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33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन से 16 गांवों को मिलेगी बेहतर बिजली आपूर्ति, लो वोल्टेज की समस्या से मिलेगी राहत

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल से नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा आम नागरिकों को बेहतर विद्युत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री  साय के गृह जिले जशपुर के नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात मिली है। जिले के फरसाबहार तहसील अंतर्गत ग्राम समडमा में 2 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। इस सब स्टेशन के शुरू होने से क्षेत्र के 16 गांवों के बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति का लाभ मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही लो वोल्टेज की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। नागलोक क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से लो वोल्टेज और बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने के कारण घरेलू विद्युत उपकरणों के संचालन, कृषि कार्यों और अन्य दैनिक गतिविधियों में कठिनाइयां होती थीं। क्षेत्र की इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर समडमा में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कराया जा रहा है। इसके पूर्ण होने से स्थानीय विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी तथा बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार होगा। समडमा सहित 16 गांवों के हजारों ग्रामीणों को मिलेगा बेहतर बिजली व्यवस्था का लाभ समडमा में निर्माणाधीन 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन से समडमा, सांको, साहिलता, बांसाझाल, छरला, मांझापारा, कोरचिकानी, लावाकेरा, जूनाडीह, जगदमपुर, रेंगारमुण्डा, जाडामल, बेलडीपा, चालडीह, जामडांड और रंगीयाडीपा सहित आसपास के क्षेत्रों के विद्युत उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। विद्युत सब स्टेशन के शुरू होने से इन गांवों में बिजली वितरण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी। इससे उपभोक्ताओं को पर्याप्त वोल्टेज के साथ बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की गुणवत्ता में सुधार होने से लोगों के दैनिक जीवन में सहूलियत बढ़ेगी। कृषि, शिक्षा और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा समडमा में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे क्षेत्र की कृषि, शिक्षा, छोटे व्यवसाय और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर विद्युत आपूर्ति से किसानों को सिंचाई पंप और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन में सुविधा होगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के संचालन में भी सहूलियत मिलेगी। इसके साथ ही घरों में विद्युत उपकरणों का उपयोग अधिक सुगम होगा और विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। विद्युत अधोसंरचना के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और स्थानीय विकास को गति देने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय की पहल से दूरस्थ अंचलों में मजबूत हो रही विद्युत अधोसंरचना मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समडमा में 2.91 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन विद्युत सब स्टेशन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके शुरू होने से नागलोक क्षेत्र में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। लंबे समय से बिजली संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे क्षेत्रवासियों ने विद्युत सब स्टेशन के निर्माण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। ग्रामीणों ने इस महत्वपूर्ण सुविधा के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि सब स्टेशन के शुरू होने से क्षेत्र में लो वोल्टेज की समस्या दूर होगी और बिजली आपूर्ति व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

कभी बरसात में टपकती थी छत, अब पक्के घर में सुरक्षित जीवन बिता रहे पहाड़ी कोरवा दिलबंधु

