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किसानों के लिए जरूरी खबर, सोयाबीन बेचने के लिए 3 से 17 अक्टूबर तक कराएं पंजीयन

सोयाबीन उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन 3 से 17 अक्टूबर तक भोपाल  भारत सरकार की प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम (भावांतर योजना) के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2026 (विपणन वर्ष 2026-27) में सोयाबीन फसल के लिए प्रदेश के किसानों का ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन 3 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। किसान सोयाबीन के पंजीयन के लिए ई-उपार्जन पोर्टल www.mpeuparjan.nic.in पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीयन करा सकेंगे। इसके लिए जिले में निर्धारित पंजीयन केन्द्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गयी हैं। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकॉर्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था ‌द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। उपार्जित फसल के भुगतान हेतु बैंक खाता किसान द्वारा विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान ‌द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें। सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही 1 रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। आधार नंबर का वेरिफिकेशन पंजीयन कराने और फसल विक्रय के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही पंजीयन मान्य होगा। किसानों को करें एसएमएस विगत खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस के माध्यम से सूचित किया जायेगा। गांव में डोडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।  

पहले दिन खिलाड़ियों का पंजीयन, दस्तावेज, शारीरिक दक्षता और चिकित्सकीय परीक्षण, 1 अक्टूबर को होगा खिलाड़ियों के खेल कौशल का परीक्षण

रायपुर खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा रायपुर जिले में संचालित गैर-आवासीय फुटबॉल, तीरंदाजी, हॉकी एवं एथलेटिक्स अकादमी में खिलाड़ियों के प्रवेश (नवीनीकरण एवं नवीन प्रवेश) के लिए आयोजित दो दिवसीय चयन ट्रायल के पहले दिन आज खिलाड़ियों के पंजीयन के साथ दस्तावेज, शारीरिक दक्षता और चिकित्सीय परीक्षण किया गया। चयन ट्रायल के दूसरे दिन कल 1 अक्टूबर को पंजीकृत खिलाड़ियों के खेल कौशल का परीक्षण किया जाएगा। चारों गैर-आवासीय अकादमी में चयन के लिए कुल 144 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। विभागीय अधिकारियों एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में फुटबॉल, तीरंदाजी, हॉकी और एथलेटिक्स के इन खिलाड़ियों का आज पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण तथा चिकित्सकीय परीक्षण किया गया। खिलाड़ियों के शारीरिक दक्षता परीक्षण के तहत हाइट (ऊंचाई), वेट (वजन), वर्टिकल जम्प, 30 मीटर दौड़, शटल रन, बॉल थ्रो, 800 मीटर दौड़ एवं सीट-अप जैसी विभिन्न शारीरिक गतिविधियों का आंकलन किया गया। चयन ट्रायल के दूसरे दिन कल 1 अक्टूबर को पंजीकृत खिलाड़ियों के खेल कौशल के परीक्षण के बाद उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चयन समिति द्वारा अकादमियों में प्रशिक्षण के लिए खिलाड़ियों का अंतिम चयन किया जाएगा।

कुम्हारपारा आंगनबाड़ी केंद्र में सजा ‘आंगन मिलन’

