डल की सभी श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सुरक्षा विभाग, ईएसआईसी विभाग की समीक्षा की। आवास योजना की राशि को एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख प्रति हितग्राही करने आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए । मंत्री देवांगन ने श्रमिकों को मिलने वाली सभी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होने कई जिलों के कम परफॉरमेंस वाले श्रम अधिकारी को कड़े निर्देश दिए गए। साथ ही योजनाओं का अधिक से अधिक श्रमिकों को लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा है कि श्रम विभाग द्वारा संचालित विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ श्रमिकों को मिले इस दिशा में अधिकारी मुस्तैदी से कार्य करें। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्रों श्रमवीर स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित कर श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण करवाने के निर्देश दिए। प्रदेश में लगभग 30 लाख 69 हजार पंजीकृत श्रमिक है। इसमें से 11 लाख श्रमिकों द्वारा 5 साल बाद नवीनीकरण नहीं कराया गया है। केबिनेट मंत्री ने श्रमिकों का दोबारा पंजीयन कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। विभागीय अधिकारी श्रमिकों के बीच इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। उन्होंने विभाग के अधीन संचालित मंडलों द्वारा किये जा रहे कार्यों की गहन समीक्षा की। देवांगन ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना का विस्तार प्रदेश के सभी जिलों में करने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। श्रम मंत्री देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगातार आर्थिक मदद दी जा रही है। श्रम विभाग के तीनों मंडल – छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, छ.ग. असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं छ.ग. श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है।  श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रदेश में विष्णु देव सरकार के सुशासन में अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के हितों में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से अटल उत्कृष्ट योजना , मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी हेतु सहायता राशि योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित की जा रही है।

महिला एवं बाल विकास सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने रायपुर जिले की आंगनबाड़ी सेवाओं की ली समीक्षा बैठक

रायपुर महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने आज इंद्रावती भवन, रायपुर में विभागीय कार्यों की गहन समीक्षा बैठक ली। बैठक में रायपुर जिले की आंगनबाड़ी सेवाओं, विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति, टेक होम राशन वितरण की स्थिति तथा पोषण अभियान की गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा की। आंगनबाड़ी केन्द्रों का नियमित निरीक्षण आवश्यक सचिव श्रीमती आबिदी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि रायपुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी तथा क्षेत्रीय स्तर के अधिकारी नियमित रूप से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण करें और वास्तविक स्थिति का आंकलन कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि निरीक्षण केवल औपचारिकता न होकर, सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और हितग्राहियों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाने का माध्यम होना चाहिए। बैठक में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना और महतारी वंदन योजना पर भी विशेष बल दिया गया। सचिव ने निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर कार्य करें। महतारी वंदन योजना में हितग्राहियों के घर-घर जाकर सर्वे करें। जिन मामलों में लाभार्थी पते पर उपलब्ध नहीं हैं, दस्तावेज अधूरे हैं या हितग्राही की मृत्यु हो चुकी है, उनकी जानकारी तत्काल सत्यापित कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर, सीडीपीओ और डीपीओ पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। टेक होम राशन वितरण की होगी सख्त निगरानी सचिव महिला एवं बाल विकास श्रीमती आबिदी ने टेक होम राशन (THR) के वितरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों गर्भवती एवं धात्री माताओं और कुपोषित बच्चों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मात्रा में टेक होम राशन उपलब्ध कराना आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है। राशन वितरण और एंट्री में किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर संबंधित पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। एनीमिया रोकथाम पर जोर सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बालिकाओं, शिशुवती महिलाओं और गर्भवती माताओं में एनीमिया की समस्या को रोकने के लिए पोषणयुक्त आहार पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी और सामुदायिक स्तर पर जागरूक करने एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से हरी सब्जियों, सहजन (मोरिंगा), गुड़, तिल, चना और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य वस्तुओं के सेवन के लिए प्रोत्साहित करें। पोषण ट्रैकर और राष्ट्रीय पोषण अभियान सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने पोषण ट्रैकर ऐप का सही उपयोग करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियमित गृहभेट करें और समय पर ऑनलाइन एंट्री करें। उन्होंने बताया कि 01 सितंबर से राष्ट्रीय पोषण अभियान की शुरुआत हो चुकी है, जिसके अंतर्गत प्रदेशभर में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएगी हैं ताकि समुदाय में कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़े और पोषण स्तर में सुधार हो। कुपोषण रोकने के लिए मिशन मोड में काम करने के निर्देश सचिव श्रीमती आबिदी ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में कुपोषण रोकने के लिए मिशन मोड में काम किया जाए ताकि कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी योजनाओं और सेवाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब बच्चों, माताओं और किशोरियों को कुपोषण और एनीमिया से मुक्त स्वस्थ जीवन मिल सके। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक पी. एल्मा, संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारी, रायपुर जिले की कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती शैल ठाकुर, सीडीपीओ तथा सुपरवाइजर उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की।