रायपुर  कभी बरसात शुरू होते ही घर की टपकती छत की चिंता सताने लगती थी। मिट्टी के कच्चे मकान में रहने के कारण बारिश के दिनों में परिवार को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। छत से पानी टपकने पर बार-बार खपरा लगाकर मरम्मत करनी पड़ती थी, लेकिन अब वे दिन बीते समय की बात हो गए हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मानिकप्रकाशपुर निवासी विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के  दिलबंधु के जीवन में प्रधानमंत्री जनमन योजना ने महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। योजना के अंतर्गत पक्का आवास मिलने से उनका परिवार अब सुरक्षित और बेहतर वातावरण में रह रहा है। इसके साथ ही गांव में सड़क, पेयजल, गैस चूल्हा और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से उनके दैनिक जीवन की परेशानियां भी कम हुई हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रारंभ प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को आवास सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में भी इन सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सामने आई दिलबंधु की कहानी दर्शाती है कि पक्के आवास और गांव में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार से जनजातीय परिवारों के जीवन में किस प्रकार सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। बरसात में खपरा लगाकर करनी पड़ती थी छत की मरम्मत, अब मिली स्थायी राहत दिलबंधु बताते हैं कि पहले उनका परिवार मिट्टी के बने कच्चे मकान में रहता था। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकना सबसे बड़ी परेशानी थी। बारिश के पानी से बचने के लिए उन्हें बार-बार खपरा लगाकर छत की मरम्मत करनी पड़ती थी। कच्चे मकान की स्थिति के कारण परिवार को हर वर्ष बारिश के दिनों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीमित संसाधनों के कारण स्वयं का पक्का घर बनाना आसान नहीं था, इसलिए परिवार लंबे समय से बेहतर आवास की आवश्यकता महसूस कर रहा था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत पक्का आवास मिलने से दिलबंधु के परिवार की यह परेशानी दूर हो गई है। अब उन्हें बरसात के समय छत से पानी टपकने या बार-बार मरम्मत करने की चिंता नहीं रहती। पक्के मकान ने परिवार को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के साथ रहने की बेहतर व्यवस्था भी प्रदान की है। दिलबंधु के लिए यह केवल मकान का निर्माण नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही कठिनाइयों से मुक्ति और सम्मानजनक जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। सड़क और स्ट्रीट लाइट से आवागमन हुआ सुगम, पेयजल और गैस चूल्हे से मिली सुविधा दिलबंधु के जीवन में बदलाव केवल पक्के आवास तक सीमित नहीं है। गांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से भी उनके परिवार को राहत मिली है। वे बताते हैं कि पहले गांव में झाड़ी-झंखाड़ अधिक थे और सड़कों की स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण आवागमन में परेशानी होती थी। विशेष रूप से दैनिक जरूरतों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। अब सड़क निर्माण होने से ग्रामीणों का आवागमन पहले की तुलना में आसान हुआ है। इसके साथ ही सड़क पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था होने से प्रकाश की सुविधा उपलब्ध हुई है। गांव में पेयजल और परिवार को गैस चूल्हे की सुविधा मिलने से भी दैनिक जीवन अधिक सुगम हुआ है। इन सुविधाओं ने परिवार की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद की है। दिलबंधु बताते हैं कि पहले की तुलना में अब गांव में रहने की व्यवस्था बेहतर हुई है और रोजमर्रा के कामकाज में होने वाली परेशानियां कम हुई हैं। पीएम जनमन से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को मिल रहा बेहतर जीवन का अवसर प्रधानमंत्री जनमन योजना का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों तक आवास और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले इन परिवारों के लिए पक्का आवास, सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं जीवन स्तर में सुधार का महत्वपूर्ण आधार हैं। इन सुविधाओं के विस्तार से परिवारों को सुरक्षित आवासीय वातावरण मिलने के साथ दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सुविधा होती है। मानिकप्रकाशपुर निवासी दिलबंधु का अनुभव इस बदलाव का उदाहरण है। पहले उनका परिवार कच्चे मकान और खराब सड़क जैसी परेशानियों का सामना करता था, जबकि अब पक्के आवास और गांव में विकसित सुविधाओं से जीवन अधिक सुविधाजनक हुआ है। विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को योजनाओं से जोड़ने के प्रयास उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और बेहतर रहन-सहन के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। पक्का घर मिलने पर दिलबंधु ने जताई खुशी, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति व्यक्त किया आभार प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत पक्का आवास मिलने पर दिलबंधु ने खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि पहले मिट्टी के कच्चे मकान में बरसात के दौरान काफी कठिनाइयां होती थीं। छत से पानी टपकने के कारण बार-बार मरम्मत करनी पड़ती थी, लेकिन अब पक्का घर बनने से परिवार को इन परेशानियों से राहत मिली है। गांव में सड़क, पेयजल, गैस चूल्हा और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से उनका रहन-सहन भी बेहतर हुआ है। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत दिलबंधु की यह कहानी विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के जीवन में शासकीय योजनाओं से आ रहे सकारात्मक बदलाव को सामने लाती है। कभी बारिश के दिनों में कच्चे मकान की टपकती छत से परेशान रहने वाला उनका परिवार आज पक्के आवास में सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहा है। इसके साथ ही गांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार ने दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाया है। दिलबंधु का अनुभव दर्शाता है कि आवास और मूलभूत सुविधाओं की पहुंच ग्रामीण एवं जनजातीय परिवारों को बेहतर और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