​रायपुर   राज्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नारायणपुर  जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में 28 सितंबर से ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को नगर पालिका क्षेत्र स्थित कुम्हारपारा आंगनबाड़ी केंद्र में सामुदायिक सहभागिता और अपनत्व से सराबोर कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और नागरिकों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। ​सजी रंगोली से दिया पोषण का संदेश इस अवसर पर कुम्हारपारा केंद्र में रंगोली के माध्यम से बच्चों के संतुलित एवं पौष्टिक आहार तथा स्वास्थ्य संबंधी संदेशों को बेहद रोचक तरीके से प्रदर्शित किया गया। उपस्थित लोगों ने रंगोली के जरिए पोषण के महत्व और बच्चों के खान-पान से जुड़ी आवश्यक जानकारियों को समझा। ​मासूमों से आत्मीय संवाद, जाना हाल-चाल कार्यक्रम में पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने बच्चों से आत्मीय बातचीत कर उनका परिचय लिया और उनकी रुचियों व गतिविधियों के बारे में जाना। इस संवाद ने केंद्र में अपनत्वपूर्ण माहौल बना दिया। इस पहल के माध्यम से अभिभावकों को यह संदेश दिया गया कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पूरक पोषण आहार वितरण का स्थल नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम हैं। ​पारंपरिक रीति-रिवाजों से गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। गर्भवती माताओं को गर्भावस्था के दौरान आवश्यक सावधानियों, नियमित स्वास्थ्य जांच और संतुलित आहार की जानकारी दी गई। शिशुओं को ऊपरी अथवा पूरक आहार देने की शुरुआत के साथ ही बाल पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया गया। ​विभागीय योजनाओं की दी गई जानकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उपस्थित माताओं और अभिभावकों को टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा तथा विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अभिभावकों से आंगनबाड़ी की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। ​सामुदायिक सहभागिता से मजबूत हो रहा जुड़ाव कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य मती हीना नाग, पार्षद रमशिला नाग सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और कुपोषण-मुक्त भविष्य के लिए परिवार के साथ-साथ समाज और आंगनबाड़ी केंद्रों का एकजुट प्रयास आवश्यक है।  ​ आगामी दिनों में जिले के अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों में भी इसी तरह के ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे जन-सामान्य और आंगनबाड़ी केंद्रों के बीच का रिश्ता और मजबूत हो सके।

छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए बड़ी राहत: राजमोहिनी देवी योजना के तहत 169 परिवारों को ₹2.42 करोड़ जारी

रायपुर प्रदेश के तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में राजमोहिनी देवी तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 169 परिवारों को 2 करोड़ 42 लाख 40 हजार रुपए की सहायता प्रदान की गई है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में डिजिटल माध्यम से अंतरित की गई।  रायगढ़ जिले के चिमटापानी समिति के मिथिलेश सिदार और दंतेवाड़ा जिले के नकुलनार समिति के गल्ले वीटी के बैंक खातों में राशि अंतरित कर डिजिटल भुगतान की शुरुआत की गई।योजना के तहत दुर्घटना मृत्यु के 4 प्रकरणों में 4-4 लाख रुपए तथा सामान्य मृत्यु या स्थायी विकलांगता के 103 प्रकरणों में 2-2 लाख रुपए की सहायता स्वीकृत की गई। इसी तरह 50 से 59 वर्ष आयु वर्ग में दुर्घटना मृत्यु या स्थायी विकलांगता के 4 प्रकरणों में 75-75 हजार रुपए और सामान्य मृत्यु के 58 प्रकरणों में 30-30 हजार रुपए की सहायता प्रदान की गई। राजमोहिनी देवी तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग में परिवार के मुखिया की सामान्य मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर 2 लाख रुपए, दुर्घटना मृत्यु पर 4 लाख रुपए तथा आंशिक विकलांगता पर एक लाख रुपए की सहायता का प्रावधान है।  इसी प्रकार 50 से 59 वर्ष आयु वर्ग में सामान्य मृत्यु पर 30 हजार रुपए, दुर्घटना मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर 75 हजार रुपए तथा आंशिक विकलांगता पर 37 हजार 500 रुपए की सहायता दी जाती है। योजना के माध्यम से तेन्दूपत्ता संग्रहण से जुड़े परिवारों को मृत्यु अथवा विकलांगता जैसी परिस्थितियों में सीधे आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। राज्य लघु वनोपज संघ के मुख्य कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, उपाध्यक्ष श्री यज्ञदत्त शर्मा और प्रबंध संचालक श्रीमती संजीता गुप्ता की उपस्थिति में राशि जारी की गई।