सैनिक स्कूल अंबिकापुर का 17वां स्थापना दिवस समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न

रायपुर सैनिक स्कूल अम्बिकापुर का 17वां स्थापना दिवस समारोह  गरिमामय वातावरण में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। यह अवसर न केवल संस्थान की उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक गरिमा, सैन्य अनुशासन और शैक्षणिक उत्कृष्टता का जीवंत प्रतीक भी बना। समारोह के मुख्य अतिथि जनजातीय कल्याण एवं कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने विद्यालय से जुड़े अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि यह संस्थान न केवल अनुशासन और शिक्षा का केंद्र है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की नींव भी है। उन्होंने कैडेट्स को देशभक्ति, समर्पण और नेतृत्व के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से सैनिक स्कूल के लिए तीन योजनाओं- विद्यालय परिसर में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना, आधुनिक इनडोर एरेना का निर्माण तथा हॉकी में कैडेट्स की प्रतिभा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निखारने हेतु एस्ट्रोटर्फ मैदान के निर्माण का आश्वासन दिया है। कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल तथा सासंद चिंतामणि महाराज ने भी अपने संबोधन में विद्यालय की भूमिका को सराहा और इसके कैडेटों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह में लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज, सीतापुर  विधायक राम कुमार टोप्पो और अम्बिकापुर मेयर श्रीमती मंजूषा भगत, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा नेताम कलेक्टर विलास भोसकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  समारोह में प्राचार्या कर्नल रीमा सोबती ने स्कूल के उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ पी श्रीनिवास एवं प्रशासनिक अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर जेम्स नायर की उपस्थिति में अपने स्वागत भाषण में विद्यालय की वर्ष भर की उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने शैक्षणिक, सहशैक्षणिक, खेलकूद और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में कैडेट्स की भागीदारी और सफलता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सैनिक स्कूल अम्बिकापुर के पूर्व कैडेट खिलानंद साहू और अनिमेष कुजूर, सैनिक स्कूल और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक दिन पर, सैनिक स्कूल अंबिकापुर के 17वें स्थापना दिवस और छत्तीसगढ़ राज्य की रजत जयंती का संयुक्त उत्सव एक अद्वितीय सांस्कृतिक और भावनात्मक संगम बन गया। जहाँ राज्य की गौरवशाली यात्रा और सैनिक स्कूल की अनुशासित शैक्षणिक परंपरा एक साथ मंच पर आलोकित हुईं। यह अवसर न केवल अतीत की उपलब्धियों को स्मरण करने का था, बल्कि भावी पीढ़ियों को प्रेरणा देने वाला एक सशक्त संदेश भी था, कि शिक्षा, संस्कृति और सेवा भाव जब एकत्रित होते हैं, तो राष्ट्र निर्माण की नींव और भी मजबूत होती है। इस अवसर पर सैनिक स्कूल के कैडेटों ने एक शानदार रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने देशभक्ति गीत, छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, मूक अभिनय और सबसे बढ़कर महाभारत की नाट्य गीत प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। किड्स अम्बिकन प्राइमरी स्कूल के नन्हे मुन्ने बच्चों के द्वारा प्रस्तुत नृत्य इस कार्यक्रम का एक अन्य आकर्षण रहा। इस मौके पर विभिन्न सदनों को उनकी वार्षिक उपलब्धियों के आधार पर सम्मानित किया गया। मानेकशा सदन को खेलों में सर्वश्रेष्ठ सदन का पुरस्कार प्राप्त हुआ, जबकि अरिहंत सदन को सर्वश्रेष्ठ कनिष्ठ सदन के रूप में सम्मानित किया गया। अर्जन सिंह सदन को शैक्षणिक एवं सहशैक्षणिक गतिविधियों में सर्वश्रेष्ठ सदन घोषित किया गया। अर्जन सिंह सदन ने प्रतिष्ठित एनडीए ट्रॉफी भी अपने नाम की, जो राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में चयन हेतु सर्वाधिक कैडेट्स भेजने वाले सदन को प्रदान की जाती है। मुख्य अतिथि कृषि मंत्री नेताम के हाथों अर्जन सिंह सदन के  हाउस मास्टर शशिकांत ने सर्वश्रेष्ठ सदन की ट्रॉफी प्राप्त की। समारोह में विद्यालय के दो शिक्षकों सामाजिक विज्ञान के अध्यापक एवं एनसीसी ए. एन. ओ. शिवेश राय एवं सैनिक स्कूल के संस्थापक सदस्यों में से एक हिंदी के अध्यापक रवीन्द्र तिवारी को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही महेश सिन्हा एवं उदेश कुमार को भी उनके समर्पित कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।

बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे CM विष्णु देव साय, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

 बाढ़ प्रभावितों का हाल जानने उनके बीच पहुँचे मुख्यमंत्री साय: अधिकारियों को राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे CM विष्णु देव साय, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश मुख्यमंत्री साय ने बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया हवाई और जमीनी सर्वेक्षण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित जिलों दंतेवाड़ा और बस्तर का हवाई सर्वेक्षण एवं जमीनी निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार तक समय पर सहायता पहुँचना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी स्तरों पर संवेदनशीलता तथा तत्परता आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय दंतेवाड़ा के चूड़ीटिकरा पारा में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर पहुँचे, जहाँ उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से भेंट कर उनकी समस्याओं को सुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया कि शिविरों में पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित आवास की व्यवस्था निरंतर बनी रहे। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाए और उनके पुनर्वास के कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से किए जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि राहत शिविरों में सभी जरूरी व्यवस्थाओं के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को राशन, बर्तन और कपड़े जैसे आवश्यक सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बाढ़ प्रभावितों को आवश्यकता अनुसार मकान की मरम्मत अथवा नए मकान निर्माण के लिए सहायता राशि समय पर देने के निर्देश दिए। साय ने कलेक्टर एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को बाढ़ से हुई फसल क्षति, पशुधन हानि सहित अन्य नुकसानों का शीघ्र आंकलन कर प्रभावितों को सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुल का भी निरीक्षण किया और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था तथा पुनर्निर्माण कार्यों की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की शीघ्र बहाली सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ कठिनाई अवश्य लाती हैं, परंतु प्रशासनिक तत्परता और जनसहयोग से इन कठिनाइयों का समय पर समाधान संभव है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की विशेष देखभाल की जाए तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य शिविर का जायजा लिया मुख्यमंत्री साय ने यहाँ लगाए गए स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल टीम से दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टरों की तैनाती और मरीजों को दी जा रही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद करते हुए यह भी पूछा कि क्या वे प्रशासन की मदद से संतुष्ट हैं। प्रभावितों ने जिला प्रशासन के त्वरित सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। साय ने बाढ़ प्रभावितों की स्वास्थ्य जांच, बीमारों के उपचार और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता के बारे में मौजूद अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्थिति सामान्य होने तक बाढ़ प्रभावितों को शिविर में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ के बाद संभावित उल्टी-दस्त तथा अन्य जलजनित मौसमी बीमारियों पर निरंतर निगरानी रखने और बचाव हेतु पेयजल स्रोतों का अनिवार्य रूप से क्लोरीनेशन करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने आमजन को पीने के शुद्ध पानी का उपयोग करने, स्वच्छता एवं साफ-सफाई बनाए रखने के लिए जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को प्रभावित वार्डों में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