डिजिटल क्रॉप सर्वे के भुगतान संबंधी शिकायत पर कृषि विभाग ने की कार्यवाही

डिजिटल क्रॉप सर्वे के भुगतान संबंधी शिकायत पर कृषि विभाग ने की कार्यवाही वित्तीय वर्ष 2026-27 में सर्वेयरों के मानदेय के लिए 2,333.33 लाख रुपये का आवंटन जारी रायपुर,  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों से संबंधित कृषि गतिविधियों के संचालन एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्यों के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे में संलग्न सर्वेयरों के मानदेय भुगतान के संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर प्राप्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को प्रकरण का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।           कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एग्रीस्टैक परियोजना के अंतर्गत डिजिटल क्रॉप सर्वे कार्य में संलग्न सर्वेयरों के मानदेय भुगतान के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में दो किस्तों में राशि आवंटित की गई है। इनमें प्रथम किस्त के रूप में 1,399.99 लाख रुपये तथा द्वितीय किस्त के रूप में 933.33 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार कुल 2,333.33 लाख रुपये का आवंटन उपलब्ध कराया गया है। विभागीय पत्र में उल्लेखित विवरण के अनुसार, उक्त आवंटन में से 1,109.16 लाख रुपये व्यय किया जाना प्रतिवेदित है, जो कुल आवंटन का 47.54 प्रतिशत है। शेष राशि के व्यय एवं भुगतान की स्थिति का नियमानुसार परीक्षण किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायत पर विभागीय कार्रवाई       जिला बालोद के डौंडीलोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम रेंगाडबरी निवासी सत्यानंद नायक द्वारा डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्य के मानदेय का भुगतान नहीं होने के संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आवेदक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में किए गए डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्य का भुगतान अब तक प्राप्त नहीं होने की बात कही थी।         प्राप्त शिकायत का कृषि विभाग ने उपलब्ध अभिलेखों एवं आवंटित राशि के विवरण के आधार पर प्रकरण का परीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। शासकीय अभिलेखों के अनुसार, शिकायत का निराकरण संबंधित विभागीय प्रक्रिया के अंतर्गत अपेक्षित है। विभाग को निर्देशित किया गया है कि शिकायत में उल्लेखित तथ्यों की जांच करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा प्रकरण के निराकरण की स्थिति सुनिश्चित की जाए। पारदर्शिता के साथ शिकायतों के निराकरण पर जोर         मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके परीक्षण एवं निराकरण की प्रक्रिया अपनाई जाती है। डिजिटल क्रॉप सर्वे के मानदेय भुगतान से संबंधित इस प्रकरण में भी संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है। इससे शिकायतों के परीक्षण, विभागीय जवाबदेही तथा लंबित प्रकरणों के नियमानुसार निराकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

सरगुजा संभाग में फसल विविधीकरण और सहायक आजीविका गतिविधियों के विस्तार पर विशेष जोर