नारायणपुर में जिला स्तरीय रंगोली प्रतियोगिता संपन्न

​रायपुर       छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणपुर में सोमवार को जिला स्तरीय महाविद्यालयीन रंगोली प्रतियोगिता का गरिमामय आयोजन किया गया। "सेवा के रंग-राष्ट्र के संग" थीम पर आधारित इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य युवाओं में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय परंपराओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति जागरूकता व रुचि विकसित करना रहा।         ​ जनभागीदारी अध्यक्ष श्री नरेंद्र मेश्राम तथा प्राचार्य एवं जिला नोडल अधिकारी के मार्गदर्शन के सफल संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अतिथियों ने प्रतियोगिता व प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए प्रतिभागियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उनका उत्साहवर्धन किया।            ​प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं, शासकीय योजनाओं, राष्ट्रीय एकता, प्राकृतिक व सांस्कृतिक विरासत तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को रंगोली के माध्यम से बेहद रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। इस दौरान स्थानीय और प्राकृतिक सामग्रियों के विशेष प्रयोग ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कड़े मूल्यांकन मानदंडों—रचनात्मकता, विषयवस्तु, प्रस्तुति, कलात्मकता और प्राकृतिक सामग्री के उपयोग—के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया।         ​ प्रतियोगिता में शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणपुर की बी.ए. प्रथम सेमेस्टर की छात्रा सुनीता नुरेटी एवं उनकी साथी ने प्रथम स्थान हासिल किया। द्वितीय स्थान संयुक्त रूप से रामकृष्ण मिशन विवेकानंद महाविद्यालय, नारायणपुर के कपूरचंद व उनकी टीम तथा शासकीय नवीन महाविद्यालय छोटेडोंगर के प्रमोद कुमार नाग व उनकी टीम को मिला। वहीं तृतीय स्थान पर संयुक्त रूप से शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय की भूमिका सोरी व उनकी टीम तथा वीरांगना रामोतीन माड़िया शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय की वीना मातलाम व उनकी टीम रही।          ​ महाविद्यालय के प्राध्यापकों, अतिथि व्याख्याताओं, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के विशेष सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का समापन भारतीय संस्कृति व परंपराओं के संरक्षण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और राष्ट्र की "विविधता में एकता" की भावना को और मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ।

पीएम स्वनिधि के लक्ष्य दो साल पहले पूरे करेगा छत्तीसगढ़, निकायों को एक्शन-प्लान बनाने के निर्देश

रायपुर नगरीय निकायों में पीएम स्वनिधि योजना में ऋण वितरण से लेकर डिजिटल लेन-देन के कार्यों में तेजी लाई जाएगी। राज्य शासन ने भारत सरकार से मिले लक्ष्यों को तय समय-सीमा से दो साल पहले पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है। सभी नगरीय निकाय इसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाएंगे। बैंकों में लंबित ऋण प्रकरण तेजी से निपटाने के साथ ही पात्र पथ विक्रेताओं को योजना से जोड़ने शत-प्रतिशत डिजिटल सशक्तीकरण पर फोकस किया जाएगा।  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आज पीएम स्वनिधि (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि) की राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में अधिकारियों से कहा कि कोई भी पात्र पथ विक्रेता योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। योजना का मुख्य उद्देश्य पथ विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के सुलभ कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने नगरीय निकायों और बैंक प्रतिनिधियों को आपसी समन्वय बढ़ाकर ऋण प्रकरणों का तेजी से निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण के ऋण वितरण की निकायवार और बैंकवार समीक्षा करते हुए लंबित आवेदनों के त्वरित निराकरण के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) को निर्देशित किया। प्रमुख सचिव  बोरा ने मंत्रालय में आयोजित वर्चुअल बैठक में सभी नगरीय निकायों को भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य समय-सीमा से दो वर्ष पहले हासिल करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर प्रभावी ढंग से अमल करने को कहा। उन्होंने अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए निकायों और बैंकों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने ऋण वितरण के साथ ही पथ विक्रेताओं के डिजिटल सशक्तीकरण पर भी फोकस करने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में क्यूआर (QR) कोड वितरण, यूपीआई (UPI) से डिजिटल लेन-देन और इस पर दिए जा रहे कैशबैक प्रोत्साहन की समीक्षा की। उन्होंने पथ विक्रेताओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। पीएम स्वनिधि की निगरानी समिति की बैठक में योजना को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने राज्य और निकाय स्तर पर मानव संसाधन की नियुक्ति की स्वीकृति दी गई। बैठक में क्रेडिट कार्ड योजना की प्रगति, प्रदेश में स्वच्छ एवं हाइजीनिक स्ट्रीट फूड हब की स्थापना और ऋण अदायगी की स्थिति की भी समीक्षा की गई। भारत सरकार को भेजे गए प्रस्तावों पर कार्योत्तर स्वीकृति भी प्रदान की गई।  बोरा ने नगरीय निकायों में पथ विक्रेताओं के साथ नियमित संवाद कार्यक्रम और जिला स्तर पर बैंकर्स कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए। इसके जरिए पथ विक्रेताओं को योजना, ऋण प्रक्रिया और डिजिटल लेन-देन की जानकारी देने के साथ बैंकों से समन्वय कर लंबित प्रकरणों का तेजी से निराकरण किया जाएगा। बैठक में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों और बैंक शाखाओं को सम्मानित करने का भी निर्णय लिया गया। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुमीत अग्रवाल, वित्त विभाग के उप सचिव  ए.के. सिंग, राज्य शहरी विकास अभिकरण के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुनील अग्रहरि, भारतीय रिजर्व बैंक के उप महाप्रबंधक  प्रदीप गोंदुले, सिडबी के उप महाप्रबंधक  संतोष राव मोरे, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के प्रतिनिधि उप महाप्रबंधक  मनोज सिंह, नगर निगमों के आयुक्त  प्रकाश सर्वे,  अरुण वर्मा,  दशरथ सिंह राजपूत, उपायुक्त  नीरज कौशिक, कार्यपालन अभियंता  ए.के. सिंग तथा योजना के निकाय स्तरीय नोडल अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।  