बाढ़ प्रभावित इलाकों पर CM साय की नजर, राहत कार्यों का किया मूल्यांकन

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की बाढ़ प्रभावित इलाकों पर CM साय की नजर, राहत कार्यों का किया मूल्यांकन रायपुर में CM विष्णु देव साय ने बाढ़ राहत इंतजामों की समीक्षा बैठक की दंतेवाड़ा सहित सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के उच्चाधिकारियों की बैठक : स्थिति सामान्य होने तक अधिकारियों को मुस्तैद रहकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश रायपुर दंतेवाड़ा सहित सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के उच्चाधिकारियों की बैठक:स्थिति सामान्य होने तक अधिकारियों को मुस्तैद रहकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज दंतेवाड़ा जिले के प्रवास के दौरान जिला कार्यालय के डंकनी सभाकक्ष में बाढ़, आपदा एवं राहत कार्यों की समीक्षा की। इस बैठक में दंतेवाड़ा के अलावा बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, वन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, क्षेत्रीय विधायक चैतराम अटामी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने विगत 26 एवं 27 अगस्त को हुई अतिवृष्टि से हुई हानि तथा प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की जानकारी बैठक के माध्यम से ली। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशासनिक अमलों द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों से हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक तत्परता एवं त्वरित कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते माह आई इस प्राकृतिक आपदा और विभीषिका से जो जन-धन एवं अधोसंरचना की क्षति हुई है, वह अपूरणीय है। यह संतोष की बात है कि जिला प्रशासन द्वारा फौरी तौर पर बचाव एवं राहत कार्य के लिए कदम उठाए गए। साथ ही शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन दान स्वरूप दिया, जो अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आई बाढ़ आपदा से चारों जिलों में 115 करोड़ रुपये की विभिन्न अधोसंरचनाओं को क्षति हुई है। इनकी मरम्मत के लिए राज्य शासन द्वारा हर संभव सहयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने गैर-शासकीय एवं स्वैच्छिक संगठनों के कार्यों की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि चारों जिलों में स्थिति सामान्य होने तक राहत एवं स्वास्थ्य शिविर आवश्यकतानुसार जारी रखें। उन्होंने कहा कि प्रशासन निरंतर प्रभावितों के संपर्क में रहे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सतत जारी रखे। इसके लिए लगातार कैंप लगाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जाए तथा उन्हें समसामयिक सलाह देते हुए आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को राहत राशि अविलंब जारी करने के भी निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित न होने पाए। इसके लिए कार्यपालन अभियंता तत्काल प्रस्ताव केंद्रीय कार्यालय को प्रेषित करें। साथ ही केशकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग के सुधार कार्य हेतु तात्कालिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने पशु-हानि पर दी जाने वाली मुआवजे की राशि के लिए नए निर्देशों के अनुसार आवंटन देने हेतु कलेक्टरों को निर्देशित किया। स्वास्थ्य विभाग की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार डोर-टू-डोर सर्वे कराया जाए। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि इन क्षेत्रों में मलेरिया, टाइफाइड एवं जलजनित रोग पनपने न पाएं। उन्होंने पेयजल के सभी स्रोतों में क्लोरीनेशन कराने और उसका परीक्षण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। इससे पहले दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टरों ने निर्धारित एजेंडा अनुसार बाढ़ से हुई क्षति और जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की क्रमवार जानकारी दी। बैठक में अतिवृष्टि से प्रभावित ग्रामों, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों, सड़कों, बाधित विद्युत आपूर्ति एवं मोबाइल नेटवर्क की स्थिति प्रस्तुत की गई। साथ ही जन-धन हानि, बाढ़ में बह गए घरों एवं मवेशियों के बारे में संख्यात्मक एवं तथ्यात्मक आंकड़े पीपीटी के माध्यम से साझा किए गए। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत एवं बचाव कार्य, प्रभावितों का रेस्क्यू कर उन्हें राहत कैंपों में ठहराना, तात्कालिक उपचार उपलब्ध कराना और खाद्य सामग्री वितरित करने की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि सर्वाधिक क्षति नदी-नालों के किनारे स्थित ग्रामों के निवासियों को हुई है, परंतु समय पर प्रशासनिक राहत उपलब्ध कराई गई। बैठक में बस्तर संभाग के संभागायुक्त डोमन सिंह, आईजी बस्तर सुंदरराज पी, दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत, सुकमा कलेक्टर देवेश ध्रुव, बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा, जिला पंचायत बस्तर के सीईओ प्रतीक जैन सहित एसपी एवं जिला स्तर के अधिकारीगण मौजूद थे।