रायपुर किसानों की आय बढ़ाने कृषि के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा सरगुजा संभाग में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए परंपरागत खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, कुक्कुटपालन, बकरीपालन और उद्यानिकी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को खेती के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा उपलब्ध कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संभाग स्तर पर समन्वित कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसी क्रम में सरगुजा संभागायुक्त  नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने खरीफ 2026 एवं रबी 2026-27 की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को योजनाओं का प्रभावी और समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अम्बिकापुर स्थित कमिश्नर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर एवं सूरजपुर जिलों के कृषि, पशुधन विकास, उद्यानिकी और मत्स्य पालन विभाग सहित कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी उपस्थित थे। संभागायुक्त ने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए केवल फसल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कृषि के साथ सहायक आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाएं। फसल विविधीकरण और पड़ती भूमि के उपयोग से बढ़ेगा कृषि उत्पादन संभागायुक्त  दुग्गा ने खरीफ 2026 के क्षेत्राच्छादन, फसल विविधीकरण और रबी मौसम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए पड़ती भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि रबी मौसम में उपलब्ध नमी और सिंचाई संसाधनों का उपयोग कर अतिरिक्त क्षेत्र में खेती के लिए उपयुक्त फसलों का चयन किया जाए। धान आधारित फसल पद्धति में दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों को शामिल करने तथा किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के अंतर्गत चयनित उपार्जन केंद्रों के कैचमेंट क्षेत्रों में फसलवार संभावित आवक का आकलन करने और किसानों को योजना के संबंध में जागरूक करने की रणनीति तैयार करने पर चर्चा हुई। संभागायुक्त ने प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के निर्धारित संकेतकों की प्रगति, एकीकृत किसान पोर्टल पर किसानों के पंजीयन तथा ग्रीष्मकालीन धान का रकबा शून्य करने के लिए तैयार कार्ययोजना की भी समीक्षा की। उन्होंने नील-हरित काई, हरी खाद और अन्य वैकल्पिक माध्यमों से पोषण प्रबंधन को बढ़ावा देने तथा कृषि में उन्नत तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया। रबी सीजन में बीज और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश संभागायुक्त ने रबी 2026-27 के लिए बीज एवं उर्वरकों की मांग, उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जिलेवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक उपलब्ध हों तथा वितरण प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित रहे। बैठक में पायलट प्रोजेक्ट वाले जिलों में फर्टिलाइजर सेल फ्रेमवर्क (एफएफएस) के माध्यम से उर्वरक वितरण के अनुभवों की जानकारी ली गई। साथ ही रबी 2026-27 से इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की गई। कृषि आदानों की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं में जिलेवार व्यय तथा खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयलसीड और आत्मनिर्भरता दलहन मिशन की प्रगति की भी समीक्षा हुई। संभागायुक्त ने ऑयल पाम एवं अन्य फलदार पौधों के रोपण क्षेत्रों में अंतरवर्तीय फसलों की संभावनाएं तलाशने और किसानों को उद्यानिकी आधारित खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से ग्रामीण परिवारों को मिलेंगे अतिरिक्त आय के अवसर पशुधन विकास विभाग की समीक्षा के दौरान संभागायुक्त ने दुग्ध उत्पादन, कुक्कुटपालन और बकरीपालन जैसी गतिविधियों को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) एवं पीपीआर टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, वत्सोत्पादन, गौधाम एवं गौशालाओं के संचालन तथा दुग्ध सहकारी समितियों के गठन की प्रगति की जानकारी ली। दुधारू पशु प्रदाय पायलट प्रोजेक्ट, मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट की गतिविधियों और विभागीय योजनाओं के अंतर्गत हितग्राही चयन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। बैठक में स्थानीय निकायों द्वारा स्थापित एबीसी सेंटरों के कार्यों के साथ राज्य बजट 2026-27 एवं वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत पशु चिकित्सालय और पशु औषधालय भवनों के निर्माण से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। संभागायुक्त ने पशुपालकों को विभागीय योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और पशु चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मत्स्य पालन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और झींगा पालन की संभावनाएं तलाशने पर जोर संभागायुक्त  दुग्गा ने मत्स्य पालन विभाग की समीक्षा करते हुए तालाबों, जलाशयों और अमृत सरोवरों का उपयोग मत्स्य उत्पादन एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन के लिए करने पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, राज्य योजनाओं, किसान क्रेडिट कार्ड तथा नेशनल फिशरमेन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीयन की प्रगति की जानकारी ली। साथ ही तालाबों एवं जलाशयों के पट्टा आवंटन और फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने मत्स्य पालन गतिविधियों में महिलाओं और महिला समूहों की भागीदारी बढ़ाने तथा सरगुजा संभाग में झींगा पालन की संभावनाओं का आकलन करने के निर्देश दिए। मत्स्य पालन को कृषि के साथ अतिरिक्त आय के प्रभावी साधन के रूप में विकसित करने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। संभागायुक्त  दुग्गा ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन अलग-अलग गतिविधियों के बजाय समन्वित आजीविका विकास के दृष्टिकोण से किया जाए। किसानों को फसल विविधीकरण, उन्नत कृषि तकनीकों और सहायक व्यवसायों के लिए प्रोत्साहित करने के साथ योजनाओं की नियमित निगरानी की जाए, ताकि सरगुजा संभाग के अधिक से अधिक किसान और ग्रामीण परिवार इनका लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

दुर्ग न्यायालय में तकनीक से सिमट रही दूरी: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जमानत आवेदन का निराकरण, मुंबई और चेन्नई के गवाहों के बयान दर्ज