पीएमईजीपी से शुरू किया बेकरी उद्योग, खुद बने आत्मनिर्भर और 10 लोगों को दिया रोजगार

रायपुर कोरिया में अब कई परिवारों की सुबह सिर्फ ‘गुड मॉर्निंग’ संदेश से नहीं, बल्कि ‘गुड मॉर्निंग बेकरी’ के ताजा ब्रेड, टोस्ट, बिस्किट और केक से भी होती है। ग्राम ओड़गी के दिलीप और सावित्री गुप्ता की जोड़ी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) का लाभ उठाकर अपने सपने को कारोबार में बदला है।कभी आर्थिक कठिनाइयों से जूझने वाला यह परिवार आज आत्मनिर्भर है और अपने साथ करीब 10 लोगों को रोजगार दे रहा है। मोदी की योजना ने दिखाई राह, सपने को मिला आकार           स्नातक तक पढ़ी सावित्री गुप्ता और दसवीं तक पढ़े उनके पति दिलीप के लिए अपना व्यवसाय शुरू करना आसान नहीं था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले दिलीप करीब पांच वर्षों तक दूसरी बेकरी में काम करते रहे। इस दौरान उन्होंने बेकरी उत्पादन, गुणवत्ता, बाजार और ग्राहकों की जरूरतों को करीब से समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनके अपने कारोबार की ताकत बना।           वर्ष 2023-24 में बैकुंठपुर विधायक श्री भैयालाल राजवाड़े के माध्यम से दिलीप को पीएमईजीपी योजना की जानकारी मिली। योजना को समझने के बाद दिलीप और सावित्री ने तय किया कि अब दूसरों के लिए काम करने के बजाय अपना रोजगार खड़ा किया जाए। पीएमईजीपी ने दिया पूंजी का संबल            सावित्री ने पीएमईजीपी के माध्यम से करीब 10 लाख रुपये का ऋण लेकर अपनी जमीन पर बेकरी उद्योग स्थापित किया। परिवार ने भी करीब 2 से 3 लाख रुपये की राशि लगाई। करीब 10 से 12 हजार वर्गफीट क्षेत्र में ‘गुड मॉर्निंग बेकरी’ की शुरुआत हुई। यहां केक, बिस्किट, मीठा गोला, ब्रेड, टोस्ट सहित विभिन्न बेकरी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। कच्चा माल अनूपपुर, मनेंद्रगढ़ और बैकुण्ठपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से मंगाया जाता है। दिलीप का अनुभव, सावित्री का संकल्प बना सफलता की ताकत          इस कारोबार की खासियत सिर्फ सरकारी ऋण से शुरू होना नहीं, बल्कि दिलीप के वर्षों के अनुभव और सावित्री के आत्मविश्वास की साझेदारी भी है। दिलीप ने जहां बेकरी के काम का व्यावहारिक अनुभव कारोबार में लगाया, वहीं सावित्री ने परिवार और व्यवसाय की जिम्मेदारियों को संभालते हुए उद्यम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों की मेहनत का परिणाम है कि गांव में शुरू हुआ कारोबार अब बैकुण्ठपुर के साथ कुदरगढ़, खर्रा और सूरजपुर तक अपने उत्पाद पहुंचा रहा है। एक परिवार की आत्मनिर्भरता से 10 परिवारों की आजीविका तक            पीएमईजीपी से शुरू हुआ यह उद्योग अब केवल दिलीप और सावित्री के परिवार की आय का साधन नहीं है। बेकरी में करीब 10 लोगों को रोजगार मिल रहा है। यानी सरकारी योजना से मिले एक अवसर ने एक परिवार को आत्मनिर्भर बनाने के साथ दूसरे जरूरतमंद परिवारों के लिए भी रोजगार का रास्ता खोला है।   सावित्री कहती हैं कि पीएमईजीपी ने उनकी तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दी। कभी अपने व्यवसाय की कल्पना करना कठिन था, लेकिन योजना से मिले आर्थिक सहयोग ने उस सपने को हकीकत में बदल दिया। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर होने के साथ दूसरों को रोजगार देने की स्थिति में हैं। मोदी जी की योजना ने हमें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया              प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सावित्री कहती हैं कि पीएमईजीपी जैसी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और मेहनत से स्वरोजगार को सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है।             दिलीप कहते हैं कि योजना का लाभ मिलने के साथ समय का सही उपयोग, अपने काम का अनुभव और निरंतर मेहनत उनकी सफलता के प्रमुख आधार रहे हैं। दूसरे की बेकरी में काम करते हुए जो सीखा, उसे अपने व्यवसाय में लगाया और आज उसी अनुभव ने उन्हें अपनी पहचान बनाने में मदद की है। जोड़ी ने मेहनत की कई परिवारों की सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ से            दिलीप और सावित्री की यह जोड़ी सेवा संकल्प की उस भावना को भी मजबूत करती है, जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर व्यक्ति स्वयं आत्मनिर्भर बने और आगे बढ़कर दूसरों के लिए भी रोजगार व आजीविका का माध्यम तैयार करे। एक योजना ने अवसर दिया, एक जोड़ी ने मेहनत की और आज उस मेहनत से कई परिवारों की सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ हो रही है।

‘नागरिक विज्ञान’ से जैव विविधता संरक्षण में भागीदारी करेंगे युवा

रायपुर  सेवा संकल्प अभियान के तहत जशपुर वनमंडल में युवाओं, स्थानीय समुदायों और वन अमले को जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता संरक्षण से जोड़ने के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं को ‘नागरिक विज्ञान’ से जोड़ते हुए स्थानीय जैव विविधता के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और संरक्षण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।  कार्यक्रम में वन मुख्यालय रायपुर के विषय विशेषज्ञ डॉ. अनिल वास्तव और कृषि महाविद्यालय, अम्बिकापुर के रिसर्च एसोसिएट  यमलेश निषाद ने जलवायु परिवर्तन के कारणों और पर्यावरण एवं जैव विविधता पर उसके प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बदलती जलवायु परिस्थितियों में वन पारिस्थितिकी तंत्र के प्रभावी प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण के विभिन्न पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया। ‘युवान’ पहल से जैव विविधता के दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण       फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्यूरिटी, रायपुर की ‘युवान’ पहल के माध्यम से युवाओं को स्थानीय जैव विविधता के वैज्ञानिक अवलोकन और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया समझाई गई। ‘मेरा युवा भारत’, जशपुर के स्वयंसेवकों ने भी इसमें भागीदारी की। प्रशिक्षण के दौरान पक्षियों, तितलियों और सरीसृपों के पारिस्थितिक महत्व तथा उनके संरक्षण के संबंध में जानकारी दी गई। प्रकृति भ्रमण और बर्ड वाचिंग के माध्यम से प्रतिभागियों को स्थानीय वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की पहचान, क्षेत्रीय अवलोकन और उनके अभिलेखीकरण का व्यावहारिक अनुभव भी मिला। कार्यक्रम में जशपुर के वनमंडलाधिकारी  शशि कुमार सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विषय विशेषज्ञ और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुन्नी का हौसला, एम हेल्प वॉटर की धार, महालक्ष्मी समूह से रोजगार की बहार