रायपुर न्याय पाने के लिए दूरी बाधा न बने और न्यायिक प्रक्रिया समय तथा संसाधनों के लिहाज से अधिक सुगम हो – इसी उद्देश्य से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक जमानत आवेदन पर सुनवाई कर उसका निराकरण किया गया, वहीं मुंबई और चेन्नई में मौजूद महत्वपूर्ण गवाहों के बयान एवं प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही भी पूरी कराई गई। यह पहल न्यायिक कार्यों में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने तथा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। *जब न्यायालयीन कार्यवाही में दूरी बाधा नहीं बनी*          एक प्रकरण में अधिवक्ताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जमानत आवेदन पर अपना पक्ष रखा। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आवेदन का विधिवत निराकरण किया। इस व्यवस्था से अधिवक्ताओं को वर्चुअल माध्यम से कार्यवाही में भाग लेने की सुविधा मिली और आवागमन में लगने वाले समय एवं संसाधनों की बचत में सहायता मिली। *मुंबई और चेन्नई से जुड़े गवाहों के दुर्ग न्यायालय में दर्ज हुए साक्ष्य*           एक अन्य विचारणाधीन प्रकरण में मुंबई और चेन्नई में निवासरत महत्वपूर्ण गवाहों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायिक कार्यवाही से जोड़ा गया। निर्धारित तकनीकी एवं विधिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उनके बयान दर्ज किए गए तथा प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही पूरी कराई गई। इससे लंबी दूरी की यात्रा से जुड़ी कठिनाइयों को कम करने और साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सुविधा मिली। *डिजिटल न्याय के साथ जनजागरूकता पर भी जोर*           न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक का वास्तविक लाभ तभी व्यापक रूप से सामने आता है, जब नागरिकों और संबंधित हितधारकों को इसकी उपलब्ध सुविधाओं तथा उपयोग के तरीकों की जानकारी हो। इसी दृष्टिकोण के तहत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में प्राधिकरण द्वारा डिजिटल माध्यमों और तकनीकी संसाधनों के उपयोग के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं।             इन प्रयासों के अंतर्गत आम नागरिकों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों तथा अन्य संबंधित हितधारकों तक विभिन्न माध्यमों से पहुँचकर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य नागरिकों को न्यायिक एवं विधिक सेवाओं की उपलब्ध सुविधाओं से परिचित कराना, तकनीक के प्रभावी उपयोग के प्रति जागरूक बनाना तथा पात्र व्यक्तियों को विधिक सहायता और न्याय तक पहुँचने के उपलब्ध माध्यमों की जानकारी देना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग का यह प्रयास न्यायिक संस्थाओं और आम नागरिकों के बीच संवाद को मजबूत करने तथा डिजिटल न्याय व्यवस्था के लाभों को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण : अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ में पत्रकारों के सवालों के जवाब में धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताया है। रायगढ़ में मीडिया से चर्चा के दौरान इस संबंध में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलने को लेकर यह निर्णय दूरगामी महत्व रखता है  और इससे निश्चित रूप से अवैध धर्मांतरण पर भी रोक लगेगी। मुख्यमंत्री  साय आज रायगढ़ में कोलता समाज द्वारा आयोजित नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने आमंत्रण के लिए समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी समाजजनों को नुआखाई और शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलता समाज शिक्षित, संगठित और प्रगतिशील समाज है। समाज के लोग शिक्षा, कृषि और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी कोलता समाज की महत्वपूर्ण भागीदारी है। मुख्यमंत्री  साय ने समाज की गतिविधियों को और सुदृढ़ करने के लिए नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के भवन हेतु 50 लाख रुपए तथा ग्राम कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपए देने की घोषणा की। मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के आयोजन पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों से प्रदेश में महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन मिलेगा और हमारी बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इन मुकाबलों में पहुंचकर महिला खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।

छत्तीसगढ़ के दुर्गम गांवों में बदली तस्वीर, दंतेवाड़ा-सुकमा सीमा पर 228 घरों तक पहुंचा नल का पानी