कोरिया  सेवा संकल्प अभियान केवल सेवा कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आत्मनिर्भर और सशक्त समाज के निर्माण का संकल्प भी है। इसी भावना को ग्राम डुमरिया की श्रीमती मुन्नी बाई राजवाड़े अपने उद्यम के माध्यम से साकार कर रही हैं। कभी खेतों में मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके परिवार चलाने वाली मुन्नी बाई आज सरकारी योजनाओं के सहयोग से सफल महिला उद्यमी बन चुकी हैं। बिहान योजना से स्वयं सहायता समूह का संबल मिला, प्रशिक्षण से आत्मविश्वास बढ़ा और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) ने उनके सपने को कारोबार में बदलने का आर्थिक आधार दिया। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर हैं और करीब 10 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। ’समूह से जुड़कर मिली उद्यम की राह’’ मुन्नी बाई बिहान योजना के अंतर्गत महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण मिला। रायपुर में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें पीएमईजीपी की जानकारी मिली। योजना से प्रभावित होकर उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र पहुंचकर विस्तृत जानकारी ली और अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने गांव में जमीन लेकर पैक्ड पेयजल प्लांट स्थापित करने का फैसला किया। कई महीनों की प्रक्रिया के बाद पीएमईजीपी के तहत करीब 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। ऋण एवं उपलब्ध सहायता से शेड, बाउंड्री और बोरवेल सहित आवश्यक व्यवस्था तैयार की गई। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने ‘एम हेल्प वॉटर’ पैक्ड पेयजल प्लांट शुरू किया। एक उद्यम से 10 लोगों को रोजगार मुन्नी बाई का व्यवसाय अब केवल उनके परिवार की आजीविका तक सीमित नहीं है। प्लांट में उनके पति, बेटा-बेटी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तथा अन्य कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।करीब 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है और कर्मचारियों को 6 से 9 हजार रुपये तक प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। पानी की गुणवत्ता जांच से लेकर बोतल भरने और पैकेजिंग तक के कार्य के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को गांव में ही रोजगार और नए कौशल का अवसर मिला है। गांव से कई जिलों तक पहुंचा कारोबार मुन्नी बाई के अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब एक से डेढ़ लाख पानी की बोतलों की पैकिंग की जा चुकी है। बैकुण्ठपुर के साथ मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, अंबिकापुर, प्रतापपुर, विश्रामपुर, सूरजपुर, भैयाथान और कुदरगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में ‘एम हेल्प वॉटर’ की आपूर्ति की जा रही है। महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मिली वित्तीय सहायता, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और उद्योग विभाग के अभिसरण से पीएमईजीपी का सहयोग उनके उद्यम की सफलता में महत्वपूर्ण साबित हुआ। मुन्नी बाई प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि पीएमईजीपी जैसी योजनाओं ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। सरकारी सहयोग और मार्गदर्शन से आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं और दूसरों को भी रोजगार दे पा रही हैं। मुन्नी बाई की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जब जनभागीदारी, संकल्प और मेहनत से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव एक परिवार से आगे बढ़कर पूरे समाज तक पहुंचता है। एक महिला आत्मनिर्भर बनती है, रोजगार के अवसर पैदा करती है और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहभागी बनती है। सेवा संकल्प अभियान की भावना भी यही है सेवा के साथ जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता विकसित समाज के निर्माण में हर व्यक्ति की भागीदारी। मुन्नी बाई इसी संकल्प की एक प्रेरक तस्वीर हैं।

केरलापेंदा में 21 साल बाद खुले श्रीराम मंदिर के द्वार, फिर से सुनाई देने लगी पूजा की घंटियां, जलने लगे आस्था के दीप

रायपुर कभी जिन रास्तों पर कदम रखने से पहले लोग कई बार सोचते थे, जहां जंगलों के बीच बंदूक की आवाज और बारूदी सुरंगों का डर बस्तर की पहचान बन गया था, उन्हीं इलाकों में अब बदलाव की एक नई कहानी लिखी जा रही है। यह बदलाव केवल सड़कों, सुरक्षा कैंपों या विकास कार्यों में नहीं, बल्कि उन लोगों की जिंदगी में भी दिखाई दे रहा है, जिन्होंने हिंसा का दौर अपनी आंखों से देखा है। दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स ने बस्तर भ्रमण के दूसरे दिन सुकमा से जगरगुंडा और केरलापेंदा होते हुए पूवर्ती तक का सफर किया। करीब 13 घंटे से अधिक चले इस सफर में उन्होंने बस्तर के उस चेहरे को करीब से देखा, जो लंबे समय तक देश के सामने नक्सल हिंसा की खबरों के जरिए ही आया। पुनर्वास केंद्र में मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों से संवाद से लेकर सुरक्षा व्यवस्था को समझने, ‘खूनी सड़क’ से गुजरने, 76 जवानों की शहादत से जुड़े क्षेत्र को देखने, ग्रामीणों से बातचीत करने, 21 साल तक बंद रहे राम मंदिर में पहुंचने और अंत में पूवर्ती में हिडमा के परिवार से मिलने तक की यह यात्रा बस्तर के अतीत, वर्तमान और बदलती परिस्थितियों की एक जीवंत तस्वीर बन गई। सुबह सुकमा पहुंचने के बाद इंफ्लुएंसर्स ने सबसे पहले सुकमा पुनर्वास केंद्र का दौरा किया। यहां उन्होंने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों से सीधे संवाद किया। बातचीत में उन्होंने उनके जीवन, आत्मसमर्पण के बाद आए बदलाव और सामान्य जीवन की ओर लौटने के अनुभवों को समझा। इन चेहरों के पीछे एक लंबा और कठिन अतीत था, लेकिन उनके सामने खड़े होकर संवाद करते इंफ्लुएंसर्स को बस्तर की कहानी का एक ऐसा मानवीय पक्ष दिखाई दिया, जिसे दूर बैठकर समझना आसान नहीं है। यह कहानी केवल बंदूक छोड़ने की नहीं, बल्कि एक सामान्य जिंदगी को दोबारा पाने की कोशिश की भी है। इसके बाद इंफ्लुएंसर्स ने सुकमा के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की। उन्होंने क्षेत्र में सुरक्षा, शांति, विकास और प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि बस्तर के दूरस्थ और कभी कठिन माने जाने वाले इलाकों तक सुरक्षा के साथ नागरिक सुविधाओं और विकास की पहुंच किस तरह बढ़ रही है। सुकमा में ही दल ने साइंस पार्क का भ्रमण किया। जंगलों और संघर्ष की छवि से इतर यह पड़ाव बस्तर की उस तस्वीर से परिचित कराने वाला था, जिसमें शिक्षा, विज्ञान और आधुनिक सुविधाओं के लिए भी जगह बन रही है। इसके बाद सफर तोंगपाल की ओर बढ़ा। भोजन के बाद दल जगरगुंडा के लिए रवाना हुआ। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह मार्ग था, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘खूनी सड़क’ के नाम से जाना जाता है। इसी रास्ते से गुजरते हुए इंफ्लुएंसर्स ने उस दौर की जानकारी ली, जब यह क्षेत्र लंबे समय तक नक्सली हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों का केंद्र रहा। जगरगुंडा पहुंचकर उन्हें उस क्षेत्र के बारे में बताया गया, जो वर्ष 2010 में सुरक्षा बलों के 76 जवानों की शहादत से जुड़े ताड़मेटला हमले की स्मृति से जुड़ा है। 