सेवा संकल्प की कहानी घने जंगलों के बीच दंतेवाड़ा-सुकमा सीमा पर बसे 228 घरों तक पहुंचा नल से जल एडपाल और डोडपाल बने ‘हर घर जल ग्राम’, परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी हुई आसान रायपुर,  दंतेवाड़ा और सुकमा जिले की सीमा पर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे एडपाल और डोडपाल गांवों के 228 परिवारों को अब घर पर ही नल से पेयजल मिल रहा है। जल जीवन मिशन से इन दूरस्थ गांवों में वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या दूर हुई है। पहले ग्रामीणों को पेयजल के लिए हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ता था। अब घर-घर नल कनेक्शन मिलने से विशेष रूप से महिलाओं की दिनचर्या आसान हुई है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण जीवन में आए बदलाव की यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  एडपाल के 137 और आश्रित ग्राम डोडपाल के 91 घरों में नल से  शुद्ध पेयजल उपलब्ध          दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर कटेकल्याण विकासखंड की ग्राम पंचायत एडपाल के 137 और उसके आश्रित ग्राम डोडपाल के 91 घरों में जल जीवन मिशन के तहत नल से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। दोनों गांवों को ‘हर घर जल ग्राम’ का दर्जा भी मिल चुका है। पानी लाने की मशक्कत से मिली मुक्ति        घर तक पानी पहुंचने का सबसे अधिक लाभ महिलाओं को मिला है। पहले गर्मी और बरसात के दिनों में भी उन्हें पानी के लिए घर से दूर जाना पड़ता था। इसमें सुबह का काफी समय बीत जाता था। अब पानी लाने की मशक्कत से राहत मिलने के साथ घरेलू कामकाज, बच्चों की देखभाल और आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए अधिक समय मिल रहा है। पानी की चिंता हुई दूर          एडपाल की वार्ड पंच बुदरी मंडावी और ग्रामीण महिला जोगी मरकाम बताती हैं कि घर में नल लगने से पानी की चिंता दूर हुई है। महिलाएं अब सब्जी बाड़ी, वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी के कामों में अधिक समय दे पा रही हैं। बच्चों को भी पानी लाने में समय लगाने के बजाय पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है। पानी की शुद्धता भी जांच रही गांव की महिलाएं        इन गांवों में पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी महिलाओं ने संभाली है। इसके लिए गठित ‘जल वाहिनी’ समूह की प्रशिक्षित महिलाएं फील्ड टेस्ट किट से पानी की नियमित जांच कर रही हैं। इससे ग्रामीणों में स्वच्छ पेयजल के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ जलजनित बीमारियों से बचाव के प्रयासों को भी बल मिल रहा है। पूरे परिवार की रोजमर्रा जिंदगी हुई आसान         डोडपाल में आयोजित ‘ग्राम जल उत्सव’ में ग्रामीणों ने घर-घर पेयजल सुविधा मिलने पर खुशी जताई। जल जीवन मिशन से दूरस्थ वनांचल के गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचने से महिलाओं और बच्चों सहित पूरे परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो रही है।

101 कन्याओं का पूजन कर दिया संरक्षण का संदेश, स्वास्थ्य और मानसिक सशक्तीकरण पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा गुरुवार को महासमुंद के अंबेडकर भवन, बागबाहरा रोड में “कन्या पूजन से कन्या संरक्षण तक” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 350 किशोरी बालिकाओं एवं माताओं ने सहभागिता की। आयोजन के माध्यम से बालिकाओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने के साथ उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत 101 कन्याओं के पूजन एवं कन्या भोज के साथ हुई। इसके बाद जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बालिकाओं और माताओं को शारीरिक स्वास्थ्य, कैंसर से बचाव, किशोरावस्था में होने वाले बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। आयोग का उद्देश्य कन्या पूजन की परंपरा को बालिकाओं के संरक्षण और उनके अधिकारों के प्रति जिम्मेदारी के संकल्प से जोड़ना रहा। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि बेटियों का सम्मान केवल किसी पर्व या विशेष अवसर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास के लिए वर्षभर प्रयास किए जाने चाहिए। बाल मनोचिकित्सक डॉ. गार्गी पांडेय ने बच्चों की सुरक्षा, उनसे संवाद करने के तरीके और व्यवहार के महत्व पर अपनी बात रखी। साथ ही मोबाइल के अत्यधिक उपयोग, स्क्रीन टाइम और डिजिटल लत के बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति अभिभावकों को जागरूक किया गया। बालको मेडिकल सेंटर, नया रायपुर की विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. यामिनी शुक्ला भविष्कर ने सर्वाइकल कैंसर के कारणों, लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं हो सकते, इसलिए समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श महत्वपूर्ण है। उन्होंने एचपीवी जांच, पैप स्मीयर और एचपीवी टीकाकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। वहीं, बालको मेडिकल सेंटर की वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. अनीशा ने ब्रेस्ट कैंसर के संभावित लक्षणों और बचाव के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने स्तन में गांठ, आकार में बदलाव अथवा त्वचा में असामान्य परिवर्तन दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं किशोरियों के लिए स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग संबंधी पहल भी की गई। एम्स रायपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा साहू ने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलाव, माहवारी स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने किशोरियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और किसी भी समस्या की स्थिति में उचित चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया। आईटीएसए हॉस्पिटल, रायपुर की बाल मनोचिकित्सक डॉ. इशिका जायसवाल ने किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन, चिंता, आत्म-जागरूकता और आत्मविश्वास जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य को समझने तथा उन्हें सकारात्मक वातावरण देने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति भी दी गई। नाटक के माध्यम से बालिकाओं के सम्मान, संरक्षण और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के सामने स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और सुरक्षा से जुड़ी अनेक चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जागरूकता, समय पर जांच, उचित परामर्श और विभिन्न संस्थाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आयोग ने एम्स रायपुर, बालको मेडिकल सेंटर और आईटीएसए हॉस्पिटल जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर बालिकाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद की पहल की है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव, एचपीवी टीकाकरण और समय पर जांच के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और एचपीवी टीकाकरण के संबंध में चिकित्सकीय सलाह लेकर उपलब्ध पात्रता एवं सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार टीकाकरण सुनिश्चित करें। अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने कहा कि आयोग “फ्रॉम डिलिबरेशन टू डिलीवरी” अर्थात विचार-विमर्श से प्रभावी क्रियान्वयन के सिद्धांत के साथ प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त बचपन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कन्या पूजन की सार्थकता तभी है, जब प्रत्येक बेटी को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान के समान अवसर मिलें। बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोंगरा पटेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भीखम ठाकुर सहित अन्य पार्षद एवं जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। उपस्थित बालिकाओं और माताओं ने बेटियों के सम्मान, स्वास्थ्य एवं संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और समाज में इस संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात की तैयारी करने पर दिया जोर