6 अप्रैल 2010 को हुए इस हमले में 76 सीआरपीएफ जवानों की जान गई थी। यह पड़ाव इंफ्लुएंसर्स के लिए केवल इतिहास जानने का अवसर नहीं था। जिन स्थानों के नाम कभी देशभर में हिंसा की खबरों के साथ सुर्खियों में आते थे, वहां खड़े होकर उस अतीत को समझना उनके लिए बस्तर को एक अलग नजरिए से देखने जैसा था। लेकिन इसी सफर में उन्हें यह भी महसूस हुआ कि बस्तर की कहानी केवल अतीत में अटकी हुई नहीं है। जगरगुंडा से आगे बढ़ते हुए इंफ्लुएंसर्स केरलापेंदा पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों से संवाद किया और क्षेत्र में आए बदलावों के बारे में जाना। ग्रामीणों के अनुभवों ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि वर्षों तक संघर्ष से प्रभावित रहे इलाके में सामान्य जीवन की वापसी का अर्थ स्थानीय लोगों के लिए क्या है। केरलापेंदा में उनका सामना बस्तर की इस बदलती तस्वीर के सबसे मार्मिक प्रतीकों में से एक राम मंदिर से हुआ। यह वही मंदिर है, जो डर और भय से करीब 21 वर्षों तक बंद रहा था। मंदिर में भगवान राम, माता सीता और भगवान लक्ष्मण की संगमरमर की प्रतिमाएं स्थापित हैं। वर्ष 2003 में माओवादी प्रभाव के दौर में ग्रामीणों को मंदिर बंद रखने और वहां पूजा-अर्चना न करने का फरमान दिया गया था। भय का ऐसा वातावरण था कि लोग मंदिर के आसपास जाने से भी बचते थे। मंदिर में पूजा करीब 21 वर्षों तक बंद रही। फिर अप्रैल 2024 में परिस्थितियां बदलीं। सुरक्षा बलों की मौजूदगी और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर की सफाई की गई। करीब 21 वर्षों से बंद मंदिर के कपाट फिर खुले। ग्रामीणों और सीआरपीएफ जवानों ने मिलकर मंदिर परिसर की सफाई की और भगवान राम, माता सीता तथा भगवान लक्ष्मण की संगमरमर की प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना दोबारा शुरू हुई। जिस मंदिर के दरवाजे कभी भय के कारण बंद हुए थे, वहां फिर पूजा की घंटियां सुनाई देने लगीं। बस्तर की बदलती तस्वीर को समझने के लिए शायद इससे अधिक भावनात्मक दृश्य मुश्किल है, एक ओर बंदूक और भय का अतीत, दूसरी ओर फिर से जलता दीप और मंदिर में लौटती पूजा। केरलापेंदा का यह प्रसंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गांव कभी माओवादी प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। वर्ष 2025 में यहां से 9 सहित कुल 16 माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद केरलापेंदा को माओवादी मुक्त गांव घोषित किया गया था।  यही कारण है कि इंफ्लुएंसर्स के लिए केरलापेंदा केवल यात्रा का एक पड़ाव नहीं रहा। यह उनके सामने बस्तर के बदलाव की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरा, जहां कभी भय के कारण पूजा रुक गई थी, वहीं अब ग्रामीण जीवन और धार्मिक गतिविधियों की वापसी दिखाई दे रही है। इसके बाद  इंफ्लुएंसर्स का दल पूवर्ती की ओर रवाना हुआ। जंगलों और दूरस्थ इलाकों से गुजरते हुए कई घंटे की यात्रा के बाद वे रात में पूवर्ती पहुंचे। पूवर्ती  नक्सली कमांडर हिडमा का पैतृक गांव है। यहां इंफ्लुएंसर्स ने हिडमा के बड़े भाई, भाभी और भतीजे से संवाद किया। उन्होंने परिवार से गांव की वर्तमान परिस्थितियों, स्थानीय जीवन … Read more