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा से आज दंतेवाड़ा सर्किट हाउस में माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड की पदाधिकारियों एवं महिला सदस्यों ने मुलाकात की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कंपनी को वनोपज के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के अंतर्गत जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त होने पर महिलाओं को बधाई दी। मुलाकात के दौरान महिला सदस्यों ने उप मुख्यमंत्री  शर्मा को अपनी कंपनी के ‘दण्डक ब्रांड’ का चावल का पैकेट भेंट किया।  शर्मा ने महिलाओं से कंपनी की गतिविधियों, उत्पादों की बिक्री, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार की संभावनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि एनपीओपी प्रमाणन मिलने के बाद अब दण्डक ब्रांड के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की आवश्यकता है। इस दौरान उन्होंने दण्डक ब्रांड को छत्तीसगढ़ के ‘छत्तीसकला’ ब्रांड के साथ जोड़कर व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने महिलाओं से उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही विदेशों में निर्यात के लिए आवश्यक तैयारियां करने को कहा।  शर्मा ने कहा कि बस्तर के प्राकृतिक वनोपज की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का लाभ स्थानीय महिलाओं और वनोपज संग्राहकों तक पहुंचना चाहिए।  शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के विकास के लिए स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका को बढ़ावा दे रही है। माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी की उपलब्धि इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बस्तर के ऐसे गांवों, जहां परंपरागत रूप से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं हुआ है, वहां के कृषि उत्पादों और वनोपज को भी निर्धारित मानकों के अनुरूप जैविक प्रमाणीकरण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने के साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। प्रदेश की पहली एनपीओपी प्रमाणित महिला किसान उत्पादक कंपनी उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत वर्ष 2023 में दंतेवाड़ा जिले में माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया था। कंपनी को हाल ही में वनोपज के लिए एनपीओपी प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित पहली किसान उत्पादक कंपनी है, जिसे वनोपज उत्पादन के लिए यह प्रमाणन मिला है। इससे कंपनी के प्रमाणित जैविक वनोपज को देश के बड़े बाजारों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ी हैं। वर्तमान में कंपनी से 1080 महिला शेयरधारक प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। इसके अतिरिक्त जिले के 60 उत्पादक समूहों से संबद्ध 2100 वनोपज संग्राहक दीदियां भी कंपनी की गतिविधियों से लाभान्वित हो रही हैं। कंपनी के माध्यम से महिलाओं को वनोपज संग्रहण, खरीदी-बिक्री, मूल्य संवर्धन और विपणन से संबंधित आजीविका के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। कंपनी ने पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया है।  दण्डक ब्रांड से स्थानीय उत्पादों को मिल रही नई पहचान       माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा स्थानीय उत्पादों को बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए ‘दण्डक ब्रांड’ की शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत एचएमटी, लाल चूड़ी और बासमती चावल के साथ नीम फूल, अमचूर, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी और रागी सहित विभिन्न स्थानीय उत्पादों का मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और पैकेजिंग कर विपणन किया जा रहा है। कंपनी द्वारा दंतेवाड़ा में विशेष बिक्री केंद्र भी प्रारंभ किया गया है, जहां स्थानीय उत्पादों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराया जा रहा है।       कंपनी की अध्यक्ष  विमला ठाकुर ने बताया कि पहले महिलाओं द्वारा संग्रहित वनोपज की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों में होती थी। बिहान मिशन के सहयोग से दण्डक ब्रांड की शुरुआत और अब एनपीओपी प्रमाणन मिलने से महिलाओं में उत्साह है। उन्होंने कहा कि अब उनके उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने और बेहतर कीमत प्राप्त करने की उम्मीद बढ़ी है।       इस अवसर पर विधायक  चैतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष  नंदलाल मुड़ामी, कलेक्टर  देवेश कुमार ध्रुव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  एम. भार्गव सहित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी की अध्यक्ष  विमला ठाकुर, कोषाध्यक्ष  सरिता ठाकुर, सचिव  मीना ठाकुर तथा अन्य सदस्य  उपस्थित रहे।

शराब घोटाले की जांच में सामने आए नए तथ्य, हर माह 80 लाख के कमीशन का खुलासा

रायपुर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) मैनपावर भुगतान घोटाले में कमीशन वसूली के नेटवर्क को लेकर जांच में नए तथ्य सामने आए हैं। ईओडब्ल्यू के पूरक आरोपपत्र के अनुसार, शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के भुगतान के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को अतिरिक्त राशि दी गई। इसके बाद एजेंसियों से नकद कमीशन वसूला जाता था। सभी एजेंसियों से हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आता था। शराब सिंडिकेट प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले तत्कालीन सीएसएमसीएल प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये नकद कमीशन लेकर शराब सिंडिकेट प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले हैं। कमीशन की रकम एकत्र कर त्रिपाठी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सिद्धार्थ सिंघानिया निभाता था। एक एजेंसी से 15.65 करोड़ रुपये देने का दावा आरोपपत्र में सिद्धार्थ सिंघानिया के कथन का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच अकेले सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड की ओर से लगभग 15.65 करोड़ रुपये दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि त्रिपाठी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नवीन प्रताप सिंह तोमर के माध्यम से कथित कमीशन वसूली जारी रही। इस दौरान सेवा शुल्क और ओवरटाइम की राशि पर कमीशन की दर बढ़ाकर एक-तिहाई किए जाने का विवरण भी मिला है। दो कंपनियों को 48 करोड़ से अधिक का भुगतान ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड को मिलाकर 48.08 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान हुआ। ईगल हंटर को 33.45 करोड़ और अलर्ट कमांडोज को 14.63 करोड़ रुपये मिले। इनमें से 38.31 करोड़ रुपये अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में भुगतान किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार, ईगल हंटर के संस्थापक बीआर लोहिया दोनों कंपनियों के प्रमुख निर्णय लेते थे। उनके निर्देश पर कर्मचारियों के ओवरटाइम और अतिरिक्त दिनों के बिल तैयार कराए गए, जबकि संबंधित कर्मचारियों को रकम नहीं मिलने की बात सामने आई। बिल पास कराने के लिए 28.80 लाख रुपये 29 नवंबर 2023 को लंबित बिल पारित कराने के बदले तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को कथित तौर पर 28.80 लाख रुपये दिए जाने थे। इसके लिए दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक भेजा गया। बैंक से रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपये कार्यालयीन खर्च के लिए रखे गए और शेष राशि कमीशन के लिए अलग की गई। रकम पहुंचाने से पहले ईडी की कार्रवाई में यह राशि बरामद हुई। जांच एजेंसी ने इसे मैनपावर भुगतान से जुड़ी कथित कमीशन वसूली के नेटवर्क का हिस्सा बताया है।